2 hours ago
update 39
अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से हट गए और बेड से नीचे उतर कर खड़े हो गए। और मेरी मम्मी की गाँड को बेड के किनारे पर रख दिया। और मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ कर खड़े हो गए।
मेरी मम्मी बेड पर नंगी आधी लेटी हुई थीं। और मेरी मम्मी की टाँगें जमीन पर थीं। मेरी मम्मी की टाँगों के बीच होने पर अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगों को हाथों से पकड़ कर और फैला दिया।
अब उनका लंड किसी तोपची की तरह ठीक मेरी मम्मी की चूत के सामने था। और जोर जोर झटका मार मार रहा था। मेरी मम्मी की आँखों के सामने लहरा रहा था।
अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगों को पकड़ा हुआ था। तो वो मेरी मम्मी से बोले। डार्लिंग इसको अपने हाथ से पकड़ कर लगाओ ना।
तो अब मेरी मम्मी ने बिना कोई जवाब दिए उनका लंड पकड़ लिया। मेरी मम्मी को अब उनका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाने में कोई शर्म नहीं आ रही थी। क्योंकि रात को सुहागरात हो चुकी थी। और मेरी मम्मी ने उनके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगा रही थीं।
अपने यार के लंड का टोपा अपनी चूत पर लगाते ही मेरी मम्मी के तो सारे बदन में आग सी लग गई। जिससे मेरी मम्मी का बदन काँपने लगा। मेरी मम्मी के बदन में झुरझुरी सी लेने लगी।
अब मेरी मम्मी के यार योगेश अंकल का लंड जो ठीक मेरी मम्मी की चूत के ऊपर था। और अंकल ने एक धक्का मारा। और उनका आधा लंड मेरी मम्मी की चूत फाड़ता हुआ दनदनाता हुआ मेरी मम्मी की चूत के अंदर घुस गया।
मेरी मम्मी तो दर्द से चिल्ला उठीं।
उई... आह... मम्मी... मर... जाऊँगी... मैं... आह... सहन... नहीं... हो... रहा... आह... योगेश जी... धीरे रुक जाइए रुक जाओ ना प्लीज... नहीं ले पाऊँगी।
पर वो कहाँ रुकने वाले थे। वो मेरी मम्मी के ऊपर झुक गए। और मेरी मम्मी के रसीले गुलाबी होठों को अपने मुँह में ले लिया। और बोले।
अंकल: क्या यार तुम भी नहीं ले पाऊँगी। रात को कितनी बार तो लिया है। देखा नहीं कितने आराम से चला गया था। और पिछले 6 महीनों से भी तो ले रही हो।
मम्मी: आप एक बार में पूरा अंदर घुसा डालते हो। आराम से प्यार से धीरे धीरे डालो ना। मैं कोई आपको मना थोड़ी ही कर रही अंदर न डालने के लिए। और रही बात पिछले 6 महीनों से लेने की तो पिछले 6 महीनों से ले रही हूँ। लेकिन कल आपने मेरी चूत सील पैक करवा दी थी ऑपरेशन से। इसलिए दर्द होता है एक बार में डालने से।
अंकल: वर्षा अभी कहाँ पूरा अंदर डाला है। पूरा तो अब अंदर डालूँगा।
और फिर से एक और जोरदार धक्का मारा। उनका ये धक्का इतना जोरदार था कि मेरी मम्मी की तो चीख निकलते निकलते रह गई। क्योंकि उन्होंने मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों से दबा रखा था। मेरी मम्मी नीचे लेटी दर्द से कराह उठीं तो अंकल रुक गए।
अंकल का पूरा लंड जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में घुस चुका था। जड़ तक घुस चुका था। मेरी मम्मी को ऐसा मालूम हुआ कि अब वो मेरी मम्मी की चूत में लंड डाले अपनी कमर को रगड़ने लगे। जिससे उनकी बिना झाँट वाली चमड़ी मेरी मम्मी की चूत के आस पास रगड़ने से मेरी मम्मी को गुदगुदी सी होने लगी।
