24-08-2026, 06:57 PM
बोतल फिर घूमी। इस बार वह रामू के सामने रुकी।
सोनिया ने तुरंत कहा, “रामू भाई… ट्रूथ ऑर डेयर?”
रामू ने रुही की तरफ देखा। वह अभी भी उनके सामने घुटनों पर ही बैठी थी। उन्होंने धीरे से जवाब दिया, “डेयर।”
सोनिया की आँखों में शरारत चमक उठी। उसने मुस्कुराते हुए कहा—
“तो… अपनी बहू के कोमल, नाज़ुक पैरों को चूमो और चाटो। दोनों पैर। अच्छी तरह से। रुही को देखती रहना।”
रुही की आँखें बड़ी हो गईं। उसने तुरंत सिर हिलाया, “नहीं… रामू जी… प्लीज… मेरे पैर नहीं… बहुत शर्म की बात है…”
रामू ने उसका मुँह बंद करने के लिए एक उंगली उसके होंठों पर रख दी। “शांत रह। डेयर मेरी है।”
फिर वे खुद धीरे से नीचे झुके। रुही के नंगे पैर उनके सामने थे—छोटे, गोरे, कोमल। उन्होंने पहले उसके दाएँ पैर को दोनों हाथों में लिया। हल्के से उठाया और उसके अंगूठे पर होंठ रख दिए।
एक लंबा, नरम चुम्बन।
फिर जीभ निकालकर उन्होंने उसके अंगूठे को ऊपर से नीचे तक चाटा। नाखून के किनारे, उंगलियों के बीच… धीरे-धीरे, पूरी तवज्जो से। रुही का शरीर झटके से काँप उठा। वह दोनों हाथों से अपना मुँह दबाए हुए सिसक रही थी।
“रामू जी… मत… बहुत शर्म आ रही है…” उसकी आवाज़ टूट रही थी।
रामू ने जवाब नहीं दिया। वे उसके दूसरे पैर पर चले गए। इस बार उन्होंने पूरा तलवा चाटा—एड़ी से लेकर उंगलियों तक। जीभ की गर्माहट और गीलापन रुही के पैरों पर फैल रहा था। वे कभी उसके पैर की उंगलियों को मुँह में ले लेते, कभी तलवे पर लंबे-लंबे चाटते।
सोनिया और जामिल दोनों चुपचाप देख रहे थे। सोनिया ने धीरे से कहा, “देखो… रामू भाई कितनी श्रद्धा से चाट रहे हैं। जैसे कोई पूजा कर रहे हों।”
जामिल ने जवाब दिया, “बहू के पैर हैं न… भैया के लिए ये भी पूजा ही है।”
रुही की आँखों से आँसू बह रहे थे। शर्म इतनी थी कि वह उनका चेहरा भी नहीं देख पा रही थी। लेकिन शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था—पैर की उंगलियाँ अपने-आप मुड़ रही थीं, साँसें तेज़ थीं।
रामू ने दोनों पैर चूम और चाट लिए। आखिर में उन्होंने रुही के दोनों पैरों को अपनी हथेलियों में लेकर उसके तलवों पर अपना माथा टिका दिया। कुछ सेकंड तक वैसे ही रहे।
फिर सिर उठाया और रुही की आँखों में देखा।
“तेरे पैर भी मेरे हैं,” उन्होंने धीरे लेकिन साफ कहा। “जैसे तेरी चूत है… जैसे तेरा मुँह है… वैसे ही ये कोमल पैर भी।”
रुही कुछ बोल नहीं पाई। बस रोते हुए उनके कंधों से लिपट गई।
गेम जारी था… लेकिन इस डेयर ने एक और परत खोल दी थी—न सिर्फ रुही की शर्म की, बल्कि रामू के मालिकाना समर्पण की भी।
बोतल फिर घूमी। इस बार वह जामिल के सामने रुकी।
रामू ने धीरे से पूछा, “जामिल… ट्रूथ ऑर डेयर?”
