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नाश्ते के बाद पापा ऑफिस चले गए। फिर घर पर मैं और मम्मी बचे थे।
पापा के ऑफिस जाने के बाद मैंने अंकल को भी बुला लिया नाश्ते के लिए।
मैं: अंकल नाश्ता कर लीजिए।
अंकल: नहीं बेटा। मैं नाश्ता कर चुका हूँ। और वैसे भी आज मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है।
मैं: क्या हुआ अंकल आपको।
अंकल: बेटा मेरी तबियत की दवा लेने आया हूँ।
मैं: अंकल कैसी दवा।
अंकल: बेटा वो तेरी मम्मी के पास है। और अंकल मम्मी की तरफ देखने लगे। तो मम्मी ने अपनी आँखें नीचे कर लीं। फिर मैंने मम्मी से कहा। मम्मी मैं आपके रूम में स्टडी करने जा रहा हूँ।
तो मम्मी ने अंकल की तरफ मुस्कुराते हुए देखा। और फिर मुझसे बोलीं। बेटा मैं भी चलती हूँ। मुझे सोना है।
मैं: नहीं मम्मी। आप मेरे वाले रूम में जाकर कंप्यूटर सीखिए। और मैं आपके रूम में स्टडी करूँगा।
मम्मी: बेटा पूरी रात भर कंप्यूटर सीखा है। अब मुझे सोना है। और तेरे पापा भी कभी वापस आ सकते हैं।
मैं: मम्मी आप पापा की टेंशन मत लीजिए। और जाकर कंप्यूटर सीखिए। फिर मैं मम्मी के रूम में चला गया। और अंदर से देखने लगा। मम्मी अंकल हॉल में थे।
मेरे रूम में जाते ही मेरी मम्मी अंकल की आँखों में आँखें डालकर मुस्कुरा कर बोलीं। योगेश जी। मुझे भी तो पता चले कि आपकी तबियत को क्या हुआ है।
अंकल: मेरी मम्मी को पकड़ कर अपनी बाँहों में भरते हुए। इतनी भी भोली नहीं हो मेरी जान।
मम्मी: मुझे कैसे पता चलेगा आपको क्या हुआ है। अगर पता होता तो कुछ इलाज नहीं कर देती।
और मेरी मम्मी नशीली आँखों से अंकल की आँखों में देख कर अपने होठों पर उँगली फिराने लगीं। ये कहने की कोशिश। आपकी बीमारी की दवा यहाँ ही है।
अंकल: मेरी मम्मी के होठों को चूमते। बस मेरी जान। तुम मुझे इन्हीं रसभरे होठों से पिलाती रहो। और अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख कर चूमने लगे।
मम्मी: योगेश जी जरा रुकिए। वो मेरा नामर्द पति अभी गया है। कहीं वो वापस न आ जाए।
अंकल: अरे पागल हो क्या। प्यार में इंतजार नहीं होता मेरी जान। और जिसकी तुम्हारे जैसी खूबसूरत बीवी हो। वो तो वैसे ही कहाँ रुक सकता है। और वैसे भी वो नामर्द वापस नहीं आएगा। समझदार है। उसे पता है उसकी बीवी को वो तो चोद नहीं सकता। इसलिए किसी और से चुदवाने के लिए अकेले में टाइम देना चाहिए।
मम्मी: क्या आप भी योगेश जी। वो जानता है उसकी बीवी उसके अलावा किसी और से नहीं चुद सकती। यदि उसे पता चल गया मैं आपसे चुदती हूँ तो वो पता नहीं मेरा क्या करेगा।
अंकल: तू क्यों डरती है इस हिजड़े नामर्द नामर्द से। अंकुश है। वो सब संभाल लेगा।
मम्मी: इसलिए तो कहती हूँ कंडोम यूज करा करो। लेकिन आप हो बिना कंडोम के ही घुसा देते हो। कहीं मैं प्रेग्नेंट न हो जाऊँ।
अंकल: यही तो मैं चाहता हूँ मेरी जान।
मम्मी: तो मम्मी ने शर्म से अपनी नजरें झुका लीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी का चेहरा अपने हाथों से उठा कर मेरी मम्मी से पूछने लगे। बोलो अंकुश की मम्मी। तुम नहीं चाहती ये सब।
अंकल के इस तरह मेरी मम्मी को अंकुश की यानी मेरी मम्मी बोलने पर मम्मी बोलीं। वो तो मैं हूँ अंकुश की मम्मी।
अंकल: तो मैं अंकुश का पापा हूँ।
लेकिन इस बार अंकल ने खुद को मेरा पापा बोलने पर मम्मी शर्म से चुप रहीं।
तो अंकल मेरी मम्मी से फिर से बोले।
अंकल: वर्षा क्या मैं तुम्हारे मुँह से कभी ये सुन पाऊँगा। जब तुम मुझे अपने बच्चे के पापा के नाम से बुलाओगी।
मेरी मम्मी अंकल के इस सवाल का क्या जवाब देतीं। बेचारी चुप थीं। क्योंकि वो मेरे पापा नहीं थे।
लेकिन इस बार अंकल फिर बोले। बोलो वर्षा। मैं अंकुश का पापा हूँ या नहीं।
मम्मी: आप अंकुश के पापा नहीं हो। लेकिन आप एक पिता का फर्ज निभा रहे हो। उसकी मम्मी को चोदकर।
अंकल: तो फिर मुझे अंकुश का पापा बोलो।
मम्मी: प्लीज योगेश जी। अभी नहीं।
अंकल: तो कब वर्षा।
मम्मी: जब अंकुश आपको मेरे सामने पापा बोलेगा। तब से।
अंकल: यदि अंकुश ने तुम्हारे सामने मुझे पापा बोला। तो मुझे क्या मिलेगा वर्षा जान।
