Yesterday, 10:30 PM
update 56
पूरे दिन पापा घर पे रहे। और अंकल को घर वापस जाना पड़ा अपने खड़े लंड के साथ।
फिर शाम को पड़ोसी आंटी हमारे घर आईं। और उन्होंने बताया। कल उनके घर प्रोग्राम है। तो सभी का निमंत्रण है। कल सभी को हमारे घर आना है।
तो पापा ने कहा। जरूर आएंगे। और मम्मी ने भी। फिर आंटी हमारे घर से चली गईं। और अंकल के घर जाकर अंकल को भी इनविटेशन दिया।
रात को मम्मी ने खाना बनाया। और मुझसे नींद की एक टैबलेट माँगी। तो मैंने कहा। मम्मी अंकल को बुला लूँगा। वो आपको कंप्यूटर सिखा देंगे।
मम्मी: मुस्कुराते हुए। नहीं। आज मैं सोऊँगी। थोड़ी थकान है।
मैं: ओके मम्मी। फिर ये नींद की गोली क्यों।
मम्मी: तेरे पापा के लिए।
मैं: क्यों मम्मी।
मम्मी: वो जल्दी सो जाएँगे। तो मुझे भी नींद आ जाएगी।
मैं: ओके मम्मी। फिर पापा खाना खाकर सो गए। और मम्मी भी उनके साथ रूम में गईं। और मैं अपने रूम में आकर सो गया।
फिर रात को 12 बजे मेरी नींद खुली। पापा मम्मी की विंडो पे गया। तो देखा। पापा सो रहे हैं। लेकिन मम्मी वहाँ नहीं हैं। फिर मैंने देखा। रूम की कुंडी खुली है। फिर मैं समझ गया। शायद मम्मी अंकल के घर गई होंगी।
मैं सीढ़ियों में गया। तो सीढ़ियों की कुंडी लगी हुई थी। इसका मतलब मम्मी बाहर से कुंडी लगाकर गई थीं।
फिर मैंने अंकल को कॉल किया।
अंकल: हेलो बेटा। हाँफते हुए।
मैं: अंकल मम्मी आपके साथ हैं।
अंकल: हाँ बेटे। और कॉल कट कर दिया।
फिर मैं सो गया। और सुबह 8 बजे उठा। तो देखा। मम्मी पापा के साथ रूम में सो रही थीं।
मम्मी कब आईं। मुझे नहीं पता। फिर मैंने अंकल को कॉल किया। तो बोले। सुबह 6 बजे तक मस्ती के साथ चोदा उसको। मजा आ गया।
मैं: क्या आज दिन में पड़ोसी के घर आओगे।
अंकल: हाँ बेटे।
फिर 11 बजे मम्मी ने पापा से कहा। वो हे पड़ोसी में चलना है प्रोग्राम में। तो पापा बोले। तू अंकुश के साथ चली जा। मुझे आज जरूरी वर्क है। फिर मैं मम्मी पड़ोसी आंटी के घर गए।
आज मम्मी ने एक बहुत ही सुंदर सी साड़ी पहनी थी। हालाँकि साड़ी बहुत ज्यादा रिवीलिंग नहीं थी। पर फिर भी मम्मी साड़ी में एकदम सेक्स डॉल लग रही थीं। मम्मी के उभरे हुए बूब्स, भारी हुई गाँड देखकर अंकल का बुरा हाल हुए जा रहा था। क्योंकि अंकल भी आए हुए थे प्रोग्राम में। बहुत सारी लेडीज आई हुई थीं। वहाँ कई जेंट्स भी थे। लेकिन अंकल तो सिर्फ मम्मी को ही घूरे जा रहे थे। मम्मी भी अंकल को स्माइल कर रही थीं।
मम्मी को पता नहीं चलता कि उनके ब्लाउज का हुक पीछे से टूट गया है। दरअसल पिछले 6 महीनों में। जब से मम्मी की अंकल ने चुदाई करना शुरू किया है। तब से मम्मी के बूब्स का साइज पहले से भी ज्यादा बढ़ चुका है। मम्मी ये तो जानती थीं कि ब्लाउज टाइट हो गया है। पर हुक टूट जाएगा। मेरी मम्मी को अंदाजा नहीं था।
प्रोग्राम में आई एक आंटी। जिन्हें मैं नहीं जानता। वो ये नोटिस कर लेती हैं। और मेरी मम्मी के पास जाकर मेरी मम्मी को ये बताती हैं। हालाँकि मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर साड़ी का पल्लू आने के कारण। प्रोग्राम में किसी ने अभी तक नोटिस नहीं किया था।
मेरी मम्मी थोड़ा घबरा जाती हैं। कि कहीं प्रोग्राम में आए जेंट्स लोगों ने देखा न हो। मेरी मम्मी के चेहरे पर पसीना आ जाता है।
फिर मम्मी मुझे आवाज देती हैं। और मुझे बाथरूम में लेकर आती हैं। और मुझसे कहती हैं। बेटा मेरे ब्लाउज का हुक टूटा है।
मैं: मम्मी अब क्या होगा।
मम्मी: बेटा मेरे ब्लाउज के हुक को एडजस्ट कर। किसी तरह।
मैं: कोशिश करता हूँ। लेकिन मम्मी के ब्लाउज का हुक टूट जाने से मम्मी का ब्लाउज बंद नहीं हो पाता।
मम्मी: बेटा अब क्या करूँ।
मैं: मम्मी मैं घर से दूसरा ब्लाउज ले आता हूँ।
मम्मी: नहीं बेटा। साड़ी का मैचिंग ब्लाउज तो यही है। दूसरे ब्लाउज पर साड़ी मैच नहीं करेगी।
मैं: तो क्या करूँ।
मम्मी: बेटा तू इस ब्लाउज को टेलर के पास ले जा। और सही करा ला।
मैं: मम्मी आप बिना ब्लाउज के कैसे रहोगी।
मम्मी: बेटा मैं टॉयलेट के अंदर रहूँगी। तू जल्दी ले आ। सही करा कर।
मैं: मम्मी ठीक है। आप दो।
फिर मम्मी ने अपना ब्लाउज उतारा। और मुझे दे दिया।
फिर मैं ब्लाउज को अपने पैंट की जेब में रखा। और बाहर आया। और अंकल के पास गया। और अंकल के कान में बता दिया। और अंकल मुस्कुराने लगे। और मेरे साथ चल दिए। जहाँ से हम टेलर के पास गए। और ब्लाउज का हुक ठीक करवाया। लेकिन अंकल ने टेलर से कहा। इस ब्लाउज का हुक थोड़ा टाइट करना।
टेलर: क्यों साहब। इससे तो ब्लाउज पहनने में परेशानी होगी।
अंकल: ये मेरी वाइफ का ब्लाउज है। मैं खुद उसे अपने हाथों से पहनाऊँगा।
टेलर: हँसते हुए। ओके साहब।
फिर टेलर ने मेरी मम्मी का ब्लाउज का हुक कुछ ज्यादा ही टाइट कर दिया।
