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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#34
**अपडेट 31**

मेरी मम्मी ने अपने आप से बहुत कोशिश की कि अपने आप पर कंट्रोल रखूँ।
लेकिन मम्मी भी तो एक जवान औरत थीं।
मम्मी के भी कुछ अरमान थे।

और जब अंकल जी जैसे मर्द ने मेरी मम्मी के बदन से खेलकर मेरी मम्मी के अंदर के अरमान को जगाया तो मम्मी भी तड़प सी उठी थीं।

मम्मी ने अपने आप को रोकने के लिए अपने हाथों को फैलाकर बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भरकर खींचने लगीं।
जबकि अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े मेरी मम्मी की पीठ को चाटते अपने लंड मेरी मम्मी की मस्त गद्देदार गाँड पर रगड़ते रहते थे।

मस्ती के कारण मेरी मम्मी भी सातवें आसमान में थीं।

मम्मी को पता ही नहीं चला कब अंकल जी उठे और उन्होंने अपना कुर्ता और बनियान उतार दिया।
और आधे नंगे ही मेरी मम्मी के ऊपर लेट गए।

मम्मी को अंकल के आधे नंगे होने का एहसास तब होता है जब मम्मी को अपनी पीठ पर उनके छाती के घने बालों का स्पर्श हुआ।
मर्द के बालों की रगड़ अपनी पीठ पर मम्मी को एक अलग ही मजा दे रही थी।

अंकल जी मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े मेरी फूल जैसी नाजुक कोमल मुलायम मम्मी को कसकर पकड़कर और मेरी मम्मी की पीठ पे कभी मेरी मम्मी की गर्दन.. कान.. को चाटने लगे चूसने लगे।

मेरी मम्मी के मुँह से सिर्फ “आह”... “उफ्फ” निकल रही थी।

अब तक अंकल का मेरी मम्मी के साथ इतना कुछ करने से मेरी मम्मी समझ गई थीं कि अंकल इस खेल में कितने बड़े खिलाड़ी हैं।
हालाँकि पिछले 6 महीनों से पता है पर आज तो अंकल कुछ ज्यादा ही बड़े खिलाड़ी लग रहे हैं।

और मेरी मम्मी इतना शर्मा रही हैं भी कैसे वो मेरी मम्मी की शर्म-हया को हटा रहे।
मुझे खुद भी पता नहीं चल पाया था।

पर इतना जरूर था कि मम्मी को अब अपने योगेश जी के साथ ये सब करने में जीवन का असली आनंद मिल रहा था।

तभी अंकल जी ने अपना हाथ मेरी मम्मी की पीठ पर मेरी मम्मी की ब्रा के हुक पर रखा।
कि मेरी मम्मी सिहर उठीं।

और जैसे वो अपना हाथ मेरी मम्मी की ब्रा के हुक पर रखकर उससे खोलने की कोशिश करने लगे।
और एक ही झटके के साथ मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया।

और मेरी मम्मी की ब्रा मेरी मम्मी के कंधों पर ढीली हो गई।
मेरी मम्मी उल्टी लेटी थीं नहीं तो मेरी मम्मी की ब्रा भी मेरी मम्मी के बदन के साथ कब की छोड़ देती।

मेरी मम्मी की ब्रा का हुक खुलते ही मेरी मम्मी की तो शर्म के मारे जान ही निकल गई थी।
और मेरी मम्मी ने अपना मुँह चादर में छुपा लिया।

पर मेरे योगेश अंकल ने मेरी मम्मी को पकड़कर सीधा किया।
पर मेरी मम्मी शर्म के मारे सीधी नहीं हुईं।

तो वो मेरी मम्मी का हाथ पकड़कर जोर से मेरी मम्मी को सीधा करने लगे।
मेरी मम्मी हिरणी जैसी कहाँ उनके जैसे सांड का मुकाबला कर पातीं।

सो उन्होंने मेरी मम्मी को बिल्कुल सीधा कर दिया।
अब मेरी मम्मी पीठ के बल लेटी थीं।

और मेरी मम्मी की एकदम नंगी चुचियाँ योगेश अंकल के सामने थीं।
मेरी मम्मी की एकदम टाइट चुचियाँ जिन पर पिंक कलर के निप्पल जो इस समय एकदम कड़क होकर खड़े थे।

मेरी मम्मी ने धीरे से आँखें खोलीं तो अंकल को अपनी नंगी चुचियों को इस तरह देखते शर्म से फिर अपनी आँखें बंद कर लीं।
और जल्दी से मम्मी ने अपने हाथों को अपनी दोनों चुचियों पर रखकर उनको ढक दिया।

