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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#64
**update 58**

फिर मैंने अंकल को कॉल किया। मम्मी बोलीं। क्यों कॉल कर रहा है।

मैं: मम्मी कुछ काम है।

मम्मी: रहने दे।

लेकिन मैं कॉल करता हूँ। और अपने रूम में चला जाता हूँ।

और फिर अंकल सीढ़ियों पर आते हैं। और मम्मी को सीढ़ियों का गेट खोलना पड़ा।

गेट खोलते ही सामने अंकल वापस आ गए। इस बार पापा फ्रेश होने गए थे। और मैं अपने रूम में।

मम्मी ने सोचा। वो हॉल में अकेली है। कोई नहीं देख रहा है। और उन्हें पता है अब रोमांस कर सकती हैं। इसलिए।

मम्मी गेट खोलती हैं। तो अंकल उसे झट से अपनी बाँहों में ले लेते हैं।

अंकल: क्या बात है जान। इतनी देर लगा दी दरवाजा खोलने में।

मम्मी: (हड़बड़ाते हुए) वो वाशरूम में गया। तभी तो खोलूँगी। नहीं तो वो देख लेता। और तुम अभी क्यों आए। मैंने कहा था रात को बुला लूँगी।

अंकल बिना कुछ कहे मम्मी के होठों को चूम लेते हैं।

किस करने के बाद मम्मी अंकल को बोलती हैं। अभी प्लीज आप जाओ। और रात को आना।

अंकल: नहीं। मैं अंकुश के रूम में छुप जाता हूँ।

मम्मी: आप भी। जैसे आप चाहो। पर जल्दी करो। वो ड्रेस होकर आता ही होगा।

और अंकल मेरे रूम में गए। और

मैं: अंकल आप कैसे करोगे।

अंकल: बेटा तू सब संभाल लेना। आज तेरी मम्मी को टेबल के नीचे से प्यार करूँगा।

मैं: समझा नहीं।

अंकल: सब समझ जाएगा। और अंकल जाकर टेबल के नीचे छुप गए। मम्मी ने नहीं देखा। क्योंकि मम्मी किचन में चली गई थीं।

फिर पापा फ्रेश होकर आए। और मम्मी को आवाज दी। वर्षा। खाना लगा दे।

मम्मी: जी। लगाती हूँ।

और मेरी मम्मी टेबल पर खाना लगाती हैं। तो पापा मेरी मम्मी को भी बैठने को कहते हैं।

मम्मी पापा के सामने बैठ जाती हैं। और मैं भी मम्मी के बगल में बैठ जाता हूँ। और फिर खाना खाने लगते हैं। मैं जानता था। अंकल टेबल के नीचे छुपे हैं। मेरी मम्मी के बैठने पर अंकल की नजर सीधा मेरी मम्मी की जाँघों की तरफ जाती है।

मेरी मम्मी की गोरी मखमली जाँघें देख कर अंकल के मन में उसे छूने का मन करता है।

अंकल मेरी मम्मी की जाँघ पर अपना हाथ रख देते हैं।

अंकल के हाथ रखते ही मम्मी शॉक हो जाती हैं। वो अंकल का हाथ अपनी जाँघ से हटाने की कोशिश करती हैं। पर पापा के सामने होने के कारण वो ज्यादा फोर्स नहीं लगा पातीं।

अंकल भी जानते हैं कि मेरी मम्मी कुछ नहीं कह पाएँगी इस समय। मेरी मम्मी के चेहरे के भाव बदलने लगते हैं। वो पहले ही डरी हुई थीं। ऊपर से अंकल की हरकत उसे और डरा देती है।

अंकल अपना हाथ मेरी मम्मी की जाँघों में फेरने लगते हैं। और धीरे धीरे मेरी मम्मी की चूत की तरफ बढ़ा देते हैं।

