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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#38
update 35  

मेरी मम्मी ने अंकल का लंड अपनी चूत पर लगा कर उसे पकड़े रखा ताकि जब अंकल धक्का मार कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसाने लगे तो कहीं फिर से उनका लंड स्लिप हो कर खिसक न जाए।  

मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल के नीचे लेटी। अपने होठों को अपने मुँह में कस कर दबा लिया ताकि जब उनका यार योगेश अंकल अपना बाँस जैसा लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसाए तो मेरी मम्मी की चीख कहीं बाहर न निकल जाए।  

अंकल अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के ऊपर लगा। अंकल ने एक धक्का मारा। उनका लंड का मोटा सुपाड़ा मेरी मम्मी की टाइट सील पैक चूत को चीरता हुआ अंदर तक जा कर रुक गया।  

अंकल जी का डेढ़ इंच से लंबा और बाँस सा मोटा सुपाड़ा मेरी मम्मी की लचीली गुफा जैसी चूत को फैलाता रुका। जैसे मेरी मम्मी और अंकल के बीच एक संपर्क सा पूरा हो गया था। अंकल के लंड का सुपारा ही मेरी मम्मी की चूत में समाए हुए गदर मचा रहा था। दर्द के मारे मेरी मम्मी मुँह से चीख ही निकल गई।  

अगर कोई घर में होता तो मेरी मम्मी की चीख सुन लेता। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे किसी ने मेरी मम्मी की चूत में कोई कीला ठोक दिया हो।  

इससे पहले कि वो अपने लौड़े को मेरी मम्मी की चूत के ओर अंदर करते, मेरी मम्मी चिल्लाती हुई उनसे बोली।  
आह.... प्लीज...... योगेश..... जी........ रुक जाइए...…..... मर गई..... मि प्लीज इसे बाहर निकाल लीजिए। आप ने एक बार ही पूरे का पूरा अंदर तक घुस दिया।  

अंकल: वर्षा कहाँ पूरा अंदर घुसा ही। अभी तो सिर्फ टोपा ही गया ही। तुम्हारी चूत कितनी टाइट हो गई है ऑपरेशन से।  

जैसे ही अंकल ने मम्मी से कहा कि उनके लंड का सुपाड़ा ही मेरी मम्मी की चूत के अंदर गया है, तो मेरी मम्मी हैरानी से सोचने लगी। क्या अभी सिर्फ सुपाड़ा ही मेरी चूत में गया ही तो दर्द से मेरा ये हाल ही। और जब पूरा लंड झड़ तक अंदर जाएगा तब मेरा क्या हाल होगा।  

यही सोचकर मेरी मम्मी अंकल को आगे बढ़ने से रोकना चाहती थी। पर उस समय अंकल कहाँ रुकने वाले थे।  

अंकल मेरी मम्मी की आँखों में आँखें डाल कर बोले। रानी ये तो स्वर्ग का द्वार ही जो मैंने खोल दिया ही। अब देखा तुझे कितना मज़ा मिलता ही।  

और वो नीचे झुके। अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों पर रख कर चूमने लगे।  

मेरी मम्मी का दर्द के मारे बुरा हाल था। मेरी मम्मी चीख भी नहीं सकती थी क्योंकि अंकल ने अपने होठों से मेरी मम्मी के होठों को दबा कर मेरी मम्मी का मुँह पूरी तरह से बंद कर रखा था। जिससे कि मेरी मम्मी चिल्ला भी नहीं सकती थी।  

अंकल मेरी मम्मी की चूत में अपने लंड डाले। मेरी मम्मी के होठों को चूस रहे थे। अपने हाथों से मेरी मम्मी की चुचियों को दबा रहे थे और धीरे धीरे अपनी कमर भी चला रहे थे। जिस कारण मेरी मम्मी को कुछ राहत मिल रही थी।  

मेरी मम्मी को कुछ राहत मिलती देख कर अंकल एक और ज़ोरदार धक्का मेरी मम्मी की चूत पर मारा।  

मुझे तो लगा कि मेरी मम्मी तो जैसे मर ही गई और मेरी मम्मी की साँसें बाहर निकल गई हों। क्योंकि अंकल का ये धक्का इतना ज़ोरदार था कि उनका लंड पूरी तरह मेरी मम्मी की चूत को चीरता हुआ लोहे की पाइप की जैसा सख्त और मेरी कलाई के जितना मोटा लंड मेरी मम्मी की चूत में लगभग ६ इंच तक अंदर तक घुस गया।  

