27-08-2026, 02:58 AM
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नया मोड़ —3
सुबह की सुनहरी धूप खिड़की से छनकर कमरे में आ रही थी। मीरा की जब आँखें खुलीं, तो उसने अंगड़ाई ली, लेकिन शरीर में एक अजीब सी थकावट और अनजाना सा खिंचाव महसूस हुआ।
बिस्तर पर बैठते ही उसकी नज़र अपने कपड़ों पर पड़ी—उसकी सफ़ेद स्लिप थोड़ी अस्त-व्यस्त थी और ठीक से नहीं पहनी हुई लग रही थी। उसके दिमाग में रात की कुछ धुंधली सी यादें कौंधने लगीं—वो होठों पर किसी का स्पर्श, सीने पर किसी की गर्माहट, मुँह में जीभ का घुलना और बदन में उठी वो कामुक सिहरन...
उसने तुरंत अपने बगल में देखा, पर सरताज बिस्तर पर नहीं थे।
हालाँकि, मीरा के लिए यह कोई नई बात नहीं थी। सिक्युरिटी की नौकरी होने के कारण कई बार सरताज को आधी रात को या तड़के ही अचानक ड्यूटी पर निकलना पड़ता था।
सरताज की हमेशा से आदत थी कि वह मीरा को कभी जगाते नहीं थे; उनका मानना था कि बेफिजूल में मीरा की नींद खराब करने का क्या फायदा।
मीरा के चेहरे पर एक हल्की सी शर्मीली मुस्कान आ गई।
मीरा (मन ही मन सोचकर मुस्कुराई): "ज़ाहिर है रात को जाने से पहले सरताज ने ही मुझे प्यार किया होगा... वो चुपचाप आए होंगे और नींद में ही मेरे होठों को चूमकर चले गए होंगे। कितने बेपरवाह हैं, जाते-जाते स्लिप भी ठीक से बंद नहीं की!"
उसने अपने होठों को उंगली से छुआ, जहाँ अभी भी एक अजीब सा गीलापन और गर्माहट महसूस हो रही थी। वह इस प्यारे से वहम में पूरी तरह डूब गई कि यह सब उसके पति का प्यार था।
इस घिनौने सच से बिल्कुल बेखबर कि रात के अंधेरे में उसके साथ सरताज ने नहीं, बल्कि उस नीच नौकर शेर ने घिनौनी हरकत की थी और सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया था, मीरा मुस्कुराते हुए उठी और फ्रेश होने के लिए बाथरूम की तरफ बढ़ गई।
उधर अपनी घिनौना हरकत और नाकामी से तिलमिलाया शेर पूरी रात कमरे में जागता रहा। रात के करीब 4 बजे तक वह जागता रहा और खुद को मां-बहन की नंगी गालियाँ देता रहा।
शेर (रात भर खुद को कोसते हुए): "साला मादरचोद! ज़िंदगी का सबसे बड़ा मौका हाथ में था और तूने दो सेकंड में अपनी गाँड मरवा ली! थू है तेरी ऐसी जवानी पर... साला मुट्ठ मार-मार के लंड का कबाड़ा कर लिया है तूने!"
सुबह करीब 7 बजे जब चंदन बाबा तैयार होकर उठे, तो उन्होंने देखा कि शेर चादर तानकर पड़ा हुआ है। उन्होंने उसे आवाज़ देकर जगाने की कोशिश की।
चंदन बाबा (आवाज़ देते हुए): "अरे शेर... उठ भाई! सुबह हो गई है।"
शेर (चादर के अंदर से ही चिढ़कर, खीझ भरी आवाज़ में बोला): "बाबा, आज मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है... सिर में बहुत दर्द है। आप जाओ, मैं थोड़ी देर बाद आऊँगा।"
चंदन बाबा ने ज़्यादा बहस नहीं की और अकेले ही मुख्य कोठी की तरफ बढ़ गए।
चंदन के जाने के करीब एक घंटे बाद शेर भारी सिर और गुस्से के साथ बिस्तर पर उठकर बैठा। उसका मूड अब भी बेहद खराब था। लेकिन तभी उसके दिमाग में एक ख्याल आया—रात को टेबल पर रखा हुआ मोबाइल!
