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अंकल मेरी मम्मी के शरीर के साथ खेल कर मेरी मम्मी की प्यास बढ़ाने लगते हैं। अंकल के हाथ कभी मेरी मम्मी की चूत पर तो कभी मेरी मम्मी के बूब्स को दबाने लगते हैं। मेरी मम्मी भी राह रह कर अंकल को मना तो करती है, पर अंकल का पूरा साथ भी देती है।
अंकल अब मेरी मम्मी के पास बैठकर मेरी मम्मी के बूब्स के ऊपर से हाथ फेरते हुए नीचे की ओर लाने लगते हैं।
मेरी मम्मी बेहोश होकर बिस्तर पर आहें भरने लगती हैं। अंकल के छूने का अहसास मेरी मम्मी को पागल बना रहा है। ऐसी फीलिंग मेरी मम्मी को पहले भी अंकल ने करवाई थी, पर आज कुछ ज्यादा हो रही है।
अंकल अपना हाथ मेरी मम्मी के पेट पर फेरते हुए मेरी मम्मी के पेटीकोट के नादे पर बार-बार फेरते हैं, जिससे मेरी मम्मी का शरीर कांप उठता है। मेरी मम्मी जानती हैं कि अंकल क्या करने वाले हैं। मेरी मम्मी के बोलती हैं, “अब रुक जाओ योगेश जी, बर्दाशत नहीं हो रहा है।”
अंकल : क्या बर्दाशत नहीं हो रहा है मेरी बुलबुल वर्षा?
मम्मी : मम्मी कोई जवाब नहीं देती, बस वो सिवाय मून करने के और कुछ नहीं कर पाती।
अंकल : बोलो वर्षा, कुछ तो बोलो।
मम्मी : मम्मी धीरे से बोलती हैं, “प्ल्ज अब बस करो।”
अंकल : वर्षा, क्या सच में आप चाहती हो कि मैं आपको चोद दू?
मम्मी : हां योगेश जी। बहुत हो गया ये सब।
अंकल : बहुत कहा वर्षा? अभी तो अपने मुझे अपनी चूत का रस भी नहीं पिलाया है।
मम्मी : पिला तो दिया था रात को, अब और बर्दाशत नहीं हो रहा है अब मुझे।
अंकल : अब मुझे क्या वर्षा? मैं समझा नहीं।
मम्मी : प्लीज योगेश जी।
अंकल : बोलो वर्षा।
मम्मी : प्लीज मुझे छोड़ दो, नहीं तो मैं मर जाऊंगी।
अंकल : वर्षा, छोड़ दू या चोद दू?
मम्मी : चोद दो।
अंकल : क्या?
मम्मी : मेरी चूत।
अंकल : किससे?
मम्मी : प्ल्ज।
अंकल : बोलना पड़ेगा वर्षा।
मम्मी : आपके लंड से।
अंकल : हां चोदूंगा, लेकिन पहले मुझे अपनी चूत का रस पिलाओ।
मम्मी : ऑयलो, लेकिन जल्दी करो, अब मुझसे बर्दाशत नहीं हो रहा है।
अंकल : थोड़ा वेट करो वर्षा, पहले मुझे मेरा काम करने दो।
मम्मी : अब कौन सा काम?
अंकल : पहले तुम्हें नंगी करूंगा।
अंकल : चुप रहो, मैं कर रहा हूं। अब चुप रहो।
ये कहते हुए अंकल मेरी मम्मी का पेटीकोट थोड़ा नीचे सरकाते हैं और मेरी मम्मी की चूत के पास अपनी जीभ से चाटते हुए ऊपर को बढ़ने लगते हैं।
मेरी मम्मी की मून करने की आवाज अब काफी तेज हो चुकी है। मम्मी ने ब्लैक ब्लाउज पहना था और ब्लैक पेटीकोट।
मम्मी : प्ल्ज अब बस करो ना।
अंकल : वर्षा मेरी जान, अभी तो तेरी चूत में अपनी जीभ उतार कर तेरी चूत का रस पीऊंगा, फिर तेरी चूत चुदाई करूंगा और तेरे बूब्स नीचोड़ूंगा। वर्षा, मैं बहुत लकी हूं जो मुझे तेरे जैसी गरम माल मिली। तू मुझसे 15 साल छोटी है, मैं 48 का, तू 33 की तेरी जैसी जवान औरत को पकड़ मैं बहुत लकी हूं। और एक वो नमर्द है जो तेरे साथ पिछले 20 साल से है, लेकिन तुझे देखकर भी उसका लंड खड़ा नहीं होता। तेरे जैसी गरम माल उस नमर्द को भगवान ने इसलिए दिया है कि तुम हमारे लंड की आग के साथ अपनी प्यास को शांत करे। वो सिर्फ तेरा नाम का पति है। असली पति का फर्ज तो मैं निभा रहा हूं।
और फिर अंकल खड़े होते हैं और अपने सारे कपड़े उतारकर दूर फेंक देते हैं। मेरी मम्मी अंकल के खड़े लंड को ध्यान से देखती रहती हैं, फिर अंकल की तरफ मुस्कुराते हुए स्मिल देती हैं और फिर शर्माते हुए अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा लेती हैं।
अंकल : हाथों से चेहरा क्यों छुपा रही है? क्या लंड पहली बार देख रही है जो तुझे शर्म आ रही है? क्या पिछले 6 महीनों से जब मेरा लंड तू अपनी चूत में लेकर मेरे लंड पर उछालती है तब तुझे शर्म नहीं आती?
