24-08-2026, 03:04 PM
बाबाजी बाहर से तो सांत्वना भरा चेहरा बनाए बैठे थे, लेकिन अंदर से वे मजे ले रहे थे। बाबाजी तो मजे लेने के लिए उससे ये सब पूछ रहा था, वर्ना उस कमीने को सब पता था की रात को केबल वाला ब्लू फिल्म लगाता है , जिसे देखकर वो अपने लंड का पानी कई बार निकाल चुके हैं और गोपाल ने ही उन्हें ये सब बताया था की ब्लू फिल्म देखकर उसने भी कई बार मयूरी से अपना लंड चुसवाया है और फिल्म देखने के बाद ही उसे ये पता चला था की गांड भी मारी जाती है ..वर्ना उसे तो बस यही मालुम था की चूत में ही लंड डाला जाता है ..और जब गोपाल ने ब्लू फिल्म में गांड मारने का सीन देखा था , तब से वो मयूरी के पीछे पड़ा हुआ था की वो भी उससे गांड मरवाए ..पर वो हमेशा मना कर देती थी ..
बाबाजी खुद केबल पर ब्लू फिल्म देख-देखकर कई बार झड़ चुके थे। लेकिन अब मयूरी के मुँह से ये सब सुनकर उनका लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैत्री लिखित कहानी।
मयूरी ने काँपती हुई आवाज़ में आगे कहा:
“पिछले महीने एक रात… जब वो पीकर घर आए तो उन्होंने… उन्होंने ऋचा को अपने कमरे में बुलाया। मैं किचन में थी। काफी देर तक जब ऋचा वापस नहीं आई तो मैं चिंतित होकर कमरे में गई तो नजारा देख के मेरे होश उड़ गए।”
मयूरी की आवाज़ भर्रा गई।
“इन्होंने ऋचा को अपने सीने से चिपका रखा था… और उसे जबरदस्ती चूम रहे थे। उसके गालों पर, गर्दन पर… बाबाजी… वो मेरी बेटी है। सिर्फ़ अठारह साल की।”
बाबाजी के रोंगटे खड़े हो गए - लेकिन अलग वजह से। बाबाजी जी ने जब ये सब सुना तो उनके रोंगटे खड़े हो गए ..इस बारे में तो गोपाल ने आज तक नहीं बताया था .. उसकी माँ को चोदु,साला, हरामी। उनके मन में तुरंत एक विकृत कल्पना घूम गई - गोपाल ने अपनी कमसिन, गुलाब जैसे होंठों वाली बेटी के नाजुक होंठों को कैसे चूसा होगा। उनके लंड ने धोती के अंदर जोर से उछाल मारा।
मयूरी आँसू पोंछते हुए बोली:
“मैंने बड़ी मुश्किल से ऋचा को उनके चंगुल से छुड़ाया। वो बेचारी घबराई हुई, काँप रही थी। भागकर अपने कमरे में चली गई। मैंने उन्हें जी भर कर गालियाँ दीं, लेकिन वो नशे में चूर थे। कोई असर नहीं हुआ। उसी दिन मैंने फैसला कर लिया कि अब तक वो माफी नहीं मांग लेंगे और शराब नहीं छोड़ देंगे, तब तक उनके लिए मेरा जिस्म बंद है।”
मयूरी ने सिर झुकाया, “बाबाजी… एक बार तो मन किया तलाक ले लूँ। पर हम गरीब हैं। तलाक के बाद गुजारा कैसे चलेगा? न अब वो उम्र बची है कि कोई दूसरा जीवनसाथी मिल जाए। इसलिए मन मारकर रोज उनकी शिकायतें सुनती हूँ।” फनलवर द्वारा संपादित।
बाबाजी की आँखों में एक अंधेरी चमक थी। वे मयूरी की पीड़ा का नाटक तो कर रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर ऋचा की कोमल देह और उसके गुलाबी होंठों की कल्पना कर रहे थे।
उन्होंने थोड़ी देर बाद गंभीर स्वर में कहा:
“जो गोपाल ने किया, वो बेहद शर्मनाक और पाप है। लेकिन हो सकता है कि तुम्हारे द्वारा बार-बार दुत्कारे जाने के बाद उसके मन में ऐसे विकृत विचार आए हों। तुम उसे प्यार से समझाओ, शराब छुड़वाने की कोशिश करो। रही बात ऋचा की, तो तुम उसकी चिंता मत करो। मैं गोपाल को भी समझा दूँगा कि अपनी बेटी के बारे में ऐसा सोचना घोर पाप है।”
फिर उन्होंने एक पल रुककर, अपनी योजना को आगे बढ़ाते हुए कहा:
“तुम बस उसकी पढ़ाई की चिंता करो। उसे जितना हो सके पढ़ाओ। अगर चाहो तो उसकी ट्यूशन भी लगवा दो।”
मयूरी ने उदास स्वर में कहा, “पर बाबाजी… अभी इतने पैसे नहीं हैं कि अलग से ट्यूशन लगवा सकूँ।”
बाबाजी की आँखों में विजयी मुस्कान खेल गई। उन्होंने नरम लेकिन दृढ़ स्वर में कहा:
“तुम एक काम करो… ऋचा को रोज दोपहर 2 बजे मेरे पास भेज दो। मैं खुद उसे पढ़ा दूँगा। संस्कृत, अंग्रेजी, गणित - जो भी जरूरत हो। मुफ्त में। आश्रम में ही सब कुछ होगा।”
मयूरी आश्चर्य से उनकी तरफ देखने लगी, “आपके पास… मतलब…?”
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ बेटी। मैं खुद उसकी पढ़ाई देख लूँगा। तुम चिंता मत करो। वो मेरे पास सुरक्षित रहेगी।”
मयूरी अभी कुछ बोल पाती, उससे पहले बाबाजी ने अपना हाथ उसके कंधे से सरकाकर उसकी गर्दन पर हल्का-हल्का सहलाते हुए कहा:
“विश्वास रखो मयूरी… मैं तुम्हारे परिवार का भला ही चाहता हूँ।” मैत्री का निर्माण।
कमरे में सन्नाटा छा गया। मयूरी के मन में संशय, कृतज्ञता और डर का मिश्रण था, जबकि बाबाजी के मन में दो शिकार - माँ और बेटी - एक साथ पकड़ने की योजना पक्की हो चुकी थी।
************************************************
यही तक दोस्तों। अगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद।
तब तक Maitri Patel की तरफ से जय भारत।।
बाबाजी खुद केबल पर ब्लू फिल्म देख-देखकर कई बार झड़ चुके थे। लेकिन अब मयूरी के मुँह से ये सब सुनकर उनका लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैत्री लिखित कहानी।
मयूरी ने काँपती हुई आवाज़ में आगे कहा:
“पिछले महीने एक रात… जब वो पीकर घर आए तो उन्होंने… उन्होंने ऋचा को अपने कमरे में बुलाया। मैं किचन में थी। काफी देर तक जब ऋचा वापस नहीं आई तो मैं चिंतित होकर कमरे में गई तो नजारा देख के मेरे होश उड़ गए।”
मयूरी की आवाज़ भर्रा गई।
“इन्होंने ऋचा को अपने सीने से चिपका रखा था… और उसे जबरदस्ती चूम रहे थे। उसके गालों पर, गर्दन पर… बाबाजी… वो मेरी बेटी है। सिर्फ़ अठारह साल की।”
बाबाजी के रोंगटे खड़े हो गए - लेकिन अलग वजह से। बाबाजी जी ने जब ये सब सुना तो उनके रोंगटे खड़े हो गए ..इस बारे में तो गोपाल ने आज तक नहीं बताया था .. उसकी माँ को चोदु,साला, हरामी। उनके मन में तुरंत एक विकृत कल्पना घूम गई - गोपाल ने अपनी कमसिन, गुलाब जैसे होंठों वाली बेटी के नाजुक होंठों को कैसे चूसा होगा। उनके लंड ने धोती के अंदर जोर से उछाल मारा।