पापा: क्या हुआ वर्षा। कुछ बोल क्यों नहीं रही।

मम्मी: जी। कुछ नहीं। बस थोड़ी नींद आ रही है।

पापा: सो जाना। पहले खाना खा ले। और अंकुश को भी खाने दे।

मैं: पापा। मम्मी ने शाम को मुझे इतना खिला दिया था। और आज मम्मी ने बहुत काम किया घर में। और पड़ोसी आंटी के प्रोग्राम में भी गई थीं।

हम बातें ही कर रहे थे। कि अंकल ने अब अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी पर ले जाते हैं।

अंकल मेरी मम्मी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगते हैं। क्योंकि मेरी मम्मी ने बहुत छोटा टॉप पहना था। जो उनकी टाँगों को पूरी नहीं ढक पा रहा था। और मम्मी के बैठने के बाद उनका टॉप उनकी पैंटी तक ही रह गया। मेरी मम्मी की पैंटी उनकी चूत की लाइन में घुस जाती है। मम्मी की चूत गीली होती देख अंकल मन ही मन उस पर हँसने लगते हैं।

यहाँ मेरी मम्मी की डर से हालत खराब है। कि कहीं अंकल की हरकत की वजह से पापा को शक न हो जाए। मम्मी बार बार मेरी तरफ देख रही थीं। शायद वो मुझसे हेल्प माँग रही थीं।

अंकल मेरी मम्मी की टाँगों को थोड़ा फैला देते हैं। और मेरी मम्मी की जाँघों में किस करते हुए मेरी मम्मी की पैंटी को थोड़ा सा साइड कर मेरी मम्मी की चूत के पास अपने होठ लगा देते हैं।

मेरी मम्मी की सिसकी निकल जाती है। उसके लिए ये अहसास एकदम नया सा नहीं था। क्योंकि अंकल हमेशा मेरी मम्मी की चूत चूसते हैं। पर आज पापा सामने बैठे थे। इसलिए पापा के सामने एक गैर मर्द से अपनी चूत चुसवाने का अहसास बिल्कुल एकदम नया है। और पापा के बारे में जानते हो। वो मादरचोद नामर्द नामर्द क्या चूत चूसेगा।

पापा: क्या हुआ वर्षा।

मम्मी: वो... कुछ नहीं। शायद किसी मच्छर ने हाथ पर काट लिया।

पापा: ओह ओके।

अंकल मेरी मम्मी की चूत के आस पास अपनी जीभ से चाटना शुरू कर देते हैं। जिससे मम्मी की चूत से पानी लावा की तरह रिसना शुरू हो जाता है। मेरी मम्मी किसी तरह अपने इमोशंस को कंट्रोल करती हैं।

अब अंकल अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर तक लाकर मेरी मम्मी की पैंटी को खींचने लगते हैं। पर मम्मी के बैठा होने की वजह से वो उसे उतार नहीं पाते। ये सब मैं अपना सिर नीचे करके देख रहा था। मैं थोड़ा टेबल से दूर भी हो लिया था। जिससे मैं नीचे आसानी से देख पा रहा था।

अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को थोड़ा तेज खींचने लगते हैं। मेरी मम्मी नीचे की तरफ नजर करती हैं। तो अंकल भी ऊपर ही देख रहे हैं। मेरी मम्मी अंकल को हल्का इशारा कर के मना करती हैं। पर अंकल भी मेरी मम्मी को इशारा करते हैं कि उन्हें मेरी मम्मी की पैंटी चाहिए।

लेकिन मम्मी अपनी गाँड नहीं उठा रही थीं।

फिर अंकल ने मेरी तरफ इशारा किया। तो मैं समझ गया। अब मुझे ही कुछ करना है। तो मैं मम्मी को बोलता हूँ। मम्मी आप मुझे एक चपाती रखना।