शेर (आँखें मलते हुए, बड़बड़ाया): "भले ही लंड ने एन मौके पर दगा दे दिया हो... पर वो मोबाइल तो चालू था! देखूँ तो सही कि उस साले कैमरे में क्या-क्या रिकॉर्ड हुआ है!"
उसने तुरंत अपना मोबाइल उठाया, गैलरी खोली और रात वाली वीडियो फाइल पर क्लिक कर दिया। उसकी धड़कनें तेज़ी से चलने लगीं कि आखिर रात के अंधेरे में कैमरे ने मीरा के उस बेपर्दा बदन का कौन-कौन सा रूप कैद किया था।
वीडियो बिल्कुल साफ़ और सही तरीक़े से रिकॉर्ड हुई थी। कैमरे ने कमरे के उस धुंधले अंधेरे में सब कुछ साफ़-साफ़ क़ैद कर लिया था।
वीडियो में मीरा का वह बेखबर, नंगा बदन... उसकी सफ़ेद स्लिप का उतरना, उसकी साफ़ और मखमली योनि, शेर का उस पर ज़बरदस्ती जीभ लगाना साफ़ दिख रहा था। यही नहीं, कैमरे ने उस पल को भी बड़ी बारीकी से कैद किया था जब शेर ने मीरा के होठों पर अपने होंठ टिकाकर उसे जबरन किस किया था, और उसके बाद अपने कड़क लंड को मीरा के रसीले होठों पर बेशर्मी से रगड़ा था।
अपनी ही बनाई इस घिनौनी वीडियो को देखते-देखते शेर का ढीला पड़ा लंड एक बार फिर से लुंगी के अंदर कड़क और सख्त हो गया।
शेर (अपने अकड़े हुए लंड को देखकर गुस्से से दाँत भींचते हुए चीखा): "अबे मादरचोद! तेरी बहन का...! जब रात को असली काम का टाइम आता है, तब तो तेरे को साला साँप सूँघ जाता है! और अब खाली वीडियो देखकर ऐसे अकड़ रहा है जैसे कितना बड़ा सुरमा हो! भोसड़ी के, ऐन वक्त पर धोखा दे दिया!"
खुद को और अपने लंड को दो-चार कड़वी गालियाँ बकने के बाद शेर ने एक लंबी साँस ली और अपने चेहरे पर एक कमीनी मुस्कान ले आया।
उसने तुरंत मोबाइल से मेमोरी कार्ड निकाला और इस खास वीडियो फाइल को उसमें कॉपी कर लिया। सिर्फ इतने पर ही उसका मन शांत नहीं हुआ; उसने बिना कोई रिस्क लिए उस पूरी वीडियो को अपने एक सीक्रेट क्लाउड अकाउंट पर भी अपलोड कर दिया, ताकि अगर फोन कभी गुम या खराब भी हो जाए, तो सबूत हमेशा महफ़ूज़ रहे।
हालांकि, वीडियो सुरक्षित करने के बाद शेर के दिमाग में अपने भाई शंकर का अंजाम याद आ गया।
शेर (गहराई से सोचने लगा): "शेर, जल्दबाज़ी में यह वीडियो सीधा मीरा के मुँह पर मारने की गलती मत कर बैठना! साला, पहले मेरे भाई शंकर ने भी ऐसी ही वीडियो की धमकी देकर मालकिन को दबाने की कोशिश की थी, और नतीजे में क्या हुआ? मीरा ने डरने के बजाय सरताज को सब सच बता दिया था और शंकर का खेल हमेशा के लिए खत्म हो गया! मैं अपने भाई जैसी बेवकूफी नहीं दोहराऊँगा। इस वीडियो का इस्तेमाल तो मैं सबसे आखिरी हथियार के तौर पर ही करूँगा। सीधे धमकी दी, तो यह रंडी फिर से अपने पति के गले लगकर सब उगल देगी और मेरी हालत भी शंकर जैसी बना देगी।"
इस खौफनाक सबक को याद करने के बाद शेर की आँखों के सामने रात के वो कुछ सेकंड कौंध गए जब उसका लंड मीरा की योनि के अंदर समाया था।
शेर (अधखुली आँखों से उस अहसास को याद करते हुए फुसफुसाया): "उफ़्फ़ मादरचोद... क्या टाइट चूत थी साली की! कसम से, जैसे मेरे पूरे लंड को जकड़ के रख लिया हो... एकदम मक्खन, एकदम गर्म! कोई बात नहीं शेर... अभी तो यह बस शुरुआत है। इस वीडियो को ब्रह्मास्त्र बनाकर जेब में रखता हूँ, और मौके का इंतज़ार करता हूँ। जब सही वक्त आएगा, तो मालकिन को ऐसे घेरूंगा कि वो चाहकर भी सरताज के पास न भाग सके!"
