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मम्मी और अंकल की हर रात रंगीन हो रही थी। पापा दादी को गए 4 दिन हो गए थे। अब उनका वापस आने का टाइम भी हो रहा था। वो एक दो दिन में आने वाले थे। मम्मी पिछले 4 दिन से अंकल के ही घर में थीं। अंकल मम्मी को बिस्तर पे आते ही नंगी कर देते थे। और मेरी मम्मी के संगमरमर बदन को अपने बदन से चिपका लेते थे। एक बार अंकल मम्मी को नंगी करते थे तो पूरी रात भर नंगी रखकर चोदते थे। और नंगी ही मम्मी को अपने बदन से चिपकाकर सुलाते थे। और घर के अंदर मम्मी को नंगी ही रखते थे। बस बाहर शॉपिंग के लिए लेकर जाते तब मम्मी के बदन पे कपड़े होते थे।
मैं मम्मी की पूरी रात भर से चुदाई देख रहा था। सुबह 5 से ज्यादा हो गया था। दोनों थक कर लेटे हुए थे एक दूसरे से चिपक कर। और मम्मी लेटे हुए ही अंकल का लंड सहला रही थीं। और अंकल के पेट पे भी हाथ फेर रही थीं।
मम्मी की साड़ी ब्लाउज पेटीकोट पैंटी ब्रा जमीन पर पड़े थे। और अंकल के कपड़े भी।
मेरी मम्मी और अंकल नंगे एक दूसरे से लिपटे। टाँगों में टाँगें फँसाए सो रहे थे। कि तभी डोरबेल की आवाज सुनाई दी। मैंने टाइम देखा तो 6 am हो गया था। उस समय शायद मम्मी को भी नींद आ रही थी। लेकिन फिर भी मम्मी अंकल का लंड सहला रही थीं। और अंकल सो तो नहीं रहे थे। लेकिन शायद थकान की वजह से लेटे हुए थे।
मम्मी ने अंकल से कहा।
मम्मी: योगेश जी बाहर दूध वाला होगा। आप जा कर दूध ले लीजिए।
तो अंकल लेटे हुए ही। अंकल मेरी मम्मी की गोरी चिकनी कड़क चुचियों को अपने हाथों में दबाकर फिर अपने मुँह में लेकर चूसते हुए बोले।
अंकल: मेरी जान मेरे पास तो दूध ही है। इससे बढ़िया दूध और कहाँ मिलेगा।
मेरी मम्मी अंकल से अलग होते बोलीं।
मम्मी: आप भी। जब देखो आपको बस यही काम रहता है।
और मुस्कुराते बेड से उठीं। और अपने कपड़े ढूँढते बोलीं। कितनी बार कहा है कपड़े पहन कर सोने दीजिए। लेकिन नहीं। नंगी ही सुलाएँगे साथ में। अब सुबह उठ कर इतने कपड़े पहनो। तब तक वो बाहर खड़ा चिल्ला चिल्ला कर पूरा मोहल्ला खड़ा कर देगा।
मेरी मम्मी वहाँ पड़ी अपना ब्लाउज और पेटीकोट उठा कर पहन लिया। और बाहर दूध लेने चली गईं। और मम्मी ब्लाउज पेटीकोट में थीं।
इसलिए मम्मी ने गेट को थोड़ा सा खोला। और बर्तन बाहर कर दिया। और खुद गेट के पीछे हो गईं। ताकि दूध वाला मम्मी को न देख सके।
दूध वाला: आप कौन हो इस घर में। मैंने कभी किसी औरत को नहीं देखा। क्योंकि मम्मी ने सिर्फ हाथ बाहर निकाला था। और मम्मी के हाथों में चूड़ियाँ थीं।
मम्मी चुप रहीं।
दूध वाला: बताइए आप कौन। यहाँ तो योगेश भाई साहब अकेले रहते हैं।
मम्मी: मैं उनकी रिलेटिव हूँ।
दूध वाला: तो आप ऐसे छुप क्यों रही हैं गेट के पीछे।
मम्मी: आप दूध दीजिए जल्दी।
दूध वाला: वो मैं दे रहा हूँ। पर आप छुप क्यों रही हैं।
मम्मी: वो मैं अभी नाइटी में हूँ। इसलिए। और आप दूध दीजिए जल्दी।
दूध वाला दूध दे देता है। तो मम्मी तुरंत बर्तन को अंदर ले लेती हैं। और गेट को बंद कर देती हैं। और दूध लेकर किचन में रख आती हैं। और फिर वापस बेडरूम में आ गईं। और अपने बालों को बाँधते हुए सो रहे अंकल की ओर देखा। जो अभी भी नींद में थे। उनका लंड मुरझाया हुआ था। तो उसको देख कर मेरी मम्मी के होठों पर एक स्माइल आ गई। और मुस्कुराते बेड की ओर चलतीं। अपने हाथ को उनके लंड को अपने कोमल हाथ में ले कर सहलाती बोलीं।
देखो अब कैसे आराम से सो रहा है। और रात भर कैसे मेरा बाजा बजाता है।
मेरी मम्मी का हाथ लगाते ही अंकल का लंड जो अभी तक उनकी टाँगों के बीच आराम फरमा रहा। एकदम फुंकार मारता उठ खड़ा हुआ।
मेरी मम्मी अभी भी अंकल के लंड महाराज से खेल रही थीं। पूरी रात चुदने के बाद भी आज मम्मी की प्यास नहीं बुझी थी। ऐसा लग रहा था। अंकल मेरी मम्मी को बाँहों से पकड़कर अपने ऊपर खींच लेते हैं। और मम्मी को बाँहों में भर लेते हैं।
मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। सुबह सुबह आप फिर से शुरू हो गए। लगता है आप पागल हो गए हैं।
अंकल: डार्लिंग तुम्हारे प्यार ने मुझे पागल बना दिया है। आओ ना। प्यार करने दो ना।
मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। पूरी रात भर आप प्यार करते रहे। दिल नहीं भरा क्या।