मम्मी: बेटा ले ले।

मैं: मम्मी आप उठकर दे दो।

मम्मी: नहीं बेटा। ले ले। मम्मी समझ गईं कि मैं उनकी पैंटी उतरवाना चाहता हूँ अंकल से। इसलिए मम्मी बोलीं। ले ले बेटा।

पापा: वर्षा। तुम दे दो उसे।

मम्मी: मम्मी मेरी तरफ इशारा करती हैं। ना में।

मैं: दो मम्मी। फिर मम्मी मजबूरी में मुझे चपाती देने के लिए उठती हैं। तो उनकी गाँड कुर्सी से उठ जाती है। और अब उनकी पैंटी उतारना आसान हो गया अंकल के लिए। और मम्मी भी समझ गई थीं कि अब उनकी पैंटी उतरने वाली है। और हुआ भी ऐसा ही। अंकल ने मम्मी की पैंटी उतार दी उनके कुल्हों से। अब मम्मी की चूत नंगी हो गई थी। और मम्मी की पैंटी उनके दोनों टाँगों के बीच थी। मम्मी मुझे देख रही थीं।

मैं: थैंक्स मम्मी।

मम्मी: मम्मी मुझे गुस्से से देख रही हैं। और कुछ नहीं बोलीं।

पैंटी उतारते ही अंकल इस बार सीधा मेरी मम्मी की चूत पर अपना मुँह रख देते हैं। मेरी मम्मी हवस के नशे में खो जाती हैं। बस अपने इमोशंस शो नहीं करतीं। वो पापा की ओर देख रही थीं। फिर मेरी तरफ देखती हैं।

इतने में पापा भी खाना खत्म कर लेते हैं। और मम्मी से कहते हैं कि वो थोड़ा टॉयलेट जा रहे हैं।

पापा के उठकर अंदर जाते ही अंकल अपनी स्पीड बढ़ा देते हैं। और मेरी मम्मी की चूत नीचे से ऊपर तक चाटने लगते हैं। मेरी मम्मी भी उठना चाहती हैं। पर हवस की आग में वो इतना खो जाती हैं कि उन्हें याद ही नहीं रहता कि ये बेस्ट टाइम है अंकल को बाहर निकालने का। और वो ये भी भूल जाती हैं। उनका बेटा उनके बगल में बैठा है। और मम्मी आह आह करने लगती हैं।

मैं: मम्मी क्या हुआ।

मम्मी: आह ओह। कुछ नहीं बेटा।

मेरी मम्मी की आँखें ऊपर को चढ़ने लगती हैं। वो धीमी आवाज में मोन करते हुए मुझे बोलती हैं।

मम्मी: बेटा तू टॉयलेट के पास जाकर खड़ा हो जा। जब तेरे पापा बाहर आने लगें। मुझे बता देना।

मैं: क्यों मम्मी।

मम्मी: बेटा प्लीज कुछ मत पूछ। जा।

मैं: बताओ मम्मी। क्या बात है।

मम्मी: बेटा योगेश जी टेबल के नीचे हैं। और बेचारे परेशान हो रहे हैं। वो तेरे पापा की वजह से टेबल के नीचे छुपा बैठे हैं।

मैं: क्या मम्मी।

अंकल: हाँ बेटा। मैं टेबल के नीचे हूँ। तू जाकर देख तेरे पापा को।

मैं नीचे झुकने लगा। तो मम्मी।

मम्मी: नहीं बेटा। तू जा। पापा को देख।

मैं: मम्मी अंकल नीचे क्या कर रहे हैं। देखने दो।

मम्मी: बेटा वो चुपचाप बैठे हैं। तू मत देख। मैंने देख लिया है योगेश जी को।

मैं: मैं समझ गया। शायद मम्मी को शर्म आएगी इस हाल में। इसलिए उन्होंने मुझे देखने को मना कर दिया है।

