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update 59
दोपहर को मम्मी की नींद खुली तो मम्मी ने कहा
“बेटा, खाना बना देती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं मार्केट से ले आता हूँ।”
मम्मी बहुत खुश हुई। फिर हम दोनों साथ में खाना खा बैठे।
मैंने कहा
“मम्मी, आज अंकल जी ने हमें अपने घर बुलाया है।”
मम्मी ने कहा
“क्यों बुलाया?”
मैंने कहा
“मम्मी, अंकल जी केक लाए थे। वो काटेंगे।”
मम्मी ने कहा
“क्या उनका बर्थडे है?”
मैंने कहा
“नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“तो फिर क्यों बुलाया?”
मैंने कहा
“मम्मी, मैंने अंकल जी से प्रॉमिस किया है कि आप और मैं चलेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरा सिर दर्द हो रहा है। मैं नहीं जा पाऊंगी।”
मैंने कहा
“प्लीज मम्मी, आप टैबलेट ले लो। चलिए। मैंने अंकल जी से प्रॉमिस किया है।”
मम्मी ने कहा
“ठीक है। कितने बजे चलना है?”
मैंने कहा
“मम्मी, 5 बजे को।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, 4 बजे हो चुके हैं।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप टैबलेट ले लो और तैयार हो जाओ।”
मम्मी ने कहा
“ओके बेटा, मैं टैबलेट ले लेती हूँ। तुम ला दो।”
फिर मैंने मम्मी को टैबलेट दी और पानी के साथ मम्मी ने टैबलेट ले ली।
फिर मम्मी बोली
“बेटा, नहाकर आती हूँ।”
मैंने कहा
“ओके मम्मी।”
फिर मम्मी नहाने चली गई। थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे आवाज दी तो मैं मम्मी के रूम में गया। तो देखा मम्मी बाथरूम से बाहर निकली है और मम्मी ने अपने सुंदर मखमली बदन पर टॉवेल लपेट रखा है।
मैं मम्मी के पास गया तो मैं बोला
“मम्मी, आपने बुलाया?”
मम्मी मेरी तरफ पलटी और बोली
“हां बेटा।”
मम्मी के बदन पर टॉवेल ने मम्मी के स्तनों से मम्मी की चूत तक कवर कर रखा था।
मैंने कहा
“बोलिए मम्मी, क्यों बुलाया?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरी पीठ पर क्रिम लगा दे।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। लेकिन आप तो टॉवेल…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, टॉवेल तो हटा देती हूँ।”
और मम्मी ने अपनी टॉवेल हटा दी। मम्मी के टॉवेल हटाते ही मम्मी एकदम नंगी हो गई।
मैंने मम्मी को नंगी देखकर दूसरी तरफ मुड़ गया तो मम्मी बोली
“बेटा, तुम पीछे क्यों मुड़ा?”
मैंने कहा
“मम्मी, वो आपने…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, क्या?”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने अंडरगारमेंट्स…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं मां हूँ तेरी। इसमें मुझे से क्या शर्माना। मैं तेरे सामने क्या आज पहली बार बिना कपड़ों के खड़ी हूँ। पहले भी तो बिना कपड़ों के खड़ी हुई हूँ और मैंने ही तो तुझे जन्म दिया है और अपना दूध पिलाया है। और तू शर्मा क्यों रहा है?”
मैंने कहा
“मम्मी, प्लीज आप कपड़े पहन लो।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं पहन लेती पर अब तो नहीं पहनूंगी। मेरी तरफ देख और मुझे पकड़ कर मेरा मुंह अपनी तरफ करवाया।”
फिर मम्मी ने कहा
“मेरी पीठ पर क्रिम लगा दे।”
फिर मैंने क्रिम उठाई और मम्मी की पीठ पर लगा दी।
और बाहर आने लगा तो मम्मी ने मुझे रोका और बोली
“बेटा, तुम नाराज हैं?”
मैंने कहा
“नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“तो फिर जा क्यों रहा है। बैठ मेरे पास।”
फिर मैं बेड पर बैठ गया और मम्मी ने अलमारी से अपनी ब्रा पैंटी निकाली और मम्मी ने पहले ब्रा पहनी और फिर पैंटी पहनने लगी। तो मम्मी ने देखा मेरी तरफ की मैं लगातार उनकी चूत को देख रहा हूँ।
मम्मी ने कहा
“बेटा, अंकुश।”
मै एकदम ध्यान से निकल कर देखा
मम्मी ने कहा
“बेटा, क्या देख रहा है?”
मैंने कहा
“वो… वो… मम्मी मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, हकला क्यों रहा है?”
मैंने कहा
“मम्मी, कुछ नहीं।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, डर मत। मैं मां हूँ तेरी। मुझे से डरने की जरूरत नहीं है। मैं हमेशा तेरा ही साथ दूंगी। तू मेरे कलेजा का टुकड़ा है। बोल बेटा, डर मत। क्या देख रहा था?”
मैंने कहा
“कुछ नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं जानती हूँ तू मुझे ही देख रहा था। बोल बेटा, अपने मन में जो भी बता। बेटा, क्या देख रहा था?”
मैंने कहा
“कुछ नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“अच्छा तो मैं झूठ बोल रही हूँ। सच बता बेटा।”
मैंने कहा
“वो मम्मी, आप नाराज हो जाएंगी।”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, मैं कभी तुझसे नाराज नहीं हूँगी।”
मैंने कहा
“वो मम्मी, आप मुझे हर महीने सुबह पर बालों की केयर करवाने भेजती हो।”
मम्मी ने कहा
“हां बेटा।”
मैंने कहा
“क्यों मम्मी हर महीने बालों की केयर करवाना?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, हर चीज की एक लिमिट होती है। इसलिए क्योंकि जब बाल बड़े हो जाएं तो उनको कटवाना चाहिए। नहीं तो सिर में पसीना आता है। और बालो की केयर करनी पड़ती है। जैसे मैं अपने बालों की केयर करती हूँ क्योंकि मैं औरत हूँ और औरतों के बाल बड़े होते हैं। लेकिन बेटा केयर नहीं करते तो इंफेक्शन हो सकता है।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। लेकिन…”
मम्मी ने कहा
“लेकिन क्या बेटा।”
मम्मी ने कहा
“बोल बेटा, चुप मत रहो।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप उस दिन शेविंग का सामान क्यों लाई हो। आपके तो दाढ़ी मूंछ नहीं आती।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, वो मेरे प्राइवेट पार्ट्स पर बाल होते हैं। जैसे की ये।”
मम्मी ने अपना सर नीचे किया और इशारे से बताया क्योंकि मम्मी की चूत पर बाल थे छोटे छोटे।
मैंने कहा
“क्या मम्मी, आप खुद शेविंग करती हो?”
मम्मी ने कहा
“नहीं।”
मैंने कहा
“तो आप लाई क्यों?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, अब करूंगी।”
मैंने कहा
“लेकिन मम्मी, आपने क्या अभी तक शेविंग नहीं की तो आपके बाल तो बहुत बड़े होने चाहिए।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं केची से कट लेती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने शेविंग क्यों नहीं की केची से करने के बजाय?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मुझे केची से ही कटना आता है। मैंने कभी रेजर ब्लेड यूज नहीं किया। इसलिए मुझे डर लगता है कहीं कट नहीं लग जाए।”
मैंने कहा
“तो मम्मी, फिर आप पापा को भी बोल सकती थीं। वो तो आपके पति हैं और पति-पत्नी तो…”
मम्मी ने कहा
“हां बेटा, मैंने कई बार पिछले 20 सालों में कई बार बोला। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बोलते हैं क्या मैं तेरे बाप का नौकर हूँ और मुझे मारते पीटते हैं।”
मैंने कहा
“मम्मी, फिर आप क्या विट क्रिम का यूज क्यों नहीं करती हूँ?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैंने कभी यूज नहीं की।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं आपका बेटा हूँ। यदि आप आदेश दे तो क्या मैं आपके बाल साफ कर दूँ?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, तू मेरा बेटा है। और बेटे से पति वाला काम कराना पाप है।”
मैंने कहा
“मम्मी, नहीं तो आपको इंफेक्शन हो सकता है बालों से।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, अब क्या करूँ?”
मैंने कहा
“मम्मी, आप चाहे तो अपनी लेडीज फ्रेंड से।”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, वो पूछेंगी तेरा पति से करा लेती तो मैं क्या जवाब दूँगी।”
मैंने कहा
“सही कह रही हो मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, तू चिंता मत कर।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप अंकल जी के प्यार को एक्सेप्ट कर लो। वो आपको बहुत प्यार करेंगे।”
मम्मी ने कहा
“नेवर बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी, फिर आप बाल सैव कैसे करोगी?”