फिर अंकल ने टेलर को पैसे दिए। और हम वापस आए। और गाड़ी से उतरे। तो अंकल ने कहा। ब्लाउज मुझे दे। और अपनी पैंट की जेब में अंकल ने मम्मी का ब्लाउज रख लिया। और मैं समझ गया। अंकल खुद अपने हाथों से मेरी मम्मी को ब्लाउज पहनाएँगे। तो मैं अंकल से बोला।
मैं: अंकल क्या आप मम्मी को ब्लाउज पहनाओगे।
अंकल: बेटा तू बाथरूम के बाहर खड़े रहकर ध्यान रखना। मैं तेरी मम्मी के साथ क्या करूँगा। तू खुद देख लेना। फिर हम दोनों बाथरूम के बाहर गए। जहाँ कोई नहीं था। प्रोग्राम में सभी लोग बिजी थे। मैं बाथरूम के बाहर रुक गया। और अंकल मेरी मम्मी का ब्लाउज लेकर अंदर बाथरूम में जाने लगे। जहाँ मेरी मम्मी बिना ब्लाउज के ब्रा में खड़ी थीं। लेकिन मम्मी ने अंदर से बाथरूम का गेट लगा रखा था।
अंकल ने अपनी पैंट की जेब से मेरी मम्मी का ब्लाउज निकाला। और बाथरूम के दरवाजे पे नॉक करते हैं।
मेरी मम्मी को लगता है कि शायद मैं यानी उनका बेटा अंकुश आ गया हूँ। और मेरी मम्मी अंदर से पुकारती हैं।
मम्मी: हाँ। आ जा अंदर। पहले ही काफी लेट हो।
अंकल भी बिना कुछ कहे गेट खोल कर अंदर चले जाते हैं। जहाँ मेरी मम्मी ब्रा और पेटीकोट में खड़ी हैं। मेरी मम्मी के उभरे हुए बूब्स देखकर अंकल के मुँह में पानी आ जाता है। मेरी मम्मी का संगमरमर सा गोरा बदन अंकल पर कहर ढाने लगता है।
अब मेरी मम्मी की गाँड अंकल की तरफ है। अंकल अपने लंड को मसले बिना रह नहीं पाते। और धीमे से बोलते हैं। जिसे मेरी मम्मी और मैं सुन लेते हैं।
अंकल: (धीमी आवाज में) वर्षा। तेरी गाँड देखकर कंट्रोल नहीं हो रहा है। मन कर रहा है तुझे अभी घोड़ी बनाकर यहीं बाथरूम में चोद दूँ।
मम्मी अंकल की आवाज सुनकर पलटती हैं। और अंकल को देखकर वापस पलट जाती हैं। अब मम्मी की पीठ अंकल की तरफ थी। और मम्मी बोलती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई। इस तरह तुम बाथरूम में आ गए। कहीं किसी ने देख लिया तो।
अंकल: सॉरी वर्षा। तुमने ही कहा था आने के लिए। मैं तो बस आपका ब्लाउज देने आया था।
मम्मी: लेकिन अंकुश कहाँ है।
अंकल: वर्षा। वो बाहर रुक गया। उसे कुछ काम था। तो उसने मुझे दिया है सही करवाने के लिए। और मैं सही करवाकर ले आया।
मम्मी: लाओ दो मुझे। मैं सब जानती हूँ। तुमने ही उससे ब्लाउज लिया होगा। और तुम उसे बाहर छोड़कर आ गए हो।
मेरी मम्मी पीछे मुड़े बिना ही अपना हाथ फैला कर अपना ब्लाउज माँगती हैं।
अंकल ब्लाउज ले कर मेरी मम्मी की ओर बढ़ते हैं। तभी किसी के कदमों की आहट सुनाई देती है। वाशरूम की ओर आने की।
अंकल झट से मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी को बाथरूम में गेट के पीछे छुपा लेते हैं। गेट अभी भी खुला भी नहीं था। और ना ही बंद था। सिर्फ थोड़ा सा लगा था। ताकि मैं देख सकूँ। अंकल ने मुझे दिखाने के लिए गेट बंद नहीं किया था। अंकल को पता था। मैं बाहर रहकर पहरेदारी करूँगा। लेकिन मम्मी को नहीं पता था। मैं बाहर हूँ पहरेदारी के लिए।
मम्मी गुस्से में आ जाती हैं। उन्हें बदनामी का डर था। कोई देख लेगा।
मम्मी: ये क्या बदतमीजी है। योगेश जी। आपकी मेरी इज्जत का कोई ख्याल नहीं है। कोई देख लेगा तो क्या होगा। देखो मुझे किसी के आने का अंदाजा हुआ है। कोई देख लेगा। अब क्या होगा।
अंकल: वर्षा सॉरी। बट प्लीज धीरे बोलिए। कुछ नहीं होगा। भरोसा रखो।
मम्मी: कोई आ रहा है। मुझे किसी के कदमों के आने की आवाज आई है। वाशरूम की ओर आने की आवाज आई थी मुझे। अगर कोई आपको और मुझे इस हालत में देखता। तो दोनों की बदनामी हो जाएगी।
ये सब मेरी मम्मी के मुँह से सुनते हुए। अंकल की नजर मेरी मम्मी के बूब्स पर ही टिकी हुई थी। ये बात मेरी मम्मी भी नोटिस कर लेती हैं। पर इस समय वो कुछ कहना नहीं चाहती थीं। शायद इसलिए।
मेरी मम्मी अपने हाथों से अपने बूब्स ढक लेती हैं ब्रा के ऊपर से ही। और अंकल को जाने के लिए कहती हैं। और अंकल से अपना ब्लाउज खींच लेती हैं।
अंकल मेरी मम्मी का ब्लाउज देना नहीं चाहते थे। पर कुछ कर भी नहीं सकते थे। मम्मी के गुस्से को देखकर। क्योंकि जब मम्मी को गुस्सा आता है। तो अंकल भी मम्मी के गुस्से से डर जाते हैं। ये तो सत्य है। चाहे कितना ही पावरफुल मर्द हो। औरत से तो डरता है। क्योंकि चूत चाहिए। तो औरत से डरना ही पड़ता है। चूत के लिए लंड को झुकना ही पड़ता है।
मेरी मम्मी को ऐसे देख अंकल की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। वो इस चांस को वेस्ट नहीं करना चाहते थे। तभी मेरी मम्मी थोड़ा गुस्से में अंकल को फिर से जाने को कहती हैं। और अंकल की तरफ अपनी पीठ कर लेती हैं।
मम्मी हिम्मत कर के अंकल से अपना ब्लाउज देने को कहती हैं। तो अंकल मेरी मम्मी के होठों पर अपनी उँगली रख कर मेरी मम्मी के हाथ में ब्लाउज देते हैं। और मम्मी के कान में फिर से फुसफुसा देते हैं।
अंकल: वर्षा मत बोलो। कहीं आपकी आवाज किसी ने सुनी। तो उसे शक न हो जाए। ये लीजिए आपका ब्लाउज।
