24-08-2026, 07:33 PM
बोतल फिर घूमी। इस बार वह फिर से रुही के सामने रुकी।
कमरे में एक अजीब सी चुप्पी छा गई। सब जानते थे कि अब बारी गंभीर होने वाली है।
सोनिया ने धीरे से पूछा, “बुलबुल… ट्रूथ ऑर डेयर?”
रुही के होंठ काँपे। उसने रामू की आँखों में देखा। इस बार उनकी आँखों में फैसला पहले से ही लिखा था।
“डेयर…” उसने बहुत कमज़ोर आवाज़ में कहा।
सोनिया ने थोड़ी देर तक उसे देखा, फिर साफ कहा—
“अपनी नाइटी उतार दे। अभी। सबके सामने।”
रुही जैसे बिजली से सही हो गई। आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने तुरंत सिर हिलाया और दोनों हाथों से अपनी नाइटी के किनारों को कसकर पकड़ लिया।
“नहीं… नहीं… सोनिया प्लीज… ये मत… मैं नहीं उतार सकती… प्लीज डेयर बदल दो…”
उसकी आवाज़ में घबराहट साफ थी। आँसू पहले से ही आँखों में तैर रहे थे।
सोनिया ने सिर हिलाया। “नहीं बुलबुल। डेयर यही है।”
रुही ने फिर रामू की तरफ रुख किया। दोनों हाथ जोड़कर, आवाज़ में गिड़गिड़ाहट भरते हुए बोली—
“रामू जी… प्लीज… आप ही कह दो… डेयर बदलवा दो… मैं सब कर लूँगी… जो कहोगे कर लूँगी… लेकिन नाइटी मत उतरवाओ… प्लीज… बहुत शर्म आ रही है… मैं नहीं कर सकती सबके सामने…”
रामू चुप थे। उनकी निगाहें रुही पर टिकी थीं—सख्त, अटल।
रुही अब लगभग रो रही थी। वह सोनिया और जामिल दोनों की तरफ भी मुड़ी।
“सोनिया… जामिल… प्लीज… डेयर बदल दो न… मैं घुटनों पर बैठ जाती हूँ… जो कहोगे कर लूँगी… लेकिन ये मत… मेरी नाइटी मत उतरवाओ… मैं मना करती हूँ… प्लीज…”
जामिल ने धीरे से सीटी बजाई। “देखो… कितनी गिड़गिड़ा रही है। पहले मूत भी पी लिया, किसी और के लंड को चूमा भी… अब नाइटी पर अड़ गई।”
सोनिया ने रुही के करीब झुककर कहा, “बुलबुल… अब बहुत देर हो चुकी है। तू पहले ही बहुत कुछ कर चुकी है। नाइटी सिर्फ एक कपड़ा है। उतार।”
रुही ने फिर से रामू के पैरों से लिपटते हुए कहा, “रामू जी… आप मेरी सुन लो… एक बार… बस एक बार मेरी बात मान लो… प्लीज… मैं आपकी बहू हूँ… आपकी रंडी हूँ… जो कहो मानूँगी… लेकिन ये डेयर बदल दो…”
उसके आँसू अब लगातार बह रहे थे। शरीर काँप रहा था। दोनों हाथों से नाइटी को इतनी ज़ोर से पकड़े हुए थी जैसे कोई उसे छीन लेगा।
कमरे में तनाव इतना बढ़ गया था कि साँसें भी भारी लग रही थीं।
सबकी निगाहें अब रामू पर थीं—देखने के लिए कि वह अपनी बहू की गिड़गिड़ाहट पर क्या फैसला करते हैं।
रामू नशे में थे। आँखें लाल और भारी थीं। शराब की गंध उनकी साँसों में घुली हुई थी। उन्होंने रुही के बालों में उंगलियाँ फँसाईं और उसका चेहरा अपनी तरफ उठाया।
“उतार,” उन्होंने सीधी, भारी आवाज़ में कहा। “नाइटी उतार। अभी।”
रुही ने सिर हिलाया। आँसू पहले से ही बह रहे थे। “रामू जी… प्लीज… माफ़ कर दो… मैं नहीं कर सकती… बहुत शर्म आ रही है… प्लीज…”