मम्मी ने कहा
“मुझे साफ करने की जरूरत नहीं है। मैं केची से कट लेती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, प्लीज आप अपने बाल साफ करो।”
मम्मी ने कहा
“क्यों बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं चाहता हूँ आपके बाल साफ हो ताकि आपको इंफेक्शन न हो।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं साफ करा लूंगी।”
मैंने कहा
“मम्मी, किससे पापा कराएंगे नहीं। आपसे होंगे नहीं।”
मम्मी ने कहा
“तेरे पापा से।”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने तो कहा पापा ने मना कर दिया है और वो आपको पिटेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटे, तेरे पापा ही करा लूंगा। और पापा वो होता है जो मम्मी को प्यार करे। पापा पापा होता है। और उस औरत के बच्चे का पापा ही पापा कहलाता है।”
मैंने कहा
“समझा नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, पिता उसे ही कहते हैं जो मम्मी को प्यार करे।”
मैंने कहा
“साफ साफ कहिए। मैं समझा नहीं।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरे बाल साफ हो जाएंगे।”
मैंने कहा
“क्या आप करोगी?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, तेरे पापा।”
मैंने कहा
“मम्मी, वो तो नहीं करेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, बोला ना पापा उसे बोलते हैं जो मम्मी को प्यार करे।”
मैंने कहा
“मम्मी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। आप क्या बोल रही हैं। क्या आप अंकल जी का प्यार एक्सेप्ट करोगी?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा। लेकिन मेरे बाल साफ हो जाएंगे। अब तू अपने दिमाग पर जोर मत डाल। तेरी समझ में नहीं आएगा।”
फिर मम्मी ने मेरे सामने ही अपनी पैंटी पहनी।
मम्मी मेरे सामने ब्रा पैंटी में खड़ी थी।
फिर मम्मी ने कहा
“बेटा, आज क्या पहनू?”
मैंने कहा
“जो आप चाहे मम्मी पहन लो।”
फिर मम्मी ने अलमारी से एक ब्लैक कलर की साड़ी पेटीकोट ब्लाउज निकाली और पहनने लगी। फिर मम्मी ने अपना मेकअप करने लगी। मैं मम्मी के रूम से बाहर आ गया।
फिर मम्मी अपने रूम से बाहर निकली। ब्लैक कलर की साड़ी में मेरी मम्मी का गोरा बदन ऐसा चमक रहा था जैसे वो अभी-अभी स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा हो।
मम्मी ने कहा
“ठीक है बेटा, चल। लेकिन मैं ज्यादा देर नहीं रुकूंगी। अंकल जी के घर।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। बस 10 मिनट में वापस आ जाएंगे।”
और हम अंकल जी के घर के लिए अपने घर के पीछे वाले दरवाजे से निकले और अंकल जी के घर का पीछे वाला गेट खटखटाया। अंकल जी समझ गए कि हम ही आए हैं।
अंकल जी जैसे ही दरवाजा खोलता है अंकल जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। सामने मेरी मम्मी को देखकर अंकल जी अपने होश खो बैठे और मेरी मम्मी को ही देखते रह गए।
ब्लैक कलर की साड़ी में मेरी मम्मी का गोरा बदन ऐसा चमक रहा था जैसे वो अभी-अभी स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा हो। अंकल जी मेरी मम्मी के सुंदरता में खो चुके थे। अंकल जी को कोई होश नहीं था।
मेरी मम्मी ने कहा
“अब क्या गेट पर ही खड़ा रखना है?”
अंकल जी ने कहा
“ओह सॉरी वर्षा। अपने होश में वापस आए। आप प्लीज अंदर आइए ना। और अंकुश तुम भी आओ।”
जैसे ही मैं और मेरी मम्मी अंदर जाते हैं हमें पूरा रूम सजाया हुआ दिखता है। टेबल पर एक केक और बीयर की बोतल रखी है। मेरी मम्मी को थोड़ा अजीब भी लगता है पर वो अंदर आ कर बैठ जाती है। क्योंकि मम्मी को बीयर पसंद नहीं है।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, क्या लेंगे आप?”
मम्मी ने कहा
“कुछ नहीं। अंकल जी आप तो ऐसे पूछ रहे हैं जैसे हम आपके गेस्ट हैं और पहली बार आए हैं।”
अंकल जी ने कहा
“हां सॉरी मैं तो भूल गया। पर अब आपका सिर दर्द कैसा है मम्मी मैंने मेरी तरफ देखा क्योंकि ये सिरदर्द वाली बात अंकल जी को कैसे पता चली। मैं अपना सर नीचे कर लिया।”
मम्मी ने कहा
“हां पहले से आराम है।”
अंकल जी अंदर गए और मैं मम्मी सोफे पर बैठे थे। अंकल जी एक ट्रे में 2 ग्लास पानी लाए पास आते ही अंकल जी की नजर मेरी मम्मी की क्लिवेज पर अटक जाती है।
मेरी मम्मी के स्तन देख अंकल जी अपने लंड को सख्त होने से रोक नहीं पाते। मेरी मम्मी भी अंकल जी को अपने स्तन घूमते हुए देख कर थोड़ा मुस्कुराते हैं और अपनी साड़ी का पल्लू सही कर लेती हैं। क्योंकि मेरी मम्मी अंकल जी को तड़पाना चाहती है।
मम्मी ने कहा
“योगेश जी, मुझे जल्दी जाना है तो प्लीज थोड़ा जल्दी कर लो।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, अभी तो आई हो आप। अभी से जाना को कह रही हो। पहले थोड़ा सेलिब्रेट तो कर लो।”
ये कह कर अंकल जी ग्लास में बीयर डालने लगते हैं।
मम्मी ने कहा
“योगेश जी, ये क्या कर रहे हो। मैं शराब नहीं पीती।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, ये शराब नहीं है बीयर है।”
मम्मी ने कहा
“हां बट मैं ये सब नहीं पीती।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, आज मना मत करो ना प्लीज।”
मम्मी ने कहा
“सॉरी योगेश जी लेकिन मैं ये नहीं पी सकती। बस।”
अंकल जी ने कहा
“ओके वर्षा, जैसी आपकी मरजी। पर मेरा साथ देने के लिए कोल्ड ड्रिंक तो ले ही सकते हो ना आप।”
मम्मी ने थोड़ा सोचने के बाद कहा
“ठीक है डाल दो।”
अंकल जी ने कहा
“अंकुश बेटा तुम तो बीयर लो हे।”
मैं कुछ बोलता उससे पहले ही मम्मी ने कहा
“नहीं वो बीयर नहीं लेगा। आप उसे भी कोल्ड ड्रिंक्स दो।”
और मुझे टॉयलेट जाना है। मैं आती हूँ। और फिर मम्मी टॉयलेट गई।
फिर अंकल जी मम्मी के जाते ही मम्मी के ग्लास में बीयर डाल देते हैं और मुझे पूछते हैं
अंकल जी: बेटा तुम कोल्ड ड्रिंक या बीयर लेगा। अब बताओ अब तो वर्षा नहीं है।
मैंने कहा
“अंकल जी थोड़ी कोल्ड ड्रिंक थोड़ी बीयर मिक्स।”
अंकल जी ने कहा
“शाबाश बेटा। लेकिन तेरी मम्मी को तो फुल बीयर के नशे में चोदूंगा। ब्लैक साड़ी में तेरी मम्मी का बदन कैसे अप्सरा लग रहा है। आज तो उसे पूरी रात चोदना है मुझे। बेटा आज तू कैसे भी करके इसे पूरी रात के लिए। मैं घर ही रुकवाना।”
मैंने कहा
“लेकिन पापा रात को घर आएंगे।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा वो तेरा काम है। वो तू संभालना। लेकिन आज पूरी रात वर्षा मेरे घर रहेगी। अभी 5 बजे है। सुबह 8 बजे तक पूरे 15 घंटे में वर्षा के साथ रहना चाहता हूं।”
मैंने कहा
“ओके अंकल जी एनजॉय करो। पापा को मैं बोल दूंगा। आज तो दोस्त के घर आए हैं। सुबह ही आएंगे।”
अंकल जी ने कहा
“शाबाश बेटा।”
फिर अंकल जी ने मम्मी के ग्लास में एक टैबलेट डाली।
मैंने कहा
“अंकल जी ये टैबलेट क्या है।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा ये वियाग्रा है। इससे नशा बढ़ेगा। आज पूरी रात चोदना है। तेरी मम्मी को साली ने आते ही लंड खड़ा कर दिया।”