अंकल: रात भर मेरी जान। अगर मेरा बस चले तो रात क्या जिंदगी भर तुम्हें प्यार करता रहूँ। एक पल के लिए तुझे अपने से दूर होने न दूँ।
मेरी मम्मी: मुस्कुरा कर। छोड़िए ना। अब जो करना है रात में कीजिएगा।
अंकल: यार प्यार करने के लिए रात क्या दिन क्या। और मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगे।
तो मेरी मम्मी बोलीं। हाय आप तो शुरू हो गए। छोड़िए। बाहर का दरवाजा खुला है। और वो लड़की आती होगी जो आपने 3 दिन पहले बुलाई थी।
और मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर दूर जा खड़ी हुईं।
तो अंकल मेरी मम्मी के सामने अपने खड़े लंड को सहलाते। यार क्यों इतना जुल्म कर रही हो।
तो जवाब में मेरी मम्मी उनकी ओर देख मुस्कुराते उनको अंगूठा दिखाती बोलीं। जब से मैंने इसको देखा है ये तो हमेशा ही खड़ा रहता है। अब इसको समझा दीजिए। अब इसको कुछ मिलने वाला नहीं। जो कुछ भी मिलेगा वो रात को ही। समझे जनाब।
अंकल: जो हुक्म रानी साहिबा। हमारी क्या मजाल जो रानी साहिबा के हुक्म की अवहेलना करे। और फिर से सोने लगे।
तो मेरी मम्मी भी मुस्कुराती बेडरूम में बिखरे कपड़े समेटने लगीं। और वहाँ एक साइड में यूज्ड कंडोम जिनमें अंकल का वीर्य भरा हुआ था। उसको उठा कर बाहर फेंक दिया। अंकल तब तक फिर से सो चुके थे। और मेरी मम्मी अपने कपड़े ले कर बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चली गईं।
मेरी मम्मी नहा कर बाथरूम से बाहर आईं। उस समय मेरी मम्मी के बदन पर सिर्फ ब्लैक कलर की ब्रा और ब्लैक कलर की मैचिंग पैंटी थी। ब्रा में मेरी मम्मी की चुचियाँ आधी से ज्यादा बाहर निकली हुई थीं। मेरी मम्मी अपनी चुचियों को ब्रा के कप में अच्छे से एडजस्ट करती हुई आईने के सामने खड़ी हो कर खुद को निहारने लगीं। सच में अंकल के साथ रिलेशनशिप में मेरी मम्मी की चुचियाँ 6 महीनों में काफी बड़ी हो गई थीं। और फिर आईने में देख कर मुस्कुरातीं। आईने के सामने खड़ी अपनी चुचियों को अपने हाथ से मसलती बोलीं। बढ़ेंगे नहीं क्या। सारी रात इन से खेलते रहते हैं। और चूसते रहते हैं।
और आईने में खुद की बॉडी को निहारने लगीं। तो मेरी मम्मी का हाथ उनके ही चूतड़ों पर चला गया। वो भी पहले के मुकाबले में काफी बढ़ गए थे। मेरी मम्मी अपने बदन को निहार ही रही थीं। कि तभी अंकल जो बेड पर लेटे हुए थे। उठ कर मेरी मम्मी के पीछे आ खड़े हुए। उनको अपने पीछे खड़ा देख मेरी मम्मी अपनी हरकतों पर शर्मा गईं। और मुँह छुपाते बोलीं। क्या योगेश जी। आपको शर्म नहीं। जो चोरी चोरी ऐसे किसी के पीछे आ कर खड़े हो गए।
तो जवाब में अंकल पीछे से मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर अपने होठों को मेरी मम्मी की नंगी गर्दन पर रख कर चूमने लगे।
अपने यार के इस तरह प्यार करने पर कोई भी औरत मदहोश हो सकती है। मेरी मम्मी का भी वही हाल था। मस्ती में मेरी मम्मी की आँखें भी बंद होने लगीं।
मेरी मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। छोड़िए ना।
अंकल: यार सच में तुम बहुत खूबसूरत हो। तुम्हें छोड़ने का नहीं बल्कि प्यार करने का मन करता है। और मेरी मम्मी की गर्दन मेरी मम्मी के गालों को चूमते अपने एक हाथ को मेरी मम्मी की ब्रा में घुसाने की कोशिश करने लगे।
मम्मी: नहीं योगेश जी।
अंकल: जान चुप रहो। और मम्मी को अपने आगे कर लिया। और अब मम्मी अंकल आमने सामने थे। और अंकल अपने हाथ मम्मी के पीछे ले जाकर मम्मी की ब्रा का हुक खोलने लगे।
मेरी मम्मी: प्लीज योगेश जी। आपको पता है ना। आपके इस तरह करने से मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं रख सकती।
अंकल: यार तो कौन कमबख्त कहता है कंट्रोल करने को। हम कुछ गलत थोड़े ही कर रहे हैं। हम पति पत्नी नहीं हैं। लेकिन तुम्हारे बेटे ने ही कहा है पति पत्नी की तरह रहो। और मेरी मम्मी को खूब चोदो।
और अपने दोनों हाथ पीछे ले जाकर मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया।
और एक हाथ मम्मी की पीठ पर फेरते रहे। और दूसरे हाथ से मेरी मम्मी की जाँघों को सहलाने लगे। तो मम्मी बोलीं। बेटे ने ये कहा है मेरी मम्मी की प्यास उनकी ही परमिशन से बुझाना। ना कि जबरदस्ती करना।
