Yesterday, 09:21 PM
**अपडेट 32**
अंकल के द्वारा मेरी मम्मी की चुचियाँ चूसे जाने पर मेरी मम्मी तो मानो सातवें आसमान में थीं।
कमरे में तो बस मेरी मम्मी की मस्ती भरी कराहने की ही आवाजें और मेरी मम्मी की चूड़ियों के खनकने की आवाजें ही आ रही थीं।
मेरी मम्मी ने भी अपने हाथों को अंकल के बालों पर कस लिया।
मेरी मम्मी की चुचियों पर अंकल के काटने से लाल-लाल निशान मेरी मम्मी की चुचियों पर पड़ गए थे।
मेरी मम्मी की चुचियों पर अंकल ने लव बाइट के निशान बना दिए थे।
इस समय मम्मी-अंकल दोनों काम क्रिया में एकदम से खोए हुए एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
कि तभी अंकल उठे और मैंने देखा कि वे नीचे की ओर चले गए।
और मेरी मम्मी के पैर को पकड़कर मेरी मम्मी के पंजों को चाट रहे थे।
मेरी मम्मी के पैरों की उनकी उँगलियों को चाट रहे थे।
और कभी मेरी मम्मी के पैरों की उँगलियों को अपने मुँह में भरकर चूस रहे थे।
मेरी मम्मी वैसे ही पड़ी रहीं तो अंकल धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहे थे।
मेरी मम्मी के लहंगे के ऊपर से ही मेरी मम्मी को चूम रहे थे।
बस अब उनका मुँह मेरी मम्मी की चुत के ऊपर से कुछ ही दूरी पर था।
और तभी मेरी मम्मी को झटके का एहसास हुआ।
क्योंकि अंकल ने अपना मुँह मेरी मम्मी की चुत के ऊपर लगा दिया था।
अंकल के होठों और मेरी मम्मी की चुत के होठों के बीच सिर्फ मेरी मम्मी के लहंगे की दीवार थी।
पर ये भी मदहोश करने वाला एहसास था।
मेरी मम्मी पागलों की तरह छटपटाने लगी थीं।
तभी अंकल जी ऊपर की तरफ बढ़े और मेरी मम्मी के नंगे पेट पर अपने गरम होठ रख दिए।
अब पेट को चूमना तो एक बात थी।
पर पेट को चाटना... उफ आपको क्या बताऊँ कि मेरी मम्मी उस समय कैसा फील कर रही थीं।
मेरी मम्मी के पेट को चाटते अंकल फिर नीचे आए।
और फिर मेरी मम्मी के पैरों को चाटते और धीरे-धीरे... उन्होंने मेरी मम्मी के पैरों को चूमते हुए... घुटने तक आ गए।
साथ ही मेरी मम्मी का लहंगा भी ऊपर की ओर खिसकते जा रहे थे।
अंकल मेरी मम्मी की नंगी गोरी मेरी मम्मी की पिंडलियों को चूस रहे थे।
और लिटरली ऐसे चूस रहे थे कि जैसे वो कोई आइसक्रीम हो या लॉलीपॉप हो।
धीरे-धीरे वे मेरी मम्मी के घुटनों तक पहुँच गए थे।
मेरी मम्मी की तो हालत ही खराब होने लगी थी।
अगर अंकल थोड़ा और ऊपर की ओर आएँ तो यही सोचकर मेरी मम्मी को शर्म आने लगी।
तो मेरी मम्मी भी उनको और आगे बढ़ने से रोककर बोलीं –
“बस कीजिए योगेश जी।”
वैसे मेरी मम्मी का अंकल को यह कहना दिल से नहीं बल्कि ऊपर से ही कह रही थीं।
जबकि दिल से मेरी मम्मी यही चाहती थीं कि अंकल आगे बढ़ें।
और दोस्तों मुझे इस बात की पूरी उम्मीद भी थी कि अब अंकल रुकने वाले नहीं थे।
और तू कहूँ मम्मी को भी उम्मीद थी अब अंकल रुकने वाले नहीं हैं।
इसलिए मम्मी ने अंकल से रुकने का नाटक किया था ये बोलकर “बस कीजिए योगेश जी”।
मैं सोच रहा था कि अंकल किसी भी वक्त मेरी मम्मी के लहंगे को और ऊपर खिसका देंगे या फिर उलट देंगे।
तो मेरी मम्मी का सबसे कीमती खजाना उनकी आँखों के सामने बेपर्दा हो जाएगा।
और मेरी मम्मी के उस खजाने को देखकर वे कैसे अपने आप को उस खजाने को लूटने से रोक पाते।
वे तो मेरी मम्मी की तिजोरी में अपनी चाबी लगाकर आज मेरी मम्मी की तिजोरी को खोल देंगे।
(लेकिन वे तो पिछले 6 महीनों से लगातार खोल रहे हैं पर आज की बात अलग है।
क्योंकि अंकल ने मम्मी की चुत का ऑपरेशन करवाया था जिससे मम्मी की चुत एकदम सील पैक हो जाए।
ये बात मुझे अंकल ने भी नहीं बताई।
लेकिन मुझे मम्मी के पर्स में हॉस्पिटल का स्लिप मिली।
फिर मैंने हॉस्पिटल से इन्क्वायरी की तो पता चला मम्मी की चुत एकदम सील पैक 20 साल की लड़की की तरह हो गई है।
जिसे आज अंकल कुचलेंगे अपने लंड से।)
वैसे अब मेरी मम्मी की टाँगों के बीच जो तिजोरी थी वो उनकी ही चाबी से खुल सकती थी।
अंकल ने मेरी मम्मी का लहंगा पकड़ा तो मुझे लगा कि वे मेरी मम्मी का लहंगा उलटने वाले हैं।
लेकिन मेरी सोच के विपरीत अंकल ने अपना सर मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा दिया था।
और अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगें जितनी खोल सकते थे खोल दीं।
और अपना सर पूरा मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा दिया था।
इस स्थिति में वे खाली मेरी मम्मी की चिकनी मक्खन जैसी जाँघों के अंदरूनी हिस्से को ही चाट पा रहे थे।
और हल्के-हल्के से काट रहे थे।
क्योंकि मुझे दिख तो नहीं रहा था लेकिन मम्मी की दर्द की आवाज आती है “ओओ... ओह” जिससे पता चलता है अंकल ने काटा होगा।
अब मेरी मम्मी की जाँघें थीं भी तो एकदम चिकनी मक्खन के जैसे और एकदम गोरी।
अंकल के द्वारा मम्मी को अपनी जाँघें चाटने में जो सेंसेशन मेरी मम्मी को हुई थी उसका जवाब नहीं था।
