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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#54

update 48

अंकल मेरी मम्मी के होठों गालों को चूम रहे थे। और उन्होंने अपना हाथ नीचे मेरी मम्मी की चुचियों की ओर बढ़ा कर मेरी मम्मी की चुचियों पर से मेरी मम्मी की साड़ी के पल्लू को हटा दिया।

अब मेरी मम्मी के ब्लाउज में कैद चुचियाँ जो किसी पहाड़ की तरह खड़ी थीं। वो अंकल के सामने बेपर्दा हो गईं। मेरी मम्मी की चुचियाँ वैसे ही अंकल को बहुत पसंद थीं। और मेरी मम्मी की चुचियों को इस हाल में इतने करीब से देख कर अंकल अपना मुँह मेरी मम्मी के ब्लाउज से बाहर निकल रही आधी चुचियों पर रख कर उनको चूमने लगे। तो मेरी मम्मी को इतनी गुदगुदी होने लगी। तो मेरी मम्मी बोलीं।

मम्मी: योगेश जी प्लीज ऐसा मत कीजिए। गुदगुदी होती है। आह... मेरी साँसें तेज तेज चलने लगीं। जिससे मेरी चुचियाँ बड़ी तेजी से ऊपर नीचे होने लगी थीं।

मेरी मम्मी की चुचियों के इस तरह के नजारे देखने के बाद अंकल अपना आपा खो गए। और मेरी मम्मी की क्लीवेज पर अपने होठ रख कर चूमने चाटने लगे। और साथ ही अपना एक हाथ नीचे ले कर मेरी मम्मी के पेट से होते हुए मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ पर ले गए। और मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ को खींच कर बाहर निकाल दिया।

मेरी मम्मी की साड़ी खुल गई। तो अंकल मेरी मम्मी की साड़ी को मेरी मम्मी के बदन से निकालने की कोशिश करने लगे। तो मेरी मम्मी ने भी अपने नाजुक बदन को थोड़ा ऊपर की ओर उठा लिया। ताकि अंकल को मेरी मम्मी के बदन से साड़ी निकालने में आसानी हो। और अंकल मेरी मम्मी की साड़ी को निकाल कर मेरी मम्मी के बदन से अलग कर दी। और उसको वहीं जमीन पर हमेशा की तरह फेंकने लगे। तो मेरी मम्मी ने उनको रोका। और कहा।

मम्मी: योगेश जी ये क्या कर रहे। आप ना इधर उधर फेंक देते हो। अगर वो कहीं अंदर आ गया तो कहाँ इसको ढूँढती फिरूँगी।

अंकल: यार तुम डरती बहुत हो। गेट लगा हुआ है। और उसी ने बोला जमकर चोदना मम्मी को। फिर भी डर रही हो। ये लो तुम्हारी साड़ी।

तो मेरी मम्मी ने अंकल से अपनी साड़ी ली। और बेड के साइड पर ही रख दी।

मेरी मम्मी बिस्तर पर अपनी चुचियाँ उठाए लेटी थीं। और अंकल मेरी मम्मी पर चढ़े। मेरी मम्मी को प्यार से चूम चाट रहे थे। मेरी मम्मी से अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। मेरी मम्मी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थीं। मेरी मम्मी का भी अब दिल करने लगा था कि अंकल अब जल्द से जल्द उनकी चुदाई करें।

मेरी मम्मी: योगेश जी अब करिए। नहीं कहीं ऐसा न हो वो आ जाए। और सब बीच में ही रह जाए।

अंकल: अंकुश नहीं आएगा। उसको पता है तुम चुद रही हो।

मम्मी: मैं अंकुश की बात नहीं कर रही हूँ।

अंकल: तो फिर कौन मादरचोद आएगा।

मम्मी: वही मादरचोद जिसकी बीवी के ऊपर आप चढ़े हो। मेरा नामर्द पति।

अंकल: उसे अंकुश रोक लेगा। वैसे भी अंकुश ने उसके रूम की कुंडी लगा दी है।

मम्मी: आप उसके रूम की कुंडी खुलवा दो। नहीं तो उसे शक हो जाएगा।

अंकल: कुंडी खुलवा दी तो कहीं वो यहाँ न आ जाए।

मम्मी: आप कुंडी खुलवा दो। वो आएगा तो पहले बाहर वाले रूम में अंकुश से मिलेगा। और अंकुश उसको रोक लेगा।

अंकल: ठीक है। अंकुश को बोलता हूँ।

फिर अंकल मम्मी के ऊपर से उठे। और बाहर गेट खोलकर आए। मम्मी वैसे ही लेटी रहीं। और अंकल मेरे पास आकर बोले। बेटा तेरे नामर्द बाप के रूम की कुंडी खोल आ।

