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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#60
update 54

अब मेरी मम्मी को डर भी लग रहा था। पर एक अलग ही तरह की एक्साइटमेंट भी हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई मासूक अपने आशिक से घर से चोरी रात की तनहाई में मिलने आती है। और वो दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे की बाँहों में खो जाते हैं।

हालाँकि 6 महीने पहले तक मेरी मम्मी को कभी कोई इस तरह का मौका नहीं मिला था। क्योंकि मेरी मम्मी बहुत संस्कारी पतिव्रता औरत थीं। लेकिन अब अंकल की रखैल हैं। और मेरी मम्मी ने पापा के अलावा किसी और मर्द की तरफ देखा भी नहीं था। छूना तो बहुत दूर की बात है। लेकिन पापा के बाद अब सिर्फ अंकल की तरफ ही देखती हैं। और अंकल के लंड पे उछलती हैं।

अंकल मेरी मम्मी की नंगी चुचियों को देखते ही अपने होश खो बैठे। और अपना चेहरा मेरी मम्मी की चुचियों के पास ले आए। और मेरी मम्मी के निप्पल को चूम लिया।

जैसे ही अंकल की गरम साँसों ने मेरी मम्मी के निप्पल को छुआ। मेरी मम्मी को ऐसा लगा जैसे मेरी मम्मी के अंदर किसी ने बिजली के तार को छेड़ दिया हो। जैसे किसी ने जलती हुई आग में घी डाल दिया हो। मेरी मम्मी के अंदर की आग और भी तेजी से धड़कने लगी। क्योंकि मुझे मम्मी के आह की आवाजों से पता चल रहा था।

मम्मी: आह... योगेश जी प्लीज। मुझसे सब्र नहीं हो रहा।

लेकिन अंकल थे। उस समय मेरी मम्मी की बात को बिना सुने। उन्होंने मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को अपने हाथों में पकड़ा। और मेरी मम्मी की चुची को मुँह में भर कर मेरी मम्मी की चुची को चूसने लगे।

अंकल मेरी मम्मी की एक चुची को किसी आम की तरह मुँह में भर कर चूस रहे थे। जबकि दूसरी चुची को अपने हाथ में पकड़ कर मसल रहे थे। मेरी मम्मी ने भी मस्ती में अपने यार के इर्द-गिर्द अपनी बाँहें कस लीं। और उन्हें अपनी चुचियों पर दबा लिया। मेरी मम्मी की चूत बड़ी तेजी से पानी छोड़ने लगी थी।

मेरी मम्मी से अब कंट्रोल करना लगभग मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। मेरी मम्मी ने अंकल से बदहवास की हालत में कहा।

मम्मी: योगेश जी क्यों तड़पा रहे। अब डाल भी दीजिए ना। आप अच्छी तरह जानते हैं। मुझे सहन नहीं कर पाना। मेरे अंदर डाल दीजिए। फिर आपका जो दिल करे करते रहिए। प्लीज।

लेकिन अंकल वो कहाँ मेरी मम्मी की बात सुन रहे थे। वो बस अपनी ही धुन में लगे हुए थे।

मम्मी: योगेश जी क्या कर रहे हैं। अब डाल दीजिए ना अंदर। अब सब्र नहीं हो रहा। बड़ी खुजली हो रही है। आपको तो मेरी चुचियाँ मिल जाती हैं। बस उसी में खो जाते हैं। एक बार मेरा पानी निकाल दीजिए। फिर आप रात भर इनको चूसते रहिए। चाहे मुँह में रख कर सो जाना। लेकिन प्लीज डाल दीजिए।

अंकल: यार बोला ना। पहले मुझे एनर्जी ड्रिंक तो पी लेने दो।

अंकल जी के मुँह से एनर्जी ड्रिंक पीने की बात सुन मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। और अपनी दोनों टाँगों को खोल कर उनको नीचे की ओर धकेलती बोलीं। लीजिए।