और मर्द को उस समय रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।
सो योगेश अंकल ने मेरी मम्मी के हाथ पकड़े और मेरी मम्मी के हाथों को मेरी मम्मी की चुचियों से हटा दिया।

इससे पहले मेरी मम्मी कुछ समझ पातीं अंकल ने अपने दोनों हाथ बढ़ाकर मेरी मम्मी के बदन पर जो मेरी मम्मी की ब्रा खुली थी उसको पकड़कर धीरे से खींचकर निकाल दिया।

और हाथ लगाकर मेरी मम्मी की चुचियों को पकड़ लिया और उससे जोर से दबा दिया।
वे बार-बार मेरी मम्मी की चुचियों को दबाते और मेरी मम्मी के निप्पल को जोर से मसल दिया।

अंकल तो मेरी मम्मी की चुचियों को जोर-जोर से मसलने लगे।
मस्ती के कारण मेरी मम्मी तो सातवें आसमान पर थीं।

मेरी मम्मी के मुँह से मस्ती से सिसकियाँ निकलने लगीं –
“हाय... आह... मर गई प्लीज धीरे... जी होली मर जाऊँगी...”

पर मेरे अंकल उस समय कहाँ रुकने वाले थे।
उन पर तो जैसे मेरी मम्मी की किसी बात का असर ही नहीं था।

मेरी मम्मी मस्ती में बड़बड़ा रही थीं कि उन्होंने अगले ही पल अपना मुँह बढ़ाकर मेरी मम्मी की चुची पर रख दिया।
और मेरी मम्मी के निप्पल को अपने होठों के बीच दबा लिया।

मेरी मम्मी तो जैसे पागल ही हो गईं।
अंकल कभी मेरी मम्मी के निप्पल को अपने होठों में दबाकर खींच देते।
कभी मेरी मम्मी की पूरी चुची को जैसे कोई आम चूसता है उसी तरह मेरी मम्मी की पूरी की पूरी चुची अपने मुँह में भरकर आम की तरह चूसने लगते।
और कभी-कभी तो मेरी मम्मी की चुची पर हल्के से अपने दाँतों से काट भी देते।

अंकल के इस तरह मेरी मम्मी की चुचियों को चूसने पर मेरी मम्मी तो मानो जन्नत में उड़ने लगी थीं।
अंकल कभी मेरी मम्मी के निप्पल को अपने दाँतों से काटते।
और कभी अपनी जीभ से छेदते।
और कभी मेरी मम्मी की चुची को जितना हो सकता अपने मुँह में भरकर ऐसे चूसते मानो मेरी मम्मी की चुची नहीं कोई दूसरी आम हो पर मेरी मम्मी की चुची से आम की तरह ही मीठा रस निकल रहा हो।

वैसे असली मर्दों को औरतों की चुचियों को चूसने में आम से ज्यादा मजा आता है। इसमें कोई शक नहीं है (मेरे नामर्द बाप को छोड़कर)।

मस्ती से तो मेरी मम्मी पागल हो गई थीं।
पर मेरा दिल तो कर रहा था कि अंदर जाकर मम्मी से कहूँ आप अपनी बाहें अंकल के गले में डाल दो और अंकल को अपने सीने से चिपका लो।
और मम्मी की चुचियाँ अपने हाथों से पकड़ अंकल से खूब चूसवाओ।

पर शर्म के मारे ऐसे नहीं कर पा रहा था।
क्योंकि मैं अंदर जाता तो माँ-बेटे के बीच का पर्दा हट जाता।
मुझे डर लगने लगा था यदि अंकल इसी तरह मेरी मम्मी की चुचियाँ चूसते रहे तो मम्मी कहीं शर्म न छोड़ दें।
और बेशरमों की तरह खुद उन्हें अपनी बाहों में भरकर उनको खुद अपनी चुचियों का रस न पिलाने लगें।

मुझे यकीन भी था अगर अंकल कुछ देर और इसी तरह मेरी मम्मी की चुचियों का रस चूसते रहे तो मेरी मम्मी किसी भी पल शर्म की दीवार को तोड़ देगी।

और मेरा शक सही निकला।
क्योंकि मम्मी ने अपनी दोनों बाहें फैला बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया।

अब मस्ती के कारण मेरी मम्मी का कंट्रोल करना बहुत ही मुश्किल हो गया।
मेरी मम्मी की साँसें तेज-तेज चलने लगी थीं।
मेरी मम्मी के मुँह से “आह... आह...”