मैं: मम्मी आप टॉयलेट के पास जाइए। मैं अंकल को निकाल दूँगा।

मम्मी: नहीं। बैठी। मैं नहीं उठ सकती।

मैं: क्यों नहीं उठ सकती।

मम्मी: प्लीज बेटा जा।

मैं समझ गया। मम्मी की पैंटी उनकी टाँगों में फँसी है। इसलिए वो उठेंगी तो पहले उन्हें पैंटी सही करनी पड़ेगी। इसलिए मुझे भगा रही हैं।

फिर मैं भी मम्मी की प्रॉब्लम को समझ कर टॉयलेट के पास जाकर खड़ा हो गया।

और मम्मी अंकल को बोलती हैं।

मम्मी: योगेश जी। अब आप बाहर आ जाइए।

लेकिन अंकल नहीं उठे। और मम्मी भी चेयर से उठाने की कोशिश भी नहीं करती हैं। और मेरी तरफ देख रही थीं।

मैं भी मम्मी की तरफ स्माइल करता हूँ। तो मम्मी भी स्माइल करती हैं।

अंकल मम्मी की चूत चाटने में लगे हुए थे। मम्मी अंकल को लगातार अपनी चूत चटाते देख फिर से अंकल को उठाने को बोलती हैं। लेकिन अंकल मम्मी की चूत चाटना नहीं छोड़ते। तो मम्मी अपना सिर नीचे की तरफ करके अपनी नजरें नीचे करती हैं। और अंकल को पूरी तरह से अपनी चूत चाटने में डूबा देख बोलती हैं। प्लीज अब छोड़ दीजिए।

मेरी मम्मी से अब कंट्रोल नहीं होता। उनकी चूत किसी भी समय झड़ने वाली होती है।

अंकल भी यही चाहते थे। आज वो मम्मी को अपनी जीभ से ही झड़ा कर उनकी चूत का रस पीकर ही घर जाएँगे।

तभी बाथरूम में पापा की आवाज आती है। वर्षा।

पापा: वर्षा।

मम्मी का ध्यान पापा की आवाज पर जाता है। और मेरा भी। मम्मी मेरी तरफ देखकर इशारा करती हैं।

मैं: जी पापा। बोलिए।

पापा: अंकुश। तेरी मम्मी को भेज।

फिर मैं मम्मी की तरफ। तो मम्मी उठाने की कोशिश करती हैं। अंकल मम्मी को उठाने से रोकने की कोशिश करते हैं। लेकिन मेरी मम्मी न चाहते हुए भी उठकर खड़ी होती हैं। और अपनी पैंटी को पहनने के लिए अपने हाथों को नीचे ले जाती हैं। पर अंकल मम्मी को अपनी पैंटी नहीं पहनने देते।

मम्मी: क्या कर रहे हो योगेश जी। जाने दो मुझे। नहीं तो उसको सब पता चल जाएगा। और वो तुम्हें छोड़ेगा नहीं। जाओ प्लीज। मुझे पैंटी पहनने दो।

पापा अंदर से फिर पुकारता है। वर्षा। क्या हुआ। मुझे टॉवल चाहिए।

मम्मी: जी। आ रही। बस टेबल से बर्तन उठा रही थी।

अंकल मेरी मम्मी का हाथ नहीं छोड़ते। वर्षा प्लीज मान जाओ ना।

मम्मी: बेटा अंकुश। रूम से पापा की टॉवल लाओ।

मैं: जी मम्मी।

और मैं पलटा ही था। कि मम्मी ने अपनी पैंटी अपनी कमर में चढ़ा ली। और पैंटी पहन ली। फिर मैं टॉवल लाया। और मम्मी को दी।

मम्मी: बेटा ला। मुझे दे। मैं देकर आती हूँ। और योगेश जी को बाहर निकाल।

मैं: जी मम्मी।

फिर मैं अंकल से कहा। अंकल बाहर आ जाओ।

फिर मैं अंकल को अपने कमरे में छुपा दिया।

और फिर पापा मम्मी रूम में चले जाते हैं। फिर एक घंटे बाद मैं मम्मी को बुलाया हूँ कॉल से।