मैं: क्यों अंकल।

अंकल: बेटा उसे शक हो जाएगा। कुंडी लगी रहेगी तो।

मैं: अंकल कुंडी खोल दी। वो कहीं रात को यहाँ आ गए तो।

अंकल: उसे तू संभाल लेना। तू बाहर वाले रूम में है। और हम अंदर वाले में। पहले वो इस रूम में आएगा। फिर अंदर वाले में। अब सब कुछ तुझे ही संभालना होगा।

मैं: ओके अंकल।

अंदर से मम्मी की आवाज आती है।

मम्मी: अंकुश बेटा।

मैं: जी मम्मी।

मम्मी: बेटा ध्यान रखना। तेरी मम्मी तेरे कहने से कंप्यूटर सीख रही है। कहीं तेरे पापा को।

मैं: मम्मी आप मुझ पर भरोसा रखो। और मैं जाकर पापा के रूम की कुंडी खोल आया बाहर से। फिर अंकल को मैंने बोला। तो अंकल अंदर गए। लेकिन इस बार उन्होंने गेट को पूरा खुला छोड़ दिया। सिर्फ पर्दा लगा था।

मम्मी वैसे ही लेटी थीं। अंकल वापस जाकर मम्मी के ऊपर लेटे। तो मम्मी।

मम्मी: गेट बंद करो।

अंकल: नहीं। वो समझदार है। वो नहीं आएगा।

मम्मी: प्लीज। मुझे शर्म आएगी।

अंकल: नहीं। पर्दा लगा है। और मम्मी को वापस से चूमने लगे।

अंकल: वर्षा कितनी नमकीन हो तुम। और अंकल के होठ मेरी मम्मी के गालों को। और हाथ मेरी मम्मी की चुचियों को मसल रहे थे।

मम्मी: योगेश जी। इन से खेलते ही रहेंगे। या इनको चूसोगे भी। पता है दिन में आपने चोदा। तब तो मेरा नामर्द पति आ गया था। तो मजा अधूरा रह गया था। तब से मैं तड़प रही हूँ। और मैंने आपको फोन भी किया। तो आपने कहा रात को आऊँगा। तब से ही आपके इंतजार में तड़प रही हैं मेरी चुचियाँ। और पता है आपके इंतजार में तड़प तड़प कर बड़ी हो गई हैं। और आपको आए एक घंटा होने वाला है। और आपने एक बार भी उनको नहीं चूसा है।

अंकल: हाँ मेरी जान। और।

फिर अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक को खोलने लगे। मेरी मम्मी उनको हुक खोलते देख मुस्कुराने लगीं। और उन्होंने मेरी मम्मी के ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए। तो मेरी मम्मी का ब्लाउज आगे से दो हिस्सों में बँट गया। तो मेरी मम्मी ने भी अपने ब्लाउज को हिस्सों में पकड़ कर साइड में कर दिया।

ब्रा में कैद मेरी मम्मी की चुचियाँ किसी कैद किए कबूतरों की तरह फड़फड़ाने लगी थीं। और बाहर आने को मचलने लगीं। और जब अंकल मेरी मम्मी के ब्लाउज को मेरी मम्मी के हाथों से बाहर निकालने लगे। तो मम्मी ने कहा।

मम्मी: योगेश जी ऐसे ही रहने दीजिए।

लेकिन अंकल तो मेरी मम्मी को नंगी करने पर आमादा थे। उन्होंने अपने हाथ से मेरी मम्मी के ब्लाउज को निकाल कर वहीं मेरी मम्मी की साड़ी के पास रख दिया। अंकल को और तड़पने के लिए मेरी मम्मी ने अपने हाथों को अपनी चुचियों पर रख लिया। और बोलीं।

मम्मी: ऐसे क्या देख रहे हैं। क्या आज पहली बार इनको देख रहे हैं।

तो अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और ब्रा के ऊपर से ही मेरी मम्मी की चुचियों को मसलने लगे।

मेरी मम्मी भी मदहोश होने लगी थीं। और मेरी मम्मी मुँह से आह... आह... करने लगी थीं। मेरी मम्मी जानती थीं कि अंकल अब किसी भी वक्त उनके (मेरी मम्मी के) इन संतरों को ब्रा की कैद से आजाद कर देंगे।

(चूत को चोदना लंड का फर्ज है। लेकिन चूत की परमिशन से। जबरदस्ती नहीं। चुदाई जरूरी है। लेकिन किसी को भी चोदो उसकी परमिशन से। लेकिन जबरदस्ती नहीं करना चाहिए।

दोस्तों ये नेचुरल है। चूत चुदने के लिए। और लंड चोदने के लिए होता है। तो दोस्तों जब हमारी बहन या पत्नी या भाभी या मम्मी या चाची या वो किसी और से अपने पति के अलावा किसी और से चुदना चाहे तो उसे चुदने दीजिए। रोकिए मत। लेकिन कंडोम लगाकर। क्योंकि कोई इंफेक्शन न हो। इसलिए कंडोम जरूरी है। और चुदाई भी।)