अंकल: तो मैं क्या जबरदस्ती कर रहा हूँ। मैं तो तुम्हारी ही परमिशन से तुम्हें प्यार कर रहा हूँ।
मम्मी: मैंने कब दी परमिशन।
अंकल: तुम्हारी परमिशन तो मुझे तुमने ब्रा पैंटी में मेरे सामने आते ही मिल गई।
मम्मी: अब रहने दीजिए। नहीं तो तुम्हारे इस तरह करने से मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी। और तुम्हारा साथ देने लगूँगी।
अंकल: तो दो साथ मेरा।
मम्मी: योगेश जी छोड़िए ना। चाय बना कर लाती हूँ। वो लड़की भी आने वाली है। और फिर से अंकल की बाँहों से निकलने लगीं। तो अंकल जोर से मेरी मम्मी के गालों को काट खाया। तो दर्द से चीख पड़ीं। और मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर दूर खड़ी अपने गालों को सहलाने लगीं। और उनकी ओर देख कर। क्या योगेश जी। सारी रात आप मुझे खाते रहते हैं। तब भी क्या का मन नहीं भरता।
और फिर मम्मी ने अंकल के सामने ही अपनी ब्रा का हुक अपने हाथ पीछे ले जाकर लगाया। और अपना ब्लाउज पेटीकोट पहना। और फिर साड़ी पहनने लगीं।
मेरी मम्मी अपनी साड़ी पहन कर चाय बनाने के जाने लगीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। और मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा तुमने बताया नहीं कि तुम मुझसे प्यार करती हो या नहीं।
अंकल ने जिस अंदाज से मेरी मम्मी से ये पूछा। तो मेरी मम्मी को भी उन पर इतना प्यार आया कि मेरी मम्मी ने अपने दोनों बाँहों का हार उनके गले में दिया।
और अपना चेहरा उनके चेहरे के पास ले जा कर उनकी आँखों में आँखें डाल कर बोलीं। बता दूँ कि कितना प्यार करती हूँ मैं आप से। तो अभी आप इतना जान लें कि मैं आपको कभी छोड़ कर नहीं जाऊँगी।
अंकल: अच्छा। लेकिन यार ये तो बताओ। डू यू लव मी।
अंकल के इस सवाल पर मेरी मम्मी मुस्कुराते बोलीं। योगेश जी अभी आपको इस सवाल के जवाब के इंतजार करना पड़ेगा। और फिर उनसे दूर खड़ी हो कर मुस्कुराने लगीं।
अंकल ने फिर से मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी बाँहों में खींच लिया। और अपने दोनों हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर मेरी मम्मी की आँखों में देखने लगे। और बोले। वर्षा यार अब तो तुम कम से कम मुझे योगेश जी मत कहा करो। कितने दिन हो गए हैं चुदाई करते हुए। और तुम अभी भी योगेश जी कहती हो।
मम्मी: तो क्या कहूँ।
अंकल: अंकुश के पापा।
मम्मी: क्यों। आप अंकुश के पापा थोड़े हो।
अंकल: पापा नहीं हूँ तो क्या। पापा का फर्ज निभा रहा हूँ। उसकी मम्मी की प्यासी चूत को चोदकर।
मम्मी: अंकल की आँखों में देखते ही मुस्कुरा कर मम्मी ने उनसे कहा। कोशिश करूँगी। और अब मैं जाऊँ।
अंकल: यार तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।
मम्मी: कौन सा सवाल।
अंकल: प्यार।
मम्मी: मेरी मम्मी अपनी बाँहें फिर से अंकल के गले में डाल कर। बस कुछ देर और। आज आपको आपके सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा।
अंकल: खुशी से। तो मुझे उस पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहेगा। अच्छा पहले एक पप्पी दो।
मम्मी: अंकल की आँखों में आँखें डाल कर मुस्कुराते हुए कहा। सारी रात करके भी आपका दिल नहीं भरा।
तो अंकल बोले।
अंकल: मेरी जान तुम चीज ही ऐसी हो।
मम्मी: इतना प्यार करते हैं आप मुझे योगेश जी।
अंकल: अपनी जान से भी ज्यादा।
मम्मी: मैं जानती हूँ। जब तक मैं आपको पप्पी नहीं दूँगी। आप मुझे छोड़ने वाले नहीं हैं। आप बड़े जिद्दी हो।
अंकल: तो दो ना।
मम्मी: मम्मी अंकल की आँखों में आँखें डाले। अंकल की साँसें मेरी मम्मी की साँसों से टकरा रही थीं। मेरी मम्मी प्यार से उनके गालों को सहलाते हुए।
अदा से बोलीं। अब मेरा शोना मेरी पप्पी लिए बिना मानेगा नहीं ना। और अपने होठों को अंकल के होठों पर रख कर उनको चूमने लगीं।
तो अंकल कहाँ रुकने वाले थे। उन्होंने अपने होठ मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए। और चूमने लगे। और फिर अपने होठ धीरे नीचे की ओर मेरी मम्मी के चुचों पर ले गए। जो दिन पर दिन बड़े होते जा रहे थे। और मेरी मम्मी की चुचियों को चूमने लगे। मेरी मम्मी की साँसें भी गरम होने लगीं। मम्मी ने भी उनको अपनी बाँहों में कस लिया। और उनके बालों में उँगलियाँ फिराने लगीं। और मेरी मम्मी को अंकल के हाथ नीचे की ओर मेरी मम्मी की टाँगों के बीच मेरी मम्मी की चूत को टटोलने लगे। कि तभी दरवाजे पर बेल बजी।