जामिल ने सोनिया की तरफ देखा। सोनिया की आँखों में पहले से ही जान थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “डेयर।”
रुही अभी भी रामू की गोद में दुबकी हुई थी। आँखें लाल थीं, शरीर काँप रहा था। वह जानती थी कि अब जो होने वाला है वह और खुला, और अश्लील होगा।
सोनिया ने खुद ही डेयर दिया, आवाज़ में हल्की सी साँस फूलना था—
“मेरी चूत को… पैंटी के ऊपर से चाट। अच्छी तरह। जब तक मैं मना न करूँ।”
जामिल ने कोई सवाल नहीं किया। उसने सोनिया को सोफे पर थोड़ा पीछे धकेला। सोनिया ने खुद ही अपनी टाँगें फैला दीं। छोटी काली पैंटी के बीच में पहले से ही हल्का सा गीला निशान दिख रहा था।
जामिल उसके बीच में झुक गया। उसने दोनों हाथों से सोनिया की जाँघें पकड़ीं और अपना मुँह उसकी पैंटी पर रख दिया। पहले हल्के चुम्बन। फिर जीभ निकालकर उसने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया—लंबे, धीमे, दबाव वाले चाट। कपड़ा जीभ से चिपक रहा था। सोनिया की कमर तुरंत लचक गई।
“आह्ह… जामिल जी…” सोनिया की आवाज़ निकल गई। उसने जामिल का सिर और अपनी तरफ दबा लिया। “और… ऐसे ही… जोर से चाट…”
जामिल पैंटी के ऊपर से ही उसकी फाँकों को जीभ से दबाने लगा। कभी बीच वाले गीले हिस्से को चूस लेता, कभी पूरी चूत को पैंटी समेत चाटता। कपड़ा और ज्यादा गहरा रंग का हो गया था। सोनिया की सिसकारियाँ अब छुप नहीं रही थीं।
रुही यह सब देख रही थी। उसकी साँसें खुद तेज़ हो गई थीं। मन में ख्याल आया—
सोनिया कितनी आसानी से खुल गई…
पैंटी के ऊपर से ही इतनी कराह रही है…
जामिल की जीभ…
रामू ने रुही के कान में धीरे कहा, “देख। तेरी सहेली कितनी मजे से अपनी चूत चटवा रही है। तू भी कभी ऐसी ही खुल जाएगी मेरे सामने… सबके सामने।”
रुही ने सिर हिलाया। आवाज़ नहीं निकली। बस रामू से और कसकर चिपक गई। उसकी अपनी चूत भी पैंटी में गीली हो रही थी—शर्म के बावजूद।
सोनिया की टाँगें काँप रही थीं। जामिल लगातार चाट रहा था। पैंटी अब पूरी तरह गीली चमक रही थी। सोनिया ने आखिरकार जामिल का सिर पकड़कर कहा—
“बस… अभी काफी है… वरना यहीं भीग जाऊँगी…”
जामिल ने आखिरी एक गहरा चाट लिया और मुँह हटाया। उसके होंठ चमक रहे थे। उसने सोनिया की तरफ देखकर मुस्कुराया।
“स्वादिष्ट,” उसने साफ कहा।
सोनिया साँस लेती हुई हँसी। “रामू भाई… अब आपकी बारी का इंतज़ार है। गेम अभी खत्म नहीं हुआ।”
कमरे में अब सिर्फ साँसें और हल्की सिसकारियाँ बची थीं।
गेम और गहरा होता जा रहा था।
सोनिया ने तुरंत कहा, “रामू भाई… ट्रूथ ऑर डेयर?”
रामू ने रुही की तरफ देखा। वह अभी भी उनके सामने घुटनों पर ही बैठी थी। उन्होंने धीरे से जवाब दिया, “डेयर।”
सोनिया की आँखों में शरारत चमक उठी। उसने मुस्कुराते हुए कहा—
“तो… अपनी बहू के कोमल, नाज़ुक पैरों को चूमो और चाटो। दोनों पैर। अच्छी तरह से। रुही को देखती रहना।”
रुही की आँखें बड़ी हो गईं। उसने तुरंत सिर हिलाया, “नहीं… रामू जी… प्लीज… मेरे पैर नहीं… बहुत शर्म की बात है…”
रामू ने उसका मुँह बंद करने के लिए एक उंगली उसके होंठों पर रख दी। “शांत रह। डेयर मेरी है।”
फिर वे खुद धीरे से नीचे झुके। रुही के नंगे पैर उनके सामने थे—छोटे, गोरे, कोमल। उन्होंने पहले उसके दाएँ पैर को दोनों हाथों में लिया। हल्के से उठाया और उसके अंगूठे पर होंठ रख दिए।
एक लंबा, नरम चुम्बन।
फिर जीभ निकालकर उन्होंने उसके अंगूठे को ऊपर से नीचे तक चाटा। नाखून के किनारे, उंगलियों के बीच… धीरे-धीरे, पूरी तवज्जो से। रुही का शरीर झटके से काँप उठा। वह दोनों हाथों से अपना मुँह दबाए हुए सिसक रही थी।
“रामू जी… मत… बहुत शर्म आ रही है…” उसकी आवाज़ टूट रही थी।
रामू ने जवाब नहीं दिया। वे उसके दूसरे पैर पर चले गए। इस बार उन्होंने पूरा तलवा चाटा—एड़ी से लेकर उंगलियों तक। जीभ की गर्माहट और गीलापन रुही के पैरों पर फैल रहा था। वे कभी उसके पैर की उंगलियों को मुँह में ले लेते, कभी तलवे पर लंबे-लंबे चाटते।
सोनिया और जामिल दोनों चुपचाप देख रहे थे। सोनिया ने धीरे से कहा, “देखो… रामू भाई कितनी श्रद्धा से चाट रहे हैं। जैसे कोई पूजा कर रहे हों।”
जामिल ने जवाब दिया, “बहू के पैर हैं न… भैया के लिए ये भी पूजा ही है।”
रुही की आँखों से आँसू बह रहे थे। शर्म इतनी थी कि वह उनका चेहरा भी नहीं देख पा रही थी। लेकिन शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था—पैर की उंगलियाँ अपने-आप मुड़ रही थीं, साँसें तेज़ थीं।
रामू ने दोनों पैर चूम और चाट लिए। आखिर में उन्होंने रुही के दोनों पैरों को अपनी हथेलियों में लेकर उसके तलवों पर अपना माथा टिका दिया। कुछ सेकंड तक वैसे ही रहे।
फिर सिर उठाया और रुही की आँखों में देखा।
“तेरे पैर भी मेरे हैं,” उन्होंने धीरे लेकिन साफ कहा। “जैसे तेरी चूत है… जैसे तेरा मुँह है… वैसे ही ये कोमल पैर भी।”
रुही कुछ बोल नहीं पाई। बस रोते हुए उनके कंधों से लिपट गई।
गेम जारी था… लेकिन इस डेयर ने एक और परत खोल दी थी—न सिर्फ रुही की शर्म की, बल्कि रामू के मालिकाना समर्पण की भी।
बोतल फिर घूमी। इस बार वह जामिल के सामने रुकी।
रामू ने धीरे से पूछा, “जामिल… ट्रूथ ऑर डेयर?”