शेर बिस्तर से उठा, अपने कड़क लंड को संभाला और एक शातिर इरादे के साथ कोठी की तरफ बढ़ने की तैयारी करने लगा।
तैयार होकर शेर सीधे रसोई की तरफ बढ़ा। रसोई का दरवाज़ा आधा खुला था और अंदर का नज़ारा देखकर शेर के कदम वहीं ठिठक गए।
चंदन बाबा और मीरा साथ मिलकर दोपहर के खाने की तैयारी कर रहे थे। मीरा ने पीले रंग की घुटनों तक लंबी मिडी ड्रेस पहन रखी थी, जिसकी ज़िप उसकी पीठ के पीछे लगी थी। वह ड्रेस उसकी छाती और कमर पर बेहद कसी हुई थी, जिससे उसके जिस्म के उभार साफ़ उभरकर सामने आ रहे थे।
चंदन बाबा की घर में मौजूदगी की वजह से आज मीरा के मन में शेर का खौफ थोड़ा कम था। वह बेफिक्र होकर सब्ज़ी काट रही थी। लेकिन जैसे ही उसकी नज़र रसोई के दरवाज़े पर खड़े शेर पर पड़ी, उसने महसूस किया कि शेर की निगाहें उसकी पीली ड्रेस में कसे मम्मों और हिप्स को किस तरह स्कैन कर रही थीं। मीरा ने नज़रअंदाज़ किया और अपना ध्यान काम में लगा लिया।
सब्ज़ी बनाते और मसाले मिलाते वक्त कई बार चंदन बाबा और मीरा की उंगलियाँ और हाथ आपस में छू जाते थे, कभी-कभी कंधे भी आपस में टकरा जाते थे। लेकिन उन दोनों के बीच एक पवित्र, बाप-बेटी जैसा रिश्ता था; दोनों के मन में एक-दूसरे के लिए कोई गलत भावना या मैली नज़र नहीं थी।
लेकिन दूर खड़ा शेर इस पूरे नज़ारे को अपनी ज़हरीली आँखों से देख रहा था। चंदन बाबा का मीरा के इतने करीब होना और उसके बदन से बार-बार टकराना शेर के सीने में आग लगा रहा था।
शेर (दरवाज़े के पास खड़ा होकर, चंदन बाबा को मन ही मन मां-बहन की गालियाँ बकने लगा): "साला मादरचोद बुड्ढा! रंडी का पिल्ला... बड़ा शरीफ बनता है! पूरे टाइम मालकिन के बदन से अपनी छाती और हाथ रगड़े जा रहा है। भोसड़ी के को साला कोई काम-धाम नहीं है, बस यहाँ मालकिन की गांड के पीछे चिपका हुआ है! काश इस साले गांडू की जगह आज मैं खड़ा होता... तो हाथ मिलाने के बहाने ही इस रंडी के कसाव का पूरा मज़ा ले लेता!"
शेर की निगाहें चंदन बाबा की सादगी और मीरा के प्रति उसके पिता तुल्य स्नेह पर टिकी हुई थीं। चंदन बार-बार मीरा को 'बिटिया... बिटिया' कहकर पुकार रहा था।
यह सुनते ही शेर के हवस से अंधे दिमाग में एक बेहद घिनौना और नीच ख्याल कौंध गया।
शेर (मन ही मन हवस में हांफते हुए बड़बड़ाया): "अबे यह बुड्ढा तो इसको 'बिटिया' बोलता रहता है... क्या कमाल का सीन बनता अगर इस बुड्ढे की जगह मैं होता! मैं इस रंडी मीरा के ऊपर चढ़ता, इसके कसदार मम्मों को दबाता और इसके कान में फुसफुसाकर बोलता— 'ले मेरी बिटिया... ले मेरा यह कड़क लंड अपनी इस टाइट चूत में... और चूस इसको!' उफ़्फ़ मादरचोद! सोच के ही लंड पैंट में फटने लगा है!"