मम्मी थोड़ा आगे खिसक जाती हैं। और अपना ब्लाउज ले कर उसे पहनने लगती हैं। पर उसका हुक अंकल ने पहले ही ज्यादा टाइट करा दिया था। इसलिए उसे बाँध नहीं पातीं। मम्मी कोशिश करती रहती हैं। पर ब्लाउज का हुक नहीं लगता। ये अंकल की चाल थी। तभी तो अंकल ने टेलर से टाइट करवाया था।
ये देख कर अंकल बिना कुछ कहे मेरी मम्मी के हाथ हुक से हटा कर ब्लाउज बाँधने की कोशिश करते हैं। और इसी बहाने मेरी मम्मी की मखमली कमर को भी छूने का मौका अंकल को मिल जाता है। हालाँकि अंकल मेरी मम्मी की कमर को रोज मसलते हैं। लेकिन आज बाथरूम में। वो भी किसी और के घर में। एक बार फिर अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड में धस जाता है।
मेरी मम्मी का शरीर एकदम गरम हो जाता है। जो अंकल भी फील कर लेते हैं।
अंकल: वर्षा। आपको फीवर है क्या।
मम्मी: नहीं। लेकिन क्यों।
अंकल: वर्षा। आपका बदन तो भट्ठी की तरह तप रहा है।
मम्मी: जल्दी से हुक लगा दो। और चुप रहो। (थोड़ा गुस्सा होने का नाटक करते हुए)
अंकल: बताओ वर्षा। आपका शरीर भट्ठी की तरह क्यों तप रहा है।
मम्मी: जब आपका लंड मेरी गाँड में धसेगा। तो यही होगा ना। और अब कुछ नहीं करने दूँगी। जो भी करना है रात को जमकर करना। पूरी रात चोदना मेरी चूत पर। अभी नहीं।
मेरी मम्मी शर्म से पानी पानी हो जाती हैं। अब अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड के कोने कोने को टटोलना शुरू कर देता है। जिससे मेरी मम्मी की चूत भी न चाहते हुए गीली होने लगती है।
मम्मी: जल्दी लगाओ योगेश जी।
अंकल: वर्षा। आपका ब्लाउज तो आ नहीं रहा आपके। शायद आपका साइज बढ़ गया है।
मेरी मम्मी ये बात सुन कर कुछ बोल भी नहीं पातीं। जिससे अंकल की हिम्मत और बढ़ जाती है। वो ब्लाउज के हुक लगाने के बहाने मेरी मम्मी को अपने शरीर पर खींच लेते हैं। तो मम्मी बोलीं।
मम्मी: अभी कुछ मत करो। रात को करना। प्लीज जल्दी से लगा दो।
अंकल: वर्षा। आपकी ब्रा को थोड़ा एडजस्ट कर दूँ। शायद उससे हुक लग जाए।
मम्मी: जो करना है जल्दी करो। और मुझे जाने दो।
अंकल से भी अब रहा नहीं जाता। वो ब्रा एडजस्ट करने के बहाने अपने हाथ आगे की ओर लाकर सीधा मेरी मम्मी की ब्रा में डाल कर मेरी मम्मी के बूब्स पर रख देते हैं।
मेरी मम्मी ने ये बिल्कुल एक्सपेक्ट नहीं किया था। वो अंकल का हाथ झटक देती हैं। और अंकल को पीछे को धक्का दे देती हैं।
मम्मी: मैंने कहा ना योगेश जी। अभी कुछ मत करो। रात को करना। क्या मैं आपसे चुदवाती नहीं हूँ। जो आप मेरे साथ बाथरूम में कर रहे हो। क्या आपको मेरी बदनामी का डर नहीं है।
अंकल कुछ बोलते उससे पहले ही।
आंटी बाथरूम के बाहर आईं। और मुझे देखकर। बेटा तेरी मम्मी कहाँ है।
मैं: बाथरूम में है।
आंटी: क्या तेरी मम्मी का ब्लाउज का हुक ठीक हो गया।
मैं: जी आंटी। मैं मार्केट से करवा लाया। अभी मम्मी बाथरूम में है।
आंटी: ठीक है बेटा। मैं चलती हूँ। और आंटी वापस चली गईं।
अब मम्मी को भी पता चल गया था। मैं बाथरूम के बाहर उनकी और अंकल की पहरेदारी कर रहा हूँ।
मम्मी: क्या आपने अंकुश को बाहर पहरेदारी पर लगा रखा है।
अंकल: हाँ वर्षा। मैं उसे बाहर पहरेदार पर लगाकर आया हूँ। और तुम हो कि मुझे करने ही नहीं दे रही हो। और डर रही हो। क्या मुझे तुम्हारी इज्जत की कोई परवाह नहीं है।
मेरी मम्मी धीमी आवाज में अंकल को डाँट लगा देती हैं।
मम्मी: तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की।
अंकल भी सोच में पड़ जाता है। कि साली अभी तो मजे ले रही थी। फिर अचानक क्यों भड़क गई।
अंकल: वर्षा। तुमने ही तो कहा था ब्रा एडजस्ट करने के लिए।
मेरी मम्मी: ब्रा एडजस्ट करने को कहा था। ऐसी गंदी हरकत के लिए नहीं।
अंकल: कैसी गंदी हरकत।
मम्मी: मेरे बेटे को हर पहरेदारी पर लगाने की।
अंकल: तुम्हारे बेटे ने खुद कहा। जाकर मेरी मम्मी को ब्लाउज पहना दो। मैं पहरेदारी करूँगा।
मम्मी: ओह। शर्म नहीं आती। झूठ बोलते हुए। मेरे बेटे को बदनाम कर रहे हो।
अंकल: सच वर्षा।
मम्मी: ठीक है। उसने ब्लाउज पहनने को बोला। मेरे बूब्स पकड़ने के लिए नहीं। फिर क्यों पकड़े मेरे बूब्स।
अंकल: सॉरी वर्षा। वो आपका ब्लाउज फिट नहीं हो रहा ऐसे। मुझसे नहीं हो पाएगा। मैं चला जाता हूँ।
मम्मी: कहाँ जा रहे हो अभी। बाहर आपने बोला। अंकुश ने बोला है ब्लाउज पहनाने को। तो कुछ भी कर के मेरा ब्लाउज बंद कर दो। और मेरे बाहर जाने के बाद ही निकलना यहाँ से।
अंकल: वर्षा। ब्लाउज आपका बहुत टाइट है। मुझसे ऐसे बंद नहीं हो पाएगा।
मम्मी: प्लीज कुछ करो। मैं ऐसे कैसे घर जाऊँगी। और अंकुश ने भी आपको बोला है मुझे ब्लाउज पहनाने को। तो अब पहनाओ।
अंकल: वर्षा। एक तरीका है। पर आप करने नहीं दोगी।
मम्मी: बोलो क्या है।
अंकल: तुम यही कहोगी। अभी मत करो। रात को करना।
मम्मी: बोलो। मैं मना नहीं करूँगी। बस मुझे ब्लाउज पहना दो।