मैंने कहा
“अंकल जी आपको वियाग्रा मम्मी के सामने ही मिलानी थी।”
अंकल जी ने कहा
“वो आज थोड़ी नाराज है। वो आज मुझे से नहीं चुदना चाहती है। इसलिए मैं उसे वियाग्रा से गरम करूंगा। फिर वो मुझे से चुद जाएगी। रात को थोड़ी नाराज हो गई थी वो।”
मैंने कहा
“जी अंकल जी मम्मी सिर्फ आपकी है। आपको जो करना है करो।”
फिर मम्मी टॉयलेट से आ गई। और आने के बाद हल्की हल्की सिप ले कर ड्रिंक पीने लगती है। जिसे देख अंकल जी मन ही मन खुश हो जाते हैं।
मम्मी पहले ही एक टैबलेट खा कर आई थी सिर दर्द की और अब दूसरी टैबलेट वियाग्रा की भी अंकल जी ने धोखे से उसे खिला दी। ना चाहते हुए भी मेरी मम्मी का शरीर गरम होने लगता है।
अंकल जी मुझे दूसरी तरफ मुंह कराने का इशारा करते हैं। मैं समझ गया मेरे सामने मम्मी कुछ नहीं करेगी। इसलिए मैं उठा मम्मी के बगल से।
मम्मी ने कहा
“कहां जा रहा है बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी वो मैं अंकल जी के लैपटॉप में मूवी देखता हूँ।”
और पास में रखे दूसरे सोफे पर अंकल जी का लैपटॉप लेकर बैठ गया और ईरफोन लगा लिए और एक मूवी स्टार्ट कर दी।
मैं इस तरह बैठा था मम्मी की तरफ। मेरी पीठ थी। मम्मी को लगेगा मैं उन्हें नहीं देख रहा हूँ। और मेरे कानों में ईरफोन थे। लेकिन मैं भी मम्मी को देख नहीं सकता था। बल्कि मम्मी मुझे देख सकती है। मैं मम्मी के आगे आ गया। लेकिन मैं जहां बैठा था वहां एक बड़ा मिरर है जिससे मैं पीछे का मतलब मम्मी अंकल जी को देख रहा था।
मम्मी आरम से बीयर पी रही थी। चुसते चुसते अचानक अंकल जी ने मेरी मम्मी के स्तनों के थोड़ा ऊपर मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू नीचे कर के अपना हाथ रख देते हैं।
मम्मी ने कहा
“ये क्या कर रहे हो योगेश जी। अंकुश सामने बैठा है।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा शायद कुछ लगा है आपके। और अंकुश ने तो ईरफोन लगा रखे हैं। और वो मूवी देखने में व्यस्त है। उसे कुछ नहीं दिख रहा है और सुनाई भी नहीं दे रहा है।”
(मेरी मम्मी भी नीचे नजर कर के देखती है।)
मम्मी ने कहा
“ये तो तिल है। क्या आप उसे पहली बार देख रहे हो। क्या पिछले 6 महीनों से नहीं देखा।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा और कहां कहां है आपके तिल। वैसे एक तिल और देखा था मैंने।”
मम्मी ने कहा
“जानती हूँ आप क्या तिल की बात कर रहे हो। आप तिल देखने के बहाने मुझे नंगी करोगे। आज मैं आपको कुछ नहीं करने दूंगी। और अब आप तिल बिल को छोड़ो। आज कुछ नहीं दूंगी आपको। और अब केक काटो और मुझे जाने दो। वैसे आज आपका बर्थडे भी नहीं फिर केक क्यों काट रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“केक तो एक बहाना मेरी जान से मिलने का। बस आपको देखने की इच्छा ही थी। तो केक ले आया।”
मम्मी ने कहा
“क्या पिछले 6 महीनों से नहीं देख रहे हो सब देख रहे हो और कर भी रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“ठीक है काटो केक और आज पूरी रात यहीं रुकना है।”
और अंकल जी केक लाए और टेबल पर रखा और मम्मी को बोले काटो।
मम्मी ने कहा
“मैं क्यों काटूँ। आप काटिए।”
और मम्मी को आवाज देने लगी।
मम्मी ने कहा
“अंकुश बेटा।”
मैंने साफ सुन रहा था। मैंने कानों में ऐसे ही ईरफोन लगा रखे थे। लेकिन आवाज तो आ रही थी। मैं तो सिर्फ उन दोनों की बातें सुन रहा था। जब मम्मी ने आवाज दी तो मैं कुछ नहीं बोला। जानबूझकर ताकि मम्मी को लगे मैं कुछ भी नहीं सुन रहा हूँ।
अंकल जी ने कहा
“वो नहीं सुनेगा ईरफोन की वजह से। आओ वर्षा हम दोनों केक काटते हैं।”
और फिर अंकल जी मेरी मम्मी के पास बैठ जाते हैं और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ा और केक काटा। अंकल जी मेरी मम्मी को केक खिलाने लगते हैं।
मम्मी ने कहा
“आप केक लाए हो इसलिए पहले आप केक खाओ।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा तो खिला तो मुझे अपने हाथों से केक।”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा
“हां खिलाती हूँ। लो खाओ।”
और मम्मी केक का एक टुकड़ा उठाती है और अंकल जी के मुंह में डालती है तो अंकल जी मेरी मम्मी की उंगली भी लिक करते हैं जिससे मेरी मम्मी के शरीर में एक अलग सा करंट दौड़ जाता है। मम्मी ने कहा
“मेरी उंगली क्यों चाट रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“तुम्हारी उंगली बहुत मीठी है। स्वादिष्ट है। इसलिए।”
और फिर अंकल जी केक का एक टुकड़ा मम्मी को खिलाते हैं जो मम्मी के होठों पर लग जाता है तो
मम्मी अपने होठों को रुमाल से साफ करने लगती है तो अंकल जी मम्मी को रोकते हैं और बोलते हैं
अंकल जी: नहीं अपने होठों को रुमाल से साफ नहीं करते।
मम्मी ने कहा
“तो किससे साफ करते हैं।”
अंकल जी ने कहा
“बताता हूँ।”
और अंकल जी अपना मुंह मेरी मम्मी के होठों के पास लाते हैं और अंकल जी अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों से लगाकर मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। मम्मी थोड़ा विरोध करती है और बोलती है
“अंकुश के सामने नहीं।”
अंकल जी ने कहा
“अंकुश को कुछ नहीं दिख रहा है।”
और अंकल जी फिर से मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। और फिर मम्मी भी अंकल जी के लिए अपने होठों को अंकल जी के होठों से चुसवाने के लिए अपना मुंह खोल देती है और अंकल जी मेरी मम्मी के होठों का रस पान कराने लगते हैं।
मेरी मम्मी मुंह खोलने के बाद भी मना करती है। एक तरफ मम्मी अपना मुंह खोलकर अपने होठों को चूसवा भी रही थी और बार बार नखरे भी कर रही थी अंकुश देख लेगा।
फिर अंकल जी मेरी मम्मी को वहीं सोफे पर लिटाकर मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू गिरा देते हैं और मेरी मम्मी के पेट पर किस की बौछार करते हैं।
मेरी मम्मी मना करने लगती है। पर वो जानती है कि अगर अभी अंकल जी को नहीं रोका तो बहुत देर हो जाएगी। और मेरी मम्मी को मेरा भी देखने का डर था कहीं मैं पीछे मुड़ कर न देख लूं। हालांकि मम्मी जानती है मैं उन्हें यहां चुदवाने लाया हूं।
पर मां हमेशा बेटे के सामने कभी अपने पति के साथ भी शर्माती है। पर यहां तो अंकल जी के साथ रंगरेलियां मना रही है तो मम्मी को शर्म आएगी ही। इसलिए वो अंकल जी को अपने ऊपर से धकेलती है।
मम्मी ने कहा
“अंकल जी मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मुझे जाना है।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा अचानक क्या हुआ। कुछ देर और रुको ना।”
मम्मी ने कहा
“मेरे सर में दर्द है अंकल जी।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा कुछ देर आराम कर लो फिर चले जाना। मेरी इतनी बात मान लो प्लीज।”
मेरी मम्मी को कुछ समझ नहीं आता। उनके शरीर की आग बहुत भड़क चुकी है क्योंकि अंकल जी ने वियाग्रा दी थी। जिसे वो शांत करना चाहती है। पर मेरी मम्मी मेरे सामने वो कुछ नहीं कर सकती।