दरवाजे पर बेल सुनाई देते ही मम्मी अंकल से अलग हुईं। और मुस्कुराते अपने यार को चिढ़ाती बोलीं।
मम्मी: कहाँ था। अभी आपको दूध नहीं मिलेगा। चाय पी लीजिए। लेकिन आप पर हमेशा मेरा दूध पीने का भूत सवार रहता है। वो ही लड़की होगी। जाइए जा कर दरवाजा खोल दीजिए। तब तक मैं चाय बना कर लाती हूँ। और फिर से मुँह कर उनकी ओर देख कर मुस्कुराते बोलीं। और हाँ कुछ पहन कर जाइएगा। कहीं ऐसा न हो बेचारी देख कर ही डर जाए।
अंकल: क्या तुम भी डरती हो।
मम्मी: मैं क्यों डरूँगी। मुझे तो अब प्यार करता है। अब जाइए जा कर दरवाजा खोलिए।
अंकल: यार तुम ही खोल दो ना। बहुत थका हुआ हूँ। बड़ी नींद आ रही है।
मम्मी: रात रात भर जनाब शरारत करते रहते हैं। तो अब तो नींद आएगी ही। कितना बोलती हूँ बस कीजिए। लेकिन नहीं। जनाब के सिर पर रोमांस सवार रहता है। आज से आप ज्यादा थके नहीं। इसलिए आज से आपको पूरी रात नहीं। और अदा से ना में मुस्कुराते सिर हिलाने लगीं।
मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल।
अंकल: यार क्यों इतना जुल्म कर रही हो। कहो तो मैं तुम्हारे पैर पड़ जाऊँ। लेकिन ऐसा जुल्म मत करना इस गुलाम पर। मैं अभी जा कर दरवाजा खोल देता हूँ रानी साहिबा।
मम्मी: बीवियों वाले अंदाज में इशारे से। जाइए ना। खोल दीजिए ना। तब तक मैं ये रूम ठीक कर दूँ।
तो अंकल वहीं जमीन पर पड़ा अंडरवियर ही उठा कर पहन कर दरवाजा खोलने चले गए।
मम्मी अभी अपनी साड़ी ठीक कर ही रही थीं। तो मैंने सोचा अब कुछ नहीं होगा उस लड़की के सामने। और मैं चुपके से अपने घर आ गया। और घर आकर पापा को कॉल किया। तो पापा ने कहा एक वीक के बाद आएँगे। तो मैंने भी अंकल को कॉल करके बता दिया।
फिर एक घंटे बाद अंकल का कॉल आया। और बोले। बेटा मेरा और तेरी मम्मी का प्लान है। हम एक वीक कहीं बाहर घूमने जाएँगे। जब तक तेरा बाप न आ जाए। पर तेरी मम्मी तेरी परमिशन चाहती है। वो नखरे करेगी। तू उसे जाने को बोल देना। उसी का प्लान है। पर वो तुझसे कह नहीं सकती।
फिर शाम को मम्मी ने मुझे बुलाया फोन करके। जब मैं अंकल के घर गया। तो मम्मी बेड पे लेटी थीं हेलो कलर के सलवार सूट में।
गुलाबी।
फिर मुझे देखकर खड़ी हुईं। और मुझे गले लगाकर बोलीं। बेटा 4 दिन हो गए हैं। मुझे घर ले चल। मैंने इन 4 दिनों में कैसे बचाया है अपने आप को। नहीं तो मैं... और चुप हो गईं।
मैं: मम्मी। आप भी। आपसे कितनी बार कहा है मैंने। आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लो।
मम्मी: मैंने तुझसे कितनी बार कहा है। नहीं करूँगी।
मैं: ओके मम्मी। पर पापा एक वीक के बाद आएँगे।
मम्मी: नाटक करते हुए। क्या।
अंकल: गुड न्यूज। मैं तेरी मम्मी को अपने फार्महाउस ले जाऊँगा। वहाँ घुमाने। और कंप्यूटर भी सिखा दूँगा।
मम्मी: नो। मैं नहीं जाऊँगी। वहाँ आप मुझे कंप्यूटर नहीं बल्कि मेरे साथ जबरदस्ती करोगे।
मैं: मम्मी अंकल ने आज तक क्या आपके साथ कुछ गलत किया है। वो जो भी करेंगे आपकी परमिशन से ही करेंगे।
मम्मी: बेटा मैं उन्हें परमिशन कभी नहीं दूँगी।
मैं: तो मम्मी आप चली जाइए अंकल के साथ।
मम्मी: नो बेटा।
मैं: मम्मी आपकी मेरी कसम।
मम्मी: कसम क्यों देता है बेटा। ठीक है। चली जाऊँगी।
मैं: और एक वीक बाद पापा आएँगे। तब तक आप अंकल के साथ रहिएगा। और कंप्यूटर सीखना। और ना ही आप मुझे कॉल करोगी।
मम्मी: क्यों बेटा।
मैं: मम्मी एक वीक तक आप कॉल नहीं करोगी। जरूरत पड़ने पे मैं ही कॉल करूँगा।
मम्मी: ओके बेटा।
फिर मैं अपने घर आ गया। और एक वीक के बाद अंकल और मम्मी घर आए अंकल के ही घर। फिर मम्मी अकेली मेरे घर आ गईं। और अंकल की शिकायत करने लगीं। बोलीं। उन्होंने मेरे जबरदस्ती करने की कोशिश की। पर मैंने उन्हें कुछ नहीं करने दिया। और बोलीं। बेटा ये मेरा मोबाइल तू अपने पास रख। मैं सोने जा रही हूँ। और बोलीं। तुझे मेरे मोबाइल में गेम खेलना हो तो खेल लेना। और पासवर्ड बता दिया।
मैं: नहीं मम्मी। मेरे मोबाइल में भी गेम है।
मम्मी: बेटा मेरे मोबाइल को देख लिया कर। और रूम में चली गईं।
फिर मैंने मम्मी का मोबाइल चेक किया। तो उसमें जो फोटो थीं। कई सारी। जिनमें अंकल ने मम्मी को गाड़ी में लंड चुसवाया।