और 2-3 मिनट तक मेरी मम्मी के ऊपर लेटे रहने के बाद अंकल ने धीरे धीरे लंड को मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मेरी मम्मी अभी भी दर्द से कराह रही थीं। जिससे वो फिर रुक गए। और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे।
अचानक अंकल ने एक और जोरदार धक्का मेरी मम्मी की चूत पर दिया। उनका लंड सनसनाता हुआ मेरी मम्मी की चूत में और ज्यादा अंदर तक घुस गया। अंकल की बिना झाँट वाली चमड़ी मेरी मम्मी को अपनी जाँघों पर घिसती हुई महसूस हो रही थी। झटका इतना जोरदार था कि मेरी मम्मी चिल्लाने लगीं।
निकाल लीजिए आह... मर गई। मैं नहीं ले पाऊँगी।
तो अंकल बोले।
अंकल: मेरी रानी, मेरी जान ये तो तुमने रात को भी लिया था। और तुम अब भी इतना चिल्ला रही हो।
और अंकल मेरी मम्मी की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे। मेरी मम्मी उनके नीचे लेटी आह... आह... कर रही थीं। बिजली की तरह अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में अंदर बाहर होने लगा।
जैसे ही मेरी मम्मी के मुँह से चीख कुछ कम होती वो एक धक्का जोर से लगा देते। और मेरी मम्मी फिर से चीख पड़ती थीं। कुछ देर तक अंकल जी इसी तरह मेरी मम्मी को चोदते रहे। मेरी मम्मी को भी अब मजा आने लगा था। तो मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें उनके गले में डाल कर उन्हें अपने से कस लिया।
मेरी मम्मी अंकल के नीचे लेटी आह आह कर रही थीं। बिजली की तरह अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में गचा गच अंदर बाहर होने लगा। जैसे ही मेरी मम्मी के मुँह से चीख कुछ कम होती मेरे अंकल एक धक्का जोर से मेरी मम्मी की चूत पर लगा देते। और मेरी मम्मी फिर से चीख पड़ती थीं। कुछ देर तक अंकल जी इसी तरह मेरी मम्मी को चोदते रहे।
धीरे धीरे अंकल का पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत की गहराई तक जगह बना चुका था। और तेजी के साथ अंदर बाहर हो रहा था। 8-10 मिनट के बाद मेरी मम्मी को भी मजा आने लगा। और मेरी मम्मी ने अपने पैर अंकल की कमर पर कैंची की तरह कस दिए। और मेरी मम्मी अपनी गाँड उठा उठा कर अंकल का साथ देने लगीं।
अंकल जैसे ही अपनी कमर उठा कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत से बाहर खींचते। मेरी मम्मी उतनी ही तेजी से नीचे से अपने चूतड़ों को उठा कर उनका लंड अपनी चूत में ले लेतीं। मेरी मम्मी और अंकल की कमर अब एक रिदम के साथ साथ चल रही थी।
मेरी मम्मी को इस तरह सहयोग करते देख अंकल खुश होते हुए बोले।
अंकल: शाबाश मेरी वर्षा रानी। अब तो तुझे चुदवाने में दर्द नहीं हो रहा है। ऐसे ही नीचे से अपनी गाँड उछाल उछाल मेरा लंड अपनी चूत में लो।
और दड़दड़ धक्के मारने लगे। और वो लगभग 15-20 मिनट तक मेरी मम्मी को चोदते रहे। मेरी मम्मी तो उनके नीचे लेटी सिसकते हुए।
मम्मी: आह... योगेश जी जी ऐसे ही आह... पूरा अंदर तक डाल कर ऐसे ही और तेज आह... कितना अंदर तक जा रहा है। उई माँ आह... योगेश जी जी और तेज रुकिए नहीं नहीं ऐसे ही बस मैं गई।