रामू हँसे। नशे में उनकी हँसी और गहरी लग रही थी। उन्होंने रुही की ठुड्डी पकड़ी और सोनिया-जामिल की तरफ इशारा करते हुए कहा—
“ये भी तो देखें… कि मेरा माल कितना चिकना और सेक्सी है। तू क्यों छुपा रही है? उतार।”
रुही ने दोनों हाथों से नाइटी को और कसकर पकड़ लिया। आवाज़ में गिड़गिड़ाहट साफ थी—
“रामू जी… माफ़ कर दो न… मैं सब कर लूँगी… जो कहोगे कर लूँगी… लेकिन नाइटी मत उतरवाओ… प्लीज… मैं नहीं कर सकती सबके सामने… मेरी इज़्ज़त… प्लीज सुन लो…”
रामू ने उसका हाथ नाइटी से हटाने की कोशिश की, लेकिन रुही ने और ज़ोर से पकड़ रखा था। वह लगभग रोते हुए बोली—
“मैं आपकी हूँ… आपकी बहू हूँ… आपकी रंडी हूँ… आप जो कहो मानती हूँ… लेकिन ये मत… माफ़ कर दो रामू जी… एक बार माफ़ कर दो… मैं घुटनों पर बैठ जाती हूँ… आपके पैर पकड़ती हूँ… लेकिन नाइटी मत उतरवाओ…”
सोनिया चुपचाप देख रही थी। जामिल भी कुछ नहीं बोल रहा था। माहौल बहुत तना हुआ था।
रामू ने रुही के गाल पर हल्के से थपकी दी—जोर की नहीं, लेकिन नशे में उनकी सहनशक्ति कम थी।
“इतना नाटक मत कर,” उन्होंने कहा। “तू पहले ही बहुत कुछ कर चुकी है। मूत पी लिया, किसी और के लंड को चूमा… अब नाइटी पर अड़ गई? उतार। मेरा माल सबको दिखना चाहिए।”
रुही अब फफक रही थी। उसने रामू के पैरों से लिपटते हुए कहा—
“माफ़ कर दो… प्लीज माफ़ कर दो… मैं नहीं कर सकती… बहुत शर्म आ रही है… मैं मर जाऊँगी शर्म से… रामू जी… आप ही बचा लो… डेयर बदल दो… कुछ और कह दो… जो कहोगे कर लूँगी… बस ये मत…”
रामू ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। नशे में उनकी आँखें तेज़ थीं।
“तू मेरी है,” उन्होंने धीरे लेकिन सख्ती से कहा। “तेरा शरीर मेरा है। तेरी शर्म भी मेरी है। अब उतार… या मैं खुद उतारूँगा।”
रुही की साँसें उखड़ रही थीं। आँसू उसके गालों पर बह रहे थे। वह नाइटी को पकड़े हुए काँप रही थी—मना करती हुई, गिड़गिड़ाती हुई, फिर भी उनके सामने घुटनों पर ही।
“माफ़ कर दो रामू जी…” वह बार-बार यही कह रही थी। “माफ़ कर दो… मैं नहीं कर सकती… प्लीज…”
कमरे में सिर्फ उसकी टूटी हुई आवाज़ और रामू की भारी साँसें गूँज रही थीं।
रामू का चेहरा सख्त हो गया। नशे में उनकी आँखें और तेज़ लग रही थीं। उन्होंने रुही के बाल पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया।
“मैंने कहा उतार,” उन्होंने भारी आवाज़ में कहा। “अब और नाटक नहीं।”
रुही अभी भी नाइटी को दोनों हाथों से पकड़े हुए रो रही थी। “रामू जी… प्लीज… माफ़ कर दो… मैं—”
थप्पड़ की आवाज़ कमरे में गूँज गई।
रामू ने उसके गाल पर एक सख्त थप्पड़ मारा। रुही का चेहरा एक तरफ झटक गया। गाल पर तुरंत लाल निशान उभर आया। आँखों से आँसू और तेज़ी से बहने लगे। वह सिसकते हुए उनके पैरों पर गिर गई।
“उतार,” रामू ने दोबारा हुक्म दिया। आवाज़ में अब कोई नरमी नहीं बची थी। “वरना और मारेगा।”
