24-08-2026, 06:28 PM
रामू जी रुही को अपने कंधे पर उठाए हुए बाथरूम से बाहर निकले।
रुही का सिर उनकी पीठ की तरफ लटक रहा था, बाल बिखरे हुए, चेहरा अभी भी शर्म से गरम। उनके हर कदम के साथ उसका शरीर हल्के से हिल रहा था। पेशाब और उनके लंड का स्वाद अभी भी उसके मुँह में बचा हुआ था।
लिविंग रूम में पहुँचते ही सोनिया और जामिल दोनों की निगाहें उन पर पड़ गईं।
सोनिया पहले तो हैरान हुई, फिर धीरे-धीरे उसकी मुस्कान फैल गई। उसने जामिल की बाँह पर हाथ मारते हुए कहा—
“अरे देखो तो… रामू भाई पूरी तरह से अपनी बहू को कंधे पर लाद के ला रहे हैं। बेचारी की क्या हालत की है अंदर!”
जामिल जोर से हँसा। “भैया, बाथरूम में इतना समय लगा दिया… लग रहा है खूब सेवा ले ली अपनी बहू से।”
रामू ने रुही को धीरे से सोफे पर उतारा। रुही तुरंत उनके सीने से चिपक गई, चेहरा छुपाने की कोशिश करती हुई। नाइटी थोड़ी सी बिखरी हुई थी, पैंटी ठीक से चढ़ी हुई, लेकिन उसकी हालत साफ बता रही थी कि अंदर बहुत कुछ हो चुका है।
रामू ने उसके बाल पीछे करते हुए कहा, “हाँ… खूब सेवा ली। मूत भी करवाया, अपना भी करवाया… और चाट-चाट के साफ भी करवाया।”
सोनिया की आँखें चमक उठीं। वह आगे झुककर रुही का चेहरा देखने की कोशिश करने लगी।
“रुही… सच में? तूने रामू भाई का मूत पी लिया?” उसने हैरानी और मज़े दोनों के स्वर में पूछा। “बेचारी… कितनी गिर गई है तू। और फिर भी इनसे लिपटी हुई है।”
रुही ने आँखें और बंद कर लीं। आवाज़ बहुत कमजोर निकली, “मत पूछो सोनिया… बहुत शर्म आ रही है…”
जामिल ने सोनिया को अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “मैडम, अब तो ये पूरी तरह रामू भैया की हो गई। देखो कैसे दुबकी हुई है। सनी की बीवी कहीं खो गई लगती है।”
रामू ने रुही को अपनी गोद में खींच लिया। उसका एक हाथ उसकी कमर पर था, दूसरा उसके गाल पर।
“अब ये कामत परिवार की बहू है,” उन्होंने साफ कहा। “आज रात और भी बहुत कुछ बाकी है। दो रात पूरी हैं… अभी तो शुरुआत है।”
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर धीरे से कहा, “रुही… सिर उठा। इतना मत शरमा। तूने जो किया है… वो अब छुपाने लायक नहीं रहा। हम सब जानते हैं।”
रुही ने धीरे से आँखें खोलीं। आँसू अभी भी कोनों में थे। उसने रामू की आँखों में देखा, फिर सोनिया की तरफ। मुँह खोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। बस उनके सीने में और गहराई से दुबक गई।
कमरे में एक भारी, कामुक सी चुप्पी छा गई।
रामू के हाथ उसकी कमर पर घूम रहे थे। सोनिया जामिल से सट चुकी थी। और रुही… शर्म, रोमांच और समर्पण के मिश्रण में डूबी हुई… बस अपने मर्द की बाँहों में थी।
अब आगे की रात और भी लंबी होने वाली थी।
जामिल अब सिर्फ अंडरवियर में था।
काली टाइट अंडरवियर में उसका शरीर और भी मज़बूत लग रहा था। और सबसे ज्यादा नज़र उसके उभार पर जाकर ठहर गई। अंडरवियर के अंदर उसका लंड इतना तना हुआ और भारी था कि कपड़े के ऊपर से ही उसकी मोटाई और लंबाई साफ अंदाज़ा हो रही थी। नसें तक हल्की-हल्की उभर रही थीं।
रुही की निगाह अनजाने में वहीं अटक गई। एक पल के लिए तो वह अपनी आँखें हटाना भूल ही गई।
यह… कितना बड़ा है…
रामू जी से भी मोटा और लंबा लग रहा है। इतना सख्त…
उसके मन में एक अजीब सी लहर दौड़ी। शर्म भी हुई कि वह किसी और मर्द के औज़ार को घूर रही है, लेकिन उत्सुकता और एक गुप्त सी उत्तेजना ने उसे बाँध लिया।
सोनिया की मौज है…
इतना विशाल लंड उसकी चूत को बाजता होगा।
कैसे लेती होगी वह इसे अंदर? कितनी चीखती होगी जब जामिल पूरा धकेलता होगा?