मम्मी : ये कैसे बात कर रहे हो योगेश जी, आप मुझसे।
अंकल : कुछ गलत नहीं कहा है जान।
ये कहते हुए अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगते हैं और सारे हुक खोलने के बाद मेरी मम्मी का ब्लाउज उतारने लगते हैं। ब्लाउज नहीं उतर पाता क्योंकि ब्लाउज मेरी मम्मी के नीचे दबा था। अंकल मेरी मम्मी को उठाने का इशारा करते हैं तो मेरी मम्मी उठकर बैठ जाती हैं। फिर अंकल ब्लाउज को उतारने लगते हैं तो मेरी मम्मी भी अंकल की मदद के लिए अपने हाथ पीछे ले जाती हैं और अंकल आसानी से ब्लाउज को उतारकर दूर फेंक देते हैं।
मम्मी : अपने क्यों फेंका?
अंकल : कुछ नहीं बोले। और फिर मम्मी को वापस मेरी मम्मी के बूब्स पर हाथ रखकर पीछे की ओर दक्का देते हैं जिससे मेरी मम्मी वापस लेट जाती हैं। लेकिन अंकल ने अभी भी मेरी मम्मी की ब्रा नहीं उतारी थी। फिर अंकल मेरी मम्मी के लेटते ही मम्मी के नीचे की ओर आते हैं और मेरी मम्मी की कमर पर पेटीकोट के नादे को पकड़ते हैं और नादे को खींचते हैं जिससे नादा खुल जाता है और पेटीकोट को उतारने लगते हैं। लेकिन इस बार भी ब्लाउज की तरह पेटीकोट उतारना संभव नहीं था क्योंकि पेटीकोट मेरी मम्मी के गांड के नीचे दबा था। तो अंकल ने मेरी मम्मी की तरफ देखा तो मेरी मम्मी समझ गई कि अंकल उनसे अपनी गांड ऊपर उठाने के लिए बोलना चाहते हैं। तो मम्मी भी अंकल की तरफ सिल करती हैं और “हां” मैं गाड़न हिलाकर अपनी गांड को ऊपर उठाती हैं लेटे हुए। फिर अंकल मेरी मम्मी का पेटीकोट को नीचे की ओर खींचने लगते हैं और अंकल मेरी मम्मी के पेटीकोट को खींचते हुए मेरी मम्मी के घुटनों तक लाते हैं और मम्मी को अपनी गांड नीचे टिलाने का इशारा करते हैं तो मेरी मम्मी अपनी गांड नीचे टिका लेती हैं। फिर अंकल मेरी मम्मी के दोनों टांगों को ऊपर उठाते हैं और फिर मेरी मम्मी के ब्लैक पेटीकोट को निकाल देते हैं। मेरी मम्मी की टांग से अब मेरी मम्मी सिर्फ ब्रा पैंटी में अंकल के सामने चुदाने के लिए बिस्तर पर लेटी हैं। मेरी मम्मी ब्रा पैंटी में स्वर्ग की अप्सरा लग रही हैं, लेकिन मेरी मम्मी के शरीर से ब्रा पैंटी भी बहुत जल्द उतर जाएंगी। ये उतारने के बाद ही मेरी मम्मी की जवानी की प्यास अंकल अपने खड़े लंड से बुझाएंगे और मेरी मम्मी के मखमली शांगमरमर मुलायम शरीर को मसलेंगे अपने कठोर हाथों से।
और फिर अंकल मेरी मम्मी को देखते रहते हैं तो मेरी मम्मी भी अंकल को मुस्कुराते हुए देखती हैं, फिर अपनी पैंटी की तरफ उंगली करते हैं।
अंकल : क्या इसे भी उतारू?