क्योंकि इसकी खुशी मम्मी के चेहरे से पता चल रही थी।
ये मम्मी का पहला अनुभव नहीं था लेकिन सुहागरात में तो पहला ही अनुभव था।
इसलिए मेरी मम्मी इतना रोमांचित फील कर रही थीं।
अंकल मेरी मम्मी की जाँघों के हर हिस्से को चाट रहे थे और चूस रहे थे।
और कभी मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों को मुँह में भरकर खींच देते हल्के से काट देते।
और फिर अंकल धीरे-धीरे मेरी मम्मी की जाँघों के अंदरूनी भाग तक पहुँच गए जहाँ मेरी मम्मी की पैंटी की बाउंड्री लाइन शुरू हो रही थी।
और वहाँ पर अपने होठों से काटना चालू कर दिया था।
अब वे जाँघों के जोड़ पर जाकर किस कर रहे थे।
और ये वो जगह थी जहाँ से मेरी मम्मी की कच्छी की बाउंड्री स्टार्ट होती है।
क्योंकि मैं अनुमान लगा रहा था क्योंकि बाहर से देखने पे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर कोई तकिया छुपा रखा हो।
और पहले तो अंकल ने अपनी जीभ निकालकर साइड से मेरी मम्मी की कच्छी में डालने की कोशिश की।
मेरी मम्मी को उस समय बड़ी शर्म आ रही थी कि अंकल जी का मुँह मेरी मम्मी के लहंगे में ही।
वे मेरी मम्मी की गीली चड्डी को देखकर बोले –
“वर्षा तेरी पैंटी तो पूरी गीली है।” (ये मुझे सुनाई दी अंकल की आवाज)
फिर अंकल ने अपने होठों को मेरी मम्मी की कच्छी के ऊपर से मेरी मम्मी की चुत पर रख दिया।
और पहली बार मेरी मम्मी के मुँह से एक भयंकर सिसकी निकल गई।
अब मुझे ऐसा लग रहा था कि अंकल मेरी मम्मी की गीली पैंटी के ऊपर अपने होठों को रखकर चलाने लगे।
अंकल के होठों और गरम साँसों को मम्मी अपनी चुत के ऊपर पाकर तो मेरी मम्मी की चुत और भी तेजी से पानी छोड़ने लगी थी।
जिससे कि मेरी मम्मी की चुत के रस से मेरी मम्मी की पैंटी पानी से बुरी तरह से गीली हो उठी थी।
अंकल बोले –
“वर्षा ये तो और ज्यादा पानी छोड़ रही है। देख कैसे तेरी चुत से झरना बह रहा है।”
तो मम्मी शर्मा गईं।
और अंकल ने मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर अपने होठ टिकाकर मेरी मम्मी की चुत के रस को चूस रहे थे।
मेरी मम्मी की चुत पूरी तरह मेरी मम्मी की पैंटी से ढकी हुई थी।
और अंकल जी को कहीं से भी मेरी मम्मी की नंगी चुत का एहसास नहीं हो रहा।
मेरे अंकल मेरी मम्मी की गीली पैंटी को अपने मुँह में दबाए उसमें से मेरी मम्मी के रस को चूस रहे थे।
मानो वो मेरी मम्मी की चुत के रस को बल्कि कोई अमृत को चूस रहे हों पी रहे हों।
तभी अंकल ने किसी तरह अपना एक हाथ मेरी मम्मी की पैंटी के अंदर डाला।
और मेरी मम्मी की चुत में से मेरी मम्मी की पैंटी को साइड किया।
और जैसे ही उन्होंने मेरी मम्मी की नंगी चुत पर अपने होठ रखकर किस किया मेरी मम्मी फड़फड़ा उठी थीं।
ये सब मैं अनुमान लगा रहा था क्योंकि मुझे कुछ दिख नहीं रहा था।
मम्मी दीवार पे टंगी घड़ी की तरफ देख रही थीं।
मैं समझ गया था मम्मी सोच रही हैं टाइम बहुत हो गया है।
लेकिन अंकल ने अभी तक उनको पूरी नंगी नहीं किया।
पर वे जानती हैं कि आज अंकल उनके साथ सुहागरात जरूर मनाएँगे।
इसलिए तो उन्होंने खुद अपनी सुहागरात के लिए मम्मी की चुत को शेव करके चिकना किया हुआ था।
अंकल तो मेरी मम्मी की चिकनी चुत को चूम रहे थे और चाट रहे थे।
अंकल जैसे-जैसे मेरी मम्मी की चुत चाट रहे थे मेरी मम्मी के बदन में जोरों से गुदगुदी होने लगी।
उत्तेजना के मारे मेरी मम्मी का बुरा हाल था।
और क्या मजा आ रहा था कि मम्मी बड़बड़ा रही थीं –
“प्लीज योगेश जी इसे छोड़ दो... उसे प्लीज छोड़ दो...”
पर उनका मुँह तो मेरी मम्मी की चुत पर लगा हुआ था।
और मेरी मम्मी की कमर न चाहते हुए भी हिल रही थी।
मेरी मम्मी के हाथ खुद-ब-खुद अंकल के सिर पर फिर रहे थे।
अभी भी उनका सिर मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा हुआ था।
और मेरी मम्मी का लहंगा मेरी मम्मी के घुटनों तक था।
मेरी मम्मी को परम सुख की अनुभूति हो रही थी।
मेरी मम्मी धीरे-धीरे अपने पड़ाव तक पहुँच रही थीं।
और जैसे-जैसे मेरी मम्मी झड़ने के करीब थीं वैसे-वैसे मेरी मम्मी की सिसकारियाँ ऐसे बढ़ रही थीं।
मेरी मम्मी खुद अपने हाथ से उनका सिर अपनी चुत पर दबाए नीचे से अपनी कमर को उछाल रही थीं।
मेरी मम्मी की सिसकारियाँ इतनी जोर-जोर से निकल रही थीं मानो बाहर के लोगों को लगे मेरी मम्मी अपनी सिसकारियाँ सुना रही हैं कि अंदर कमरे में मेरी मम्मी के साथ क्या हो रहा है।
और अंकल मेरी मम्मी की चुत इस तरह चाट रहे हैं।
और तभी मम्मी को ऐसा फील हुआ कि जैसे मेरे अंदर से कुछ गरम सा लावा बाहर निकल रहा है।
ऐसा एहसास तो मेरी मम्मी को पहले भी पिछले 6 महीनों से हो रहा है।
लेकिन सुहागरात में पहली बार।
जब मम्मी अपने चरम पर थीं तो मम्मी के मुँह से ऐसी भयंकर सिसकारी निकल रही थी कि उसको यहाँ शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूँ।
उफ्फ...