शेर बाहर खड़ा होकर अपनी हवस भरी सोच में जलता रहा, जबकि अंदर चंदन बाबा और मीरा अपने काम में लगे रहे।
रसोई के दरवाज़े पर टिके-टिके शेर का दिमाग खुराफात के नए-नए जाल बुन रहा था। वह जितनी बार चंदन बाबा को मीरा के पास मुस्कुराते और हाथ बटाते देखता, उसका सीना जलन से जलने लगता।
वह अच्छी तरह समझ चुका था कि जब तक यह बुड्ढा इस घर में ढाल बनकर खड़ा रहेगा, तब तक मीरा पर दोबारा हाथ डालना या उसे दबाना लगभग नामुमकिन होगा।
शेर ( नफरत से बुदबुदाया): "साला मादरचोद बुड्ढा बीच में सबसे बड़ा रोड़ा बना बैठा है! जब तक यह यहाँ खड़ा रहेगा, मेरा कोई भी दांव सही नहीं बैठेगा। इस मुसीबत को रास्ते से हटाने का कोई न कोई तोड़ तो निकालना ही पड़ेगा..."
तभी शेर की शैतानी खोपड़ी में एक बेहद खौफनाक विचार कौंधा। उसकी आँखें चमक उठीं।
शेर (कमीनी मुस्कान के साथ मन ही मन बड़बड़ाया): "अबे भाई... कैसा हो अगर इस बुड्ढे का दिमाग ही पूरी तरह से भ्रष्ट कर दिया जाए? अभी तो यह साला बड़ा 'बिटिया-बिटिया' चिल्लाता है ... पर है तो आखिर मर्द ही! अगर किसी तरह इसके दिमाग में कामवासना का ज़हर घोल दिया जाए, ताकि यह भी इस पीली ड्रेस वाली मालकिन को बेटी की नज़र से नहीं, बल्कि एक रंडी की तरह हवस की निगाहों से देखने लगे... उफ़्फ़ मादरचोद! तब तो नज़ारा ही बदल जाएगा!"
इस गंदे ख्याल के आते ही शेर की आँखों के सामने एक खौफनाक मंज़र तैरने लगा—जहाँ वह अकेले नहीं, बल्कि चंदन बाबा को भी अपना साथी बनाकर मीरा की इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ा रहा होगा।
शेर (अपनी लुंगी के ऊपर से ही अपने अकड़ते हुए लंड को दबाते हुए हांफने लगा): "अबे कसम से... अगर यह बुड्ढा भी पट गया, तो मज़ा ही आ जाएगा! फिर तो दोनों मिलकर इस मीरा को दबोचेंगे... एक आगे से पेलेगा तो दूसरा पीछे से! बेचारी मालकिन चीखेगी-चिल्लाएगी, पर कोई बचाने वाला नहीं होगा! दोनों मिलकर इसकी टाइट चूत और गांड की धज्जियाँ उड़ा देंगे!"
लेकिन फिर शेर ने अपना सिर झटका और थोड़ा संभला।
शेर (गंभीर होकर सोचने लगा): "पर सवाल यह है कि इस बुड्ढे की खोपड़ी को घुमाया कैसे जाए? यह इतना सीधा और भगत आदमी है, ऐसे तो लाइन पर आने से रहा... इसके दिमाग में हवस की चिंगारी कैसे लगाई जाए? कोई न कोई तगड़ा नाटक या चाल तो चलनी ही पड़ेगी। कोई ऐसा आइडिया ढूँढना होगा कि बुड्ढे का ईमान डोल जाए। सोचना पड़ेगा...!"