मम्मी: यदि अंकुश ने मेरे सामने आपको पापा बोला। तो ये वर्षा तन मन से पूरी तरह से आपकी हो जाएगी। फिर आप जो कहेंगे। मैं इनकार नहीं करूँगी।
मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल ने मेरी मम्मी को पीछे से बाँहों में जकड़ लिया। और मेरी मम्मी की गर्दन और मेरी मम्मी के गालों को चूमने लगे।
मम्मी: योगेश जी ये मत करें। आप जानते हैं ये मेरी कमजोरी है। आह... आपके ऐसे करने से कंट्रोल नहीं रख पाती।
अंकल: जानू ये तुम्हारा कमजोर पॉइंट नहीं है। तुम्हारा कमजोर पॉइंट तो तुम्हारी टाँगों के बीच है। वैसे भी यार अब तुम्हें कंट्रोल करने की क्या जरूरत है। आओ ना यार। सुबह से कितना मूड बन रहा है।
मम्मी: मुस्कुरा कर। योगेश जी आप ये बताइए। आपका मूड कब नहीं बना हुआ। अच्छा। आप अंकुश के बेडरूम में चलिए। मैं आती हूँ। क्योंकि मेरे बेडरूम में तो अंकुश है। आप अंकुश के अंदर वाले बेडरूम में चलिए। और हाँ। वो रात के 6 यूज्ड कंडोम टेबल पर रखे हैं। उन्हें जरा बाहर फेंक देना। कहीं ऐसा न हो कि भूल जाएँ। और वो नामर्द देख ले।
अंकल: यार फेंक देंगे। उससे अब और भी तो होंगे। वो भी साथ ही फेंक देंगे। अब चलो ना यार। और अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी गोद में उठा कर बेडरूम की ओर चलने लगे। कि तभी दरवाजे पर बेल बज उठी।
अंकल: गाली निकालते हुए। मादरचोद। इस समय कौन होगा।
मम्मी: क्या योगेश जी। आप इतना गुस्सा क्यों कर रहे हैं। जाइए देखिए। दरवाजे पर कौन है जनाब।
अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी गोद से उतारा। और दरवाजा खोलने के लिए जाने लगे।
तो मम्मी बोलीं।
मम्मी: मैं जानती हूँ आपका इरादा। अगर कोई हुआ तो आप उसे बाहर से रुखसत कर देंगे।
अंकल मम्मी की तरफ आँख दिखाकर दरवाजा खोलने जाने लगे।
तो मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अंकल को अंगूठा दिखा कर चिढ़ा रही थीं।
अंकल: वर्षा क्यों चिढ़ा रही हो। तुम जानती हो अभी इस समय मुझ पर और मेरे लंड पर क्या बीत रही है।
मम्मी: हाँ जानती हूँ। और आपके वापस आने पर ये आपका (अंकल के लंड की तरफ इशारा करते हुए) मुझ पर ही भारी पड़ने वाला है।
और अंकल जाने लगे। तो मम्मी को कुछ याद आया। और बोलीं।
मम्मी: रुकिए।
अंकल: अब क्या हुआ।
मम्मी: ये आपका घर नहीं है। इसलिए आप दरवाजा मत खोलिए। कोई क्या सोचेगा आपको देखकर।
अंकल: हाँ वर्षा। अब क्या करें।
मम्मी: अंकुश को बोलिए। और अंकुश के अंदर वाले रूम में छुप जाइए।
अंकल ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर आया। तो
मम्मी: बेटा देख कौन है।
और अंकल अंदर मेरे रूम में छुप गए।
मैं गेट खोलने गया। तो गेट खोलते ही पापा सामने खड़े थे।
पापा को सामने पा कर एक बार तो मेरी मम्मी भी डर गई थीं। और डर के मारे वहाँ डाइनिंग टेबल से नाश्ते की खाली प्लेट्स उठाने लगीं।
मैं: सिचुएशन को संभालते हुए बोला। पापा क्या हुआ। आप वापस कैसे आ गए।
नामर्द पापा: मूड नहीं हुआ। तबियत ठीक नहीं लग रही थी। इसलिए वापस आ गया।
मैं: तो ठीक है पापा। आप आराम करो अपने बेडरूम में।
पापा: ओके बेटा। और जैसे ही पापा अपने बेडरूम में जाने लगे। तो उनकी नजर मेरी मम्मी के नंगे पेट पर पड़ी। पहले तो वो हैरान हुए। पर फिर इस बात को इग्नोर करते हुए बोले।
पापा: वर्षा तुम आ रही हो ना बेडरूम में।
मम्मी: आप जाओ। मैं थोड़ा घर का काम कर लेती हूँ।
मैं: पापा मम्मी को अभी घर का काम करना है। फिर उसके बाद मम्मी मेरे कॉलेज के प्रोजेक्ट में मेरी मदद करेगी।
पापा: ओके बेटा। और मम्मी से। वर्षा अंकुश की मदद करना।
मम्मी: जी।
फिर पापा अपने रूम में चले गए।
फिर पापा के रूम में जाते ही मैं मम्मी से बोला।
मैं: मम्मी रूम में चलो।
मम्मी: नहीं बेटा। तेरे पापा घर में हैं।
मैं: मम्मी मैंने पापा से बोल दिया है। आप मेरी मदद करोगी कॉलेज प्रोजेक्ट में।
मम्मी: नहीं बेटा।
मैं: मम्मी अब चलिए। अंकल वेट कर रहे हैं आपको कंप्यूटर सिखाने के लिए। चलिए। तो फिर मम्मी मेरे साथ मेरे रूम में आईं। जहाँ अंकल मेरे बेड पर बैठे हुए थे। और मुझे देखकर स्माइल देने लगे।