ऐसा लग रहा था कि मम्मी के जीवन में आज पहली बार किसी ने इतने जबरदस्त तरीके से मम्मी की चुत को चाटा हो।
और मम्मी को चुत चटवाने में इतना मजा आया कि उन्हें आज पता चला हो चुत चुदवाने से ज्यादा तो चटवाने में मजे हैं।
और पता नहीं कैसे मेरी मम्मी अपनी शर्म को छोड़कर अंकल का सिर अपनी चुत पर दबाए अपने चूतड़ों को जोर-जोर हिला रही हैं।
आप लोगों ने जिन्होंने सेक्स का अनुभव किया होगा उन्हें पता होगा कि जब औरत अपने चरम पर पहुँचती है तो वो कितनी भयंकर हो जाती है।
लेकिन अंकल अभी भी मेरी मम्मी की चुत को चाटने में लगे हुए थे।
और अब मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि मेरी मम्मी की जान ही बाहर न निकल जाए।
और मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे मेरी मम्मी जन्नत में हैं।
मेरी मम्मी अब खुद ही नीचे से अपनी गाँड उठा-उठा कर अपने यार योगेश अंकल को अपनी चुत चटा रही थीं।
और सिर पकड़कर खुद ही अपनी चुत पर दबा रही थीं।
मुझे गजब की फीलिंग थी।
अब मेरी मम्मी के हाथ-पाँव में जान नहीं बची थी।
और अंकल अभी भी मेरी मम्मी की चुत पर चिपके हुए थे।
और मेरी मम्मी को अभी भी हल्का-हल्का मजा आ रहा था।
अंकल अभी भी जिस तरह मेरी मम्मी की चुत से चिपके हुए थे मुझे ऐसा फील हो रहा था कि उन्होंने कभी चुत देखी ही नहीं हो।
वे भूल गए थे वो किस चुत पे लगे हुए।
वो पिछले 6 महीनों से उन्हीं की है।
वे अभी भी एक पालतू कुत्ते की तरह मेरी मम्मी की चुत को चाटने में लगे हुए थे।
और मेरी मम्मी लंबी-लंबी साँसें ले रही थीं।
(और हो भी क्यों न। आज मेरी मम्मी अपनी 20 साल पहले सिर्फ नाम की सुहागरात मनाई थी।
और अब 20 साल बाद असली सुहागरात मना रही हैं 33 साल की उम्र में।
एक कुँवारी लड़की की तरह अपनी चुत का ऑपरेशन करवाकर एकदम टाइट सील पैक चुत को अंकल के लंड से कुचलवाकर।
आज अपनी जवानी को मजा ले रही हैं।
और बिल्कुल 18 साल की लड़की लग रही हैं मेरी मम्मी।
कोई नहीं कह सकता वो एक 19 साल के बेटे की मम्मी और 33 की हैं।
वो 18 साल की कच्ची कुँवारी लड़की लग रही थीं।
आज मम्मी शादी के बाद असली सुहागरात मना रही हैं एक गैर मर्द के साथ।
वो भी उसके बेटे की मदद से।)
अंकल अपनी जीभ को मेरी मम्मी की चुत के हर एक कोने तक पहुँचाना जैसे उनका मकसद रहा हो।
और जब औरत को ऑर्गेज्म होता है और उसके बाद भी कोई उसकी चुत से चिपका रहे तो एक मध्यम आनंद की अनुभूति होती है जो उस समय मेरी मम्मी को महसूस हो रही थी।
ऐसा मजा मेरी मम्मी को सुहागरात में पहली बार मिला था।
और अंकल की दीवानी सी हो गई थीं।
कुछ देर बाद अंकल मेरी मम्मी के लहंगे से बाहर निकले।
मम्मी ने जैसे उनका चेहरा देखा तो मेरी मम्मी को एक हल्की सी हँसी आ गई।
क्योंकि उनके आधे से ज्यादा मुँह पर मेरी मम्मी का रस फैला हुआ था।
और थोड़ा बहुत उनके मुँह से नीचे टपक रहा था।
अंकल अपने होठों पर अपनी जीभ फेरते तो मेरी मम्मी शर्म से उनको रोकने लगीं।
तो अंकल बोले –
“नहीं वर्षा ये तो बड़ा ही टेस्टी है। जानती हो इसको पीने से मेरे अंदर कितनी एनर्जी का संचार हुआ।
इसको पीकर तो मैं अपने आप को कितना तंदुरुस्त और जवान महसूस करने लगा हूँ।”
जब अंकल और मम्मी दोनों की आँखें मिलीं तो वे दोनों ही मुस्कुरा दिए।
वे धीरे-धीरे मेरी मम्मी की तरफ बढ़े और अचानक मेरी मम्मी के होठ पर किस कर दिया।
मेरी मम्मी को बड़ा अजीब सा महसूस हुआ।
अंकल मेरी मम्मी के बगल में लेटे मेरी मम्मी को चूम रहे थे।
अंकल मम्मी को चूम रहे थे।
और धीरे-धीरे से अपने हाथ को मेरी मम्मी के पेट पर ले जाकर मेरी मम्मी की नाभि में एक-दो बार उँगली डाल रहे थे।
फिर उन्होंने अपने एक पैर से मेरी मम्मी के दोनों पैरों को दबाते हुए।
और अपनी उँगली मेरी मम्मी के लहंगे के नाड़े में फँसाई।
और मेरी मम्मी के लहंगे के नाड़े का सिरा ढूँढने लगे।
और जैसे ही उनके हाथ में मेरी मम्मी के लहंगे का सिरा आया तो उन्होंने फटाक से मेरी मम्मी के लहंगे का नाड़ा खींच दिया।
मेरी मम्मी का लहंगा खुला हुआ मेरी मम्मी के बदन पर पड़ा हुआ था।
कि तभी योगेश अंकल नीचे आए और मेरी मम्मी के लहंगे को मेरी मम्मी के पैरों से निकालने लगे।
लहंगा मेरी मम्मी के नीचे दबा हुआ था जिससे वो मेरी मम्मी के पैरों से निकल नहीं रहा था।
तो अंकल एक शरारती स्माइल के साथ मेरी मम्मी की ओर देखने लगे।
और मेरी मम्मी ने शर्माकर अपनी गाँड थोड़ी सी ऊपर उठा दी।
और तभी अंकल ने झट से मेरी मम्मी का लहंगा खींचकर मेरी मम्मी के पैरों से निकाल दिया।
मेरी मम्मी के लहंगे को अंकल मेरी मम्मी के सामने अपने हाथों में पकड़े थे।
और मेरी मम्मी नीचे लेटी शर्माती उनको देख रही थीं।
और उन्होंने मेरी मम्मी की आँखों में देखकर मेरी मम्मी के लहंगे को चूमते हुए नीचे फेंक दिया।
जो लहंगा अभी कुछ क्षण पहले मेरी मम्मी की कमर के साथ लिपटा था अब वो लहंगा जमीन पर पड़ा था।
मेरी मम्मी के लहंगे को मेरी मम्मी के बदन से निकालने के बाद अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से उठ खड़े हुए।
और मेरी मम्मी की ओर एक शरारती मुस्कान के साथ मेरी मम्मी की आँखों में देखते और मुस्कुराते हुए मेरी मम्मी की आँखों के सामने ही।
अपना पायजामा के नाड़े को खींचकर खोलने लगे।
अंकल के सीने में घने काले बाल... जाँघों पे घने काले बाल...