मम्मी और अंकल की हर रात रंगीन हो रही थी। पापा दादी को गए 4 दिन हो गए थे। अब उनका वापस आने का टाइम भी हो रहा था। वो एक दो दिन में आने वाले थे। मम्मी पिछले 4 दिन से अंकल के ही घर में थीं। अंकल मम्मी को बिस्तर पे आते ही नंगी कर देते थे। और मेरी मम्मी के संगमरमर बदन को अपने बदन से चिपका लेते थे। एक बार अंकल मम्मी को नंगी करते थे तो पूरी रात भर नंगी रखकर चोदते थे। और नंगी ही मम्मी को अपने बदन से चिपकाकर सुलाते थे। और घर के अंदर मम्मी को नंगी ही रखते थे। बस बाहर शॉपिंग के लिए लेकर जाते तब मम्मी के बदन पे कपड़े होते थे।
मैं मम्मी की पूरी रात भर से चुदाई देख रहा था। सुबह 5 से ज्यादा हो गया था। दोनों थक कर लेटे हुए थे एक दूसरे से चिपक कर। और मम्मी लेटे हुए ही अंकल का लंड सहला रही थीं। और अंकल के पेट पे भी हाथ फेर रही थीं।
मम्मी की साड़ी ब्लाउज पेटीकोट पैंटी ब्रा जमीन पर पड़े थे। और अंकल के कपड़े भी।
मेरी मम्मी और अंकल नंगे एक दूसरे से लिपटे। टाँगों में टाँगें फँसाए सो रहे थे। कि तभी डोरबेल की आवाज सुनाई दी। मैंने टाइम देखा तो 6 am हो गया था। उस समय शायद मम्मी को भी नींद आ रही थी। लेकिन फिर भी मम्मी अंकल का लंड सहला रही थीं। और अंकल सो तो नहीं रहे थे। लेकिन शायद थकान की वजह से लेटे हुए थे।
मम्मी ने अंकल से कहा।
मम्मी: योगेश जी बाहर दूध वाला होगा। आप जा कर दूध ले लीजिए।
तो अंकल लेटे हुए ही। अंकल मेरी मम्मी की गोरी चिकनी कड़क चुचियों को अपने हाथों में दबाकर फिर अपने मुँह में लेकर चूसते हुए बोले।
अंकल: मेरी जान मेरे पास तो दूध ही है। इससे बढ़िया दूध और कहाँ मिलेगा।
मेरी मम्मी अंकल से अलग होते बोलीं।
मम्मी: आप भी। जब देखो आपको बस यही काम रहता है।
और मुस्कुराते बेड से उठीं। और अपने कपड़े ढूँढते बोलीं। कितनी बार कहा है कपड़े पहन कर सोने दीजिए। लेकिन नहीं। नंगी ही सुलाएँगे साथ में। अब सुबह उठ कर इतने कपड़े पहनो। तब तक वो बाहर खड़ा चिल्ला चिल्ला कर पूरा मोहल्ला खड़ा कर देगा।
मेरी मम्मी वहाँ पड़ी अपना ब्लाउज और पेटीकोट उठा कर पहन लिया। और बाहर दूध लेने चली गईं। और मम्मी ब्लाउज पेटीकोट में थीं।
इसलिए मम्मी ने गेट को थोड़ा सा खोला। और बर्तन बाहर कर दिया। और खुद गेट के पीछे हो गईं। ताकि दूध वाला मम्मी को न देख सके।
दूध वाला: आप कौन हो इस घर में। मैंने कभी किसी औरत को नहीं देखा। क्योंकि मम्मी ने सिर्फ हाथ बाहर निकाला था। और मम्मी के हाथों में चूड़ियाँ थीं।
मम्मी चुप रहीं।
दूध वाला: बताइए आप कौन। यहाँ तो योगेश भाई साहब अकेले रहते हैं।
मम्मी: मैं उनकी रिलेटिव हूँ।
दूध वाला: तो आप ऐसे छुप क्यों रही हैं गेट के पीछे।
मम्मी: आप दूध दीजिए जल्दी।
दूध वाला: वो मैं दे रहा हूँ। पर आप छुप क्यों रही हैं।
मम्मी: वो मैं अभी नाइटी में हूँ। इसलिए। और आप दूध दीजिए जल्दी।
दूध वाला दूध दे देता है। तो मम्मी तुरंत बर्तन को अंदर ले लेती हैं। और गेट को बंद कर देती हैं। और दूध लेकर किचन में रख आती हैं। और फिर वापस बेडरूम में आ गईं। और अपने बालों को बाँधते हुए सो रहे अंकल की ओर देखा। जो अभी भी नींद में थे। उनका लंड मुरझाया हुआ था। तो उसको देख कर मेरी मम्मी के होठों पर एक स्माइल आ गई। और मुस्कुराते बेड की ओर चलतीं। अपने हाथ को उनके लंड को अपने कोमल हाथ में ले कर सहलाती बोलीं।
देखो अब कैसे आराम से सो रहा है। और रात भर कैसे मेरा बाजा बजाता है।
मेरी मम्मी का हाथ लगाते ही अंकल का लंड जो अभी तक उनकी टाँगों के बीच आराम फरमा रहा। एकदम फुंकार मारता उठ खड़ा हुआ।
मेरी मम्मी अभी भी अंकल के लंड महाराज से खेल रही थीं। पूरी रात चुदने के बाद भी आज मम्मी की प्यास नहीं बुझी थी। ऐसा लग रहा था। अंकल मेरी मम्मी को बाँहों से पकड़कर अपने ऊपर खींच लेते हैं। और मम्मी को बाँहों में भर लेते हैं।
मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। सुबह सुबह आप फिर से शुरू हो गए। लगता है आप पागल हो गए हैं।
अंकल: डार्लिंग तुम्हारे प्यार ने मुझे पागल बना दिया है। आओ ना। प्यार करने दो ना।
मेरी मम्मी: क्या योगेश जी। पूरी रात भर आप प्यार करते रहे। दिल नहीं भरा क्या।
