24-08-2026, 06:52 PM
बोतल फिर घूमी। इस बार वह सोनिया के सामने रुकी।
रामू ने धीरे से बोतल को देखा, फिर सोनिया की तरफ। उनकी आवाज़ में हल्की सी मुस्कान और पूरा अधिकार था—
“सोनिया… डेयर।”
सोनिया ने भौंहें उठाईं। “बोलो रामू भाई… क्या करना है?”
रामू ने रुही को अपनी गोद में और कसते हुए साफ कहा, “अपनी नाइटी उतार। अभी। सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह।”
सोनिया एक पल के लिए रुही की तरफ देखती हुई मुस्कुराई। फिर बिना किसी हिचकिचाहट के खड़ी हो गई। उसने दोनों हाथों से अपनी लाल सैटिन नाइटी के स्ट्रैप्स नीचे किए और धीरे-धीरे उसे शरीर से खिसका दिया। नाइटी उसके पैरों पर गिर गई।
अब वह सिर्फ गुलाबी ब्रा और छोटी काली पैंटी में खड़ी थी। उसके पूर्ण स्तन ब्रा में ठूसे हुए थे, कमर और जाँघें खुली हुईं। जामिल ने तुरंत उसका हाथ पकड़कर उसे वापस अपनी गोद में खींच लिया।
“शाबाश,” जामिल ने उसके कान में कहा।
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर आँखें मारीं। “देखा रुही? मैंने उतार दी। तू अभी भी नाइटी में है… लेकिन कब तक?”
रुही की निगाह सोनिया के शरीर पर चली गई और फिर झटके से हट गई। शर्म और एक अजीब सी उत्तेजना दोनों से उसका चेहरा गर्म हो रहा था। उसने रामू से और सटते हुए धीरे कहा, “रामू जी… अब मेरी बारी मत लाना प्लीज…”
रामू ने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “अभी नहीं। तेरी नाइटी अभी रहने दे। लेकिन देखती रह… खेल लंबा है।”
सोनिया अब जामिल की गोद में सिर्फ ब्रा-पैंटी में बैठी थी। जामिल का हाथ उसकी पीठ पर घूम रहा था। माहौल और खुल चुका था।
बोतल फिर से मध्य में रख दी गई।
अब अगला मौका किसी का भी हो सकता था… और रुही जानती थी कि उसकी नाइटी अभी बची हुई है, लेकिन कब तक—यह अब रामू के हाथ में था।
बोतल रुही के सामने रुकी।
सोनिया ने धीरे से पूछा, “बुलबुल… ट्रूथ ऑर डेयर?”
रुही की आवाज़ काँप रही थी। उसने रामू की आँखों में एक पल के लिए देखा, फिर नज़र झुका ली।
“डेयर…” उसने फुसफुसाया।
सोनिया की आवाज़ में हल्की सी क्रूर मिठास थी, “तो रामू भाई के लंड को… अंडरवियर के ऊपर से चूस। जब तक मैं न कहूँ, मुँह मत हटा।”
रुही ने सिर उठाया। आँखें पहले से ही नम थीं। “सोनिया… इतना मत करो… मैं… मैं सबके सामने नहीं कर सकती…”
रामू ने उसका हाथ पकड़ा। उनकी आवाज़ ऊँची नहीं थी, लेकिन उसमें एक भारी, अटल निर्णय था—
“तू कर सकती है। क्योंकि तू मेरी है। और मेरी औरत डेयर से भागती नहीं। घुटनों पर बैठ।”
रुही कुछ पल अचल बैठी रही। फिर धीरे-धीरे, जैसे कोई बहुत भारी फैसला ले रही हो, वह सोफे से उतरकर उनके सामने घुटनों के बल बैठ गई। सिर नीचे था। कंधे काँप रहे थे।
रामू ने उसके बालों को बहुत हल्के से सहलाया। “देख मुझे।”
रुही ने आँखें उठाईं। आँसू उसकी पलकों पर टिके थे।
“मुझे डर लग रहा है,” उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा। “शर्म भी आ रही है… बहुत।”
रामू ने उसका गाल थामा। “डर और शर्म दोनों मेरे हैं अब। तू बस कर जो मैं कह रहा हूँ।”
रुही ने आँखें बंद कर लीं। उसने आगे झुककर उनके अंडरवियर के तने हुए उभार पर अपने होंठ रख दिए। गरम। सख्त। कपड़े के ऊपर से भी उसकी मौजूदगी इतनी भारी थी कि रुही की साँस अटक गई। वह धीरे-धीरे चूसने लगी—काँपते हुए, सिसकते हुए।
सोनिया चुपचाप देख रही थी। उसकी आवाज़ में अब मज़ाक कम, और एक अजीब सी गंभीरता थी—
“देख जामिल… यह सिर्फ डेयर नहीं कर रही। यह खुद को सौंप रही है।”
जामिल ने धीरे से जवाब दिया, “हम्म… आँखों में वैसी ही हालत है जैसी कभी-कभी आपकी होती है।”
रुही चूसती रही। आँसू अब उसके गालों पर बह रहे थे। मन के अंदर एक आवाज़ बार-बार कह रही थी—
मैं गिर रही हूँ…
और मैं खुद गिरने दे रही हूँ…
रामू ने उसके बालों में उंगलियाँ फँसाईं। दबाव नहीं था, सिर्फ कब्ज़ा था।
“बोल,” उन्होंने धीरे कहा। “मुँह लगाए हुए बोल… तू कौन है?”
