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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
बाबाजी ने अपनी आवाज़ को और भी गहरी, सम्मोहक और वासना से भरी बनाते हुए कहा,

“तो जैसा मैंने कहा था मयूरी… कल्प-उर्जा क्रिया एक ऐसी दिव्य क्रिया है, जिसमें एक साथी दूसरे को उत्तेजना के उस शिखर तक ले जा सकता है, जहाँ वह आज तक कभी नहीं पहुँचा होगा। शरीर की हर नस फड़कने लगे, रोंगटे खड़े हो जाएँ और आत्मा तक सिहरन पहुँच जाए। अगर तुमने निश्चय कर ही लिया है, तो मुझे अपने शरीर के उस सबसे पवित्र और संवेदनशील अंग, अपने स्तनों पर - यह क्रिया करने की अनुमति देनी होगी। बोलो… तैयार हो?” मैत्री द्वारा रचित।
 
मयूरी बाबाजी की इन स्पष्ट और कामुक बातों को सुनकर फिर से शर्म के समंदर में डूब गई। उसका पूरा चेहरा, गर्दन और छाती तक लाल हो गया। वह कुछ बोल नहीं पाई, सिर्फ़ अपनी उँगलियों को कसकर पकड़े रही।
 
बाबाजी ने धीरे से मुस्कुराते हुए आगे कहा,
 
“शर्म मत करो मयूरी। यहाँ शर्म करने से कुछ नहीं सीख पाओगी। तुम ऐसा करो… अपनी साड़ी उतारकर खड़ी हो जाओ। और हाँ… यह ब्लाउस भी उतार दो।”
 
मयूरी कई पल तक चुपचाप सोचती रही। बाबाजी द्वारा दिए गए उपकार, ऋचा की पढ़ाई, पैसे और भरोसे की बातें उसके मन में घूम रही थीं। आखिरकार उसने आँखें बंद कर लीं, चेहरा दूसरी तरफ़ घुमा लिया और काँपते हाथों से अपनी साड़ी का पल्लू खोलने लगी।
 
बाबाजी ने उसे देखते हुए कहा,
 
“ये क्या कर रही हो मयूरी? ऐसे शरमाओगी तो कुछ भी नहीं सीख पाओगी। मेरी तरफ़ मुंह करके खड़ी हो। ऊपर से निर्वस्त्र हो जाओ। मुझे देखने दो… तुम्हें बिना किसी झिझक के। और डरो मत, तुम्हारी सम्मति के बिना कुछ नहीं होगा।” बाबा जानता था की उसे उस जगह तक ले जाऊंगा जहा से वह ना कह ही नहीं सकती।
 
मयूरी ने गहरी साँस ली। उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था। वह धीरे-धीरे बाबाजी की तरफ़ घूम गई और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया।
 
बाबाजी पालथी मारकर बैठ गए। उनकी आँखें ठरकी सेठ की तरह चमक रही थीं, जैसे कोई कोठे पर बैठा महँगी वेश्या का नृत्य देख रहा हो।
 
साड़ी का पल्लू गिरते ही मयूरी की भारी, भरी-भरी छातियाँ ब्लाउज में कैद होकर भी उनके सामने उजागर हो गईं। ब्लाउज के पतले कपड़े के अंदर काली ब्रा और उसके नीचे मोटे, उभरे हुए निप्पल साफ़ नजर आ रहे थे। मैत्री पटेल की रचना।
 
मयूरी ने धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। जैसे-जैसे हुक खुलते जा रहे थे, उसके स्तन अपने असली आकार में आने लगे - दबे हुए से आज़ाद होकर हल्के से उछलने को तैयार। आखिरी हुक खुलते ही ब्लाउज के दोनों पल्ले बिदककर दाएँ और बाएँ कंधों पर जा गिरे।
 