अंकल: वर्षा। तुम अपनी ब्रा उतार दो। फिर शायद ब्लाउज फिट हो जाए।
मम्मी: ऐसे कैसे उतार सकती हूँ तुम्हारे सामने।
अंकल: क्यों। पहले नहीं उतारी।
मम्मी: तुम्हारे सामने ब्रा तो क्या। मैं पूरी नंगी होती हूँ। पर अभी ब्रा उतार दूँगी। तो तुम मेरे बूब्स को निचोड़ने लग जाओगे। और मुझे गरम कर दोगे। फिर मेरी चूत तुम्हारे लंड के बिना शांत नहीं होगी। जो मैं नहीं चाहती अभी। क्योंकि यहाँ कोई भी शक कर सकता है।
अंकल: ठीक है। तुम मेरे सामने ब्रा मत उतारो। मैं तुम्हारे नंगे बूब्स देख लूँगा। तो तुम्हारे बूब्स को निचोड़े बिना मुझे चैन नहीं मिलेगा। इसलिए तुम मुझे अपने बूब्स दिखाए बिना अपनी ब्रा उतार दो।
मम्मी: मैं अपनी ब्रा उतारूँगी। तो तुम कैसे नहीं देखोगे। तुम्हें तो वो दिखेंगे ही। और फिर आप मेरे बूब्स निचोड़कर यहीं मेरी चुदाई भी कर दोगे।
अंकल: वर्षा। मुझे दिखाने को कौन कह रहा है। मेरी तरफ कमर कर के उतार दो। और ब्लाउज पहन लो।
मेरी मम्मी को कुछ समझ नहीं आता। वो वापस मुड़ कर खड़ी हो जाती हैं। पर शर्म के कारण ब्रा नहीं उतारतीं।
अंकल मौका भाप जाता है। और बिना कुछ कहे मेरी मम्मी की ब्रा की स्ट्रैप खोल देते हैं।
हालाँकि अंकल मेरी मम्मी के बूब्स नहीं देख पाते। लेकिन मेरी मम्मी के नंगे बूब्स का अहसास ही अंकल को पागल कर देता है। वैसे भी अभी कुछ समय पहले अंकल ने मेरी मम्मी के बूब्स को अपने हाथों में भर लिया था। जिसका अहसास अभी तक उनके मस्तिष्क में तरोताजा था।
मेरी मम्मी कुछ नहीं कह पातीं। अंकल मेरी मम्मी की ब्रा अपने पास ही रख लेते हैं। और ब्लाउज मम्मी को पहनने के लिए देते हैं।
अंकल मेरी मम्मी के करीब आकर।
अंकल: वर्षा। कितनी सुंदर हो आप। मैं कितना खुशनसीब हूँ। जो मुझे तुम जैसी जवान 33 साल की लड़की मिली हो। तुम्हें देखकर कोई नहीं कहेगा। तुम्हारा 33 की उम्र में एक 19 साल का बेटा है। और अंकल अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर पर ही रखे रखते हैं। मम्मी भी शर्म से अपनी नजरें नीची रखकर धीमी आवाज में।
मम्मी: मैं भी कितनी खुशनसीब हूँ। जो मुझे चुदवाने के लिए आप जैसा एक दमदार मर्द मिला। वो भी मुझे मेरे बेटे ने ही दिलवाया। अपनी मम्मी को चुदवाने के लिए। उसे मेरी तड़प प्यास नहीं देखी जाती। और मम्मी को चुदवाने के लिए पहरेदारी कर रहा है।
अंकल: हाँ वर्षा। हम दोनों ही खुशनसीब हैं। जो हमारे साथ अंकुश है।
मेरी मम्मी इस सिचुएशन से जल्दी बाहर निकलना चाहती थीं। इसलिए बोलीं।
मम्मी: अब जल्दी करें। बाहर बेचारा अंकुश खड़ा है। और वो जल्दी जल्दी अपना ब्लाउज पहनने लगती हैं। और हुक लगाने की कोशिश करती हैं। इस बार थोड़ी मेहनत कर के भी हुक नहीं लगता। तो अंकल से बोलती हैं। आप लगाओ। मुझसे नहीं लग रहा है।
तो अंकल मम्मी के ब्लाउज का हुक लगा देते हैं। और हुक लग जाता है।
फिर मम्मी अपनी ब्रा माँगती हैं अंकल से। लाओ मेरी ब्रा दो।
अंकल: क्या इसे अंकुश के सामने लेकर जाओगी। तो तुम्हें शर्म नहीं आएगी।
मम्मी: तो फिर मेरी ब्रा का क्या होगा।
अंकल: मेरा लंड खड़ा है। उसे शांत करना भी जरूरी है।
मम्मी: तो आप मेरी ब्रा में अपना वीर्य भरोगे।
अंकल: मैं तेरी ब्रा में मुठ मारूँगा।
मम्मी: मार लो। और मुझे दे देना। घर आकर। मैं जा रही हूँ।
अंकल: अंकुश को दे दूँगा। वो दे देगा।
मम्मी: नहीं। उसे नहीं। मुझे शर्म आएगी। उसके हाथों से लेना।
अंकल: मैं अंकुश को बोल दूँगा। वो तेरे बाथरूम में डाल देगा।
मम्मी: जैसी आपकी मर्जी। और बाहर आने लगती हैं। फिर रुक जाती हैं।
अंकल: जाओ। रुक क्यों गई।
मम्मी: मुझसे शर्म आ रही है। आप अंकुश से कहिए। वो बाहर से चला जाए। मैं उसके सामने नहीं जाना चाहती हूँ।
फिर अंकल ने मुझे बाथरूम से ही कॉल किया। बेटा चला जा। तेरी माँ को शर्म आ रही है। फिर मैं वहाँ से चला आया प्रोग्राम में। और फिर थोड़ी देर बाद प्रोग्राम में मम्मी भी आ गईं। और मुझे देखकर शर्माने लगीं।
मैं मम्मी के पास आ गया।
मैं: मम्मी आप आ गईं। वो आपका ब्लाउज मैंने आंटी को दे दिया था। मैंने मम्मी से झूठ बोला।
मम्मी: हाँ। और उसी आंटी ने पहना भी दिया। और हँसने लगीं।
मैं: मम्मी। मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था।
मम्मी: बेटा तू झूठ बोल रहा है। तूने योगेश जी को दिया था। लेकिन योगेश जी मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। लेकिन मैंने उन्हें बाथरूम से निकाल दिया। और खुद ब्लाउज पहना। नहीं तो आज वो मुझे नंगी करके पता नहीं क्या करते।
मैं: सॉरी मम्मी। गलती हो गई।
मम्मी: कोई बात नहीं बेटा। चल घर चलते हैं। और हम घर आ गए।
फिर शाम को अंकल ने मुझे बुलाकर मम्मी की ब्रा दी। जिसमें मुठ भरा था। मैंने लाकर मम्मी की बाथरूम में डाल दी। और मम्मी ने मुझे देख लिया। पर कुछ बोली नहीं।