रुही के मन में तस्वीरें बनने लगीं—सोनिया की टाँगें जामिल की कमर पर लिपटी हुईं, उसकी कराहें, जामिल का भारी शरीर उसके ऊपर उठता-गिरता… वह विशाल लंड बार-बार उसकी चूत को चीरता हुआ।
इतने में सोनिया की आवाज़ आई।
“क्या देख रही है रुही?” सोनिया ने शरारती मुस्कान के साथ पूछा। उसने जानबूझकर जामिल के करीब सरककर अपना हाथ उसके उभार पर रख दिया। “मेरे वाले को घूर रही है?”
रुही झटके से नज़रें हटा लीं। गाल तुरंत लाल हो गए। “नहीं… मैं… कुछ नहीं…”
जामिल हँस पड़ा। उसकी हँसी भारी थी। “देखने में कोई बुराई नहीं भाभी। मैडम भी अक्सर बताती हैं कि मेरा थोड़ा बड़ा है। है न सोनिया?”
सोनिया ने उसके अंडरवियर के ऊपर से ही हल्के से दबाते हुए कहा, “बड़ा नहीं… बहुत बड़ा। कभी-कभी तो लगता है कि पूरा अंदर ले पाऊँगी भी या नहीं। लेकिन ले लेती हूँ… चीख-चीख कर।”
रुही की साँसें तेज़ हो गईं। वह रामू जी से और कसकर चिपक गई, लेकिन उसकी नज़र फिर से एक पल के लिए जामिल के उभार पर चली गई।
रामू ने सब देख लिया था। उन्होंने रुही के कान में धीरे से कहा, “देख रही है न? सोनिया के मर्द का भी कमाल का है। लेकिन याद रख… तू सिर्फ मेरे लंड की है। समझी?”
रुही ने सिर हिलाया। आवाज़ बहुत धीमी थी, “हाँ… रामू जी… सिर्फ आपके…”
लेकिन मन के अंदर एक छोटी सी आवाज़ अभी भी चल रही थी—
सोनिया कितनी चीखती होगी…
जब इतना मोटा लंड उसकी चूत में पूरा उतरता होगा…
क्या वह भी कभी रोती होगी दर्द से… या सिर्फ मज़े में कराहती होगी?
सोनिया ने रुही की हालत भांपते हुए कहा, “रुही, तू इतनी शर्मा क्यों रही है? तू भी तो अभी-अभी रामू भाई का मूत पीकर आई है। अब किसी और के लंड को देखने में क्या शर्म?”
जामिल ने अपना हाथ सोनिया की कमर पर रखते हुए जोड़ा, “सही कह रही हैं मैडम। आज रात सब खुले हैं। छुपाने की कोई बात नहीं।”
रुही ने आँखें बंद कर लीं। शर्म और एक अजीब सी उत्तेजना दोनों से उसका शरीर गर्म हो रहा था। वह रामू की छाती में मुँह छुपाए बैठी रही… लेकिन मन में जामिल के विशाल उभार और सोनिया की चीखों की कल्पना अभी भी घूम रही थी।
रुही अभी भी रामू जी की छाती से चिपकी हुई थी। आँखें बंद किए हुए, लेकिन मन शांत नहीं था। जामिल के अंडरवियर के उस भारी उभार की तस्वीर बार-बार आँखों के सामने आ रही थी।
सोनिया ने जामिल के और करीब सरकते हुए रुही की तरफ देखा। उसकी आवाज़ में हल्की सी चिढ़ाने वाली मिठास थी—
“रुही… तू सच में सोच रही है ना? कि मैं इस लंड को कैसे लेती हूँ?” उसने जामिल के उभार पर हल्के से थपकी दी। “बोल, सोच रही है?”
रुही ने सिर हिलाया, लेकिन जवाब नहीं दिया। शर्म से उसका गला सूख रहा था।
जामिल ने सोनिया को अपनी गोद में खींच लिया। सोनिया की एक जाँघ उसके ऊपर चढ़ गई। उसने रुही से कहा, “भाभी, मैडम जब इसे लेती हैं ना… तो पहले बहुत चीखती हैं। धीरे-धीरे पूरा उतरता है… फिर वो खुद कमर हिलाने लगती हैं। कभी-कभी तो आँसू भी आ जाते हैं… लेकिन छोड़ती नहीं।”
सोनिया हँसी। “सच है। कभी-कभी लगता है फट जाएगी… लेकिन मज़ा भी उतना ही आता है। रुही, तू बता… रामू भाई का जब पहली बार गया था तो तू कितना रोई थी?”
