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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#59

update 53

मेरी मम्मी को अंकल का लंड किसी शेर की दाढ़ की तरह उनके चूतड़ों पर महसूस हो रहा था।

मम्मी: योगेश जी वो चुभ रहा है। ये तो अभी से तैयार हो गया है।

अंकल: तो फिर जान। इसको शांत कर दो ना।

मेरी मम्मी से भी अब सब्र नहीं हुआ। और मेरी मम्मी भी पलट गईं। और अंकल की आँखों में देखने लगीं। तो अंकल ने पहले मेरी मम्मी के लेफ्ट गाल को चूमा। और मेरी मम्मी के दूसरे गालों को अपने होठों में दबा कर चूसा। तो मेरी मम्मी ने शर्म से अपना चेहरा दूसरी ओर कर लिया। तो अंकल ने मेरी मम्मी का चेहरा ऊपर करके अपने होठ मेरी मम्मी की गर्दन पर रख दिए। और उसको चूमने और चाटने लगे। और उनके हाथ मेरी मम्मी की पीठ पर थे। जिससे वो सहला रहे थे। और धीरे अपने हाथ नीचे की ओर ले जाते। मेरी मम्मी के चूतड़ों पर रख कर मेरी मम्मी के चूतड़ों को हाथों में दबा देते। कभी धीरे। और कभी जोर से थप्पड़ मार देते। और फिर अपने हाथ को ऊपर ले जा कर मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से मेरी मम्मी की ब्रा के हुक को खोलने की कोशिश करने लगे। तो मेरी मम्मी ने उनको मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खोलने से रोका।

मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। इसको क्यों खोल रहे हैं। पता ना वो घर में ही है।

अंकल: क्या यार। तुम्हें घर में ब्रा पहनना जरूरी है क्या। तुम्हें कितनी बार कहा है कि घर में ब्रा मत पहना करो।

मम्मी: मुस्कुरा कर। आपका बस चले ना। तो आप मुझे ब्रा तो क्या। ब्लाउज भी पहनने न दें। ऐसे ही सारा दिन घर में नंगी रखें। पर करूँ। वो भी तो घर में है। अगर मैं ब्रा नहीं पहनती। तो पता है कैसे उछलते हैं। और उसकी नजर इन पर ही तो लगी रहती है। और वो बोलता। तूने ब्रा क्यों नहीं पहनी। मेरा तो खड़ा होता नहीं है। तो फिर तू तेरी चुचियाँ किसे दिखा रही है।

अंकल: तो क्या हुआ मेरी जान। तू उस मादरचोद नामर्द नामर्द से कह देना। मैं योगेश के लिए ब्रा नहीं पहनती हूँ। वो क्या कर लेगा। और लगता है ये कमबख्त ब्रा बहुत टाइट हो गई है क्या।

मम्मी: होगी ही ना टाइट। 6 महीने पहले खरीदी थी ये ब्रा। 6 महीने पहले कितनी छोटी थी मेरी चुचियाँ। आराम से आ जाती थीं मेरी ब्रा में। लेकिन इन 6 महीनों में आपने उनको दबा दबाकर इनको बड़ा कर दिया है। अब ये ब्रा टाइट हो गई है। और आपको तो मौका मिलना चाहिए। बस लग जाते हैं इन से खेलने। आप भी दिन भर इनको कितना खींचते हैं। कितना चूसते हैं। बढ़ गया मेरा साइज। 6 महीने पहले जहाँ मेरा साइज 32 था। अब मुझे लग रहा है जिस तरह से आप इसकी खींचते और चूसते हैं। कुछ दिन में 36 हो जाएगा।

अंकल: होता है अक्सर प्यार में मेरी जान। वैसे जान। इसमें मेरा कोई कसूर नहीं। कसूर तुम्हारी इस मस्त जवानी का ही। देखते ही मचल जाता है। तुम अभी 33 की हो। और देखने में लगती हो 23 की। कोई नहीं कह सकता कि तुम एक 19 साल के लड़के की मम्मी हो। तुम अंकुश की बहन लगती हो। और अंकल का इतना कहना ही था कि मम्मी और अंकल दोनों साथ में हँसने लगे।

अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े थे। उन्होंने अपने हाथ मेरी मम्मी के चूतड़ों पर रख दिए। और मेरी मम्मी के चूतड़ों को हाथों में भर कर ऐसे दबाने लगे। मानो मेरी मम्मी के चूतड़ कोई एक स्पंज बॉल हो।

मेरी मम्मी फिर से गरम होने लगीं। तो उन्होंने मेरी मम्मी को चिपका लिया। और मेरी मम्मी को चूमने लगे। और उनका लंड मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बीच सैंडविच बना हुआ था। और उनका लंड पर प्रीक्यूम की बूंदों से गीला हो गया। और वो मेरी मम्मी की साड़ी पर उनका प्रीक्यूम लग गया था। मेरी मम्मी ने उनके होठों को चूमना बंद कर दिया। तो वो मेरी मम्मी से बोले। जान। अब तुम्हें क्या हुआ।

मम्मी: (मेरी मम्मी ने अपने होठों को अपने हाथ से साफ किया। क्योंकि अंकल के मेरी मम्मी के होठों को चूमने से मेरी मम्मी के होठों की लिपस्टिक खराब हो गई थी।) बस भी कीजिए। मेरी सारी लिपस्टिक खराब हो गई। वो आ जाएगा।

अंकल: सिर्फ 6 महीने हुए हैं हमारे रिलेशनशिप को। और तुम्हें इतना टेंशन हो रहा है। ऐसे थोड़ी ही हमारी न्यू लाइफ चलेगी। पिछले 19 सालों से तुम भी तड़प रही हो। और वो लाइफ एन्जॉय कर रहे हैं। तो तुम उस मादरचोद नामर्द नामर्द से डर रही हो। और तुम हर वक्त टेंशन में रहती हो। वो देख लेगा। अरे क्या देख लेगा वो मादरचोद नामर्द नामर्द। जो खुद अपनी बीवी की चूत में 19 सालों से एक बार भी अपनी लुल्ली को नहीं घुसा पाया। और तुम हिजड़े से टेंशन लेती हो।

मम्मी: तो मैं क्या करूँ। क्या आपको नहीं होती टेंशन। मुझे क्या ऐसे डर डर कर प्यार करना अच्छा लगता है। मेरा दिल नहीं करता क्या। मैं खुल कर आप से प्यार करूँ। आप ही बताओ। जब वो यहाँ नहीं था। तो मैं कभी आपको रोकती थी। कभी किसी बात के लिए आपको मना किया था। पर मैं नहीं चाहती उससे अभी हमारे रिश्ते के बारे में अभी कुछ पता चले। क्योंकि मुझे मेरी टेंशन नहीं है। कोई मेरे बारे में क्या सोचेगा। पर अंकुश की है। उससे उसके दोस्त पड़ोसी रिश्तेदार क्या कहेंगे। तेरी माँ एक वेश्या है। तेरे ही पड़ोसी की रखैल है। मैं नहीं चाहती हूँ कि मेरा बेटा समाज में मोहल्ले में कॉलेज में अपना सिर नीचा रखे। क्या आपको अंकुश के बारे में कुछ नहीं लगता। यदि आपको नहीं लगता कि अंकुश को सिर नीचा होगा। वैसे अगर आप चाहें तो मैं अभी जाकर उसको हमारे बारे में बता दूँ। फिर आपका जो दिल करे कीजिए। आपकी कसम। मैं मना नहीं करूँगी।

अंकल: मैं भी अंकुश को अपना बेटा मानता हूँ। मैं भी चाहता हूँ उसका सिर हमेशा ऊँचा रहे। इसलिए तो चुप चुप के करता हूँ। नहीं तो मैं तुझे उसी मादरचोद नामर्द नामर्द के सामने चोदता। लेकिन अब कुछ तो करना पड़ेगा। जिससे हमारा मजा चालू रहे। और अंकुश का सिर भी ऊँचा रहे। कोई उसे अपमानित न करे। वर्षा। अच्छा सुनो। तुम आई-पिल्स ले रही हो क्या। मेरी मम्मी अंकल दोनों अभी भी एक दूसरे से चिपके हुए थे।