महज़ इस विचार के दिमाग में आते ही शेर के पैंट के अंदर बैठा लंड तनकर अकड़ गया था। उसने रसोई की तरफ एक आखिरी हवस भरी निगाह डाली और दबे पाँव वहाँ से खिसककर अपने अगले चाल की योजना बनाने में जुट गया।
दोपहर के लगभग दो बज चुके थे। सुबह से ही शेर का बदन हवस की आग में तपने लगा था। वह बार-बार मीरा के करीब जाने के बहाने ढूंढ रहा था, लेकिन चंदन बाबा साये की तरह रसोई और घर के आसपास बने हुए थे, जिसकी वजह से शेर को एक पल के लिए भी मौका नहीं मिल पा रहा था।
खाना खाने के बाद चंदन बाबा कुछ काम से बाहर चले गए। सरताज अपनी सिक्युरिटी ड्यूटी पर बाहर थे ही।
रसोई के पास बने वॉशबेसिन पर मीरा बर्तन साफ करने के बाद अकेले हाथ-मुँह धो रही थी। उसकी पीली मिडी ड्रेस उसके सुडौल बदन पर अब भी कसी हुई थी। मौका देखते ही शेर के चेहरे पर कमीनी मुस्कान आ गई और वह दबे पाँव, बिल्कुल मीरा के पीछे जाकर खड़ा हो गया।
मीरा ने जैसे ही टॉवल से हाथ पोंछकर पीछे मुड़ना चाहा, शेर ने उसका रास्ता रोक लिया।
शेर (अपनी मूंछों पर हाथ फेरते हुए, घूरकर नीचता से फुसफुसाया): "मीरा जी... आज अंदर कौन से कलर की कच्छा पहनी हो?"
यह गंदा और बेशर्म सवाल सुनते ही मीरा का मुँह खुला का खुला रह गया। उसकी आँखों में खौफ और घिन एक साथ तैर गए।
मीरा (गुस्से में लाल होकर, दबी आवाज़ में डांटते हुए बोली): "शेर! अपनी औकात में रहो और तमीज़ से बात करो! यह क्या बकवास कर रहे हो?"
शेर (आगे कदम बढ़ाते हुए, ढिठाई से मुस्कुराया): "अरे मालकिन, सुबह से आपके इर्द-गिर्द घूम रहा हूँ... छूने तक का तो मौका मिला नहीं। अब इतना तो बता ही सकती हो कि अंदर कौन से रंग का कपड़ा छुपा रखा है? इसमें इतना शर्माना क्या!"
इतना अश्लील और बेहया शब्द सुनकर मीरा का पूरा चेहरा शर्म और गुस्से से तमतमा उठा।
तभी शेर ने अपनी लुंगी के हिस्से की तरफ इशारा किया, जहाँ उसका कड़क लंड साफ़ उभर रहा था।
शेर (आँख मारते हुए, बेशर्मी की सारी हदें पार करके बोला): "देखो न मीरा जी... सुबह से आपको देख-देखकर यह कैसे खड़ा हो गया है!"
मीरा इतनी घबरा गई और हड़बड़ाहट में उसके मुँह से अनजाने में निकल गया— "क्या...?"
शेर (अपनी कमीनी हँसी हँसते हुए, सीधे आँखों में देखकर बोला): "मेरा लंड मीरा जी... मेरा लंड! सुबह से आपके पीछे लपलपा रहा है!"
जैसे ही मीरा झटके से पीछे मुड़कर वहाँ से भागने लगी, शेर ने बड़ी फुर्ती से अपना हाथ आगे बढ़ाकर मीरा की गोरी कलाई को कसकर दबोच लिया।
मीरा हड़बड़ा गई और उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने झटके से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए दबी और गुस्से से कांपती आवाज़ में कहा, "छोड़ो मेरा हाथ! शेर छोड़ो मुझे... !"