अंकल मेरी मम्मी की ब्रा के हुक को खोलने लगे। तो मेरी मम्मी ने कहा। योगेश जी अब इसको तो मत खोलिए। ऐसे ही बाहर निकाल लीजिए ना।

तो अंकल ने मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खोलते ही मेरी मम्मी की ब्रा को भी खींच कर मेरी मम्मी के बदन से अलग कर दिया। अंकल कितनी बार मेरी मम्मी की चुचियों को इस हालत में देख चुके। चूस चुके थे। लेकिन पता नहीं आज मेरी मम्मी को क्या हुआ। मेरी मम्मी ने उनके इस तरह अपनी चुचियों को देखने के साथ ही अपनी चुचियों को अपने हाथों से ढक लिया।

अंकल: यार ये क्या कर रही हो। क्यों इन पर जुल्म कर रही हो। देखने दो ना। और अपने हाथों को मेरी मम्मी के हाथों के ऊपर रख कर मेरी मम्मी के हाथों को हटा दिया। अब मेरी मम्मी ऊपर से पूरी नंगी थीं। और तानी चुचियाँ अंकल की आँखों के सामने थीं।

मेरी मम्मी: मम्मी अंकल की आँखों में देख कर मुस्कुरा कर। ऐसे क्या देख रहे हैं। क्या आज पहली बार देख रहे हैं।

अंकल: जान कितनी खूबसूरत और मस्त हैं तुम्हारे ये रसीले आम। क्या तुम इसी लिए अपने इन आमों को मुझसे छुपा कर रखती हो।

मम्मी: योगेश जी आप से नहीं बल्कि दुनिया से। आपको इनके मालिक हैं। इनको चूसने का हक सिर्फ और सिर्फ आपको ही है। और पिछले 6 महीनों से आपको ही चूसवा रही हूँ।

मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल ने अपना एक हाथ बढ़ा कर मेरी मम्मी की तानी हुई चुची पर रख दिया। और उसको मसलने लगे। हाय तेरी चुचियाँ कितनी टाइट हैं। तुम्हारी कितनी रसीली चुचियाँ हैं। कितना रस भरा हुआ है इन दोनों चुचियों में। और मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर नींबू की तरह मसलने लगे।

मेरी मम्मी भी अपना कंट्रोल खोने लगी थीं।

मम्मी: योगेश जी इनको चूसिए ना। जब आप चूसते हैं तो कितना मजा आता है। और अपनी एक चुची को पकड़ कर अपने यार के मुँह की ओर ठेलने लगीं। तो अंकल ने अपना मुँह मेरी मम्मी की चुची पर रख दिया। वो मेरी मम्मी की एक चुची को चूसने लगे। और दूसरी चुची को अपने हाथ से मसलने लगे।

मम्मी: सिसकते हुए। योगेश जी कितना मजा आता है। जब आप मेरे इन दूध को चूसते हैं। हाय आज शाम से आपने इनको एक बार भी प्यार नहीं किया। मैंने आपकी फोन भी की थी। आप नहीं आए। दिन में उस मादरचोद नपुंसक नामर्द ने मजा अधूरा छुड़वा दिया था।

अंकल: मेरी रानी। ये मैं ही जानता हूँ कि कैसे मैंने शाम से ही तुम्हारे इन दुधेरों आमों का रस चखने के लिए अपने आप को रोका है। मैं नहीं चाहता था तुम्हारे ऊपर वो नामर्द शक करे। इसलिए नहीं आया था। और दिन में उसी नामर्द की वजह से मजा अधूरा रह गया था।

मम्मी: योगेश जी। अब तो कोई नहीं रोक रहा इनको चूसने में। तो जी भर इन आमों का रस चूसिए। योगेश जी वैसे ही चूसिए जैसे रोज चूसते हैं। पूरा मुँह में भर कर खींचिए।

और अंकल मेरी मम्मी की पूरी चुची को जितना मुँह में हो सकता भरते। और खींचते। सच उस समय मेरी मम्मी के मुँह से इतनी सिसकियाँ निकलतीं। मैं बता नहीं सकता। ये तो मैं जानता हूँ। मेरी मम्मी ने मेरे बाहर वाले रूम में होने की वजह से कंट्रोल किया। क्योंकि गेट खुला था। सिर्फ पर्दा लगा था। नहीं तो मेरी मम्मी अपनी आहें आह की आवाजों से पूरा कमरा सिर पर उठा लेतीं।

मम्मी: योगेश जी दोनों को एक साथ चूसिए ना। मैं दबाती हूँ। और मेरी मम्मी ने अपनी चुचियों को कस कर दबा लिया। और अंकल मेरी मम्मी के दोनों निप्पल को एक साथ अपनी जीभ से छेड़ते। मेरी मम्मी की चूत नीचे समुंदर बहा रही थी। मेरी मम्मी से रहा नहीं गया। तो मम्मी ने कहा।

मम्मी: योगेश जी अब और मत तड़पाइए। आ जाएगी ना। बस और बर्दाश्त नहीं होता।

तो अंकल अपने हाथ को नीचे की ओर ले गए। और मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े को पकड़ कर उसको खींचने लगे।