यही वो हद थी जहाँ तक शायद हर मर्द का जाता है। लेकिन मेरे नामर्द बाप का तो कभी गया भी नहीं होगा। हर मर्द का इतना ही जाता होगा। लेकिन अंकल का तो नॉर्मल मर्दों से भी बड़ा था।  

यानी कि हर औरत इतना तो लेती है। लेकिन मेरी मम्मी को तो इससे भी आगे का सफर करना था। मेरी मम्मी को अपनी चूत में अंकल के लंड को लेकर प्यार करना था और ये ही स्पेशल सुहागरात होगी।  

उनका लंड मेरी मम्मी की चूत में कुछ ऐसा फँसा था कि जैसे किसी ने एक टाइट बोतल को किसी कॉर्क से बंद कर दिया हो।  

दर्द के मारे मेरी मम्मी अपने सिर को झटके दे दे कर इधर उधर कर रही थी और अंकल को अपने ऊपर से पीछे को धकेल रही थी। पर मेरी मम्मी अंकल को अपने ऊपर से पीछे हटाने में कामयाब नहीं हो पा रही थी।  

होती भी कैसे। कहाँ मेरी मम्मी हीरानी के जिस्म जैसी पतली सी और अंकल भैंसे के जैसे हट्टे कट्टे। उन्हें मेरी मम्मी के इस दर्द की क्या परवाह।  

आप तो जानते ही कि अगर कोई लड़की किसी मर्द के लंड के नीचे आ जाए तो वो मर्द उसे कैसे छोड़ सकता है। और कल की बात तो ये कि मेरी मम्मी तो चंचल हीरानी से भी ज्यादा ब्यूटीफुल सेक्सी क्यूट नाज़ुक कली थी।  

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत में फँसाए। मेरी मम्मी के ऊपर लेट गए और मेरी मम्मी के होठों को चूसने लगे।  

दर्द के मारे मेरी मम्मी अपने पैरों को अंकल के ऊपर पटकने लगी। मेरी मम्मी के आँखों से दर्द के कारण आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।  

मेरी मम्मी की दोनों टाँगें अंकल के कब्जे में थी और मेरी मम्मी के रसीले गुलाबी होठों पर अंकल के होठों का कब्जा था।  

अंकल ये बात अच्छी तरह से जानते थे कि मेरी मम्मी का ये दर्द कुछ देर के लिए ही। और अगर उन्होंने इस समय मेरी मम्मी के दर्द की परवाह की और मेरी मम्मी को छोड़ दिया तो कहीं मेरी मम्मी उनको दोबारा न चढ़ने दे। क्योंकि एक बार चूत चुदने से बच गई तो दोबारा फिर से गरम करना पड़ेगा।  

अंकल धीरे धीरे अपनी कमर को चला कर अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर कर रहे थे। कि तभी उन्होंने एक और तेज़ शॉट मेरी मम्मी की चूत पर लगा दिया। और अंकल का अपना मूसल लंड मेरी मम्मी की चूत को चीरता हुआ अंदर तक घुस गया।  

मेरी मम्मी की चूत की झिल्ली टूट चुकी थी जो पहले से टूटी थी। लेकिन ऑपरेशंस के कारण फिर से नई बनी थी। वो भी टूट गई क्योंकि उसी झिल्ली के लिए तो ऑपरेशन करवाया था अंकल ने मेरी मम्मी की चूत का।  

और अंकल का फौलादी लंड मेरी मम्मी के अंदर इतनी गहराई तक समा चुका था जहाँ मेरी मम्मी की बच्चेदानी थी। मेरी मम्मी की आँखों से आँसू की धारा बह रही थी। मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि आज ही मेरी मम्मी का कौमार्य भंग हुआ ही। मेरी मम्मी की नाथ आज ही टूटी ही।  

(२० साल पहले तो न तो मेरे नामर्द बाप ने मेरी मम्मी का कौमार्य भंग किया था और न ही मेरी मम्मी की नाथ तोड़ी थी। उस मादरचोद ने मेरी मम्मी की चूत में लुल्ली भी पूरी क्या १ इंच भी नहीं घुसाई होगी। पर मैं कैसे पैदा हुआ ये भी मुझे नहीं पता।  