शेर के चेहरे पर रत्ती भर भी खौफ नहीं था। उसने मीरा की कलाई पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली और चेहरे पर एक बेहद कमीनी मुस्कान ले आया।
शेर (मीरा के बिल्कुल करीब झुककर, उसकी आँखों में हवस से घूरते हुए फुसफुसाया): "अरे ऐसे कैसे जाने दें मालकिन... आपने बताया तो नहीं कि अंदर क्या पहन रखा है? और मीरा जी... कसम के मुताबिक तो मैं आपको जब चाहूँ पकड़ सकता हूँ, जहाँ चाहूँ छू सकता हूँ! यह तो मेरी शराफ़त है कि सुबह से दूर-दूर से तड़प रहा हूँ।"
मीरा का जिस्म खौफ और शर्म के मारे थर-थर कांपने लगा। वह समझ नहीं पा रही थी कि इस नीच नौकर के चंगुल से खुद को कैसे छुड़ाए।
शेर ने मीरा की कसी हुई पीली ड्रेस पर ऊपर से नीचे तक एक निगाह दौड़ाई ।
शेर (मीरा के चेहरे के पास मुँह लाकर, नीचता से मुस्कुराते हुए बोला): "वैसे जितना मैं आपको और आपके इस गोरे जिस्म को जानता हूँ न मालकिन... मेरा दांव कहता है कि आज आपने इस पीली ड्रेस के अंदर पीले ही रंग की कच्छा पहन रखी है... है ना?"
यह सुनते ही मीरा के पैर तले ज़मीन खिसक गई! उसकी आँखें सदमे से फटी की फटी रह गईं और उसका मुँह खुला का खुला रह गया।
शेर का अंदाज़ा बिल्कुल सही था—उसने सचमुच अंदर पीले रंग की ही पैंटी पहन रखी थी।
मीरा यह सोचकर अंदर तक दहल गई कि इस नीच नौकर को यह बात कैसे पता चली। क्या उसने किसी तरह उसकी पैंटी को ड्रेस के नीचे से देख लिया है? यह कैसे हो सकता है?
शेर उसके हैरान चेहरे को देखकर समझ गया कि उसका तीर निशाने पर लगा है, और वह हाथ दबाते हुए अपनी इस गंदी जीत पर मन ही मन हँसने लगा।
मीरा के मुँह से डर और हैरत के मारे अपने आप निकल गया, "तुम्हे... तुम्हें कैसे पता?"
उसकी आवाज़ में छिपा घबराहट देखकर शेर का मज़ा दोगुना हो गया। उसके चेहरे की कमीनी मुस्कान और चौड़ी हो गई। उसने मीरा की कलाई को हल्का सा झटका देकर अपनी तरफ थोड़ा और खींच लिया, जिससे मीरा के सुडौल मम्मे शेर की छाती से बस कुछ ही इंच की दूरी पर आ गए।
शेर (आँख मारते हुए, बेहद बेशर्मी से मुस्कुराकर बोला): "अरे मालकिन! इस शेर की नज़र बहुत पारखी है। बस थोड़ा सा अंदाज़ा लगाया... जब आपने ऊपर इतनी कड़क पीली ड्रेस पहन रखी है, तो मैचिंग के हिसाब से अंदर की पैंटी भी तो पीले ही रंग की होनी चाहिए ना? औरतें तो वैसे भी मैचिंग की शौकीन होती हैं!"
मीरा शर्म से पानी-पानी हो रही थी और अपनी कलाई छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।
शेर की हवस भरी निगाहें अब मीरा की पीली मिडी ड्रेस के कसदार सीने पर टिक गईं, जहाँ उसके दोनों मम्मे ड्रेस की ज़िप को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे।
शेर (अपनी जीभ से होठों को चाटते हुए, नीचता से फुसफुसाया): "और जब कच्छा पीला है मालकिन... तो मेरी मानो, आपकी ब्रा भी पक्का पीले ही रंग की होगी! क्यों... सही पकड़ा न? कहो तो ज़रा ज़िप खोलकर चेक कर लूँ कि मेरा अंदाज़ा कितना सही है?"
इतना कहकर शेर ने अपनी हथेली मीरा की पीठ की तरफ ले जाकर उसकी ड्रेस की ज़िप के पास टिका दी।
मीरा का दिल खौफ से ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
तभी अचानक बाहर से चंदन बाबा के कदमों की आहट आई। वे रसोई का दरवाज़ा ढकेलते हुए अंदर दाखिल हुए और सहज आवाज़ में बोले, "बिटिया, आज रात को खाने में क्या बनना है? आपने बताया ही नहीं..."