मम्मी: बेटा कैसे बुलाया।

मैं: मम्मी अंकल टेबल के नीचे छुपे थे। आपको कैसे पता चला।

मम्मी: बेटा उन्होंने मेरे पैर को टच किया। तो पता चला।

मैं: मम्मी क्या आज भी अंकल ने आपको परेशान करने की कोशिश की।

मम्मी: नहीं बेटा। आज तो कुछ नहीं किया। पर बेटा मुझे डर था। कहीं तेरे पापा देख न लें।

मैं: मम्मी अंकल आपको बुला रहे हैं कंप्यूटर सिखाने के लिए।

मम्मी: बेटा उनके घर नहीं जाऊँगी कंप्यूटर सिखाने।

मैं: मम्मी अंकल मेरे रूम में हैं। आपको कंप्यूटर सिखाने आए हैं।

मम्मी: क्या। तूने इन्हें बुलाया।

मैं: हाँ मम्मी। मैंने अंकल को बुला लिया।

मम्मी: नहीं बेटा। वापस भेज दे।

मैं: नो मम्मी। आप जाइए रूम में।

मम्मी: तेरे पापा रूम में हैं।

मैं: मम्मी मैं पापा को संभाल लूँगा। प्लीज आप जाइए।

मम्मी: ठीक है। और मम्मी मेरे रूम में चली गईं। और अंकल भी बाथरूम गए हुए थे।

मम्मी रूम में गईं। तो मैं विंडो पे गया।

मम्मी: योगेश जी कहाँ हो।

अंकल: बाथरूम में। और अंकल ने बाथरूम का गेट खोला। तो

अंकल दरवाजे से बाहर निकल ही रहे होते हैं। कि मेरी मम्मी टॉवल ले कर अंकल की ओर भागती हैं।

अंकल: कहाँ थी वर्षा। मैं एक घंटे से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ अंकुश के रूम में।

मम्मी: सॉरी। वो बस उस मादरचोद नामर्द नामर्द के सोने का वेट कर रही थी।

अंकल पास आते ही मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में जकड़ लेते हैं। और मेरी मम्मी को दीवार के साथ लगा के मेरी मम्मी के होठों को चूम लेते हैं।

मेरी मम्मी तो पहले ही हवस की आग में झुलस रही थीं। मेरी मम्मी से रहा नहीं जाता। और वो अंकल के मुँह में अपनी जीभ डाल के अंकल के होठों को चूसने लगती हैं।

मम्मी भी पूरे जोश में अंकल को किस कर रही थीं। अंकल को ज्यादा समय नहीं लगता मम्मी की टॉप उतारने में। लेकिन मम्मी अंकल को रोकती हैं। पर अंकल नहीं माने। और उन्होंने मम्मी के टॉप को नीचे से उठाया। तो मम्मी बोलीं।

मम्मी: पहले दरवाजा तो लगा दो रूम का। अंकुश बाहर हॉल में है। और मेरा पति बेडरूम में है।

अंकल: चुप। अंकुश पहरेदारी पर। और अंकल ने टॉप को मम्मी के कंधे पर लाए। तो मम्मी ने भी अपने हाथ ऊपर करके टॉप उतरवाने में अंकल की मदद की। और अंकल ने टॉप को मेरी मम्मी के बदन से निकाल दिया।

टॉप उतारते ही अंकल देखते हैं कि मेरी मम्मी ने सिर्फ ब्रा पहनी है।

मैं भी चुप कर ये सब देख रहा था।

अंकल: मुझे लगता है जान। मुझसे ज्यादा तुम प्यासी हो।

मम्मी: हम्म... क्यों।

अंकल: तुम्हारी चूत तो पहले ही गीली पड़ी है। और तुमने पैंटी मेरे सामने पहनी थी। जब मैं टेबल के नीचे था। तब तुमने अपनी पैंटी को अपनी टाँगों से उठाया। और पहनी थी।