पर वो तो ६ महीने पहले अंकल ने मेरी मम्मी का कौमार्य भी भंग किया था और नाथ भी तोड़ी थी मेरी मम्मी की। और आज भी ऑपरेशन से बनाया गया कौमार्य भी आज अंकल ने फिर से भंग कर दिया और नाथ भी तोड़ दी।  

अंकल ने सही कहूँ तो अंकल न होते तो मेरी मम्मी सारी जिंदगी कुँवारी रहती। शरीर से भले ही दुनिया के सामने वो मेरे पापा की पत्नी है।)  

मेरी मम्मी तो बिल्कुल बेहोशी की हालत में पड़ी थी और अंकल के नीचे लेटी चीख रही ही चिल्ला रही थी। प्लीज योगेश जी, इसे निकाल लीजिए। मैं नहीं ले सकती इतना बड़ा। मर जाऊँगी।  

उस समय मेरी मम्मी दर्द से इतना तड़प रही थी कि कभी अपने हाथों को अंकल के गले में डाल कर कस रही थी ताकि वो हिल न सके। और कभी अपनी बाँहों को फैला कर बेड की चादर को अपनी मुट्ठियों में भर कर खींच रही थी।  

मेरी मम्मी की बात सुनते ही अंकल ने कहा। मेरी जान क्या कह रही हो तुम कि तुम नहीं ले सकती। बल्कि ये कहो कि तुम ने पूरा का पूरा लंड ले लिया।  

मेरी मम्मी को अंकल की बात पर विश्वास ही नहीं हुआ कि उन्होंने कैसे उनका इतना लंबा और मोटा लंड अपनी इस टाइट सील पैक चूत में ले सकती हूँ। ये जानने के लिए क्या वो सच बोल रहे हैं।  

मेरी मम्मी ने अपना हाथ नीचे की ओर ले गई और अपने हाथ लगा चेक किया। तो मेरी मम्मी को अपने आप पर ही विश्वास नहीं हुआ कि कैसे मेरी मम्मी की छोटी सी चूत उनका इतना बड़ा लौंडा अपने अंदर निगल गई।  

दोस्तों आपको बता दूँ। मम्मी पिछले ६ महीनों से अंकल का पूरा लंड ले रही है। लेकिन आज उनकी चूत सील पैक हुई है ऑपरेशन से। इसलिए विश्वास नहीं हो रहा था मम्मी को।  

अंकल मेरी मम्मी की चूत में अपना लंड डाल कर पड़े थे और मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में भर कर मेरी मम्मी के निप्पल को चूस रहे थे। अंकल के द्वारा मेरी मम्मी की चुची चूसे जाने पर मेरी मम्मी को कुछ शांति मिली।  

मेरी मम्मी के चेहरे पर दर्द कम होता देख कर अंकल ने प्यार से मेरी मम्मी के बालों में अपना हाथ फेरते हुए मेरी मम्मी के गालों को चूमते हुए बोले। बस मेरी जान, वर्षा हो गया।  

…अब और इतना कहते हुए अंकल ने अपना मोटा लंड धीरे से मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकाला।  

जैसे ही अंकल ने अपना लंड मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकाला, उस समय मेरी मम्मी की चूत से फटक की आवाज़ हुई कि जैसे किसी ने बंद बोतल से कॉर्क निकाला हो।  

इससे पहले मेरी मम्मी कुछ समझ पाती, अंकल ने एक ज़ोरदार झटके से अपना लंड फिर से पूरा मेरी मम्मी की चूत में डाल दिया।  

मेरी मम्मी अपने यार योगेश अंकल के नीचे लेटी तड़प रही थी और उनसे छूटने की हर कोशिश कर रही थी। लेकिन कोई भी शेर अपने हाथ आए शिकार को कैसे जाने दे सकता ही। अंकल उस समय किसी शेर की तरह मेरी मम्मी को अपने कब्जे में किए मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे।  

मम्मी: आह… योगेश जी ….प्लीज… बहुत… दर्द….. ओह गुड।  

मेरी मम्मी की छोटी सी गाँड काँप रही थी। अंकल थे वो अब धीरे से अपने लंड को मेरी मम्मी की चूत से बाहर निकालते ...और फिर से एक झटके में पूरा मेरी मम्मी की चूत के अंदर डाल देते।  