रुही काँपते हाथों से अपनी नाइटी के किनारों को पकड़ा। रोते-रोते उसने उसे ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। नाइटी उसके सिर से निकलकर हाथों में आ गई। उसने उसे एक तरफ गिरा दिया।
अब वह सिर्फ छोटी लाल पैंटी में खड़ी थी। गोरा, चिकना शरीर सबके सामने था—स्तन, कमर, जाँघें। शर्म से वह तुरंत दोनों टाँगें क्रॉस करके खड़ी हो गई। एक हाथ से अपनी छाती छुपाने की कोशिश करती, दूसरे हाथ से नीचे की तरफ। लेकिन छुप नहीं पा रही थी।
वह बस खड़ी-खड़ी रो रही थी। कंधे काँप रहे थे। गाल पर थप्पड़ का निशान चमक रहा था। आँसू उसकी ठुड्डी से होते हुए छाती पर बह रहे थे।
सोनिया और जामिल दोनों चुपचाप देख रहे थे। कोई नहीं हँसा इस बार। माहौल बहुत भारी हो गया था।
रामू ने रुही के सामने खड़े होकर उसके रोते हुए चेहरे को देखा। फिर धीरे से कहा—
“अब दिख रहा है… मेरा माल कितना चिकना है। रो… रो ले। लेकिन खड़ी रह। टाँगें क्रॉस करके मत छुप। सीधी खड़ी हो।”
रुही ने और जोर से सिसकी ली। टाँगें क्रॉस किए हुए, रोते हुए, वह बस वहीं खड़ी रही—शर्म से नंगी, थप्पड़ खाई हुई, और पूरी तरह से उनके हुक्म में।
रुही सिर्फ छोटी लाल पैंटी में खड़ी थी। टाँगें क्रॉस किए हुए, एक हाथ से छाती छुपाने की नाकाम कोशिश करती हुई, दूसरे हाथ से नीचे। गाल पर थप्पड़ का लाल निशान साफ चमक रहा था। आँसू लगातार बह रहे थे। वह सिसक-सिसक कर रो रही थी—शर्म से, डर से, और उस गहरी बेबसी से जो अब उसकी साँस बन चुकी थी।
जामिल की निगाहें रुही के शरीर पर ठहर गईं।
गोरी, चिकनी त्वचा। भारी लेकिन नाज़ुक स्तन। पतली कमर। गोल जाँघें। पैंटी के अंदर छुपी हुई वह जगह जिसे वह सिर्फ कल्पना में देख सकता था। उसके मुँह में पानी आ गया। एक बूँद लार उसके होंठ के कोने से निकलकर ठुड्डी की तरफ बढ़ी। उसने जल्दी से पोंछ लिया, लेकिन आँखें नहीं हटाईं।
रामू भैया कितने किस्मत वाले हैं…
इतनी कोमल कबूतरी को कैसे दबोच रखा है…
रोज़ इसे नचाता होगा। रोता हुआ मुँह देखता होगा। थप्पड़ मारता होगा। और फिर इसे अपनी गोद में भर लेता होगा।
इसका शरीर कितना मुलायम लगेगा हाथ में…
जब यह रोती होगी तो और भी मज़ेदारी लगती होगी।
जामिल के मन में ख्याल आ रहे थे—रुही की टाँगें फैलाकर, उसके आँसू पोंछते हुए, उसके कान में गंदे शब्द कहते हुए। वह निगल गया। उसका लंड अंडरवियर में और तन गया।
रामू खड़े होकर अपनी बहू को देख रहे थे। नशे में भी उनके चेहरे पर एक गहरी, शांत सी गर्व की भावना थी।
यह मेरी है।
मेरी प्रॉपर्टी।
इसे मैंने तोड़ा है। इसे मैंने रंडी बनाया है। इसे मैंने अपने मूत से नहलाया है।
अब सब देख रहे हैं कि मेरा माल कितना चिकना, कितना शर्मसार, कितना आज्ञाकारी है।
रो… रो ले। तेरे आँसू भी मेरे हैं।
उन्होंने रुही के रोते हुए चेहरे को देखा और अंदर ही अंदर संतुष्टि महसूस की। यह उनका कब्ज़ा था—पूरा, बिना किसी हिस्से के।