मेरी मम्मी ने उनका हाथ पकड़ लिया। और बोलीं। योगेश जी ये क्या कर रहे। इससे क्यों खोल रहे हो।

अंकल: यार क्या हुआ। अगर इससे नहीं खोलूँगा तो फिर कैसे होगा।

मेरी मम्मी: करने के लिए इसको खोलने की क्या जरूरत है। आप इसको मत खोलिए। कहीं वो आ गया तो। आप तो करना ही है। तो मेरे पेटीकोट को उठा कर जल्दी से कर लीजिए।

अंकल: जान तुम तो जानती हो। ऐसे मजा नहीं आता। जब तक तुम्हें पूरी नंगी करके न लूँ। तो कहाँ मजा आएगा। यार मजा तो नंगी करके ही लेने में आता है। जब मेरा पूरा बदन तुम्हारे बदन से टकराता है। और अंकुश है। वो सब संभाल लेगा।

मम्मी: मैं जानती हूँ। आप मुझे नंगी किए बिना नहीं मानेंगे।

अंकल: हाँ जान। अब हाथ हटाओ।

तो मम्मी।

मम्मी: हटाती हूँ। और मेरी मम्मी ने अपना हाथ हटाते हुए मुस्कुरा कर कहा। आपको पूरा मजा चाहिए। जरा भी कोऑपरेट नहीं करते आप तो।

मेरी मम्मी का हाथ हटते ही अंकल ने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींचने लगे। पर वो नहीं खुल रहा था। तो वो थोड़ा झुंझला कर बोले। अरे यार इतनी टाइट क्यों बाँधती हो। तो मेरी मम्मी ने भी कहा। मैं कहाँ नाड़ा इतना टाइट बाँधती हूँ। आप भी तो रोज खोलते हैं। पता नहीं आज थोड़ा कस कर बाँध गया।

अंकल: क्या अंकुश को बुलाऊँ।

मम्मी: उसे क्यों बुला रहे हो।

अंकल: तुम्हारे पेटीकोट का नाड़ा खोलने के लिए।

मम्मी: वो पूछेगा क्यों खुलवा रहे हो मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा। तो क्या बोलोगे।

अंकल: यही कि तेरी मम्मी चुदवाने के लिए तड़प रही है। और नाड़ा नहीं खुल रहा है।

मम्मी: आपकी इतनी हिम्मत। जरा बुलाकर दिखाओ। मैं भी तो देखूँ आप कैसे बुलाते हो।

अंकल: मुझे जोर से आवाज दी। अंकुश बेटा।

मम्मी: नहीं रुकिए।

मैं: जी अंकल। बाहर वाले रूम से। क्या हुआ अंकल।

मम्मी: कुछ नहीं बेटा। ये तो वैसे ही बोल रहे हैं। और मम्मी अपने कान पकड़ के सॉरी बोलने लगीं। तो अंकल।

अंकल: कुछ नहीं बेटा। मैं ये पूछ रहा था। तू कब तक सोएगा।

मैं: अंकल बस सोने ही वाला हूँ।

मम्मी: अब सो जा बेटा।

मैं: ओके मम्मी।

फिर मम्मी धीमी आवाज में। क्या मरवाओगे मुझे।

अंकल: तूने ही तो कहा अंकुश को बुलाने के लिए।

मम्मी: आप पिटोगे।

अंकल: पिट लेना। पर पहले तेरी चूत फाड़ने दे। और अंकल मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा जोर से खींचने लगे। तो

मम्मी: योगेश जी रुकिए। आप तो इसको तोड़ ही देंगे। पता नहीं रात में कैसे फिर इस पेटीकोट में मैं नाड़ा डालती रहूँगी। और मेरी मम्मी ने खुद अपना पेटीकोट खोलने में अंकल की मदद की। और पेटीकोट का नाड़ा खुल गया। अंकल मेरी मम्मी के पेटीकोट को मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकालने लगे। मेरी मम्मी का पेटीकोट नीचे मेरी मम्मी के चूतड़ों में फँसा हुआ था। तो अंकल ने कहा। वर्षा अब तेरी गाँड को उठा। मुझे उसे बाहर निकालना है।

मम्मी: तो मैंने कब मना किया है। निकाल दो।

अंकल: तेरे चूतड़ के नीचे दबा है। अब थोड़ी गाँड ऊपर उठा।

फिर मम्मी ने अपने चूतड़ धीरे धीरे ऊपर उठाए। तो अंकल ने मेरी मम्मी का पेटीकोट मेरी मम्मी के टाँगों से निकाल कर नीचे जमीन पर फेंकने लगे। तो मेरी मम्मी बोलीं।

मम्मी: मैंने आप से कहा है। इधर उधर मत फेंकिए। कहीं वो आ गया तो मैं ढूँढती फिरूँगी।