अंकल द्वारा मेरी मम्मी की चूत पर धक्कों के कारण मेरी मम्मी का दर्द थोड़ा कम हो गया था। ... वो फिर से धक्का मारने लगे।  

अब तो अंकल एक रिदम के साथ मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मार लंड मेरी मम्मी की चूत में अंदर बाहर करने लगे। और उन्होंने रेगुलरली मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मारने लगे।  

पूरे कमरे में पुच्छ्छ.. पुच्छ्छ आवाज़ गूँज रही थी।  

मेरी मम्मी की दर्द भरी चीखें कब मस्ती भरी चीखों में बदल गई, मुझे पता ही नहीं चला। और मेरी मम्मी अब मस्ती से सिसकने लगी।  

मेरी मम्मी के मुँह से तो बस ..आह... आह.. आह.. हाय मर गई धीरे आह योगेश जी बस मैं गई आह।  

और बस कमरे में मेरी मम्मी की चूड़ियों के खनकने की और मेरी मम्मी की सिसकियों की आवाज़ के मेरी मम्मी और अंकल के धक्कों से बेड के हिलने की आवाज़ चर चर की गूँज रही थी। मेरी मम्मी के हाथ भी अंकल के पीछे उनके चूतड़ पर चले गए थे।  

और मेरी मम्मी अपने हाथ अंकल की गाँड पर रख कर उनको अपने अंदर और कस रही थी।  

मेरी मम्मी को मस्ती में देख कर तो अंकल भी अब ज़ोर से मेरी मम्मी की चूत पर धक्के मारने लगे।  

मेरी मम्मी की चूत भी अब पानी छोड़ रही थी जिससे लंड मेरी मम्मी की चूत में जाने से आसानी हो रही थी। और मेरी मम्मी की चूत के रस की चिकनाई से अंकल का लंड आसानी से मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था।  

अंकल का लंड अब किसी बिना रुकावट के गचा गच मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर आ जा रहा था।  

अंकल जो मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े मेरी मम्मी की चूत पर तबड़तोड़ धक्के मार रहे थे। सच में अब तो रूम में मेरी मम्मी की पलंगतोड़ दमदार चुदाई हो रही थी। आज मेरी मम्मी को उनकी दूसरी सुहागरात में पहली बार ऐसी पलंगतोड़ दमदार चुदाई का आनंद मिल रहा था।  

सच में जब अंकल अपना मूसल लंड निकाल कर जड़ कर मेरी मम्मी की चूत में ठेलते, उनका लंड मेरी मम्मी की बच्चेदानी से टकराते। मेरी मम्मी को इतना मज़ा मिलता मैं बता नहीं सकता। ये तो सिर्फ मम्मी ही बता सकती है।  

लेकिन मेरी मम्मी के चेहरे से पता चल रहा था उन्हें अद्भुत स्वर्ग का आनंद मिल रहा है। मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मेरी मम्मी किसी मस्त घोड़े पर बैठी जन्नत की सैर कर रही है।  

और अंकल ऊपर से मेरी मम्मी की चुचियों को चूस रहे थे। अपने दाँतों से काट रहे थे।  

जैसे ही वो मेरी मम्मी की चुचियों को काटते, मेरी मम्मी एक मीठे दर्द से चिल्ला कर बोली। उई माँ। योगेश जी। मर गई धीरे करिया। आपका बड़ा लंबा और मोटा ही आह आह।  

और मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें अंकल की कमर में फँसा दी। और मेरी मम्मी ने अपने हाथ उनके गले में डाल उनको अपने में समाने के लिए खुद ही उतावली हो रही थी।  

मेरी मम्मी और अंकल दोनों के बदन एक दूसरे से चिपके हुए थे। अब मेरी मम्मी अंकल के धक्कों के साथ नीचे से अपनी गाँड उठा उठा कर अंकल के धक्कों का जवाब दे रही थी।  

मेरी मम्मी की चूत में अंकल अपना लंड अंदर बाहर करते मेरी मम्मी से पूछने लगे। वर्षा मज़ा आ रहा ही।  

उस समय तो मस्ती में मेरी मम्मी इतना ज्यादा डूब चुकी थी। बिना कोई शर्म के बोली। जी योगेश जी बहुत।  