मम्मी: हाँ। मैंने तुम्हारे सामने पहनी थी। लेकिन जब अंकुश ने मुझे कॉल करके बाहर बुलाया। तो मैं समझ गई। वो मुझे चुदवाने के लिए बुला रहा है। और हुआ भी ऐसा ही। मैं बाहर आई। तो उसने कहा। अंकल आपको मेरे रूम में कंप्यूटर सिखाने के लिए बुला रहे हैं। अब वो ये तो नहीं कह सकता। मम्मी अंकल आपको चोदने के लिए बुला रहे हैं। तो मैं अपनी पैंटी पहले ही उतार आई। ताकि आपकी उतरनी न पड़े। तो अंकल मेरी मम्मी के कहने से खुश हो जाते हैं। तो मेरी मम्मी अंकल को अपनी तरफ खींचती हैं।

अंकल मम्मी बाथरूम के गेट पर खड़े थे। तो अंकल मेरी मम्मी को रूम में रखे बेड पे धकेल देते हैं। और अपना लंड मेरी मम्मी की चूत पर लगा देते हैं।

मम्मी: क्या बात है। आज मेरी ब्रा नहीं उतारोगे।

अंकल: पहले अपने लंड को सीधा तेरी चूत में डालकर चोद लूँ। फिर उसके बाद दूसरे राउंड में तेरे बूब्स को मसलूँगा। और तुझे पूरे बदन को किस भी करूँगा। पर अब कंट्रोल नहीं हो रहा है।

मेरी मम्मी ब्लू ब्रा में थीं।

चूत इतनी गीली होती है कि लंड सीधा मेरी मम्मी की चूत में घुस जाता है। मेरी मम्मी की आह निकल जाती है। पर अंकल अब रुकना नहीं चाहते थे।

अंकल अपने धक्के लगाना चालू रखते हैं।

मम्मी: आह... आह... ओह... मम्मी आह... आह... ओह... मेरी मम्मी की चीखें मुझे बाहर तक सुनाई दे रही थीं। क्योंकि अंकल मम्मी को नॉन स्टॉप चोद रहे थे। एक ही पोजीशन में लगातार 20 मिनट से ज्यादा हो गए थे।

मेरी मम्मी इस समय पापा के बारे में भी भूल चुकी थीं। और चरमसुख की प्राप्ति कर लेना चाहती थीं।

मेरी मम्मी भी अंकल के साथ अपनी चूत हिलाना शुरू कर देती हैं। जिससे अंकल अपने आप को संभाल नहीं पाते। और अंकल का शरीर अकड़ने लगता है।

मेरी मम्मी का ऐसे चुदते देख मैं भी पापा के बारे में भूल जाता हूँ। और चुदाई देखता रहता हूँ।

और फिर थोड़ी देर बाद अंकल एक आह भर के मेरी मम्मी की चूत में झड़ने लगते हैं। पर मम्मी अभी भी अपनी चूत हिला रही थीं। क्योंकि उसे भी अब झड़ना था। पर एंड टाइम पर अंकल झड़ जाते हैं।

मम्मी: योगेश जी...

अंकल: (मेरी मम्मी के ऊपर ढेर हो जाते हैं) क्या हुआ जान। मजा नहीं आया क्या।

मम्मी: योगेश जी प्लीज। थोड़ा और करो।

अंकल थोड़ा हिलता है। पर अब उनका लंड भी ढीला पड़ चुका है।

अंकल: जान। क्या बात है। मैंने तुम्हें लगातार 30 मिनट तक चोदा। पर तुम आज एक बार भी नहीं झड़ीं। और दिन तो तुम मेरे झड़ने से पहले 3 बार झड़ जाती हो।

मम्मी: आज आपने मेरी प्यास बढ़ा दी थी दिन में पड़ोस के घर में बाथरूम में। और अभी टेबल के नीचे। इसलिए मैं बहुत प्यासी हो गई थी।