अंकल की बात सुन कर मेरी मम्मी ने शर्माते अपना चेहरा उनकी छाती में छुपा लिया। और बोलीं। कभी कभी ले लेती हूँ। जब कभी आपको ज्यादा जोश चढ़ा होता है। और आप अंदर बरसा देते हो।

अंकल: यार कहाँ तुम्हारे अंदर गिराता हूँ तुम। बिना चढ़ाए करने देती हो क्या। देखो। तुम आई-पिल्स लेना बंद कर दो। पता है इससे साइड इफेक्ट होता है।

मम्मी: क्यों। आपका क्या पता। कभी मुझे ज्यादा गरम करके बिना कंडोम चढ़ाए अंदर गिरा देते। और कुछ हो गया तो।

अंकल: तो क्या हुआ। आज नहीं तो कुछ टाइम के बाद तो अंदर गिराना ही होगा। क्या तुम मेरे बच्चे की माँ बनाना नहीं चाहती।

अंकल के मुँह से अपने बच्चे की माँ बनाने की बात सुन मेरी मम्मी के गाल लाल हो उठे। और मेरी मम्मी ने शर्मा अपना मुँह उनकी छाती में छुपा कर प्यार से उनकी छाती में मुक्का मारते बोलीं। धत्त।

अंकल: क्या धत्त।

मम्मी: उसका तो खड़ा हो नहीं होता। और मैं प्रेग्नेंट हो गई। तो वो मुझे बदनाम कर देगा।

अंकल: हम उसका इलाज करवाएँगे। जिससे उसका खड़ा होगा। फिर तू उससे सिर्फ एक बार चुदवा लेना। और आई पिल ले लेना। और फिर उसे नामर्द बनाने की मेडिसिन दे देंगे। और फिर मेरे लंड से चुदवाकर प्रेग्नेंट हो जाना। और उसको लगेगा तुमको उसी ने प्रेग्नेंट किया है। सिर्फ एक बार उसका लंड खड़ा होगा। और फिर तुम्हारी और मेरी एक बेटी होगी। प्यारी सी। बिल्कुल तुम्हारी तरह। हमारे प्यार की निशानी।

मम्मी: नहीं बेटा।

अंकल: अंदर गिराने दो। तभी तो बेटा होगा।

मम्मी: (प्यार से अपने यार की आँखों में देखती हुई) आपको बस मेरे अंदर गिराने का मौका चाहिए। पहले आप उस मादरचोद नामर्द नामर्द का लंड की प्रॉब्लम सॉल्व करो। फिर आपकी जितनी इच्छा हो मेरे अंदर बरसाना। रोकूँगी नहीं। लेकिन अंकुश चाहेगा तभी। कि उसे कोई भाई या बहन चाहिए या नहीं।

अंकल: अच्छा यार। वो कल वाले यूज्ड कंडोम कहाँ फेंके तुमने। जो मैंने तुम्हें दिए थे।

मम्मी: कौन से।

अंकल: अरे वही कंडोम जो कल रात को यूज किए थे। 6 कंडोम। और एक आज दिन में यूज किया। पूरे 7 कंडोम।

मम्मी: अरे वो तो मैंने अंकुश के रूम में। उनके कितना वीर्य भरा हुआ था उनमें। मेरा तो पूरा हाथ भी भर गया था।

अंकल: यार वही पूछ रहा हूँ। कि वो यूज्ड कंडोम कहाँ हैं। फेंक दिए या वहीं पड़े हैं।

मम्मी: ओह। वो तो वहीं पड़े हैं अंकुश के अंदर वाले रूम में। और हाँ। मैं तो उसके बाद मैं भूल गई उसको वहाँ से हटाना।

अंकल: अरे यार। क्या करती हो। कंडोम फेंकने के लिए कहा था ना मैंने तुमने। अब वो मादरचोद नामर्द नामर्द वहाँ एसी ठीक करने गया है। और कुछ गड़बड़ हो गया तो। अगर उसने वो यूज्ड वीर्य से भरे कंडोम देख लिए। तो यही सोचेगा कि कि मैंने और तुम्हें ही इससे यूज किया है। क्योंकि उसका तो लंड खड़ा होता नहीं है। और उसका शक मुझ पर ही जाएगा। क्योंकि मैं ही तेरे घर में आ जाता हूँ। ये बात वो जानता है कि मेरी अंकुश से दोस्ती है। या कहते हुए अंकल ने एक झटके में मेरी मम्मी को अपने से अलग किया। मेरी मम्मी की आँखों से आँसू आने लगे। आज पहली बार था कि अंकल ने मेरी मम्मी को इस प्रकार डाँटा था।

