1 hour ago
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अंकल मुस्कुरा कर मेरी मम्मी की ओर ही देख रहे थे। उन्हें अपनी ओर इस तरह देखते देख मेरी मम्मी शर्मा कर कहने लगीं। ऐसी क्या देख रहे हैं।
तो वो मुस्कुराते हुए कहने लगे। तुम्हें वर्षा इस समय तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो।
कोई मर्द किसी औरत के हुस्न की इस तरह तारीफ करे उससे कितनी खुशी होती है। खासकर उसका यार उसकी खूबसूरती की तारीफ करे तो इतनी खुशी ये तो सिर्फ वही औरत बता सकती है।
अपनी खुशी को मेरी मम्मी छुपाती अंकल से कहने लगीं। योगेश जी आपको अभी मैं खूबसूरत लग रही हूँ। रात में नहीं लगी।
तो अंकल मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी का हाथ अपने खड़े लंड पर रख। डार्लिंग मुझसे इससे पूछो। रात से कैसे एकदम खड़ा है।
तो मेरी मम्मी शर्मा कर अपना हाथ छुड़ा कर बोलीं। बस बस अब आप नहा लीजिए। मैं बाहर जाती हूँ किचन में। बाहर वो लड़की हमारा वेट कर रही है। एक बार तो दरवाजा खटखटा कर बुलाने भी आ गई है।
और जैसे ही जाने के लिए मुड़ीं तभी अंकल जी ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। और कहने लगे। इतनी भी क्या जल्दी है मेरी जान। और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा।
और अपने दोनों हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल की छाती से लगी हुई थीं।
मेरी मम्मी को बाँहों में लिए अंकल ने मेरी मम्मी के माथे से मेरी मम्मी की रेशमी झुलफों को हटा कर प्यार से मेरी मम्मी के गालों को सहलाते। अपने होठों को मेरी मम्मी के चिकने गालों पर फिराते बोले। वर्षा डार्लिंग तुम एक नशा हो। मेरी जान क्यों तड़पा रही हो। आओ ना।
और अंकल ने अपने होठ मेरी मम्मी की गर्दन पर लगा दिए। और उसे जोर जोर से चूमने लगे। और अपने दोनों हाथों को मेरी मम्मी की साड़ी के अंदर हाथ डाल कर मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को दबाने लगे।
पता नहीं क्यों अंकल के इस तरह मेरी मम्मी की चुचियाँ दबाने पर मेरी मम्मी अपने आप को बहुत असहज महसूस कर रही थीं। और बोलीं। बाहर वो लड़की है। प्लीज छोड़िए।
अंकल: वो लड़की तो रात में भी बाहर थी। अब नखरे क्यों।
मम्मी: रात में तो आपके साथ ये सब करते मुझे इसलिए ज्यादा फील नहीं हो रहा था कि रात में एक हमारी सुहागरात की रात थी। और हर लड़की की मान में सुहागरात की एक अलग ही एक्साइटमेंट होती है। वो तो सुहागरात के कारण मैंने आपका खुलकर साथ दिया। वो लड़की भी जानती है सुहागरात में तो सब होता है। लेकिन अब दिन है इसलिए जाने दीजिए। नहीं तो कहेगी मैडम दिन में भी।
अंकल: हाँ तो बोल देना दिन में भी करवाती हूँ।
मम्मी: आप भी अब चलिए। दिन में सब नहीं करना। वो कहेगी मैडम दिन में तो आराम करो। इसलिए मैं उसका सामना नहीं कर पाऊँगी।
अंकल: नहीं वर्षा एक राउंड।
मम्मी: नहीं योगेश जी। वो रात थी इसलिए मैंने आपका खुलकर साथ दिया। और देना भी चाहिए। लेकिन अब दिन में भी करवाऊँगी तो कहेगी मैडम। इसलिए मैं उसके इस घर में होते हुए दिन में कुछ नहीं। और मुझे दिन में प्लीज शर्म आएगी। अगर उसने मेरी दिन में चीखें सुन लीं तो।
अंकल: उसने तो पूरी रात सुनी होगी।
मम्मी: रात में हर औरत चुदती है। लेकिन दिन में कपड़े अभी उतारते।
अंकल: वो जानती। मैंने उसके सामने तुझे मंगलसूत्र पहनाया। माँग में सिंदूर डाला।
मम्मी: वो ये भी जानती होगी मैं आपकी वाइफ नहीं हूँ।