अंकल: ठीक है। नेक्स्ट राउंड स्टार्ट करें।

मम्मी: नहीं। आप अपनी जीभ से मेरा निकाल दीजिए। और फिर अंकल अपने मुँह से मेरी मम्मी की चूत चुदाई शुरू करते हैं।

और मेरी मम्मी भी झड़ जाती हैं। और फिर अंकल खड़े हो जाते हैं।

अंकल बोलते हैं। नेक्स्ट राउंड।

मम्मी शर्म से पानी पानी हो जाती हैं। भले ही वो थोड़ी देर पहले बेशर्म बनकर अपनी टाँगें खोलकर अंकल से चुदवा रही थीं। और मेरी मम्मी शर्माकर अपने पास में रखी टॉवल को उठा लेती हैं। और अपने बदन पे ढक लेती हैं। और अपनी नजर दूसरी तरफ कर लेती हैं।

अंकल: क्या इतना शर्मा रही हो।

मम्मी: प्लीज। मुझे शर्म आ रही है।

अंकल: अभी थोड़ी देर पहले तो बेशर्म बनकर अपनी चूत चुदवा रही थीं।

मम्मी: आप जाओ यहाँ से। मुझे शर्म आ रही है।

अंकल पास में रखी एक चेयर पे बैठ जाते हैं। और मम्मी से बोलते हैं।

अंकल: आओ वर्षा। मेरी गोद में बैठ जाओ।

मम्मी: चुप रहती हैं। और कुछ नहीं बोलतीं।

अंकल: आओ वर्षा।

फिर मम्मी बेड पर से उठती हैं। और टॉवल को अपने बदन पर लपेट लेती हैं। और चलकर अंकल के पास पहुँचती हैं।

जैसे ही मेरी मम्मी चेयर के पास पहुँचती हैं। जिसपर अंकल बैठे थे। अंकल ने तुरंत ही मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी को अपने पास खींच लिया। और मेरी मम्मी को किस करना शुरू कर देते हैं।

मम्मी: क्या कर रहे हो योगेश जी। हटो यहाँ से।

अंकल मेरी मम्मी की एक नहीं सुनते। और मेरी मम्मी के होठों को चूसना चालू रखते हैं। मेरी मम्मी थोड़ा बहकती हैं। पर उसी समय खुद को संभाल लेती हैं। और अंकल को पीछे हटाती हैं।

अंकल: क्या हुआ वर्षा। हटा क्यों रही हो।

मम्मी: तुम पागल हो क्या। एक बार कर लिया। अब दोबारा नहीं। अंकुश बेचारा बाहर हॉल में बैठा है। और मेरा पति जाग गया तो।

अंकल: मुझे कुछ नहीं पता वर्षा। मुझे बस आज पूरी रात तुम्हारी चुदाई करनी है।

मम्मी: पागल मत बनो। मुझे कोई प्यास नहीं बुझानी। तुम जाओ यहाँ से। मेरा अंकुश बाहर है। मुझे जाने दो। मैं उससे और पहरेदारी नहीं करवा सकती हूँ। वैसे भी आपके लंड ने मेरी चूत की चुदाई कर दी है। और आपका लंड भी ठंडा हो गया है।

अंकल: वर्षा। मान जाओ ना। और इस टॉवल को हटाओ।

मुझसे क्यों छुपा रही हो। मैं तो पिछले 6 महीनों से देख रहा हूँ। क्या मैं तुम्हारे बदन से खेलता नहीं हूँ सही ढंग से। क्या मैं तुम्हारी प्यास नहीं बुझाता हूँ सही ढंग से।

मम्मी: मैं बहुत खुश हूँ आपके साथ। तुम गलत सोच रहे हो। मैं अंकुश से और पहरेदारी नहीं करवा सकती हूँ। इसलिए अब कल दिन में करेंगे। वैसे भी एक राउंड तो हो गया है।

