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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#55
update 49

अब मेरी मम्मी की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। जिससे अंकल का लंड अब आसानी से मेरी मम्मी की चूत में जड़ तक बिना किसी रुकावट के आ जा रहा था। और अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े। मेरी मम्मी के दोनों पैरों को और फैला दिया। और लंड को फिर बाहर निकाल कर हल्के से स्मूथली मेरी मम्मी की चूत के अंदर एक रिदम के साथ डालने लगे। अंकल ने एक रिदम के साथ मेरी मम्मी की चूत के ऊपर धक्के मारना शुरू कर दिए।

और धीरे धीरे मेरी मम्मी को चोदने लगे। मेरी मम्मी को भी अब अच्छा लगने लगा था। मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें अंकल के गले में डाल कर उन्हें अपनी बाँहों में कस लिया। जबकि मेरी मम्मी के मुँह से सिसकियाँ बराबर निकल रही थीं।

उधर पापा मम्मी के रूम में पापा अकेले थे। जो कि लैपटॉप में काम कर रहे थे ऑफिस का। उनको क्या पता उनकी बीवी उनके बेटे के रूम में अपने यार से चुदाई करवा रही है। वो भी अपने बेटे की ही मदद से। बेटे के रूम के अंदर उन्होंने एक रूम बनवाया। उसी में उनकी बीवी उसके यार से चुदाई करवा रही है। खुद उनका बेटा उनकी पत्नी को पड़ोसी से चुदवा रहा है। और उनकी बीवी नंगी होकर अपनी रंगें खोलकर अपने यार के लंड से चुद रही है। लेकिन इन सब से मेरे नामर्द पापा अनजान थे। क्योंकि उन्हें लग रहा होगा उनकी बीवी उनके बेटे के साथ सो रही है। माँ बेटे सो रहे हैं।

लेकिन पापा को महसूस हुआ होगा या वो बाहर हॉल में आए होंगे। तो उन्हें लगा होगा मैं जाग रहा हूँ। हो सकता है मेरे रूम की लाइट जल रही थी। इसलिए उन्हें लगा होगा मैं जाग रहा हूँ। और रात के 11 बजने वाले थे। तो पापा ने मेरे रूम का गेट खटखटाया। तो गेट के खटखट से अंदर रूम में मेरी मम्मी और अंकल की कामवासना में विघ्न हुआ। और मेरी मम्मी और अंकल दोनों की हालत टाइट हो गई। क्योंकि वो जानते थे कि ये मेरे पापा ने ही खटखटाया है। तो निश्चित रूप से मम्मी या मुझे जवाब देना जरूरी था। लेकिन मम्मी की तो डर से हवा टाइट थी। बेचारी वो तो कुछ बोल नहीं सकती थीं। और ना ही गेट खोल सकती थीं। क्योंकि वो तो नंगी अपने यार के लंड के नीचे थीं। और उन्हें कपड़े पहनने में समय लगता। तो अब बोलने की बारी मेरी थी। तो मैंने ही हिम्मत करके कहा। कौन।

पापा: बेटा मैं हूँ।

तो मम्मी पापा की आवाज सुनकर और ज्यादा डर गईं।

इस समय अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे। और उनका मूसल लंड अभी भी मेरी मम्मी की चूत में ही फँसा हुआ था। मेरी मम्मी अपनी गाँड को पीछे खींचती हुई उनके लंड को निकालने की कोशिश करने लगीं। पर अंकल अपने लंड को निकालने नहीं दे रहे थे। और फिर से मेरी मम्मी की चूत के जूस से गीले लंड को एक धक्का मार मेरी मम्मी की चूत के अंदर डाल दिया। मेरी मम्मी ने उन्हें आँखों के इशारे से अपने ऊपर से उठाने का इशारा किया। लेकिन अंकल इशारे से मेरी मम्मी को चुप करा कर मेरी मम्मी के ऊपर ही चढ़े रहे।

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े धीरे धीरे अपनी कमर को चला कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर कर रहे थे। मैं ये लाइव देख रहा था मोबाइल में। और पापा बाहर खड़े थे।

