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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#45

update 40

मेरी मम्मी अंकल दोनों तैयार हो चुकी थीं कपड़े पहनकर। तभी फिर से गेट बजा। तो मम्मी ने गेट खोला। तो सामने वो ही लड़की खड़ी थी। और अंदर आ गई। और अंकल से बोली। सर कुछ गेस्ट आए हैं आपसे मिलने।

तो अंकल ने कहा। तुम उन्हें बैठाओ। चाय पिलाओ। और मैं कुछ ही देर में आता हूँ।

फिर वो लड़की वापस चली गई। और अंकल ने मम्मी से कहा। वर्षा मेरे कुछ दोस्त आए हैं। प्लीज मेरी हेल्प करोगी।

मम्मी: कैसी हेल्प।

अंकल: मैंने उनसे झूठ बोला था कि मेरी वाइफ आई हुई है।

मम्मी: लेकिन आपका तो डिवोर्स हो गया। तो वापस कैसे आएगी।

अंकल: मेरे दोस्तों को नहीं पता मेरा डिवोर्स हो गया है। मैंने सबकी से कह रखा है मेरी वाइफ दूसरे शहर में जॉब करती है।

मम्मी: लेकिन वो तो आपकी वाइफ को जानते होंगे।

अंकल: नहीं। मेरे दोस्त मेरी वाइफ से पहले कभी नहीं मिले। और ना ही उन्होंने मेरी वाइफ की फोटो देखी है। बस तुम्हें उनके सामने मेरी वाइफ बनकर चलना होगा।

मम्मी: समझ गई। तो चलिए। और ले चलिए मुझे अपनी वाइफ बनाकर अपने दोस्त से मिलवाने।

फिर अंकल मेरी मम्मी के करीब आए। और मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में ले कर मेरी मम्मी की आँखों में देखते हुए कहने लगे। वर्षा अब हम दोनों पति पत्नी ही। इस बेडरूम के अंदर तुम भले ही मुझे योगेश जी कहती हो। पर प्लीज बाहर तुम मुझे मेरे सब दोस्तों और उनकी पत्नियों के सामने मुझे योगेश जी नहीं कहना। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि सब पीछे से मेरा या तुम्हारा मजाक उड़ाए। सिर्फ योगेश बोलना।

तो मेरी मम्मी ने धीरे से कहा। जी योगेश जी। मैं ध्यान रखूँगी।

अंकल: और एक बात वर्षा। अब हम लोगों की नजर में पति पत्नी ही। मेरे दोस्त भी तुम्हें मेरी पत्नी के रूप में जानते हैं। और वो भी मेरी ही उम्र के हैं। और तुमसे करीब 15 से 20 साल बड़े होंगे। सो प्लीज उनको भी अब से अंकल नहीं कहना। क्योंकि उनको अब अगर अंकल कहोगी तो उनको भी अच्छा नहीं लगेगा।

और प्यार से मेरी मम्मी के चेहरे को घुमा कर बोले। रखोगी ना इस बात का ध्यान। बोलो अपने यार की इज्जत का खयाल रखोगी ना।

मम्मी: धीरे से जी।

अंकल: अपने से चिपकाते मेरी मम्मी को। तो फिर बाहर चलें मिसेज योगेश।

तो मेरी मम्मी शर्मा कर जी।

अंकल मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाले बाहर आ गए। और अंकल मेरी मम्मी को अपने सब दोस्तों से मिलवा रहे थे।

अंकल: डार्लिंग इनसे मिलो। ये पीके साहब हैं। मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त।