और लंड एकदम तना हुआ था जैसे कि अभी उनका अंडरवियर फाड़कर बाहर आने को बेताब हो।
मेरी मम्मी की तो नजर ये सब देखकर शर्मा गई।
लेकिन मन में एक राहत की बात थी मेरी मम्मी के लिए कि अंकल जी का लंड बहुत ही दमदार था।
क्योंकि मम्मी उसे पिछले 6 महीनों से ले रही थीं।
मम्मी को इस बात की तसल्ली थी कि अंकल अपने इस लंड से मेरी दमदार चुदाई करेंगे।
उन्हें तड़पाने नहीं पड़ेगा जैसे 20 साल पहले सुहागरात में तड़पी थीं।
पिछले 20 साल से रातों को अपने हाथों की उँगलियों से अपनी चुत की आग को ठंडा करती आ रही थीं।
पिछले 6 महीनों तक मम्मी ने 19 साल तक उँगलियों का ही सहारा लिया था।
लेकिन पिछले 6 महीनों से उन्हें अंकल का दमदार लंड मिल रहा था।
अंकल का लंड एकदम कड़क बिल्कुल कुतुब मीनार की तरह खड़ा था।
सच में कोई लड़की अपने पति का ऐसे लंड देखकर खुशी से पागल हो सकती है।
और मम्मी भी किसी लड़की से कम नहीं।
वो आज भी एक लड़की ही हैं।
वो तो उनकी कम उम्र में 20 साल पहले शादी कर दी थी।
नहीं तो आजकल तो 33 साल की लड़कियाँ ही होती हैं।
आजकल तो 33 साल की लड़कियों की शादी होती है।
पर मम्मी की शादी 20 साल पहले हो गई थी।
लेकिन मम्मी अब अपनी असली सुहागरात 33 साल की उम्र में मना रही थीं।
और मम्मी को एक खुशी इस बात की भी थी कि अंकल का लंड मम्मी के लिए ही है।
और उनके बेटे ने ही योगेश के लंड पे उसकी मम्मी का नाम लिखवाया है “वर्षा”।
और मम्मी की चुत पे भी अंकल का नाम लिखा था “योगेश”।
अंकल का लंड मेरी मम्मी के लिए अपना सिर उठाकर खड़ा था।
हाय राम अंडरवियर में से अंकल जी का मस्त घोड़े जैसे लंड देखते ही मेरी मम्मी की हालत खराब होने लगी थी।
क्योंकि मम्मी अंकल के लंड को जानती थीं।
और आज उनकी चुत एक कुँवारी कन्या की तरह थी।
एकदम सील पैक।
ऑपरेशन से मम्मी को ऐसा लग रहा था अंकल का लंड का गुस्सा मेरी चुत की क्या हालत करेगा।
बेचारी सील पैक चुत का क्या हाल होगा।
मम्मी के बदन को यदि अंकल की जगह कोई और होता तो मम्मी के बदन को मेरी मम्मी की चिकनी जाँघ देखकर उस पर ही अपना माल छोड़ देता।
लेकिन मैं अंकल को जानता था और मम्मी भी।
इसलिए मम्मी की आँखों में डर भी दिख रहा था।
क्या आज अंकल का सांड जैसा लंड उनकी फूल जैसी सील पैक चुत की क्या हालत करेगा।
मुझे तो लग रहा था मम्मी की सील पैक चुत अंकल का लंड नहीं खेल पाएगी।
और एक तरफ ये भी पता था मम्मी की चुत पिछले 6 महीनों से लंड ले रही है।
लेकिन आज चुत सील पैक थी।
शायद मम्मी भी यही सोच रही थीं क्या अब उनके इस मूसल लंड को झेल पाऊँगी.. बिस्तर पर उनका साथ अच्छे से दे भी पाऊँगी या नहीं।
फिर मम्मी शर्म से दूसरी तरफ देखने लगीं।
तो अंकल आकर बेड पर मेरी मम्मी के साथ लेट गए।
अब मेरी मम्मी और अंकल बेड पर सिर्फ अंडरवियर में ही लेटे थे।
बिस्तर का तो हाल तो बेहाल था.. चादर पूरी खिंची हुई थी.. फूल बिखरे हुए.. कुछ जमीन पे..
ये सब देख के कोई भी बोल सकता है.. कि किसी “मर्द और औरत की बीच यहाँ अभी जबरदस्त चुदाई हुई है”।
जबकि सच्चाई यह कि चुदाई हुई नहीं सिर्फ चुसाई हुई जिसमें ये हाल।
अंकल मेरी मम्मी के बगल में लेटकर मेरी मम्मी को अपनी बाहों में भरकर चूमने लगे।
अब वे दोनों के नंगे बदन एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
मेरी मम्मी अपने चिकने बदन से अपने यार योगेश जी के सख्त बदन पर घने बालों की रगड़ मेरी मम्मी के बदन में एक अलग की उमंग दिल में उठ रही थी।
मेरी मम्मी की साँसों की गति और भी तेज हो गई थी।
अंकल ने अपना चेहरा मेरी मम्मी के चेहरे पर झुकाया।
और अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों की ओर बढ़ाने लगे।
तो मेरी मम्मी ने उत्सुकता से अपने होठों को उनके होठों की ओर बढ़ा दिया।
मेरी मम्मी को इस कदर गरम देखकर तो अंकल मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों में दबाकर फिर से उनका रस चूसने लगे।
मेरी मम्मी और अंकल के होठों से होठ, छातियों से छातियाँ, मेरी मम्मी की चुत के ऊपर उनका लंड, पैरों से पैर रगड़ रहे थे।
मम्मी-अंकल दोनों के बदन एक-दूसरे के साथ ऐसे चिपके जैसे कि दो बदन न होकर एक ही हों।
मेरी मम्मी की चुचियाँ योगेश अंकल जी की चौड़ी छाती में दबी हुई थीं।
उनका एक हाथ मेरी मम्मी के गोल-मटोल चूतड़ पर था जिस पर वे प्यार से थप्पड़ मार रहे थे।
और अपने दूसरे हाथ को मेरी मम्मी के हाथ पर रखा।
और मेरी मम्मी का हाथ थामकर उसको अपने अंडरवियर में खड़े लंड पर रखकर उसको थमा दिया।
मम्मी अपने हाथों में मर्द के लंड के एहसास से ही मेरी मम्मी उत्तेजित होने लगीं।
कुछ देर तक अंकल ऐसे ही अपने लंड के इर्द-गिर्द मेरी मम्मी के हाथ को थामे रहे।
और फिर मेरी मम्मी के हाथ से ही अपने लंड को सहलाने लगे।
कुछ देर अंकल मेरी मम्मी के हाथ को पकड़कर अपना लंड सहलाते रहे।
और जब उन्होंने देखा मेरी मम्मी खुद ही उनका लंड सहला रही हैं तो उन्होंने मेरी मम्मी का हाथ छोड़ दिया।
अब मेरी मम्मी को भी अंकल का लंड सहलाने में मजा आ रहा था।
क्योंकि इस उम्र 47 साल में भी अंकल का लंड एक लोहे की रॉड की तरह था जो पिछले 6 महीनों से मम्मी को सुख दे रहा था।
अंकल का लंड एकदम असली मर्द का लंड मेरे नामर्द बाप की तरह नहीं।
मेरी मम्मी अपना हाथ अच्छी तरह से अंकल के लंड पर घुमाकर उनके लंड की लंबाई और मोटाई का जायजा लेने लगीं।