पूरे दिन पापा घर पे रहे। और अंकल को घर वापस जाना पड़ा अपने खड़े लंड के साथ।
फिर शाम को पड़ोसी आंटी हमारे घर आईं। और उन्होंने बताया। कल उनके घर प्रोग्राम है। तो सभी का निमंत्रण है। कल सभी को हमारे घर आना है।
तो पापा ने कहा। जरूर आएंगे। और मम्मी ने भी। फिर आंटी हमारे घर से चली गईं। और अंकल के घर जाकर अंकल को भी इनविटेशन दिया।
रात को मम्मी ने खाना बनाया। और मुझसे नींद की एक टैबलेट माँगी। तो मैंने कहा। मम्मी अंकल को बुला लूँगा। वो आपको कंप्यूटर सिखा देंगे।
मम्मी: मुस्कुराते हुए। नहीं। आज मैं सोऊँगी। थोड़ी थकान है।
मैं: ओके मम्मी। फिर ये नींद की गोली क्यों।
मम्मी: तेरे पापा के लिए।
मैं: क्यों मम्मी।
मम्मी: वो जल्दी सो जाएँगे। तो मुझे भी नींद आ जाएगी।
मैं: ओके मम्मी। फिर पापा खाना खाकर सो गए। और मम्मी भी उनके साथ रूम में गईं। और मैं अपने रूम में आकर सो गया।
फिर रात को 12 बजे मेरी नींद खुली। पापा मम्मी की विंडो पे गया। तो देखा। पापा सो रहे हैं। लेकिन मम्मी वहाँ नहीं हैं। फिर मैंने देखा। रूम की कुंडी खुली है। फिर मैं समझ गया। शायद मम्मी अंकल के घर गई होंगी।
मैं सीढ़ियों में गया। तो सीढ़ियों की कुंडी लगी हुई थी। इसका मतलब मम्मी बाहर से कुंडी लगाकर गई थीं।
फिर मैंने अंकल को कॉल किया।
अंकल: हेलो बेटा। हाँफते हुए।
मैं: अंकल मम्मी आपके साथ हैं।
अंकल: हाँ बेटे। और कॉल कट कर दिया।
फिर मैं सो गया। और सुबह 8 बजे उठा। तो देखा। मम्मी पापा के साथ रूम में सो रही थीं।
मम्मी कब आईं। मुझे नहीं पता। फिर मैंने अंकल को कॉल किया। तो बोले। सुबह 6 बजे तक मस्ती के साथ चोदा उसको। मजा आ गया।
मैं: क्या आज दिन में पड़ोसी के घर आओगे।
अंकल: हाँ बेटे।
फिर 11 बजे मम्मी ने पापा से कहा। वो हे पड़ोसी में चलना है प्रोग्राम में। तो पापा बोले। तू अंकुश के साथ चली जा। मुझे आज जरूरी वर्क है। फिर मैं मम्मी पड़ोसी आंटी के घर गए।
आज मम्मी ने एक बहुत ही सुंदर सी साड़ी पहनी थी। हालाँकि साड़ी बहुत ज्यादा रिवीलिंग नहीं थी। पर फिर भी मम्मी साड़ी में एकदम सेक्स डॉल लग रही थीं। मम्मी के उभरे हुए बूब्स, भारी हुई गाँड देखकर अंकल का बुरा हाल हुए जा रहा था। क्योंकि अंकल भी आए हुए थे प्रोग्राम में। बहुत सारी लेडीज आई हुई थीं। वहाँ कई जेंट्स भी थे। लेकिन अंकल तो सिर्फ मम्मी को ही घूरे जा रहे थे। मम्मी भी अंकल को स्माइल कर रही थीं।
मम्मी को पता नहीं चलता कि उनके ब्लाउज का हुक पीछे से टूट गया है। दरअसल पिछले 6 महीनों में। जब से मम्मी की अंकल ने चुदाई करना शुरू किया है। तब से मम्मी के बूब्स का साइज पहले से भी ज्यादा बढ़ चुका है। मम्मी ये तो जानती थीं कि ब्लाउज टाइट हो गया है। पर हुक टूट जाएगा। मेरी मम्मी को अंदाजा नहीं था।
प्रोग्राम में आई एक आंटी। जिन्हें मैं नहीं जानता। वो ये नोटिस कर लेती हैं। और मेरी मम्मी के पास जाकर मेरी मम्मी को ये बताती हैं। हालाँकि मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर साड़ी का पल्लू आने के कारण। प्रोग्राम में किसी ने अभी तक नोटिस नहीं किया था।
मेरी मम्मी थोड़ा घबरा जाती हैं। कि कहीं प्रोग्राम में आए जेंट्स लोगों ने देखा न हो। मेरी मम्मी के चेहरे पर पसीना आ जाता है।
फिर मम्मी मुझे आवाज देती हैं। और मुझे बाथरूम में लेकर आती हैं। और मुझसे कहती हैं। बेटा मेरे ब्लाउज का हुक टूटा है।
मैं: मम्मी अब क्या होगा।
मम्मी: बेटा मेरे ब्लाउज के हुक को एडजस्ट कर। किसी तरह।
मैं: कोशिश करता हूँ। लेकिन मम्मी के ब्लाउज का हुक टूट जाने से मम्मी का ब्लाउज बंद नहीं हो पाता।
मम्मी: बेटा अब क्या करूँ।
मैं: मम्मी मैं घर से दूसरा ब्लाउज ले आता हूँ।
मम्मी: नहीं बेटा। साड़ी का मैचिंग ब्लाउज तो यही है। दूसरे ब्लाउज पर साड़ी मैच नहीं करेगी।
मैं: तो क्या करूँ।
मम्मी: बेटा तू इस ब्लाउज को टेलर के पास ले जा। और सही करा ला।
मैं: मम्मी आप बिना ब्लाउज के कैसे रहोगी।
मम्मी: बेटा मैं टॉयलेट के अंदर रहूँगी। तू जल्दी ले आ। सही करा कर।
मैं: मम्मी ठीक है। आप दो।
फिर मम्मी ने अपना ब्लाउज उतारा। और मुझे दे दिया।
फिर मैं ब्लाउज को अपने पैंट की जेब में रखा। और बाहर आया। और अंकल के पास गया। और अंकल के कान में बता दिया। और अंकल मुस्कुराने लगे। और मेरे साथ चल दिए। जहाँ से हम टेलर के पास गए। और ब्लाउज का हुक ठीक करवाया। लेकिन अंकल ने टेलर से कहा। इस ब्लाउज का हुक थोड़ा टाइट करना।
टेलर: क्यों साहब। इससे तो ब्लाउज पहनने में परेशानी होगी।
अंकल: ये मेरी वाइफ का ब्लाउज है। मैं खुद उसे अपने हाथों से पहनाऊँगा।
टेलर: हँसते हुए। ओके साहब।
फिर टेलर ने मेरी मम्मी का ब्लाउज का हुक कुछ ज्यादा ही टाइट कर दिया।
फिर अंकल ने टेलर को पैसे दिए। और हम वापस आए। और गाड़ी से उतरे। तो अंकल ने कहा। ब्लाउज मुझे दे। और अपनी पैंट की जेब में अंकल ने मम्मी का ब्लाउज रख लिया। और मैं समझ गया। अंकल खुद अपने हाथों से मेरी मम्मी को ब्लाउज पहनाएँगे। तो मैं अंकल से बोला।