मम्मी : हां प्ल्ज इसे भी उतार दो और मेरी आग बुझा दो प्लीज योगेश जी।
तो फिर अंकल अपने हाथों को अपनी पीठ पर ले जाते हैं और अपने दोनों हाथों पीठ पर आपस में पकड़ लेते हैं और मेरी मम्मी की चूत पैंटी पर अपना मुंह रखते हैं और मेरी मम्मी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही किस करते हैं और मुंह में भर लेते हैं।
जिससे मेरी मम्मी के मुंह आह्ह्ह की सिसकारी निकल जाती है।
मम्मी : प्ल्ज जल्दी उतारिये और चोदिये मेरी चूत।
अंकल : हां बाबी कर रहा हूं। और फिर अंकल अपना मुंह खोलकर अपने दांतों से मेरी मम्मी को कमर पेरी मेरी मम्मी की पैंटी को अपने दांतों से पकड़ते हैं और अपने दांतों से मेरी मम्मी की पैं티 को खींचते हुए नीचे लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उतर नहीं पाते हैं क्योंकि पेटीकोट की तरह मेरी मम्मी की पैंटी भी गांड के नीचे दबी थी।
फिर अंकल अपने दोनों हाथों को अपनी पीठ से हटाते हैं और एक हाथ से मेरी मम्मी के राइट बूब्स को जोर से मसलते हैं और एक हाथ से मेरी मम्मी के पेट को मसलते हैं अपनी मुट्ठी में लेकर। फिर मेरी मम्मी की तरफ देखते हैं तो मम्मी समझ जाती हैं और अपनी गांड को ऊपर उठाती हैं। फिर अंकल एक हाथ से मम्मी के राइट बूब्स को मसलते हुए और एक हाथ से मेरी मम्मी के पेट को मसलते हुए अपने दांतों से मेरी मम्मी की पैंटी को खींचने लगते हैं, जिससे मेरी मम्मी की पैंटी धीरे धीरे मेरी मम्मी के घुटनों तक जाती है। और मेरी मम्मी अपनी गांड वापस से बिस्तर पर टिका देती हैं और अपनी टांगों को उठा लेती हैं। फिर अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को अपने दांतों से ही मेरी मम्मी की टांग से निकाल देते हैं और मेरी मम्मी की पैंटी को सूंघ लेते हैं। और मेरी मम्मी सिर्फ ब्रा में थी।
अंकल : क्या खुशबू है वर्षा, तेरी पैंटी में तेरी चूत की?
मम्मी : अब बस कीजिए और जल्दी से चोदिए मेरी चूत।
आज मेरी मम्मी ने सब कुछ ब्लैक पहना था — साड़ी, पेटीकोट, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी। सब कुछ ब्लैक मेरी मम्मी के गोरे मखमली शांगमरमर मुलायम शरीर पर ब्लैक बहुत जाचता है।
अब अंकल मेरी मम्मी की टांगों को ऊपर उठाते हैं और मम्मी के पैरों के तलवों को जीभ से चाटने लगते हैं जिससे मेरी मम्मी को गुदगुदी होने लगी।
मम्मी : योगेश जी, नहीं, गुदगुदी हो रही है, मेरी चूत चोदिए।
लेकिन अंकल कुछ नहीं बोले और मेरी मम्मी के पैरों की उंगलियों को मुंह में लेकर चूसने लगे — पहले एक पैर की, फिर दूसरे पैर की उंगलियों को चूसा। फिर अपनी जीभ से मेरी मम्मी के दोनों पैरों को चाटते हुए ऊपर आने लगे — एड़ियों से लेकर घुटनों, फिर जांघों को चाटते हुए मेरी मम्मी की चूत तक पहुंचे। और मेरी मम्मी की चूत के गुलाबी होंठों को अपनी जीभ से चाटते लगे। और मेरी मम्मी की चूत में अपनी जीभ घुसाने लगे और फिर अंदर जीभ घुसाकर मेरी मम्मी को चूत को अपनी जीभ से चोदने लगे। और मेरी मम्मी अपना सर इधर-उधर पटकने लगी और बोली, “गुदगुदी हो रही है, अब रहने दीजिए।” लेकिन 5 मिनट तक मेरी मम्मी की चूत को अपनी जीभ से चोदने के बाद अंकल ऊपर बड़ें और मेरी मम्मी की पेट को अपनी जीभ से चाटते हुए मेरी मम्मी की नंगी में अपनी जीभ घुसा दी। तो मम्मी एकदम ऊपर उठी और अपनी हाथों से अंकल के सिर को पकड़ा, लेकिन अंकल ने मेरी मम्मी को वापस ले दिया और मेरी मम्मी की नंगी में अपनी जीभ से चाता और फिर और ऊपर बड़ें और मेरी मम्मी के बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही अपने मुंह में भर कर बारी-बारी से चूसने लगे। तो मम्मी