अंकल: हाँ उसे पता है तुम मेरी लवर हो। वाइफ नहीं।
मम्मी: इसलिए दिन में नहीं। अब चलिए।
अंकल: उसे पता है तो क्यों डरती हो। जो रात में होता है वो दिन में भी होता है। इसलिए तुम्हारी चुचियाँ मेरी हैं दिन रात।
मम्मी: आप नहीं मानोगे। ठीक है। जब उसके सामने आपने मेरी माँग में सिंदूर डाला है तो कर लीजिए। आपका हक है मेरी चुचियों पर। तो मैं कैसे आपको रोक सकती हूँ। अपनी चुचियों से खेलिए खेलिए। पर पहले नाश्ता कर लो।
अंकल: पहले तुम्हारी चुचियों का नाश्ता करूँगा।
और अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को दबाते हुए काफी एक्साइटेड हो गए थे। और मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ कर मेरी मम्मी की चुचियों के ऊपर से हटा दिया।
मेरी मम्मी के टाइट ब्लाउज में मेरी मम्मी की चुचियों का शेप। और मेरी मम्मी के निप्पल जो एकदम किसी अंगूर के दाने की तरह खड़े थे। साफ नजर आ रहे थे।
अपने यार योगेश जी को भले ही रात में उन्होंने मेरी मम्मी की इन चुचियों को जी भर कर मसला था। चूसा था। लेकिन दिन के उजाले में उनको अपनी चुचियों को इस तरह घूरते देख मेरी मम्मी ने शर्म से अपने हाथों से अपनी चुचियों को ढक लिया।
अंकल ने मेरी मम्मी के हाथ मेरी मम्मी की चुचियों से हटा कर मेरी मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे। और जैसे ही वो मेरी मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे मेरी मम्मी ने उनको रोका। और कहा। योगेश जी नहीं… अभी बाहर जाना है। बाहर वो लड़की हमारा इंतजार कर रही है।
पर अंकल थे माने नहीं। और कहने लगे। वर्षा… इट्स ओके… टाइम है… उसने बुलाया तो नहीं अभी तक… और वैसे भी उसको पता है… सुहागरात हुई है… देर रात को सोए होंगे थके होंगे तो टाइम तो लगेगा…
और उन्होंने मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पूरी तरह से हटा कर नीचे गिरा दिया। और फिर से मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगे। अंकल को इस तरह मेरी मम्मी से प्यार करते देख मेरी मम्मी अंकल से कहने लगीं। आप कितने सेक्सी और हॉट मर्द हो। और कितने रोमांटिक हो। आपके अंदर किसी भी लड़की को अपने वश में करने की कला आती है।
फिर अंकल ने मम्मी के मुँह से अपनी तरफ सुनकर मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और मेरी मम्मी के गाल जो एकदम से शर्म से गुलाबी हो गए उनको चूमने लगे।
अब तो मेरी मम्मी अंकल का साथ देने के लिए मजबूर हो गईं। अंदर से इतनी गरम जो हो गई थीं। अंकल पर अपने नजरों की बिजलियाँ गिराते कहा। क्या।
मम्मी: क्या योगेश जी। आप बड़े वो ही। कैसे मुझे फिर से राजी कर लिया। हटाइए ना। बाहर जाने दीजिए ना। पूरा बदन दर्द कर रहा है।
तो अंकल मेरी मम्मी के होठों को चूमते हुए बोले।
अंकल: मेरी जान ये नौकर किस लिए। तुम कहो तो दबा दूँ तुम्हारा ये बदन।
मम्मी: शर्म आ रही है। हटाइए ना तो।
तो अंकल ने मेरी मम्मी के होठों पर अपने होठ रख दिए। और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे।
मेरी मम्मी के होठों पर लगी लिपस्टिक को अंकल ने चूस चूस कर एकदम से साफ कर दिया था।
अंकल: वर्षा कितनी नरम हो। कितनी नमकीन हो। तुम्हारी लिपस्टिक का ये स्वाद कितना बढ़िया है।
मम्मी ने भी अपनी बाँहें अपने यार योगेश जी के गले में डाल। अपने मुँह को इधर उधर घुमा कर अंकल को ये सिग्नल देने की कोशिश कर रही थीं कि मैं (मेरी मम्मी) अब पूरी तरह से उनका साथ देने को तैयार हूँ।
अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े। मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भरे हुए अपने चिपकाए हुए थे। आखिर अंकल ने मेरी मम्मी के ब्लाउज के सारे हुक खोल कर उसे निकाल दिया। और ब्लाउज उतारने के बाद उन्होंने अपना हाथ पीछे ले जा कर मेरी मम्मी की ब्रा का हुक भी खोल दिया। और एक झटके से ब्रा को मेरी मम्मी के बदन से उतार कर फेंक दिया।
अब मेरी मम्मी ऊपर से पूरी नंगी थीं। मेरी मम्मी की नंगी चुचियों को देखते ही अंकल जी ने अपने हाथ मेरी मम्मी की चुची पर रख। और अपने होठ को मेरी मम्मी के कान के नीचे रख कर चाटने लगे। उनके इस तरह करने से मेरी मम्मी तो एकदम पागल सी हो गईं।
जब उन्होंने मेरी मम्मी के कान अपने होठों में दबा कर चूसने लगे। और फिर जब उन्होंने मेरी मम्मी की गर्दन पर लव बाइट्स करनी शुरू की तो मस्ती में मेरी मम्मी आहें भरने लगीं।
मेरी मम्मी को इस तरह प्यार करते हुए अंकल ने मेरी मम्मी के कान में धीरे से कहा।
अंकल: वर्षा मेरी जान तू बहुत नमकीन है। बहुत ही हॉट और सेक्सी हो। आई लव यू।
उस समय मेरी मम्मी भी गरम हो रही थीं। बस मेरी मम्मी के मुँह से इतना ही निकला। जी।
अब तो मेरी मम्मी को अंकल का लंड जो कि एकदम से खड़ा था। मेरी मम्मी को उनकी गाँड पर साफ महसूस हो रहा था। अंकल के इस तरह करने पर मेरी मम्मी अब पूरी तरह से गरम हो उठी थीं। तो मेरी मम्मी भी अपनी गाँड को हिला रही थीं। ताकि अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड पर ठीक से एडजस्ट हो जाए।
फिर अंकल ने अपना हाथ नीचे ले जा कर मेरी मम्मी की साड़ी की खींच कर मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ खोल दी। और मेरी मम्मी की साड़ी खुल कर मेरी मम्मी के पैरों में आ गई। तो अंकल ने मेरी मम्मी के होठों को चूमते नीचे अपने हाथ से मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा ढूँढने लगे। और उनके हाथ मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े पर आ गया।
अब अंकल ने मेरी मम्मी को किस करते हुए एक झटके में ही मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े को खींच कर खोलने लगे। तो मेरी मम्मी ने अंकल से कहा। योगेश जी इसको मत खोलिए ना। वो लड़की फिर आ जाएगी। इसको (पेटीकोट) को ऊपर उठा कर कर लीजिए।
एक तरह से अपना पेटीकोट ऊपर उठा कर करने का कह कर मेरी मम्मी ने अंकल को खुद को चोदने की परमिशन तो दे दी थी।
अंकल: डार्लिंग ऊपर उठा कर लेने में वो मजा नहीं आएगा। तुम्हारे जैसे हसीन खूबसूरत लवर को अगर पूरी तरह से नंगी करके लेने में जो मजा है वो उठा कर लेने में कहाँ।
अंकल की बात सुन मेरी मम्मी।
मम्मी: नहीं रहने दो। और 3 बजने वाले। वाले घर भी जाना है। अंकुश क्या सोचेगा। मुझे सुबह ही चले जाना था। लेकिन सुबह नहीं गई। अब जाना होगा।
अंकल: तुम उसकी चिंता मत करो। मैंने उससे बोला है। जब तक कि तेरी दादी और नामर्द बाप वापस न आए। तेरी मम्मी मेरे पास रहेगी। और उसने भी कहा है। आप मम्मी को नंगी रखना घर पे। मैं भी नहीं आऊँगा आपके घर। नहीं तो मम्मी को शर्म आएगी। और मम्मी को कपड़े पहनने पड़ेंगे।
और अंकल की बातें सुनकर मम्मी चुप हो गईं। और अंकल ने मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा खींच कर खोल दिया। और जैसे ही उन्होंने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींचा। मेरी मम्मी का पेटीकोट सरक कर नीचे जमीन पर गिर गया।