आप भी ना। टाइम और जगह नहीं देखते। आपको तो घर में मजा चाहिए। अगर ऐसा ही और मजा लेना होता है ना। तो ये सब अंकुश के बेडरूम में करते हैं ना। कि खुले में सबके सामने। लीजिए। अब जल्दी से चाट लीजिए। अब अंकल का चेहरा मेरी मम्मी की चूत के बिल्कुल सामने था।

मेरी मम्मी को अपनी चूत पर अंकल की गरम साँसें और भी तेजी से पानी छोड़ने लगीं। और खुद उनके सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाती बोलीं।

मम्मी: लीजिए। पी लीजिए एनर्जी ड्रिंक। पता नहीं आपको यहाँ कौन सा एनर्जी ड्रिंक मिलता है। अंकल अपनी होठों को मेरी मम्मी की चूत के गुलाबी होठों से मिला दिया।

जैसे ही अंकल के होठ मेरी मम्मी की चूत के होठों से मिले। मेरी मम्मी के मुख से एक जबरदस्त सिसकी निकल गई। आह... नो... मम्म...। मस्ती में मेरी मम्मी की आँखें बंद हो गईं। और मेरी मम्मी किसी जल बिन मछली की तरह अपना सिर इधर उधर झटकने लगीं।

वो तो बस मेरी मम्मी की चूत पर अपनी नाक गड़ाए गरम साँसें ले और छोड़ रहे थे। और कभी मेरी मम्मी की चूत के होठों को अपने होठों में दबा कर चूसने लगते। और अपनी जीभ को जितना हो सकता था मेरी मम्मी की चूत के अंदर तक घुसा कर मेरी मम्मी की चूत को अपनी जीभ से ही चोदने लगे।

तो मेरी मम्मी ने भी मस्ती में अपनी टाँगें और खोल कर अपना हाथ उनके बालों में फिराती अपनी कमर को धीरे से चलाने लगीं। और कभी उनका सिर पकड़ कर खुद ही अपनी चूत पर दबाने लगीं। कि तभी अंकल मेरी मम्मी की एक टाँग को ऊपर उठा दिया। जिससे कि मेरी मम्मी की चूत पूरी तरह से खुल गई। जिससे वो बड़े प्यार से चाटने लगे। और कभी मेरी मम्मी की चूत के होठों को अपने दाँतों से काट लेते। जिससे मेरी मम्मी की चूत के होठ बिल्कुल लाल हो गए। और मेरी मम्मी मस्ती में अपने दोनों हाथों से अपनी चुचियों को मसलने लगीं।

उनके इस तरह चाटने से मेरी मम्मी जोर जोर से झड़ने लगीं। जिससे वो ऐसे चाट रहे थे कि जैसे वो कोई अमृत हो। मेरी मम्मी के मुख से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं। मेरी मम्मी की चूत का रस चाटने के बाद अंकल जी उठे। और मेरी मम्मी की आँखों में देख कर मेरी मम्मी को फिर से चूमने लगे।

मेरी मम्मी की चूत का रस पीने के बाद तो अंकल में जोश और बढ़ गया था। अब तो वो मेरी मम्मी को सता रहे थे। तड़पा रहे थे। अब मेरी मम्मी ने भी उनको तड़पाने का सोचा।

मम्मी: मैं जाती हूँ योगेश जी। बहुत देर हो गई है। अब तो आपने एनर्जी ड्रिंक पी लिया ना। आ गई ना आपके अंदर एनर्जी। अब जाइए। जा कर सो जाइए।

अंकल: ऐसे थोड़ी ही होता है वर्षा डार्लिंग।

मम्मी: पर... वो उठ जाएगा। मेरी मम्मी का इशारा मेरे नामर्द बाप की ओर था।

अंकल: वर्षा तुम मेरी बीवी हो... राइट... मेरा हक है तुमपे... और अगर वो आ जाएगा भी तो हम कुछ गलत नहीं कर रहे। सब पति पत्नी यही करते हैं। हम भी तो वही कर रहे हैं जो सब पति पत्नी करते हैं।