अपने यार की बात सुन कर मेरी मम्मी ने उनको नमस्ते करते कहा। नमस्ते, भाई साहब।

फिर वो भी मम्मी को नमस्ते भाभी जी बोले। मैंने देखा नमस्ते करते पीके अंकल मेरी मम्मी की तरफ मुस्कुरा रहे थे। फिर अंकल की ओर देख कर। यार भाभी को देख कर मुझे तेरी किस्मत पर रश्क हो रहा है। कि कितनी सुंदर बीवी मिली है। इतनी सुंदर बीवी मिलते ही हम दोस्तों को भूल गया। सुबह से अब रूम से निकला है। लगता है अभी से अपनी लगाम भाभी जी के हाथ में थमा दी।

अंकल: हाँ यार। अब तो हमारे लगाम सरकार के हाथों में हैं। हम तो सरकार के नौकर हैं। और मेरी मम्मी की ओर देख कर। क्यों मेमसाहिब।

मेरी मम्मी अपने यार की बगल में खड़ी शर्मा रही थीं। कि तभी

मिसेज पीके मेरी मम्मी के पास आईं। और मम्मी को पकड़ कर दूसरी ओर ले गईं। जहाँ पहले से 2 लेडीज खड़ी थीं। वो भी अंकल के फ्रेंड्स की पत्नियाँ थीं। मेरी मम्मी वहाँ खड़ी थीं। कि वहाँ खड़ी मिसेज पीके मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर पूछने लगीं। वर्षा रात को भाई साहब ने ज्यादा तंग तो नहीं किया।

मिसेज गुप्ता: अरे बहन क्या बात कर रही। बेचारी की हालत नहीं देख रही। कि कैसे रात भर भाई साहब ने मसला था।

वो ये सब मेरी मम्मी के बदन पर अंकल जी के हर जगह होठों के निशान देख कर मेरी मम्मी से हंसी मजाक कर रही थीं। जबकि मेरी मम्मी वहाँ खड़ी अपनी नजरें झुकाए अपनी साड़ी से उन लव बाइट्स को छुपाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन वो सब बेकार था। वो सब तरह तरह की सेक्सी बातों से मेरी मम्मी से हंसी मजाक करती रहीं। और मेरी मम्मी शर्म से नजरें झुकाए पानी पानी हो रही थीं।

कुछ देर ऐसा ही चलता। तो वो चलने तो लगे। तो अंकल मेरी मम्मी के पास आए। और मम्मी से बोले। वर्षा मैं इनको बाहर तक छोड़ कर आता हूँ।

कोई कुछ बोलता इससे पहले ही मिसेज गुप्ता अंकल से बोलीं। सीखिए अपने दोस्त से। सब काम अपनी बीवी से पूछ कर करते हैं। और एक आप ही।

गुप्ता अंकल: जान। ये जोरू का गुलाम है। मैं नहीं।

और वहाँ सब जोर जोर से हँसने लगे। और मेरी मम्मी वहाँ खड़ी शर्म से अपना मुँह नीचे किए पानी पानी हो रही थीं।

अंकल जी अपने सब दोस्तों को छोड़ कर आए। और मेरी मम्मी को आते ही पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया।

मेरी मम्मी: योगेश जी प्लीज अभी नहीं। बहुत थकी हुई हूँ।

अंकल: डार्लिंग तुम भी काफी थकी हुई हो। तुम भी थोड़ा आराम कर लो।

मेरी मम्मी: और आप योगेश जी।

अंकल: मैं थोड़ा मेरे ऑफिस में कुछ काम है। वो करके आता हूँ। अगर मेरी मालकिन आदेश दे तो।

मम्मी: मम्मी ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दी।

और जैसे ही अंकल ऑफिस के लिए निकलने लगे मेरी मम्मी ने उनको रोका। तो अंकल मेरी मम्मी के पास आए। और मेरी मम्मी को फिर से अपनी बाँहों में भर कर मेरी मम्मी के गालों पर अपने होठों को फिराते बोले। डार्लिंग आप तो खादिम। आपकी नहीं सुनेगा तो फिर किसकी सुनेगा। इसको क्या अपनी नौकरी से जवाब नहीं मिल जाएगा।