कुछ देर अंकल मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर से मेरी मम्मी की चूत को सहलाते रहे थे। और फिर उन्होंने अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी में डाल कर उसको नीचे खिसका कर उतार दिया। अब मेरी मम्मी की नंगी गाँड पर मेरे अंकल का लंड लगा हुआ था।
जिससे मेरी मम्मी भी गरम हो गई थीं। मेरी मम्मी की चूत से पानी निकल रहा था। अंकल ने पीछे से मेरी मम्मी की चुचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया। और प्यार से मसलने लगे। और वो जब मेरी मम्मी की चुची के निप्पल्स को अपनी उँगलियों को भर कर मसलने लगे तो मेरी मम्मी के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं।
आह... आह... योगेश जी धीरे मसालो।
अंकल ने मेरी मम्मी को दीवार के सहारे और दबा दिया। और मेरी मम्मी की गाँड पर उनका लंड सटा हुआ था। और मेरी मम्मी की दोनों चुचियाँ अंकल के हाथों में थीं। अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े। बस अपनी उँगली और अंगूठे से मेरी मम्मी के निप्पल्स को बेदर्दी से मसलने में लगे थे।
अंकल के द्वारा मेरी मम्मी अपनी चुचियाँ इस तरह बेदर्दी से मसलने से भी गरम हो उठी थीं। मेरी मम्मी तो जोश में एकदम पागल सी हो रही थीं। जिससे मेरी मम्मी की चूत लगातार पानी छोड़े जा रही थी।
10 मिनट इसी तरह अंकल मेरी मम्मी को दीवार के सहारे खड़ी मेरी मम्मी की चुचियों को मसलने के बाद। अंकल मेरी मम्मी को पकड़ कर बेड के पास ले गए। और बेड पर बैठने को कहा। तो मेरी मम्मी अंकल के कहने पर बेड पर बैठ गईं।
अब तो मेरी मम्मी भी जोश से अपने आप को काबू में नहीं रख पा रही थीं। और अपने यार से बोलीं।
मम्मी: योगेश जी प्लीज जल्दी कुछ करो ना। नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी।
अंकल मुस्कुरा कर मेरी मम्मी की ओर ही देख रहे थे। उन्हें अपनी ओर इस तरह देखते देख मेरी मम्मी शर्मा कर कहने लगीं। ऐसी क्या देख रहे हैं।
तो वो मुस्कुराते हुए कहने लगे। तुम्हें वर्षा इस समय तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो।
कोई मर्द किसी औरत के हुस्न की इस तरह तारीफ करे उससे कितनी खुशी होती है। खासकर उसका यार उसकी खूबसूरती की तारीफ करे तो इतनी खुशी ये तो सिर्फ वही औरत बता सकती है।
अपनी खुशी को मेरी मम्मी छुपाती अंकल से कहने लगीं। योगेश जी आपको अभी मैं खूबसूरत लग रही हूँ। रात में नहीं लगी।
तो अंकल मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर मेरी मम्मी का हाथ अपने खड़े लंड पर रख। डार्लिंग मुझसे इससे पूछो। रात से कैसे एकदम खड़ा है।
तो मेरी मम्मी शर्मा कर अपना हाथ छुड़ा कर बोलीं। बस बस अब आप नहा लीजिए। मैं बाहर जाती हूँ किचन में। बाहर वो लड़की हमारा वेट कर रही है। एक बार तो दरवाजा खटखटा कर बुलाने भी आ गई है।
और जैसे ही जाने के लिए मुड़ीं तभी अंकल जी ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। और कहने लगे। इतनी भी क्या जल्दी है मेरी जान। और मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा।
और अपने दोनों हाथ मेरी मम्मी की कमर में डाल कर मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल की छाती से लगी हुई थीं।
मेरी मम्मी को बाँहों में लिए अंकल ने मेरी मम्मी के माथे से मेरी मम्मी की रेशमी झुलफों को हटा कर प्यार से मेरी मम्मी के गालों को सहलाते। अपने होठों को मेरी मम्मी के चिकने गालों पर फिराते बोले। वर्षा डार्लिंग तुम एक नशा हो। मेरी जान क्यों तड़पा रही हो। आओ ना।