जामिल ने सोनिया की तरफ देखा। सोनिया की आँखों में पहले से ही जान थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “डेयर।”
रुही अभी भी रामू की गोद में दुबकी हुई थी। आँखें लाल थीं, शरीर काँप रहा था। वह जानती थी कि अब जो होने वाला है वह और खुला, और अश्लील होगा।
सोनिया ने खुद ही डेयर दिया, आवाज़ में हल्की सी साँस फूलना था—
“मेरी चूत को… पैंटी के ऊपर से चाट। अच्छी तरह। जब तक मैं मना न करूँ।”
जामिल ने कोई सवाल नहीं किया। उसने सोनिया को सोफे पर थोड़ा पीछे धकेला। सोनिया ने खुद ही अपनी टाँगें फैला दीं। छोटी काली पैंटी के बीच में पहले से ही हल्का सा गीला निशान दिख रहा था।
जामिल उसके बीच में झुक गया। उसने दोनों हाथों से सोनिया की जाँघें पकड़ीं और अपना मुँह उसकी पैंटी पर रख दिया। पहले हल्के चुम्बन। फिर जीभ निकालकर उसने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया—लंबे, धीमे, दबाव वाले चाट। कपड़ा जीभ से चिपक रहा था। सोनिया की कमर तुरंत लचक गई।
“आह्ह… जामिल जी…” सोनिया की आवाज़ निकल गई। उसने जामिल का सिर और अपनी तरफ दबा लिया। “और… ऐसे ही… जोर से चाट…”
जामिल पैंटी के ऊपर से ही उसकी फाँकों को जीभ से दबाने लगा। कभी बीच वाले गीले हिस्से को चूस लेता, कभी पूरी चूत को पैंटी समेत चाटता। कपड़ा और ज्यादा गहरा रंग का हो गया था। सोनिया की सिसकारियाँ अब छुप नहीं रही थीं।
रुही यह सब देख रही थी। उसकी साँसें खुद तेज़ हो गई थीं। मन में ख्याल आया—
सोनिया कितनी आसानी से खुल गई…
पैंटी के ऊपर से ही इतनी कराह रही है…
जामिल की जीभ…
रामू ने रुही के कान में धीरे कहा, “देख। तेरी सहेली कितनी मजे से अपनी चूत चटवा रही है। तू भी कभी ऐसी ही खुल जाएगी मेरे सामने… सबके सामने।”
रुही ने सिर हिलाया। आवाज़ नहीं निकली। बस रामू से और कसकर चिपक गई। उसकी अपनी चूत भी पैंटी में गीली हो रही थी—शर्म के बावजूद।
सोनिया की टाँगें काँप रही थीं। जामिल लगातार चाट रहा था। पैंटी अब पूरी तरह गीली चमक रही थी। सोनिया ने आखिरकार जामिल का सिर पकड़कर कहा—
“बस… अभी काफी है… वरना यहीं भीग जाऊँगी…”
जामिल ने आखिरी एक गहरा चाट लिया और मुँह हटाया। उसके होंठ चमक रहे थे। उसने सोनिया की तरफ देखकर मुस्कुराया।
“स्वादिष्ट,” उसने साफ कहा।
सोनिया साँस लेती हुई हँसी। “रामू भाई… अब आपकी बारी का इंतज़ार है। गेम अभी खत्म नहीं हुआ।”
कमरे में अब सिर्फ साँसें और हल्की सिसकारियाँ बची थीं।
गेम और गहरा होता जा रहा था।


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