3 hours ago
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शाम को पापा ने कहा। वो थोड़ा लेट आएंगे ऑफिस से। मम्मी ने खाना बनाया। और फिर करीब रात को 8 pm पर लाइट अचानक चली गई। मैंने देखा। मोहल्ले में लाइट आ रही है। फिर मम्मी ने कहा। बेटे किसी इलेक्ट्रीशियन को फोन कर।
मैंने कहा।
मैं: मम्मी। मुझे तो किसी इलेक्ट्रीशियन के बारे में जानकारी नहीं है। शायद अंकल को हो। उनसे पूछूँ।
मम्मी: हाँ। शायद योगेश जी को पता हो।
मैं: मम्मी आप अंकल को कॉल कर दो।
मम्मी: तू ही कर दे।
मैं: मम्मी आप करो।
मम्मी: ठीक है। फिर मम्मी अंकल को कॉल करती हैं।
अंकल: वर्षा। कैसे याद किया। कुछ काम था क्या।
मम्मी: वो मेरे घर की लाइट नहीं आ रही है। कुछ प्रॉब्लम है। शायद तुम किसी इलेक्ट्रीशियन को जानते हो। तो उसे भेज दो।
अंकल: वर्षा। लाइट तो आ रही है। शायद आपके ही घर में कहीं कोई दिक्कत होगी। लेकिन वर्षा। इस समय तो कोई भी नहीं आएगा। रात हो चुकी है।
मम्मी: देखो। अगर कोई आ जाए तो। पूरी रात बिना लाइट कैसे रहूँगी।
अंकल: मेरे घर आ जाओ तुम माँ बेटे। और पूरी रात मस्ती करेंगे।
मम्मी: आप भी। मेरे पति का क्या। वो कैसे सोएँगे।
अंकल: ठीक है। मैं ही आता हूँ। और देखता हूँ क्या प्रॉब्लम है।
फिर अंकल आते हैं। मम्मी ने मोबाइल की टॉर्च जला रखी थी। और अंकल मम्मी को सामने देख अंकल अपने होश खो बैठते हैं। आज मम्मी बेहद खूबसूरत ड्रेस में थीं। अंकल ने मेरी मम्मी को इस तरह के कपड़ों में पहले भी कई बार देखा है। लेकिन अंकल जब भी मम्मी को इन कपड़ों में देखते हैं। उनका लंड खड़ा हो जाता है। आज मम्मी ने एक फ्रॉक पहनी थी। जिसमें कंधे नंगे थे। सिर्फ एक डोर थी कंधों पर। मम्मी के दूधों से लेकर चूत तक का हिस्सा ढका था। उस ड्रेस से मम्मी की रंगें नंगी थीं। सिर्फ पैंटी ही ढक पा रही थी। मम्मी ने इतनी सेक्सी ड्रेस क्यों पहनी। मुझे नहीं पता। पर अंकल क्या। किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाए मम्मी को देखकर।
मेरी मम्मी अंकल को एकटक अपनी ओर देखते हुए उनसे पूछ बैठती हैं।
मम्मी: ऐसा क्या देख रहे हो।
अंकल: वो वर्षा। आपको हमेशा जब भी देखता हूँ। हमेशा प्यार करने का दिल करता है। और वर्षा। इस ड्रेस को मैंने तुम्हें जब दिलवाया था मार्केट से। तब सोचा था तुम बहुत खूबसूरत लगोगी इस ड्रेस में। लेकिन जितना सोचा था इस ड्रेस में। उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही हो।
मम्मी: ज्यादा मक्खन मत लगाओ। मुझे पता है मैं कैसी लगती हूँ।
अंकल: सच वर्षा। मैं झूठ नहीं कहता। मैं रियली लकी हूँ। जो मुझे आप जैसी गर्लफ्रेंड मिली।
मम्मी: अपनी स्माइल करते हुए। ये सब छोड़ो। लाइट देखो क्यों नहीं आ रही। और अंकुश भी है यहीं। मैं उनसे थोड़ी दूरी पर था।
अंकल: क्यों। उससे क्या फर्क पड़ता है। वो ही तो हमें मिलवाता है।
मम्मी: पहले लाइट देखो।
अंकल घर में मेन कनेक्शन देखने लगते हैं। तो उन्हें वहाँ थोड़ा वायर जली हुई दिखती है। वो मम्मी को टॉर्च पकड़ के खड़ा रहने के लिए कहते हैं।