और अंकल ने अपने होठ मेरी मम्मी की गर्दन पर लगा दिए। और उसे जोर जोर से चूमने लगे। और अपने दोनों हाथों को मेरी मम्मी की साड़ी के अंदर हाथ डाल कर मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को दबाने लगे।
पता नहीं क्यों अंकल के इस तरह मेरी मम्मी की चुचियाँ दबाने पर मेरी मम्मी अपने आप को बहुत असहज महसूस कर रही थीं। और बोलीं। बाहर वो लड़की है। प्लीज छोड़िए।
अंकल: वो लड़की तो रात में भी बाहर थी। अब नखरे क्यों।
मम्मी: रात में तो आपके साथ ये सब करते मुझे इसलिए ज्यादा फील नहीं हो रहा था कि रात में एक हमारी सुहागरात की रात थी। और हर लड़की की मान में सुहागरात की एक अलग ही एक्साइटमेंट होती है। वो तो सुहागरात के कारण मैंने आपका खुलकर साथ दिया। वो लड़की भी जानती है सुहागरात में तो सब होता है। लेकिन अब दिन है इसलिए जाने दीजिए। नहीं तो कहेगी मैडम दिन में भी।
अंकल: हाँ तो बोल देना दिन में भी करवाती हूँ।
मम्मी: आप भी अब चलिए। दिन में सब नहीं करना। वो कहेगी मैडम दिन में तो आराम करो। इसलिए मैं उसका सामना नहीं कर पाऊँगी।
अंकल: नहीं वर्षा एक राउंड।
मम्मी: नहीं योगेश जी। वो रात थी इसलिए मैंने आपका खुलकर साथ दिया। और देना भी चाहिए। लेकिन अब दिन में भी करवाऊँगी तो कहेगी मैडम। इसलिए मैं उसके इस घर में होते हुए दिन में कुछ नहीं। और मुझे दिन में प्लीज शर्म आएगी। अगर उसने मेरी दिन में चीखें सुन लीं तो।
अंकल: उसने तो पूरी रात सुनी होगी।
मम्मी: रात में हर औरत चुदती है। लेकिन दिन में कपड़े अभी उतारते।
अंकल: वो जानती। मैंने उसके सामने तुझे मंगलसूत्र पहनाया। माँग में सिंदूर डाला।
मम्मी: वो ये भी जानती होगी मैं आपकी वाइफ नहीं हूँ।
अंकल: हाँ उसे पता है तुम मेरी लवर हो। वाइफ नहीं।
मम्मी: इसलिए दिन में नहीं। अब चलिए।
अंकल: उसे पता है तो क्यों डरती हो। जो रात में होता है वो दिन में भी होता है। इसलिए तुम्हारी चुचियाँ मेरी हैं दिन रात।
मम्मी: आप नहीं मानोगे। ठीक है। जब उसके सामने आपने मेरी माँग में सिंदूर डाला है तो कर लीजिए। आपका हक है मेरी चुचियों पर। तो मैं कैसे आपको रोक सकती हूँ। अपनी चुचियों से खेलिए खेलिए। पर पहले नाश्ता कर लो।
अंकल: पहले तुम्हारी चुचियों का नाश्ता करूँगा।
और अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को दबाते हुए काफी एक्साइटेड हो गए थे। और मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ कर मेरी मम्मी की चुचियों के ऊपर से हटा दिया।
मेरी मम्मी के टाइट ब्लाउज में मेरी मम्मी की चुचियों का शेप। और मेरी मम्मी के निप्पल जो एकदम किसी अंगूर के दाने की तरह खड़े थे। साफ नजर आ रहे थे।
अपने यार योगेश जी को भले ही रात में उन्होंने मेरी मम्मी की इन चुचियों को जी भर कर मसला था। चूसा था। लेकिन दिन के उजाले में उनको अपनी चुचियों को इस तरह घूरते देख मेरी मम्मी ने शर्म से अपने हाथों से अपनी चुचियों को ढक लिया।
अंकल ने मेरी मम्मी के हाथ मेरी मम्मी की चुचियों से हटा कर मेरी मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे। और जैसे ही वो मेरी मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे मेरी मम्मी ने उनको रोका। और कहा। योगेश जी नहीं… अभी बाहर जाना है। बाहर वो लड़की हमारा इंतजार कर रही है।
