Thread Rating:
  • 1 Vote(s) - 5 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#36
**अपडेट 33**

मेरी मम्मी को चूमते अंकल ने अपना एक हाथ मेरी मम्मी की पैंटी में डाल दिया। तो मेरी मम्मी ने भी मस्ती में अपनी टाँगों को पूरी तरह से खोल दिया ताकि वे आज अच्छी तरह से मेरी मम्मी की चुत को सहला सकें उसका मजा ले सकें।

अंकल उस समय कहाँ उस मौके को अपने हाथ से जाने देने वाले थे। उन्होंने मेरी मम्मी की कामरस से गीली चुत में अपनी उँगली को डालकर अंदर-बाहर करने लगे।

मेरे नामर्द बाप के बाद अंकल दूसरे मर्द थे जिन्होंने मेरी मम्मी को छुआ। पिछले 6 महीनों से मम्मी पे अंकल का कब्जा था और 19 साल तक मेरे नामर्द बाप। और तू कहूँ कानूनी तौर पर तो आज भी मेरी मम्मी पे उस नामर्द का ही अधिकार है। पर उस नामर्द मादरचोद ने कभी मेरी मम्मी को मसला नहीं और मसलेगा भी कैसे उसके लंड में दम भी नहीं थी और पता नहीं मैं कैसे पैदा हो गया उसकी लिल्ली से।

मेरी मम्मी एक अप्सरा हैं और उनके लिए ही एक ही मर्द है वो हैं अंकल योगेश अंकल। मेरी मम्मी को पहला मर्द नामर्द मिला और दूसरा असली मर्द योगेश अंकल जिनका हाथ मेरी मम्मी की चुत पर घूम रहा था।

मेरी मम्मी मस्ती में आकर खुद ही अंकल के होठों को अपने होठों में दबोच लिया। मस्ती में मेरी मम्मी को अब इस बात का भी एहसास नहीं था कि सुहागरात में एक औरत हमेशा शर्माती है, शर्म ही औरत का गहना होता है, औरत पहल नहीं करती है, सिर्फ मर्द ही पहल करता है, औरत कठपुतली होती है, औरत मर्द की इच्छा पूरी करती है और अपनी इच्छा पे कंट्रोल करती है।

लेकिन मुझे लग रहा था कि अंकल की इन्हीं हरकतों की वजह से मेरी मम्मी उनसे पहले ही अपने ऊपर अपना कंट्रोल न खो दें और खुद ही उन्हें एक औरत की शर्म का जो पर्दा होता है उस पर्दे की दीवार को न तोड़ दें।

मुझे अब यकीन हो गया था मम्मी उस शर्म के पर्दे की दीवार को तोड़ने के लिए मजबूर हो चुकी हैं। लेकिन ये भी जानता था मम्मी कंट्रोल कर लेगीं।

कुछ देर ऐसे ही मेरी मम्मी की चुत के साथ खेलने पर अंकल मेरी मम्मी को अपनी बाहों में फिर से भर लिया और मेरी मम्मी की आँखों में आँखें डालकर देखने लगे। तो मेरी मम्मी को उनके इस तरह देखने पर बहुत ही शर्म महसूस हो रही थी। मेरी मम्मी का पूरा बदन पसीने से गीला हो गया था। मेरी मम्मी के बाल बिखरकर मेरी मम्मी के चेहरे पर आ चुके थे।

तो अंकल मेरी मम्मी के चेहरे पर झुके अपनी उँगली से मेरी मम्मी के चेहरे से मेरी मम्मी के बालों को हटाने लगे। तो मेरी मम्मी के पूरे बदन में एक मीठा सा एहसास होने लगा। तो मेरी मम्मी ने धीरे से कहा –
“योगेश जी क्या कर रहे हैं?”

अंकल : “बस अपनी वर्षा रानी को प्यार कर रहा हूँ।”

अंकल के बदन से पसीने की बूँदें मेरी मम्मी के ऊपर गिर रही थीं। कि अंकल मेरी मम्मी पर झुकते बोले –
“वर्षा कितनी सुंदर और हसीन हो तुम।”

और अपने होठों को मेरी मम्मी की गर्दन पर रखकर कामुक तरीके से मेरी मम्मी को चूमने लगे। तो मस्ती में मेरी मम्मी भी सिसकने लगीं। किसी भी औरत को कोई मर्द ऐसे गर्दन पर अपने गरम होठ रखकर चूमने लगे तो उसका उत्तेजित होना स्वाभाविक है। मेरी मम्मी अपनी बाहें अंकल के गले में लपेटे –
“आह योगेश जी ये क्या कर रहे हैं...”

अंकल : “क्यों वर्षा तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?”