हालाँकि मम्मी को इसकी बाप पता थी फिर भी वे मेरे नामर्द बाप से तुलना कर रही थीं।
क्योंकि आज सुहागरात है और ये उनकी दूसरी सुहागरात है।
पहली सुहागरात मेरे नामर्द बाप के साथ 20 साल पहले जिसकी लंड की माप लंबाई 2 इंच मोटाई आधा इंच जो कि एक बच्चे की लिल्ली होती है।
और अंकल की माप 9 इंच लंबा और 4 इंच मोटा।
यदि कहूँ तो अंकल के लंड के मुकाबले पापा का लंड ना के बराबर है।
और जिस भी औरत को पता हो कि उसके पति का लंड इतना जबरदस्त है वो कितनी खुश होती ये आप अच्छी तरह से जानते हैं।
अंकल तो मेरी मम्मी को अंडरवियर के ऊपर से ही अपने लंड के आकार का एहसास करा रहे थे कि उनका लंड कितना कड़क और दमदार है इस उम्र में भी।
क्योंकि वे 47 के मम्मी 33 की।
वे जानते हैं सब कुछ पहले से हो रहा है।
पर उन्होंने मम्मी को कहा था सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है।
इसलिए मम्मी भी अनजान बनते हुए सब कुछ पहली बार कर रही थीं।
मेरी मम्मी को तो उसी समय ये फील हो गया था कि आज इस लंड से उनकी कितनी जबरदस्त ठुकाई होने वाली है।
और होगी भी।
क्योंकि अंकल का लंड सुहागरात मनाने के लिए पिछले 2 दिन से शांत बैठा था।
आज अपना सारा गुस्सा मेरी मम्मी पर निकालने वाला था।
अंकल के द्वारा मेरी मम्मी की चुचियाँ चूसे जाने पर मेरी मम्मी तो मानो सातवें आसमान में थीं।
कमरे में तो बस मेरी मम्मी की मस्ती भरी कराहने की ही आवाजें और मेरी मम्मी की चूड़ियों के खनकने की आवाजें ही आ रही थीं।
मेरी मम्मी ने भी अपने हाथों को अंकल के बालों पर कस लिया।
मेरी मम्मी की चुचियों पर अंकल के काटने से लाल-लाल निशान मेरी मम्मी की चुचियों पर पड़ गए थे।
मेरी मम्मी की चुचियों पर अंकल ने लव बाइट के निशान बना दिए थे।
इस समय मम्मी-अंकल दोनों काम क्रिया में एकदम से खोए हुए एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
कि तभी अंकल उठे और मैंने देखा कि वे नीचे की ओर चले गए।
और मेरी मम्मी के पैर को पकड़कर मेरी मम्मी के पंजों को चाट रहे थे।
मेरी मम्मी के पैरों की उनकी उँगलियों को चाट रहे थे।
और कभी मेरी मम्मी के पैरों की उँगलियों को अपने मुँह में भरकर चूस रहे थे।
मेरी मम्मी वैसे ही पड़ी रहीं तो अंकल धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहे थे।
मेरी मम्मी के लहंगे के ऊपर से ही मेरी मम्मी को चूम रहे थे।
बस अब उनका मुँह मेरी मम्मी की चुत के ऊपर से कुछ ही दूरी पर था।
और तभी मेरी मम्मी को झटके का एहसास हुआ।
क्योंकि अंकल ने अपना मुँह मेरी मम्मी की चुत के ऊपर लगा दिया था।
अंकल के होठों और मेरी मम्मी की चुत के होठों के बीच सिर्फ मेरी मम्मी के लहंगे की दीवार थी।
पर ये भी मदहोश करने वाला एहसास था।
मेरी मम्मी पागलों की तरह छटपटाने लगी थीं।
तभी अंकल जी ऊपर की तरफ बढ़े और मेरी मम्मी के नंगे पेट पर अपने गरम होठ रख दिए।
अब पेट को चूमना तो एक बात थी।
पर पेट को चाटना... उफ आपको क्या बताऊँ कि मेरी मम्मी उस समय कैसा फील कर रही थीं।
मेरी मम्मी के पेट को चाटते अंकल फिर नीचे आए।
और फिर मेरी मम्मी के पैरों को चाटते और धीरे-धीरे... उन्होंने मेरी मम्मी के पैरों को चूमते हुए... घुटने तक आ गए।
साथ ही मेरी मम्मी का लहंगा भी ऊपर की ओर खिसकते जा रहे थे।
अंकल मेरी मम्मी की नंगी गोरी मेरी मम्मी की पिंडलियों को चूस रहे थे।
और लिटरली ऐसे चूस रहे थे कि जैसे वो कोई आइसक्रीम हो या लॉलीपॉप हो।
धीरे-धीरे वे मेरी मम्मी के घुटनों तक पहुँच गए थे।
मेरी मम्मी की तो हालत ही खराब होने लगी थी।
अगर अंकल थोड़ा और ऊपर की ओर आएँ तो यही सोचकर मेरी मम्मी को शर्म आने लगी।
तो मेरी मम्मी भी उनको और आगे बढ़ने से रोककर बोलीं –
“बस कीजिए योगेश जी।”
वैसे मेरी मम्मी का अंकल को यह कहना दिल से नहीं बल्कि ऊपर से ही कह रही थीं।
जबकि दिल से मेरी मम्मी यही चाहती थीं कि अंकल आगे बढ़ें।
और दोस्तों मुझे इस बात की पूरी उम्मीद भी थी कि अब अंकल रुकने वाले नहीं थे।
और तू कहूँ मम्मी को भी उम्मीद थी अब अंकल रुकने वाले नहीं हैं।
इसलिए मम्मी ने अंकल से रुकने का नाटक किया था ये बोलकर “बस कीजिए योगेश जी”।
मैं सोच रहा था कि अंकल किसी भी वक्त मेरी मम्मी के लहंगे को और ऊपर खिसका देंगे या फिर उलट देंगे।
तो मेरी मम्मी का सबसे कीमती खजाना उनकी आँखों के सामने बेपर्दा हो जाएगा।
और मेरी मम्मी के उस खजाने को देखकर वे कैसे अपने आप को उस खजाने को लूटने से रोक पाते।
वे तो मेरी मम्मी की तिजोरी में अपनी चाबी लगाकर आज मेरी मम्मी की तिजोरी को खोल देंगे।
(लेकिन वे तो पिछले 6 महीनों से लगातार खोल रहे हैं पर आज की बात अलग है।
क्योंकि अंकल ने मम्मी की चुत का ऑपरेशन करवाया था जिससे मम्मी की चुत एकदम सील पैक हो जाए।
ये बात मुझे अंकल ने भी नहीं बताई।
लेकिन मुझे मम्मी के पर्स में हॉस्पिटल का स्लिप मिली।
फिर मैंने हॉस्पिटल से इन्क्वायरी की तो पता चला मम्मी की चुत एकदम सील पैक 20 साल की लड़की की तरह हो गई है।
जिसे आज अंकल कुचलेंगे अपने लंड से।)
वैसे अब मेरी मम्मी की टाँगों के बीच जो तिजोरी थी वो उनकी ही चाबी से खुल सकती थी।
अंकल ने मेरी मम्मी का लहंगा पकड़ा तो मुझे लगा कि वे मेरी मम्मी का लहंगा उलटने वाले हैं।
लेकिन मेरी सोच के विपरीत अंकल ने अपना सर मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा दिया था।
और अंकल ने मेरी मम्मी की टाँगें जितनी खोल सकते थे खोल दीं।