अंकल: ठीक है। मत करो अब चुदाई। पर साथ में सो तो सकते हैं। और अंकुश को बुला लेते हैं। हम तीनों साथ में सोएँगे।

मम्मी: बिल्कुल नहीं। तुम फिर बदतमीजी करोगे।

अंकल: मैंने क्या बदतमीजी की आपके साथ।

मम्मी: अच्छा। तो वो क्या था जो तुमने टेबल के नीचे से किया मेरे साथ। तुम्हें बिल्कुल भी चिंता नहीं थी। मेरे पति देख लेते तो। वो तो अंकुश भी साथ था।

अंकल: बट वर्षा। मजा तो आपको भी आया ना।

मम्मी: नहीं। ऐसा कुछ नहीं है। और ना ही मैं ऐसी बदतमीजी फिर कभी सहन करूँगी।

अंकल: वर्षा। मैं जानता हूँ। मुझे ऐसा नहीं करना था। तुम्हारा पति साथ था। लेकिन अब तो वो रूम में सो रहा है।

मम्मी: अब निकलो प्लीज। इससे पहले कि वो मादरचोद नामर्द नामर्द जाग जाए। और तुम्हें कोई दिक्कत हो।

अंकल: वर्षा प्लीज सॉरी। टेबल के नीचे जो किया। अब माफ कर दो। और एन्जॉय करते हैं।

मम्मी: ठीक है। लेकिन एक शर्त पे। आप अंकुश से कहिए। वो जाकर उसके पापा के रूम में सो जाए। और बाहर से कुंडी लगा देना।

और अंकुश से कहना। जब उसके पापा उठें। और बाहर से कुंडी लगी मिले। तो वो उसके पापा से कहे। मैंने ही मम्मी को दूसरे रूम में सोने भेजा है। और मैं आपके पास सो गया। और मैंने ही मम्मी से कहकर रूम की कुंडी लगवाई है बाहर से। और मेरा मोबाइल भी अंकुश को दे देना। ताकि वो उसे रूम में रखे। और जब उसका बाप मुझे कॉल करे। तो मेरा मोबाइल उसी रूम में बजे। और फिर हमें कोई डिस्टर्ब न हो पूरी रात।

अंकल: ये हुई ना वर्षा बात। ताकि तेरे पति उठ भी जाएँ। तो हमें डिस्टर्ब न हो।

और फिर अंकल मेरे पास आए। और मैं पापा के रूम में मम्मी का मोबाइल लेकर चला गया। और अंकल ने पापा के रूम की कुंडी बाहर से लगा दी। और फिर मैंने अपना मोबाइल में वीडियो चालू किया। लेकिन कुछ नहीं मिला। क्योंकि मेरा अंदर वाले रूम में सीसीटीवी कैमरा है। बाहर वाले में नहीं। और मम्मी अंकल अंदर वाले रूम में नहीं गए।

फिर मैंने अंकल को व्हाट्सएप पे मैसेज भेजा।

मैं: क्या आप दोनों मेरे अंदर वाले रूम में हो।

अंकल: बाहर वाले रूम में चुदाई कर रहा हूँ तेरी मम्मी की।

फिर मैं भी सो गया। और फिर सुबह 8 बजे मम्मी ने आकर मुझे और पापा को उठाया। और चाय पिलाई।

मैंने अंकल से पूछा कॉल पर। कितने बजे गए। तो अंकल ने कहा। लास्ट राउंड 8 बजे तक हुआ। फिर तेरी मम्मी ने मुझे चाय पिलाकर रवाना किया। और फिर तुझे और तेरे बाप को पिलाई।

फिर 9 बजे पापा ऑफिस चले गए। और मम्मी सोने। और फिर ना तो मम्मी से मैंने कुछ पूछा। और ना ही मम्मी ने।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 3 hours ago



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