मैं: अंकल क्या आप मम्मी को ब्लाउज पहनाओगे।
अंकल: बेटा तू बाथरूम के बाहर खड़े रहकर ध्यान रखना। मैं तेरी मम्मी के साथ क्या करूँगा। तू खुद देख लेना। फिर हम दोनों बाथरूम के बाहर गए। जहाँ कोई नहीं था। प्रोग्राम में सभी लोग बिजी थे। मैं बाथरूम के बाहर रुक गया। और अंकल मेरी मम्मी का ब्लाउज लेकर अंदर बाथरूम में जाने लगे। जहाँ मेरी मम्मी बिना ब्लाउज के ब्रा में खड़ी थीं। लेकिन मम्मी ने अंदर से बाथरूम का गेट लगा रखा था।
अंकल ने अपनी पैंट की जेब से मेरी मम्मी का ब्लाउज निकाला। और बाथरूम के दरवाजे पे नॉक करते हैं।
मेरी मम्मी को लगता है कि शायद मैं यानी उनका बेटा अंकुश आ गया हूँ। और मेरी मम्मी अंदर से पुकारती हैं।
मम्मी: हाँ। आ जा अंदर। पहले ही काफी लेट हो।
अंकल भी बिना कुछ कहे गेट खोल कर अंदर चले जाते हैं। जहाँ मेरी मम्मी ब्रा और पेटीकोट में खड़ी हैं। मेरी मम्मी के उभरे हुए बूब्स देखकर अंकल के मुँह में पानी आ जाता है। मेरी मम्मी का संगमरमर सा गोरा बदन अंकल पर कहर ढाने लगता है।
अब मेरी मम्मी की गाँड अंकल की तरफ है। अंकल अपने लंड को मसले बिना रह नहीं पाते। और धीमे से बोलते हैं। जिसे मेरी मम्मी और मैं सुन लेते हैं।
अंकल: (धीमी आवाज में) वर्षा। तेरी गाँड देखकर कंट्रोल नहीं हो रहा है। मन कर रहा है तुझे अभी घोड़ी बनाकर यहीं बाथरूम में चोद दूँ।
मम्मी अंकल की आवाज सुनकर पलटती हैं। और अंकल को देखकर वापस पलट जाती हैं। अब मम्मी की पीठ अंकल की तरफ थी। और मम्मी बोलती हैं।
मम्मी: योगेश जी। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई। इस तरह तुम बाथरूम में आ गए। कहीं किसी ने देख लिया तो।
अंकल: सॉरी वर्षा। तुमने ही कहा था आने के लिए। मैं तो बस आपका ब्लाउज देने आया था।
मम्मी: लेकिन अंकुश कहाँ है।
अंकल: वर्षा। वो बाहर रुक गया। उसे कुछ काम था। तो उसने मुझे दिया है सही करवाने के लिए। और मैं सही करवाकर ले आया।
मम्मी: लाओ दो मुझे। मैं सब जानती हूँ। तुमने ही उससे ब्लाउज लिया होगा। और तुम उसे बाहर छोड़कर आ गए हो।
मेरी मम्मी पीछे मुड़े बिना ही अपना हाथ फैला कर अपना ब्लाउज माँगती हैं।
अंकल ब्लाउज ले कर मेरी मम्मी की ओर बढ़ते हैं। तभी किसी के कदमों की आहट सुनाई देती है। वाशरूम की ओर आने की।
अंकल झट से मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी को बाथरूम में गेट के पीछे छुपा लेते हैं। गेट अभी भी खुला भी नहीं था। और ना ही बंद था। सिर्फ थोड़ा सा लगा था। ताकि मैं देख सकूँ। अंकल ने मुझे दिखाने के लिए गेट बंद नहीं किया था। अंकल को पता था। मैं बाहर रहकर पहरेदारी करूँगा। लेकिन मम्मी को नहीं पता था। मैं बाहर हूँ पहरेदारी के लिए।
मम्मी गुस्से में आ जाती हैं। उन्हें बदनामी का डर था। कोई देख लेगा।
मम्मी: ये क्या बदतमीजी है। योगेश जी। आपकी मेरी इज्जत का कोई ख्याल नहीं है। कोई देख लेगा तो क्या होगा। देखो मुझे किसी के आने का अंदाजा हुआ है। कोई देख लेगा। अब क्या होगा।
अंकल: वर्षा सॉरी। बट प्लीज धीरे बोलिए। कुछ नहीं होगा। भरोसा रखो।
मम्मी: कोई आ रहा है। मुझे किसी के कदमों के आने की आवाज आई है। वाशरूम की ओर आने की आवाज आई थी मुझे। अगर कोई आपको और मुझे इस हालत में देखता। तो दोनों की बदनामी हो जाएगी।
ये सब मेरी मम्मी के मुँह से सुनते हुए। अंकल की नजर मेरी मम्मी के बूब्स पर ही टिकी हुई थी। ये बात मेरी मम्मी भी नोटिस कर लेती हैं। पर इस समय वो कुछ कहना नहीं चाहती थीं। शायद इसलिए।
मेरी मम्मी अपने हाथों से अपने बूब्स ढक लेती हैं ब्रा के ऊपर से ही। और अंकल को जाने के लिए कहती हैं। और अंकल से अपना ब्लाउज खींच लेती हैं।
अंकल मेरी मम्मी का ब्लाउज देना नहीं चाहते थे। पर कुछ कर भी नहीं सकते थे। मम्मी के गुस्से को देखकर। क्योंकि जब मम्मी को गुस्सा आता है। तो अंकल भी मम्मी के गुस्से से डर जाते हैं। ये तो सत्य है। चाहे कितना ही पावरफुल मर्द हो। औरत से तो डरता है। क्योंकि चूत चाहिए। तो औरत से डरना ही पड़ता है। चूत के लिए लंड को झुकना ही पड़ता है।
मेरी मम्मी को ऐसे देख अंकल की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। वो इस चांस को वेस्ट नहीं करना चाहते थे। तभी मेरी मम्मी थोड़ा गुस्से में अंकल को फिर से जाने को कहती हैं। और अंकल की तरफ अपनी पीठ कर लेती हैं।
मम्मी हिम्मत कर के अंकल से अपना ब्लाउज देने को कहती हैं। तो अंकल मेरी मम्मी के होठों पर अपनी उँगली रख कर मेरी मम्मी के हाथ में ब्लाउज देते हैं। और मम्मी के कान में फिर से फुसफुसा देते हैं।
अंकल: वर्षा मत बोलो। कहीं आपकी आवाज किसी ने सुनी। तो उसे शक न हो जाए। ये लीजिए आपका ब्लाउज।