मैं: अंकल आप मम्मी को अंदर वाले रूम में कंप्यूटर सिखा दीजिए।
मम्मी: बेटा आज रहने दे।
मैं: अंकल आप मम्मी को ले जाइए हाथ पकड़ कर। नहीं तो मम्मी आज कंप्यूटर नहीं सीखेंगी।
तो अंकल बिना बोले मम्मी का हाथ पकड़ा। और मम्मी का हाथ खींचकर अंदर रूम में ले गए। और मम्मी भी बिना कुछ बोले अंदर वाले रूम में चली गईं। और अंदर रूम में जाते ही अंकल ने पर्दा लगा दिया। लेकिन दरवाजा नहीं लगाया।
मम्मी: अरे योगेश जी। आप दरवाजा क्यों बंद नहीं कर रहे हैं। दरवाजा बंद कीजिए। मुझे शर्म आती है। मेरा बेटा बाहर रूम में मेरी आवाज सुनेगा तो। वो क्या समझेगा। आप प्लीज दरवाजा बंद करो।
अंकल जी: (मेरी मम्मी को अपने पास खींचते हुए अपनी बाँहों में कसते हुए) हद है यार। एक तो वो बेचारा तुम्हें मेरे लंड से चुदवाने के लिए पहरेदारी कर रहा है। और तुम उसे अपनी चुदाई की आवाजें भी नहीं सुनने दोगी। उसे भी तो पता चले कि उसकी मम्मी की मैं ढंग से चुदाई करता हूँ या नहीं।
मम्मी: उसे पता है आप उसकी मम्मी को बहुत ही दमदारी से चोदते हो। पर इस वक्त वो नामर्द भी घर में है। कहीं वो मेरी आवाज न सुन ले। नहीं तो।
अंकल: वो नामर्द क्या करेगा। जो पिछले 19 साल से अपनी बीवी की चूत में एक बार भी लंड नहीं घुसा सका।
मम्मी: लेकिन वो मेरा पति है।
अंकल: पति का फर्ज तो मैं निभा रहा हूँ। और जो चूत में लंड घुसाए वो पति होता है। और तुम्हारी चूत में मेरा लंड मैं घुसाया हूँ। इसलिए मैं तुम्हारा पति हुआ। और तुम मेरी बीवी हुई।
मम्मी: नहीं। मैंने शादी उसके साथ की। इसलिए वो मेरा पति। और मैं उसकी पत्नी। और तुम मेरी चुदाई करते हो। ये तो सिर्फ अंकुश को पता है।
अंकल: मैं सिर्फ इतना जानता हूँ। तुम सिर्फ मेरी हो।
मम्मी: हाँ। सिर्फ आपकी हूँ।
अंकल: तुम सिर्फ और सिर्फ मेरी हो। वो मादरचोद बहंकलोदा नामर्द नामर्द हिजड़ा। और वो क्या समझेगा। यार मैं प्यार अपनी अमानत के साथ कर रहा हूँ। या किसी दूसरी औरत के साथ। और इतना कहते ही अंकल ने अपने होठ मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए।
मम्मी: मेरी मम्मी ने अंकल के होठों से अपने होठों को अलग किया। और थोड़ा गुस्से में बोलीं। क्या बोल रहे थे आप। अब जरा बोलिए। अगर किसी और औरत के साथ थोड़े ही कर रहा हूँ। अगर मैंने किसी और औरत को आपके साथ क्या आपके इर्द गिर्द भी देख लिया ना। तो फिर देखना उसकी जो हालत मैं करूँगी सो करूँगी ही। पर आपकी भी वो हालत करूँगी कि आप भी देखना। आप सिर्फ मेरे। आप सिर्फ वर्षा के हो।
अंकल: अंकल मेरी मम्मी की आँखों में देखते ही डर गए। क्योंकि एक औरत के गुस्से से तो मर्द को डर लगता है। क्योंकि औरत के पास चूत होती है। और लंड को चूत चाहिए। इसलिए कई मर्द औरत का पालतू कुत्ता होता है। चूत चाहिए तो डरना ही पड़ता है। ठीक वैसे ही अंकल भी डर गए। और बोले।
अंकल: अरे यार। मैं कहाँ। मैं तो वैसे ही बोल रहा था।
मम्मी: सब जानती हूँ। आप सब मर्द एक जैसे होते हैं। बड़े मजे कर लिए आपने मुझसे मिलने से पहले। लेकिन अब मेरे अलावा किसी और के साथ नहीं चलेगा।
अंकल: सच कह रहा हूँ। 6 महीने पहले तक मैंने कई औरतों को चोदा है। कई लड़कियों को भी चोदा है। लेकिन पिछले 6 महीनों से सिर्फ तुम्हें ही चोद रहा हूँ। जब से तुमने मुझे अपना ये संगमरमर बदन सौंपा है। तब से आज तक मैंने तुम्हारे अलावा किसी और की तरफ देखा तक नहीं।
मम्मी: अच्छा। और देखने की हिम्मत भी नहीं करना।
अंकल: कान पकड़। जो हुक्म रानी साहिबा। अब और कोई हुक्म इस गुलाम के लिए। अंकल के इस तरह प्यार जताने पर मेरी मम्मी खुद अपने आप को रोक नहीं पाईं। और उनकी आँखों में देखते हुए आँखों से ही इशारे से उनको प्यार करने के लिए कहने लगीं।
मेरी मम्मी अपनी बाँहें फिर से अंकल के गले में डाल कर। अब जल्दी से कर लीजिए जो करना है। तो अंकल फिर से अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए। और मेरी मम्मी के होठों को चूमने लगे। जबकि उनका खड़ा लंड मेरी मम्मी को अपनी चूत पे महसूस हो रहा था।