रामू ने रुही के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए जवाब दिया, “बहुत रोई थी। चीखी भी थी। लेकिन अब देखो… कितनी अच्छी बहू बन गई है। मेरे मूत तक पी लेती है।”
रुही की साँस अटक गई। उसने रामू के कान में धीरे से कहा, “इतना मत बताओ न… बहुत शर्म आ रही है…”
रामू ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। “शर्म रख। आज रात शर्म की कोई जगह नहीं। तू मेरी है… और ये दोनों भी जानते हैं।”
इतने में जामिल ने सोनिया की नाइटी का एक स्ट्रैप गिरा दिया। सोनिया ने रोकने की बजाय उसकी तरफ और झुक गई। जामिल का हाथ उसकी छाती पर था। दोनों की साँसें तेज़ हो रही थीं।
सोनिया ने आँखें आधी बंद करते हुए रुही से कहा, “देख… अब जामिल जी मुझे छू रहे हैं। तू भी रामू भाई से और चिपक जा। आज रात लंबी है… और हम सब यहीं हैं।”
रुही ने अनजाने में फिर से जामिल के उभार की तरफ एक झलक ली। इतना मोटा… इतना तना हुआ। मन में फिर वही ख्याल आया—
सोनिया की चूत इसे कैसे समाती होगी…
कितनी बार चीखती होगी रात में…
रामू ने उसका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “मेरी तरफ देख। सिर्फ मेरी तरफ। तू सोनिया की चूत की फिक्र मत कर। तेरी चूत की फिक्र मैं करूँगा।”
फिर उन्होंने रुही को अपनी गोद में और कस लिया। उनका तना हुआ लंड उसकी जाँघ से सट रहा था। रुही का शरीर काँप उठा।
कमरे का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। बातें कम हो रही थीं, साँसें तेज़ हो रही थीं। सोनिया जामिल के ऊपर लगभग बैठ चुकी थी। और रुही… शर्म और उत्तेजना के बीच फँसी हुई… बस अपने मर्द की बाँहों में थी।
रात अब और गहरी होने वाली थी।
रुही का सिर उनकी पीठ की तरफ लटक रहा था, बाल बिखरे हुए, चेहरा अभी भी शर्म से गरम। उनके हर कदम के साथ उसका शरीर हल्के से हिल रहा था। पेशाब और उनके लंड का स्वाद अभी भी उसके मुँह में बचा हुआ था।
लिविंग रूम में पहुँचते ही सोनिया और जामिल दोनों की निगाहें उन पर पड़ गईं।
सोनिया पहले तो हैरान हुई, फिर धीरे-धीरे उसकी मुस्कान फैल गई। उसने जामिल की बाँह पर हाथ मारते हुए कहा—
“अरे देखो तो… रामू भाई पूरी तरह से अपनी बहू को कंधे पर लाद के ला रहे हैं। बेचारी की क्या हालत की है अंदर!”
जामिल जोर से हँसा। “भैया, बाथरूम में इतना समय लगा दिया… लग रहा है खूब सेवा ले ली अपनी बहू से।”
रामू ने रुही को धीरे से सोफे पर उतारा। रुही तुरंत उनके सीने से चिपक गई, चेहरा छुपाने की कोशिश करती हुई। नाइटी थोड़ी सी बिखरी हुई थी, पैंटी ठीक से चढ़ी हुई, लेकिन उसकी हालत साफ बता रही थी कि अंदर बहुत कुछ हो चुका है।
रामू ने उसके बाल पीछे करते हुए कहा, “हाँ… खूब सेवा ली। मूत भी करवाया, अपना भी करवाया… और चाट-चाट के साफ भी करवाया।”
सोनिया की आँखें चमक उठीं। वह आगे झुककर रुही का चेहरा देखने की कोशिश करने लगी।
“रुही… सच में? तूने रामू भाई का मूत पी लिया?” उसने हैरानी और मज़े दोनों के स्वर में पूछा। “बेचारी… कितनी गिर गई है तू। और फिर भी इनसे लिपटी हुई है।”
रुही ने आँखें और बंद कर लीं। आवाज़ बहुत कमजोर निकली, “मत पूछो सोनिया… बहुत शर्म आ रही है…”
जामिल ने सोनिया को अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “मैडम, अब तो ये पूरी तरह रामू भैया की हो गई। देखो कैसे दुबकी हुई है। सनी की बीवी कहीं खो गई लगती है।”