मम्मी ने कहा
“अंकल जी प्लीज रूम में चलते हैं। यहां अंकुश है। मुझे शर्म आ रही है।”
अंकल जी ने कहा
“ठीक है चलो वर्षा।”
और फिर मेरी मम्मी उठ कर अंदर रूम में चली जाती है और बेड पर लेट जाती है। और लेने भर से उसे आराम कहां मिलने वाला था। क्योंकि वियाग्रा तो अपना असर दिखाएगी ही। जब तक चुदाई नहीं होगी मम्मी को आराम नहीं मिलेगा। मैं और अंकल जी दोनों ही बाहर से मेरी मम्मी को अपने पैरों को आपस में रगड़ रही है और वो साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत को रगड़ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मम्मी का मन कर रहा है कि अभी अपनी चूत में उंगली डाल ले। मैं अंकल जी से बोला
मैं: अंकल जी आप जाकर मेरी मम्मी की प्यास बुझा दो। मुझे मम्मी की तड़प बेचैन नहीं दिख रही है।
अंकल जी ने कहा
“ये वियाग्रा का असर है बेटा।”
और मैं अंकल जी दोनों ही बाहर विंडो से मम्मी की बेचैन तड़प को बाहर से देख रहे थे और अंकल जी मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।
अंकल जी ने कहा
“बेटा आज तेरी मम्मी को पूरी रात रगड़ रगड़ के चोदूंगा। सुबह ये ढंग से चल भी नहीं पाएगी।”
मैंने कहा
“अंकल जी आप जैसा चाहो वेवा करो। मम्मी को पूरी रात चोदो। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैंने 6 महीने पहले ही मम्मी को आपके हवाले कर दिया है। अब मम्मी सिर्फ आपकी है।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा अब मैं रूम में जाता हूँ और तेरी मम्मी को चोदूँगा।”
और अंकल जी रूम में गए और बेड के पास जाकर मेरी मम्मी को जो बेड पर लेटी थी मेरी मम्मी की टांगों को चूमना शुरू कर देते हैं।
मेरी मम्मी के मुंह से सिसकियां निकलने लगती हैं। पर वो अब भी अंकल जी को मना करती है।
अंकल जी जानते हैं कि मेरी मम्मी अब नखरे कर रही है जो मेरी मम्मी की पुरानी आदत है। और वो बोलते हैं
अंकल जी: वर्षा तुम्हारी नखरे करने की आदत नहीं गई। चुदवाती भी हो और नखरे भी करती हो। मुझे नहीं चुदवाना।
अंकल जी मेरी मम्मी के पीछे मेरी मम्मी की गांड पर अपना लंड लगाते हैं और मेरी मम्मी का मुंह पकड़ के मेरी मम्मी को अपनी ओर टर्न करने की कोशिश करते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा इधर देखो ना मेरी ओर।”
मम्मी ने कहा
“नहीं अंकल जी तुम प्लीज जाओ।”
अंकल जी मेरी मम्मी की एक नहीं सुनते और मेरी मम्मी को अपनी ओर घुमा के मेरी मम्मी के होठों को चुमने की कोशिश करते हैं।
मेरी मम्मी एक और बार कोशिश करती है और अंकल जी को अपने ऊपर से हटा के जाने लगती है। पर अंकल जी मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लु पकड़ लेते हैं जिससे मेरी मम्मी बेड के पास ही रुक जाती है।
अंकल जी फिर एक बार मेरी मम्मी की ओर कदम बढ़ा देते हैं और मेरी मम्मी भी पीछे हटने लगती है। मेरी मम्मी दीवार के सहारे खड़ी हो जाती है।
अंकल जी मेरी मम्मी के कंधे पर अपना एक हाथ रखते हैं और दूसरे से मेरी मम्मी के पेट को मसल देते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा क्यों आप खुद भी तड़प रही हो और मुझे भी तड़पा रही हो। आपकी प्यास में अच्छी तरह से जानता हूँ। पिछले 6 महीनों से जानता हूँ आप चुदवाने के तड़पती हो और मुझे चुदवाती हो। लेकिन चुदवाने से पहले नखरे करती हो। और तुम्हारी इस नखरे करने की आदत पर मैं तुम पर फिदा हूँ। मुझे तुम्हारा ये नखरे बहुत पसंद है वर्षा। अब आ जाओ और मत तड़पाओ।”
मम्मी ने कहा
“श्श आह योगेश जी मुझे जाने दो। मेरी आज तबीयत ठीक नहीं है। रात को आप आज मेरा घर और फिर कर लेना।”
अंकल जी ने कहा
“नहीं वर्षा मैं जानता हूँ तू नखरे कर रही हो। तुम्हारी चूत में आग लगी हुई है। जिसे अभी ही शांत करना जरूरी है। नहीं तो तुम बीमार हो जाएगी। और अंकुश ने मुझे तेरी चूत की आग को ठंडा करने की जिम्मेदारी दी है। मुझे से आपको तड़पता देख रहा नहीं जाता वर्षा। आज मैं आपकी प्यास शांत कर के ही तुम्हें तुम्हारे घर भेजूँगा।”
और अंकल जी इतना कह कर मेरी मम्मी को फिर से बेड पर धकेल देते हैं और मेरी मम्मी के पास बैठ कर अपनी टीशर्ट उतार फेंकते हैं। मेरी मम्मी अंकल जी को लगातार मना कर रही है। पर अंकल जी जानते हैं ये अंकुश की वजह से शर्मा रही है।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा तुम अंकुश की वजह से शर्मा रही हो।”
मम्मी ने कहा
“मुझे अच्छा नहीं लगता वो बाहर बैठा है। वो मेरा बेटा है।”
अंकल जी ने कहा
“उसे मैंने बोल दिया है वो अंदर नहीं आएगा।”
और अंकल जी मेरी मम्मी के पेटीकोट को ऊपर करके पेटीकोट में अपना हाथ डालने लगते हैं।
मेरी मम्मी अंकल जी का हाथ रोकती है। पर अंकल जी को अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी तक लेने में कोई ज्यादा समय नहीं लगता। मेरी मम्मी की पैंटी पूरी तरह भीगी हुई है। जिसे देख अंकल जी के चेहरे पर हंसी आ जाती है। अंकल जी की चूत पर हाथ फेरने से मेरी मम्मी का विरोध भी सिर्फ नाम मात्र का ही रह जाता है।
अंकल जी अपना हाथ मेरी मम्मी की चूत पर ही फेरते रहते हैं और मेरी मम्मी के ऊपर आ जाते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा क्यों बहाना कर रही हो। आपकी चूत में तो सैलाब आया हुआ है।”
ये कह कर अंकल जी मेरी मम्मी की पैंटी में अपना हाथ डाल के मेरी मम्मी की चूत को सहलाने लगते हैं।
“देखना चाहती हो आप कितनी प्यासी हो।”
अंकल जी अपने उंगलियों को रोक मेरी मम्मी के होठों के पास अपने होठ लाते हैं। अंकल जी के रुकने से मेरी मम्मी की आंख खुल अंकल जी को देखती है। अंकल जी को इतना पास पाकर मेरी मम्मी अंकल जी को ना रुकने को कहना चाहती है पर शर्म की वजह से कुछ कहती नहीं। क्योंकि मेरी मम्मी कभी कभी तो एकदम वेश्या बन जाती है और कभी कभी एक संस्कारी और शर्माती है। जब कि अंकल जी से उनगनात बार चुदवा चुकी है।
अंकल जी अपने होठ मेरी मम्मी के ओर करीब ले आते हैं जिसे देख मेरी मम्मी भी अपना मुंह ऊपर को उठा के अंकल जी के होठों को चूमने की कोशिश करती है। पर अंकल जी झट से पीछे हो जाते हैं।
एक दो बार अंकल जी ऐसे ही मेरी मम्मी को तड़पाते हैं जिससे मेरी मम्मी की झुनझलाहत और बढ़ जाती है। फिर अचानक अंकल जी मेरी मम्मी के करीब आते हैं। पर इस बार वो पीछे नहीं हटते और मेरी मम्मी के रस से भरे होठों को जंगली जानवर की तरह चूसने लगते हैं।
मेरी मम्मी भी अपना मुंह खोल अंकल जी को पूरो सपोर्ट कराने लगती है।
दोपहर को मम्मी की नींद खुली तो मम्मी ने कहा
“बेटा, खाना बना देती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं मार्केट से ले आता हूँ।”
मम्मी बहुत खुश हुई। फिर हम दोनों साथ में खाना खा बैठे।
मैंने कहा
“मम्मी, आज अंकल जी ने हमें अपने घर बुलाया है।”
मम्मी ने कहा
“क्यों बुलाया?”