और अपना सर पूरा मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा दिया था।
इस स्थिति में वे खाली मेरी मम्मी की चिकनी मक्खन जैसी जाँघों के अंदरूनी हिस्से को ही चाट पा रहे थे।
और हल्के-हल्के से काट रहे थे।
क्योंकि मुझे दिख तो नहीं रहा था लेकिन मम्मी की दर्द की आवाज आती है “ओओ... ओह” जिससे पता चलता है अंकल ने काटा होगा।
अब मेरी मम्मी की जाँघें थीं भी तो एकदम चिकनी मक्खन के जैसे और एकदम गोरी।
अंकल के द्वारा मम्मी को अपनी जाँघें चाटने में जो सेंसेशन मेरी मम्मी को हुई थी उसका जवाब नहीं था।
क्योंकि इसकी खुशी मम्मी के चेहरे से पता चल रही थी।
ये मम्मी का पहला अनुभव नहीं था लेकिन सुहागरात में तो पहला ही अनुभव था।
इसलिए मेरी मम्मी इतना रोमांचित फील कर रही थीं।
अंकल मेरी मम्मी की जाँघों के हर हिस्से को चाट रहे थे और चूस रहे थे।
और कभी मेरी मम्मी की चिकनी जाँघों को मुँह में भरकर खींच देते हल्के से काट देते।
और फिर अंकल धीरे-धीरे मेरी मम्मी की जाँघों के अंदरूनी भाग तक पहुँच गए जहाँ मेरी मम्मी की पैंटी की बाउंड्री लाइन शुरू हो रही थी।
और वहाँ पर अपने होठों से काटना चालू कर दिया था।
अब वे जाँघों के जोड़ पर जाकर किस कर रहे थे।
और ये वो जगह थी जहाँ से मेरी मम्मी की कच्छी की बाउंड्री स्टार्ट होती है।
क्योंकि मैं अनुमान लगा रहा था क्योंकि बाहर से देखने पे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर कोई तकिया छुपा रखा हो।
और पहले तो अंकल ने अपनी जीभ निकालकर साइड से मेरी मम्मी की कच्छी में डालने की कोशिश की।
मेरी मम्मी को उस समय बड़ी शर्म आ रही थी कि अंकल जी का मुँह मेरी मम्मी के लहंगे में ही।
वे मेरी मम्मी की गीली चड्डी को देखकर बोले –
“वर्षा तेरी पैंटी तो पूरी गीली है।” (ये मुझे सुनाई दी अंकल की आवाज)
फिर अंकल ने अपने होठों को मेरी मम्मी की कच्छी के ऊपर से मेरी मम्मी की चुत पर रख दिया।
और पहली बार मेरी मम्मी के मुँह से एक भयंकर सिसकी निकल गई।
अब मुझे ऐसा लग रहा था कि अंकल मेरी मम्मी की गीली पैंटी के ऊपर अपने होठों को रखकर चलाने लगे।
अंकल के होठों और गरम साँसों को मम्मी अपनी चुत के ऊपर पाकर तो मेरी मम्मी की चुत और भी तेजी से पानी छोड़ने लगी थी।
जिससे कि मेरी मम्मी की चुत के रस से मेरी मम्मी की पैंटी पानी से बुरी तरह से गीली हो उठी थी।
अंकल बोले –
“वर्षा ये तो और ज्यादा पानी छोड़ रही है। देख कैसे तेरी चुत से झरना बह रहा है।”
तो मम्मी शर्मा गईं।
और अंकल ने मेरी मम्मी की पैंटी के ऊपर अपने होठ टिकाकर मेरी मम्मी की चुत के रस को चूस रहे थे।
मेरी मम्मी की चुत पूरी तरह मेरी मम्मी की पैंटी से ढकी हुई थी।
और अंकल जी को कहीं से भी मेरी मम्मी की नंगी चुत का एहसास नहीं हो रहा।
मेरे अंकल मेरी मम्मी की गीली पैंटी को अपने मुँह में दबाए उसमें से मेरी मम्मी के रस को चूस रहे थे।
मानो वो मेरी मम्मी की चुत के रस को बल्कि कोई अमृत को चूस रहे हों पी रहे हों।
तभी अंकल ने किसी तरह अपना एक हाथ मेरी मम्मी की पैंटी के अंदर डाला।
और मेरी मम्मी की चुत में से मेरी मम्मी की पैंटी को साइड किया।
और जैसे ही उन्होंने मेरी मम्मी की नंगी चुत पर अपने होठ रखकर किस किया मेरी मम्मी फड़फड़ा उठी थीं।
ये सब मैं अनुमान लगा रहा था क्योंकि मुझे कुछ दिख नहीं रहा था।
मम्मी दीवार पे टंगी घड़ी की तरफ देख रही थीं।
मैं समझ गया था मम्मी सोच रही हैं टाइम बहुत हो गया है।
लेकिन अंकल ने अभी तक उनको पूरी नंगी नहीं किया।
पर वे जानती हैं कि आज अंकल उनके साथ सुहागरात जरूर मनाएँगे।
इसलिए तो उन्होंने खुद अपनी सुहागरात के लिए मम्मी की चुत को शेव करके चिकना किया हुआ था।
अंकल तो मेरी मम्मी की चिकनी चुत को चूम रहे थे और चाट रहे थे।
अंकल जैसे-जैसे मेरी मम्मी की चुत चाट रहे थे मेरी मम्मी के बदन में जोरों से गुदगुदी होने लगी।
उत्तेजना के मारे मेरी मम्मी का बुरा हाल था।
और क्या मजा आ रहा था कि मम्मी बड़बड़ा रही थीं –
“प्लीज योगेश जी इसे छोड़ दो... उसे प्लीज छोड़ दो...”
पर उनका मुँह तो मेरी मम्मी की चुत पर लगा हुआ था।
और मेरी मम्मी की कमर न चाहते हुए भी हिल रही थी।
मेरी मम्मी के हाथ खुद-ब-खुद अंकल के सिर पर फिर रहे थे।
अभी भी उनका सिर मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर घुसा हुआ था।
और मेरी मम्मी का लहंगा मेरी मम्मी के घुटनों तक था।
मेरी मम्मी को परम सुख की अनुभूति हो रही थी।
मेरी मम्मी धीरे-धीरे अपने पड़ाव तक पहुँच रही थीं।
और जैसे-जैसे मेरी मम्मी झड़ने के करीब थीं वैसे-वैसे मेरी मम्मी की सिसकारियाँ ऐसे बढ़ रही थीं।
मेरी मम्मी खुद अपने हाथ से उनका सिर अपनी चुत पर दबाए नीचे से अपनी कमर को उछाल रही थीं।
मेरी मम्मी की सिसकारियाँ इतनी जोर-जोर से निकल रही थीं मानो बाहर के लोगों को लगे मेरी मम्मी अपनी सिसकारियाँ सुना रही हैं कि अंदर कमरे में मेरी मम्मी के साथ क्या हो रहा है।
और अंकल मेरी मम्मी की चुत इस तरह चाट रहे हैं।
और तभी मम्मी को ऐसा फील हुआ कि जैसे मेरे अंदर से कुछ गरम सा लावा बाहर निकल रहा है।
ऐसा एहसास तो मेरी मम्मी को पहले भी पिछले 6 महीनों से हो रहा है।
लेकिन सुहागरात में पहली बार।
जब मम्मी अपने चरम पर थीं तो मम्मी के मुँह से ऐसी भयंकर सिसकारी निकल रही थी कि उसको यहाँ शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूँ।
उफ्फ...