अंकल: डार्लिंग अभी तो और मज़ा करवाऊँगा आगे तुम्हें।  

पता नहीं मेरी मम्मी के मुँह से निकल गया।  
मम्मी: योगेश जी मैं भी मज़ा करना चाहती हूँ।  

और अंकल मेरी मम्मी की बात पे मेरी मम्मी को फुल स्पीड से अपने लंड से मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करने लगे।  

मेरी मम्मी उनके नीचे लेटी आह…..आह…आई... करके झड़ने लगी।  

मेरी मम्मी की चूत के पानी के साथ अंकल का लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करता फुच फुच की आवाज़ कर रहा था। पूरे कमरे में चुदाई का माहौल गरम हो चुका था।  

फुच्च.. फुच्च्त……. थप्प…. थप्प… थप्प.. आह… ऊम्म.. हम्म. . योगेश जी……आह….आह.. ऊफ्… ओह… ओह…. फुच्च.. फुच्च…..….  

अब तो अंकल अपने धक्कों की रफ्तार को तेज़ करते हुए ऐसे ज़ोर से चिल्ला रहे थे जैसे कोई शेर चिल्ला रहा हो। अंकल के धक्कों की रफ्तार देख कर यही लग रहा था कि मानो कि झड़ने के बहुत ही करीब हो और वो जल्द से जल्द अपना जूस मेरी मम्मी की चूत में निकालना चाहते हो।  

मेरी मम्मी का यार योगेश अंकल का लौंडा मेरी मम्मी की बच्चेदानी तक टकरा रहा जिससे कि मेरी मम्मी को बड़ा आनंद महसूस हो रहा था।  

तभी अंकल के लंड ने झटके से पिचकारी छोड़ी और जितना वीर्य उनके अंदर भरा हुआ था वो सारे का सारे मेरी मम्मी की कोख में भर कर झड़ने लगे।  

अंकल का वीर्य जब मेरी मम्मी के पेट के अंदर गया तो मेरी मम्मी को ऐसा लगा होगा कि जैसे किसी ने मेरी मम्मी के अंदर नाल खुला छोड़ दिया हो।  

मेरी मम्मी की चूत तो अंकल के वीर्य से एकदम भरी हुई थी कि तभी मेरी मम्मी की चूत ने भी तीसरी बार उनके साथ ही पानी छोड़ दिया। मेरी मम्मी की चूत से आज से पहले कभी इतना पानी नहीं आया था। शायद पिछले ६ महीनों में भी नहीं।  

मेरी मम्मी अपने चूतड़ों को पूरा ऊपर उठाए अपनी जाँघों को पूरी तरह से फैलाए उनके वीर्य की हर बूँद को अपने अंदर ले रही थी। ताकि अपने यार योगेश अंकल के कीमती वीर्य की एक भी बूँद मेरी मम्मी की चूत से बाहर नहीं चले।  

वैसे चलने का सवाल भी पैदा नहीं हो रहा था क्योंकि अंकल का मोटा लंड मेरी मम्मी की चूत में ऐसा घुसा हुआ था जैसे किसी बोतल में कॉर्क को ठूँस कर उस बोतल को बंद कर दिया हो। अंकल का मस्त लंड अब भी मेरी मम्मी की चूत में घुसा मेरी मम्मी की बच्चेदानी से चिपका हुआ था।  

मेरी मम्मी और उनके यार योगेश अंकल का रिश्ता ऐसा लग रहा था जैसे पति पत्नी हो। पर ऐसा नहीं था। वो सिर्फ सुहागरात मना रहे थे लेकिन शादी नहीं की थी। इसलिए पति पत्नी नहीं थे। लेकिन लग रहा था मम्मी अंकल का रिश्ता अब पति पत्नी के रिश्ते में बदल चुका हो।  

अंकल पसीने से लथपथ मेरी मम्मी के ऊपर ही ऐसे ढेर हो गए मानो कितना थक गए हो। वैसे उन्होंने मेहनत भी कितनी की थी। मेरी मम्मी जैसी नाज़ुक कली को कितनी बुरी तरह से मसल कर। मेरी मम्मी जो आज ऑपरेशन करवाकर अपनी चूत को सील पैक करवाकर एक नाज़ुक कच्ची कली और कुँवारी लड़की बनी थी उसे एक कली से फूल बना दिया था।  