अंकल: तू किससे डर रही है।

मम्मी: उस नामर्द से।

अंकल: बाहर अंकुश बैठा है। डरने की जरूरत नहीं है। और अंकल अपने कपड़े उतारने लगे। और नंगे हो गए। और मेरी मम्मी के साथ ही आकर लेट गए।

और मेरी मम्मी के होठों को चूमते अपने हाथ को नीचे मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर मेरी मम्मी की चूत पर रख दिया। मेरी मम्मी की पैंटी उस समय मेरी मम्मी की चूत के रस से एकदम गीली हो चुकी थी। और अंकल अपने हाथ से मेरी मम्मी की चूत को सहलाते बोले।

अंकल: वर्षा क्या बात। आज बहुत पानी छोड़ रही है तेरी चूत।

मम्मी: योगेश जी आप ऐसे ही मेरे पूरे बदन को छेड़ोगे तो क्या पानी नहीं छोड़ूँगी। पता है आज दिन में वो नामर्द आ गया। तो इसकी प्यास नहीं बुझ पाई थी। और तभी से ये तड़प रही है। पिछले 10 दिनों से ये लगातार आपके लंड से चुद रही है। और आपसे दूर नहीं रही है। और 10 दिन आज ही ऐसा दिन आया है। जब ये आपसे 6 घंटे से भी ज्यादा दूर रही है। पिछले 10 दिन मेरी चूत आपके लंड से चिपकी हुई है। सोते समय भी आपके लंड को अपने अंदर तो नहीं। लेकिन बाहर से चिपक कर सोती है। लेकिन आज 6 घंटे आपसे दूर रही है।

अंकल: 6 घंटों में इसका ये हाल हो गया। तो अब तो तेरा नामर्द पति वापस आ गया है। तो अब कैसे रहेगी मेरे लंड के बिना।

मम्मी: आप अंकुश से कहना। और इसी रूम में आप मुझे दिन रात चोदना। अंकुश मुझे इस रूम में बुला लेगा। और आपको छिपा देगा। आप अंकुश से बात करना। अब मेरी चूत आपके लंड के बिना नहीं रह पाएगी।

अंकल: ऐसी बात है मेरी जान। लो मैं अभी अपनी रानी को प्यार करता। और नीचे मेरी मम्मी की जाँघों पर झुक कर मेरी मम्मी की जाँघों को चाटने लगे।

तो

मम्मी: योगेश जी ये क्या कर रहे हैं। अब ऐसे क्यों चाट रहे हैं। जल्दी से अपना मेरे अंदर डाल दीजिए ना।

अंकल: यार तुम्हें पता है कि मुझे तुम्हारी चूत चाटने में कितना मजा मिलता है। जानती हो ना। जब मैं तुम्हारा रस पीता हूँ ना। कितनी एनर्जी मिलती है मुझे। मेरी जान ये तुम्हारा जो रस है। एनर्जी टॉनिक है मेरे लिए। इससे पी कर तो मेरे अंदर एक नया जोश भर जाता है। जब से मेरी जान तुम्हारे इस अमृत को पीना शुरू किया है ना। अपने आप को एकदम तंदुरुस्त महसूस करने लगा हूँ।

अपने यार की इस बात पर मेरी मम्मी अंकल की तरफ देख कर मुस्कुरा कर।

मम्मी: अगर ऐसी बात है योगेश जी। तो फिर मैं आपको ये एनर्जी टॉनिक पीने से नहीं रोकूँगी।

अंकल मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों को चाटने लगे। और फिर अपने होठों को ठीक मेरी मम्मी की गीली पैंटी के ऊपर मेरी मम्मी की चूत पर रख कर मेरी मम्मी की चूत को पैंटी के साथ ही चूसने लगे।

मम्मी: योगेश जी इसको उतार कर चाटिए ना अच्छे से।

अंकल: मेरी जान अपनी रानी का इतना कीमती रस जो इस पर चड्डी पर ही क्या। मैं उसे ऐसे ही वेस्ट कर दूँ। मैं तो रानी की चूत से निकले अमृत की एक एक बूँद को अपने होठों में लेकर पी जाऊँगा।

अंकल मेरी मम्मी की पैंटी पर मेरी मम्मी की चूत के रस को अच्छी तरह से चूस कर। अंकल ने अपनी उँगलियाँ मेरी मम्मी की पैंटी में फँसाईं। और मेरी मम्मी की पैंटी को नीचे खिसकाने लगे। तो फिर से मेरी मम्मी के चूतड़ों की वजह से पैंटी नहीं उतर रही थी। तो अंकल ने मेरी मम्मी को अपने चूतड़ ऊपर उठाने का इशारा किया। तो मेरी मम्मी ने भी अपनी गर्दन हाँ में हिला कर इशारा किया। और अपने चूतड़ों को ऊपर उठा लिया। तो अंकल ने मेरी मम्मी की पैंटी मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकाल दी। अब मेरी मम्मी एकदम नंगी अंकल के सामने लेटी थीं। तो मेरी मम्मी ने अंकल से कहा।