मेरी मम्मी ने रोनी सूरत बनाते कहा। आपको पता है कितनी टेंशन है मुझको। और आपकी जब आपको मौका मिलता है चढ़ा लेते हो। और फिर इधर उधर फेंक देते हो। इसमें मेरा क्या गलती। आप मुझे डाँटने लगे। सारी रात आप करते रहते हैं। और सुबह वो घर में था। कहाँ फेंकती। और उसके बाद आप घर का कुछ भी काम कहाँ करने देते हो। वो घर से गया नहीं। आप मुझे उठा कर बेडरूम में ले गए। और चढ़ गए मेरे ऊपर। अब भी आपको मौका मिलता ना। अभी मुझे उठा कर रूम में ले जाते। और नंगी करके मेरे ऊपर चढ़े होते।

शायद अंकल जी को भी अपनी गलती का एहसास हो गया। तो वो बोले। अच्छा बाबा। माफ कर दो। सारी गलती मेरी ही। तो मेरी मम्मी ने रूठ कर अपना मुँह दूसरी ओर कर लिया। तो अंकल मेरी मम्मी को पीछे से बाँहों में भरते बोले। जान। कहा ना। गलती हो गई। अब माफ कर दो ना। कहो तो तुम्हारे पाँव पड़ जाऊँ। और जैसे ही वो नीचे झुक कर मेरी मम्मी के पैर पकड़ने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। ये आप क्या कर रहे। तो अंकल ने मेरी मम्मी को गले से लगा लिया। और बोले। जान। माफ कर दो मुझे। तुम पर गुस्सा नहीं करना चाहिए था। वो क्या ही। पता नहीं मुझे क्या हो गया। जानती हो ना। तुम्हारे नामर्द पति का कितना टेंशन है। और मेरी मम्मी के गालों को चूमने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। अब हटाइए ना। ज्यादा प्यार दिखाने की जरूरत नहीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी के सामने अपने दोनों कान पकड़ कर बोले। सरकार। अब तो इस गुलाम को माफ कर दो। अंकल की इस हरकत पर मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। और अंकल ने मेरी मम्मी को गले लगा कर। और चुम्मी देकर बोले। अंकुश से बोलता हूँ। वो रूम में जाकर कंडोम हटा दे। और उस नामर्द को कोई शक न हो। फिर अंकल ने किचन से ही मुझे कॉल किया।

मैं: हेलो अंकल।

अंकल: बेटा तेरे रूम में तेरा बाप गया है।

मैं: हाँ अंकल। वो एसी ठीक करने गए हैं।

अंकल: बेटा कल के 7 कंडोम तेरे अंदर वाले रूम में हैं। वो तेरा बाप न देख ले। तू जाकर उन्हें हटा दे।

मैं: ओके। मैं ले जाता हूँ। फिर कॉल कट हुआ। मैं रूम में गया। और जाकर देखा। पापा बाहर रूम में मेरे एसी की सफाई कर रहे थे। और कंडोम अंदर वाले रूम में थे।

मैं: पापा कितना टाइम लगेगा।

पापा: होने वाला है बेटा। सफाई कर रहा हूँ।

फिर मैं अंदर वाले रूम में गया। जहाँ कंडोम 7 पूरे थे। मैंने कंडोम को उठाया। और बेड के नीचे डाल दिया। ताकि किसी को शक न हो। और मैं उन्हें बाहर लाता। तो पापा देख लेते। इसलिए बेड के नीचे डाल दिए। उनमें अंकल का अनमोल वीर्य रस भरा हुआ था। जब मैं बेड के नीचे कंडोम डाल कर उठा। तो मैंने देखा। मम्मी भी रूम में आ गई थीं। और उन्होंने मुझे बेड के नीचे कंडोम डालते देख लिया था। शायद वो डर के मारे आई होंगी।