सोनिया की निगाहें भी रुही पर थीं। वह जामिल की गोद में बैठी हुई, चुपचाप देख रही थी। उसके मन में एक अजीब सा मिश्रण चल रहा था—उत्तेजना, जलन, और एक गहरी कामुक कल्पना।
रामू भाई जैसे भेड़िये ने इस बकरी को कैसे नोचा होगा…
जब पहली बार इसका घूँघट उठाया होगा… जब इसे रोते हुए चोदा होगा…
यह कितनी चीखी होगी। कितनी मना की होगी। और फिर कैसे इसकी टाँगें खुद फैल गई होंगी।
भेड़िया जब बकरी को दबोचता है ना… तो पहले उसके गले में दाँत गाड़ता है। फिर धीरे-धीरे खाता है।
रामू ने भी यही किया होगा। पहले तोड़ा, फिर पाला, फिर अपना बना लिया।
सोनिया ने अनजाने में अपनी जाँघें भींच लीं। जामिल का हाथ उसकी कमर पर था, लेकिन उसकी सोच रुही के नंगे शरीर और रामू की सख्ती पर अटकी हुई थी।
रुही इस पूरे समय बस रो रही थी।
आँसू उसकी छाती पर गिर रहे थे। गाल जल रहा था। शरीर सबके सामने था। वह टाँगें क्रॉस किए हुए खड़ी थी—जितना हो सके खुद को समेटने की कोशिश में। मन में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—
सब देख रहे हैं…
मेरा शरीर… मेरे आँसू… मेरी हालत…
मैं अब कुछ भी नहीं बचा पाई…
कमरे में भारी चुप्पी थी।
सिर्फ रुही की सिसकियाँ और चारों के अंदर चल रहे ख्यालों का तनाव।
रामू ने आखिरकार कदम बढ़ाया। उन्होंने रुही के पास जाकर उसका रोता हुआ चेहरा थामा और धीरे से कहा—
“रो ले। लेकिन सिर ऊपर रख। मेरा माल रोते हुए भी सुंदर लगता है।”
कमरे में एक अजीब सी चुप्पी छा गई। सब जानते थे कि अब बारी गंभीर होने वाली है।
सोनिया ने धीरे से पूछा, “बुलबुल… ट्रूथ ऑर डेयर?”
रुही के होंठ काँपे। उसने रामू की आँखों में देखा। इस बार उनकी आँखों में फैसला पहले से ही लिखा था।
“डेयर…” उसने बहुत कमज़ोर आवाज़ में कहा।
सोनिया ने थोड़ी देर तक उसे देखा, फिर साफ कहा—
“अपनी नाइटी उतार दे। अभी। सबके सामने।”
रुही जैसे बिजली से सही हो गई। आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने तुरंत सिर हिलाया और दोनों हाथों से अपनी नाइटी के किनारों को कसकर पकड़ लिया।
“नहीं… नहीं… सोनिया प्लीज… ये मत… मैं नहीं उतार सकती… प्लीज डेयर बदल दो…”
उसकी आवाज़ में घबराहट साफ थी। आँसू पहले से ही आँखों में तैर रहे थे।
सोनिया ने सिर हिलाया। “नहीं बुलबुल। डेयर यही है।”
रुही ने फिर रामू की तरफ रुख किया। दोनों हाथ जोड़कर, आवाज़ में गिड़गिड़ाहट भरते हुए बोली—
“रामू जी… प्लीज… आप ही कह दो… डेयर बदलवा दो… मैं सब कर लूँगी… जो कहोगे कर लूँगी… लेकिन नाइटी मत उतरवाओ… प्लीज… बहुत शर्म आ रही है… मैं नहीं कर सकती सबके सामने…”
रामू चुप थे। उनकी निगाहें रुही पर टिकी थीं—सख्त, अटल।
रुही अब लगभग रो रही थी। वह सोनिया और जामिल दोनों की तरफ भी मुड़ी।
“सोनिया… जामिल… प्लीज… डेयर बदल दो न… मैं घुटनों पर बैठ जाती हूँ… जो कहोगे कर लूँगी… लेकिन ये मत… मेरी नाइटी मत उतरवाओ… मैं मना करती हूँ… प्लीज…”