तो मैं कहता हूँ। मम्मी मैं पकड़ता हूँ टॉर्च।
मम्मी: नहीं बेटा। तू दूर रह। ये लाइट से दूर रहना चाहिए। मुझे बहुत अच्छा लगा। मम्मी मुझसे कितना प्यार करती हैं।
फिर मम्मी अंकल के पीछे टॉर्च पकड़ के खड़ी हो जाती हैं। पर इससे अंकल को सही से दिखाई नहीं देता। उनके मन में मेरी मम्मी से मजे लेने का एक तरीका सूझता है।
अंकल: वर्षा। ऐसे तो सही से दिख नहीं रहा। कहीं मुझे करंट न लग जाए। आप आगे आ जाइए प्लीज।
मेरी मम्मी अंकल के आगे जाने को नहीं आना चाहती थीं। क्योंकि मम्मी समझ चुकी थीं। अंकल मम्मी से रोमांस करेंगे। पर जाना भी जरूरी था। मम्मी ने मेरी तरफ देखा।
मैंने कहा। मम्मी अंकल सही कह रहे हैं। फिर मम्मी मेरी ओर हाँ में गर्दन हिला कर बोलीं। बेटा दूर रह। मैं टॉर्च बता रही हूँ। और अंकल के आगे खड़ी हो जाती हैं।
अंकल गहरी साँस ले कर मेरी मम्मी के बदन की खुशबू को सूँघते हैं। और वायर को सही करने लगते हैं।
मेरी मम्मी के इतना करीब होने से अंकल का लंड पूरा तन जाता है। मेरी मम्मी को भी इस बात का अहसास था। कि इस तरह उन्हें अंकल के आगे नहीं आना चाहिए था। उनके आगे आने से अंकल का लंड खड़ा होगा। और मैं सामने था। इसलिए मम्मी को भी शर्म आ रही थी। मेरी मम्मी अपने बदन पर अंकल की साँसें फील कर सकती थीं।
अंकल मेरी मम्मी की ऐस (गाँड) पर डिक टच कर के मेरी मम्मी का रिएक्शन चेक करते हैं। डिक टच होते ही मेरी मम्मी अंकल को टोक देती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुमने प्रॉमिस किया था। आप अंकुश के सामने दोबारा ऐसी वैसी हरकत न करने के लिए।
अंकल: वर्षा। जानता हूँ। इसलिए अपने आप को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा हूँ। बट वर्षा। हर चीज मेरे कंट्रोल में नहीं है। वर्षा। तेरे इतना करीब आकर मेरा लंड न चाहते हुए भी खड़ा हो गया है। इसमें मेरी नहीं। आपकी ही गलती है।
मम्मी थोड़ा गुस्सा हो जाती हैं।
मम्मी: मेरी क्या गलती है इसमें।
अंकल: वर्षा। मुझसे मत बुलवायो।
मम्मी: बताओ। मेरी क्या गलती है।
अंकल: वर्षा। आप हैं ही इतनी खूबसूरत। कि मुर्दे का भी खड़ा हो जाए। मुझे माफ करना वर्षा। आप कहें तो मैं कल किसी को ले आता हूँ सही करने के लिए।
मम्मी: आप तो नाराज हो गए। मैं क्या आपको अपना बदन नहीं सौंपती हूँ। क्या आपसे नहीं चुदवाती हूँ पूरी रात। पर मैं यही कहती हूँ। अंकुश के सामने नहीं। वो मेरा बेटा है। माँ बेटे के बीच थोड़ी मर्यादा होनी चाहिए। मैं जानती हूँ। वो मेरी चुदाई की पहरेदारी भी करेगा। और रही बात। आपने कहा आप कल किसी को ले आओगे। तो हम पूरी रात कैसे रहेंगे अँधेरे में। तुम प्लीज इसे सही कर दो।
अंकल: वर्षा। बट थोड़ा मेरी मजबूरी समझ के मुझे माफ कर देना। मैं भी नहीं चाहता कि माँ बेटे की मर्यादा टूटे। पर अंकुश ने ही तुम्हें मेरे लंड से चुड़वाया है। और मैं जब भी तुझे देखता हूँ। मेरा लंड हमेशा खड़ा हो जाता है।