पर अंकल थे माने नहीं। और कहने लगे। वर्षा… इट्स ओके… टाइम है… उसने बुलाया तो नहीं अभी तक… और वैसे भी उसको पता है… सुहागरात हुई है… देर रात को सोए होंगे थके होंगे तो टाइम तो लगेगा…
और उन्होंने मेरी मम्मी की साड़ी का पल्लू पूरी तरह से हटा कर नीचे गिरा दिया। और फिर से मेरी मम्मी के ब्लाउज के हुक खोलने लगे। अंकल को इस तरह मेरी मम्मी से प्यार करते देख मेरी मम्मी अंकल से कहने लगीं। आप कितने सेक्सी और हॉट मर्द हो। और कितने रोमांटिक हो। आपके अंदर किसी भी लड़की को अपने वश में करने की कला आती है।
फिर अंकल ने मम्मी के मुँह से अपनी तरफ सुनकर मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। और मेरी मम्मी के गाल जो एकदम से शर्म से गुलाबी हो गए उनको चूमने लगे।
अब तो मेरी मम्मी अंकल का साथ देने के लिए मजबूर हो गईं। अंदर से इतनी गरम जो हो गई थीं। अंकल पर अपने नजरों की बिजलियाँ गिराते कहा। क्या।
मम्मी: क्या योगेश जी। आप बड़े वो ही। कैसे मुझे फिर से राजी कर लिया। हटाइए ना। बाहर जाने दीजिए ना। पूरा बदन दर्द कर रहा है।
तो अंकल मेरी मम्मी के होठों को चूमते हुए बोले।
अंकल: मेरी जान ये नौकर किस लिए। तुम कहो तो दबा दूँ तुम्हारा ये बदन।
मम्मी: शर्म आ रही है। हटाइए ना तो।
तो अंकल ने मेरी मम्मी के होठों पर अपने होठ रख दिए। और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे।
मेरी मम्मी के होठों पर लगी लिपस्टिक को अंकल ने चूस चूस कर एकदम से साफ कर दिया था।
अंकल: वर्षा कितनी नरम हो। कितनी नमकीन हो। तुम्हारी लिपस्टिक का ये स्वाद कितना बढ़िया है।
मम्मी ने भी अपनी बाँहें अपने यार योगेश जी के गले में डाल। अपने मुँह को इधर उधर घुमा कर अंकल को ये सिग्नल देने की कोशिश कर रही थीं कि मैं (मेरी मम्मी) अब पूरी तरह से उनका साथ देने को तैयार हूँ।
अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े। मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भरे हुए अपने चिपकाए हुए थे। आखिर अंकल ने मेरी मम्मी के ब्लाउज के सारे हुक खोल कर उसे निकाल दिया। और ब्लाउज उतारने के बाद उन्होंने अपना हाथ पीछे ले जा कर मेरी मम्मी की ब्रा का हुक भी खोल दिया। और एक झटके से ब्रा को मेरी मम्मी के बदन से उतार कर फेंक दिया।
अब मेरी मम्मी ऊपर से पूरी नंगी थीं। मेरी मम्मी की नंगी चुचियों को देखते ही अंकल जी ने अपने हाथ मेरी मम्मी की चुची पर रख। और अपने होठ को मेरी मम्मी के कान के नीचे रख कर चाटने लगे। उनके इस तरह करने से मेरी मम्मी तो एकदम पागल सी हो गईं।
जब उन्होंने मेरी मम्मी के कान अपने होठों में दबा कर चूसने लगे। और फिर जब उन्होंने मेरी मम्मी की गर्दन पर लव बाइट्स करनी शुरू की तो मस्ती में मेरी मम्मी आहें भरने लगीं।
मेरी मम्मी को इस तरह प्यार करते हुए अंकल ने मेरी मम्मी के कान में धीरे से कहा।
अंकल: वर्षा मेरी जान तू बहुत नमकीन है। बहुत ही हॉट और सेक्सी हो। आई लव यू।
उस समय मेरी मम्मी भी गरम हो रही थीं। बस मेरी मम्मी के मुँह से इतना ही निकला। जी।
अब तो मेरी मम्मी को अंकल का लंड जो कि एकदम से खड़ा था। मेरी मम्मी को उनकी गाँड पर साफ महसूस हो रहा था। अंकल के इस तरह करने पर मेरी मम्मी अब पूरी तरह से गरम हो उठी थीं। तो मेरी मम्मी भी अपनी गाँड को हिला रही थीं। ताकि अंकल का लंड मेरी मम्मी की गाँड पर ठीक से एडजस्ट हो जाए।