इस दौरान मेरी मम्मी की चूत 2 बार अपना पानी छोड़ चुकी थी। और अंकल थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनका लंड तो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।
फिर वो मेरी मम्मी के ऊपर से हट गए। और मेरी मम्मी को घोड़ी की तरह बन जाने को कहा। यानी कि मेरी मम्मी को डॉगी स्टाइल में हो जाने के लिए कहा।
मेरी मम्मी: क्या योगेश जी अभी ऐसे ही कर लीजिए। वो रात को कर लेना। अभी इतना टाइम नहीं। कोई भी किसी भी वक्त आ सकता है।
एक तरह से मेरी मम्मी ने अपने यार को रात को खुद को घोड़ी बना कर चोदने के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया था। शायद मम्मी को बाहर खड़ी लड़की का डर था। उससे शर्म थी। लेकिन मम्मी रात को भी चुदी। उस लड़की ने ही मम्मी को सजाया था। इसलिए मम्मी को भी अब उस लड़की की घर में मौजूदगी में भी अंकल के साथ हमबिस्तर होने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी। क्योंकि एक मर्द एक औरत के साथ ये सब करता है। और उस लड़की को भी पता है मम्मी अंकल के अफेयर के बारे में। उसे ये भी पता है वो दोनों पति पत्नी नहीं हैं। फिर भी उस लड़की ने मम्मी को सजाया था अंकल के लिए।
और अंकल भी कहाँ मानने वाले थे मम्मी के ये कहने के। बस भी रात को घोड़ी बना लेना। और मम्मी भी जान चुकी थीं अंकल को रात का इंतजार नहीं होगा। वो उन्हें अभी घोड़ी बनाकर ही चोदेंगे।
अंकल: जान मेरी वर्षा जान मान जाओ। अब मुझसे रहा नहीं जाएगा रात तक। और तुम तो जानती हो मुझे कितना मजा आता है तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदने में। और तुम्हें भी तो बहुत मजा आता है घोड़ी बनकर अपनी चूत चुदवाने में।
अंकल की बातें सुनकर मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अंकल के सामने अपने हाथों को आगे करके घुटनों के बल हो कर घोड़ी बन गईं। जबकि मैं जानता हूँ मेरे पापा ने कभी भी चुदाई के दौरान इस पोजीशन का इस्तेमाल नहीं किया होगा। जबकि मेरे अंकल चुदाई के दौरान अलग अलग पोजीशन के इस्तेमाल करते मम्मी के साथ में।
अब अंकल मेरी मम्मी के पीछे आए। मेरी मम्मी के चूतड़ों को पकड़ कर अपने लंड को पीछे से मेरी मम्मी की चूत पर लगा कर एक ही धक्के में अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में पूरा पहुँचा दिया। और पीछे से मेरी मम्मी की कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करने लगे।
अब मेरी मम्मी भी अपनी गाँड को पीछे की ओर पुश करके अपने यार की ताल से ताल मिलाने की कोशिश कर रही थीं। मेरी मम्मी के इस तरह झुकने के कारण मेरी मम्मी की चुचियाँ नीचे लटक कर हवा में झूल रही थीं। कि अंकल अपने हाथों को जो मेरी मम्मी की कमर पर थे आगे बढ़ा मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ लिया।
अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ कर ऐसे मेरी मम्मी की चूत पर धक्के लगा रहे। मानो कोई घुड़सवार किसी घोड़ी पर चढ़ा हो। और उसने अपने हाथ में उस घोड़ी की लगाम पकड़ी हुई हो। अंकल ने मेरी मम्मी की चूत पर अपने धक्कों की स्पीड बहुत बढ़ा दी थी।