ऐसा लग रहा था कि मम्मी के जीवन में आज पहली बार किसी ने इतने जबरदस्त तरीके से मम्मी की चुत को चाटा हो।
और मम्मी को चुत चटवाने में इतना मजा आया कि उन्हें आज पता चला हो चुत चुदवाने से ज्यादा तो चटवाने में मजे हैं।
और पता नहीं कैसे मेरी मम्मी अपनी शर्म को छोड़कर अंकल का सिर अपनी चुत पर दबाए अपने चूतड़ों को जोर-जोर हिला रही हैं।
आप लोगों ने जिन्होंने सेक्स का अनुभव किया होगा उन्हें पता होगा कि जब औरत अपने चरम पर पहुँचती है तो वो कितनी भयंकर हो जाती है।
लेकिन अंकल अभी भी मेरी मम्मी की चुत को चाटने में लगे हुए थे।
और अब मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि मेरी मम्मी की जान ही बाहर न निकल जाए।
और मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे मेरी मम्मी जन्नत में हैं।
मेरी मम्मी अब खुद ही नीचे से अपनी गाँड उठा-उठा कर अपने यार योगेश अंकल को अपनी चुत चटा रही थीं।
और सिर पकड़कर खुद ही अपनी चुत पर दबा रही थीं।
मुझे गजब की फीलिंग थी।
अब मेरी मम्मी के हाथ-पाँव में जान नहीं बची थी।
और अंकल अभी भी मेरी मम्मी की चुत पर चिपके हुए थे।
और मेरी मम्मी को अभी भी हल्का-हल्का मजा आ रहा था।
अंकल अभी भी जिस तरह मेरी मम्मी की चुत से चिपके हुए थे मुझे ऐसा फील हो रहा था कि उन्होंने कभी चुत देखी ही नहीं हो।
वे भूल गए थे वो किस चुत पे लगे हुए।
वो पिछले 6 महीनों से उन्हीं की है।
वे अभी भी एक पालतू कुत्ते की तरह मेरी मम्मी की चुत को चाटने में लगे हुए थे।
और मेरी मम्मी लंबी-लंबी साँसें ले रही थीं।
(और हो भी क्यों न। आज मेरी मम्मी अपनी 20 साल पहले सिर्फ नाम की सुहागरात मनाई थी।
और अब 20 साल बाद असली सुहागरात मना रही हैं 33 साल की उम्र में।
एक कुँवारी लड़की की तरह अपनी चुत का ऑपरेशन करवाकर एकदम टाइट सील पैक चुत को अंकल के लंड से कुचलवाकर।
आज अपनी जवानी को मजा ले रही हैं।
और बिल्कुल 18 साल की लड़की लग रही हैं मेरी मम्मी।
कोई नहीं कह सकता वो एक 19 साल के बेटे की मम्मी और 33 की हैं।
वो 18 साल की कच्ची कुँवारी लड़की लग रही थीं।
आज मम्मी शादी के बाद असली सुहागरात मना रही हैं एक गैर मर्द के साथ।
वो भी उसके बेटे की मदद से।)
अंकल अपनी जीभ को मेरी मम्मी की चुत के हर एक कोने तक पहुँचाना जैसे उनका मकसद रहा हो।
और जब औरत को ऑर्गेज्म होता है और उसके बाद भी कोई उसकी चुत से चिपका रहे तो एक मध्यम आनंद की अनुभूति होती है जो उस समय मेरी मम्मी को महसूस हो रही थी।
ऐसा मजा मेरी मम्मी को सुहागरात में पहली बार मिला था।
और अंकल की दीवानी सी हो गई थीं।
कुछ देर बाद अंकल मेरी मम्मी के लहंगे से बाहर निकले।
मम्मी ने जैसे उनका चेहरा देखा तो मेरी मम्मी को एक हल्की सी हँसी आ गई।
क्योंकि उनके आधे से ज्यादा मुँह पर मेरी मम्मी का रस फैला हुआ था।
और थोड़ा बहुत उनके मुँह से नीचे टपक रहा था।
अंकल अपने होठों पर अपनी जीभ फेरते तो मेरी मम्मी शर्म से उनको रोकने लगीं।
तो अंकल बोले –
“नहीं वर्षा ये तो बड़ा ही टेस्टी है। जानती हो इसको पीने से मेरे अंदर कितनी एनर्जी का संचार हुआ।
इसको पीकर तो मैं अपने आप को कितना तंदुरुस्त और जवान महसूस करने लगा हूँ।”
जब अंकल और मम्मी दोनों की आँखें मिलीं तो वे दोनों ही मुस्कुरा दिए।
वे धीरे-धीरे मेरी मम्मी की तरफ बढ़े और अचानक मेरी मम्मी के होठ पर किस कर दिया।
मेरी मम्मी को बड़ा अजीब सा महसूस हुआ।
अंकल मेरी मम्मी के बगल में लेटे मेरी मम्मी को चूम रहे थे।
अंकल मम्मी को चूम रहे थे।
और धीरे-धीरे से अपने हाथ को मेरी मम्मी के पेट पर ले जाकर मेरी मम्मी की नाभि में एक-दो बार उँगली डाल रहे थे।
फिर उन्होंने अपने एक पैर से मेरी मम्मी के दोनों पैरों को दबाते हुए।
और अपनी उँगली मेरी मम्मी के लहंगे के नाड़े में फँसाई।
और मेरी मम्मी के लहंगे के नाड़े का सिरा ढूँढने लगे।
और जैसे ही उनके हाथ में मेरी मम्मी के लहंगे का सिरा आया तो उन्होंने फटाक से मेरी मम्मी के लहंगे का नाड़ा खींच दिया।
मेरी मम्मी का लहंगा खुला हुआ मेरी मम्मी के बदन पर पड़ा हुआ था।
कि तभी योगेश अंकल नीचे आए और मेरी मम्मी के लहंगे को मेरी मम्मी के पैरों से निकालने लगे।
लहंगा मेरी मम्मी के नीचे दबा हुआ था जिससे वो मेरी मम्मी के पैरों से निकल नहीं रहा था।
तो अंकल एक शरारती स्माइल के साथ मेरी मम्मी की ओर देखने लगे।
और मेरी मम्मी ने शर्माकर अपनी गाँड थोड़ी सी ऊपर उठा दी।
और तभी अंकल ने झट से मेरी मम्मी का लहंगा खींचकर मेरी मम्मी के पैरों से निकाल दिया।
मेरी मम्मी के लहंगे को अंकल मेरी मम्मी के सामने अपने हाथों में पकड़े थे।
और मेरी मम्मी नीचे लेटी शर्माती उनको देख रही थीं।
और उन्होंने मेरी मम्मी की आँखों में देखकर मेरी मम्मी के लहंगे को चूमते हुए नीचे फेंक दिया।
जो लहंगा अभी कुछ क्षण पहले मेरी मम्मी की कमर के साथ लिपटा था अब वो लहंगा जमीन पर पड़ा था।
मेरी मम्मी के लहंगे को मेरी मम्मी के बदन से निकालने के बाद अंकल मेरी मम्मी के ऊपर से उठ खड़े हुए।
और मेरी मम्मी की ओर एक शरारती मुस्कान के साथ मेरी मम्मी की आँखों में देखते और मुस्कुराते हुए मेरी मम्मी की आँखों के सामने ही।
अपना पायजामा के नाड़े को खींचकर खोलने लगे।
अंकल के सीने में घने काले बाल... जाँघों पे घने काले बाल...