अपने यार योगेश जी के इस अंदाज पर मेरी मम्मी मुस्कुराए बिना न रहीं। और बोलीं। क्या योगेश जी आप भी ना। फिर अपने यार से। आप बाजार से आते टाइम वो कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले आएंगे क्या आप।

मेरी मम्मी के कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले कर आने पर वो मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा उसकी जरूरत है क्या। हमारे बीच रात को सब कुछ हो तो गया था।

मेरी मम्मी: प्लीज योगेश जी। रात को जो हुआ इसके लिए ही तो।

अंकल: क्या वर्षा। तुम चाहती नहीं कि हमारा भी बच्चा हो। हमारे प्यार की निशानी हो।

मम्मी: शर्मा पड़ीं। और धीरे से बोलीं। ऐसी बात नहीं है योगेश जी। मैं भी चाहती हूँ हमारे प्यार की निशानी आए। लेकिन मेरे पति ने मुझे कई सालों से छुआ तक नहीं। फिर उसे क्या जवाब दूँगी। और मेरी बुढ़िया सास को मैंने अंकुश के जन्म के बाद बोला था। मम्मी जी आपके बेटे ने नसबंदी करा ली है। तो उसे क्या कहूँगी ये बच्चा कैसे।

अंकल: ठीक है वर्षा। पर ये बताओ। मैं तुम्हें पिछले 6 महीनों से लगातार चोद रहा हूँ। तब तुम क्या आई पिल लेती थी।

मम्मी: हाँ। पर अभी वो खत्म हो गई है। इसलिए।

अंकल: ठीक है। मैं ला दूँगा। लेकिन अब तुम आई पिल कम यूज करना।

मम्मी: ठीक है। मैं आई पिल नहीं लूँगी। आप कंडोम ले आना। और आप कंडोम लगाकर करना।

अंकल: मैं कंडोम ले आऊँगा। अब मैं तुम्हें कंडोम लगाकर चोदूँगा। लेकिन आज रात को कंडोम तुमको अपने हाथों से ही कंडोम मेरे लंड पे चढ़ाना होगा।

मम्मी: अंकल की बात सुनकर शर्मा गईं। और नीचे सिर करके मुस्कुराने लगीं। फिर धीरे से बोलीं। मैं नहीं चढ़ाऊँगी। आप खुद चढ़ाना कंडोम को।

और अंकल की बाँहों से निकल कर शरारत से अंकल को अंगूठा दिखा कर चिढ़ाने लगीं। तो अंकल जाते हुए बोले। अगर तुम नहीं चढ़ाओगी तो मैं भी नहीं चढ़ाऊँगा। ऐसे ही बिना कंडोम के डालूँगा।

तो मम्मी ने मुस्कुरा कर आँखों के इशारे से बताया कि आप ले तो आइए। आपका अपने अंदर लिया है तो फिर उस पर चढ़ा भी दूँगी। और फिर वो बाहर निकल गए।

और मम्मी बेडरूम में जाने लगीं। तो दो लड़कियाँ मम्मी के पीछे पीछे जाने लगीं। (ये क्या। कल तो एक ही लड़की थी। ये दूसरी कब आई मुझे भी नहीं पता।) और फिर मम्मी ने पूछा पहली लड़की से। ये कौन है।

तो लड़की 1: मैम ये मेरी फ्रेंड है। और ये भी जॉब करती है मेरी तरह। और ये अभी एक घंटे पहले ही आई थी।

मम्मी: ओके। पर उसका नाम क्या है।

लड़की 1: मैं यहाँ लड़की 2 लिख रहा हूँ।

और फिर दोनों लड़कियाँ मम्मी के पीछे पीछे रूम में चली गईं। और रूम में जाते ही लड़की 1 (एल1) मम्मी से कहने लगी। मैम मैं सर का बेडरूम ठीक कर देती हूँ।