अंकल मेरी मम्मी की कमर में अपना हाथ डाले मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर मेरी मम्मी के होठों पर लगी लिपस्टिक को चूसने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी अपना हाथ नीचे करके उनके खड़े लंड पर रख दिया। और उनके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगीं। योगेश जी। आपका ये घोड़ा तो एकदम से तैयार है। कैसे खड़ा है ये। कैसे आजाद होने के छटपटा रहा है।
अंकल: मेरी जान। अब इसकी लगाम तो तुम्हारे ही हाथ में है। तुम ही जो इसको कैद से आजाद कर सकती हो। वैसे मेरी जान। नामर्दों के लंड ही खड़े नहीं होते। और मर्दों के हर समय ऐसे ही ऐसे खड़े रहते हैं। जैसे कोई जंग में जाने के लिए योद्धा।
मम्मी: जैसे मेरा वो नामर्द पति। उसका पिछले 19 साल से खड़ा ही नहीं हुआ। और एक आप हैं। जिनका हर समय खड़ा रहता है। योगेश जी कितनी एनर्जी है आप में।
अंकल: मेरी जान। मेरी एनर्जी का कारण भी तो तुम ही हो। जानती हो ना। जब से मैंने तुम्हारा एनर्जी ड्रिंक पीना शुरू किया है। अंदर से एक अलग ही चुस्ती सी आ गई है। बस यार। तुम इसी तरह मुझे एनर्जी ड्रिंक पिलाती रहना। बोलो पिलाओगी ना।
मम्मी: शर्म से। क्या योगेश जी आप भी। आपको क्या। मैंने कभी मना किया है। और अब आप ज्यादा बातें मत करिए। जो करना है जल्दी से कर लीजिए। वो नामर्द घर पर ही है। और अब मेरे अंदर भी आग लग रही है।
अंकल: कहाँ।
मम्मी: नीचे। जहाँ आपका घोड़ा घुसेगा। अब मैं चाहती हूँ आप मुझे जल्दी से मेरी रानी को चोद डालिए।
अंकल: मेरी मम्मी की बात सुन अंकल मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ कर मेरी मम्मी की साड़ी खोलने लगे। मेरी मम्मी अपनी साड़ी खोलने में अपने यार की मदद भी कर रही थीं। साथ ही उनको रोकने की कोशिश भी।
मम्मी: योगेश जी साड़ी मत खोलिए ना। उठा कर लीजिए ना। लेकिन अंकल कहाँ मेरी मम्मी की बात सुनते थे। मेरी मम्मी की साड़ी निकाल कर उन्होंने फेंक दी। और मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा पकड़ कर मेरी मम्मी का पेटीकोट खोलने लगे।
मम्मी: मैं उठा देती हूँ। आप पैंटी नीचे करके कर लीजिए।
अंकल: यार कुछ नहीं होगा। तुम जानती हो ना। मुझे मजा तभी आता है जब तुम एकदम नंगी मेरे साथ हो।
मम्मी: क्या योगेश जी आप भी ना। रात को करते हैं ना। मैं रोकती हूँ क्या आपको।
अंकल ने मेरी मम्मी की कोई भी बात को नहीं सुना। और मेरी मम्मी को ले कर बिस्तर पर लेट गए। और मेरी मम्मी के गालों मेरी मम्मी की गर्दन और मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर मेरी मम्मी की क्लीवेज को चूमने लगे। वो जानते थे ये मेरी मम्मी की कमजोरी है। और यही करते उन्होंने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींच कर खोल दिया।
मम्मी: आह... योगेश जी बस कीजिए ना। आह... क्यों तड़पा रहे हैं। डाल दीजिए ना अंदर। लेकिन अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से मेरी मम्मी की चुचियों को मसल रहे थे।
मम्मी: धीरे मसलिए। आप जानते हैं कितनी बड़ी हो गई हैं। मेरा बेटा क्या सोचेगा। मेरी चुचियाँ देखकर। मम्मी की चुचियाँ कितनी बड़ी हो गई हैं। पापा तो मम्मी की चुचियाँ चूसते नहीं हैं। तो कैसे हो गईं।
अंकल: मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोल कर मेरी मम्मी के ब्लाउज को निकाल कर नीचे फेंक दिया।
अंकल: मेरी रानी। तेरी ये चुचियाँ नहीं। ये तो रसीले आम हैं। और अंकुश ने खुद बोला है। मेरे पापा मेरी मम्मी की चुचियों को हाथ भी नहीं लगाते हैं। इसलिए आप उन्हें बड़ी कर दो। इसलिए उन्हें बड़ी कर रहा हूँ। और मेरी मम्मी के निप्पल को ब्रा के साथ ही मुँह में भर कर आम की तरह चूसने लगे। मेरी मम्मी की ब्रा अंकल के थूक से पूरी तरह से गीली हो गई। और फिर अंकल ने मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को ब्रा से बाहर निकाल दिया। और निप्पल को अपनी जीभ निकाल कर छेड़ने लगे। और फिर मेरी मम्मी की चुची को ऐसे मुँह में भर लिया। जैसे दुशेरी आम का रस चूस रहे हों।