मम्मी: हम्म। लेकिन मैं आपकी बीवी नहीं हूँ। आपकी रखैल हूँ। बीवी तो मैं उसी नामर्द की हूँ। पर अंकुश ने मुझे आपसे चुड़वाकर आपकी रखैल बना दिया है। पर उसे तो नहीं पता मैं आपकी रखैल हूँ। वो तो यही समझता है उसके अलावा किसी और से नहीं चुदी हूँ। मैं सिर्फ उसी की हूँ। और जब उसे पता चलेगा आपकी रखैल बन गई हूँ। तो वो नामर्द मेरी बदनामी कर देगा। और साथ में अंकुश की भी। अब आप ही बताइए योगेश जी। क्या आप चाहते हैं मैं समाज में अपना सिर नीचे करके रहूँ।

अंकल: नहीं। लेकिन मैं उस मादरचोद को भी हिजड़ा साबित करवा दूँगा। अब खुश।

मम्मी: हाँ। मैं खुश हूँ आपसे। और आपके नग्ग राज लंड से।

अंकल: तो फिर अब चुदवाने से क्यों मना कर रही है। और वैसे भी सेक्स गलत नहीं है। चुदाई भी बहुत जरूरी है। ये नेचुरल है।

मम्मी: मैंने कब इनकार किया है। और कहा है कि हम गलत कर रहे हैं।

अंकल: तो फिर देखो ना। कैसे ये अभी भी खड़ा है। और उन्होंने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख दिया।

मेरी मम्मी उनके लंड को अपने हाथ से सहलाती मुस्कुरा कर बोलीं।

मम्मी: आपका ये लंड तो हर टाइम ही खड़ा रहता है। जब से मैंने उसे देखा है 6 महीने पहले। तब से ये हमेशा खड़ा ही रहता है। और मुझे पिछले 6 महीनों से चोद रहा है। लेकिन चोदने के बाद भी आपका ये लंड बैठता भी नहीं है। चोदने के बाद भी खड़ा ही रहता है। मैंने इसे तो कभी बैठे देखा नहीं। हर समय ये जोश में उछलता ही रहता है। और उनके लंड को सहलाने लगीं। और मेरी मम्मी उनसे बोलीं। लाइए। मैं आज इसको अपने हाथ से शांत कर देती हूँ।

और जल्दी अपना हाथ चला कर अंकल के लंड को आगे पीछे करते हुए उनकी मुठ मारने लगीं। तो अंकल मेरी मम्मी को बाँहों में भरते हुए बोले। मेरी जान। जिसकी बीवी तुम जैसी सुंदर और सेक्सी हो। उस मर्द का लंड कैसे बैठ सकता है। मेरी रानी। इसको अपने हाथ से नहीं। अगर करना ही है तो अपने इन गुलाबी होठों में ले कर शांत कर दो। और मेरी मम्मी के होठों पर अपनी उँगली फिराने लगे।

मेरी मम्मी से अपना लंड चुसवाने की बात पर मेरी मम्मी शर्म से।

मम्मी: क्या आप भी ना योगेश जी। मैं मुँह में नहीं लूँगी। और मैं आपकी बीवी नहीं। रखैल हूँ।

अंकल: मेरी रानी। हमारी शादी नहीं हुई तो क्या। मैंने तो तुम्हें दिल से अपनी बीवी मान लिया है। फिर इसको जरा से अपनी टाँगों के बीच ले कर इसको शांत कर दो।

मेरी मम्मी: लंड को हाथ से हिलाती बोलीं। मैं अपने हाथ से आपका पानी निकाल तो रही हूँ। मेरी मम्मी की बात पर अंकल मेरी मम्मी की आँखों में देख कर बोले।

अंकल: नहीं मेरी जान। अगर निकालना ही है तो अपने इन रसीले होठों से निकाल दो। ये सीधा सीधा वो मेरी मम्मी को अपना लंड चूसने को बोल रहे थे। पर मेरी मम्मी ने कहा।

मम्मी: नहीं जी। तो। और वहीं हॉल में रखे सोफे पर लेट गईं।

फिर अंकल मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ गए। और मेरी मम्मी की टाँगों को पूरा खोल दिया। और अपने खड़े लंड को पकड़ कर मेरी मम्मी की चूत पर टिका दिया। और मेरी मम्मी की दोनों टाँगों को ऊपर उठा दिया।