जामिल ने धीरे से सीटी बजाई। “देखो… कितनी गिड़गिड़ा रही है। पहले मूत भी पी लिया, किसी और के लंड को चूमा भी… अब नाइटी पर अड़ गई।”
सोनिया ने रुही के करीब झुककर कहा, “बुलबुल… अब बहुत देर हो चुकी है। तू पहले ही बहुत कुछ कर चुकी है। नाइटी सिर्फ एक कपड़ा है। उतार।”
रुही ने फिर से रामू के पैरों से लिपटते हुए कहा, “रामू जी… आप मेरी सुन लो… एक बार… बस एक बार मेरी बात मान लो… प्लीज… मैं आपकी बहू हूँ… आपकी रंडी हूँ… जो कहो मानूँगी… लेकिन ये डेयर बदल दो…”
उसके आँसू अब लगातार बह रहे थे। शरीर काँप रहा था। दोनों हाथों से नाइटी को इतनी ज़ोर से पकड़े हुए थी जैसे कोई उसे छीन लेगा।
कमरे में तनाव इतना बढ़ गया था कि साँसें भी भारी लग रही थीं।
सबकी निगाहें अब रामू पर थीं—देखने के लिए कि वह अपनी बहू की गिड़गिड़ाहट पर क्या फैसला करते हैं।
रामू नशे में थे। आँखें लाल और भारी थीं। शराब की गंध उनकी साँसों में घुली हुई थी। उन्होंने रुही के बालों में उंगलियाँ फँसाईं और उसका चेहरा अपनी तरफ उठाया।
“उतार,” उन्होंने सीधी, भारी आवाज़ में कहा। “नाइटी उतार। अभी।”
रुही ने सिर हिलाया। आँसू पहले से ही बह रहे थे। “रामू जी… प्लीज… माफ़ कर दो… मैं नहीं कर सकती… बहुत शर्म आ रही है… प्लीज…”
रामू हँसे। नशे में उनकी हँसी और गहरी लग रही थी। उन्होंने रुही की ठुड्डी पकड़ी और सोनिया-जामिल की तरफ इशारा करते हुए कहा—
“ये भी तो देखें… कि मेरा माल कितना चिकना और सेक्सी है। तू क्यों छुपा रही है? उतार।”
रुही ने दोनों हाथों से नाइटी को और कसकर पकड़ लिया। आवाज़ में गिड़गिड़ाहट साफ थी—
“रामू जी… माफ़ कर दो न… मैं सब कर लूँगी… जो कहोगे कर लूँगी… लेकिन नाइटी मत उतरवाओ… प्लीज… मैं नहीं कर सकती सबके सामने… मेरी इज़्ज़त… प्लीज सुन लो…”
रामू ने उसका हाथ नाइटी से हटाने की कोशिश की, लेकिन रुही ने और ज़ोर से पकड़ रखा था। वह लगभग रोते हुए बोली—
“मैं आपकी हूँ… आपकी बहू हूँ… आपकी रंडी हूँ… आप जो कहो मानती हूँ… लेकिन ये मत… माफ़ कर दो रामू जी… एक बार माफ़ कर दो… मैं घुटनों पर बैठ जाती हूँ… आपके पैर पकड़ती हूँ… लेकिन नाइटी मत उतरवाओ…”
सोनिया चुपचाप देख रही थी। जामिल भी कुछ नहीं बोल रहा था। माहौल बहुत तना हुआ था।
रामू ने रुही के गाल पर हल्के से थपकी दी—जोर की नहीं, लेकिन नशे में उनकी सहनशक्ति कम थी।
“इतना नाटक मत कर,” उन्होंने कहा। “तू पहले ही बहुत कुछ कर चुकी है। मूत पी लिया, किसी और के लंड को चूमा… अब नाइटी पर अड़ गई? उतार। मेरा माल सबको दिखना चाहिए।”
रुही अब फफक रही थी। उसने रामू के पैरों से लिपटते हुए कहा—
“माफ़ कर दो… प्लीज माफ़ कर दो… मैं नहीं कर सकती… बहुत शर्म आ रही है… मैं मर जाऊँगी शर्म से… रामू जी… आप ही बचा लो… डेयर बदल दो… कुछ और कह दो… जो कहोगे कर लूँगी… बस ये मत…”