मैं: मम्मी आप यहाँ।

मम्मी: वो बेटा। मैं वो। मम्मी बोल नहीं पा रही थीं। शर्म की वजह से। क्योंकि मैंने कंडोम बेड के नीचे डाले थे। और एक माँ अपने बेटे को ऐसे करते देखेगी। तो शर्म आएगी ही।

मैं: मम्मी लगता है आप मुझे चाय के लिए बुलाने आई हो।

मम्मी: हाँ बेटा। चल। चाय पी ले। और मम्मी ने फिर ऐसे शो किया। जैसे उन्होंने कुछ नहीं देखा। मम्मी भी चाय के लिए बोल पड़ीं। जबकि अभी खाना का टाइम था। क्योंकि मैंने चाय बोला। तो मम्मी भी हड़बड़ाते हुए चाय बोल पड़ीं। जबकि वो खाना का भूल गईं।

मैं: हाँ मम्मी। चलो। और मैं मम्मी के साथ अंदर वाले रूम से निकला। बाहर वाले रूम में। जहाँ पापा एसी की सफाई कर रहे थे।

फिर हम दोनों बाहर वाले रूम से भी निकल कर हॉल में आए। और मैं सोफे पे बैठा। और मम्मी किचन में चली गईं। जहाँ अंकल थे पहले से मौजूद। और मैं भी किचन देखने लगा थोड़ी दूरी से चुपके से।

अंकल: (स्माइलिंग) वर्षा। कंडोम मिला।

मम्मी: (डाँटते हुए) मिल गया अंकुश को। और उसने बेड के नीचे छिपा दिए। बहुत वीर्य भरा था उनमें। अंकुश को हाथ गीला हो गया आपके वीर्य रस से।

अंकल: तुझे कैसे पता। क्या अंकुश ने तुझे बताया।

मम्मी: नहीं। लेकिन जब वो आपके वीर्य से भरे कंडोम बेड के नीचे छुपा रहा था। तो मैं देख रही थी। फिर मैंने उसके सामने ऐसे दिखावा किया। जैसे मैंने कुछ नहीं देखा।

अंकल: बोल देती। मैं देख रही हूँ।

मम्मी: चुप करो। बेशर्म। वो मेरा बेटा है। वो हमारी इतनी मदद कर रहा है। ये क्या काम है। अब आप जाइए। मुझे काम करना है। आज मैं आपकी वजह से फँस जाती। आपका क्या है। आप तो मर्द हो। सब गलती हम औरतों की ही मानी जाती है। चूत भी हमारी फटती है। और बदनामी भी हमारी होती है। और दर्द भी हमें होता है।

मम्मी गुस्से में बोल रही थीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और बोले।

अंकल: नहीं ऐसे नहीं। पहले बोलो मुझे माफ कर दिया। अगर तुम कहो तो मुर्गा बन जाऊँ। प्लीज यार। अब मान भी जाओ। सॉरी। अब मुझे माफ खाना लगा दो। और अपना दूध पिला दो। और अंकल ने इतना कहते ही मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ कर प्यार से सहला दिया।

मम्मी: धत्त। जाइए अब आप यहाँ से। और रही बात दूध की। वो अब नहीं। वो अब सीधा रात को ही मिलेगा।

और पापा रूम से ही आवाज देते हुए। बेटा तेरी मम्मी को बोल। खाना टेबल पर लगा दे। मैं आ रहा हूँ।

तो मैंने भी मम्मी को इसकी जानकारी देना सही समझा। क्योंकि आ एकदम आ जाते। और अंकल मम्मी को साथ में देख लेते। तो प्रॉब्लम हो जाती।

मैं: मम्मी पापा आ रहे हैं। खाना टेबल पर लगा दो। बाहर से ही जोर से आवाज दी। ताकि मम्मी अंकल समझ जाएँ कि मैंने उन्हें पापा के आने की इन्फॉर्मेशन दे दी है।

मम्मी: हाँ बेटा। लगा रही हूँ। बस 5 मिनट।

मैं: समझ गया। मम्मी ये कहना चाह रही थीं। बेटा तेरे पापा को 5 मिनट और रोक। रूम में। रूम से बाहर मत आने दे।

मम्मी: (अंकल से) देखा मेरे बेटे को। उसने पहले ही इन्फॉर्मेशन दे दी। अब अंकल को किचन से बाहर निकाल दो मम्मी।