मेरी मम्मी अपने यार के नीचे टाँगें खोली करके लेटीं। और जैसे ही अंकल ने अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत में डालने लगे। तो मेरी मम्मी ने उनको रोक दिया। और कहा।

मम्मी: योगेश जी पहले इस पर वो चढ़ा तो लीजिए।

अंकल: यार अब कंडोम कहाँ से लाऊँगा। ऐसे ही करने दो ना।

मम्मी: नहीं। करना ही है। वो ले कर आइए।

फिर अंकल ने कहा। लाता हूँ। और अंकल मेरे रूम में आए। और मुझे कंडोम माँगा। और कंडोम लेकर चले गए। और उसको फाड़ कर अपने लंड पर चढ़ा लिया। और जाकर फिर से पोजीशन सेट की।

मम्मी: ये क्या किया आपने। अंकुश से कंडोम लेकर आए हो। उसकी मम्मी को ही चोदने के लिए।

अंकल: हाँ। मैं उसको बोलकर आया हूँ। तेरी मम्मी चुदने के लिए कंडोम का बोला है। और तू आराम से सो जा। मैं तेरी मम्मी को पूरी रात चोदूँगा।

मम्मी: मुस्कुरा कर। आप भी बड़े शरारती हैं। आपको किसी न किसी मेरे अंदर गिराने की सोचते हो। मैंने कहा है। एक बार मेरे पति का प्रॉब्लम सॉल्व हो जाए। फिर आपका जितना दिल करे मेरे अंदर बरसाना। मैं मना नहीं करूँगी।

अंकल: कैसी प्रॉब्लम।

मम्मी: उसका लंड खड़ा होने लग जाए।

अंकल: उसका लंड खड़ा होने लगेगा। तो तुम मुझसे चुदवाने बंद कर दोगी।

मम्मी: नहीं। उसका लंड खड़ा होने लगेगा। तो मैं उससे महीने में सिर्फ एक बार चुदूँगी। और आपसे रोज। फिर मैं आपके लंड से प्रेग्नेंट हो भी गई। तो वो मादरचोद नामर्द नामर्द समझेगा मैं उसी के लंड से प्रेग्नेंट हुई हूँ।

अंकल: सच वर्षा। तुम हमारा बच्चा करोगी।

मम्मी: क्या योगेश जी आप भी ना। जब आप मेरे अंदर अपना गिराएँगे। तो क्या मेरा पेट नहीं फूलेगा। और रही बात बच्चे की। तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी। उसके बाद अंकुश कहेगा। मैं बच्चे को जन्म दूँ तो ही दूँगी। अदरवाइज मैं अबॉर्शन करवा लूँगी। और ये क्या आप बातें ही करते रहेंगे। कहीं वो आ न जाए। जल्दी कीजिए।

तो अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के गुलाबी होठों में फँसा दिया। तो मेरी मम्मी के मुँह से हल्की सी आह... निकली।

अंकल: क्या हुआ वर्षा।

मम्मी: अरे कुछ नहीं... वो थोड़ा सा दर्द हुआ...

अंकल: डालूँ क्या।

मम्मी: हाँ... आप बिना मेरी चूत में डाले मानोगे क्या। पर जरा धीरे से डालना। कहीं एक बार में ही पूरा घुसा मत देना। आपको एक ही बार में पूरा मेरे अंदर घुसाने की आदत है।

अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत पर रगड़ने लगे। जिससे मेरी मम्मी की चूत और भी पानी छोड़ने लगी।

मम्मी: योगेश जी ये क्या कर रहे। अब अंदर डाल भी दीजिए ना। बाहर क्यों रगड़ रहे हैं। गुदगुदी होती है।

अंकल: यार तुम्हारी चूत की चिकनाई से इसको थोड़ा चिकना कर रहा। ताकि आराम से चला जाए। और तुम्हें दर्द भी न हो।

मम्मी: अपनी बाँहें उनके गले में डाल कर। इतनी ही चिंता है आपको मेरे दर्द की। अब डाल भी दीजिए ना।