रामू ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। नशे में उनकी आँखें तेज़ थीं।
“तू मेरी है,” उन्होंने धीरे लेकिन सख्ती से कहा। “तेरा शरीर मेरा है। तेरी शर्म भी मेरी है। अब उतार… या मैं खुद उतारूँगा।”
रुही की साँसें उखड़ रही थीं। आँसू उसके गालों पर बह रहे थे। वह नाइटी को पकड़े हुए काँप रही थी—मना करती हुई, गिड़गिड़ाती हुई, फिर भी उनके सामने घुटनों पर ही।
“माफ़ कर दो रामू जी…” वह बार-बार यही कह रही थी। “माफ़ कर दो… मैं नहीं कर सकती… प्लीज…”
कमरे में सिर्फ उसकी टूटी हुई आवाज़ और रामू की भारी साँसें गूँज रही थीं।
रामू का चेहरा सख्त हो गया। नशे में उनकी आँखें और तेज़ लग रही थीं। उन्होंने रुही के बाल पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया।
“मैंने कहा उतार,” उन्होंने भारी आवाज़ में कहा। “अब और नाटक नहीं।”
रुही अभी भी नाइटी को दोनों हाथों से पकड़े हुए रो रही थी। “रामू जी… प्लीज… माफ़ कर दो… मैं—”
थप्पड़ की आवाज़ कमरे में गूँज गई।
रामू ने उसके गाल पर एक सख्त थप्पड़ मारा। रुही का चेहरा एक तरफ झटक गया। गाल पर तुरंत लाल निशान उभर आया। आँखों से आँसू और तेज़ी से बहने लगे। वह सिसकते हुए उनके पैरों पर गिर गई।
“उतार,” रामू ने दोबारा हुक्म दिया। आवाज़ में अब कोई नरमी नहीं बची थी। “वरना और मारेगा।”
रुही काँपते हाथों से अपनी नाइटी के किनारों को पकड़ा। रोते-रोते उसने उसे ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। नाइटी उसके सिर से निकलकर हाथों में आ गई। उसने उसे एक तरफ गिरा दिया।
अब वह सिर्फ छोटी लाल पैंटी में खड़ी थी। गोरा, चिकना शरीर सबके सामने था—स्तन, कमर, जाँघें। शर्म से वह तुरंत दोनों टाँगें क्रॉस करके खड़ी हो गई। एक हाथ से अपनी छाती छुपाने की कोशिश करती, दूसरे हाथ से नीचे की तरफ। लेकिन छुप नहीं पा रही थी।
वह बस खड़ी-खड़ी रो रही थी। कंधे काँप रहे थे। गाल पर थप्पड़ का निशान चमक रहा था। आँसू उसकी ठुड्डी से होते हुए छाती पर बह रहे थे।
सोनिया और जामिल दोनों चुपचाप देख रहे थे। कोई नहीं हँसा इस बार। माहौल बहुत भारी हो गया था।
रामू ने रुही के सामने खड़े होकर उसके रोते हुए चेहरे को देखा। फिर धीरे से कहा—
“अब दिख रहा है… मेरा माल कितना चिकना है। रो… रो ले। लेकिन खड़ी रह। टाँगें क्रॉस करके मत छुप। सीधी खड़ी हो।”
रुही ने और जोर से सिसकी ली। टाँगें क्रॉस किए हुए, रोते हुए, वह बस वहीं खड़ी रही—शर्म से नंगी, थप्पड़ खाई हुई, और पूरी तरह से उनके हुक्म में।
रुही सिर्फ छोटी लाल पैंटी में खड़ी थी। टाँगें क्रॉस किए हुए, एक हाथ से छाती छुपाने की नाकाम कोशिश करती हुई, दूसरे हाथ से नीचे। गाल पर थप्पड़ का लाल निशान साफ चमक रहा था। आँसू लगातार बह रहे थे। वह सिसक-सिसक कर रो रही थी—शर्म से, डर से, और उस गहरी बेबसी से जो अब उसकी साँस बन चुकी थी।
जामिल की निगाहें रुही के शरीर पर ठहर गईं।