मेरी मम्मी बिस्तर पर लेटी अपने होठों को काटने लगीं।
अपने मुँह को इधर-उधर झटक रही थीं।
जबकि अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को बड़े प्यार से चूस रहे थे।

अंकल के चूसने से मेरी मम्मी की चुचियाँ एकदम से लाल हो चुकी थीं।
मेरी मम्मी के मुँह से बस मेरी मम्मी की सिसकियों के साथ –
“आह योगेश जी... बस कीजिए... रुक जाइए... और नहीं प्लीज दर्द हो रहा है।”

लेकिन अंकल मेरी मम्मी की चुचियों को छोड़ने की बजाय और भी जोर-जोर से चूसने लगे।
वे मेरी मम्मी की एक चुची को चूसते और दूसरी को अपने हाथ में पकड़कर उससे खेलने लगते।
वे बारी-बारी से मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को चूसते।

अब मेरी मम्मी भी पागल हो उठी थीं।
आखिर मेरी मम्मी भी एक औरत ही थीं।
कब तक अपने यार योगेश जी के इस तरह मेरी मम्मी की चुचियों को चूसने पर अपने आप को कंट्रोल कर पातीं।

मेरी मम्मी की टाँगों के बीच मेरी मम्मी की चुत लगातार पानी छोड़ रही थी।
कि तभी अंकल मेरी मम्मी की दोनों चुचियाँ एक साथ मुँह में भरकर चूसने लगे।

मुझे ऐसा लगा जैसे मम्मी मन में बोल रही होंगी –
“योगेश जी अब रुक जाइए। बस एक बार पहले मुझे चोद दीजिए। फिर जितना आपका दिल करे मेरी चुचियों को चूस लीजिए।”

पर मैं जानता था मेरी मम्मी शर्म के कारण ऐसे बोल नहीं सकती थीं।

मेरी मम्मी की चुचियों को इस तरह चूसकर मेरी मम्मी को इस हद तक गरम करने पर मैं समझ गया था कि अंकल मम्मी के मुँह से कहलवाना चाहते हैं “मुझे चोदो”।
लेकिन मम्मी अपने आप पर पूरा कंट्रोल करके रखी थीं।

अब इस खेल में मेरी मम्मी को आज पूरा मजा मिलने वाला था जो 20 साल पहले मेरे नामर्द बाप के साथ हुई सुहागरात में नहीं मिला था।

अब मम्मी को भी भरपूर मजा आ रहा था।
और अंकल की तरफ से ऐसा कुछ न होते देखकर मेरी मम्मी खुद ही नीचे से अपनी चुची उछालकर उनको इशारा करने लगीं कि अब मेरी चुत उनका लंड माँग रही है।

मेरी मम्मी तो मस्ती में नीचे से गाँड उठाकर –
“हाय योगेश जी चूसो मेरी चुची... धीरे से काटो मेरी चुची।”

और अपनी बाहों को अंकल जी के गले में डाल दिया।

मेरी मम्मी मस्ती में आँखें बंद किए –
“आह योगेश जी प्यार से... धीरे से काटिए नहीं बस धीरे से मुँह में भर खींचिए... ऐसे ही।”

मेरे अंकल जी मेरी मम्मी की चुचियों का रस चूसते –
“आह वर्षा कितना रस भरा है इनमें। दिल करता है तुम्हारे इन दूसरी आमों का मीठा रस पीता ही रहूँ।”

मम्मी ने जैसे ही अपनी आँखें खोलीं मेरी मम्मी की आँखें अंकल की आँखों से जा मिलीं।
और अंकल की आँखों से आँख मिलते ही मेरी मम्मी ने शर्म से अपनी आँखें झुका लीं।
पर अंकल अपने होठों को मेरी मम्मी की चुचियों से नहीं हटाया।

मेरे अंकल मेरी मम्मी की चुचियों के साथ ऐसे चिपके हुए थे जैसे शहद के साथ कोई मधुमक्खी हो।
और मेरी मम्मी की चुचियों को चूसते बोले –
“वर्षा मेरी डार्लिंग आई लव यू।”

अब मेरी मम्मी भी अंकल के साथ सुहागरात में पति-पत्नी के संबंध बनाने के लिए आगे बढ़ रही थीं।
हालाँकि पिछले 6 महीनों से लगातार मम्मी चुद रही हैं अंकल से।
लेकिन आज तो सुहागरात मनाने जा रही हैं।

और अंकल ने कहा है सुहागरात में सब पहली बार होता है।
और मम्मी भी ये जानती होंगी आज अंकल के साथ उनकी सुहागरात यादगार बनने वाली है।

क्योंकि जिस तरह का मजा उन्होंने मेरी मम्मी को अभी तक दिया शायद वैसा मजा मेरे नामर्द बाप तो कभी दे ही नहीं सकते।
इसलिए 20 साल पहले तो नाम की सुहागरात हुई थी।
असली सुहागरात तो 20 साल बाद आज हो रही है मम्मी की योगेश अंकल के साथ।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 09:14 PM



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