पापा की फिर से आवाज आई। बेटा अंकुश। मैं हूँ। तेरा पापा।

मैं अब भी कुछ नहीं बोला। तो पापा ने फिर से कहा। बेटा अंकुश जवाब दे। तुम लोग सोने ठीक हो ना।

मैं: हाँ। क्यों पापा।

पापा: मुझे लगा तुम लोग सोए नहीं।

मैं: ऐसा कुछ नहीं है पापा। मम्मी तो कब की सो गईं।

पापा: बेटा वर्षा को तो लाइट में नींद नहीं आती है। तो वो कैसे सो गईं। तेरे रूम की तो लाइट जली हुई है।

मैं: पापा मम्मी तो सो गईं। शायद वो आज दिन में आंटी के साथ मार्केट गई थीं। इसलिए थकान हो गई होगी। इसलिए लाइट में ही सो गईं।

पापा: ठीक है। लेकिन तू क्यों नहीं सोया अभी तक।

मैं: पापा मैं स्टडी कर रहा हूँ।

पापा: बेटा 11 बजने वाले हैं। अब सो जा।

मैं: पापा अभी थोड़ी देर में सोता हूँ।

पापा: ओके बेटा। और हाँ सुबह 11 बजे तक उठूँगा। थोड़ी तबियत खराब है। इसलिए।

मैं: पापा आपने तो कहा था 10 बजे तक।

पापा: बेटा अब बोल रहा हूँ 11 तक।

मैं: ओके पापा।

फिर पापा चले गए वापस।

फिर मैंने वापस मोबाइल में देखने लगा। अंदर अंकल लगातार अपनी कमर चलाकर मेरी नाजुक फूल जैसी मम्मी की चूत में नॉन स्टॉप धक्के मार रहे थे। मेरी मम्मी तो बाहर दरवाजे पर पापा के आने से ही पसीने पसीने हो गई थीं। जबकि अंकल बिना रुके मम्मी को चोदे जा रहे थे। पापा से बात कर रहा था तब भी अंकल मम्मी को चोद रहे थे। जबकि मेरी मम्मी अंकल के नीचे पड़ी डर के मारे एकदम से ठंडी हो गई थीं। मम्मी को उसी पोजीशन में चोदते हुए 40 मिनट से ज्यादा हो गया था। अब तो पापा को गए हुए भी लगभग 30 मिनट से ज्यादा हो गया। तो मम्मी अंकल से बोलीं। चुदाई का मजा भी ले रही थीं। और डर भी। दोनों साथ साथ।

और मम्मी को चुदाई का मजा और डर दोनों साथ में मिल रहा था।

मेरी मम्मी: योगेश जी जल्दी कर लीजिए ना। आप कहीं वो आ न जाएँ।

अंकल: यार कर तो रहा हूँ। तुम भी ना। बस लेटी रहो। नहीं आएगा वो। उसे अंकुश ने वापस भेज दिया है।

मम्मी: पता नहीं आज आपका हो ही नहीं रहा। मेरा तो हो चुका है।

मेरी मम्मी भी नीचे से अपने चूतड़ों को तेज तेज उठाने लगी थीं। कि ताकि अंकल का जल्दी से निकल जाए।

अंकल का चेहरा उस समय काफी टेंस्ड था। जिससे उनका लंड और फूल गया था। जिससे वो और जोर जोर से धक्के मेरी मम्मी की चूत में मार रहे थे। उनका लंड अब मेरी मम्मी की चूत में बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था।

मम्मी: योगेश जी अब उसकी आवाज फिर से नहीं आई। लगता है वो नामर्द चला गया है।

अंकल: जाएगा क्यों नहीं। उसका बेटा उससे बोल रहा है। पापा आप जाओ। तो जाएगा ही ना। और उसे क्या पता उसका बेटा ही उसकी बीवी को मेरे से चुड़वा रहा है। और उसका बेटा ही उसकी मम्मी की चुदाई की बाहर वाले में पहरेदारी कर रहा है।