मम्मी: योगेश जी जल्दी कीजिए ना। डाल दीजिए ना। अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा।

अंकल: यार तुम्हें क्या लगता है। तुम ही कंट्रोल नहीं कर पा रही हो। क्या मैं कंट्रोल कर पाऊँगा। और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख कर मेरी मम्मी से बोले। देखो ये बेचारा शाम से कैसे तड़प रहा है। शाम से ही भूखा है तुम्हारी चूत का। तेरी चूत से ही इसकी भूख मिटेगी। आज दिन में तुम्हारे नामर्द पति ने आकर तुम्हारी चूत की चुदाई ढंग से नहीं होने दी। और तभी से ये भूखा है।

मेरी मम्मी: अंकल की इस बात पर हँसते हुए धीरे से उनके लंड को सहलाती बोलीं। मेरे रहते ये भूखा रहे। ये कभी नहीं होगा। अभी इसकी भूख को शांत कर दूँगी मैं। और रही दिन की बात तो उस मादरचोद नपुंसक ने दिन में घर आकर अच्छा नहीं किया। कल उस मादरचोद को मैं खाने में पेट खराब करने वाली दवा मिला दूँगी। जिससे उस मादरचोद का पेट खराब हो जाएगा।

अंकल: ऐसा मत करना। नहीं तो वो नामर्द पूरे दिन घर पर ही रहेगा।

मम्मी: तो क्या करूँ उस नामर्द का। आप ही बताओ।

अंकल: उसे कुछ नहीं करो। उस नामर्द को बाद में देखेंगे। अभी तो इस लंड का इलाज करो।

मम्मी: लंड को सहलाती हुई। योगेश जी अब और मत तड़पाइए। डाल दीजिए ना मेरे अंदर। और बिस्तर पर लेट कर मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगों को पूरा फैला दिया। तो अंकल मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ गए। और अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत के ऊपर टिकाने लगे। तो मेरी मम्मी ने उन्हें रोका।

मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। पहले इस पर वो तो चढ़ा लीजिए।

अंकल: यार आज कंडोम के बिना ही करते हैं ना।

मम्मी: नहीं नहीं। बिना उसके अभी नहीं। जानते हैं ना आपका कितना निकलता है। और मुझे पता है। एक बार ही आपने अपना माल मेरे अंदर गिराया। तो अगले ही दिन मैं बड़ा पेट ले कर घूमती रहूँगी।

अंकल: जान। तो क्या तुम नहीं चाहती कि हमारा भी कोई बच्चा हो।

मम्मी: क्या योगेश जी। मैंने ऐसा तो नहीं कहा। पर अभी आप इस पर वो कंडोम चढ़ा लीजिए।

अंकल: यार अब वो कहाँ पड़ा है।

मम्मी: वो मेरे रूम की ड्रॉअर में पड़ा है। कल ही उसे वहाँ से उठा कर रखूँगी। क्योंकि उस नामर्द ने अगर देख लिया तो समझ जाएगा कि इस घर में इसकी क्या जरूरत है। कौन इसको इस्तेमाल करता है। क्योंकि वो तो इस्तेमाल करता ही नहीं। वो इस्तेमाल करेगा भी कैसे। वो तो नामर्द नपुंसक है। उसने तो पिछले 19 साल से मेरी चूत में लंड घुसाया ही नहीं है।

अंकल: जान तू कितनी समझदार है। और तू चिंता मत कर। उस नामर्द ने पिछले 19 सालों से लंड नहीं घुसाया तेरी चूत में। तो क्या। मैं तो घुसा रहा हूँ पिछले 6 महीनों से। पर अब बात ये है। इस रूम में तो वो नामर्द सो रहा है। मैं तो कंडोम लेने उस रूम में नहीं जा सकता हूँ। अब तू ही उस रूम में जाकर निकाल कर ला। और मेरे इस लंड पर चढ़ा दे।

मम्मी: योगेश जी आप भी ना। आप बिना सोचे समझे ही बोल देते हैं। मैं उस रूम में कैसे जाऊँगी।

अंकल: क्यों नहीं जा सकती। वो तेरा रूम है।

मम्मी: अभी भी नहीं समझे। मैं क्यों नहीं जा सकती।

अंकल: नहीं समझा। अब तू ही बता।

मम्मी: मैं इस समय नंगी हूँ। और नंगी कैसे जाऊँगी। मुझे कपड़े पहनने पड़ेंगे। और वो आप मुझे पहनने नहीं देंगे। तो मैं नंगी कैसे जाऊँगी। और इस रूम से निकलूँगी तो अंकुश बाहर वाले रूम में है। वो मुझे नंगी देख लेगा।

अंकल: तो क्या हुआ। तूने बताया था तू उसके सामने नंगी भी रह लेती है। वो तेरा बेटा है।