मम्मी : पहले ब्रा उतारो।
तो अंकल ने मेरी मम्मी के बूब्स को चूसना छोड़ा और अपनी की तरफ देखा।
मम्मी : मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन हां मैं हिलाई।
फिर अंकल ने मेरी मम्मी के नीचे अपने हाथ ले गए — मम्मी लेटे हुई थी — और अंकल मेरी मम्मी के शरीर के ऊपर थे लेटे हुए। अंकल ने अपने हाथों को मेरी मम्मी की पीठ के नीचे ले गए तो मेरी मम्मी थोड़ा ऊपर को उठी, जिससे अंकल को मेरी मम्मी की ब्रा के हुक खोलने में आसानी हो गई।
तभी मेरे मोबाइल पर पापा का कॉल आया।
मैं : हेलो पापा।
पापा : बेटा, एक फाइल अर्जेंट है, लेकर मेरे ऑफिस आ जा।
तो मैंने मम्मी को व्हाट्सएप पर मैसेज कर दिया। मैं पापा के ऑफिस के जा रहा हूं।
फिर मैं घर जाकर पापा की फाइल लेकर पापा के ऑफिस गया और पापा को फाइल दी और वापस आने लगा तो पापा बोले, “बेटा, साथ में चलेंगे।”
फिर मैंने मम्मी के व्हाट्सएप पर मैसेज किया, “मैं पापा के साथ आऊंगा।”
फिर करीब 9 बजे मम्मी का मैसेज आया — “बेटा, मैं घर आ गई।”
फिर मैंने मम्मी को रिप्लाई दिया, “मैं पापा आ रहे हैं।”
और फिर मैं पापा घर पहुंचे।
और अगले दिन।
अगले दिन सनडे था। पापा घर पर ही थे। मम्मी रोज की तरह किचन में खाना बना रही थी। कि तभी मम्मी के मोबाइल पर रिंग बजी। जब मैंने देखा तो अंकल का फोन था। मैंने जैसे ही फोन रिसीव किया —
अंकल : और जन्मन कैसी हो?
मैं : अंकल, मैं हूं।
अंकल : अहा तू है क्या बेटा? मम्मी का फोन तू क्यों रखा है? जा मम्मी को दे।
मैं : मम्मी काम कर रही हैं और पापा भी आज घर पर ही है, हॉल में ही बैठे हैं।
अंकल : अहा, एक काम कर तू अपने पापा को बाहर भेज, मैं आ रहा हूं।
मैं : पापा अभी ही सो के उठे हैं, क्या बोल कर भेजू?
अंकल : वो सब मैं नहीं जानता हूं। और हां, फोन लाइन पर ही रख। जैसे ही वो बाहर जाए, मम्मी को फोन दे देना।
मैं : ओके अंकल।
बहुत हॉल में पापा पेपर पढ़ रहे थे और मम्मी बस किचन से हॉल में आ रही थी।
मैं : पापा।
पापा : हां बेटा।
मैं : पापा, वो मेरा प्रोजेक्ट का कल लास्ट डेट है, आप प्लीज ये सामान ले आओ ना, मैं लिस्ट व्हाट्सएप कर देता हूं आपको।
पापा : तू खुद चला जा ना।
मैं : नहीं जा सकता, मुझे लिखना है, बहुत अभी प्लीज।
पापा : ठीक है, लाता हूं।
मम्मी मुझे ही घूर रही थी क्योंकि मम्मी को पता था कि मेरा कोई प्रोजेक्ट चलू नहीं है।
पापा के जाते ही मम्मी कुछ बोलने वाली थी कि मैंने मम्मी को फोन दे दिया, बोला “आपका फोन है।” और फिर मैं अपने रूम में चला जाता हूं।
मुझे सिर्फ मम्मी की आवाज सुनाई दे रही थी।
मम्मी : नहीं, आज नहीं।
मम्मी : अरे समझिये ना, वो घर में ही है।
मम्मी : अरे अंकश से क्या काम है आपको, नहीं, मैं सब समझती हूं आपका काम।
मम्मी : मुझे डर लग रहा है, आज नहीं।
मम्मी : अहा, ठीक है, लेकिन आप देख लेना सब।
मम्मी : बेटा, तेरे अंकल कुछ बात करेंगे तेरे से, ये ले।
हां, मम्मी आया।
मैं : क्या हुआ अंकल?
अंकल : सुन, मैं अभी 5 मिनट में आ रहा हूं। आज दिन भर तेरी मां को रगड़ कर चोदूंगा। तू अपने बाप को संभाल लेना।
मैं : ठीक है अंकल, आप आ जाइये।
मम्मी : क्या बोला योगेश जी ने?