मेरी मम्मी : “ऐसी बात नहीं योगेश जी। बस पता नहीं मुझे क्या हो रहा है।”

मेरी मम्मी इतना बोली ही थीं कि अंकल ने फिर से मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों में भरकर चूसने लगे।

फिर अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से उठे और नीचे मेरी मम्मी की टाँगों के पास आ गए और मेरी मम्मी का एक पैर उठा लिया। मम्मी के पैर को अपने हाथ में पकड़े मेरे योगेश अंकल ने मेरी मम्मी के पैर के अंगूठे को चूमने लगे और उसको अपने मुँह में भर-भर कर चूसने लगे।

अंकल ने मेरी मम्मी के पैर के अंगूठे और मेरी मम्मी के पैर की उँगलियों को चूसते बोले –
“वर्षा तुम्हारे पैर कितने सुंदर और मुलायम हैं।”

मेरी मम्मी की हालत तो उस समय जल बिन मछली की तरह हो रही थी। अंकल के द्वारा इस तरह मेरी मम्मी के पैरों की उँगलियों को चूसना मेरी मम्मी के अंदर की काम ज्वाला को भड़का रहा था। अंकल मेरी मम्मी के पैरों की उँगलियों को चूसते ऊपर की ओर बढ़ने लगे। उनकी जीभ मेरी मम्मी की पिंडलियों से होते मेरी मम्मी के घुटनों तक आ चुकी थी और अंकल मेरी मम्मी के घुटनों को चूमते ऊपर मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों पर अपने होठों की कलाकारी दिखाने लगे।

और वे जैसे ही मेरी मम्मी की जाँघों को अपने होठों में दबाकर काटते मेरी मम्मी मस्ती में मेरी मम्मी ने अपने हाथों से चादर को अपनी मुट्ठी में भींच लिया। मेरी मम्मी की चुत तो और तेजी से पानी छोड़ने लगी। मेरी मम्मी की पैंटी मेरी मम्मी की चुत के पानी से एकदम गीली हो गई थी।

कि तभी मेरी मम्मी के ऊपर से उठे। मेरी मम्मी तो शर्म से लेटी अपनी आँखें भी नहीं खोल पा रही थीं। कि तभी मेरी मम्मी को अंकल का हाथ अपनी पैंटी के इलास्टिक पर महसूस हुआ और वे अपने हाथ को मेरी मम्मी की पैंटी के इलास्टिक में डालने की कोशिश कर रहे थे।

मेरी मम्मी समझ गईं कि अंकल मेरी मम्मी के बदन से आखिरी कपड़ा मेरी मम्मी की पैंटी भी अलग करके उन्हें एकदम नंगी कर देना चाहते हैं और हुआ भी ऐसा ही। अंकल ने जब अपनी उँगलियाँ मेरी मम्मी की पैंटी के इलास्टिक में फँसाकर उसको नीचे खिसकाने लगे तो मेरी मम्मी ने अपना हाथ बढ़ाकर अपना हाथ अंकल के हाथ पर रख उनको रोकने के लिए आँख से इशारा करने लगीं –
“प्लीज योगेश जी ये नहीं... प्लीज इसे मत उतारिए।”

पर अंकल कहाँ मानने वाले थे क्योंकि औरतों का असली खजाना तो उनकी पैंटी के अंदर ही तो होता है और हर मर्द औरत उस खजाने को लूटने के लिए बेकरार रहता है। ठीक वैसे ही मेरी मम्मी का असली खजाना मेरी मम्मी की पैंटी के अंदर ही था और अंकल ने फिर से अपना हाथ मेरी मम्मी की पैंटी के अंदर डाल दिया।

उफ्फ... मेरी मम्मी के मुँह से तो बस ये “आह...” निकल गई। और अंकल मेरी मम्मी की पैंटी को नीचे की ओर खिसका मेरी मम्मी की टाँगों से बाहर निकालने की कोशिश करने लगे। पैंटी मेरी मम्मी के चूतड़ों के नीचे दबी हुई थी।

पता नहीं मेरी मम्मी को क्या हुआ। मेरी मम्मी ने अपने चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर हवा में उठा लिया ताकि वे मेरी मम्मी की पैंटी को आसानी से निकाल सकें और अंकल ने मेरी मम्मी की पैंटी को मेरी मम्मी की टाँगों से निकाल दिया।

और अंकल ने आज सुबह ही मेरी मम्मी के चुत के बालों को एकदम साफ करके मेरी मम्मी की चुत को एकदम साफ-सुथरे मैदान की तरह से चिकना किया हुआ था। एक तो मेरी मम्मी की एकदम चिकनी चुत और उस पर मेरी मम्मी की चुत से निकले पानी से एकदम चमक रही थी। मेरी मम्मी की चिकनी चुत को देखकर अंकल की आँखों में अलग ही चमक आ गई।

अंकल मेरी मम्मी की टाँगों के बीच बैठे थे। अंकल ने पागलों की तरह अपने हाथ मेरी मम्मी की चुत की ओर बढ़ाकर मेरी मम्मी की चुत पे रख दिया और मेरी मम्मी की चुत को सहलाने लगे।
Like Reply


Messages In This Thread
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 09:28 PM



Users browsing this thread: Rahulraj306, 7 Guest(s)