अंकल: रात भर मेरी जान। अगर मेरा बस चले तो रात क्या जिंदगी भर तुम्हें प्यार करता रहूँ। एक पल के लिए तुझे अपने से दूर होने न दूँ।
मेरी मम्मी: मुस्कुरा कर। छोड़िए ना। अब जो करना है रात में कीजिएगा।
अंकल: यार प्यार करने के लिए रात क्या दिन क्या। और मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगे।
तो मेरी मम्मी बोलीं। हाय आप तो शुरू हो गए। छोड़िए। बाहर का दरवाजा खुला है। और वो लड़की आती होगी जो आपने 3 दिन पहले बुलाई थी।
और मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर दूर जा खड़ी हुईं।
तो अंकल मेरी मम्मी के सामने अपने खड़े लंड को सहलाते। यार क्यों इतना जुल्म कर रही हो।
तो जवाब में मेरी मम्मी उनकी ओर देख मुस्कुराते उनको अंगूठा दिखाती बोलीं। जब से मैंने इसको देखा है ये तो हमेशा ही खड़ा रहता है। अब इसको समझा दीजिए। अब इसको कुछ मिलने वाला नहीं। जो कुछ भी मिलेगा वो रात को ही। समझे जनाब।
अंकल: जो हुक्म रानी साहिबा। हमारी क्या मजाल जो रानी साहिबा के हुक्म की अवहेलना करे। और फिर से सोने लगे।
तो मेरी मम्मी भी मुस्कुराती बेडरूम में बिखरे कपड़े समेटने लगीं। और वहाँ एक साइड में यूज्ड कंडोम जिनमें अंकल का वीर्य भरा हुआ था। उसको उठा कर बाहर फेंक दिया। अंकल तब तक फिर से सो चुके थे। और मेरी मम्मी अपने कपड़े ले कर बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चली गईं।
मेरी मम्मी नहा कर बाथरूम से बाहर आईं। उस समय मेरी मम्मी के बदन पर सिर्फ ब्लैक कलर की ब्रा और ब्लैक कलर की मैचिंग पैंटी थी। ब्रा में मेरी मम्मी की चुचियाँ आधी से ज्यादा बाहर निकली हुई थीं। मेरी मम्मी अपनी चुचियों को ब्रा के कप में अच्छे से एडजस्ट करती हुई आईने के सामने खड़ी हो कर खुद को निहारने लगीं। सच में अंकल के साथ रिलेशनशिप में मेरी मम्मी की चुचियाँ 6 महीनों में काफी बड़ी हो गई थीं। और फिर आईने में देख कर मुस्कुरातीं। आईने के सामने खड़ी अपनी चुचियों को अपने हाथ से मसलती बोलीं। बढ़ेंगे नहीं क्या। सारी रात इन से खेलते रहते हैं। और चूसते रहते हैं।
और आईने में खुद की बॉडी को निहारने लगीं। तो मेरी मम्मी का हाथ उनके ही चूतड़ों पर चला गया। वो भी पहले के मुकाबले में काफी बढ़ गए थे। मेरी मम्मी अपने बदन को निहार ही रही थीं। कि तभी अंकल जो बेड पर लेटे हुए थे। उठ कर मेरी मम्मी के पीछे आ खड़े हुए। उनको अपने पीछे खड़ा देख मेरी मम्मी अपनी हरकतों पर शर्मा गईं। और मुँह छुपाते बोलीं। क्या योगेश जी। आपको शर्म नहीं। जो चोरी चोरी ऐसे किसी के पीछे आ कर खड़े हो गए।
तो जवाब में अंकल पीछे से मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर अपने होठों को मेरी मम्मी की नंगी गर्दन पर रख कर चूमने लगे।
अपने यार के इस तरह प्यार करने पर कोई भी औरत मदहोश हो सकती है। मेरी मम्मी का भी वही हाल था। मस्ती में मेरी मम्मी की आँखें भी बंद होने लगीं।
मेरी मम्मी: ये क्या कर रहे हैं योगेश जी। छोड़िए ना।
अंकल: यार सच में तुम बहुत खूबसूरत हो। तुम्हें छोड़ने का नहीं बल्कि प्यार करने का मन करता है। और मेरी मम्मी की गर्दन मेरी मम्मी के गालों को चूमते अपने एक हाथ को मेरी मम्मी की ब्रा में घुसाने की कोशिश करने लगे।
मम्मी: नहीं योगेश जी।
अंकल: जान चुप रहो। और मम्मी को अपने आगे कर लिया। और अब मम्मी अंकल आमने सामने थे। और अंकल अपने हाथ मम्मी के पीछे ले जाकर मम्मी की ब्रा का हुक खोलने लगे।
मेरी मम्मी: प्लीज योगेश जी। आपको पता है ना। आपके इस तरह करने से मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं रख सकती।
अंकल: यार तो कौन कमबख्त कहता है कंट्रोल करने को। हम कुछ गलत थोड़े ही कर रहे हैं। हम पति पत्नी नहीं हैं। लेकिन तुम्हारे बेटे ने ही कहा है पति पत्नी की तरह रहो। और मेरी मम्मी को खूब चोदो।
और अपने दोनों हाथ पीछे ले जाकर मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया।
और एक हाथ मम्मी की पीठ पर फेरते रहे। और दूसरे हाथ से मेरी मम्मी की जाँघों को सहलाने लगे। तो मम्मी बोलीं। बेटे ने ये कहा है मेरी मम्मी की प्यास उनकी ही परमिशन से बुझाना। ना कि जबरदस्ती करना।
अंकल: तो मैं क्या जबरदस्ती कर रहा हूँ। मैं तो तुम्हारी ही परमिशन से तुम्हें प्यार कर रहा हूँ।