ये कह कर अंकल अपना लंड सीधा मेरी मम्मी के ऐस क्रैक में लगा देते हैं।
मेरी मम्मी को मानो जैसे एक करंट लगा हो।
अंकल वायर को कट कर उसे चेंज करने लगते हैं।
अंकल इसी बहाने मेरी मम्मी की गाँड में अपना लंड रगड़ने लगते हैं। जिससे मेरी मम्मी की चूत भी गीली हो जाती है। मेरी मम्मी की साँसें तेज हो जाती हैं। और अंकल समझ जाते हैं कि मेरी मम्मी गरम हो रही हैं।
अंकल: वर्षा। आपका थैंक्स कहना भूल गया था मैं।
मम्मी: (धीमी आवाज में) वो क्यों।
अंकल: वर्षा। आपने मुझे अपनी ब्रा जो दी थी आज दिन में। और मेरे बारे में किसी को कुछ कहा भी नहीं।
मम्मी: ब्रा दी थी। और आपने उसमें मुठ मारी। मुझे अच्छा नहीं लगा। आपने अंकुश से भिजवाई।
अंकल: इसमें क्या हो गया। उसने कहा था। उसे लगता है जब मैं तुम्हें प्यार करता हूँ।
मम्मी: ठीक है। अब लाइट सही करो।
अंकल: वर्षा। क्या तुम्हारी चूत गरम हुई थी दिन में।
मम्मी: हाँ। आपने मुझे बहुत गरम कर दिया था बाथरूम में।
अंकल: मेरा भी लंड तुम्हारे जिस्म से खड़ा हो गया था।
मम्मी: पर आपने तो मेरी ब्रा में मुठ मारकर ठंडा कर लिया था।
अंकल: इसका मतलब तेरी चूत प्यासी है। और तड़प रही है मेरे लंड के लिए।
मम्मी: मैं सब समझती हूँ। आप मुझे अभी चोदना चाहते हो। पर मैं अभी अपनी चूत नहीं दूँगी। आप लाइट सही करो।
अंकल वो कर ही रहा हूँ। पर ये बताओ। आज रात का क्या प्लान है।
मम्मी अंकल बातें कर रहे थे। और बातों बातों में मेरी मम्मी को पता ही नहीं चलता। कब अंकल ने कनेक्शन सही कर दिया। पर कमरे की लाइट अभी भी स्विच ऑफ ही है।
अंकल: आई लव यू वर्षा। ये कह कर अंकल मेरी मम्मी के शरीर पर झुक जाते हैं। और मेरी मम्मी के गले पर किस कर देते हैं।
मम्मी: आह। योगेश जी। पीछे हट जाओ प्लीज।
अंकल: वर्षा। आपका मन नहीं करता कि मैं हमेशा आपकी प्यास बुझाऊँ।
अंकल अब अपने हाथ मेरी मम्मी के बूब्स की ओर बढ़ा देते हैं।
अंकल के हाथों को अपने बूब्स की ओर बढ़ता देख मेरी मम्मी खुद को संभालने की कोशिश करती हैं। और दूर जाने लगती हैं। पर अंकल मेरी मम्मी को दीवार से लगा देते हैं। और मेरी मम्मी को पीछे से हग कर लेते हैं।
मेरी मम्मी अंकल की पकड़ से छूटने की हल्की कोशिश करती हैं। पर अंकल मेरी मम्मी को दीवार से लगा के मेरी मम्मी के टॉप की चेन पीछे से खोल देते हैं। और वो टॉप ऐसी थी। कंधों पर डोर से बँधी थी। बहुत छोटी टॉप थी।
मम्मी: योगेश जी प्लीज समझो। छोड़ो मुझे।
अंकल: वर्षा। देखो तो मेरी ओर।
अंकल मेरी मम्मी को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश करते हैं।
मेरी मम्मी मना करती हैं। पर अंकल थोड़ा प्रेशर बढ़ा के मेरी मम्मी को अपनी तरफ मोड़ ही लेते हैं। मेरी मम्मी भी ज्यादा विरोध नहीं कर पातीं।
अंकल मेरी मम्मी को सीधा कर अपना हाथ मेरी मम्मी के बूब्स की तरफ लाने लगते हैं। जिसे देख मेरी मम्मी अंकल के हाथ को बीच में ही रोक लेती हैं।
मम्मी: योगेश जी प्लीज। अब मत छेड़ो मुझे। वरना मैं तुम्हें कभी अपने बदन को छूने भी नहीं दूँगी।