नाश्ते के बाद पापा ऑफिस चले गए। फिर घर पर मैं और मम्मी बचे थे।
पापा के ऑफिस जाने के बाद मैंने अंकल को भी बुला लिया नाश्ते के लिए।
मैं: अंकल नाश्ता कर लीजिए।
अंकल: नहीं बेटा। मैं नाश्ता कर चुका हूँ। और वैसे भी आज मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है।
मैं: क्या हुआ अंकल आपको।
अंकल: बेटा मेरी तबियत की दवा लेने आया हूँ।
मैं: अंकल कैसी दवा।
अंकल: बेटा वो तेरी मम्मी के पास है। और अंकल मम्मी की तरफ देखने लगे। तो मम्मी ने अपनी आँखें नीचे कर लीं। फिर मैंने मम्मी से कहा। मम्मी मैं आपके रूम में स्टडी करने जा रहा हूँ।
तो मम्मी ने अंकल की तरफ मुस्कुराते हुए देखा। और फिर मुझसे बोलीं। बेटा मैं भी चलती हूँ। मुझे सोना है।
मैं: नहीं मम्मी। आप मेरे वाले रूम में जाकर कंप्यूटर सीखिए। और मैं आपके रूम में स्टडी करूँगा।
मम्मी: बेटा पूरी रात भर कंप्यूटर सीखा है। अब मुझे सोना है। और तेरे पापा भी कभी वापस आ सकते हैं।
मैं: मम्मी आप पापा की टेंशन मत लीजिए। और जाकर कंप्यूटर सीखिए। फिर मैं मम्मी के रूम में चला गया। और अंदर से देखने लगा। मम्मी अंकल हॉल में थे।
मेरे रूम में जाते ही मेरी मम्मी अंकल की आँखों में आँखें डालकर मुस्कुरा कर बोलीं। योगेश जी। मुझे भी तो पता चले कि आपकी तबियत को क्या हुआ है।
अंकल: मेरी मम्मी को पकड़ कर अपनी बाँहों में भरते हुए। इतनी भी भोली नहीं हो मेरी जान।
मम्मी: मुझे कैसे पता चलेगा आपको क्या हुआ है। अगर पता होता तो कुछ इलाज नहीं कर देती।
और मेरी मम्मी नशीली आँखों से अंकल की आँखों में देख कर अपने होठों पर उँगली फिराने लगीं। ये कहने की कोशिश। आपकी बीमारी की दवा यहाँ ही है।
अंकल: मेरी मम्मी के होठों को चूमते। बस मेरी जान। तुम मुझे इन्हीं रसभरे होठों से पिलाती रहो। और अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख कर चूमने लगे।
मम्मी: योगेश जी जरा रुकिए। वो मेरा नामर्द पति अभी गया है। कहीं वो वापस न आ जाए।
अंकल: अरे पागल हो क्या। प्यार में इंतजार नहीं होता मेरी जान। और जिसकी तुम्हारे जैसी खूबसूरत बीवी हो। वो तो वैसे ही कहाँ रुक सकता है। और वैसे भी वो नामर्द वापस नहीं आएगा। समझदार है। उसे पता है उसकी बीवी को वो तो चोद नहीं सकता। इसलिए किसी और से चुदवाने के लिए अकेले में टाइम देना चाहिए।
मम्मी: क्या आप भी योगेश जी। वो जानता है उसकी बीवी उसके अलावा किसी और से नहीं चुद सकती। यदि उसे पता चल गया मैं आपसे चुदती हूँ तो वो पता नहीं मेरा क्या करेगा।
अंकल: तू क्यों डरती है इस हिजड़े नामर्द नामर्द से। अंकुश है। वो सब संभाल लेगा।
मम्मी: इसलिए तो कहती हूँ कंडोम यूज करा करो। लेकिन आप हो बिना कंडोम के ही घुसा देते हो। कहीं मैं प्रेग्नेंट न हो जाऊँ।
अंकल: यही तो मैं चाहता हूँ मेरी जान।
मम्मी: तो मम्मी ने शर्म से अपनी नजरें झुका लीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी का चेहरा अपने हाथों से उठा कर मेरी मम्मी से पूछने लगे। बोलो अंकुश की मम्मी। तुम नहीं चाहती ये सब।
अंकल के इस तरह मेरी मम्मी को अंकुश की यानी मेरी मम्मी बोलने पर मम्मी बोलीं। वो तो मैं हूँ अंकुश की मम्मी।
अंकल: तो मैं अंकुश का पापा हूँ।
लेकिन इस बार अंकल ने खुद को मेरा पापा बोलने पर मम्मी शर्म से चुप रहीं।
तो अंकल मेरी मम्मी से फिर से बोले।
अंकल: वर्षा क्या मैं तुम्हारे मुँह से कभी ये सुन पाऊँगा। जब तुम मुझे अपने बच्चे के पापा के नाम से बुलाओगी।
मेरी मम्मी अंकल के इस सवाल का क्या जवाब देतीं। बेचारी चुप थीं। क्योंकि वो मेरे पापा नहीं थे।
लेकिन इस बार अंकल फिर बोले। बोलो वर्षा। मैं अंकुश का पापा हूँ या नहीं।
मम्मी: आप अंकुश के पापा नहीं हो। लेकिन आप एक पिता का फर्ज निभा रहे हो। उसकी मम्मी को चोदकर।
अंकल: तो फिर मुझे अंकुश का पापा बोलो।
मम्मी: प्लीज योगेश जी। अभी नहीं।
अंकल: तो कब वर्षा।
मम्मी: जब अंकुश आपको मेरे सामने पापा बोलेगा। तब से।
अंकल: यदि अंकुश ने तुम्हारे सामने मुझे पापा बोला। तो मुझे क्या मिलेगा वर्षा जान।