लेकिन अपनी बात पूरी करने से पहले ही चंदन बाबा की नज़र मीरा पर पड़ी। उसका चेहरा डर के मारे एकदम पीला पड़ चुका था, और उसकी आँखों में खौफ साफ़ दिख रहा था।
चंदन की निगाहें तुरंत नीचे गईं और उन्होंने देखा कि शेर ने मीरा की कलाई को कसकर दबोच रखा है।
माहौल का सन्नाटा और चंदन का चौंकना देखते ही शेर की हवा निकल गई। उसने तुरंत झटके से मीरा का हाथ छोड़ दिया और दो कदम पीछे हटकर ऐसे खड़ा हो गया जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मीरा ने खुद को संभाला और चंदन बाबा के करीब पहुँच गई। अपनी कांपती आवाज़ को छुपाते हुए उसने कहा, "बाबा... आज रात को चिकन करी बना लो। ज्योति को बहुत अच्छी लगती है।"
चंदन बाबा ने शेर को एक शक भरी और सख्त निगाह से देखा, फिर मीरा की तरफ देखकर नरमी से बोले, "ठीक है मीरा बिटिया, जैसा तुम कहो। मैं अभी तैयारी कर देता हूँ।"
उधर दूर खड़ा शेर दबे पाँव खिसकते हुए मन ही मन चंदन बाबा को मां-बहन की नंगी गालियाँ बकने लगा।
शेर (आँखें तरेरकर, चंदन को घूरते हुए ): "अबे बिटिया के बच्चे! साला हर बार कबाब में हड्डी बनकर टपक पड़ता है! अभी बस मालकिन की ज़िप खोलने ही वाला था कि यह बुड्ढा बीच में रायता फैलाने आ गया। साले का इलाज बहुत जल्द करना पड़ेगा... जब तक इसको रास्ते से नहीं हटाऊँगा, तब तक इस पीली मिडी वाली रंडी का मज़ा नहीं ले पाऊँगा!"
शेर (आँखों से चंदन को घूरकर बड़बड़ाया): "इस साले के दिमाग में हवस का ज़हर ऐसा घोलूँगा कि यह खुद मालकिन की ज़िप खोलने दौड़ेगा। इसका इलाज तो अब मुझे करना ही पड़ेगा!"
शेर बाहर निकल गया।
उधर रसोई में खड़ा चंदन गहरी सोच में पड़ गया। उसका दिमाग पुरानी बातों और अभी घटी घटना को जोड़ने लगा।
चंदन (मन ही मन गहरी चिंता में डूबते हुए सोचने लगा): "क्या इसी वजह से सरताज मुझे इतनी जल्दी यहाँ वापस ले आया? क्या मीरा और शेर के बीच ऐसा कुछ चल रहा है जो सही नहीं है? पर जितना मैं मीरा बिटिया को जानता हूँ, वह वैसी औरत तो हरगिज़ नहीं है... उसका चरित्र तो बिल्कुल साफ़ है।"
तभी चंदन को सरताज की कही हुई एक बात याद आई।
चंदन : "हाँ! सरताज ने ही तो मुझसे कहा था कि कई बार मीरा अचानक बहुत सहम जाती है, किसी अनजाने खौफ में आ जाती है। तो क्या वह खौफ इस शेर की वजह से है? क्या यह शेर ठीक इंसान नहीं है?"
