28-08-2026, 11:34 PM
वह कुछ देर तक उसके ऊपर ही लेटा रहा, अपनी सांसों को सामान्य होने दिया। फिर उसने उसे धीरे से उठाया और उसे 'डॉगी पोजीशन' में आने का आदेश दिया।
"अब घुटनों और हाथों के बल झुक जाओ। मुझे तुम्हे पीछे से चोदना है," हरीश ने आदेश दिया।
चैताली झुक गई, उसके भारी कूल्हे अब हरीश के सामने पूरी तरह खुले हुए थे। उसकी चूत अब पहले से कहीं ज्यादा लुब्रिकेटेड थी, क्योंकी उसमें वीर्य और प्राकृतिक रस का मिश्रण था।
हरीश ने बिना कीसी देरी के पीछे से अपना लन्ड उसके अंदर घुसा दिया। इस बार वह पूरी ताकत से प्रहार कर रहा था। हर धक्के के साथ उसकी अंडकोष चैताली के कूल्हों से टकरा रहे थे, जिससे एक तेज ' थप-थप ' की आवाज़ आ रही थी।
"उफ़! यह छेद कीतना तंग और गरम है!" हरीश चिल्लाया। उसने आगे झुककर चैताली के लटके हुए बूब्स को अपने हाथों में लिया और उसे जोर-जोर से मरोड़ने लगा।
चैताली की कमर नीचे की ओर झुकी हुई थी और वह केवल हरीश की गति के साथ हिल रही थी। हरीश की पकड़ उसकी कमर पर इतनी मजबूत थी की वहां उंगलियों के निशान पड़ गए थे। जब उसे लगा की वह फिर से चरम सीमा पर पहुँचने वाला है, तो उसने अचानक अपना लन्ड बाहर खींच लिया।
उसने चैताली के बालों को मजबूती से पकड़कर उसके सिर को पीछे की ओर खींचा और अपना सारा लोड उसके चेहरे पर खाली कर दिया। सफेद गाढ़ा वीर्य उसकी आंखों, गालों और होंठों पर बिखर गया।
हरीश ने एक गहरी सांस ली और सुकून से उसके बगल में लेट गया। उसने कुछ देर तक उसे गले लगाया, जैसे वह कोई खिलौना हो।


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