एल1 की बात सुनते ही साथ में खड़ी एल2 बोली। हाय री ते। क्या बोल रही है तू। ये सिर्फ सर का बेडरूम थोड़ी है। ये तो अब मैम का भी बेडरूम है। अब ये सर मैम दोनों का ही है। क्यों मैम। मैं ठीक कह रही हूँ ना।

मेरी मम्मी वहाँ खड़ी मुँह नीचे किए हुए थीं। शर्म के कारण। क्योंकि वो जानती थीं कि ये दोनों लड़कियाँ जानती हैं कि मैं उनकी बीवी नहीं हूँ। और एक बच्चे की माँ भी हूँ। और मेरा योगेश जी के साथ अफेयर है। इसलिए मम्मी को शर्म आ रही थी।

एल1: अरे हाँ रे। देखा था कैसे सर भी मैम के आगे कैसे हाथ जोड़े खड़े थे।

मेरी मम्मी खड़ी उनकी बातें सुन रही थीं। तो बनावटी गुस्से से बोलीं। चल जाओ यहाँ से। मैं खुद ठीक कर लूँगी।

एल2: जी मैम। आप कितना काम करेंगी। रात भर से काम ही तो कर रही हैं। देख रही हैं अपने आप को कितना थक गई हैं।

एल1: बिस्तर की ओर इशारा करते हुए। वो तो बिस्तर की हालत देख कर ही पता चल रहा है। रात को मैम जी कितना काम किया है। बिस्तर की हालत ही कुछ ऐसी थी। पूरे बिस्तर पर मसले हुए फूल। मेरी मम्मी की टूटी हुई चूड़ियों के साथ साथ मेरी मम्मी की टूटी झुलफें जगह जगह। मेरी मम्मी की चूत के रस के धब्बों के साथ अंकल के वीर्य के धब्बे जो अब सूख चुके। और कहीं कहीं खून के निशान देख कर कोई भी आसानी से बता सकता था कि यहाँ रात भर कितनी जबरदस्त पलंग तोड़ चुदाई हुई थी।

लड़की मेरी मम्मी की ओर देख कर शरारत से बोली। हाय दैया मैम। लगता है मालिक ने रात भर सोने नहीं दिया होगा। आपका अंग अंग मरोड़ कर रख दिया होगा। आप कहें तो मैं दबा दूँ। आराम मिलेगा।

एल2: क्या रे तू भी ना। जब सर ने रात भर मैम से काम करवाया है। मैम थकी भी उनके कारण ही। मैम हमसे क्यों दबवाएँगी। ये तो सर से ही दबवाएँगी। अब तो सोच ले कहीं ऐसे न हो मैम सारा काम सर से ही करवाने लगें। और हमारी छुट्टी हो जाए। मैम हमारी छुट्टी तो नहीं हो जाएगी।

और दोनों मुस्कुराने लगीं। तो मेरी मम्मी मुस्कुराते शर्म से प्यार से हाथ उठा कर। मार खाएगी तू। भाग यहाँ से। मैं कर लूँगी।

(दोस्तों मैं ये सब चुपकर देख रहा था। क्योंकि अंकल ने मुझे छुपने की व्यवस्था पहले ही कर दी थी। मैं उनको देख रहा था। लेकिन वो मुझे नहीं।)

एल1: मैम ये हमें कर लेने दीजिए। मैं तो कहती हूँ आप आराम ही कर लीजिए। सर किसी भी वक्त आ सकते हैं। फिर आपको काम ही करना है।

मेरी मम्मी जानती थीं वो उन्हें क्या काम करना है बोल रही थीं। वैसे सच भी था। मेरी मम्मी भी जानती थीं अंकल किसी भी वक्त आ सकते हैं। और आते ही मेरी मम्मी को ले कर बिस्तर पर चढ़ जाएँगे। और फिर से मेरी मम्मी का बाजा बजाना शुरू कर देंगे।