मम्मी: मैंने कब दी परमिशन।
अंकल: तुम्हारी परमिशन तो मुझे तुमने ब्रा पैंटी में मेरे सामने आते ही मिल गई।
मम्मी: अब रहने दीजिए। नहीं तो तुम्हारे इस तरह करने से मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी। और तुम्हारा साथ देने लगूँगी।
अंकल: तो दो साथ मेरा।
मम्मी: योगेश जी छोड़िए ना। चाय बना कर लाती हूँ। वो लड़की भी आने वाली है। और फिर से अंकल की बाँहों से निकलने लगीं। तो अंकल जोर से मेरी मम्मी के गालों को काट खाया। तो दर्द से चीख पड़ीं। और मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर दूर खड़ी अपने गालों को सहलाने लगीं। और उनकी ओर देख कर। क्या योगेश जी। सारी रात आप मुझे खाते रहते हैं। तब भी क्या का मन नहीं भरता।
और फिर मम्मी ने अंकल के सामने ही अपनी ब्रा का हुक अपने हाथ पीछे ले जाकर लगाया। और अपना ब्लाउज पेटीकोट पहना। और फिर साड़ी पहनने लगीं।
मेरी मम्मी अपनी साड़ी पहन कर चाय बनाने के जाने लगीं। तो अंकल ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। और मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा तुमने बताया नहीं कि तुम मुझसे प्यार करती हो या नहीं।
अंकल ने जिस अंदाज से मेरी मम्मी से ये पूछा। तो मेरी मम्मी को भी उन पर इतना प्यार आया कि मेरी मम्मी ने अपने दोनों बाँहों का हार उनके गले में दिया।
और अपना चेहरा उनके चेहरे के पास ले जा कर उनकी आँखों में आँखें डाल कर बोलीं। बता दूँ कि कितना प्यार करती हूँ मैं आप से। तो अभी आप इतना जान लें कि मैं आपको कभी छोड़ कर नहीं जाऊँगी।
अंकल: अच्छा। लेकिन यार ये तो बताओ। डू यू लव मी।
अंकल के इस सवाल पर मेरी मम्मी मुस्कुराते बोलीं। योगेश जी अभी आपको इस सवाल के जवाब के इंतजार करना पड़ेगा। और फिर उनसे दूर खड़ी हो कर मुस्कुराने लगीं।
अंकल ने फिर से मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी बाँहों में खींच लिया। और अपने दोनों हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपने से चिपका कर मेरी मम्मी की आँखों में देखने लगे। और बोले। वर्षा यार अब तो तुम कम से कम मुझे योगेश जी मत कहा करो। कितने दिन हो गए हैं चुदाई करते हुए। और तुम अभी भी योगेश जी कहती हो।
मम्मी: तो क्या कहूँ।
अंकल: अंकुश के पापा।
मम्मी: क्यों। आप अंकुश के पापा थोड़े हो।
अंकल: पापा नहीं हूँ तो क्या। पापा का फर्ज निभा रहा हूँ। उसकी मम्मी की प्यासी चूत को चोदकर।
मम्मी: अंकल की आँखों में देखते ही मुस्कुरा कर मम्मी ने उनसे कहा। कोशिश करूँगी। और अब मैं जाऊँ।
अंकल: यार तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।
मम्मी: कौन सा सवाल।
अंकल: प्यार।
मम्मी: मेरी मम्मी अपनी बाँहें फिर से अंकल के गले में डाल कर। बस कुछ देर और। आज आपको आपके सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा।
अंकल: खुशी से। तो मुझे उस पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहेगा। अच्छा पहले एक पप्पी दो।
मम्मी: अंकल की आँखों में आँखें डाल कर मुस्कुराते हुए कहा। सारी रात करके भी आपका दिल नहीं भरा।
तो अंकल बोले।
अंकल: मेरी जान तुम चीज ही ऐसी हो।
मम्मी: इतना प्यार करते हैं आप मुझे योगेश जी।
अंकल: अपनी जान से भी ज्यादा।
मम्मी: मैं जानती हूँ। जब तक मैं आपको पप्पी नहीं दूँगी। आप मुझे छोड़ने वाले नहीं हैं। आप बड़े जिद्दी हो।
अंकल: तो दो ना।
मम्मी: मम्मी अंकल की आँखों में आँखें डाले। अंकल की साँसें मेरी मम्मी की साँसों से टकरा रही थीं। मेरी मम्मी प्यार से उनके गालों को सहलाते हुए।
अदा से बोलीं। अब मेरा शोना मेरी पप्पी लिए बिना मानेगा नहीं ना। और अपने होठों को अंकल के होठों पर रख कर उनको चूमने लगीं।
तो अंकल कहाँ रुकने वाले थे। उन्होंने अपने होठ मेरी मम्मी के होठों पर रख दिए। और चूमने लगे। और फिर अपने होठ धीरे नीचे की ओर मेरी मम्मी के चुचों पर ले गए। जो दिन पर दिन बड़े होते जा रहे थे। और मेरी मम्मी की चुचियों को चूमने लगे। मेरी मम्मी की साँसें भी गरम होने लगीं। मम्मी ने भी उनको अपनी बाँहों में कस लिया। और उनके बालों में उँगलियाँ फिराने लगीं। और मेरी मम्मी को अंकल के हाथ नीचे की ओर मेरी मम्मी की टाँगों के बीच मेरी मम्मी की चूत को टटोलने लगे। कि तभी दरवाजे पर बेल बजी।