अंकल ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में कस लिया। मेरी मम्मी के चेहरे पर तो एक असीम आनंद का भाव था। और जैसे ही मेरी मम्मी की नज़र अंकल से मिली तो मेरी मम्मी ने शर्म के मारे अपना मुँह उनकी छाती में ही छुपा लिया।  

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर कुछ देर तक ऐसे ही पड़े रहे मेरी मम्मी की चूत में अपना लंड डाले। और जब उनके लंड ने मेरी मम्मी की चूत में अपना पानी गिरना बंद हुआ तो उन्होंने उसे मेरी मम्मी की चूत से खींच कर बाहर निकाल लिया और मेरी मम्मी की ओर एक साइड पर लेट गए।  

जैसे ही मेरी मम्मी की नज़र उनके लंड पर गई तो मेरी मम्मी ये देख कर हैरान रह गई कि अंकल का लंड मेरी मम्मी के खून और पानी से भरा हुआ था। मेरी मम्मी और अंकल दोनों की साँसें बड़ी तेज़ी से चल रही थीं।  

अंकल ने मेरी मम्मी को फिर से अपनी बाँहों में समेट लिया और मेरी मम्मी के गालों को चूमते हुए बोले।  

अंकल: वर्षा आज मैं बड़ा खुश हूँ। आज तुमने जो मज़ा मुझे दिया है वो मुझे मेरी बीवी के साथ भी सुहागरात में नहीं मिला। वैसे तो तुम मुझे पिछले ६ महीनों से मज़े दे रही हो पर सुहागरात में पहली बार मिला है।  

वर्षा मैंने पहली सुहागरात मेरी वाइफ के साथ और दूसरी तुम्हारे साथ सुहागरात मनाई है। सच तो ये है मेरी बीवी ने सुहागरात में तो क्या सुहागरात के बाद भी मैं उसके साथ २५ साल रहा हूँ। लेकिन उसने ऐसा आनंद २५ सालों में नहीं दिया था।  

मुझे तो अपनी किस्मत पर ही यकीन ही नहीं हो रहा कि तुम्हारी जैसी लड़की मेरी एक लड़के की माँ होते हुए भी तुम मेरे साथ हो गई। और तूने मेरे प्यार को एक्सेप्ट कर लिया। और तुम्हारी जवानी का रस चखने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ।  

मैंने तो सोचा था कि डिवोर्स के बाद किसी औरत की ओर देखूँगा भी नहीं। पर तुम ने मेनका बन कर मेरी तपस्या भंग कर दी। कसम से जब से तुम्हें देखा तुम्हें पाने के लिए दिन रात तड़पा हूँ।  

और फिर मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में कसते हुए मेरी मम्मी की आँखों में देख कर बोले। वर्षा तुमको कैसा लगा।  

मेरी मम्मी शर्म से कुछ न बोली। तो उन्होंने फिर पूछा। बताओ ना वर्षा मेरा प्यार करना तुमको कैसा लगा।  

तो जवाब मेरी मम्मी मुस्कुरा पड़ी और शर्म से अपना मुँह दूसरी ओर कर लिया। और धीरे से बोली। कितनी ज़ोर से करते हो आप। मुझे तो ऐसे निचोड़ डाला जैसे कोई नींबू को निचोड़ते हो। और आपका निकलता भी तो कितना ही। मेरा तो लगता है पेट ही भर गया।  

वैसे एक बात थी। जब आपने मुझे ६ महीने पहले चोदा था मैं तब से आपकी मर्दानगी पे दीवानी होकर मर चुकी हूँ।  

अंकल मेरी मम्मी की बात नींबू की तरह निचोड़ने की सुन कर मेरी मम्मी की चुचियों को अपने हाथ में भर कर मेरी मम्मी की आँखों में आँखें डाल कर बोले। मेरी जान तुम्हारे ये नींबू नहीं बल्कि ये तो रसीले आम ही। पता ही कितना रस भरा भरा पड़ा है इनमें।  

और वर्षा तुम कह रही हो मेरा इतना निकला ही तो ये तो मैं तुम्हारे अंदर पिछले ६ महीनों से डाल रहा हूँ और नींबू की तरह पिछले ६ महीनों से निचोड़ रहा हूँ। और रही बात सुहागरात की तो सुहागरात में बीवी ने मज़ा नहीं दिया और उसके बाद तुम्हारी जैसी कोई मिली नहीं।  