मैं : मम्मी, वो अभी आ रहे हैं आपको कंप्यूटर सिखाने और उनको कुछ जरूरी बात भी करनी है आपसे।
अंकल मेरी मम्मी के शरीर के साथ खेल कर मेरी मम्मी की प्यास बढ़ाने लगते हैं। अंकल के हाथ कभी मेरी मम्मी की चूत पर तो कभी मेरी मम्मी के बूब्स को दबाने लगते हैं। मेरी मम्मी भी राह रह कर अंकल को मना तो करती है, पर अंकल का पूरा साथ भी देती है।
अंकल अब मेरी मम्मी के पास बैठकर मेरी मम्मी के बूब्स के ऊपर से हाथ फेरते हुए नीचे की ओर लाने लगते हैं।
मेरी मम्मी बेहोश होकर बिस्तर पर आहें भरने लगती हैं। अंकल के छूने का अहसास मेरी मम्मी को पागल बना रहा है। ऐसी फीलिंग मेरी मम्मी को पहले भी अंकल ने करवाई थी, पर आज कुछ ज्यादा हो रही है।
अंकल अपना हाथ मेरी मम्मी के पेट पर फेरते हुए मेरी मम्मी के पेटीकोट के नादे पर बार-बार फेरते हैं, जिससे मेरी मम्मी का शरीर कांप उठता है। मेरी मम्मी जानती हैं कि अंकल क्या करने वाले हैं। मेरी मम्मी के बोलती हैं, “अब रुक जाओ योगेश जी, बर्दाशत नहीं हो रहा है।”
अंकल : क्या बर्दाशत नहीं हो रहा है मेरी बुलबुल वर्षा?
मम्मी : मम्मी कोई जवाब नहीं देती, बस वो सिवाय मून करने के और कुछ नहीं कर पाती।
अंकल : बोलो वर्षा, कुछ तो बोलो।
मम्मी : मम्मी धीरे से बोलती हैं, “प्ल्ज अब बस करो।”
अंकल : वर्षा, क्या सच में आप चाहती हो कि मैं आपको चोद दू?
मम्मी : हां योगेश जी। बहुत हो गया ये सब।
अंकल : बहुत कहा वर्षा? अभी तो अपने मुझे अपनी चूत का रस भी नहीं पिलाया है।
मम्मी : पिला तो दिया था रात को, अब और बर्दाशत नहीं हो रहा है अब मुझे।
अंकल : अब मुझे क्या वर्षा? मैं समझा नहीं।
मम्मी : प्लीज योगेश जी।
अंकल : बोलो वर्षा।
मम्मी : प्लीज मुझे छोड़ दो, नहीं तो मैं मर जाऊंगी।
अंकल : वर्षा, छोड़ दू या चोद दू?
मम्मी : चोद दो।
अंकल : क्या?
मम्मी : मेरी चूत।
अंकल : किससे?
मम्मी : प्ल्ज।
अंकल : बोलना पड़ेगा वर्षा।
मम्मी : आपके लंड से।
अंकल : हां चोदूंगा, लेकिन पहले मुझे अपनी चूत का रस पिलाओ।
मम्मी : ऑयलो, लेकिन जल्दी करो, अब मुझसे बर्दाशत नहीं हो रहा है।
अंकल : थोड़ा वेट करो वर्षा, पहले मुझे मेरा काम करने दो।
मम्मी : अब कौन सा काम?
अंकल : पहले तुम्हें नंगी करूंगा।
अंकल : चुप रहो, मैं कर रहा हूं। अब चुप रहो।
ये कहते हुए अंकल मेरी मम्मी का पेटीकोट थोड़ा नीचे सरकाते हैं और मेरी मम्मी की चूत के पास अपनी जीभ से चाटते हुए ऊपर को बढ़ने लगते हैं।
मेरी मम्मी की मून करने की आवाज अब काफी तेज हो चुकी है। मम्मी ने ब्लैक ब्लाउज पहना था और ब्लैक पेटीकोट।
मम्मी : प्ल्ज अब बस करो ना।
अंकल : वर्षा मेरी जान, अभी तो तेरी चूत में अपनी जीभ उतार कर तेरी चूत का रस पीऊंगा, फिर तेरी चूत चुदाई करूंगा और तेरे बूब्स नीचोड़ूंगा। वर्षा, मैं बहुत लकी हूं जो मुझे तेरे जैसी गरम माल मिली। तू मुझसे 15 साल छोटी है, मैं 48 का, तू 33 की तेरी जैसी जवान औरत को पकड़ मैं बहुत लकी हूं। और एक वो नमर्द है जो तेरे साथ पिछले 20 साल से है, लेकिन तुझे देखकर भी उसका लंड खड़ा नहीं होता। तेरे जैसी गरम माल उस नमर्द को भगवान ने इसलिए दिया है कि तुम हमारे लंड की आग के साथ अपनी प्यास को शांत करे। वो सिर्फ तेरा नाम का पति है। असली पति का फर्ज तो मैं निभा रहा हूं।
और फिर अंकल खड़े होते हैं और अपने सारे कपड़े उतारकर दूर फेंक देते हैं। मेरी मम्मी अंकल के खड़े लंड को ध्यान से देखती रहती हैं, फिर अंकल की तरफ मुस्कुराते हुए स्मिल देती हैं और फिर शर्माते हुए अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा लेती हैं।
अंकल : हाथों से चेहरा क्यों छुपा रही है? क्या लंड पहली बार देख रही है जो तुझे शर्म आ रही है? क्या पिछले 6 महीनों से जब मेरा लंड तू अपनी चूत में लेकर मेरे लंड पर उछालती है तब तुझे शर्म नहीं आती?