मम्मी: हाँ। मैं उसके सामने नंगी रह लेती हूँ। पर इस समय मैं आपके साथ इस रूम में हूँ। और मैं इस रूम से नंगी निकलूँगी तो मुझे शर्म आएगी। माँ बेटे के बीच शर्म भी जरूरी है। भले ही उसे पता है मैं आपसे चुदने के लिए नंगी हुई हूँ। पर वो मेरा बेटा है। और फिर मैं उस मेरे वाले रूम में जाऊँगी। तो वो नामर्द मुझे नंगी देखेगा। तो बखेड़ा खड़ा कर देगा।

अंकल: तू सही कह रही है। मैं अंकुश को बोलता हूँ। वो ला देगा।

मम्मी: नहीं नहीं। उसे मत बोलिए। मुझे शर्म आती है।

अंकल: तू चुप रह। मैं बोलता हूँ फिर।

मम्मी: उसे फोन से बोलिए। मुझे शर्म आएगी।

अंकल: तो बाहर जाकर बोलूँ।

मम्मी: नहीं। व्हाट्सएप पे मैसेज कर दो।

फिर अंकल ने मुझे व्हाट्सएप पे मैसेज किया।

मैसेज: अंकुश बेटा तेरी मम्मी की ड्रॉअर में कंडोम रखे हैं। तू जाकर कंडोम ले आ।

मैं: अंकल कितने कंडोम लाने हैं।

अंकल: आज तू जितनी बार अपनी मम्मी को चुदवाना चाहे। इतने ही कंडोम ले आ।

मैं: अंकल मैं तो चाहता हूँ आप मेरी मम्मी को अनगिनत बार प्यार करो। पर मम्मी आपसे कितनी बार चाहती हैं। मैं उतने ही ले आऊँगा।

अंकल ने मम्मी की तरफ देखा। तो मम्मी ने अंकल से मोबाइल लिए। और खुद ही मैसेज टाइप करने लगीं।

मैसेज: बेटा तेरी मम्मी ने कहा है। आज मैं इतनी बार चुदूँगी जितनी बार अंकुश चाहेगा। इसलिए तू कंडोम ले आ।

ये मैसेज मेरी मम्मी ने ही टाइप किया था। जो मैं कैमरा की मदद से देख रहा था।

फिर मैं मम्मी पापा के रूम में गया। वहाँ देखा पापा लैपटॉप पर कुछ काम कर रहे थे।

पापा: बेटा कैसे आया।

मैं: (अब मैं पापा को कैसे बताता कि कंडोम लेने आया हूँ। आपकी बीवी ने मँगवाए हैं योगेश अंकल से चुदवाने के लिए।) मैं पापा वो मम्मी का गाउन लेने आया हूँ। ड्रॉअर में रखा है।

पापा: ले जा। और तेरी मम्मी से बोलना। मुझे सुबह 10 बजे से पहले न उठाए। क्योंकि कल मैं ऑफिस देर से जाऊँगा।

मैं: ओके पापा।

फिर मैंने मम्मी की ड्रॉअर खोली। और एक गाउन उठाया। क्योंकि गाउन उठाना जरूरी था। नहीं तो पापा को क्या बताता। और मम्मी ने बहुत सारे कंडोम रख रखे साड़ी के नीचे। मैंने उसमें से कुछ कंडोम उठाने लगा। फिर मैंने सोचा सारे ही ले चलता हूँ। जितने यूज करने होंगे कर लेंगे। और मैंने सारे कंडोम को गाउन के अंदर रखा। और अपने रूम में चला आया।

और पर्दे के नीचे से मैंने अंदर वाले रूम में 6 कंडोम डाल दिए पर्दे के अंदर नीचे से हाथ से।