रामू ने रुही को अपनी गोद में खींच लिया। उसका एक हाथ उसकी कमर पर था, दूसरा उसके गाल पर।
“अब ये कामत परिवार की बहू है,” उन्होंने साफ कहा। “आज रात और भी बहुत कुछ बाकी है। दो रात पूरी हैं… अभी तो शुरुआत है।”
सोनिया ने रुही की तरफ देखकर धीरे से कहा, “रुही… सिर उठा। इतना मत शरमा। तूने जो किया है… वो अब छुपाने लायक नहीं रहा। हम सब जानते हैं।”
रुही ने धीरे से आँखें खोलीं। आँसू अभी भी कोनों में थे। उसने रामू की आँखों में देखा, फिर सोनिया की तरफ। मुँह खोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। बस उनके सीने में और गहराई से दुबक गई।
कमरे में एक भारी, कामुक सी चुप्पी छा गई।
रामू के हाथ उसकी कमर पर घूम रहे थे। सोनिया जामिल से सट चुकी थी। और रुही… शर्म, रोमांच और समर्पण के मिश्रण में डूबी हुई… बस अपने मर्द की बाँहों में थी।
अब आगे की रात और भी लंबी होने वाली थी।
जामिल अब सिर्फ अंडरवियर में था।
काली टाइट अंडरवियर में उसका शरीर और भी मज़बूत लग रहा था। और सबसे ज्यादा नज़र उसके उभार पर जाकर ठहर गई। अंडरवियर के अंदर उसका लंड इतना तना हुआ और भारी था कि कपड़े के ऊपर से ही उसकी मोटाई और लंबाई साफ अंदाज़ा हो रही थी। नसें तक हल्की-हल्की उभर रही थीं।
रुही की निगाह अनजाने में वहीं अटक गई। एक पल के लिए तो वह अपनी आँखें हटाना भूल ही गई।
यह… कितना बड़ा है…
रामू जी से भी मोटा और लंबा लग रहा है। इतना सख्त…
उसके मन में एक अजीब सी लहर दौड़ी। शर्म भी हुई कि वह किसी और मर्द के औज़ार को घूर रही है, लेकिन उत्सुकता और एक गुप्त सी उत्तेजना ने उसे बाँध लिया।
सोनिया की मौज है…
इतना विशाल लंड उसकी चूत को बाजता होगा।
कैसे लेती होगी वह इसे अंदर? कितनी चीखती होगी जब जामिल पूरा धकेलता होगा?
रुही के मन में तस्वीरें बनने लगीं—सोनिया की टाँगें जामिल की कमर पर लिपटी हुईं, उसकी कराहें, जामिल का भारी शरीर उसके ऊपर उठता-गिरता… वह विशाल लंड बार-बार उसकी चूत को चीरता हुआ।
इतने में सोनिया की आवाज़ आई।
“क्या देख रही है रुही?” सोनिया ने शरारती मुस्कान के साथ पूछा। उसने जानबूझकर जामिल के करीब सरककर अपना हाथ उसके उभार पर रख दिया। “मेरे वाले को घूर रही है?”
रुही झटके से नज़रें हटा लीं। गाल तुरंत लाल हो गए। “नहीं… मैं… कुछ नहीं…”
जामिल हँस पड़ा। उसकी हँसी भारी थी। “देखने में कोई बुराई नहीं भाभी। मैडम भी अक्सर बताती हैं कि मेरा थोड़ा बड़ा है। है न सोनिया?”
सोनिया ने उसके अंडरवियर के ऊपर से ही हल्के से दबाते हुए कहा, “बड़ा नहीं… बहुत बड़ा। कभी-कभी तो लगता है कि पूरा अंदर ले पाऊँगी भी या नहीं। लेकिन ले लेती हूँ… चीख-चीख कर।”
रुही की साँसें तेज़ हो गईं। वह रामू जी से और कसकर चिपक गई, लेकिन उसकी नज़र फिर से एक पल के लिए जामिल के उभार पर चली गई।
रामू ने सब देख लिया था। उन्होंने रुही के कान में धीरे से कहा, “देख रही है न? सोनिया के मर्द का भी कमाल का है। लेकिन याद रख… तू सिर्फ मेरे लंड की है। समझी?”
रुही ने सिर हिलाया। आवाज़ बहुत धीमी थी, “हाँ… रामू जी… सिर्फ आपके…”
लेकिन मन के अंदर एक छोटी सी आवाज़ अभी भी चल रही थी—
सोनिया कितनी चीखती होगी…
जब इतना मोटा लंड उसकी चूत में पूरा उतरता होगा…
क्या वह भी कभी रोती होगी दर्द से… या सिर्फ मज़े में कराहती होगी?