अंकल तो उस समय किसी रेल की तरह अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में पेल रहे थे। जब अंकल की जाँघें मेरी मम्मी के चूतड़ों से टकरातीं। उस समय थप थप का एक बहुत ही मधुर संगीत कमरे में गूँज रहा था।
आह... आह... मेरी जान... आह... मेरा निकलने वाला है।
और 10-15 धक्कों के बाद अंकल के लंड ने मेरी मम्मी की चूत में पिचकारी छोड़ दी। मेरी मम्मी की पूरी चूत फिर से अंकल के वीर्य से भर गई। मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बदन एकदम पसीने से भीग चुके थे।
तभी उनके बेडरूम के दरवाजे पर फिर से दस्तक हुई। अंकल ने मेरी मम्मी के होठों को चूमा। तो मेरी मम्मी ने भी पहली बार किस के टाइम अपने यार के होठों को चूमा (सुहागरात के बाद)। और अपनी बाँहें अपने यार के गले में डाल दीं। और उनके होठों को चूमने लगीं।
उस समय मेरी मम्मी और अंकल दोनों में से कोई भी एक दूसरे के होठों को छोड़ना नहीं चाहता था। पर वो जानते थे अभी वो लड़की घर में ही। और वो बाहर उनका इंतजार कर रही है।
दरवाजे पर दस्तक होने पर मेरी मम्मी शर्म से बोलीं।
मम्मी: मैंने कहा था ना योगेश जी। वो लड़की क्या सोचेगी।
और जल्दी से वहाँ पड़े अपने कपड़े उठा कर पहनने लगीं। मेरी मम्मी जल्दी से अपनी साड़ी पहनने लगीं।
मेरी मम्मी को साड़ी पहनते अंकल मेरी मम्मी को ही देख रहे थे। अपने यार को इस तरह अपनी ओर देखते मेरी मम्मी बोलीं। आप भी पहन लीजिए ना जल्दी से। वो लड़की बाहर बुला रही है।
और जल्दी से अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए अपने बालों को संवारने लगीं। तब तक अंकल जी तैयार हो चुके थे।
अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से हट गए और बेड से नीचे उतर कर खड़े हो गए। और मेरी मम्मी की गाँड को बेड के किनारे पर रख दिया। और मेरी मम्मी की टाँगों के बीच आ कर खड़े हो गए।
मेरी मम्मी बेड पर नंगी आधी लेटी हुई थीं। और मेरी मम्मी की टाँगें जमीन पर थीं। मेरी मम्मी की टाँगों के बीच होने पर अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगों को हाथों से पकड़ कर और फैला दिया।
अब उनका लंड किसी तोपची की तरह ठीक मेरी मम्मी की चूत के सामने था। और जोर जोर झटका मार मार रहा था। मेरी मम्मी की आँखों के सामने लहरा रहा था।
अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगों को पकड़ा हुआ था। तो वो मेरी मम्मी से बोले। डार्लिंग इसको अपने हाथ से पकड़ कर लगाओ ना।
तो अब मेरी मम्मी ने बिना कोई जवाब दिए उनका लंड पकड़ लिया। मेरी मम्मी को अब उनका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाने में कोई शर्म नहीं आ रही थी। क्योंकि रात को सुहागरात हो चुकी थी। और मेरी मम्मी ने उनके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगा रही थीं।
अपने यार के लंड का टोपा अपनी चूत पर लगाते ही मेरी मम्मी के तो सारे बदन में आग सी लग गई। जिससे मेरी मम्मी का बदन काँपने लगा। मेरी मम्मी के बदन में झुरझुरी सी लेने लगी।
अब मेरी मम्मी के यार योगेश अंकल का लंड जो ठीक मेरी मम्मी की चूत के ऊपर था। और अंकल ने एक धक्का मारा। और उनका आधा लंड मेरी मम्मी की चूत फाड़ता हुआ दनदनाता हुआ मेरी मम्मी की चूत के अंदर घुस गया।