मयूरी आँसू पोंछते हुए बोली:
“मैंने बड़ी मुश्किल से ऋचा को उनके चंगुल से छुड़ाया। वो बेचारी घबराई हुई, काँप रही थी। भागकर अपने कमरे में चली गई। मैंने उन्हें जी भर कर गालियाँ दीं, लेकिन वो नशे में चूर थे। कोई असर नहीं हुआ। उसी दिन मैंने फैसला कर लिया कि अब तक वो माफी नहीं मांग लेंगे और शराब नहीं छोड़ देंगे, तब तक उनके लिए मेरा जिस्म बंद है।”
मयूरी ने सिर झुकाया, “बाबाजी… एक बार तो मन किया तलाक ले लूँ। पर हम गरीब हैं। तलाक के बाद गुजारा कैसे चलेगा? न अब वो उम्र बची है कि कोई दूसरा जीवनसाथी मिल जाए। इसलिए मन मारकर रोज उनकी शिकायतें सुनती हूँ।” फनलवर द्वारा संपादित।
बाबाजी की आँखों में एक अंधेरी चमक थी। वे मयूरी की पीड़ा का नाटक तो कर रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर ऋचा की कोमल देह और उसके गुलाबी होंठों की कल्पना कर रहे थे।
उन्होंने थोड़ी देर बाद गंभीर स्वर में कहा:
“जो गोपाल ने किया, वो बेहद शर्मनाक और पाप है। लेकिन हो सकता है कि तुम्हारे द्वारा बार-बार दुत्कारे जाने के बाद उसके मन में ऐसे विकृत विचार आए हों। तुम उसे प्यार से समझाओ, शराब छुड़वाने की कोशिश करो। रही बात ऋचा की, तो तुम उसकी चिंता मत करो। मैं गोपाल को भी समझा दूँगा कि अपनी बेटी के बारे में ऐसा सोचना घोर पाप है।”
फिर उन्होंने एक पल रुककर, अपनी योजना को आगे बढ़ाते हुए कहा:
“तुम बस उसकी पढ़ाई की चिंता करो। उसे जितना हो सके पढ़ाओ। अगर चाहो तो उसकी ट्यूशन भी लगवा दो।”
मयूरी ने उदास स्वर में कहा, “पर बाबाजी… अभी इतने पैसे नहीं हैं कि अलग से ट्यूशन लगवा सकूँ।”
बाबाजी की आँखों में विजयी मुस्कान खेल गई। उन्होंने नरम लेकिन दृढ़ स्वर में कहा:
“तुम एक काम करो… ऋचा को रोज दोपहर 2 बजे मेरे पास भेज दो। मैं खुद उसे पढ़ा दूँगा। संस्कृत, अंग्रेजी, गणित - जो भी जरूरत हो। मुफ्त में। आश्रम में ही सब कुछ होगा।”
मयूरी आश्चर्य से उनकी तरफ देखने लगी, “आपके पास… मतलब…?”
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ बेटी। मैं खुद उसकी पढ़ाई देख लूँगा। तुम चिंता मत करो। वो मेरे पास सुरक्षित रहेगी।”
मयूरी अभी कुछ बोल पाती, उससे पहले बाबाजी ने अपना हाथ उसके कंधे से सरकाकर उसकी गर्दन पर हल्का-हल्का सहलाते हुए कहा:
“विश्वास रखो मयूरी… मैं तुम्हारे परिवार का भला ही चाहता हूँ।” मैत्री का निर्माण।
कमरे में सन्नाटा छा गया। मयूरी के मन में संशय, कृतज्ञता और डर का मिश्रण था, जबकि बाबाजी के मन में दो शिकार - माँ और बेटी - एक साथ पकड़ने की योजना पक्की हो चुकी थी।
************************************************
यही तक दोस्तों। अगला एपिसोड आपके कोमेंट्स आने के बाद।
तब तक Maitri Patel की तरफ से जय भारत।।



![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)