मेरी मम्मी अंकल की बात सुन कर मुस्कुराते हुए उनकी आँखों में देख कर बोली।  
मम्मी: क्या अब भी नहीं मिली।  

अंकल: मेरी मम्मी को चूमते हुए बोले। मिल तो गई हो। तभी तो पिछले ६ महीनों से खाली कर रहा हूँ तुम्हारी चूत में और जिंदगी भर रोज़ खाली करूँगा।  

अंकुश बेटा भी साथ है। वो खाली मरवाएगा। वो ही तुम्हें लाएगा कंप्यूटर सिखाने के बहाने से मेरे पास और तुम्हारी चूत भरवाकर वापस भी ले जाएगा।  

मम्मी: नहीं नहीं योगेश जी उसको नहीं। प्लीज मुझे शर्म आती है। जब वो कहता है मम्मी अंकल से कंप्यूटर सीखने चलो तो मुझे लगता है वो कह रहा हो। चूत चुदवाने चलो मम्मी।  

वो मेरा बेटा है और माँ बेटे के बीच शर्म का पर्दा होना चाहिए। इसलिए मैं खुद आ जाया करूँगी मिलने मिलने पे पर उसके सामने नहीं आऊँगी। प्लीज।  

अंकल: क्यों वर्षा उसे तो पता है। तुम यानी उसकी मम्मी वर्षा उसके इन ले योगेश से यानी तुम मुझसे चुदती हो तो फिर शर्म कैसी।  

मम्मी: प्लीज योगेश जी वो मेरा बेटा है और माँ बेटे के बीच शर्म ज़रूरी है। प्लीज आप समझा करो।  

और मम्मी अंकल की चौड़ी छाती पर अपना सिर रख लेटी। उनकी छाती के बालों में अपनी उँगली घुमा रही थी।  

कि अंकल मेरी मम्मी का हाथ पकड़ कर नीचे की ओर अपने लंड पर रख दिया। तो मेरी मम्मी भी बिना किसी शर्म के उनके लंड को सहलाने लगी।  

मेरी मम्मी की आँखें नीचे की ओर उनके लंड पर ही थी। और अंकल का लंड एक बार मेरी मम्मी के अंदर झड़ने के बाद भी किसी तोपची की तोप की तरह की मैदान में अगले राउंड के लिए तैयार खड़ा था।  

मेरी मम्मी और अंकल इस समय भी दोनों एकदम नंगे लेटे थे। और उस समय ना तो मेरी मम्मी की आँखों में नींद थी और ना ही अंकल की आँखों में।  

मैंने देखा कि सुबह के ४ बज गए हैं। यानी कि एक राउंड में ही ७ घंटे हो गए। अंकल ने फोरप्ले में ही ६ घंटे लगा दिए और १ घंटा चुदाई में।  

मेरी आँखों में नींद आने लगी थी लेकिन मम्मी अंकल की आँखों में नींद नहीं थी।  

मुझे लगता है मम्मी की पहली सुहागरात मुश्किल से आधे घंटे में ही हो गई होगी २० साल पहले। लेकिन दूसरी सुहागरात २० साल बाद आज पूरी रात में भी खत्म नहीं हुई। जबकि अंकल इस ४७ साल की उम्र हो जाने के बाद भी किसी जवान की तरह मैदान में दाँते हुए थे।  

मेरी मम्मी अंकल के लंड को सहला रही थी और उनकी छाती में ही अपना सिर रखे बोली।  

मम्मी: योगेश जी एक बात पूछूँ आप से।  
अंकल: क्यों नहीं डार्लिंग मेरी वर्षा पूछो।  

मम्मी: आपने मेरे साथ सुहागरात क्यों मनाई। आप मुझसे प्यार करते हो क्या। सच में मुझसे प्यार करते हो।  

अंकल: हाँ वर्षा मैं सच में तुमसे प्यार करता हूँ।  

मम्मी: क्या सिर्फ सेक्स के लिए।  

अंकल: नहीं वर्षा मैं तुमसे सेक्स के लिए बल्कि दिल से प्यार करता हूँ और अंकुश को अपना बेटा मानता हूँ।