दरवाजे पर बेल सुनाई देते ही मम्मी अंकल से अलग हुईं। और मुस्कुराते अपने यार को चिढ़ाती बोलीं।
मम्मी: कहाँ था। अभी आपको दूध नहीं मिलेगा। चाय पी लीजिए। लेकिन आप पर हमेशा मेरा दूध पीने का भूत सवार रहता है। वो ही लड़की होगी। जाइए जा कर दरवाजा खोल दीजिए। तब तक मैं चाय बना कर लाती हूँ। और फिर से मुँह कर उनकी ओर देख कर मुस्कुराते बोलीं। और हाँ कुछ पहन कर जाइएगा। कहीं ऐसा न हो बेचारी देख कर ही डर जाए।
अंकल: क्या तुम भी डरती हो।
मम्मी: मैं क्यों डरूँगी। मुझे तो अब प्यार करता है। अब जाइए जा कर दरवाजा खोलिए।
अंकल: यार तुम ही खोल दो ना। बहुत थका हुआ हूँ। बड़ी नींद आ रही है।
मम्मी: रात रात भर जनाब शरारत करते रहते हैं। तो अब तो नींद आएगी ही। कितना बोलती हूँ बस कीजिए। लेकिन नहीं। जनाब के सिर पर रोमांस सवार रहता है। आज से आप ज्यादा थके नहीं। इसलिए आज से आपको पूरी रात नहीं। और अदा से ना में मुस्कुराते सिर हिलाने लगीं।
मेरी मम्मी की बात सुन कर अंकल।
अंकल: यार क्यों इतना जुल्म कर रही हो। कहो तो मैं तुम्हारे पैर पड़ जाऊँ। लेकिन ऐसा जुल्म मत करना इस गुलाम पर। मैं अभी जा कर दरवाजा खोल देता हूँ रानी साहिबा।
मम्मी: बीवियों वाले अंदाज में इशारे से। जाइए ना। खोल दीजिए ना। तब तक मैं ये रूम ठीक कर दूँ।
तो अंकल वहीं जमीन पर पड़ा अंडरवियर ही उठा कर पहन कर दरवाजा खोलने चले गए।
मम्मी अभी अपनी साड़ी ठीक कर ही रही थीं। तो मैंने सोचा अब कुछ नहीं होगा उस लड़की के सामने। और मैं चुपके से अपने घर आ गया। और घर आकर पापा को कॉल किया। तो पापा ने कहा एक वीक के बाद आएँगे। तो मैंने भी अंकल को कॉल करके बता दिया।
फिर एक घंटे बाद अंकल का कॉल आया। और बोले। बेटा मेरा और तेरी मम्मी का प्लान है। हम एक वीक कहीं बाहर घूमने जाएँगे। जब तक तेरा बाप न आ जाए। पर तेरी मम्मी तेरी परमिशन चाहती है। वो नखरे करेगी। तू उसे जाने को बोल देना। उसी का प्लान है। पर वो तुझसे कह नहीं सकती।
फिर शाम को मम्मी ने मुझे बुलाया फोन करके। जब मैं अंकल के घर गया। तो मम्मी बेड पे लेटी थीं हेलो कलर के सलवार सूट में।
गुलाबी।
फिर मुझे देखकर खड़ी हुईं। और मुझे गले लगाकर बोलीं। बेटा 4 दिन हो गए हैं। मुझे घर ले चल। मैंने इन 4 दिनों में कैसे बचाया है अपने आप को। नहीं तो मैं... और चुप हो गईं।
मैं: मम्मी। आप भी। आपसे कितनी बार कहा है मैंने। आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लो।
मम्मी: मैंने तुझसे कितनी बार कहा है। नहीं करूँगी।
मैं: ओके मम्मी। पर पापा एक वीक के बाद आएँगे।
मम्मी: नाटक करते हुए। क्या।
अंकल: गुड न्यूज। मैं तेरी मम्मी को अपने फार्महाउस ले जाऊँगा। वहाँ घुमाने। और कंप्यूटर भी सिखा दूँगा।
मम्मी: नो। मैं नहीं जाऊँगी। वहाँ आप मुझे कंप्यूटर नहीं बल्कि मेरे साथ जबरदस्ती करोगे।
मैं: मम्मी अंकल ने आज तक क्या आपके साथ कुछ गलत किया है। वो जो भी करेंगे आपकी परमिशन से ही करेंगे।
मम्मी: बेटा मैं उन्हें परमिशन कभी नहीं दूँगी।
मैं: तो मम्मी आप चली जाइए अंकल के साथ।
मम्मी: नो बेटा।
मैं: मम्मी आपकी मेरी कसम।
मम्मी: कसम क्यों देता है बेटा। ठीक है। चली जाऊँगी।
मैं: और एक वीक बाद पापा आएँगे। तब तक आप अंकल के साथ रहिएगा। और कंप्यूटर सीखना। और ना ही आप मुझे कॉल करोगी।
मम्मी: क्यों बेटा।
मैं: मम्मी एक वीक तक आप कॉल नहीं करोगी। जरूरत पड़ने पे मैं ही कॉल करूँगा।
मम्मी: ओके बेटा।
फिर मैं अपने घर आ गया। और एक वीक के बाद अंकल और मम्मी घर आए अंकल के ही घर। फिर मम्मी अकेली मेरे घर आ गईं। और अंकल की शिकायत करने लगीं। बोलीं। उन्होंने मेरे जबरदस्ती करने की कोशिश की। पर मैंने उन्हें कुछ नहीं करने दिया। और बोलीं। बेटा ये मेरा मोबाइल तू अपने पास रख। मैं सोने जा रही हूँ। और बोलीं। तुझे मेरे मोबाइल में गेम खेलना हो तो खेल लेना। और पासवर्ड बता दिया।
मैं: नहीं मम्मी। मेरे मोबाइल में भी गेम है।
मम्मी: बेटा मेरे मोबाइल को देख लिया कर। और रूम में चली गईं।
फिर मैंने मम्मी का मोबाइल चेक किया। तो उसमें जो फोटो थीं। कई सारी। जिनमें अंकल ने मम्मी को गाड़ी में लंड चुसवाया।



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