अंकल: क्यों वर्षा। आप भी तो गरम हो गई हो। तो क्यों रोक रही हो मुझे।
मम्मी: नहीं। ऐसा कुछ नहीं है। आपकी जो भी करना है। कल दिन में करना। अभी अंकुश खड़ा है पास में। उसके सामने नहीं। और वो मेरा बेटा है। और माँ बेटे के बीच मर्यादा होती है।
अंकल: लेकिन वर्षा। उसी ने तो हम दोनों की चुदाई करवाई है। और पिछले 6 महीनों से वो मुझसे तुमको चुड़वा रहा है। और मैं उसी के कहने पे आपकी प्यास बुझाने के लिए तो यहाँ आया हूँ। और वर्षा। मैं जब भी तुमको देखता हूँ। तो देखो मेरे साथ क्या हो जाता है।
ये कह कर अंकल मेरी मम्मी का हाथ अपने लंड की ओर फोर्स करने लगते हैं।
मेरी मम्मी अपने आप को थोड़ा संभालती हैं। और अंकल को पीछे की ओर पुश कर देती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुम जाते हो या मैं अंकुश को बोलूँ। वो तुम्हें रोकेगा मेरे बदन से खेलने से।
अंकल: वर्षा। मैं उससे बोल देता हूँ। वो रूम में चला जाएगा। फिर तो मजे लेने दोगी अपने बदन से।
मम्मी: नहीं प्लीज। रात को कर लेना। जब मेरा पति आ जाएगा। और सो जाएगा तब।
अंकल: वर्षा। मुझे यकीन नहीं हो रहा है। कि तुम किस तरह अपने आप को कंट्रोल कर पा रही हो।
मम्मी: मैं जानती हूँ मैं कैसे कंट्रोल कर रही हूँ। मैं अंकुश के सामने ये सब अच्छा नहीं लगता है। और मैं आपसे मना नहीं कर रही हूँ। बस रात को मैं तुम्हें बुला लूँगी। पर अभी नहीं।
अंकल मेरी मम्मी को आज ऐसे ही नहीं छोड़ना चाहते। और अंकल फिर से मेरी मम्मी की ओर बढ़ चलते हैं। तभी डोर बेल रिंग होने की आवाज आती है।
मेरी मम्मी और अंकल दोनों शॉक हो जाते हैं। कि रात में 10 बजे कौन आया होगा।
क्योंकि पापा तो कॉल करके आते हैं।
मेरी मम्मी अपने आप को संभालती हैं। और मुझे आवाज देती हैं। अंकुश।
मैं: जी मम्मी।
मम्मी: बेटा देख कौन है।
मैं: देखता हूँ। कि हॉल से तो सामने पापा थे। आज पापा बिना कॉल किए आ गए।
मैं वापस आकर थोड़ी दूर रहता हूँ मम्मी अंकल से। हालाँकि अभी भी घर की लाइट का स्विच ऑफ था। लेकिन मम्मी ने मोबाइल की टॉर्च जला रखी थी।
मैं: मम्मी। पापा आए हैं। और ये सुनकर मेरी मम्मी के होश उड़ जाते हैं। क्योंकि इस समय अंकल मम्मी के साथ में हैं। और पापा देख लेंगे तो क्या होगा। मेरी मम्मी को समझ नहीं आता कि अब क्या करें। मेरी मम्मी का शरीर ठंडा पड़ने लगता है। लेकिन कुछ ही पलों में वो पसीना पसीना हो जाती हैं।
अंकल मेरी मम्मी के पास आ कर मेरी मम्मी को हिलाते हैं।
अंकल: क्या हुआ वर्षा। डर क्यों रही हो। अंकुश साथ में है। डरने की जरूरत नहीं है।
मैं: हाँ मम्मी। आप डरो मत। पापा को मैं संभाल लूँगा।
मम्मी: योगेश जी। तुम जाओ जल्दी यहाँ से।
अंकल: ठीक है। मैं ऊपर सीढ़ियों में जा रहा हूँ। वो जैसे ही फ्रेश होने जाए। मैं आ जाऊँगा।
मम्मी: क्यों।
अंकल: बाद में बताऊँगा। और सीढ़ियों से चले गए।
फिर मैंने घर की लाइट ऑन की। और गेट खोला। पापा आ गए घर में। और फ्रेश होने चले गए।