मम्मी: तो फिर सुहागरात क्यों। मैं तो पिछले ६ महीनों से आपके साथ हमबिस्तर हो रही हूँ।

अंकल: वर्षा अंकुश की दिल से तमन्ना थी मेरी मम्मी की सुहागरात हो। क्योंकि वो जानता है तुम्हारी सुहागरात ना के बराबर हुई होगी तुम्हारे पति के साथ। इसलिए उसी ने कहा था। वो तुमसे बहुत प्यार करता है। इसलिए उसने ही तुम्हारी मेरी दूसरी सुहागरात के लिए कहा था।

और सच कहूँ तो वर्षा जब अंकुश ने कहा सुहागरात के लिए तो तुम मेरे दिलो दिमाग पर इस कदर छा गई बता नहीं सकता। और इसलिए मैंने अंकुश की बात मान ली। कि तुम जैसी हसीन औरत... सॉरी वर्षा तुम औरत नहीं लड़की हो। और तुम जैसी लड़की के साथ सुहागरात मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

तुम्हारी चुदाई पिछले ६ महीनों से कर रहा था लेकिन सुहागरात मनाना गर्व की बात है। इसलिए सुहागरात मना रहा हूँ। और वर्षा तुम जैसी हसीन लड़की मैंने आज तक नहीं देखी। वर्षा तुम बेटे की माँ होने के बाद भी लड़की लगती हो।

पिछले साल मैंने तुम्हें देखा और प्रपोज किया तो तुमने मुझे ठुकरा दिया था। लेकिन जब अंकुश ने खुद कहा मेरी मम्मी की चुदाई करो और पिछले ६ महीनों से वो मुझे तुमसे चुदवा रहा है।

मम्मी: योगेश जी तुम मुझसे सच्चा प्यार करते थे तो तुमने मुझे दोबारा प्रपोज क्यों नहीं किया?

अंकल: जब मैंने तुम्हें प्रपोज किया तो तुमने ठुकरा दिया था। तो मैंने सोचा तुम एक पतिव्रता संस्कारी औरत हो। तुम कभी मेरे प्यार को एक्सेप्ट नहीं करोगी। लेकिन अंकुश ने सब पॉसिबल कर दिया।

मम्मी: यदि मैं पतिव्रता संस्कारी औरत थी तो अब ये सब।

अंकल: सच कहूँ वर्षा।

मम्मी: जी।

अंकल: वर्षा तुम आज भी पतिव्रता संस्कारी औरत हो। वो तो एक दिन अंकुश के साथ तुम्हारे घर गया तो मैं बाथरूम भी गया। तो मैंने वहाँ तुम्हारी ब्रा और पैंटी देख कर... सच में वर्षा तुम्हारी ब्रा पैंटी में कितनी बढ़िया खुशबू आ रही थी। मैं खुद को रोक नहीं पाया। तभी मैंने तुम्हारी ब्रा पैंटी उठाई और उन्हें चाटने लगा।

अंकल की बात सुनकर मम्मी शर्म से प्यार से उनके सीने पर हल्के मुक्के मारते हुए बोली। क्या योगेश जी आप भी ना बड़े बदमाश हो।

अंकल: वो सब तो था ही। ऊपर से उस दिन के बाद एक दिन जब तुम पूरी भीगी हुई। तुम्हारा हर एक अंग सच कहूँ किसी को अपना दीवाना बना दे। मैं ही जानता हूँ मेरी जान उस दिन कैसे मैंने आपको रोका था। आज भी मेरी आँखों में तुम्हारी वही तस्वीर आती है।

देखो मेरी जान अभी मैंने वो बात ही की। देखो ये कैसे उछल-कूद मचाने लगा।

मेरी मम्मी शर्म से अपने यार योगेश जी की छाती में मुँह छुपाए उनके लंड को सहला रही थी और बोली।

मम्मी: अंकुश ने आपकी कैसे हेल्प की बताइए।

अंकल: क्या करेगी जानकर।

मम्मी: कुछ नहीं।

अंकल: उसे डाँटेगी।

मम्मी: नहीं सिर्फ जानना चाहती हूँ।

अंकल: फिर कभी बाद में बताऊँगा।

मम्मी: ओके।

और अंकल के लंड को सहलाती रही।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 10:27 PM



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