मेरी मम्मी तो दर्द से चिल्ला उठीं।
उई... आह... मम्मी... मर... जाऊँगी... मैं... आह... सहन... नहीं... हो... रहा... आह... योगेश जी... धीरे रुक जाइए रुक जाओ ना प्लीज... नहीं ले पाऊँगी।
पर वो कहाँ रुकने वाले थे। वो मेरी मम्मी के ऊपर झुक गए। और मेरी मम्मी के रसीले गुलाबी होठों को अपने मुँह में ले लिया। और बोले।
अंकल: क्या यार तुम भी नहीं ले पाऊँगी। रात को कितनी बार तो लिया है। देखा नहीं कितने आराम से चला गया था। और पिछले 6 महीनों से भी तो ले रही हो।
मम्मी: आप एक बार में पूरा अंदर घुसा डालते हो। आराम से प्यार से धीरे धीरे डालो ना। मैं कोई आपको मना थोड़ी ही कर रही अंदर न डालने के लिए। और रही बात पिछले 6 महीनों से लेने की तो पिछले 6 महीनों से ले रही हूँ। लेकिन कल आपने मेरी चूत सील पैक करवा दी थी ऑपरेशन से। इसलिए दर्द होता है एक बार में डालने से।
अंकल: वर्षा अभी कहाँ पूरा अंदर डाला है। पूरा तो अब अंदर डालूँगा।
और फिर से एक और जोरदार धक्का मारा। उनका ये धक्का इतना जोरदार था कि मेरी मम्मी की तो चीख निकलते निकलते रह गई। क्योंकि उन्होंने मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों से दबा रखा था। मेरी मम्मी नीचे लेटी दर्द से कराह उठीं तो अंकल रुक गए।
अंकल का पूरा लंड जड़ तक मेरी मम्मी की चूत में घुस चुका था। जड़ तक घुस चुका था। मेरी मम्मी को ऐसा मालूम हुआ कि अब वो मेरी मम्मी की चूत में लंड डाले अपनी कमर को रगड़ने लगे। जिससे उनकी बिना झाँट वाली चमड़ी मेरी मम्मी की चूत के आस पास रगड़ने से मेरी मम्मी को गुदगुदी सी होने लगी।
और 2-3 मिनट तक मेरी मम्मी के ऊपर लेटे रहने के बाद अंकल ने धीरे धीरे लंड को मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मेरी मम्मी अभी भी दर्द से कराह रही थीं। जिससे वो फिर रुक गए। और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे।
अचानक अंकल ने एक और जोरदार धक्का मेरी मम्मी की चूत पर दिया। उनका लंड सनसनाता हुआ मेरी मम्मी की चूत में और ज्यादा अंदर तक घुस गया। अंकल की बिना झाँट वाली चमड़ी मेरी मम्मी को अपनी जाँघों पर घिसती हुई महसूस हो रही थी। झटका इतना जोरदार था कि मेरी मम्मी चिल्लाने लगीं।
निकाल लीजिए आह... मर गई। मैं नहीं ले पाऊँगी।
तो अंकल बोले।
अंकल: मेरी रानी, मेरी जान ये तो तुमने रात को भी लिया था। और तुम अब भी इतना चिल्ला रही हो।
और अंकल मेरी मम्मी की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे। मेरी मम्मी उनके नीचे लेटी आह... आह... कर रही थीं। बिजली की तरह अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में अंदर बाहर होने लगा।
जैसे ही मेरी मम्मी के मुँह से चीख कुछ कम होती वो एक धक्का जोर से लगा देते। और मेरी मम्मी फिर से चीख पड़ती थीं। कुछ देर तक अंकल जी इसी तरह मेरी मम्मी को चोदते रहे। मेरी मम्मी को भी अब मजा आने लगा था। तो मेरी मम्मी ने अपनी बाँहें उनके गले में डाल कर उन्हें अपने से कस लिया।