दोनों लड़कियाँ मुस्कुराती बाहर चली गईं।

मेरी मम्मी: धीमी आवाज में बोलीं। ये दोनों लड़कियाँ सच ही बोल रही हैं। मुझे अब आराम ही कर लेना चाहिए। क्योंकि मेरा अंग अंग दुख रहा है। रात भर योगेश जी ने मुझे इतनी बुरी तरह से निचोड़ा जो था।

फिर मेरी मम्मी मुस्कुरातीं। और खुद रूम ठीक करने लगीं। पता नहीं मेरी मम्मी को क्या सूझा। उन्होंने बिस्तर की चादर और वहाँ पड़ी हर चीज को अपनी सुहागरात की याद के तौर पर संभाल कर रख लिया।

इस बात को मम्मी और मैं भी जानता था। अंकल का मन ऑफिस में नहीं लगता है मम्मी के बिना। और अंकल कभी भी घर आ सकते हैं। इसलिए मेरी मम्मी जल्दी से अपने आप को संवारने लगीं। और फिर मम्मी तैयार होकर अंकल का इंतजार करने लगीं।

और अचानक मम्मी ने फोन उठाया। और अंकल को फोन किया। लेकिन अंकल ने कॉल नहीं उठाया।

मम्मी धीमी आवाज में अपने आप से। शायद ऑफिस में बिजी होंगे। इसलिए मेरा फोन नहीं उठाया।

और मम्मी ने जैसे ही फोन रखा। अंकल रूम के गेट पे आते दिखाई दिए। (क्योंकि मैं भी हॉल में नहीं देख रहा था। मैं सिर्फ मम्मी को ही रूम में देख रहा था। अंकल कब आए मुझे भी नहीं पता।)

मेरी मम्मी अंकल की आँखों में आँखें मिलते ही मुस्कुरा पड़ीं। और मम्मी बोलीं। आ गए योगेश जी। मैं आपको ही फोन कर रही थी।

अंकल: मैडम आपने इस गुलाम को याद किया। गुलाम मैडम की सेवा में हाजिर है।

अपने यार के इस जवाब पर मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ीं। और बोलीं। बातें बातें बनाना तो कोई आप से सीखे। मेरे पिया मेरे साजन मेरे हमदर्द मेरे जीवन साथी। और मैंने आप से कुछ लाने को कहा था। आप वो लेकर आए हैं क्या।

अंकल: ये क्या। मेरे पिया साजन हमदर्द इतने सारे नाम। और क्या लाना था। आपने क्या मँगवाया था।

मेरी मम्मी: मैं जानती थी आप भूल जाएँगे।

अंकल: जान बताओ तो सही क्या लाना था।

मेरी मम्मी: जानती हूँ योगेश जी। आप जान बूझकर मेरे मुँह से सुनना चाहते हैं।

अंकल: डार्लिंग तो सुना दो।

मेरी मम्मी: मैंने आपको आई पिल और कंडोम लाने को बोला था।

और मम्मी इतना बोलकर चुप हो गईं।

अंकल ने अपना बैग खोला। और बैग से एक पैकेट निकाल कर मेरी मम्मी के हाथ में थमा दिया। और अपनी बाँहें मेरी मम्मी के गले में डाल। मेरी मम्मी के करीब अपने चेहरे से मेरी मम्मी का चेहरा जोड़ कर। अब मेरी मम्मी के होठों से उनके होठों के करीब ला कर बोले। महारानी की शान में ये गुलाम इतनी गुस्ताखी कर सकता है। मुझे क्या अपनी नौकरी से हाथ धोना है क्या। मेमसाहिब आपका नौकर हमेशा आपके हुक्म का गुलाम रहेगा। वैसे मेमसाहिब इस नौकर की नौकरी पक्की है या अभी टेम्पररी है।

मेरी मम्मी अंकल की बाँहों से निकल कर शर्माते मुस्कुराते। क्या योगेश जी। हटाइए ना।
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Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 03:05 PM
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