शाम को पापा ने कहा। वो थोड़ा लेट आएंगे ऑफिस से। मम्मी ने खाना बनाया। और फिर करीब रात को 8 pm पर लाइट अचानक चली गई। मैंने देखा। मोहल्ले में लाइट आ रही है। फिर मम्मी ने कहा। बेटे किसी इलेक्ट्रीशियन को फोन कर।
मैंने कहा।
मैं: मम्मी। मुझे तो किसी इलेक्ट्रीशियन के बारे में जानकारी नहीं है। शायद अंकल को हो। उनसे पूछूँ।
मम्मी: हाँ। शायद योगेश जी को पता हो।
मैं: मम्मी आप अंकल को कॉल कर दो।
मम्मी: तू ही कर दे।
मैं: मम्मी आप करो।
मम्मी: ठीक है। फिर मम्मी अंकल को कॉल करती हैं।
अंकल: वर्षा। कैसे याद किया। कुछ काम था क्या।
मम्मी: वो मेरे घर की लाइट नहीं आ रही है। कुछ प्रॉब्लम है। शायद तुम किसी इलेक्ट्रीशियन को जानते हो। तो उसे भेज दो।
अंकल: वर्षा। लाइट तो आ रही है। शायद आपके ही घर में कहीं कोई दिक्कत होगी। लेकिन वर्षा। इस समय तो कोई भी नहीं आएगा। रात हो चुकी है।
मम्मी: देखो। अगर कोई आ जाए तो। पूरी रात बिना लाइट कैसे रहूँगी।
अंकल: मेरे घर आ जाओ तुम माँ बेटे। और पूरी रात मस्ती करेंगे।
मम्मी: आप भी। मेरे पति का क्या। वो कैसे सोएँगे।
अंकल: ठीक है। मैं ही आता हूँ। और देखता हूँ क्या प्रॉब्लम है।
फिर अंकल आते हैं। मम्मी ने मोबाइल की टॉर्च जला रखी थी। और अंकल मम्मी को सामने देख अंकल अपने होश खो बैठते हैं। आज मम्मी बेहद खूबसूरत ड्रेस में थीं। अंकल ने मेरी मम्मी को इस तरह के कपड़ों में पहले भी कई बार देखा है। लेकिन अंकल जब भी मम्मी को इन कपड़ों में देखते हैं। उनका लंड खड़ा हो जाता है। आज मम्मी ने एक फ्रॉक पहनी थी। जिसमें कंधे नंगे थे। सिर्फ एक डोर थी कंधों पर। मम्मी के दूधों से लेकर चूत तक का हिस्सा ढका था। उस ड्रेस से मम्मी की रंगें नंगी थीं। सिर्फ पैंटी ही ढक पा रही थी। मम्मी ने इतनी सेक्सी ड्रेस क्यों पहनी। मुझे नहीं पता। पर अंकल क्या। किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाए मम्मी को देखकर।
मेरी मम्मी अंकल को एकटक अपनी ओर देखते हुए उनसे पूछ बैठती हैं।
मम्मी: ऐसा क्या देख रहे हो।
अंकल: वो वर्षा। आपको हमेशा जब भी देखता हूँ। हमेशा प्यार करने का दिल करता है। और वर्षा। इस ड्रेस को मैंने तुम्हें जब दिलवाया था मार्केट से। तब सोचा था तुम बहुत खूबसूरत लगोगी इस ड्रेस में। लेकिन जितना सोचा था इस ड्रेस में। उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही हो।
मम्मी: ज्यादा मक्खन मत लगाओ। मुझे पता है मैं कैसी लगती हूँ।
अंकल: सच वर्षा। मैं झूठ नहीं कहता। मैं रियली लकी हूँ। जो मुझे आप जैसी गर्लफ्रेंड मिली।
मम्मी: अपनी स्माइल करते हुए। ये सब छोड़ो। लाइट देखो क्यों नहीं आ रही। और अंकुश भी है यहीं। मैं उनसे थोड़ी दूरी पर था।
अंकल: क्यों। उससे क्या फर्क पड़ता है। वो ही तो हमें मिलवाता है।
मम्मी: पहले लाइट देखो।
अंकल घर में मेन कनेक्शन देखने लगते हैं। तो उन्हें वहाँ थोड़ा वायर जली हुई दिखती है। वो मम्मी को टॉर्च पकड़ के खड़ा रहने के लिए कहते हैं।