मैंने कहा
“मम्मी, अंकल जी केक लाए थे। वो काटेंगे।”
मम्मी ने कहा
“क्या उनका बर्थडे है?”
मैंने कहा
“नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“तो फिर क्यों बुलाया?”
मैंने कहा
“मम्मी, मैंने अंकल जी से प्रॉमिस किया है कि आप और मैं चलेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरा सिर दर्द हो रहा है। मैं नहीं जा पाऊंगी।”
मैंने कहा
“प्लीज मम्मी, आप टैबलेट ले लो। चलिए। मैंने अंकल जी से प्रॉमिस किया है।”
मम्मी ने कहा
“ठीक है। कितने बजे चलना है?”
मैंने कहा
“मम्मी, 5 बजे को।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, 4 बजे हो चुके हैं।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप टैबलेट ले लो और तैयार हो जाओ।”
मम्मी ने कहा
“ओके बेटा, मैं टैबलेट ले लेती हूँ। तुम ला दो।”
फिर मैंने मम्मी को टैबलेट दी और पानी के साथ मम्मी ने टैबलेट ले ली।
फिर मम्मी बोली
“बेटा, नहाकर आती हूँ।”
मैंने कहा
“ओके मम्मी।”
फिर मम्मी नहाने चली गई। थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे आवाज दी तो मैं मम्मी के रूम में गया। तो देखा मम्मी बाथरूम से बाहर निकली है और मम्मी ने अपने सुंदर मखमली बदन पर टॉवेल लपेट रखा है।
मैं मम्मी के पास गया तो मैं बोला
“मम्मी, आपने बुलाया?”
मम्मी मेरी तरफ पलटी और बोली
“हां बेटा।”
मम्मी के बदन पर टॉवेल ने मम्मी के स्तनों से मम्मी की चूत तक कवर कर रखा था।
मैंने कहा
“बोलिए मम्मी, क्यों बुलाया?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरी पीठ पर क्रिम लगा दे।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। लेकिन आप तो टॉवेल…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, टॉवेल तो हटा देती हूँ।”
और मम्मी ने अपनी टॉवेल हटा दी। मम्मी के टॉवेल हटाते ही मम्मी एकदम नंगी हो गई।
मैंने मम्मी को नंगी देखकर दूसरी तरफ मुड़ गया तो मम्मी बोली
“बेटा, तुम पीछे क्यों मुड़ा?”
मैंने कहा
“मम्मी, वो आपने…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, क्या?”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने अंडरगारमेंट्स…”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं मां हूँ तेरी। इसमें मुझे से क्या शर्माना। मैं तेरे सामने क्या आज पहली बार बिना कपड़ों के खड़ी हूँ। पहले भी तो बिना कपड़ों के खड़ी हुई हूँ और मैंने ही तो तुझे जन्म दिया है और अपना दूध पिलाया है। और तू शर्मा क्यों रहा है?”
मैंने कहा
“मम्मी, प्लीज आप कपड़े पहन लो।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं पहन लेती पर अब तो नहीं पहनूंगी। मेरी तरफ देख और मुझे पकड़ कर मेरा मुंह अपनी तरफ करवाया।”
फिर मम्मी ने कहा
“मेरी पीठ पर क्रिम लगा दे।”
फिर मैंने क्रिम उठाई और मम्मी की पीठ पर लगा दी।
और बाहर आने लगा तो मम्मी ने मुझे रोका और बोली
“बेटा, तुम नाराज हैं?”
मैंने कहा
“नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“तो फिर जा क्यों रहा है। बैठ मेरे पास।”
फिर मैं बेड पर बैठ गया और मम्मी ने अलमारी से अपनी ब्रा पैंटी निकाली और मम्मी ने पहले ब्रा पहनी और फिर पैंटी पहनने लगी। तो मम्मी ने देखा मेरी तरफ की मैं लगातार उनकी चूत को देख रहा हूँ।
मम्मी ने कहा
“बेटा, अंकुश।”
मै एकदम ध्यान से निकल कर देखा
मम्मी ने कहा
“बेटा, क्या देख रहा है?”
मैंने कहा
“वो… वो… मम्मी मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, हकला क्यों रहा है?”
मैंने कहा
“मम्मी, कुछ नहीं।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, डर मत। मैं मां हूँ तेरी। मुझे से डरने की जरूरत नहीं है। मैं हमेशा तेरा ही साथ दूंगी। तू मेरे कलेजा का टुकड़ा है। बोल बेटा, डर मत। क्या देख रहा था?”
मैंने कहा
“कुछ नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं जानती हूँ तू मुझे ही देख रहा था। बोल बेटा, अपने मन में जो भी बता। बेटा, क्या देख रहा था?”
मैंने कहा
“कुछ नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“अच्छा तो मैं झूठ बोल रही हूँ। सच बता बेटा।”
मैंने कहा
“वो मम्मी, आप नाराज हो जाएंगी।”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, मैं कभी तुझसे नाराज नहीं हूँगी।”
मैंने कहा
“वो मम्मी, आप मुझे हर महीने सुबह पर बालों की केयर करवाने भेजती हो।”
मम्मी ने कहा
“हां बेटा।”
मैंने कहा
“क्यों मम्मी हर महीने बालों की केयर करवाना?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, हर चीज की एक लिमिट होती है। इसलिए क्योंकि जब बाल बड़े हो जाएं तो उनको कटवाना चाहिए। नहीं तो सिर में पसीना आता है। और बालो की केयर करनी पड़ती है। जैसे मैं अपने बालों की केयर करती हूँ क्योंकि मैं औरत हूँ और औरतों के बाल बड़े होते हैं। लेकिन बेटा केयर नहीं करते तो इंफेक्शन हो सकता है।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। लेकिन…”
मम्मी ने कहा
“लेकिन क्या बेटा।”
मम्मी ने कहा
“बोल बेटा, चुप मत रहो।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप उस दिन शेविंग का सामान क्यों लाई हो। आपके तो दाढ़ी मूंछ नहीं आती।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, वो मेरे प्राइवेट पार्ट्स पर बाल होते हैं। जैसे की ये।”
मम्मी ने अपना सर नीचे किया और इशारे से बताया क्योंकि मम्मी की चूत पर बाल थे छोटे छोटे।
मैंने कहा
“क्या मम्मी, आप खुद शेविंग करती हो?”
मम्मी ने कहा
“नहीं।”
मैंने कहा
“तो आप लाई क्यों?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, अब करूंगी।”
मैंने कहा
“लेकिन मम्मी, आपने क्या अभी तक शेविंग नहीं की तो आपके बाल तो बहुत बड़े होने चाहिए।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं केची से कट लेती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने शेविंग क्यों नहीं की केची से करने के बजाय?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मुझे केची से ही कटना आता है। मैंने कभी रेजर ब्लेड यूज नहीं किया। इसलिए मुझे डर लगता है कहीं कट नहीं लग जाए।”
मैंने कहा
“तो मम्मी, फिर आप पापा को भी बोल सकती थीं। वो तो आपके पति हैं और पति-पत्नी तो…”
मम्मी ने कहा
“हां बेटा, मैंने कई बार पिछले 20 सालों में कई बार बोला। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बोलते हैं क्या मैं तेरे बाप का नौकर हूँ और मुझे मारते पीटते हैं।”
मैंने कहा
“मम्मी, फिर आप क्या विट क्रिम का यूज क्यों नहीं करती हूँ?”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैंने कभी यूज नहीं की।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं आपका बेटा हूँ। यदि आप आदेश दे तो क्या मैं आपके बाल साफ कर दूँ?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, तू मेरा बेटा है। और बेटे से पति वाला काम कराना पाप है।”
मैंने कहा
“मम्मी, नहीं तो आपको इंफेक्शन हो सकता है बालों से।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, अब क्या करूँ?”
मैंने कहा
“मम्मी, आप चाहे तो अपनी लेडीज फ्रेंड से।”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, वो पूछेंगी तेरा पति से करा लेती तो मैं क्या जवाब दूँगी।”
मैंने कहा
“सही कह रही हो मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, तू चिंता मत कर।”
मैंने कहा
“मम्मी, आप अंकल जी के प्यार को एक्सेप्ट कर लो। वो आपको बहुत प्यार करेंगे।”
मम्मी ने कहा
“नेवर बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी, फिर आप बाल सैव कैसे करोगी?”