उसकी नजरें अभी भी नीचे झुकी हुई थीं।
 
बाबाजी ने गहरी, भूखी आवाज़ में कहा,
 
“मयूरी… मेरी तरफ़ देखो। शर्म को अपने अंदर मत दबाओ। आँखों में आँखें डालकर खोलो अपने अंग-वस्त्र को। वरना ये शर्म तुम्हें आगे कभी नहीं बढ़ने देगी।”
 
मयूरी ने धीरे से अपना चेहरा ऊपर उठाया। उसकी नशीली, शर्म और उत्तेजना से भरी आँखें बाबाजी की वासना भरी आँखों से टकराईं। उसने दोनों हाथों से ब्लाउज के किनारों को पकड़ा, एक मादक अंगड़ाई ली और ब्लाउज को पूरी तरह उतारकर फेंक दिया।
 
अब मयूरी सिर्फ़ अपनी काली ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी। उसकी भारी छातियाँ ब्रा के कैद से बाहर निकलने को बेताब थीं।
 
बाबाजी ने अपनी धोती के अंदर फड़कते हुए मोटे लंड को हाथ से दबाते हुए कहा,
 
“कितना जुल्म करती हो तुम अपनी इन सुंदर छातियों पर… इतनी छोटी-सी ब्रा में उन्हें कैद करके रखना… उफ्फ्… कितना पाप है ये।”
 
मयूरी की होंठों पर पहली बार हल्की-सी शर्मीली मुस्कान आई।
 
बाबाजी ने और आगे झुककर, भूखी नजरों से घूरते हुए कहा,
 
“अब नीचे गिराओ इस आखिरी बाधा को भी… और देखने दो मुझे अपने इन सुंदर, रसीले उरोजों को। मुझे बताओ… ये कितने दिन से प्यासे हैं सच्चे स्पर्श के लिए?”
 
मयूरी का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने काँपते हाथों से पीछे हाथ डाले, ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा छिटककर उसके जिस्म से अलग हो गई। अगर उसने ब्रा के कप को हाथ से न पकड़ा होता, तो शायद वो सीधे बाबाजी के चेहरे पर गिर जाती।
 
मयूरी ने धड़कते दिल के साथ अपने हाथ हटा लिए। ब्रा सूखे पत्ते की तरह नीचे लहराती हुई गिर गई।
 
उसकी दो भारी, गोल, दूधिया छातियाँ पूरी आज़ादी से बाहर आ गईं। बड़े-बड़े, गुलाबी-भूरे निप्पल हवा में सिहर रहे थे।
 
बाबाजी की साँसें भारी हो गईं। उन्होंने लंबी साँस लेते हुए कहा,
 
“उफ्फ्फ्… मयूरी… क्या नजारा है ये। इतनी बड़ी, इतनी कसी हुई, इतनी रसीली छातियाँ… आज तक मैंने ऐसी नहीं देखीं। कितनी भूखी दिख रही हैं ये… जैसे सालों से सही स्पर्श की तड़प में हों।” एडिटेड किया है फनलवर ने।
 
मयूरी शर्म से काँप रही थी, लेकिन बाबाजी की इन कामुक तारीफों से उसके निप्पल और भी सख्त हो गए थे।
 
*************************************.


आज का लिये बस यही तक दोस्तों।

आशा है की आप को एपिसोड पसंद आएगा।

अगला एपिसोड आपके कोममेंट्स आने के बाद तुरंत।

तब तक Maitri Patel की तरफ से रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाये और जय भारत।।
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Messages In This Thread
सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:14 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 12-06-2026, 08:37 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 27-06-2026, 05:02 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Rizzi1198 - 30-07-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-08-2026, 06:21 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 27-08-2026, 03:09 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 28-08-2026, 05:28 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-09-2026, 06:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 08-09-2026, 10:10 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-09-2026, 05:04 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-09-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-09-2026, 09:57 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-09-2026, 05:39 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 24-09-2026, 04:27 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Tadpole - 23-09-2026, 07:12 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Wanton - 23-09-2026, 07:24 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 01-10-2026, 09:20 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Bumchod - 05-10-2026, 05:27 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-10-2026, 08:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-10-2026, 07:50 PM



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