अंकल: अरे। वो क्या। तेरा अकेला का बेटा है। मेरा भी तो बेटा है।

मम्मी: कुछ भी बोलते रहते हैं आप। शर्माते हुए।

अंकल: क्यों मेरी रानी। कुछ गलत कहा। अब वो मेरा भी तो बेटा ही हुआ। क्योंकि मैं उसकी मम्मी को चोद कर उसकी मम्मी को खुश कर रहा हूँ। जो मम्मी को चोदता है। वही बाप होता है। इसलिए मैं अंकुश का बाप भी बन गया हूँ। उसकी वर्षा मम्मी को चोद कर। अब जान। मैं चलता हूँ। और अंकल ने मेरी मम्मी के चूतड़ों पर हाथ मार बोले। जान। जरा जल्दी आना अंकुश के रूम में। तुम्हारी याद में कहीं तड़पता न रहूँ। जवाब में मेरी मम्मी भी मुस्कुरा पड़ीं। और बोलीं। आपको शिकायत का मौका नहीं दूँगी। और अंकल किचन से बाहर आए। और मुझे बाय करते हुए चले गए। फिर मैं किचन में गया। तो मम्मी ने कहा। बेटा जाकर खाना टेबल पर लगा दे।

मैं: जी मम्मी। और टेबल पर खाना लगाया। फिर मैंने पापा मम्मी ने खाना खाया। और पापा अपने रूम में चले गए। और फिर मैंने अंकल को मैसेज किया। तो अंकल भी आ गए।

मम्मी अंकल को देख मुझसे बोलीं।

मम्मी: बेटा तूने इन्हें क्यों बुलाया।

मैं: मम्मी कंप्यूटर सिखाने के लिए।

मम्मी: बेटा आज मैं कंप्यूटर नहीं सीखूँगी। क्योंकि मैं आज तेरे पापा के साथ उनके रूम में सोऊँगी।

मैं: मम्मी आप आ जाना। पापा के सोने के बाद।

मम्मी: नहीं बेटा। उनकी नींद खुल गई तो क्या होगा।

मैं: मैं हूँ ना मम्मी। आप टेंशन मत लेना। मैं सब संभाल लूँगा। आप सिर्फ कंप्यूटर सीखना।

मम्मी: ओके बेटा। और फिर मम्मी पापा के रूम में चली गईं। और अंकल मेरे अंदर वाले रूम में चले गए।

फिर मैं मम्मी पापा की विंडो पे गया। तो देखा। पापा बेड पे लेटे हुए थे। और मम्मी रूम में गईं। तो मम्मी को देख रहे थे। मम्मी ने एक बहुत ही सेक्सी सी पिंक कलर की नाइटी निकाली अलमारी से। और बाथरूम में चली गईं।

और उसे चेंज करके बाथरूम से बाहर आईं। पापा के पास आकर बेड पर लेट गईं। और पापा भी फिर मम्मी की तरफ हो गए। और अपना एक हाथ मेरी मम्मी की कमर पर रख दिया।

मम्मी: क्या है।

पापा: क्या तुम मुझसे नाराज हो।

मम्मी: नहीं। क्यों।

पापा: फिर तुम कपड़े पहन कर क्यों सोती हो।

मम्मी: मैं पहले नंगी सोती थी। तो भी आप कुछ नहीं करते थे। 19 साल से आपने कुछ किया नहीं। तो मैं अब नाइटी पहन कर सोती हूँ। क्या कुछ करोगे आज।

पापा: नहीं वर्षा।

मम्मी: कभी तो कर लो। 19 साल से तड़प रही हूँ।

पापा: वर्षा। नहीं। इससे हमारा शरीर कमजोर होता है। लाइफ में सेक्स लिमिटेड होना चाहिए।

मम्मी: आपने तो 19 साल से।

पापा: वर्षा। मैंने कहा ना। लिमिटेड सेक्स की क्या जरूरत है। अब हमारे बेटा है। अब क्या करेंगे।

मम्मी: लेकिन मेरी चूत का।

पापा: तेरी चूत को बोल दे। अब लंड नहीं मिलेगा। और हाँ। और यदि तूने किसी और का लंड के बारे में सोचा। तो मेरी चूत को काट दूँगा। अब तू लंड के सपने देखना बंद कर दे।

