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Thriller बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ?
#29
हरीश उसके ऊपर झुक गया, उसकी छाती उसकी पीठ से दब गई, और उसने अपनी जीभ उसकी रीढ़ की हड्डी के बीचोंबीच फिरा दी।
 
"मैं चाहता हूँ की इस बार तुम ऊपर रहो," उसने फुसफुसाते हुए कहा। "मैं तुम्हें चोदते हुए तुम्हारा चेहरा देखना चाहता हूँ।"
 
वह सोफे पर वापस बैठ गया और उसे अपनी ओर खींच लिया। चैताली उसके ऊपर बैठ गई, उसकी जांघें उसकी कमर को जकड़ रही थीं। चैताली ने नीचे उसकी ओर देखा, उसकी आँखें अभी भी धुंधली थीं, उसके होंठ खुले हुए थे। उसने धीरे-धीरे खुद को नीचे कीया, हरीश के लन्ड का सिरा चैताली की चूत को छेड़ रहा था, फिर वह धीरे-धीरे नीचे उतरती गई, इंच-दर-इंच, जब तक की हरीश का मोटा लौड़ा उसके अंदर गहराई तक समा नहीं गया।
 
चैताली ने एक लंबी, कंपकंपी भरी आह भरी, उसका सिर पीछे की ओर झुक गया। उसके मम्मे हिल रहे थे, निप्पल छत की ओर इशारा कर रहे थे। वह धीरे-धीरे हिलने लगी, एक धीमी, घर्षण भरी गति जिससे दबाव सीधे उसकी क्लिटोरिस पर केंद्रित हो रहा था।
 
"हे भगवान... हाँ..." चैताली की आवाज़ में कुछ हद तक स्वाभाविक स्वर लौट आया था, हालाँकी सम्मोहक सुझाव ने उसे वश में रखा हुआ था।
 
"इसे रगड़ो, चैताली। अपनी मोटी चूत को मेरे लन्ड पर रगड़ो," हरीश ने आदेश दिया, उसके हाथ उसके बूब्स को थामने के लिए ऊपर उठे और उन्हें ज़ोर से दबाया।
 
घर्षण बेहद सुखद था। उनकी गीली त्वचा के आपस में रगड़ने की आवाज़ - एक चपचपाहट भरी, फिसलने वाली आवाज़ - हवा में गूंज रही थी। चैताली की हरकतें और अनियमित हो गईं, उसकी साँसें छोटी, तेज़ हो गईं। वह चरम सीमा के करीब थी, उसकी आंतरिक मांसपेशियां लयबद्ध लहरों में उसके चारों ओर धड़क रही थीं।
 
"मैं... मैं बस..."

"अभी नहीं," हरीश कराहते हुए बोला, क्योंकी वह भी चरम सुख के करीब था। "मैं चाहता हूँ की तुम चिल्लाकर कहो, मुझे बताओ की तुम मेरी रंडी हो। मुझे बताओ की तुम्हें चुदाई होना पसंद है।"
 
"मैं... मैं तुम्हारी रंडी हूँ!" चैताली रोते हुए बोली, उसकी आवाज़ कांप रही थी। "मुझे चुदाई  पसंद है! प्लीज़... मुझे ज़ोर से फ़क करो!"
 
हरीश ने उसके कूल्हों को पकड़ा और ऊपर की ओर ज़ोरदार झटके देने लगा, उसके नीचे आने की गति के साथ तालमेल बिठाते हुए। झटके ज़ोरदार थे, उनके शरीर आपस में टकराकर एक कच्ची, कामुक आवाज़ पैदा कर रहे थे। उसे उसके चरम सुख की गर्मी महसूस हो रही थी, उसकी चूत की दीवारें कसकर सिकुड़ रही थीं।
 
"मैं आ रहा हूँ" वह दहाड़ा।
 
उसने आखिरी बार ज़ोर से ऊपर की ओर धक्का दिया और जितना हो सके उतना अंदर तक धंस गया। उसके शरीर से वीर्य का ज़बरदस्त विस्फोट हुआ, जो सीधे उसके सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) तक जा पहुँचा। वह कराह उठा, उसका शरीर उस तीव्र सुख के झटकों से कांप रहा था, उसका लन्ड उसके अंदर धड़क रहा था और वह लगातार उसके अंदर वीर्य छोड़ रहा था।
 
चैताली उसके सीने पर गिर पड़ी, चरम सुख की लहरें उस पर छा रही थीं। वह सिसक रही थी—सालों से दबी हुई चाहत और अकेलेपन का गुबार निकल रहा था—और उसका शरीर उसके शरीर से सटकर कांप रहा था। वे कई मिनट तक वहीं लेटे रहे, बस उनके दिलों की ज़ोरदार, एक-सी धड़कनें और बाहर गुड़गांव के ट्रैफ़िक की दूर से आती आवाज़ सुनाई दे रही थी।
 
हरीश को एक ठंडी जीत का एहसास हुआ। उसने उस औरत—मिसेज़ चैताली घोष—को देखा; वह सम्मानित एग्जीक्यूटिव, वह गरिमामयी विधवा—अब पसीने से तर-बतर, कांपती हुई और काम-तृप्ति के बाद बेहाल हालत में थी।
 
उसने धीरे से उसे अपने ऊपर से हटाया, हालाँ की उस हरकत में कोई नरमी नहीं थी। वह उठा और बाथरूम की ओर चला गया, जहाँ उसने तौलिए से खुद को साफ़ कीया। जब वह वापस लौटा, तो चैताली अभी भी सोफ़े पर लेटी हुई थी; उसकी आँखें धीरे-धीरे झपक रही थीं, और वह नशा या सम्मोहन धीरे-धीरे उतर रहा था, पर पूरी तरह गया नहीं था।
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RE: बेटे के दोस्त ने आंटी को सम्मोहित(hypnotize) किया....फिर क्या हुआ? - by MohdIqbal - 29-08-2026, 10:51 PM



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