मम्मी ने कहा
“मुझे साफ करने की जरूरत नहीं है। मैं केची से कट लेती हूँ।”
मैंने कहा
“मम्मी, प्लीज आप अपने बाल साफ करो।”
मम्मी ने कहा
“क्यों बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी, मैं चाहता हूँ आपके बाल साफ हो ताकि आपको इंफेक्शन न हो।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मैं साफ करा लूंगी।”
मैंने कहा
“मम्मी, किससे पापा कराएंगे नहीं। आपसे होंगे नहीं।”
मम्मी ने कहा
“तेरे पापा से।”
मैंने कहा
“मम्मी, आपने तो कहा पापा ने मना कर दिया है और वो आपको पिटेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटे, तेरे पापा ही करा लूंगा। और पापा वो होता है जो मम्मी को प्यार करे। पापा पापा होता है। और उस औरत के बच्चे का पापा ही पापा कहलाता है।”
मैंने कहा
“समझा नहीं मम्मी।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, पिता उसे ही कहते हैं जो मम्मी को प्यार करे।”
मैंने कहा
“साफ साफ कहिए। मैं समझा नहीं।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, मेरे बाल साफ हो जाएंगे।”
मैंने कहा
“क्या आप करोगी?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा, तेरे पापा।”
मैंने कहा
“मम्मी, वो तो नहीं करेंगे।”
मम्मी ने कहा
“बेटा, बोला ना पापा उसे बोलते हैं जो मम्मी को प्यार करे।”
मैंने कहा
“मम्मी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। आप क्या बोल रही हैं। क्या आप अंकल जी का प्यार एक्सेप्ट करोगी?”
मम्मी ने कहा
“नहीं बेटा। लेकिन मेरे बाल साफ हो जाएंगे। अब तू अपने दिमाग पर जोर मत डाल। तेरी समझ में नहीं आएगा।”
फिर मम्मी ने मेरे सामने ही अपनी पैंटी पहनी।
मम्मी मेरे सामने ब्रा पैंटी में खड़ी थी।
फिर मम्मी ने कहा
“बेटा, आज क्या पहनू?”
मैंने कहा
“जो आप चाहे मम्मी पहन लो।”
फिर मम्मी ने अलमारी से एक ब्लैक कलर की साड़ी पेटीकोट ब्लाउज निकाली और पहनने लगी। फिर मम्मी ने अपना मेकअप करने लगी। मैं मम्मी के रूम से बाहर आ गया।
फिर मम्मी अपने रूम से बाहर निकली। ब्लैक कलर की साड़ी में मेरी मम्मी का गोरा बदन ऐसा चमक रहा था जैसे वो अभी-अभी स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा हो।
मम्मी ने कहा
“ठीक है बेटा, चल। लेकिन मैं ज्यादा देर नहीं रुकूंगी। अंकल जी के घर।”
मैंने कहा
“जी मम्मी। बस 10 मिनट में वापस आ जाएंगे।”
और हम अंकल जी के घर के लिए अपने घर के पीछे वाले दरवाजे से निकले और अंकल जी के घर का पीछे वाला गेट खटखटाया। अंकल जी समझ गए कि हम ही आए हैं।
अंकल जी जैसे ही दरवाजा खोलता है अंकल जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। सामने मेरी मम्मी को देखकर अंकल जी अपने होश खो बैठे और मेरी मम्मी को ही देखते रह गए।
ब्लैक कलर की साड़ी में मेरी मम्मी का गोरा बदन ऐसा चमक रहा था जैसे वो अभी-अभी स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा हो। अंकल जी मेरी मम्मी के सुंदरता में खो चुके थे। अंकल जी को कोई होश नहीं था।
मेरी मम्मी ने कहा
“अब क्या गेट पर ही खड़ा रखना है?”
अंकल जी ने कहा
“ओह सॉरी वर्षा। अपने होश में वापस आए। आप प्लीज अंदर आइए ना। और अंकुश तुम भी आओ।”
जैसे ही मैं और मेरी मम्मी अंदर जाते हैं हमें पूरा रूम सजाया हुआ दिखता है। टेबल पर एक केक और बीयर की बोतल रखी है। मेरी मम्मी को थोड़ा अजीब भी लगता है पर वो अंदर आ कर बैठ जाती है। क्योंकि मम्मी को बीयर पसंद नहीं है।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, क्या लेंगे आप?”
मम्मी ने कहा
“कुछ नहीं। अंकल जी आप तो ऐसे पूछ रहे हैं जैसे हम आपके गेस्ट हैं और पहली बार आए हैं।”
अंकल जी ने कहा
“हां सॉरी मैं तो भूल गया। पर अब आपका सिर दर्द कैसा है मम्मी मैंने मेरी तरफ देखा क्योंकि ये सिरदर्द वाली बात अंकल जी को कैसे पता चली। मैं अपना सर नीचे कर लिया।”
मम्मी ने कहा
“हां पहले से आराम है।”
अंकल जी अंदर गए और मैं मम्मी सोफे पर बैठे थे। अंकल जी एक ट्रे में 2 ग्लास पानी लाए पास आते ही अंकल जी की नजर मेरी मम्मी की क्लिवेज पर अटक जाती है।
मेरी मम्मी के स्तन देख अंकल जी अपने लंड को सख्त होने से रोक नहीं पाते। मेरी मम्मी भी अंकल जी को अपने स्तन घूमते हुए देख कर थोड़ा मुस्कुराते हैं और अपनी साड़ी का पल्लू सही कर लेती हैं। क्योंकि मेरी मम्मी अंकल जी को तड़पाना चाहती है।
मम्मी ने कहा
“योगेश जी, मुझे जल्दी जाना है तो प्लीज थोड़ा जल्दी कर लो।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, अभी तो आई हो आप। अभी से जाना को कह रही हो। पहले थोड़ा सेलिब्रेट तो कर लो।”
ये कह कर अंकल जी ग्लास में बीयर डालने लगते हैं।
मम्मी ने कहा
“योगेश जी, ये क्या कर रहे हो। मैं शराब नहीं पीती।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, ये शराब नहीं है बीयर है।”
मम्मी ने कहा
“हां बट मैं ये सब नहीं पीती।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा, आज मना मत करो ना प्लीज।”
मम्मी ने कहा
“सॉरी योगेश जी लेकिन मैं ये नहीं पी सकती। बस।”
अंकल जी ने कहा
“ओके वर्षा, जैसी आपकी मरजी। पर मेरा साथ देने के लिए कोल्ड ड्रिंक तो ले ही सकते हो ना आप।”
मम्मी ने थोड़ा सोचने के बाद कहा
“ठीक है डाल दो।”
अंकल जी ने कहा
“अंकुश बेटा तुम तो बीयर लो हे।”
मैं कुछ बोलता उससे पहले ही मम्मी ने कहा
“नहीं वो बीयर नहीं लेगा। आप उसे भी कोल्ड ड्रिंक्स दो।”
और मुझे टॉयलेट जाना है। मैं आती हूँ। और फिर मम्मी टॉयलेट गई।
फिर अंकल जी मम्मी के जाते ही मम्मी के ग्लास में बीयर डाल देते हैं और मुझे पूछते हैं
अंकल जी: बेटा तुम कोल्ड ड्रिंक या बीयर लेगा। अब बताओ अब तो वर्षा नहीं है।
मैंने कहा
“अंकल जी थोड़ी कोल्ड ड्रिंक थोड़ी बीयर मिक्स।”
अंकल जी ने कहा
“शाबाश बेटा। लेकिन तेरी मम्मी को तो फुल बीयर के नशे में चोदूंगा। ब्लैक साड़ी में तेरी मम्मी का बदन कैसे अप्सरा लग रहा है। आज तो उसे पूरी रात चोदना है मुझे। बेटा आज तू कैसे भी करके इसे पूरी रात के लिए। मैं घर ही रुकवाना।”
मैंने कहा
“लेकिन पापा रात को घर आएंगे।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा वो तेरा काम है। वो तू संभालना। लेकिन आज पूरी रात वर्षा मेरे घर रहेगी। अभी 5 बजे है। सुबह 8 बजे तक पूरे 15 घंटे में वर्षा के साथ रहना चाहता हूं।”
मैंने कहा
“ओके अंकल जी एनजॉय करो। पापा को मैं बोल दूंगा। आज तो दोस्त के घर आए हैं। सुबह ही आएंगे।”
अंकल जी ने कहा
“शाबाश बेटा।”
फिर अंकल जी ने मम्मी के ग्लास में एक टैबलेट डाली।
मैंने कहा
“अंकल जी ये टैबलेट क्या है।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा ये वियाग्रा है। इससे नशा बढ़ेगा। आज पूरी रात चोदना है। तेरी मम्मी को साली ने आते ही लंड खड़ा कर दिया।”