मम्मी थोड़ा आगे खिसक जाती हैं। और अपना ब्लाउज ले कर उसे पहनने लगती हैं। पर उसका हुक अंकल ने पहले ही ज्यादा टाइट करा दिया था। इसलिए उसे बाँध नहीं पातीं। मम्मी कोशिश करती रहती हैं। पर ब्लाउज का हुक नहीं लगता। ये अंकल की चाल थी। तभी तो अंकल ने टेलर से टाइट करवाया था।
ये देख कर अंकल बिना कुछ कहे मेरी मम्मी के हाथ हुक से हटा कर ब्लाउज बाँधने की कोशिश करते हैं। और इसी बहाने मेरी मम्मी की मखमली कमर को भी छूने का मौका अंकल को मिल जाता है। हालाँकि अंकल मेरी मम्मी की कमर को रोज मसलते हैं। लेकिन आज बाथरूम में। वो भी किसी और के घर में। एक बार फिर अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड में धस जाता है।
मेरी मम्मी का शरीर एकदम गरम हो जाता है। जो अंकल भी फील कर लेते हैं।
अंकल: वर्षा। आपको फीवर है क्या।
मम्मी: नहीं। लेकिन क्यों।
अंकल: वर्षा। आपका बदन तो भट्ठी की तरह तप रहा है।
मम्मी: जल्दी से हुक लगा दो। और चुप रहो। (थोड़ा गुस्सा होने का नाटक करते हुए)
अंकल: बताओ वर्षा। आपका शरीर भट्ठी की तरह क्यों तप रहा है।
मम्मी: जब आपका लंड मेरी गाँड में धसेगा। तो यही होगा ना। और अब कुछ नहीं करने दूँगी। जो भी करना है रात को जमकर करना। पूरी रात चोदना मेरी चूत पर। अभी नहीं।
मेरी मम्मी शर्म से पानी पानी हो जाती हैं। अब अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड के कोने कोने को टटोलना शुरू कर देता है। जिससे मेरी मम्मी की चूत भी न चाहते हुए गीली होने लगती है।
मम्मी: जल्दी लगाओ योगेश जी।
अंकल: वर्षा। आपका ब्लाउज तो आ नहीं रहा आपके। शायद आपका साइज बढ़ गया है।
मेरी मम्मी ये बात सुन कर कुछ बोल भी नहीं पातीं। जिससे अंकल की हिम्मत और बढ़ जाती है। वो ब्लाउज के हुक लगाने के बहाने मेरी मम्मी को अपने शरीर पर खींच लेते हैं। तो मम्मी बोलीं।
मम्मी: अभी कुछ मत करो। रात को करना। प्लीज जल्दी से लगा दो।
अंकल: वर्षा। आपकी ब्रा को थोड़ा एडजस्ट कर दूँ। शायद उससे हुक लग जाए।
मम्मी: जो करना है जल्दी करो। और मुझे जाने दो।
अंकल से भी अब रहा नहीं जाता। वो ब्रा एडजस्ट करने के बहाने अपने हाथ आगे की ओर लाकर सीधा मेरी मम्मी की ब्रा में डाल कर मेरी मम्मी के बूब्स पर रख देते हैं।
मेरी मम्मी ने ये बिल्कुल एक्सपेक्ट नहीं किया था। वो अंकल का हाथ झटक देती हैं। और अंकल को पीछे को धक्का दे देती हैं।
मम्मी: मैंने कहा ना योगेश जी। अभी कुछ मत करो। रात को करना। क्या मैं आपसे चुदवाती नहीं हूँ। जो आप मेरे साथ बाथरूम में कर रहे हो। क्या आपको मेरी बदनामी का डर नहीं है।
अंकल कुछ बोलते उससे पहले ही।
आंटी बाथरूम के बाहर आईं। और मुझे देखकर। बेटा तेरी मम्मी कहाँ है।
मैं: बाथरूम में है।
आंटी: क्या तेरी मम्मी का ब्लाउज का हुक ठीक हो गया।
मैं: जी आंटी। मैं मार्केट से करवा लाया। अभी मम्मी बाथरूम में है।
आंटी: ठीक है बेटा। मैं चलती हूँ। और आंटी वापस चली गईं।
अब मम्मी को भी पता चल गया था। मैं बाथरूम के बाहर उनकी और अंकल की पहरेदारी कर रहा हूँ।
मम्मी: क्या आपने अंकुश को बाहर पहरेदारी पर लगा रखा है।
अंकल: हाँ वर्षा। मैं उसे बाहर पहरेदार पर लगाकर आया हूँ। और तुम हो कि मुझे करने ही नहीं दे रही हो। और डर रही हो। क्या मुझे तुम्हारी इज्जत की कोई परवाह नहीं है।
मेरी मम्मी धीमी आवाज में अंकल को डाँट लगा देती हैं।
मम्मी: तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की।
अंकल भी सोच में पड़ जाता है। कि साली अभी तो मजे ले रही थी। फिर अचानक क्यों भड़क गई।
अंकल: वर्षा। तुमने ही तो कहा था ब्रा एडजस्ट करने के लिए।
मेरी मम्मी: ब्रा एडजस्ट करने को कहा था। ऐसी गंदी हरकत के लिए नहीं।
अंकल: कैसी गंदी हरकत।
मम्मी: मेरे बेटे को हर पहरेदारी पर लगाने की।
अंकल: तुम्हारे बेटे ने खुद कहा। जाकर मेरी मम्मी को ब्लाउज पहना दो। मैं पहरेदारी करूँगा।
मम्मी: ओह। शर्म नहीं आती। झूठ बोलते हुए। मेरे बेटे को बदनाम कर रहे हो।
अंकल: सच वर्षा।
मम्मी: ठीक है। उसने ब्लाउज पहनने को बोला। मेरे बूब्स पकड़ने के लिए नहीं। फिर क्यों पकड़े मेरे बूब्स।
अंकल: सॉरी वर्षा। वो आपका ब्लाउज फिट नहीं हो रहा ऐसे। मुझसे नहीं हो पाएगा। मैं चला जाता हूँ।
मम्मी: कहाँ जा रहे हो अभी। बाहर आपने बोला। अंकुश ने बोला है ब्लाउज पहनाने को। तो कुछ भी कर के मेरा ब्लाउज बंद कर दो। और मेरे बाहर जाने के बाद ही निकलना यहाँ से।
अंकल: वर्षा। ब्लाउज आपका बहुत टाइट है। मुझसे ऐसे बंद नहीं हो पाएगा।
मम्मी: प्लीज कुछ करो। मैं ऐसे कैसे घर जाऊँगी। और अंकुश ने भी आपको बोला है मुझे ब्लाउज पहनाने को। तो अब पहनाओ।
अंकल: वर्षा। एक तरीका है। पर आप करने नहीं दोगी।
मम्मी: बोलो क्या है।
अंकल: तुम यही कहोगी। अभी मत करो। रात को करना।
मम्मी: बोलो। मैं मना नहीं करूँगी। बस मुझे ब्लाउज पहना दो।