फिर पापा दूसरी तरफ मुँह कर के सो गया।

मैं उन दोनों को विंडो से देख रहा था। कि तभी अंकल मेरे पीछे आए। और मेरे कंधे पे हाथ रखा। और बोले। क्या देख रहे हो बेटा।

मैं: मैंने पलट कर देखा। अंकल ओनली अंडरवियर में थे। मैं बोला। अंकल देख रहा हूँ। मेरा नामर्द बाप मेरी मम्मी को कैसे डाँटता है। मादरचोद नामर्द नामर्द खुद खर्राटे लेकर सो गया। लेकिन मेरी मम्मी को आपसे दूर रख रहा है।

अंकल: तो बुला ले बेटा तेरी मम्मी को। मेरा लंड खड़ा है।

मैं: अंकल आप मम्मी को बुला लेना। मैं रूम में जाकर सोने का नाटक करता हूँ। नहीं तो मम्मी को बहुत शर्म आएगी। मेरे सामने आपके साथ अंदर वाले रूम में जाने में। क्योंकि आप ओनली अंडरवियर में ही।

अंकल: बेटा इतना तो चलने दे। इसमें कोई शर्म नहीं है।

फिर अंकल ने मेरे सामने ही मम्मी को कॉल किया। लेकिन मम्मी ने कॉल रिसीव नहीं किया। क्योंकि मम्मी सो रही थीं। और मोबाइल वाइब्रेशन पर था।

फिर अंकल ने दोबारा इसी प्रकार 5 वी बार कॉल पर मम्मी की वाइब्रेशन से नींद खुली। और उन्होंने कॉल उठाया। अभी रात के 11 बजे थे। मम्मी ने पापा की तरफ देखा। पापा घोड़े बेचकर खर्राटे लेकर सो रहे थे। फिर मम्मी ने मोबाइल को कान पे लगाया।

मम्मी: धीमी आवाज में। हेलो।

अंकल: आओ ना यार।

मम्मी: वो मेरी थोड़ी आँख लग गई थी। अभी आती हूँ।

अंकल: आओ जल्दी।

मम्मी: ज्यादा देर नहीं रुकूँगी। इसको पता न चल जाए। इसलिए सिर्फ 2 मिनट।

अंकल: जल्दी आओ। सब्र नहीं हो रहा है।

मम्मी: मुस्कुराकर। एक दिन भी सब्र नहीं होता आपसे। कैसे तड़प रहे हैं। फिर मम्मी ने अंकल की ओर देखा। वो गहरी नींद में सोए हुए थे।

फिर मम्मी रूम से बाहर आने लगीं। तो मैंने अंकल से कहा। अंकल मैं रूम में जाता हूँ। और मैं रूम में आ गया। और रूम से ही बाहर देखने लगा।

फिर अंकल मम्मी का इंतजार कर रहे थे। मम्मी रूम से निकलीं। और मम्मी ने पापा के रूम की बाहर से कुंडी लगा दी। मम्मी ने अंकल को रूम के बाहर ही खड़ा देखा।

मम्मी: क्या। आप रूम के बाहर ही मेरा वेट कर रहे हो। हो अंडरवियर में खड़े हो। क्या इतना भी सब्र नहीं हो रहा है आपसे। जो कपड़े उतारकर आ गए। अब अंकुश के सामने मैं कैसे आपके साथ जाऊँगी। आप तो अंडरवियर में ही। मुझे शर्म आएगी।

अंकल: कोई शर्म नहीं आएगी मेरी बुलबुल। और उन्होंने अपने हाथ मेरी मम्मी की कमर में डालकर मेरी मम्मी को अपने से चिपका लिया। और मेरी मम्मी के होठों को चूमने लगे।

और बोलने लगे। यार तुम नहीं जानती। तुम्हारे बिना एक पल के लिए रहना कितना मुश्किल है। ये एक एक पल मैंने कैसे गुजारा है। ये मैं ही जानता हूँ।