मेरी मम्मी अंकल के नीचे लेटी आह आह कर रही थीं। बिजली की तरह अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत में गचा गच अंदर बाहर होने लगा। जैसे ही मेरी मम्मी के मुँह से चीख कुछ कम होती मेरे अंकल एक धक्का जोर से मेरी मम्मी की चूत पर लगा देते। और मेरी मम्मी फिर से चीख पड़ती थीं। कुछ देर तक अंकल जी इसी तरह मेरी मम्मी को चोदते रहे।
धीरे धीरे अंकल का पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत की गहराई तक जगह बना चुका था। और तेजी के साथ अंदर बाहर हो रहा था। 8-10 मिनट के बाद मेरी मम्मी को भी मजा आने लगा। और मेरी मम्मी ने अपने पैर अंकल की कमर पर कैंची की तरह कस दिए। और मेरी मम्मी अपनी गाँड उठा उठा कर अंकल का साथ देने लगीं।
अंकल जैसे ही अपनी कमर उठा कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत से बाहर खींचते। मेरी मम्मी उतनी ही तेजी से नीचे से अपने चूतड़ों को उठा कर उनका लंड अपनी चूत में ले लेतीं। मेरी मम्मी और अंकल की कमर अब एक रिदम के साथ साथ चल रही थी।
मेरी मम्मी को इस तरह सहयोग करते देख अंकल खुश होते हुए बोले।
अंकल: शाबाश मेरी वर्षा रानी। अब तो तुझे चुदवाने में दर्द नहीं हो रहा है। ऐसे ही नीचे से अपनी गाँड उछाल उछाल मेरा लंड अपनी चूत में लो।
और दड़दड़ धक्के मारने लगे। और वो लगभग 15-20 मिनट तक मेरी मम्मी को चोदते रहे। मेरी मम्मी तो उनके नीचे लेटी सिसकते हुए।
मम्मी: आह... योगेश जी जी ऐसे ही आह... पूरा अंदर तक डाल कर ऐसे ही और तेज आह... कितना अंदर तक जा रहा है। उई माँ आह... योगेश जी जी और तेज रुकिए नहीं नहीं ऐसे ही बस मैं गई।
इस दौरान मेरी मम्मी की चूत 2 बार अपना पानी छोड़ चुकी थी। और अंकल थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनका लंड तो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।
फिर वो मेरी मम्मी के ऊपर से हट गए। और मेरी मम्मी को घोड़ी की तरह बन जाने को कहा। यानी कि मेरी मम्मी को डॉगी स्टाइल में हो जाने के लिए कहा।
मेरी मम्मी: क्या योगेश जी अभी ऐसे ही कर लीजिए। वो रात को कर लेना। अभी इतना टाइम नहीं। कोई भी किसी भी वक्त आ सकता है।
एक तरह से मेरी मम्मी ने अपने यार को रात को खुद को घोड़ी बना कर चोदने के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया था। शायद मम्मी को बाहर खड़ी लड़की का डर था। उससे शर्म थी। लेकिन मम्मी रात को भी चुदी। उस लड़की ने ही मम्मी को सजाया था। इसलिए मम्मी को भी अब उस लड़की की घर में मौजूदगी में भी अंकल के साथ हमबिस्तर होने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी। क्योंकि एक मर्द एक औरत के साथ ये सब करता है। और उस लड़की को भी पता है मम्मी अंकल के अफेयर के बारे में। उसे ये भी पता है वो दोनों पति पत्नी नहीं हैं। फिर भी उस लड़की ने मम्मी को सजाया था अंकल के लिए।
और अंकल भी कहाँ मानने वाले थे मम्मी के ये कहने के। बस भी रात को घोड़ी बना लेना। और मम्मी भी जान चुकी थीं अंकल को रात का इंतजार नहीं होगा। वो उन्हें अभी घोड़ी बनाकर ही चोदेंगे।
अंकल: जान मेरी वर्षा जान मान जाओ। अब मुझसे रहा नहीं जाएगा रात तक। और तुम तो जानती हो मुझे कितना मजा आता है तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदने में। और तुम्हें भी तो बहुत मजा आता है घोड़ी बनकर अपनी चूत चुदवाने में।