तो मैं कहता हूँ। मम्मी मैं पकड़ता हूँ टॉर्च।
मम्मी: नहीं बेटा। तू दूर रह। ये लाइट से दूर रहना चाहिए। मुझे बहुत अच्छा लगा। मम्मी मुझसे कितना प्यार करती हैं।
फिर मम्मी अंकल के पीछे टॉर्च पकड़ के खड़ी हो जाती हैं। पर इससे अंकल को सही से दिखाई नहीं देता। उनके मन में मेरी मम्मी से मजे लेने का एक तरीका सूझता है।
अंकल: वर्षा। ऐसे तो सही से दिख नहीं रहा। कहीं मुझे करंट न लग जाए। आप आगे आ जाइए प्लीज।
मेरी मम्मी अंकल के आगे जाने को नहीं आना चाहती थीं। क्योंकि मम्मी समझ चुकी थीं। अंकल मम्मी से रोमांस करेंगे। पर जाना भी जरूरी था। मम्मी ने मेरी तरफ देखा।
मैंने कहा। मम्मी अंकल सही कह रहे हैं। फिर मम्मी मेरी ओर हाँ में गर्दन हिला कर बोलीं। बेटा दूर रह। मैं टॉर्च बता रही हूँ। और अंकल के आगे खड़ी हो जाती हैं।
अंकल गहरी साँस ले कर मेरी मम्मी के बदन की खुशबू को सूँघते हैं। और वायर को सही करने लगते हैं।
मेरी मम्मी के इतना करीब होने से अंकल का लंड पूरा तन जाता है। मेरी मम्मी को भी इस बात का अहसास था। कि इस तरह उन्हें अंकल के आगे नहीं आना चाहिए था। उनके आगे आने से अंकल का लंड खड़ा होगा। और मैं सामने था। इसलिए मम्मी को भी शर्म आ रही थी। मेरी मम्मी अपने बदन पर अंकल की साँसें फील कर सकती थीं।
अंकल मेरी मम्मी की ऐस (गाँड) पर डिक टच कर के मेरी मम्मी का रिएक्शन चेक करते हैं। डिक टच होते ही मेरी मम्मी अंकल को टोक देती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुमने प्रॉमिस किया था। आप अंकुश के सामने दोबारा ऐसी वैसी हरकत न करने के लिए।
अंकल: वर्षा। जानता हूँ। इसलिए अपने आप को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा हूँ। बट वर्षा। हर चीज मेरे कंट्रोल में नहीं है। वर्षा। तेरे इतना करीब आकर मेरा लंड न चाहते हुए भी खड़ा हो गया है। इसमें मेरी नहीं। आपकी ही गलती है।
मम्मी थोड़ा गुस्सा हो जाती हैं।
मम्मी: मेरी क्या गलती है इसमें।
अंकल: वर्षा। मुझसे मत बुलवायो।
मम्मी: बताओ। मेरी क्या गलती है।
अंकल: वर्षा। आप हैं ही इतनी खूबसूरत। कि मुर्दे का भी खड़ा हो जाए। मुझे माफ करना वर्षा। आप कहें तो मैं कल किसी को ले आता हूँ सही करने के लिए।
मम्मी: आप तो नाराज हो गए। मैं क्या आपको अपना बदन नहीं सौंपती हूँ। क्या आपसे नहीं चुदवाती हूँ पूरी रात। पर मैं यही कहती हूँ। अंकुश के सामने नहीं। वो मेरा बेटा है। माँ बेटे के बीच थोड़ी मर्यादा होनी चाहिए। मैं जानती हूँ। वो मेरी चुदाई की पहरेदारी भी करेगा। और रही बात। आपने कहा आप कल किसी को ले आओगे। तो हम पूरी रात कैसे रहेंगे अँधेरे में। तुम प्लीज इसे सही कर दो।
अंकल: वर्षा। बट थोड़ा मेरी मजबूरी समझ के मुझे माफ कर देना। मैं भी नहीं चाहता कि माँ बेटे की मर्यादा टूटे। पर अंकुश ने ही तुम्हें मेरे लंड से चुड़वाया है। और मैं जब भी तुझे देखता हूँ। मेरा लंड हमेशा खड़ा हो जाता है।
ये कह कर अंकल अपना लंड सीधा मेरी मम्मी के ऐस क्रैक में लगा देते हैं।