मम्मी: यदि अंकुश ने मेरे सामने आपको पापा बोला। तो ये वर्षा तन मन से पूरी तरह से आपकी हो जाएगी। फिर आप जो कहेंगे। मैं इनकार नहीं करूँगी।
मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल ने मेरी मम्मी को पीछे से बाँहों में जकड़ लिया। और मेरी मम्मी की गर्दन और मेरी मम्मी के गालों को चूमने लगे।
मम्मी: योगेश जी ये मत करें। आप जानते हैं ये मेरी कमजोरी है। आह... आपके ऐसे करने से कंट्रोल नहीं रख पाती।
अंकल: जानू ये तुम्हारा कमजोर पॉइंट नहीं है। तुम्हारा कमजोर पॉइंट तो तुम्हारी टाँगों के बीच है। वैसे भी यार अब तुम्हें कंट्रोल करने की क्या जरूरत है। आओ ना यार। सुबह से कितना मूड बन रहा है।
मम्मी: मुस्कुरा कर। योगेश जी आप ये बताइए। आपका मूड कब नहीं बना हुआ। अच्छा। आप अंकुश के बेडरूम में चलिए। मैं आती हूँ। क्योंकि मेरे बेडरूम में तो अंकुश है। आप अंकुश के अंदर वाले बेडरूम में चलिए। और हाँ। वो रात के 6 यूज्ड कंडोम टेबल पर रखे हैं। उन्हें जरा बाहर फेंक देना। कहीं ऐसा न हो कि भूल जाएँ। और वो नामर्द देख ले।
अंकल: यार फेंक देंगे। उससे अब और भी तो होंगे। वो भी साथ ही फेंक देंगे। अब चलो ना यार। और अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी गोद में उठा कर बेडरूम की ओर चलने लगे। कि तभी दरवाजे पर बेल बज उठी।
अंकल: गाली निकालते हुए। मादरचोद। इस समय कौन होगा।
मम्मी: क्या योगेश जी। आप इतना गुस्सा क्यों कर रहे हैं। जाइए देखिए। दरवाजे पर कौन है जनाब।
अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी गोद से उतारा। और दरवाजा खोलने के लिए जाने लगे।
तो मम्मी बोलीं।
मम्मी: मैं जानती हूँ आपका इरादा। अगर कोई हुआ तो आप उसे बाहर से रुखसत कर देंगे।
अंकल मम्मी की तरफ आँख दिखाकर दरवाजा खोलने जाने लगे।
तो मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अंकल को अंगूठा दिखा कर चिढ़ा रही थीं।
अंकल: वर्षा क्यों चिढ़ा रही हो। तुम जानती हो अभी इस समय मुझ पर और मेरे लंड पर क्या बीत रही है।
मम्मी: हाँ जानती हूँ। और आपके वापस आने पर ये आपका (अंकल के लंड की तरफ इशारा करते हुए) मुझ पर ही भारी पड़ने वाला है।
और अंकल जाने लगे। तो मम्मी को कुछ याद आया। और बोलीं।
मम्मी: रुकिए।
अंकल: अब क्या हुआ।
मम्मी: ये आपका घर नहीं है। इसलिए आप दरवाजा मत खोलिए। कोई क्या सोचेगा आपको देखकर।
अंकल: हाँ वर्षा। अब क्या करें।
मम्मी: अंकुश को बोलिए। और अंकुश के अंदर वाले रूम में छुप जाइए।
अंकल ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर आया। तो
मम्मी: बेटा देख कौन है।
और अंकल अंदर मेरे रूम में छुप गए।
मैं गेट खोलने गया। तो गेट खोलते ही पापा सामने खड़े थे।
पापा को सामने पा कर एक बार तो मेरी मम्मी भी डर गई थीं। और डर के मारे वहाँ डाइनिंग टेबल से नाश्ते की खाली प्लेट्स उठाने लगीं।
मैं: सिचुएशन को संभालते हुए बोला। पापा क्या हुआ। आप वापस कैसे आ गए।
नामर्द पापा: मूड नहीं हुआ। तबियत ठीक नहीं लग रही थी। इसलिए वापस आ गया।
मैं: तो ठीक है पापा। आप आराम करो अपने बेडरूम में।
पापा: ओके बेटा। और जैसे ही पापा अपने बेडरूम में जाने लगे। तो उनकी नजर मेरी मम्मी के नंगे पेट पर पड़ी। पहले तो वो हैरान हुए। पर फिर इस बात को इग्नोर करते हुए बोले।
पापा: वर्षा तुम आ रही हो ना बेडरूम में।
मम्मी: आप जाओ। मैं थोड़ा घर का काम कर लेती हूँ।
मैं: पापा मम्मी को अभी घर का काम करना है। फिर उसके बाद मम्मी मेरे कॉलेज के प्रोजेक्ट में मेरी मदद करेगी।
पापा: ओके बेटा। और मम्मी से। वर्षा अंकुश की मदद करना।
मम्मी: जी।
फिर पापा अपने रूम में चले गए।
फिर पापा के रूम में जाते ही मैं मम्मी से बोला।
मैं: मम्मी रूम में चलो।
मम्मी: नहीं बेटा। तेरे पापा घर में हैं।
मैं: मम्मी मैंने पापा से बोल दिया है। आप मेरी मदद करोगी कॉलेज प्रोजेक्ट में।
मम्मी: नहीं बेटा।
मैं: मम्मी अब चलिए। अंकल वेट कर रहे हैं आपको कंप्यूटर सिखाने के लिए। चलिए। तो फिर मम्मी मेरे साथ मेरे रूम में आईं। जहाँ अंकल मेरे बेड पर बैठे हुए थे। और मुझे देखकर स्माइल देने लगे।