चंदन ने अपनी नज़रें उस दरवाज़े की तरफ उठाईं जहाँ से शेर अभी-अभी खिसका था। उसके चेहरे पर सतर्कता और गम्भीरता छा गई।
चंदन (दृढ़ निश्चय के साथ): "मुझे अब और ज़्यादा चौकन्ना रहना होगा। सुबह जब मीरा बिटिया मेरे साथ रसोई में काम कर रही थी, तो कितनी खुश थी, कितनी बेफिक्र हँस रही थी... और अभी? अभी जब मैंने उसे देखा, तो उसका चेहरा डर के मारे एकदम पीला पड़ा हुआ था, जैसे किसी ने उसकी गर्दन पर तलवार रख दी हो! उस शेर ने जिस तरह उसका हाथ दबोच रखा था, वह किसी भी कोण से तमीज़दार नौकर की हरकत नहीं थी।"
चंदन ने तय कर लिया कि अब वह मीरा पर कोई मुसीबत नहीं आने देगा और इस घर में एक ढाल बनकर शेर की हर एक हरकत पर पैनी नज़र रखेगा।
अपने क्वाटर में वापस आकर शेर बिस्तर पर लेट गया और अपने मोबाइल पर नीली फ़िल्में देखने लगा। एडल्ट वीडियो देखते-देखते उसने गैलरी खोली और रात वाली मीरा की गुप्त वीडियो चला ली।
स्क्रीन पर मीरा का बेखबर, नंगा बदन और अपनी घिनौनी हरकत देखते ही शेर की लुंगी के अंदर उसका लंड लोहे की तरह तनकड़कर खड़ा हो गया।
लंड पर हाथ फेरते-फेरते शेर के खुराफाती दिमाग में एक बेहद शातिर योजना ने जन्म लिया।
शेर (कमीनी हँसी के साथ बड़बड़ाया): "अबे भाई! क्या दिमाग़ चला है मेरा... अगर इस चंदन बुड्ढे को किसी तरह इन नीली फ़िल्मों की लत लगा दी जाए तो? पहले इसको नॉर्मल पोर्न फ़िल्में दिखाऊँगा, फिर धीरे-धीरे नौकर और मालकिन वाली गंदी फ़िल्में... जब यह रोज़-रोज़ वैसी फ़िल्में देखेगा, तो इसका दिमाग अपने आप भ्रष्ट हो जाएगा! फिर यह मीरा को 'बिटिया' नहीं, बल्कि बदन से लबालब भरी एक औरत की तरह देखने लगेगा!"
लेकिन तभी शेर के चेहरे पर एक पल के लिए शक की लकीरें उभर आईं।
शेर (माथे पर हाथ रखकर सोचने लगा): "पर साला यह बुड्ढा तो 60 साल की आस्था का ढोंग रचाए बैठा है... क्या इसके अंदर अभी भी हवस बची होगी? कहीं साले का औज़ार पूरी तरह से ठप्प ही हो चुका हो तो मेरी यह पोर्न वाली सारी स्कीम धरी की धरी रह जाएगी! बुड्ढे का खड़ा ही नहीं होगा तो फ़िल्म देखकर भी क्या उखाड़ लेगा?"
शेर ने अपनी दाढ़ी खुजलाई और फिर झटके से उसकी आँखें संतोष से चमक उठीं। उसने अपनी योजना की आखिरी कड़ी जोड़ ली थी।
शेर (हाथ पर हाथ मारते हुए, हवस में हांफकर बोला): "हाँ मादरचोद! यह हुई न बात! इसके अंदर हवस की आग भड़काने के लिए इसके खाने या दूध में वियाग्रा की गोली मिला दूँगा! जब दिन-रात साले का लंड लोहे की तरह तना रहेगा और नीचे खिंचाव पैदा होगा, तब इसके सामने मीरा की सुंदरता और उसके कसदार मम्मों की तारीफें करूँगा... बुड्ढे की खोपड़ी अपने आप घूम जाएगी!"
उसने अपने दिमाग में इस घिनौनी साजिश का पूरा खाका तैयार कर लिया:
वियाग्रा की गोली अश्लील पोर्न फ़िल्मेंनौकर-मालकिन वाली गंदी वीडियोमीरा के बदन की उत्तेजक कहानियाँबुड्ढे का दिमाग पूरी तरह भ्रष्ट!
शेर (अपने अकड़े हुए लंड को सहलाते हुए ज़हरीली मुस्कान से मुस्कुराया): "एक बार इस बुड्ढे का ईमान डोला... फिर तो यह खुद मीरा की ज़िप खोलने दौड़ेगा! और जब हम दोनों मिलकर उस छिनाल को घेरेंगे, तो मालकिन चाहकर भी सिक्युरिटी वाले पति के पास मुँह उठाने लायक नहीं रहेगी!"
सारा दिन शेर चील की तरह नज़रें गड़ाए मीरा पर झपटने का मौका ढूँढता रहा, पर उसकी एक न चली। चंदन बाबा साये की तरह मीरा के आसपास ही डटे रहे, और जब वे नहीं होते, तो मीरा खुद को अपने कमरे में बंद रख रही थी।
Deepak Kapoor
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