मेरी मम्मी को मानो जैसे एक करंट लगा हो।
अंकल वायर को कट कर उसे चेंज करने लगते हैं।
अंकल इसी बहाने मेरी मम्मी की गाँड में अपना लंड रगड़ने लगते हैं। जिससे मेरी मम्मी की चूत भी गीली हो जाती है। मेरी मम्मी की साँसें तेज हो जाती हैं। और अंकल समझ जाते हैं कि मेरी मम्मी गरम हो रही हैं।
अंकल: वर्षा। आपका थैंक्स कहना भूल गया था मैं।
मम्मी: (धीमी आवाज में) वो क्यों।
अंकल: वर्षा। आपने मुझे अपनी ब्रा जो दी थी आज दिन में। और मेरे बारे में किसी को कुछ कहा भी नहीं।
मम्मी: ब्रा दी थी। और आपने उसमें मुठ मारी। मुझे अच्छा नहीं लगा। आपने अंकुश से भिजवाई।
अंकल: इसमें क्या हो गया। उसने कहा था। उसे लगता है जब मैं तुम्हें प्यार करता हूँ।
मम्मी: ठीक है। अब लाइट सही करो।
अंकल: वर्षा। क्या तुम्हारी चूत गरम हुई थी दिन में।
मम्मी: हाँ। आपने मुझे बहुत गरम कर दिया था बाथरूम में।
अंकल: मेरा भी लंड तुम्हारे जिस्म से खड़ा हो गया था।
मम्मी: पर आपने तो मेरी ब्रा में मुठ मारकर ठंडा कर लिया था।
अंकल: इसका मतलब तेरी चूत प्यासी है। और तड़प रही है मेरे लंड के लिए।
मम्मी: मैं सब समझती हूँ। आप मुझे अभी चोदना चाहते हो। पर मैं अभी अपनी चूत नहीं दूँगी। आप लाइट सही करो।
अंकल वो कर ही रहा हूँ। पर ये बताओ। आज रात का क्या प्लान है।
मम्मी अंकल बातें कर रहे थे। और बातों बातों में मेरी मम्मी को पता ही नहीं चलता। कब अंकल ने कनेक्शन सही कर दिया। पर कमरे की लाइट अभी भी स्विच ऑफ ही है।
अंकल: आई लव यू वर्षा। ये कह कर अंकल मेरी मम्मी के शरीर पर झुक जाते हैं। और मेरी मम्मी के गले पर किस कर देते हैं।
मम्मी: आह। योगेश जी। पीछे हट जाओ प्लीज।
अंकल: वर्षा। आपका मन नहीं करता कि मैं हमेशा आपकी प्यास बुझाऊँ।
अंकल अब अपने हाथ मेरी मम्मी के बूब्स की ओर बढ़ा देते हैं।
अंकल के हाथों को अपने बूब्स की ओर बढ़ता देख मेरी मम्मी खुद को संभालने की कोशिश करती हैं। और दूर जाने लगती हैं। पर अंकल मेरी मम्मी को दीवार से लगा देते हैं। और मेरी मम्मी को पीछे से हग कर लेते हैं।
मेरी मम्मी अंकल की पकड़ से छूटने की हल्की कोशिश करती हैं। पर अंकल मेरी मम्मी को दीवार से लगा के मेरी मम्मी के टॉप की चेन पीछे से खोल देते हैं। और वो टॉप ऐसी थी। कंधों पर डोर से बँधी थी। बहुत छोटी टॉप थी।
मम्मी: योगेश जी प्लीज समझो। छोड़ो मुझे।
अंकल: वर्षा। देखो तो मेरी ओर।
अंकल मेरी मम्मी को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश करते हैं।
मेरी मम्मी मना करती हैं। पर अंकल थोड़ा प्रेशर बढ़ा के मेरी मम्मी को अपनी तरफ मोड़ ही लेते हैं। मेरी मम्मी भी ज्यादा विरोध नहीं कर पातीं।
अंकल मेरी मम्मी को सीधा कर अपना हाथ मेरी मम्मी के बूब्स की तरफ लाने लगते हैं। जिसे देख मेरी मम्मी अंकल के हाथ को बीच में ही रोक लेती हैं।
मम्मी: योगेश जी प्लीज। अब मत छेड़ो मुझे। वरना मैं तुम्हें कभी अपने बदन को छूने भी नहीं दूँगी।