अंकल का अपने प्रति ये प्यार से दीवानी देख मेरी मम्मी खुद भी अपने आप को रोक नहीं पाईं। और मेरी मम्मी ने भी अपनी बाँहें अंकल के बदन पर कस दीं। और अंकल की आँखों में अपनी आँखें डाल कर एक नशीली अदा से बोलीं। क्या मैं रह सकती हूँ आपके बिना। आपने कैसे आदत डाल दी है। अब तो उसके बिना नींद ही कहाँ आती है।

अंकल: अब सब्र नहीं होता है जान।

मम्मी: कितने बेशर्म हैं आप भी। आप से जरा भी सब्र नहीं होता। देखिए ना। कितने फोन कर दिए। अगर उससे पता लग जाता तो।

अंकल: यार मुझसे सब्र नहीं होता। तो क्या तुम से सब्र होता है। और रही बात उसको पता लगने की। अगर लग जाता तो लग जाता। और वो मेरी मम्मी के ऊपर वाले होठ को अपने होठ में दबा कर चूस रहे थे। मैं किसी दूसरे की जीएफ को थोड़े ही प्यार कर रहा हूँ। अपनी जीएफ को कर रहा हूँ। और अंकल फिर से मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे।

जबकि उनके हाथ मेरी मम्मी के पीछे नाइटी के ऊपर से मेरी मम्मी की गाँड पर थे।

मम्मी: मैं उसकी जीएफ नहीं। लेकिन उसकी बीवी हूँ।

अंकल: उस नामर्द की बीवी। लेकिन सिर्फ नाम की।

मम्मी: अंकल की बाँहों में कसमसाते हुए। आह... योगेश जी। अब और बर्दाश्त नहीं होता। चलिए ना बेडरूम में। क्या यहीं खड़े खड़े करने का इरादा है।

अंकल भी बिना कुछ कहे मेरी मम्मी के होठों को चूसने में लगे थे।

मेरी मम्मी का थूक निकल कर अंकल के मुँह में जा रहा था। और वो मेरी मम्मी की जीभ को अपने होठ में दबा कर चूस रहे थे। नीचे से उनका लंड अंडरवियर में तंबू की तरह खड़ा मेरी मम्मी के बदन में चुभ रहा था। फिर अंकल ने अपना हाथ मेरी मम्मी की चुची पर रख कर उसे दबाने लगे। और मम्मी से बोले। यार तुम्हें कहा था। नीचे ब्रा मत पहनना।

मम्मी: अगर नहीं पहनती ना। पता है कितने जोर जोर से हिलते हैं। कितने बड़े हो गए। मैं सिर्फ आपकी हूँ। और आपकी रखैल हो कर इनको पराये मर्द के सामने खुला छोड़ दूँ।

अंकल: वो पराय मर्द थोड़ी है। वो तो तेरा नामर्द पति है।

मम्मी: मैं उसे पिछले 6 महीने तक पति मानती थी। लेकिन जब से आपका लंड मुझे अंकुश ने दिलवाया है। तब से मैं आपकी रखैल हूँ। उसकी बीवी नहीं। अब वो मेरे लिए पराय मर्द है। और मेरे बदन पे उसका नहीं। सिर्फ आपका अधिकार है। और पता नहीं वो मेरे उछलते दूधों को देखकर क्या सोचता होगा।

अंकल: हाँ। तू सिर्फ मेरी है वर्षा। और पीछे से अपना हाथ मेरी मम्मी की ब्रा के हुक पर रख कर खोलते समय बोले। वो मादरचोद नामर्द नामर्द सोचेगा क्या मेरी जान। कि उसकी बीवी ने अपने यार को दिखाने के लिए ही इनको खुला छोड़ा है। तो क्योंकि वो नामर्द तो इनका दूध निकाल कर पी नहीं सकता। इसलिए उसकी बीवी अपने यार को पिलाएगी।

मम्मी: प्यार से उनकी छाती में मुक्के मारती बोलीं। आप भी ना। कुछ भी बोलते हैं। फिर अंकल ने मेरी मम्मी को चूमते चूमते मेरी मम्मी को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया।

मम्मी: मम्म... योगेश जी... आह... फिर अंकल ने मेरी मम्मी की नाइटी की डोरी को खींच कर खोल दिया। और मेरी मम्मी की चुचियाँ उनकी आँखों के सामने नंगी हो गईं।
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Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 03:05 PM
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