मैंने कहा
“अंकल जी आपको वियाग्रा मम्मी के सामने ही मिलानी थी।”
अंकल जी ने कहा
“वो आज थोड़ी नाराज है। वो आज मुझे से नहीं चुदना चाहती है। इसलिए मैं उसे वियाग्रा से गरम करूंगा। फिर वो मुझे से चुद जाएगी। रात को थोड़ी नाराज हो गई थी वो।”
मैंने कहा
“जी अंकल जी मम्मी सिर्फ आपकी है। आपको जो करना है करो।”
फिर मम्मी टॉयलेट से आ गई। और आने के बाद हल्की हल्की सिप ले कर ड्रिंक पीने लगती है। जिसे देख अंकल जी मन ही मन खुश हो जाते हैं।
मम्मी पहले ही एक टैबलेट खा कर आई थी सिर दर्द की और अब दूसरी टैबलेट वियाग्रा की भी अंकल जी ने धोखे से उसे खिला दी। ना चाहते हुए भी मेरी मम्मी का शरीर गरम होने लगता है।
अंकल जी मुझे दूसरी तरफ मुंह कराने का इशारा करते हैं। मैं समझ गया मेरे सामने मम्मी कुछ नहीं करेगी। इसलिए मैं उठा मम्मी के बगल से।
मम्मी ने कहा
“कहां जा रहा है बेटा।”
मैंने कहा
“मम्मी वो मैं अंकल जी के लैपटॉप में मूवी देखता हूँ।”
और पास में रखे दूसरे सोफे पर अंकल जी का लैपटॉप लेकर बैठ गया और ईरफोन लगा लिए और एक मूवी स्टार्ट कर दी।
मैं इस तरह बैठा था मम्मी की तरफ। मेरी पीठ थी। मम्मी को लगेगा मैं उन्हें नहीं देख रहा हूँ। और मेरे कानों में ईरफोन थे। लेकिन मैं भी मम्मी को देख नहीं सकता था। बल्कि मम्मी मुझे देख सकती है। मैं मम्मी के आगे आ गया। लेकिन मैं जहां बैठा था वहां एक बड़ा मिरर है जिससे मैं पीछे का मतलब मम्मी अंकल जी को देख रहा था।
मम्मी आरम से बीयर पी रही थी। चुसते चुसते अचानक अंकल जी ने मेरी मम्मी के स्तनों के थोड़ा ऊपर मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू नीचे कर के अपना हाथ रख देते हैं।
मम्मी ने कहा
“ये क्या कर रहे हो योगेश जी। अंकुश सामने बैठा है।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा शायद कुछ लगा है आपके। और अंकुश ने तो ईरफोन लगा रखे हैं। और वो मूवी देखने में व्यस्त है। उसे कुछ नहीं दिख रहा है और सुनाई भी नहीं दे रहा है।”
(मेरी मम्मी भी नीचे नजर कर के देखती है।)
मम्मी ने कहा
“ये तो तिल है। क्या आप उसे पहली बार देख रहे हो। क्या पिछले 6 महीनों से नहीं देखा।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा और कहां कहां है आपके तिल। वैसे एक तिल और देखा था मैंने।”
मम्मी ने कहा
“जानती हूँ आप क्या तिल की बात कर रहे हो। आप तिल देखने के बहाने मुझे नंगी करोगे। आज मैं आपको कुछ नहीं करने दूंगी। और अब आप तिल बिल को छोड़ो। आज कुछ नहीं दूंगी आपको। और अब केक काटो और मुझे जाने दो। वैसे आज आपका बर्थडे भी नहीं फिर केक क्यों काट रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“केक तो एक बहाना मेरी जान से मिलने का। बस आपको देखने की इच्छा ही थी। तो केक ले आया।”
मम्मी ने कहा
“क्या पिछले 6 महीनों से नहीं देख रहे हो सब देख रहे हो और कर भी रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“ठीक है काटो केक और आज पूरी रात यहीं रुकना है।”
और अंकल जी केक लाए और टेबल पर रखा और मम्मी को बोले काटो।
मम्मी ने कहा
“मैं क्यों काटूँ। आप काटिए।”
और मम्मी को आवाज देने लगी।
मम्मी ने कहा
“अंकुश बेटा।”
मैंने साफ सुन रहा था। मैंने कानों में ऐसे ही ईरफोन लगा रखे थे। लेकिन आवाज तो आ रही थी। मैं तो सिर्फ उन दोनों की बातें सुन रहा था। जब मम्मी ने आवाज दी तो मैं कुछ नहीं बोला। जानबूझकर ताकि मम्मी को लगे मैं कुछ भी नहीं सुन रहा हूँ।
अंकल जी ने कहा
“वो नहीं सुनेगा ईरफोन की वजह से। आओ वर्षा हम दोनों केक काटते हैं।”
और फिर अंकल जी मेरी मम्मी के पास बैठ जाते हैं और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ा और केक काटा। अंकल जी मेरी मम्मी को केक खिलाने लगते हैं।
मम्मी ने कहा
“आप केक लाए हो इसलिए पहले आप केक खाओ।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा तो खिला तो मुझे अपने हाथों से केक।”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा
“हां खिलाती हूँ। लो खाओ।”
और मम्मी केक का एक टुकड़ा उठाती है और अंकल जी के मुंह में डालती है तो अंकल जी मेरी मम्मी की उंगली भी लिक करते हैं जिससे मेरी मम्मी के शरीर में एक अलग सा करंट दौड़ जाता है। मम्मी ने कहा
“मेरी उंगली क्यों चाट रहे हो।”
अंकल जी ने कहा
“तुम्हारी उंगली बहुत मीठी है। स्वादिष्ट है। इसलिए।”
और फिर अंकल जी केक का एक टुकड़ा मम्मी को खिलाते हैं जो मम्मी के होठों पर लग जाता है तो
मम्मी अपने होठों को रुमाल से साफ करने लगती है तो अंकल जी मम्मी को रोकते हैं और बोलते हैं
अंकल जी: नहीं अपने होठों को रुमाल से साफ नहीं करते।
मम्मी ने कहा
“तो किससे साफ करते हैं।”
अंकल जी ने कहा
“बताता हूँ।”
और अंकल जी अपना मुंह मेरी मम्मी के होठों के पास लाते हैं और अंकल जी अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों से लगाकर मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। मम्मी थोड़ा विरोध करती है और बोलती है
“अंकुश के सामने नहीं।”
अंकल जी ने कहा
“अंकुश को कुछ नहीं दिख रहा है।”
और अंकल जी फिर से मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। और फिर मम्मी भी अंकल जी के लिए अपने होठों को अंकल जी के होठों से चुसवाने के लिए अपना मुंह खोल देती है और अंकल जी मेरी मम्मी के होठों का रस पान कराने लगते हैं।
मेरी मम्मी मुंह खोलने के बाद भी मना करती है। एक तरफ मम्मी अपना मुंह खोलकर अपने होठों को चूसवा भी रही थी और बार बार नखरे भी कर रही थी अंकुश देख लेगा।
फिर अंकल जी मेरी मम्मी को वहीं सोफे पर लिटाकर मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू गिरा देते हैं और मेरी मम्मी के पेट पर किस की बौछार करते हैं।
मेरी मम्मी मना करने लगती है। पर वो जानती है कि अगर अभी अंकल जी को नहीं रोका तो बहुत देर हो जाएगी। और मेरी मम्मी को मेरा भी देखने का डर था कहीं मैं पीछे मुड़ कर न देख लूं। हालांकि मम्मी जानती है मैं उन्हें यहां चुदवाने लाया हूं।
पर मां हमेशा बेटे के सामने कभी अपने पति के साथ भी शर्माती है। पर यहां तो अंकल जी के साथ रंगरेलियां मना रही है तो मम्मी को शर्म आएगी ही। इसलिए वो अंकल जी को अपने ऊपर से धकेलती है।
मम्मी ने कहा
“अंकल जी मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मुझे जाना है।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा अचानक क्या हुआ। कुछ देर और रुको ना।”
मम्मी ने कहा
“मेरे सर में दर्द है अंकल जी।”
अंकल जी ने कहा
“वर्षा कुछ देर आराम कर लो फिर चले जाना। मेरी इतनी बात मान लो प्लीज।”