मैंने देखा कि मेरी मम्मी के चूत के पानी से अंकल का लंड भी चिकना हो गया। जिससे उनका लंड मेरी मम्मी की चूत के छेद से फिसलता जा रहा था। अब मेरी मम्मी भी बहुत गरम हो रही थीं। और बोलीं।

मम्मी: अब ये क्या कर रहे हो। क्यों तड़पा रहे हो। आप चिकना हो तो गया है। डाल भी दो ना मेरे अंदर।

अंकल: अरे... यार छेद कहाँ है।

मम्मी: (छेद सुनके शर्माते हुए) क्या आप भी... रोज न जाने कितने बार डालते हो। जैसे पता ही न हो। थोड़ा नीचे ही... आह... हाँ...

अंकल: यार तो फिर तुम ही पकड़ कर इसे अपने छेद पर लगा दो ना।

मम्मी: आप भी योगेश जी। आपको इससे मुझे पकड़ाने के कोई न कोई बहाना चाहिए। और मेरी मम्मी ने अंकल का लंड पकड़ा। और बोलीं। पहले आप रूम की कुंडी लगा दीजिए। नहीं तो वो मादरचोद नामर्द नामर्द हिजड़ा बाहर आकर देख लेगा।

अंकल: मैंने पहले ही लगा दी है। तूने नहीं लगाई। पर मैंने तेरे बिना कहे ही लगा दी। अब जल्दी से सेट कर अपनी चूत के छेद पर मेरा लंड। और मेरी मम्मी ने अंकल का लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया। और बोलीं। अब धीरे से घुसाना।

मेरी मम्मी की चूत की गरमी पा कर अंकल ने हल्का सा धक्का मारा। और उनका लंड थोड़ा सा मेरी मम्मी की चूत में घुस गया।

मम्मी: आह... उफ्फ... योगेश जी। गया थोड़ा सा... रुको रुको।

अंकल एक पल के लिए रुके। और फिर एक दमदार धक्का मार कर उन्होंने अपना लंड पूरा मेरी मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया। मेरी मम्मी की दोनों टाँगों को अपने हाथों से थामे मेरी मम्मी से बोले। गया ना अंदर... जान... मेरी मम्मी तो मस्त हो गईं। और नशीली आँखों से अंकल की आँखों में देख कर बोलीं। तो क्या बिना मेरे अंदर किए मानोगे।

फिर तो अंकल एक रिदम के साथ अपनी कमर चलाने लगे। और मेरी मम्मी भी नीचे से अपनी कमर चला रही थीं। वो अपना पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकालते। और फिर जड़ तक घुसा देते। जिससे मेरी मम्मी के मुँह से हल्की सी आह... निकल जाती। अब तो उनके धक्कों की स्पीड भी बढ़ने लगी। मेरी मम्मी अंकल दोनों के मुख से आह... आह... आह... निकल रही थी। मस्ती में मेरी मम्मी ने अपनी दोनों बाँहें अंकल के गले में डाल कर उन्हें अपनी बाँहों में कस लिया।

मेरी मम्मी उनके बालों में अपनी उँगलियाँ फिराती बोलीं। आह... योगेश जी कितना अंदर तक घुसाते हैं आप। आह... धीरे... दर्द होता है। उई माँ... सुनिए ना प्लीज। मेरी मम्मी की दोनों टाँगें पूरी तरह से खुली हुई थीं। और अंकल मेरी मम्मी की चूत पर धक्के पर धक्का मार रहे थे। उनका लंड गचा गच मेरी मम्मी की चूत में आ जा रहा था।

और जैसे ही मेरी मम्मी झड़ने के करीब हुईं। मेरी मम्मी ने अंकल को अपनी तरफ जोर से बाँहों में जकड़ लिया। और जोर जोर से झड़ने लगीं। और अपनी दोनों टाँगों को उनकी कमर में लपेट लिया। तो अंकल ने मेरी मम्मी को उलटा लिया। अब वो नीचे। और मेरी मम्मी उनके ऊपर उनके लंड पर बैठी थीं।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 10:05 PM



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