अंकल की बातें सुनकर मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए अंकल के सामने अपने हाथों को आगे करके घुटनों के बल हो कर घोड़ी बन गईं। जबकि मैं जानता हूँ मेरे पापा ने कभी भी चुदाई के दौरान इस पोजीशन का इस्तेमाल नहीं किया होगा। जबकि मेरे अंकल चुदाई के दौरान अलग अलग पोजीशन के इस्तेमाल करते मम्मी के साथ में।
अब अंकल मेरी मम्मी के पीछे आए। मेरी मम्मी के चूतड़ों को पकड़ कर अपने लंड को पीछे से मेरी मम्मी की चूत पर लगा कर एक ही धक्के में अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में पूरा पहुँचा दिया। और पीछे से मेरी मम्मी की कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करने लगे।
अब मेरी मम्मी भी अपनी गाँड को पीछे की ओर पुश करके अपने यार की ताल से ताल मिलाने की कोशिश कर रही थीं। मेरी मम्मी के इस तरह झुकने के कारण मेरी मम्मी की चुचियाँ नीचे लटक कर हवा में झूल रही थीं। कि अंकल अपने हाथों को जो मेरी मम्मी की कमर पर थे आगे बढ़ा मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ लिया।
अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ कर ऐसे मेरी मम्मी की चूत पर धक्के लगा रहे। मानो कोई घुड़सवार किसी घोड़ी पर चढ़ा हो। और उसने अपने हाथ में उस घोड़ी की लगाम पकड़ी हुई हो। अंकल ने मेरी मम्मी की चूत पर अपने धक्कों की स्पीड बहुत बढ़ा दी थी।
अंकल तो उस समय किसी रेल की तरह अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में पेल रहे थे। जब अंकल की जाँघें मेरी मम्मी के चूतड़ों से टकरातीं। उस समय थप थप का एक बहुत ही मधुर संगीत कमरे में गूँज रहा था।
आह... आह... मेरी जान... आह... मेरा निकलने वाला है।
और 10-15 धक्कों के बाद अंकल के लंड ने मेरी मम्मी की चूत में पिचकारी छोड़ दी। मेरी मम्मी की पूरी चूत फिर से अंकल के वीर्य से भर गई। मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बदन एकदम पसीने से भीग चुके थे।
तभी उनके बेडरूम के दरवाजे पर फिर से दस्तक हुई। अंकल ने मेरी मम्मी के होठों को चूमा। तो मेरी मम्मी ने भी पहली बार किस के टाइम अपने यार के होठों को चूमा (सुहागरात के बाद)। और अपनी बाँहें अपने यार के गले में डाल दीं। और उनके होठों को चूमने लगीं।
उस समय मेरी मम्मी और अंकल दोनों में से कोई भी एक दूसरे के होठों को छोड़ना नहीं चाहता था। पर वो जानते थे अभी वो लड़की घर में ही। और वो बाहर उनका इंतजार कर रही है।
दरवाजे पर दस्तक होने पर मेरी मम्मी शर्म से बोलीं।
मम्मी: मैंने कहा था ना योगेश जी। वो लड़की क्या सोचेगी।
और जल्दी से वहाँ पड़े अपने कपड़े उठा कर पहनने लगीं। मेरी मम्मी जल्दी से अपनी साड़ी पहनने लगीं।
मेरी मम्मी को साड़ी पहनते अंकल मेरी मम्मी को ही देख रहे थे। अपने यार को इस तरह अपनी ओर देखते मेरी मम्मी बोलीं। आप भी पहन लीजिए ना जल्दी से। वो लड़की बाहर बुला रही है।
और जल्दी से अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए अपने बालों को संवारने लगीं। तब तक अंकल जी तैयार हो चुके थे।


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