अंकल: क्यों वर्षा। आप भी तो गरम हो गई हो। तो क्यों रोक रही हो मुझे।
मम्मी: नहीं। ऐसा कुछ नहीं है। आपकी जो भी करना है। कल दिन में करना। अभी अंकुश खड़ा है पास में। उसके सामने नहीं। और वो मेरा बेटा है। और माँ बेटे के बीच मर्यादा होती है।
अंकल: लेकिन वर्षा। उसी ने तो हम दोनों की चुदाई करवाई है। और पिछले 6 महीनों से वो मुझसे तुमको चुड़वा रहा है। और मैं उसी के कहने पे आपकी प्यास बुझाने के लिए तो यहाँ आया हूँ। और वर्षा। मैं जब भी तुमको देखता हूँ। तो देखो मेरे साथ क्या हो जाता है।
ये कह कर अंकल मेरी मम्मी का हाथ अपने लंड की ओर फोर्स करने लगते हैं।
मेरी मम्मी अपने आप को थोड़ा संभालती हैं। और अंकल को पीछे की ओर पुश कर देती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुम जाते हो या मैं अंकुश को बोलूँ। वो तुम्हें रोकेगा मेरे बदन से खेलने से।
अंकल: वर्षा। मैं उससे बोल देता हूँ। वो रूम में चला जाएगा। फिर तो मजे लेने दोगी अपने बदन से।
मम्मी: नहीं प्लीज। रात को कर लेना। जब मेरा पति आ जाएगा। और सो जाएगा तब।
अंकल: वर्षा। मुझे यकीन नहीं हो रहा है। कि तुम किस तरह अपने आप को कंट्रोल कर पा रही हो।
मम्मी: मैं जानती हूँ मैं कैसे कंट्रोल कर रही हूँ। मैं अंकुश के सामने ये सब अच्छा नहीं लगता है। और मैं आपसे मना नहीं कर रही हूँ। बस रात को मैं तुम्हें बुला लूँगी। पर अभी नहीं।
अंकल मेरी मम्मी को आज ऐसे ही नहीं छोड़ना चाहते। और अंकल फिर से मेरी मम्मी की ओर बढ़ चलते हैं। तभी डोर बेल रिंग होने की आवाज आती है।
मेरी मम्मी और अंकल दोनों शॉक हो जाते हैं। कि रात में 10 बजे कौन आया होगा।
क्योंकि पापा तो कॉल करके आते हैं।
मेरी मम्मी अपने आप को संभालती हैं। और मुझे आवाज देती हैं। अंकुश।
मैं: जी मम्मी।
मम्मी: बेटा देख कौन है।
मैं: देखता हूँ। कि हॉल से तो सामने पापा थे। आज पापा बिना कॉल किए आ गए।
मैं वापस आकर थोड़ी दूर रहता हूँ मम्मी अंकल से। हालाँकि अभी भी घर की लाइट का स्विच ऑफ था। लेकिन मम्मी ने मोबाइल की टॉर्च जला रखी थी।
मैं: मम्मी। पापा आए हैं। और ये सुनकर मेरी मम्मी के होश उड़ जाते हैं। क्योंकि इस समय अंकल मम्मी के साथ में हैं। और पापा देख लेंगे तो क्या होगा। मेरी मम्मी को समझ नहीं आता कि अब क्या करें। मेरी मम्मी का शरीर ठंडा पड़ने लगता है। लेकिन कुछ ही पलों में वो पसीना पसीना हो जाती हैं।
अंकल मेरी मम्मी के पास आ कर मेरी मम्मी को हिलाते हैं।
अंकल: क्या हुआ वर्षा। डर क्यों रही हो। अंकुश साथ में है। डरने की जरूरत नहीं है।
मैं: हाँ मम्मी। आप डरो मत। पापा को मैं संभाल लूँगा।
मम्मी: योगेश जी। तुम जाओ जल्दी यहाँ से।
अंकल: ठीक है। मैं ऊपर सीढ़ियों में जा रहा हूँ। वो जैसे ही फ्रेश होने जाए। मैं आ जाऊँगा।
मम्मी: क्यों।
अंकल: बाद में बताऊँगा। और सीढ़ियों से चले गए।
फिर मैंने घर की लाइट ऑन की। और गेट खोला। पापा आ गए घर में। और फ्रेश होने चले गए।


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