रुही के होंठ उनके उभार से सटे थे। आवाज़ लगभग टूट रही थी—
“आपकी… आपकी बहू… आपकी रंडी…”
रामू की साँस भारी हो गई। उन्होंने उसका सिर और पास खींच लिया।
“अच्छी लड़की,” उन्होंने फुसफुसाया। “अब तू समझ गई है।”
रुही ने जवाब में सिर्फ एक लंबी, काँपती सिसकारी दी… और चूसती रही।
शर्म अभी भी जला रही थी।
लेकिन समर्पण अब उससे कहीं भारी पड़ चुका था।
बोतल फिर घूमी। इस बार वह सोनिया के सामने रुकी।
रुही अभी भी रामू के सामने घुटनों पर ही थी। आँखें नम, होंठ थोड़े सूजे हुए। माहौल पहले से ही काफी भारी था।
जामिल ने मुस्कुराते हुए पूछा, “सोनिया… ट्रूथ ऑर डेयर?”
सोनिया ने रुही की हालत पर एक नज़र डाली, फिर धीरे से बोली, “डेयर।”
रामू ने इस बार डेयर दिया। उनकी आवाज़ में हल्की सी मर्दाना क्रूरता थी—
“जामिल की बालों वाली बगलों को चाट। दोनों। अच्छी तरह से। जब तक मैं न कहूँ, मुँह मत हटा।”
सोनिया की भौंहें हल्की सी उठीं। वह हैरान नहीं हुई, बल्कि एक अजीब सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। “रामू भाई… आप भी कम नहीं हो।”
फिर भी वह बिना मना किए जामिल के पास गई। जामिल ने अपना एक हाथ ऊपर उठाया। उसकी बगल के घने काले बाल साफ दिख रहे थे। मर्दाना पसीने की हल्की गंध भी आ रही थी।
सोनिया झुकी। उसने आँखें बंद किए बिना जामिल की बगल पर अपनी जीभ फेर दी। पहले हल्के से, फिर लंबी-लंबी जीभ चलाते हुए चाटने लगी। बाल उसकी जीभ से चिपक रहे थे। गंध तेज़ थी।
जामिल की साँस भारी हो गई। उसने सोनिया के बाल पकड़कर उसका मुँह और अंदर दबा दिया। “हाँ… ऐसे ही… अच्छी तरह चाट।”
सोनिया ने एक बगल अच्छी तरह चाटी, फिर जामिल ने दूसरा हाथ ऊपर किया। वह दूसरी बगल पर भी उसी श्रद्धा से जीभ फेरने लगी। कभी-कभी होंठों से चूस भी लेती थी।
रुही यह सब घुटनों पर बैठे हुए देख रही थी। उसके मन में एक अजीब सा द्वंद्व चल रहा था।
सोनिया… इतनी आसानी से…
जामिल की बगल चाट रही है… बाल और पसीने के साथ…
और वह शर्मा भी नहीं रही…
सोनिया ने चाटते हुए ही आँखें खोलकर रुही की तरफ देखा। मुँह अभी भी जामिल की बगल से सटा हुआ था। आवाज़ अस्पष्ट थी—
“देख… रुही… मैं भी गिरती हूँ… बस तू जितना शर्माती नहीं।”
रामू ने रुही के बाल सहलाते हुए धीरे कहा, “देख ले। हर औरत अपने मर्द की गंध चाटती है। तू भी चाट चुकी है मेरी… मूत की, पसीने की। फर्क सिर्फ इतना है कि तू अभी भी शर्माती है… और सोनिया नहीं।”
सोनिया ने दोनों बगलें चाट लीं। जब वह मुँह हटाती है तो उसके होंठ चमक रहे थे, और चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति थी।
“हो गया,” उसने साँस लेते हुए कहा। “रामू भाई… अब संतुष्ट?”