मैं: अंकल आप मम्मी को अंदर वाले रूम में कंप्यूटर सिखा दीजिए।
मम्मी: बेटा आज रहने दे।
मैं: अंकल आप मम्मी को ले जाइए हाथ पकड़ कर। नहीं तो मम्मी आज कंप्यूटर नहीं सीखेंगी।
तो अंकल बिना बोले मम्मी का हाथ पकड़ा। और मम्मी का हाथ खींचकर अंदर रूम में ले गए। और मम्मी भी बिना कुछ बोले अंदर वाले रूम में चली गईं। और अंदर रूम में जाते ही अंकल ने पर्दा लगा दिया। लेकिन दरवाजा नहीं लगाया।
मम्मी: अरे योगेश जी। आप दरवाजा क्यों बंद नहीं कर रहे हैं। दरवाजा बंद कीजिए। मुझे शर्म आती है। मेरा बेटा बाहर रूम में मेरी आवाज सुनेगा तो। वो क्या समझेगा। आप प्लीज दरवाजा बंद करो।
अंकल जी: (मेरी मम्मी को अपने पास खींचते हुए अपनी बाँहों में कसते हुए) हद है यार। एक तो वो बेचारा तुम्हें मेरे लंड से चुदवाने के लिए पहरेदारी कर रहा है। और तुम उसे अपनी चुदाई की आवाजें भी नहीं सुनने दोगी। उसे भी तो पता चले कि उसकी मम्मी की मैं ढंग से चुदाई करता हूँ या नहीं।
मम्मी: उसे पता है आप उसकी मम्मी को बहुत ही दमदारी से चोदते हो। पर इस वक्त वो नामर्द भी घर में है। कहीं वो मेरी आवाज न सुन ले। नहीं तो।
अंकल: वो नामर्द क्या करेगा। जो पिछले 19 साल से अपनी बीवी की चूत में एक बार भी लंड नहीं घुसा सका।
मम्मी: लेकिन वो मेरा पति है।
अंकल: पति का फर्ज तो मैं निभा रहा हूँ। और जो चूत में लंड घुसाए वो पति होता है। और तुम्हारी चूत में मेरा लंड मैं घुसाया हूँ। इसलिए मैं तुम्हारा पति हुआ। और तुम मेरी बीवी हुई।
मम्मी: नहीं। मैंने शादी उसके साथ की। इसलिए वो मेरा पति। और मैं उसकी पत्नी। और तुम मेरी चुदाई करते हो। ये तो सिर्फ अंकुश को पता है।
अंकल: मैं सिर्फ इतना जानता हूँ। तुम सिर्फ मेरी हो।
मम्मी: हाँ। सिर्फ आपकी हूँ।
अंकल: तुम सिर्फ और सिर्फ मेरी हो। वो मादरचोद बहंकलोदा नामर्द नामर्द हिजड़ा। और वो क्या समझेगा। यार मैं प्यार अपनी अमानत के साथ कर रहा हूँ। या किसी दूसरी औरत के साथ। और इतना कहते ही अंकल ने अपने होठ मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए।
मम्मी: मेरी मम्मी ने अंकल के होठों से अपने होठों को अलग किया। और थोड़ा गुस्से में बोलीं। क्या बोल रहे थे आप। अब जरा बोलिए। अगर किसी और औरत के साथ थोड़े ही कर रहा हूँ। अगर मैंने किसी और औरत को आपके साथ क्या आपके इर्द गिर्द भी देख लिया ना। तो फिर देखना उसकी जो हालत मैं करूँगी सो करूँगी ही। पर आपकी भी वो हालत करूँगी कि आप भी देखना। आप सिर्फ मेरे। आप सिर्फ वर्षा के हो।
अंकल: अंकल मेरी मम्मी की आँखों में देखते ही डर गए। क्योंकि एक औरत के गुस्से से तो मर्द को डर लगता है। क्योंकि औरत के पास चूत होती है। और लंड को चूत चाहिए। इसलिए कई मर्द औरत का पालतू कुत्ता होता है। चूत चाहिए तो डरना ही पड़ता है। ठीक वैसे ही अंकल भी डर गए। और बोले।
अंकल: अरे यार। मैं कहाँ। मैं तो वैसे ही बोल रहा था।
मम्मी: सब जानती हूँ। आप सब मर्द एक जैसे होते हैं। बड़े मजे कर लिए आपने मुझसे मिलने से पहले। लेकिन अब मेरे अलावा किसी और के साथ नहीं चलेगा।
अंकल: सच कह रहा हूँ। 6 महीने पहले तक मैंने कई औरतों को चोदा है। कई लड़कियों को भी चोदा है। लेकिन पिछले 6 महीनों से सिर्फ तुम्हें ही चोद रहा हूँ। जब से तुमने मुझे अपना ये संगमरमर बदन सौंपा है। तब से आज तक मैंने तुम्हारे अलावा किसी और की तरफ देखा तक नहीं।
मम्मी: अच्छा। और देखने की हिम्मत भी नहीं करना।
अंकल: कान पकड़। जो हुक्म रानी साहिबा। अब और कोई हुक्म इस गुलाम के लिए। अंकल के इस तरह प्यार जताने पर मेरी मम्मी खुद अपने आप को रोक नहीं पाईं। और उनकी आँखों में देखते हुए आँखों से ही इशारे से उनको प्यार करने के लिए कहने लगीं।
मेरी मम्मी अपनी बाँहें फिर से अंकल के गले में डाल कर। अब जल्दी से कर लीजिए जो करना है। तो अंकल फिर से अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए। और मेरी मम्मी के होठों को चूमने लगे। जबकि उनका खड़ा लंड मेरी मम्मी को अपनी चूत पे महसूस हो रहा था।
