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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
गोपाल शराब के नशे में और भी लाल हो चुका था। उसकी आँखें लाल और भारी हो रही थीं।

“हाँ बाबाजी… साली चूत देने में कितने नखरे करती है। आपने तो देखा ही है उसका जिस्म… कितना भरा-भरा, रस भरा। इतनी बड़ी-बड़ी बोबलें हैं उसकी… उफ्फ्… उन्हें पीने को तरस गया हूँ बाबाजी जी। रात को पास लेट जाती है तो भी मुड़ जाती है। मन करता है जबरदस्ती पकड़कर चोद दूँ… पर डर लगता है कि कहीं आवाज़ न हो जाए। बेटी जो घर में है।” मैत्री रचित कहानी।
 
गोपाल बक रहा था और बाबाजी चुपचाप सुन रहे थे। उनकी आँखें बंद थीं, लेकिन उनके मन में मयूरी का नग्न, मांसल शरीर घूम रहा था। उनकी धोती के अंदर लंड फिर से फड़कने लगा था - मोटा, भारी और कठोर।
 
बाबाजी ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा,
 
“अच्छा सुनो गोपाल… मेरे पास एक आईडिया है। अगर तुम उस पर अमल कर सको, तो तुम्हारी पत्नी फिर से पहले जैसी हो जाएगी - तुम्हारे लिए तरसने लगेगी, तुम्हें प्यार करने लगेगी, और शायद… तुम्हें वो सब देने लगेगी जो तुम चाहते हो।”
 
गोपाल की आँखें चमक उठीं। नशा एक पल में उड़ गया। वह झुककर बाबाजी के पैरों के पास बैठ गया, हाथ जोड़कर।
 
“बाबाजी… अगर आप ऐसा चमत्कार कर सकें तो मैं जिन्दगी भर आपका गुलाम बनकर रहूँगा। बताइये… क्या करना होगा? मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ।”
 
बाबाजी मन ही मन विजयी मुस्कान लिए हुए थे। उनका शिकार अब पूरी तरह फँस चुका था। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी योजना बतानी शुरू की - चालाकी भरे शब्दों में, धार्मिक आड़ में, और पुरुष की कमजोरी को उत्तेजित करते हुए।
 
गोपाल सुनता रहा। कभी-कभी उसका सिर हिलाता, कभी “हाँ बाबाजी” कहता। जब गोपाल चला गया तो बाबाजी लेट गए और अपनी किस्मत को सराहते हुए गहरी नींद सो गए।

*******.

अगले दिन दोपहर।

 
सूरज अपनी चरम सीमा पर था। बाबाजी सुबह के सारे कार्य निपटाकर अपने कमरे में मयूरी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कोष से कुछ रुपये अलग निकालकर एक लिफाफे में रख लिए थे - हथियार के रूप में।
 
ठीक 11 बजे मयूरी आई।
 
उसने साधारण सा हल्का साड़ी पहना था, लेकिन उसका भरा-भरा जिस्म किसी भी कपड़े को चुनौती दे रहा था। भारी छातियाँ, चौड़ी कमर, और मोटी गांड - हर कदम के साथ हिल रही थीं। क्या मादक नजारा था।
 
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अंदर आओ मयूरी… पीछे वाले कमरे में।”
 
मयूरी बिना किसी संकोच के उनके पीछे चल दी। वह जानती थी कि ऐसी नाजुक बातें खुलेआम नहीं की जा सकतीं। रचयिता मैत्री पटेल है।
 
कमरे में घुसते ही बाबाजी चोकड़ी मारकर दीवान पर बैठ गए। मयूरी ने हाथ जोड़कर उनके सामने कालीन पर पालथी मार ली। उसकी साड़ी की पल्लू थोड़ी सरक गई थी, जिससे उसकी गहरी ब्लाउज वाली छाती का आधा हिस्सा दिख रहा था।
 
बाबाजी ने सबसे पहले लिफाफा आगे बढ़ाया।
 
“ये लो मयूरी… ऋचा की पढ़ाई के लिए। जितना चाहिए, ले लो।”
 
मयूरी की आँखें नम हो गईं। उसने हाथ जोड़कर पैसे लिए और तुरंत अपने ब्लाउज के अंदर, छातियों के बीच ठूस लिए। बाबाजी की निगाहें उसकी छातियों की गहराई में घुस गईं - वे लालच से भर गई थीं।
 
“धन्यवाद बाबाजी… आपका ये एहसान मैं कभी नहीं भुला पाऊँगी। मैं वादा करती हूँ, जल्दी ही ये सारे पैसे कोष में वापस डाल दूँगी।”
 
बाबाजी ने मुस्कुराते हुए कहा,
 
“कोई जल्दी नहीं है बेटी। मैं तो बस यही चाहता हूँ कि ऋचा की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।”
 
कुछ देर चुप्पी रही।
 
फिर मयूरी ने हिचकते हुए, धीमी और शर्मीली आवाज़ में पूछा,
 
“और… बाबाजी… कल आप जो बात कर रहे थे… हमारे बारे में… वो… क्या कह रहे थे?”
 
बाबाजी मन ही मन मुस्कुराए। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शिकार खुद जाल में कदम रख चुका था।
 
उन्होंने धीरे से आगे झुककर, गहरी और मीठी आवाज़ में कहा, “मयूरी, गोपाल बहुत परेशान रहता है। वो तुमसे प्यार करता है, लेकिन वो कहता है कि तुम उसे अब पास नहीं आने देतीं। उसकी शिकायत है कि तुम उसकी इच्छाओं को ठुकरा देती हो… खासकर… शारीरिक इच्छाओं को।”
 
मयूरी का चेहरा शर्म और गुस्से से लाल हो गया। उसने नजरें झुका लीं।
 
बाबाजी ने नरम स्वर में आगे कहा, 

“मैं जानता हूँ… औरत का शरीर भी भूखा रह जाता है तो तकलीफ होती है। गोपाल की कमी है, लेकिन शायद तुम भी कुछ बातें खुलकर नहीं कह पातीं। अगर तुम चाहो… तो मैं तुम्हारी मन की बात सुन सकता हूँ। कोई डर नहीं। यहाँ सिर्फ तुम और मैं हैं… और भगवान।”


बाबाजी की नजरें अब मयूरी की छातियों, कमर और गोद में घूम रही थीं। हवा में उत्तेजना और खतरे की मीठी महक फैलने लगी थी।
 
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जुड़े रहिये दोस्तों।


मैत्री पटेल
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सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:14 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 12-06-2026, 08:37 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 27-06-2026, 05:02 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Rizzi1198 - 30-07-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-08-2026, 06:21 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 24-08-2026, 02:55 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 28-08-2026, 05:28 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-09-2026, 06:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 08-09-2026, 10:10 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-09-2026, 05:04 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-09-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-09-2026, 09:57 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-09-2026, 05:39 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 24-09-2026, 04:27 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Tadpole - 23-09-2026, 07:12 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Wanton - 23-09-2026, 07:24 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 01-10-2026, 09:20 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Bumchod - 05-10-2026, 05:27 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-10-2026, 08:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - Yesterday, 07:50 PM



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