मेरी मम्मी: मुस्कुराते हुए अंकल की आँखों में देखते हुए। सिर्फ पहरेदारी कर रहा है या कंडोम भी लाकर दे रहा है। और मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें अंकल के गले में डाल कर खुद ही उनको चूमने लगीं।

अंकल अब अपना पूरा लंड एक ही झटके में मेरी मम्मी की चूत से निकालते। और फिर उसे जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में पहुँचा देते। अब तो मेरी मम्मी नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर अपने यार का साथ देने लगी थीं।

मेरी मम्मी: आह... योगेश जी धीरे धीरे। आह... आज आपको क्या हो गया। आपका हो नहीं रहा। उई माँ। बस कीजिए। मेरा 2 बार हो चुका है। आज आपने क्या खाया है। बस कीजिए। आह...

और मेरी मम्मी ने अंकल को रुकने को कहा। तो अंकल बोले।

अंकल: यार अब क्या हुआ।

मेरी मम्मी: मेरी मम्मी मुस्कुरा कर बोलीं। कुछ नहीं। वो आप दूसरी तरह से कीजिए ना। और मुस्कुराने लगीं। तो अंकल मुस्कुराते मेरी मम्मी के ऊपर से उठे।

मेरी मम्मी अपने दोनों हाथ आगे करके अंकल के सामने घोड़ी की तरह हो गईं। और अपनी गाँड को थोड़ा सा ऊपर की ओर उठा लिया। मेरी मम्मी के मस्त चूतड़ देख कर अंकल जो मेरी मम्मी के चूतड़ों को प्यार से सहलाने लगे।

अंकल: वर्षा तेरे चूतड़ कितने मस्त हैं। आज तो तेरी गाँड।

मम्मी: नहीं नहीं। और फिर वापस से लेट गईं।

अंकल: क्या हुआ वर्षा। घोड़ी बनो।

मम्मी: नहीं। मेरा दिल धकाने लगा कि कहीं आप मेरे पीछे वाले दरवाजे का उद्घाटन आज ही न कर डालें।

अंकल: वर्षा क्यों। क्या प्रॉब्लम है।

मम्मी: मुझे मेरी गाँड का उद्घाटन करवाने में कोई आपत्ति नहीं। क्योंकि मैं जानती हूँ आज नहीं तो कल मेरे इस छेद का भी आप जरूर इस्तेमाल करेंगे। और आपका मेरे पूरे बदन पर अधिकार है। लेकिन मैं अभी आपसे गाँड नहीं मरवाना चाहती।

अंकल: तो कब देगी मुझे अपनी गाँड।

मम्मी: प्लीज। मैं खुद आपको अपनी गाँड दूँगी। जब मुझे लगेगा तब। पर प्लीज आप कभी मत बोलना। मैं खुद दे दूँगी।

अंकल: ओके। अब घोड़ी बन।

तो मेरी मम्मी घोड़ी बन गईं। और बोलीं। अब डालिए।

तो अंकल ने भी मेरी मम्मी की कमर को पकड़ कर फिर से मोर्चा संभाल लिया। और अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत पर सेट करके धक्के मारने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा।

मेरी मम्मी: योगेश जी आराम से करना।

अंकल: यार आराम से करने में क्या मजा। और एक धक्का मारा। मेरी मम्मी की चूत के रस से मेरी मम्मी की चूत पहले ही काफी चिकनी हो चुकी थी। सो उनको एक ही धक्के में अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में जड़ तक घुसा दिया। और मेरी मम्मी की कमर को पकड़ कर मेरी मम्मी की तबादतोड़ चुदाई फिर से शुरू कर दी।

अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में मेरी मम्मी के अंदर की चिकनाई की वजह से बिना किसी रुकावट के अंदर आ जा रहा था। अंकल ने अपने हाथ जो मेरी मम्मी की कमर पर थे। उनको मेरी मम्मी की कमर से हटा कर मेरी मम्मी के लटक रहे संतरों को अपने हाथों में ऐसे थाम लिया। जैसा कोई घुड़सवार किसी घोड़ी पर चढ़े उसकी लगाम को थाम लेता है। और अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़े जोर से मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मारने लगे।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 09:19 PM



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