अंकल मेरी मम्मी की कमर में अपना हाथ डाले मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर मेरी मम्मी के होठों पर लगी लिपस्टिक को चूसने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी अपना हाथ नीचे करके उनके खड़े लंड पर रख दिया। और उनके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगीं। योगेश जी। आपका ये घोड़ा तो एकदम से तैयार है। कैसे खड़ा है ये। कैसे आजाद होने के छटपटा रहा है।
अंकल: मेरी जान। अब इसकी लगाम तो तुम्हारे ही हाथ में है। तुम ही जो इसको कैद से आजाद कर सकती हो। वैसे मेरी जान। नामर्दों के लंड ही खड़े नहीं होते। और मर्दों के हर समय ऐसे ही ऐसे खड़े रहते हैं। जैसे कोई जंग में जाने के लिए योद्धा।
मम्मी: जैसे मेरा वो नामर्द पति। उसका पिछले 19 साल से खड़ा ही नहीं हुआ। और एक आप हैं। जिनका हर समय खड़ा रहता है। योगेश जी कितनी एनर्जी है आप में।
अंकल: मेरी जान। मेरी एनर्जी का कारण भी तो तुम ही हो। जानती हो ना। जब से मैंने तुम्हारा एनर्जी ड्रिंक पीना शुरू किया है। अंदर से एक अलग ही चुस्ती सी आ गई है। बस यार। तुम इसी तरह मुझे एनर्जी ड्रिंक पिलाती रहना। बोलो पिलाओगी ना।
मम्मी: शर्म से। क्या योगेश जी आप भी। आपको क्या। मैंने कभी मना किया है। और अब आप ज्यादा बातें मत करिए। जो करना है जल्दी से कर लीजिए। वो नामर्द घर पर ही है। और अब मेरे अंदर भी आग लग रही है।
अंकल: कहाँ।
मम्मी: नीचे। जहाँ आपका घोड़ा घुसेगा। अब मैं चाहती हूँ आप मुझे जल्दी से मेरी रानी को चोद डालिए।
अंकल: मेरी मम्मी की बात सुन अंकल मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ कर मेरी मम्मी की साड़ी खोलने लगे। मेरी मम्मी अपनी साड़ी खोलने में अपने यार की मदद भी कर रही थीं। साथ ही उनको रोकने की कोशिश भी।
मम्मी: योगेश जी साड़ी मत खोलिए ना। उठा कर लीजिए ना। लेकिन अंकल कहाँ मेरी मम्मी की बात सुनते थे। मेरी मम्मी की साड़ी निकाल कर उन्होंने फेंक दी। और मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा पकड़ कर मेरी मम्मी का पेटीकोट खोलने लगे।
मम्मी: मैं उठा देती हूँ। आप पैंटी नीचे करके कर लीजिए।
अंकल: यार कुछ नहीं होगा। तुम जानती हो ना। मुझे मजा तभी आता है जब तुम एकदम नंगी मेरे साथ हो।
मम्मी: क्या योगेश जी आप भी ना। रात को करते हैं ना। मैं रोकती हूँ क्या आपको।
अंकल ने मेरी मम्मी की कोई भी बात को नहीं सुना। और मेरी मम्मी को ले कर बिस्तर पर लेट गए। और मेरी मम्मी के गालों मेरी मम्मी की गर्दन और मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर मेरी मम्मी की क्लीवेज को चूमने लगे। वो जानते थे ये मेरी मम्मी की कमजोरी है। और यही करते उन्होंने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींच कर खोल दिया।
मम्मी: आह... योगेश जी बस कीजिए ना। आह... क्यों तड़पा रहे हैं। डाल दीजिए ना अंदर। लेकिन अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से मेरी मम्मी की चुचियों को मसल रहे थे।
मम्मी: धीरे मसलिए। आप जानते हैं कितनी बड़ी हो गई हैं। मेरा बेटा क्या सोचेगा। मेरी चुचियाँ देखकर। मम्मी की चुचियाँ कितनी बड़ी हो गई हैं। पापा तो मम्मी की चुचियाँ चूसते नहीं हैं। तो कैसे हो गईं।
अंकल: मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोल कर मेरी मम्मी के ब्लाउज को निकाल कर नीचे फेंक दिया।
अंकल: मेरी रानी। तेरी ये चुचियाँ नहीं। ये तो रसीले आम हैं। और अंकुश ने खुद बोला है। मेरे पापा मेरी मम्मी की चुचियों को हाथ भी नहीं लगाते हैं। इसलिए आप उन्हें बड़ी कर दो। इसलिए उन्हें बड़ी कर रहा हूँ। और मेरी मम्मी के निप्पल को ब्रा के साथ ही मुँह में भर कर आम की तरह चूसने लगे। मेरी मम्मी की ब्रा अंकल के थूक से पूरी तरह से गीली हो गई। और फिर अंकल ने मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को ब्रा से बाहर निकाल दिया। और निप्पल को अपनी जीभ निकाल कर छेड़ने लगे। और फिर मेरी मम्मी की चुची को ऐसे मुँह में भर लिया। जैसे दुशेरी आम का रस चूस रहे हों।



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