मम्मी : ये कैसे बात कर रहे हो योगेश जी, आप मुझसे।
अंकल : कुछ गलत नहीं कहा है जान।
ये कहते हुए अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगते हैं और सारे हुक खोलने के बाद मेरी मम्मी का ब्लाउज उतारने लगते हैं। ब्लाउज नहीं उतर पाता क्योंकि ब्लाउज मेरी मम्मी के नीचे दबा था। अंकल मेरी मम्मी को उठाने का इशारा करते हैं तो मेरी मम्मी उठकर बैठ जाती हैं। फिर अंकल ब्लाउज को उतारने लगते हैं तो मेरी मम्मी भी अंकल की मदद के लिए अपने हाथ पीछे ले जाती हैं और अंकल आसानी से ब्लाउज को उतारकर दूर फेंक देते हैं।
मम्मी : अपने क्यों फेंका?
अंकल : कुछ नहीं बोले। और फिर मम्मी को वापस मेरी मम्मी के बूब्स पर हाथ रखकर पीछे की ओर दक्का देते हैं जिससे मेरी मम्मी वापस लेट जाती हैं। लेकिन अंकल ने अभी भी मेरी मम्मी की ब्रा नहीं उतारी थी। फिर अंकल मेरी मम्मी के लेटते ही मम्मी के नीचे की ओर आते हैं और मेरी मम्मी की कमर पर पेटीकोट के नादे को पकड़ते हैं और नादे को खींचते हैं जिससे नादा खुल जाता है और पेटीकोट को उतारने लगते हैं। लेकिन इस बार भी ब्लाउज की तरह पेटीकोट उतारना संभव नहीं था क्योंकि पेटीकोट मेरी मम्मी के गांड के नीचे दबा था। तो अंकल ने मेरी मम्मी की तरफ देखा तो मेरी मम्मी समझ गई कि अंकल उनसे अपनी गांड ऊपर उठाने के लिए बोलना चाहते हैं। तो मम्मी भी अंकल की तरफ सिल करती हैं और “हां” मैं गाड़न हिलाकर अपनी गांड को ऊपर उठाती हैं लेटे हुए। फिर अंकल मेरी मम्मी का पेटीकोट को नीचे की ओर खींचने लगते हैं और अंकल मेरी मम्मी के पेटीकोट को खींचते हुए मेरी मम्मी के घुटनों तक लाते हैं और मम्मी को अपनी गांड नीचे टिलाने का इशारा करते हैं तो मेरी मम्मी अपनी गांड नीचे टिका लेती हैं। फिर अंकल मेरी मम्मी के दोनों टांगों को ऊपर उठाते हैं और फिर मेरी मम्मी के ब्लैक पेटीकोट को निकाल देते हैं। मेरी मम्मी की टांग से अब मेरी मम्मी सिर्फ ब्रा पैंटी में अंकल के सामने चुदाने के लिए बिस्तर पर लेटी हैं। मेरी मम्मी ब्रा पैंटी में स्वर्ग की अप्सरा लग रही हैं, लेकिन मेरी मम्मी के शरीर से ब्रा पैंटी भी बहुत जल्द उतर जाएंगी। ये उतारने के बाद ही मेरी मम्मी की जवानी की प्यास अंकल अपने खड़े लंड से बुझाएंगे और मेरी मम्मी के मखमली शांगमरमर मुलायम शरीर को मसलेंगे अपने कठोर हाथों से।
और फिर अंकल मेरी मम्मी को देखते रहते हैं तो मेरी मम्मी भी अंकल को मुस्कुराते हुए देखती हैं, फिर अपनी पैंटी की तरफ उंगली करते हैं।
अंकल : क्या इसे भी उतारू?