रामू ने सिर हिलाया। “हाँ। अच्छी थी।”
गेम जारी था। लेकिन अब कमरे में एक और परत खुल चुकी थी—शर्म की नहीं, बल्कि गंध, शरीर और बिना शर्त समर्पण की।
रुही अभी भी घुटनों पर थी… और सोच रही थी कि अगला डेयर उसका हुआ तो क्या होगा।
रामू ने धीरे से बोतल को देखा, फिर सोनिया की तरफ। उनकी आवाज़ में हल्की सी मुस्कान और पूरा अधिकार था—
“सोनिया… डेयर।”
सोनिया ने भौंहें उठाईं। “बोलो रामू भाई… क्या करना है?”
रामू ने रुही को अपनी गोद में और कसते हुए साफ कहा, “अपनी नाइटी उतार। अभी। सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह।”
सोनिया एक पल के लिए रुही की तरफ देखती हुई मुस्कुराई। फिर बिना किसी हिचकिचाहट के खड़ी हो गई। उसने दोनों हाथों से अपनी लाल सैटिन नाइटी के स्ट्रैप्स नीचे किए और धीरे-धीरे उसे शरीर से खिसका दिया। नाइटी उसके पैरों पर गिर गई।
अब वह सिर्फ गुलाबी ब्रा और छोटी काली पैंटी में खड़ी थी। उसके पूर्ण स्तन ब्रा में ठूसे हुए थे, कमर और जाँघें खुली हुईं। जामिल ने तुरंत उसका हाथ पकड़कर उसे वापस अपनी गोद में खींच लिया।
“शाबाश,” जामिल ने उसके कान में कहा।
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर आँखें मारीं। “देखा रुही? मैंने उतार दी। तू अभी भी नाइटी में है… लेकिन कब तक?”
रुही की निगाह सोनिया के शरीर पर चली गई और फिर झटके से हट गई। शर्म और एक अजीब सी उत्तेजना दोनों से उसका चेहरा गर्म हो रहा था। उसने रामू से और सटते हुए धीरे कहा, “रामू जी… अब मेरी बारी मत लाना प्लीज…”
रामू ने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “अभी नहीं। तेरी नाइटी अभी रहने दे। लेकिन देखती रह… खेल लंबा है।”
सोनिया अब जामिल की गोद में सिर्फ ब्रा-पैंटी में बैठी थी। जामिल का हाथ उसकी पीठ पर घूम रहा था। माहौल और खुल चुका था।
बोतल फिर से मध्य में रख दी गई।
अब अगला मौका किसी का भी हो सकता था… और रुही जानती थी कि उसकी नाइटी अभी बची हुई है, लेकिन कब तक—यह अब रामू के हाथ में था।
बोतल रुही के सामने रुकी।
सोनिया ने धीरे से पूछा, “बुलबुल… ट्रूथ ऑर डेयर?”
रुही की आवाज़ काँप रही थी। उसने रामू की आँखों में एक पल के लिए देखा, फिर नज़र झुका ली।
“डेयर…” उसने फुसफुसाया।
सोनिया की आवाज़ में हल्की सी क्रूर मिठास थी, “तो रामू भाई के लंड को… अंडरवियर के ऊपर से चूस। जब तक मैं न कहूँ, मुँह मत हटा।”
रुही ने सिर उठाया। आँखें पहले से ही नम थीं। “सोनिया… इतना मत करो… मैं… मैं सबके सामने नहीं कर सकती…”
रामू ने उसका हाथ पकड़ा। उनकी आवाज़ ऊँची नहीं थी, लेकिन उसमें एक भारी, अटल निर्णय था—
“तू कर सकती है। क्योंकि तू मेरी है। और मेरी औरत डेयर से भागती नहीं। घुटनों पर बैठ।”
रुही कुछ पल अचल बैठी रही। फिर धीरे-धीरे, जैसे कोई बहुत भारी फैसला ले रही हो, वह सोफे से उतरकर उनके सामने घुटनों के बल बैठ गई। सिर नीचे था। कंधे काँप रहे थे।
रामू ने उसके बालों को बहुत हल्के से सहलाया। “देख मुझे।”
रुही ने आँखें उठाईं। आँसू उसकी पलकों पर टिके थे।
“मुझे डर लग रहा है,” उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा। “शर्म भी आ रही है… बहुत।”
रामू ने उसका गाल थामा। “डर और शर्म दोनों मेरे हैं अब। तू बस कर जो मैं कह रहा हूँ।”
रुही ने आँखें बंद कर लीं। उसने आगे झुककर उनके अंडरवियर के तने हुए उभार पर अपने होंठ रख दिए। गरम। सख्त। कपड़े के ऊपर से भी उसकी मौजूदगी इतनी भारी थी कि रुही की साँस अटक गई। वह धीरे-धीरे चूसने लगी—काँपते हुए, सिसकते हुए।
सोनिया चुपचाप देख रही थी। उसकी आवाज़ में अब मज़ाक कम, और एक अजीब सी गंभीरता थी—
“देख जामिल… यह सिर्फ डेयर नहीं कर रही। यह खुद को सौंप रही है।”
जामिल ने धीरे से जवाब दिया, “हम्म… आँखों में वैसी ही हालत है जैसी कभी-कभी आपकी होती है।”
रुही चूसती रही। आँसू अब उसके गालों पर बह रहे थे। मन के अंदर एक आवाज़ बार-बार कह रही थी—
मैं गिर रही हूँ…
और मैं खुद गिरने दे रही हूँ…
रामू ने उसके बालों में उंगलियाँ फँसाईं। दबाव नहीं था, सिर्फ कब्ज़ा था।
“बोल,” उन्होंने धीरे कहा। “मुँह लगाए हुए बोल… तू कौन है?”