और लंड एकदम तना हुआ था जैसे कि अभी उनका अंडरवियर फाड़कर बाहर आने को बेताब हो।
मेरी मम्मी की तो नजर ये सब देखकर शर्मा गई।
लेकिन मन में एक राहत की बात थी मेरी मम्मी के लिए कि अंकल जी का लंड बहुत ही दमदार था।
क्योंकि मम्मी उसे पिछले 6 महीनों से ले रही थीं।
मम्मी को इस बात की तसल्ली थी कि अंकल अपने इस लंड से मेरी दमदार चुदाई करेंगे।
उन्हें तड़पाने नहीं पड़ेगा जैसे 20 साल पहले सुहागरात में तड़पी थीं।
पिछले 20 साल से रातों को अपने हाथों की उँगलियों से अपनी चुत की आग को ठंडा करती आ रही थीं।
पिछले 6 महीनों तक मम्मी ने 19 साल तक उँगलियों का ही सहारा लिया था।
लेकिन पिछले 6 महीनों से उन्हें अंकल का दमदार लंड मिल रहा था।
अंकल का लंड एकदम कड़क बिल्कुल कुतुब मीनार की तरह खड़ा था।
सच में कोई लड़की अपने पति का ऐसे लंड देखकर खुशी से पागल हो सकती है।
और मम्मी भी किसी लड़की से कम नहीं।
वो आज भी एक लड़की ही हैं।
वो तो उनकी कम उम्र में 20 साल पहले शादी कर दी थी।
नहीं तो आजकल तो 33 साल की लड़कियाँ ही होती हैं।
आजकल तो 33 साल की लड़कियों की शादी होती है।
पर मम्मी की शादी 20 साल पहले हो गई थी।
लेकिन मम्मी अब अपनी असली सुहागरात 33 साल की उम्र में मना रही थीं।
और मम्मी को एक खुशी इस बात की भी थी कि अंकल का लंड मम्मी के लिए ही है।
और उनके बेटे ने ही योगेश के लंड पे उसकी मम्मी का नाम लिखवाया है “वर्षा”।
और मम्मी की चुत पे भी अंकल का नाम लिखा था “योगेश”।
अंकल का लंड मेरी मम्मी के लिए अपना सिर उठाकर खड़ा था।
हाय राम अंडरवियर में से अंकल जी का मस्त घोड़े जैसे लंड देखते ही मेरी मम्मी की हालत खराब होने लगी थी।
क्योंकि मम्मी अंकल के लंड को जानती थीं।
और आज उनकी चुत एक कुँवारी कन्या की तरह थी।
एकदम सील पैक।
ऑपरेशन से मम्मी को ऐसा लग रहा था अंकल का लंड का गुस्सा मेरी चुत की क्या हालत करेगा।
बेचारी सील पैक चुत का क्या हाल होगा।
मम्मी के बदन को यदि अंकल की जगह कोई और होता तो मम्मी के बदन को मेरी मम्मी की चिकनी जाँघ देखकर उस पर ही अपना माल छोड़ देता।
लेकिन मैं अंकल को जानता था और मम्मी भी।
इसलिए मम्मी की आँखों में डर भी दिख रहा था।
क्या आज अंकल का सांड जैसा लंड उनकी फूल जैसी सील पैक चुत की क्या हालत करेगा।
मुझे तो लग रहा था मम्मी की सील पैक चुत अंकल का लंड नहीं खेल पाएगी।
और एक तरफ ये भी पता था मम्मी की चुत पिछले 6 महीनों से लंड ले रही है।
लेकिन आज चुत सील पैक थी।
शायद मम्मी भी यही सोच रही थीं क्या अब उनके इस मूसल लंड को झेल पाऊँगी.. बिस्तर पर उनका साथ अच्छे से दे भी पाऊँगी या नहीं।
फिर मम्मी शर्म से दूसरी तरफ देखने लगीं।
तो अंकल आकर बेड पर मेरी मम्मी के साथ लेट गए।
अब मेरी मम्मी और अंकल बेड पर सिर्फ अंडरवियर में ही लेटे थे।
बिस्तर का तो हाल तो बेहाल था.. चादर पूरी खिंची हुई थी.. फूल बिखरे हुए.. कुछ जमीन पे..
ये सब देख के कोई भी बोल सकता है.. कि किसी “मर्द और औरत की बीच यहाँ अभी जबरदस्त चुदाई हुई है”।
जबकि सच्चाई यह कि चुदाई हुई नहीं सिर्फ चुसाई हुई जिसमें ये हाल।
अंकल मेरी मम्मी के बगल में लेटकर मेरी मम्मी को अपनी बाहों में भरकर चूमने लगे।
अब वे दोनों के नंगे बदन एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
मेरी मम्मी अपने चिकने बदन से अपने यार योगेश जी के सख्त बदन पर घने बालों की रगड़ मेरी मम्मी के बदन में एक अलग की उमंग दिल में उठ रही थी।
मेरी मम्मी की साँसों की गति और भी तेज हो गई थी।
अंकल ने अपना चेहरा मेरी मम्मी के चेहरे पर झुकाया।
और अपने होठों को मेरी मम्मी के होठों की ओर बढ़ाने लगे।
तो मेरी मम्मी ने उत्सुकता से अपने होठों को उनके होठों की ओर बढ़ा दिया।
मेरी मम्मी को इस कदर गरम देखकर तो अंकल मेरी मम्मी के होठों को अपने होठों में दबाकर फिर से उनका रस चूसने लगे।
मेरी मम्मी और अंकल के होठों से होठ, छातियों से छातियाँ, मेरी मम्मी की चुत के ऊपर उनका लंड, पैरों से पैर रगड़ रहे थे।
मम्मी-अंकल दोनों के बदन एक-दूसरे के साथ ऐसे चिपके जैसे कि दो बदन न होकर एक ही हों।
मेरी मम्मी की चुचियाँ योगेश अंकल जी की चौड़ी छाती में दबी हुई थीं।
उनका एक हाथ मेरी मम्मी के गोल-मटोल चूतड़ पर था जिस पर वे प्यार से थप्पड़ मार रहे थे।
और अपने दूसरे हाथ को मेरी मम्मी के हाथ पर रखा।
और मेरी मम्मी का हाथ थामकर उसको अपने अंडरवियर में खड़े लंड पर रखकर उसको थमा दिया।
मम्मी अपने हाथों में मर्द के लंड के एहसास से ही मेरी मम्मी उत्तेजित होने लगीं।
कुछ देर तक अंकल ऐसे ही अपने लंड के इर्द-गिर्द मेरी मम्मी के हाथ को थामे रहे।
और फिर मेरी मम्मी के हाथ से ही अपने लंड को सहलाने लगे।
कुछ देर अंकल मेरी मम्मी के हाथ को पकड़कर अपना लंड सहलाते रहे।
और जब उन्होंने देखा मेरी मम्मी खुद ही उनका लंड सहला रही हैं तो उन्होंने मेरी मम्मी का हाथ छोड़ दिया।
अब मेरी मम्मी को भी अंकल का लंड सहलाने में मजा आ रहा था।
क्योंकि इस उम्र 47 साल में भी अंकल का लंड एक लोहे की रॉड की तरह था जो पिछले 6 महीनों से मम्मी को सुख दे रहा था।
अंकल का लंड एकदम असली मर्द का लंड मेरे नामर्द बाप की तरह नहीं।
मेरी मम्मी अपना हाथ अच्छी तरह से अंकल के लंड पर घुमाकर उनके लंड की लंबाई और मोटाई का जायजा लेने लगीं।
हालाँकि मम्मी को इसकी बाप पता थी फिर भी वे मेरे नामर्द बाप से तुलना कर रही थीं।
क्योंकि आज सुहागरात है और ये उनकी दूसरी सुहागरात है।
पहली सुहागरात मेरे नामर्द बाप के साथ 20 साल पहले जिसकी लंड की माप लंबाई 2 इंच मोटाई आधा इंच जो कि एक बच्चे की लिल्ली होती है।
और अंकल की माप 9 इंच लंबा और 4 इंच मोटा।
यदि कहूँ तो अंकल के लंड के मुकाबले पापा का लंड ना के बराबर है।
और जिस भी औरत को पता हो कि उसके पति का लंड इतना जबरदस्त है वो कितनी खुश होती ये आप अच्छी तरह से जानते हैं।
अंकल तो मेरी मम्मी को अंडरवियर के ऊपर से ही अपने लंड के आकार का एहसास करा रहे थे कि उनका लंड कितना कड़क और दमदार है इस उम्र में भी।
क्योंकि वे 47 के मम्मी 33 की।
वे जानते हैं सब कुछ पहले से हो रहा है।
पर उन्होंने मम्मी को कहा था सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है।
इसलिए मम्मी भी अनजान बनते हुए सब कुछ पहली बार कर रही थीं।
मेरी मम्मी को तो उसी समय ये फील हो गया था कि आज इस लंड से उनकी कितनी जबरदस्त ठुकाई होने वाली है।
और होगी भी।
क्योंकि अंकल का लंड सुहागरात मनाने के लिए पिछले 2 दिन से शांत बैठा था।
आज अपना सारा गुस्सा मेरी मम्मी पर निकालने वाला था।



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