मम्मी : हां प्ल्ज इसे भी उतार दो और मेरी आग बुझा दो प्लीज योगेश जी।
तो फिर अंकल अपने हाथों को अपनी पीठ पर ले जाते हैं और अपने दोनों हाथों पीठ पर आपस में पकड़ लेते हैं और मेरी मम्मी की चूत पैंटी पर अपना मुंह रखते हैं और मेरी मम्मी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही किस करते हैं और मुंह में भर लेते हैं।
जिससे मेरी मम्मी के मुंह आह्ह्ह की सिसकारी निकल जाती है।
मम्मी : प्ल्ज जल्दी उतारिये और चोदिये मेरी चूत।
अंकल : हां बाबी कर रहा हूं। और फिर अंकल अपना मुंह खोलकर अपने दांतों से मेरी मम्मी को कमर पेरी मेरी मम्मी की पैंटी को अपने दांतों से पकड़ते हैं और अपने दांतों से मेरी मम्मी की पैं티 को खींचते हुए नीचे लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उतर नहीं पाते हैं क्योंकि पेटीकोट की तरह मेरी मम्मी की पैंटी भी गांड के नीचे दबी थी।
फिर अंकल अपने दोनों हाथों को अपनी पीठ से हटाते हैं और एक हाथ से मेरी मम्मी के राइट बूब्स को जोर से मसलते हैं और एक हाथ से मेरी मम्मी के पेट को मसलते हैं अपनी मुट्ठी में लेकर। फिर मेरी मम्मी की तरफ देखते हैं तो मम्मी समझ जाती हैं और अपनी गांड को ऊपर उठाती हैं। फिर अंकल एक हाथ से मम्मी के राइट बूब्स को मसलते हुए और एक हाथ से मेरी मम्मी के पेट को मसलते हुए अपने दांतों से मेरी मम्मी की पैंटी को खींचने लगते हैं, जिससे मेरी मम्मी की पैंटी धीरे धीरे मेरी मम्मी के घुटनों तक जाती है। और मेरी मम्मी अपनी गांड वापस से बिस्तर पर टिका देती हैं और अपनी टांगों को उठा लेती हैं। फिर अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को अपने दांतों से ही मेरी मम्मी की टांग से निकाल देते हैं और मेरी मम्मी की पैंटी को सूंघ लेते हैं। और मेरी मम्मी सिर्फ ब्रा में थी।
अंकल : क्या खुशबू है वर्षा, तेरी पैंटी में तेरी चूत की?
मम्मी : अब बस कीजिए और जल्दी से चोदिए मेरी चूत।
आज मेरी मम्मी ने सब कुछ ब्लैक पहना था — साड़ी, पेटीकोट, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी। सब कुछ ब्लैक मेरी मम्मी के गोरे मखमली शांगमरमर मुलायम शरीर पर ब्लैक बहुत जाचता है।
अब अंकल मेरी मम्मी की टांगों को ऊपर उठाते हैं और मम्मी के पैरों के तलवों को जीभ से चाटने लगते हैं जिससे मेरी मम्मी को गुदगुदी होने लगी।
मम्मी : योगेश जी, नहीं, गुदगुदी हो रही है, मेरी चूत चोदिए।
लेकिन अंकल कुछ नहीं बोले और मेरी मम्मी के पैरों की उंगलियों को मुंह में लेकर चूसने लगे — पहले एक पैर की, फिर दूसरे पैर की उंगलियों को चूसा। फिर अपनी जीभ से मेरी मम्मी के दोनों पैरों को चाटते हुए ऊपर आने लगे — एड़ियों से लेकर घुटनों, फिर जांघों को चाटते हुए मेरी मम्मी की चूत तक पहुंचे। और मेरी मम्मी की चूत के गुलाबी होंठों को अपनी जीभ से चाटते लगे। और मेरी मम्मी की चूत में अपनी जीभ घुसाने लगे और फिर अंदर जीभ घुसाकर मेरी मम्मी को चूत को अपनी जीभ से चोदने लगे। और मेरी मम्मी अपना सर इधर-उधर पटकने लगी और बोली, “गुदगुदी हो रही है, अब रहने दीजिए।” लेकिन 5 मिनट तक मेरी मम्मी की चूत को अपनी जीभ से चोदने के बाद अंकल ऊपर बड़ें और मेरी मम्मी की पेट को अपनी जीभ से चाटते हुए मेरी मम्मी की नंगी में अपनी जीभ घुसा दी। तो मम्मी एकदम ऊपर उठी और अपनी हाथों से अंकल के सिर को पकड़ा, लेकिन अंकल ने मेरी मम्मी को वापस ले दिया और मेरी मम्मी की नंगी में अपनी जीभ से चाता और फिर और ऊपर बड़ें और मेरी मम्मी के बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही अपने मुंह में भर कर बारी-बारी से चूसने लगे। तो मम्मी