रुही के होंठ उनके उभार से सटे थे। आवाज़ लगभग टूट रही थी—
“आपकी… आपकी बहू… आपकी रंडी…”
रामू की साँस भारी हो गई। उन्होंने उसका सिर और पास खींच लिया।
“अच्छी लड़की,” उन्होंने फुसफुसाया। “अब तू समझ गई है।”
रुही ने जवाब में सिर्फ एक लंबी, काँपती सिसकारी दी… और चूसती रही।
शर्म अभी भी जला रही थी।
लेकिन समर्पण अब उससे कहीं भारी पड़ चुका था।
बोतल फिर घूमी। इस बार वह सोनिया के सामने रुकी।
रुही अभी भी रामू के सामने घुटनों पर ही थी। आँखें नम, होंठ थोड़े सूजे हुए। माहौल पहले से ही काफी भारी था।
जामिल ने मुस्कुराते हुए पूछा, “सोनिया… ट्रूथ ऑर डेयर?”
सोनिया ने रुही की हालत पर एक नज़र डाली, फिर धीरे से बोली, “डेयर।”
रामू ने इस बार डेयर दिया। उनकी आवाज़ में हल्की सी मर्दाना क्रूरता थी—
“जामिल की बालों वाली बगलों को चाट। दोनों। अच्छी तरह से। जब तक मैं न कहूँ, मुँह मत हटा।”
सोनिया की भौंहें हल्की सी उठीं। वह हैरान नहीं हुई, बल्कि एक अजीब सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। “रामू भाई… आप भी कम नहीं हो।”
फिर भी वह बिना मना किए जामिल के पास गई। जामिल ने अपना एक हाथ ऊपर उठाया। उसकी बगल के घने काले बाल साफ दिख रहे थे। मर्दाना पसीने की हल्की गंध भी आ रही थी।
सोनिया झुकी। उसने आँखें बंद किए बिना जामिल की बगल पर अपनी जीभ फेर दी। पहले हल्के से, फिर लंबी-लंबी जीभ चलाते हुए चाटने लगी। बाल उसकी जीभ से चिपक रहे थे। गंध तेज़ थी।
जामिल की साँस भारी हो गई। उसने सोनिया के बाल पकड़कर उसका मुँह और अंदर दबा दिया। “हाँ… ऐसे ही… अच्छी तरह चाट।”
सोनिया ने एक बगल अच्छी तरह चाटी, फिर जामिल ने दूसरा हाथ ऊपर किया। वह दूसरी बगल पर भी उसी श्रद्धा से जीभ फेरने लगी। कभी-कभी होंठों से चूस भी लेती थी।
रुही यह सब घुटनों पर बैठे हुए देख रही थी। उसके मन में एक अजीब सा द्वंद्व चल रहा था।
सोनिया… इतनी आसानी से…
जामिल की बगल चाट रही है… बाल और पसीने के साथ…
और वह शर्मा भी नहीं रही…
सोनिया ने चाटते हुए ही आँखें खोलकर रुही की तरफ देखा। मुँह अभी भी जामिल की बगल से सटा हुआ था। आवाज़ अस्पष्ट थी—
“देख… रुही… मैं भी गिरती हूँ… बस तू जितना शर्माती नहीं।”
रामू ने रुही के बाल सहलाते हुए धीरे कहा, “देख ले। हर औरत अपने मर्द की गंध चाटती है। तू भी चाट चुकी है मेरी… मूत की, पसीने की। फर्क सिर्फ इतना है कि तू अभी भी शर्माती है… और सोनिया नहीं।”
सोनिया ने दोनों बगलें चाट लीं। जब वह मुँह हटाती है तो उसके होंठ चमक रहे थे, और चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति थी।
“हो गया,” उसने साँस लेते हुए कहा। “रामू भाई… अब संतुष्ट?”
रामू ने सिर हिलाया। “हाँ। अच्छी थी।”
गेम जारी था। लेकिन अब कमरे में एक और परत खुल चुकी थी—शर्म की नहीं, बल्कि गंध, शरीर और बिना शर्त समर्पण की।
रुही अभी भी घुटनों पर थी… और सोच रही थी कि अगला डेयर उसका हुआ तो क्या होगा।


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