सोनिया ने रुही की हालत भांपते हुए कहा, “रुही, तू इतनी शर्मा क्यों रही है? तू भी तो अभी-अभी रामू भाई का मूत पीकर आई है। अब किसी और के लंड को देखने में क्या शर्म?”
जामिल ने अपना हाथ सोनिया की कमर पर रखते हुए जोड़ा, “सही कह रही हैं मैडम। आज रात सब खुले हैं। छुपाने की कोई बात नहीं।”
रुही ने आँखें बंद कर लीं। शर्म और एक अजीब सी उत्तेजना दोनों से उसका शरीर गर्म हो रहा था। वह रामू की छाती में मुँह छुपाए बैठी रही… लेकिन मन में जामिल के विशाल उभार और सोनिया की चीखों की कल्पना अभी भी घूम रही थी।
रुही अभी भी रामू जी की छाती से चिपकी हुई थी। आँखें बंद किए हुए, लेकिन मन शांत नहीं था। जामिल के अंडरवियर के उस भारी उभार की तस्वीर बार-बार आँखों के सामने आ रही थी।
सोनिया ने जामिल के और करीब सरकते हुए रुही की तरफ देखा। उसकी आवाज़ में हल्की सी चिढ़ाने वाली मिठास थी—
“रुही… तू सच में सोच रही है ना? कि मैं इस लंड को कैसे लेती हूँ?” उसने जामिल के उभार पर हल्के से थपकी दी। “बोल, सोच रही है?”
रुही ने सिर हिलाया, लेकिन जवाब नहीं दिया। शर्म से उसका गला सूख रहा था।
जामिल ने सोनिया को अपनी गोद में खींच लिया। सोनिया की एक जाँघ उसके ऊपर चढ़ गई। उसने रुही से कहा, “भाभी, मैडम जब इसे लेती हैं ना… तो पहले बहुत चीखती हैं। धीरे-धीरे पूरा उतरता है… फिर वो खुद कमर हिलाने लगती हैं। कभी-कभी तो आँसू भी आ जाते हैं… लेकिन छोड़ती नहीं।”
सोनिया हँसी। “सच है। कभी-कभी लगता है फट जाएगी… लेकिन मज़ा भी उतना ही आता है। रुही, तू बता… रामू भाई का जब पहली बार गया था तो तू कितना रोई थी?”
रामू ने रुही के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए जवाब दिया, “बहुत रोई थी। चीखी भी थी। लेकिन अब देखो… कितनी अच्छी बहू बन गई है। मेरे मूत तक पी लेती है।”
रुही की साँस अटक गई। उसने रामू के कान में धीरे से कहा, “इतना मत बताओ न… बहुत शर्म आ रही है…”
रामू ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। “शर्म रख। आज रात शर्म की कोई जगह नहीं। तू मेरी है… और ये दोनों भी जानते हैं।”
इतने में जामिल ने सोनिया की नाइटी का एक स्ट्रैप गिरा दिया। सोनिया ने रोकने की बजाय उसकी तरफ और झुक गई। जामिल का हाथ उसकी छाती पर था। दोनों की साँसें तेज़ हो रही थीं।
सोनिया ने आँखें आधी बंद करते हुए रुही से कहा, “देख… अब जामिल जी मुझे छू रहे हैं। तू भी रामू भाई से और चिपक जा। आज रात लंबी है… और हम सब यहीं हैं।”
रुही ने अनजाने में फिर से जामिल के उभार की तरफ एक झलक ली। इतना मोटा… इतना तना हुआ। मन में फिर वही ख्याल आया—
सोनिया की चूत इसे कैसे समाती होगी…
कितनी बार चीखती होगी रात में…
रामू ने उसका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “मेरी तरफ देख। सिर्फ मेरी तरफ। तू सोनिया की चूत की फिक्र मत कर। तेरी चूत की फिक्र मैं करूँगा।”
फिर उन्होंने रुही को अपनी गोद में और कस लिया। उनका तना हुआ लंड उसकी जाँघ से सट रहा था। रुही का शरीर काँप उठा।
कमरे का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। बातें कम हो रही थीं, साँसें तेज़ हो रही थीं। सोनिया जामिल के ऊपर लगभग बैठ चुकी थी। और रुही… शर्म और उत्तेजना के बीच फँसी हुई… बस अपने मर्द की बाँहों में थी।
रात अब और गहरी होने वाली थी।


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