फिर मैंने अंकल को मैसेज किया।

मैसेज: अंकल मैं कंडोम ले आया हूँ। और साथ में मम्मी का गाउन भी लाया हूँ। वो पापा जाग रहे थे। उन्होंने पूछा तो मैंने गाउन का बहाना बना दिया। और पूरे कंडोम ले आया हूँ। और गाउन और पूरे कंडोम मेरे बेड पर रखे हैं। और मैंने 6 कंडोम पर्दे के नीचे से रूम में डाल दिए हैं। और पापा ने कहा है। कल सुबह 10 बजे उठेंगे। उससे पहले उन्हें नहीं उठाना है। और कल पापा देर से ऑफिस जाएँगे। इसलिए पापा ने बोला है। कोई उनके रूम में 10 बजे से पहले न जाए।
मैसेज की बेल दोनों ने सुनी। तो अंकल ने मैसेज पढ़ा। और मुस्कुराने लगे। अंकल को मुस्कुराते देख मम्मी ने मोबाइल लिए। और पढ़ने लगीं। फिर मम्मी भी मुस्कुराते हुए उठीं। और बेड से उतरकर पर्दे के पास आती हैं। और 6 कंडोम उठा लेती हैं। और वापस बेड पर जाती हैं। और अंकल से बोलती हैं।
मम्मी: मेरा बेटा ने 6 कंडोम दिए। आप उसकी मम्मी को 6 बार चोदना पूरी रात में।
अंकल: जो हुक्म महारानी। अब जल्दी से कंडोम को मेरे लंड पर चढ़ाओ।
तो मम्मी ने एक कंडोम के रैपर को फाड़ा। और कंडोम निकाल कर अंकल के लंड चढ़ाने लगीं। लेकिन मम्मी ने अचानक पहले अंकल के लंड को किस किया। और जीभ से चाटने लगीं। और फिर लंड पर चढ़ाया। और बोलीं। कल सुबह 10 बजे तक मैं आपको इन कंडोम को यूज करवाऊँ। पूरे 6 हैं।
अंकल: 6 तो यहाँ हैं। बाकी बाहर वाले में अंकुश के बेड पे तेरे गाउन के साथ रखे हैं।
मम्मी: तो शुरुआत कीजिए। सुबह 10 बजे तक। अभी 10 बजे हैं रात के। और पूरे 12 घंटे हैं।
अंकल: बीच में ये तो नहीं कहेगी। थक गई हूँ। अब सो जाते हैं।
मम्मी: पता नहीं। कह भी सकती हूँ। पर ये तो आप पर डिपेंड करेगा। आप मुझे सोने देंगे या नहीं। ये कह कर मेरी मम्मी अंकल के सामने अपनी टाँगें चौड़ी करके लेट गईं। इस बार अंकल ने एक तकिया उठाया। और उसे मेरी मम्मी के चूतड़ों के नीचे रख दिया। जिससे कि मेरी मम्मी की पोजीशन ठीक हो जाए। मेरी मम्मी की चूत थोड़ी ऊपर उठ गई।
मेरी मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। इससे क्यों नीचे लगा रहे हैं।
अंकल: यार इस पोजीशन में लंड और भी अंदर तक जाएगा।
मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। और कितना अंदर तक घुसाएँगे आप। अपना लंड मेरे अंदर। आगे ही कितना अंदर तक तो जाता है।
अंकल: मेरी रानी। जितना अंदर तक जाता है। उतना मजा भी तो देता है।
अंकल की इस बात पर मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। फिर अंकल ने अपनी उँगली चाटी। और उसमें थूक लगा के मेरी मम्मी की चूत में रगड़ा। मेरी मम्मी भी अपने चूड़ियों से भरे हाथों से अपने यार के लंड को सहला रही थीं। फिर अंकल धीरे धीरे नीचे आए। और मेरी मम्मी ने उनके लंड को पकड़े रखा। और मेरी मम्मी ने अपनी चूत के छेद पर अंकल का लंड लगा दिया। वैसे अब मेरी मम्मी और अंकल दोनों को अब इस बात की चिंता नहीं थी कि मेरा नामर्द बाप कभी भी अंदर आ सकता है। क्योंकि उनकी पहरेदारी के लिए मैं बाहर बैठा था।
अंकल जो कि मेरी मम्मी की टाँगों के बीच थे। और मेरी मम्मी ने उनका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया हुआ था। तो उन्होंने मेरी मम्मी की टाँगों को पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा। तो उनका लंड सीधा दनदनाता मेरी मम्मी की चूत के अंदर तक घुस गया। तो मेरी मम्मी ने कहा।
मम्मी: हल्के से चीखते हुए। उई माँ ओह... क्या योगेश जी। आप एक बार में ही घुसा डालते हो।
अंकल: यार अब तुम भी तो एक बार में पूरा ले तो लेती हो।
मम्मी: क्या आप भी ना। रोज लेती हूँ। तो क्या अभी नहीं ले पाऊँगी क्या। लेकिन आप कम से कम धीरे धीरे ही अंदर घुसाइए कीजिए। लेकिन नहीं। आपको तो एक ही धक्के में पूरा अंदर घुसाने में मजा आता है। वैसे योगेश जी आज मुझे आपका लंड कुछ ज्यादा मोटा लग रहा है।
अंकल: वो मेरी जान। शाम से बेचैन था तुम्हारे लिए। इसलिए लग रहा होगा। और अंकल अपने लंड को 3-4 इंच बाहर की ओर खींचा। और फिर एक ही झटके में जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में घुसा दिया। मेरी मम्मी के मुँह से हल्की सी चीख निकली। जिसे मेरी मम्मी ने अपने होठों में दबा लिया। अंकल के इस धक्के पर मेरी मम्मी बेड पर लगभग 3-4 इंच आगे खिसक गईं।
मेरी मम्मी: उफ... अरे थोड़ा धीरे धक्का... माँ... र...ई...ए... बड़ा मोटा है आपका। धीरे प्यार से करिए ना। मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही हूँ।
अंकल: हम्मम यार। तुम जानती हो कि तुम जब सामने होती हो तो मुझसे कंट्रोल नहीं होता। और नीचे झुके। और मेरी मम्मी के होठों पर अपने होठ रख कर चूमने लगे।
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