फिर अंकल ने अपना हाथ नीचे ले जा कर मेरी मम्मी की साड़ी की खींच कर मेरी मम्मी की साड़ी की गांठ खोल दी। और मेरी मम्मी की साड़ी खुल कर मेरी मम्मी के पैरों में आ गई। तो अंकल ने मेरी मम्मी के होठों को चूमते नीचे अपने हाथ से मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा ढूँढने लगे। और उनके हाथ मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े पर आ गया।
अब अंकल ने मेरी मम्मी को किस करते हुए एक झटके में ही मेरी मम्मी के पेटीकोट के नाड़े को खींच कर खोलने लगे। तो मेरी मम्मी ने अंकल से कहा। योगेश जी इसको मत खोलिए ना। वो लड़की फिर आ जाएगी। इसको (पेटीकोट) को ऊपर उठा कर कर लीजिए।
एक तरह से अपना पेटीकोट ऊपर उठा कर करने का कह कर मेरी मम्मी ने अंकल को खुद को चोदने की परमिशन तो दे दी थी।
अंकल: डार्लिंग ऊपर उठा कर लेने में वो मजा नहीं आएगा। तुम्हारे जैसे हसीन खूबसूरत लवर को अगर पूरी तरह से नंगी करके लेने में जो मजा है वो उठा कर लेने में कहाँ।
अंकल की बात सुन मेरी मम्मी।
मम्मी: नहीं रहने दो। और 3 बजने वाले। वाले घर भी जाना है। अंकुश क्या सोचेगा। मुझे सुबह ही चले जाना था। लेकिन सुबह नहीं गई। अब जाना होगा।
अंकल: तुम उसकी चिंता मत करो। मैंने उससे बोला है। जब तक कि तेरी दादी और नामर्द बाप वापस न आए। तेरी मम्मी मेरे पास रहेगी। और उसने भी कहा है। आप मम्मी को नंगी रखना घर पे। मैं भी नहीं आऊँगा आपके घर। नहीं तो मम्मी को शर्म आएगी। और मम्मी को कपड़े पहनने पड़ेंगे।
और अंकल की बातें सुनकर मम्मी चुप हो गईं। और अंकल ने मेरी मम्मी का पेटीकोट का नाड़ा खींच कर खोल दिया। और जैसे ही उन्होंने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींचा। मेरी मम्मी का पेटीकोट सरक कर नीचे जमीन पर गिर गया।
कुछ देर अंकल मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर से मेरी मम्मी की चूत को सहलाते रहे थे। और फिर उन्होंने अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी में डाल कर उसको नीचे खिसका कर उतार दिया। अब मेरी मम्मी की नंगी गाँड पर मेरे अंकल का लंड लगा हुआ था।
जिससे मेरी मम्मी भी गरम हो गई थीं। मेरी मम्मी की चूत से पानी निकल रहा था। अंकल ने पीछे से मेरी मम्मी की चुचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया। और प्यार से मसलने लगे। और वो जब मेरी मम्मी की चुची के निप्पल्स को अपनी उँगलियों को भर कर मसलने लगे तो मेरी मम्मी के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं।
आह... आह... योगेश जी धीरे मसालो।
अंकल ने मेरी मम्मी को दीवार के सहारे और दबा दिया। और मेरी मम्मी की गाँड पर उनका लंड सटा हुआ था। और मेरी मम्मी की दोनों चुचियाँ अंकल के हाथों में थीं। अंकल मेरी मम्मी के पीछे खड़े। बस अपनी उँगली और अंगूठे से मेरी मम्मी के निप्पल्स को बेदर्दी से मसलने में लगे थे।
अंकल के द्वारा मेरी मम्मी अपनी चुचियाँ इस तरह बेदर्दी से मसलने से भी गरम हो उठी थीं। मेरी मम्मी तो जोश में एकदम पागल सी हो रही थीं। जिससे मेरी मम्मी की चूत लगातार पानी छोड़े जा रही थी।
10 मिनट इसी तरह अंकल मेरी मम्मी को दीवार के सहारे खड़ी मेरी मम्मी की चुचियों को मसलने के बाद। अंकल मेरी मम्मी को पकड़ कर बेड के पास ले गए। और बेड पर बैठने को कहा। तो मेरी मम्मी अंकल के कहने पर बेड पर बैठ गईं।
अब तो मेरी मम्मी भी जोश से अपने आप को काबू में नहीं रख पा रही थीं। और अपने यार से बोलीं।
मम्मी: योगेश जी प्लीज जल्दी कुछ करो ना। नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी।


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