मेरी मम्मी को कुछ समझ नहीं आता। उनके शरीर की आग बहुत भड़क चुकी है क्योंकि अंकल जी ने वियाग्रा दी थी। जिसे वो शांत करना चाहती है। पर मेरी मम्मी मेरे सामने वो कुछ नहीं कर सकती।
मम्मी ने कहा
“अंकल जी प्लीज रूम में चलते हैं। यहां अंकुश है। मुझे शर्म आ रही है।”
अंकल जी ने कहा
“ठीक है चलो वर्षा।”
और फिर मेरी मम्मी उठ कर अंदर रूम में चली जाती है और बेड पर लेट जाती है। और लेने भर से उसे आराम कहां मिलने वाला था। क्योंकि वियाग्रा तो अपना असर दिखाएगी ही। जब तक चुदाई नहीं होगी मम्मी को आराम नहीं मिलेगा। मैं और अंकल जी दोनों ही बाहर से मेरी मम्मी को अपने पैरों को आपस में रगड़ रही है और वो साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत को रगड़ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मम्मी का मन कर रहा है कि अभी अपनी चूत में उंगली डाल ले। मैं अंकल जी से बोला
मैं: अंकल जी आप जाकर मेरी मम्मी की प्यास बुझा दो। मुझे मम्मी की तड़प बेचैन नहीं दिख रही है।
अंकल जी ने कहा
“ये वियाग्रा का असर है बेटा।”
और मैं अंकल जी दोनों ही बाहर विंडो से मम्मी की बेचैन तड़प को बाहर से देख रहे थे और अंकल जी मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।
अंकल जी ने कहा
“बेटा आज तेरी मम्मी को पूरी रात रगड़ रगड़ के चोदूंगा। सुबह ये ढंग से चल भी नहीं पाएगी।”
मैंने कहा
“अंकल जी आप जैसा चाहो वेवा करो। मम्मी को पूरी रात चोदो। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैंने 6 महीने पहले ही मम्मी को आपके हवाले कर दिया है। अब मम्मी सिर्फ आपकी है।”
अंकल जी ने कहा
“बेटा अब मैं रूम में जाता हूँ और तेरी मम्मी को चोदूँगा।”
और अंकल जी रूम में गए और बेड के पास जाकर मेरी मम्मी को जो बेड पर लेटी थी मेरी मम्मी की टांगों को चूमना शुरू कर देते हैं।
मेरी मम्मी के मुंह से सिसकियां निकलने लगती हैं। पर वो अब भी अंकल जी को मना करती है।
अंकल जी जानते हैं कि मेरी मम्मी अब नखरे कर रही है जो मेरी मम्मी की पुरानी आदत है। और वो बोलते हैं
अंकल जी: वर्षा तुम्हारी नखरे करने की आदत नहीं गई। चुदवाती भी हो और नखरे भी करती हो। मुझे नहीं चुदवाना।
अंकल जी मेरी मम्मी के पीछे मेरी मम्मी की गांड पर अपना लंड लगाते हैं और मेरी मम्मी का मुंह पकड़ के मेरी मम्मी को अपनी ओर टर्न करने की कोशिश करते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा इधर देखो ना मेरी ओर।”
मम्मी ने कहा
“नहीं अंकल जी तुम प्लीज जाओ।”
अंकल जी मेरी मम्मी की एक नहीं सुनते और मेरी मम्मी को अपनी ओर घुमा के मेरी मम्मी के होठों को चुमने की कोशिश करते हैं।
मेरी मम्मी एक और बार कोशिश करती है और अंकल जी को अपने ऊपर से हटा के जाने लगती है। पर अंकल जी मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लु पकड़ लेते हैं जिससे मेरी मम्मी बेड के पास ही रुक जाती है।
अंकल जी फिर एक बार मेरी मम्मी की ओर कदम बढ़ा देते हैं और मेरी मम्मी भी पीछे हटने लगती है। मेरी मम्मी दीवार के सहारे खड़ी हो जाती है।
अंकल जी मेरी मम्मी के कंधे पर अपना एक हाथ रखते हैं और दूसरे से मेरी मम्मी के पेट को मसल देते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा क्यों आप खुद भी तड़प रही हो और मुझे भी तड़पा रही हो। आपकी प्यास में अच्छी तरह से जानता हूँ। पिछले 6 महीनों से जानता हूँ आप चुदवाने के तड़पती हो और मुझे चुदवाती हो। लेकिन चुदवाने से पहले नखरे करती हो। और तुम्हारी इस नखरे करने की आदत पर मैं तुम पर फिदा हूँ। मुझे तुम्हारा ये नखरे बहुत पसंद है वर्षा। अब आ जाओ और मत तड़पाओ।”
मम्मी ने कहा
“श्श आह योगेश जी मुझे जाने दो। मेरी आज तबीयत ठीक नहीं है। रात को आप आज मेरा घर और फिर कर लेना।”
अंकल जी ने कहा
“नहीं वर्षा मैं जानता हूँ तू नखरे कर रही हो। तुम्हारी चूत में आग लगी हुई है। जिसे अभी ही शांत करना जरूरी है। नहीं तो तुम बीमार हो जाएगी। और अंकुश ने मुझे तेरी चूत की आग को ठंडा करने की जिम्मेदारी दी है। मुझे से आपको तड़पता देख रहा नहीं जाता वर्षा। आज मैं आपकी प्यास शांत कर के ही तुम्हें तुम्हारे घर भेजूँगा।”
और अंकल जी इतना कह कर मेरी मम्मी को फिर से बेड पर धकेल देते हैं और मेरी मम्मी के पास बैठ कर अपनी टीशर्ट उतार फेंकते हैं। मेरी मम्मी अंकल जी को लगातार मना कर रही है। पर अंकल जी जानते हैं ये अंकुश की वजह से शर्मा रही है।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा तुम अंकुश की वजह से शर्मा रही हो।”
मम्मी ने कहा
“मुझे अच्छा नहीं लगता वो बाहर बैठा है। वो मेरा बेटा है।”
अंकल जी ने कहा
“उसे मैंने बोल दिया है वो अंदर नहीं आएगा।”
और अंकल जी मेरी मम्मी के पेटीकोट को ऊपर करके पेटीकोट में अपना हाथ डालने लगते हैं।
मेरी मम्मी अंकल जी का हाथ रोकती है। पर अंकल जी को अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी तक लेने में कोई ज्यादा समय नहीं लगता। मेरी मम्मी की पैंटी पूरी तरह भीगी हुई है। जिसे देख अंकल जी के चेहरे पर हंसी आ जाती है। अंकल जी की चूत पर हाथ फेरने से मेरी मम्मी का विरोध भी सिर्फ नाम मात्र का ही रह जाता है।
अंकल जी अपना हाथ मेरी मम्मी की चूत पर ही फेरते रहते हैं और मेरी मम्मी के ऊपर आ जाते हैं।
अंकल जी ने कहा
“वर्षा क्यों बहाना कर रही हो। आपकी चूत में तो सैलाब आया हुआ है।”
ये कह कर अंकल जी मेरी मम्मी की पैंटी में अपना हाथ डाल के मेरी मम्मी की चूत को सहलाने लगते हैं।
“देखना चाहती हो आप कितनी प्यासी हो।”
अंकल जी अपने उंगलियों को रोक मेरी मम्मी के होठों के पास अपने होठ लाते हैं। अंकल जी के रुकने से मेरी मम्मी की आंख खुल अंकल जी को देखती है। अंकल जी को इतना पास पाकर मेरी मम्मी अंकल जी को ना रुकने को कहना चाहती है पर शर्म की वजह से कुछ कहती नहीं। क्योंकि मेरी मम्मी कभी कभी तो एकदम वेश्या बन जाती है और कभी कभी एक संस्कारी और शर्माती है। जब कि अंकल जी से उनगनात बार चुदवा चुकी है।
अंकल जी अपने होठ मेरी मम्मी के ओर करीब ले आते हैं जिसे देख मेरी मम्मी भी अपना मुंह ऊपर को उठा के अंकल जी के होठों को चूमने की कोशिश करती है। पर अंकल जी झट से पीछे हो जाते हैं।
एक दो बार अंकल जी ऐसे ही मेरी मम्मी को तड़पाते हैं जिससे मेरी मम्मी की झुनझलाहत और बढ़ जाती है। फिर अचानक अंकल जी मेरी मम्मी के करीब आते हैं। पर इस बार वो पीछे नहीं हटते और मेरी मम्मी के रस से भरे होठों को जंगली जानवर की तरह चूसने लगते हैं।
मेरी मम्मी भी अपना मुंह खोल अंकल जी को पूरो सपोर्ट कराने लगती है।


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