मम्मी : पहले ब्रा उतारो।
तो अंकल ने मेरी मम्मी के बूब्स को चूसना छोड़ा और अपनी की तरफ देखा।
मम्मी : मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन हां मैं हिलाई।
फिर अंकल ने मेरी मम्मी के नीचे अपने हाथ ले गए — मम्मी लेटे हुई थी — और अंकल मेरी मम्मी के शरीर के ऊपर थे लेटे हुए। अंकल ने अपने हाथों को मेरी मम्मी की पीठ के नीचे ले गए तो मेरी मम्मी थोड़ा ऊपर को उठी, जिससे अंकल को मेरी मम्मी की ब्रा के हुक खोलने में आसानी हो गई।
तभी मेरे मोबाइल पर पापा का कॉल आया।
मैं : हेलो पापा।
पापा : बेटा, एक फाइल अर्जेंट है, लेकर मेरे ऑफिस आ जा।
तो मैंने मम्मी को व्हाट्सएप पर मैसेज कर दिया। मैं पापा के ऑफिस के जा रहा हूं।
फिर मैं घर जाकर पापा की फाइल लेकर पापा के ऑफिस गया और पापा को फाइल दी और वापस आने लगा तो पापा बोले, “बेटा, साथ में चलेंगे।”
फिर मैंने मम्मी के व्हाट्सएप पर मैसेज किया, “मैं पापा के साथ आऊंगा।”
फिर करीब 9 बजे मम्मी का मैसेज आया — “बेटा, मैं घर आ गई।”
फिर मैंने मम्मी को रिप्लाई दिया, “मैं पापा आ रहे हैं।”
और फिर मैं पापा घर पहुंचे।
और अगले दिन।
अगले दिन सनडे था। पापा घर पर ही थे। मम्मी रोज की तरह किचन में खाना बना रही थी। कि तभी मम्मी के मोबाइल पर रिंग बजी। जब मैंने देखा तो अंकल का फोन था। मैंने जैसे ही फोन रिसीव किया —
अंकल : और जन्मन कैसी हो?
मैं : अंकल, मैं हूं।
अंकल : अहा तू है क्या बेटा? मम्मी का फोन तू क्यों रखा है? जा मम्मी को दे।
मैं : मम्मी काम कर रही हैं और पापा भी आज घर पर ही है, हॉल में ही बैठे हैं।
अंकल : अहा, एक काम कर तू अपने पापा को बाहर भेज, मैं आ रहा हूं।
मैं : पापा अभी ही सो के उठे हैं, क्या बोल कर भेजू?
अंकल : वो सब मैं नहीं जानता हूं। और हां, फोन लाइन पर ही रख। जैसे ही वो बाहर जाए, मम्मी को फोन दे देना।
मैं : ओके अंकल।
बहुत हॉल में पापा पेपर पढ़ रहे थे और मम्मी बस किचन से हॉल में आ रही थी।
मैं : पापा।
पापा : हां बेटा।
मैं : पापा, वो मेरा प्रोजेक्ट का कल लास्ट डेट है, आप प्लीज ये सामान ले आओ ना, मैं लिस्ट व्हाट्सएप कर देता हूं आपको।
पापा : तू खुद चला जा ना।
मैं : नहीं जा सकता, मुझे लिखना है, बहुत अभी प्लीज।
पापा : ठीक है, लाता हूं।
मम्मी मुझे ही घूर रही थी क्योंकि मम्मी को पता था कि मेरा कोई प्रोजेक्ट चलू नहीं है।
पापा के जाते ही मम्मी कुछ बोलने वाली थी कि मैंने मम्मी को फोन दे दिया, बोला “आपका फोन है।” और फिर मैं अपने रूम में चला जाता हूं।
मुझे सिर्फ मम्मी की आवाज सुनाई दे रही थी।
मम्मी : नहीं, आज नहीं।
मम्मी : अरे समझिये ना, वो घर में ही है।
मम्मी : अरे अंकश से क्या काम है आपको, नहीं, मैं सब समझती हूं आपका काम।
मम्मी : मुझे डर लग रहा है, आज नहीं।
मम्मी : अहा, ठीक है, लेकिन आप देख लेना सब।
मम्मी : बेटा, तेरे अंकल कुछ बात करेंगे तेरे से, ये ले।
हां, मम्मी आया।
मैं : क्या हुआ अंकल?
अंकल : सुन, मैं अभी 5 मिनट में आ रहा हूं। आज दिन भर तेरी मां को रगड़ कर चोदूंगा। तू अपने बाप को संभाल लेना।
मैं : ठीक है अंकल, आप आ जाइये।
मम्मी : क्या बोला योगेश जी ने?
मैं : मम्मी, वो अभी आ रहे हैं आपको कंप्यूटर सिखाने और उनको कुछ जरूरी बात भी करनी है आपसे।


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