अंकल: वर्षा। तुम अपनी ब्रा उतार दो। फिर शायद ब्लाउज फिट हो जाए।
मम्मी: ऐसे कैसे उतार सकती हूँ तुम्हारे सामने।
अंकल: क्यों। पहले नहीं उतारी।
मम्मी: तुम्हारे सामने ब्रा तो क्या। मैं पूरी नंगी होती हूँ। पर अभी ब्रा उतार दूँगी। तो तुम मेरे बूब्स को निचोड़ने लग जाओगे। और मुझे गरम कर दोगे। फिर मेरी चूत तुम्हारे लंड के बिना शांत नहीं होगी। जो मैं नहीं चाहती अभी। क्योंकि यहाँ कोई भी शक कर सकता है।
अंकल: ठीक है। तुम मेरे सामने ब्रा मत उतारो। मैं तुम्हारे नंगे बूब्स देख लूँगा। तो तुम्हारे बूब्स को निचोड़े बिना मुझे चैन नहीं मिलेगा। इसलिए तुम मुझे अपने बूब्स दिखाए बिना अपनी ब्रा उतार दो।
मम्मी: मैं अपनी ब्रा उतारूँगी। तो तुम कैसे नहीं देखोगे। तुम्हें तो वो दिखेंगे ही। और फिर आप मेरे बूब्स निचोड़कर यहीं मेरी चुदाई भी कर दोगे।
अंकल: वर्षा। मुझे दिखाने को कौन कह रहा है। मेरी तरफ कमर कर के उतार दो। और ब्लाउज पहन लो।
मेरी मम्मी को कुछ समझ नहीं आता। वो वापस मुड़ कर खड़ी हो जाती हैं। पर शर्म के कारण ब्रा नहीं उतारतीं।
अंकल मौका भाप जाता है। और बिना कुछ कहे मेरी मम्मी की ब्रा की स्ट्रैप खोल देते हैं।
हालाँकि अंकल मेरी मम्मी के बूब्स नहीं देख पाते। लेकिन मेरी मम्मी के नंगे बूब्स का अहसास ही अंकल को पागल कर देता है। वैसे भी अभी कुछ समय पहले अंकल ने मेरी मम्मी के बूब्स को अपने हाथों में भर लिया था। जिसका अहसास अभी तक उनके मस्तिष्क में तरोताजा था।
मेरी मम्मी कुछ नहीं कह पातीं। अंकल मेरी मम्मी की ब्रा अपने पास ही रख लेते हैं। और ब्लाउज मम्मी को पहनने के लिए देते हैं।
अंकल मेरी मम्मी के करीब आकर।
अंकल: वर्षा। कितनी सुंदर हो आप। मैं कितना खुशनसीब हूँ। जो मुझे तुम जैसी जवान 33 साल की लड़की मिली हो। तुम्हें देखकर कोई नहीं कहेगा। तुम्हारा 33 की उम्र में एक 19 साल का बेटा है। और अंकल अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर पर ही रखे रखते हैं। मम्मी भी शर्म से अपनी नजरें नीची रखकर धीमी आवाज में।
मम्मी: मैं भी कितनी खुशनसीब हूँ। जो मुझे चुदवाने के लिए आप जैसा एक दमदार मर्द मिला। वो भी मुझे मेरे बेटे ने ही दिलवाया। अपनी मम्मी को चुदवाने के लिए। उसे मेरी तड़प प्यास नहीं देखी जाती। और मम्मी को चुदवाने के लिए पहरेदारी कर रहा है।
अंकल: हाँ वर्षा। हम दोनों ही खुशनसीब हैं। जो हमारे साथ अंकुश है।
मेरी मम्मी इस सिचुएशन से जल्दी बाहर निकलना चाहती थीं। इसलिए बोलीं।
मम्मी: अब जल्दी करें। बाहर बेचारा अंकुश खड़ा है। और वो जल्दी जल्दी अपना ब्लाउज पहनने लगती हैं। और हुक लगाने की कोशिश करती हैं। इस बार थोड़ी मेहनत कर के भी हुक नहीं लगता। तो अंकल से बोलती हैं। आप लगाओ। मुझसे नहीं लग रहा है।
तो अंकल मम्मी के ब्लाउज का हुक लगा देते हैं। और हुक लग जाता है।
फिर मम्मी अपनी ब्रा माँगती हैं अंकल से। लाओ मेरी ब्रा दो।
अंकल: क्या इसे अंकुश के सामने लेकर जाओगी। तो तुम्हें शर्म नहीं आएगी।
मम्मी: तो फिर मेरी ब्रा का क्या होगा।
अंकल: मेरा लंड खड़ा है। उसे शांत करना भी जरूरी है।
मम्मी: तो आप मेरी ब्रा में अपना वीर्य भरोगे।
अंकल: मैं तेरी ब्रा में मुठ मारूँगा।
मम्मी: मार लो। और मुझे दे देना। घर आकर। मैं जा रही हूँ।
अंकल: अंकुश को दे दूँगा। वो दे देगा।
मम्मी: नहीं। उसे नहीं। मुझे शर्म आएगी। उसके हाथों से लेना।
अंकल: मैं अंकुश को बोल दूँगा। वो तेरे बाथरूम में डाल देगा।
मम्मी: जैसी आपकी मर्जी। और बाहर आने लगती हैं। फिर रुक जाती हैं।
अंकल: जाओ। रुक क्यों गई।
मम्मी: मुझसे शर्म आ रही है। आप अंकुश से कहिए। वो बाहर से चला जाए। मैं उसके सामने नहीं जाना चाहती हूँ।
फिर अंकल ने मुझे बाथरूम से ही कॉल किया। बेटा चला जा। तेरी माँ को शर्म आ रही है। फिर मैं वहाँ से चला आया प्रोग्राम में। और फिर थोड़ी देर बाद प्रोग्राम में मम्मी भी आ गईं। और मुझे देखकर शर्माने लगीं।
मैं मम्मी के पास आ गया।
मैं: मम्मी आप आ गईं। वो आपका ब्लाउज मैंने आंटी को दे दिया था। मैंने मम्मी से झूठ बोला।
मम्मी: हाँ। और उसी आंटी ने पहना भी दिया। और हँसने लगीं।
मैं: मम्मी। मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था।
मम्मी: बेटा तू झूठ बोल रहा है। तूने योगेश जी को दिया था। लेकिन योगेश जी मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। लेकिन मैंने उन्हें बाथरूम से निकाल दिया। और खुद ब्लाउज पहना। नहीं तो आज वो मुझे नंगी करके पता नहीं क्या करते।
मैं: सॉरी मम्मी। गलती हो गई।
मम्मी: कोई बात नहीं बेटा। चल घर चलते हैं। और हम घर आ गए।
फिर शाम को अंकल ने मुझे बुलाकर मम्मी की ब्रा दी। जिसमें मुठ भरा था। मैंने लाकर मम्मी की बाथरूम में डाल दी। और मम्मी ने मुझे देख लिया। पर कुछ बोली नहीं।



![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)