गोरी, चिकनी त्वचा। भारी लेकिन नाज़ुक स्तन। पतली कमर। गोल जाँघें। पैंटी के अंदर छुपी हुई वह जगह जिसे वह सिर्फ कल्पना में देख सकता था। उसके मुँह में पानी आ गया। एक बूँद लार उसके होंठ के कोने से निकलकर ठुड्डी की तरफ बढ़ी। उसने जल्दी से पोंछ लिया, लेकिन आँखें नहीं हटाईं।
रामू भैया कितने किस्मत वाले हैं…
इतनी कोमल कबूतरी को कैसे दबोच रखा है…
रोज़ इसे नचाता होगा। रोता हुआ मुँह देखता होगा। थप्पड़ मारता होगा। और फिर इसे अपनी गोद में भर लेता होगा।
इसका शरीर कितना मुलायम लगेगा हाथ में…
जब यह रोती होगी तो और भी मज़ेदारी लगती होगी।
जामिल के मन में ख्याल आ रहे थे—रुही की टाँगें फैलाकर, उसके आँसू पोंछते हुए, उसके कान में गंदे शब्द कहते हुए। वह निगल गया। उसका लंड अंडरवियर में और तन गया।
रामू खड़े होकर अपनी बहू को देख रहे थे। नशे में भी उनके चेहरे पर एक गहरी, शांत सी गर्व की भावना थी।
यह मेरी है।
मेरी प्रॉपर्टी।
इसे मैंने तोड़ा है। इसे मैंने रंडी बनाया है। इसे मैंने अपने मूत से नहलाया है।
अब सब देख रहे हैं कि मेरा माल कितना चिकना, कितना शर्मसार, कितना आज्ञाकारी है।
रो… रो ले। तेरे आँसू भी मेरे हैं।
उन्होंने रुही के रोते हुए चेहरे को देखा और अंदर ही अंदर संतुष्टि महसूस की। यह उनका कब्ज़ा था—पूरा, बिना किसी हिस्से के।
सोनिया की निगाहें भी रुही पर थीं। वह जामिल की गोद में बैठी हुई, चुपचाप देख रही थी। उसके मन में एक अजीब सा मिश्रण चल रहा था—उत्तेजना, जलन, और एक गहरी कामुक कल्पना।
रामू भाई जैसे भेड़िये ने इस बकरी को कैसे नोचा होगा…
जब पहली बार इसका घूँघट उठाया होगा… जब इसे रोते हुए चोदा होगा…
यह कितनी चीखी होगी। कितनी मना की होगी। और फिर कैसे इसकी टाँगें खुद फैल गई होंगी।
भेड़िया जब बकरी को दबोचता है ना… तो पहले उसके गले में दाँत गाड़ता है। फिर धीरे-धीरे खाता है।
रामू ने भी यही किया होगा। पहले तोड़ा, फिर पाला, फिर अपना बना लिया।
सोनिया ने अनजाने में अपनी जाँघें भींच लीं। जामिल का हाथ उसकी कमर पर था, लेकिन उसकी सोच रुही के नंगे शरीर और रामू की सख्ती पर अटकी हुई थी।
रुही इस पूरे समय बस रो रही थी।
आँसू उसकी छाती पर गिर रहे थे। गाल जल रहा था। शरीर सबके सामने था। वह टाँगें क्रॉस किए हुए खड़ी थी—जितना हो सके खुद को समेटने की कोशिश में। मन में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—
सब देख रहे हैं…
मेरा शरीर… मेरे आँसू… मेरी हालत…
मैं अब कुछ भी नहीं बचा पाई…
कमरे में भारी चुप्पी थी।
सिर्फ रुही की सिसकियाँ और चारों के अंदर चल रहे ख्यालों का तनाव।
रामू ने आखिरकार कदम बढ़ाया। उन्होंने रुही के पास जाकर उसका रोता हुआ चेहरा थामा और धीरे से कहा—
“रो ले। लेकिन सिर ऊपर रख। मेरा माल रोते हुए भी सुंदर लगता है।”


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