22-08-2026, 08:51 PM
> "आप सभी पाठकों का बहुत बहुत धन्यवाद और इस थ्रेड पर स्वागत है! आपके कमेंट्स और सुझावों ने कहानी को एक नया मोड़ दिया है। इसी के आधार पर पेश है अगला अपडेट। पढ़िए और बताइए आपको कैसा लगा! ✨"
एक दिन मैं, मम्मी, पापा और छोटा भाई सब मिलकर खाना खा रहे थे। दोनों बहनें दुकान पर थीं और खाना खा चुकी थीं। इधर उधर की बातें हो रही थीं, इसी बीच मुझे मम्मी के स्त्री चरित्र का वो रूप दिखा, जिसकी मुझे काफी दिनों बाद समझ आई।
मम्मी ने पापा की तरफ देखते हुए कहा, "भाई साहब (प्रदीप अंकल की तरफ इशारा करते हुए) को बोल दो न कि रात को घर आ जाया करें।कह तो आपने पहले भी रखा है पर ये बहुत कम आते हैं। मैं बच्चों के साथ अकेली रहती हूँ तो बहुत डर लगता है, वैसे भी हमारे घर के आस पास अंधेरा होते ही सन्नाटा छा जाता है।"
अंकल ने मुस्कुराते हुए मजाक में कहा, "अरे बहनजी, आ तो जाता हूँ! क्यों झूठी शिकायत लगा रही हो? कभी काम की वजह से देर हो जाती है तो कभी गाँव जाना पड़ता है।" फिर उन्होंने शरारत भरी नज़रों से मम्मी की तरफ देखा और हँसते हुए बोले, "तुम तो हो ही बड़ी
डरपोक हो! चूहे के खड़के की आवाज सुनकर ऐसे डर गईं थीं जैसे कोई चोर आ गया हो!" कहकर अंकल जोर से हंसने लगे,यह सुनकर पापा समेत घर के सब लोग ठहाका मारकर हँस पड़े।
मुझे समझ आ गया था कि मम्मी अंकल का घर आना सुनिश्चित करने के लिए डर का बहाना कर रही थी और अंकल ने वो चूहे वाली बात सुना कर पापा को यकीन दिला दिया था के सच में मम्मी अकेली घर रहने पर डरती है,इसीलिए पापा को कह रही थी के अंकल को रोजाना आने के लिए बोल दें।
"सच तो यह था कि यह सब कोई नई शुरुआत नहीं थी, बल्कि यह खेल तो काफी समय से पर्दे के पीछे चल रहा था। मम्मी ने यह बात पापा के सामने बड़ी ही चतुराई से कही थी ताकि कल को अगर कोई पापा के कान भरे भी, तो उन्हें ज़रा भी शक न हो। आखिर अंकल मम्मी को हमेशा 'बहन जी' कहकर ही बुलाते थे, और इसी वजह से पापा भी कभी गहराई से नहीं सोचते थे। उनके लिए तो यह सिर्फ एक भाई का अपनी बहन की सुरक्षा की फिक्र करना था।
पर मैं पास ही बैठा यह सब देख रहा था और मुझे मम्मी की इस सोची समझी चाल का पूरा अंदाज़ा था। मम्मी ने इस 'डर' के बहाने को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया था ताकि अंकल के घर आने का सिलसिला और भी गहरा हो सके। यह कोई अचानक हुआ फैसला नहीं था, बल्कि यह तो उस खेल का हिस्सा था जो काफी समय से धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था। पापा को लग रहा था कि घर में सुरक्षा बढ़ रही है, पर मुझे पता था कि असल में घर के भीतर वह वर्जित खेल पहले से ही अपनी जड़ें जमा चुका था। अंकल का 'बहन जी' कहना और पापा का उन पर आँख मूँदकर भरोसा करना ही तो इस खेल को अब तक सुरक्षित बनाए हुए था। जिसे पापा सुरक्षा समझ रहे थे, वह दरअसल उस गुनाह को और भी ज्यादा गति देने की तैयारी थी जो काफी समय से परदे के पीछे पक रहा था।"
पापा दो महीने घर में रहने के बाद अब वापस विदेश जाने वाले थे। मेरी दोनों बहनें भी हॉस्टल जाने वाली थीं। उन्हें तो पहले ही जाना था, पर वो चार पांच दिन और रुक गई थीं क्योंकि सबने सोचा था कि जब पापा को एयरपोर्ट छोड़ने जाएंगे, तो वहीं से सीधा हॉस्टल चली जाएंगी।
मेरा छोटा भाई भी कुछ दिनों के लिए मामा के घर से आया हुआ था(बता चुका हूं शुरू में के छोटा भाई मामा के पास ही रहता था)। तो सबने मिलकर यह तय किया कि जब पापा को एयरपोर्ट छोड़ने का वक्त आएगा, तब घर के बाकी सभी लोग एक साथ निकल जाएंगे। प्लान के मुताबिक, पापा को छोड़ने के बाद मैं,मेरी मम्मी और छोटा भाई मामा के घर चले जाएंगे। वहाँ एक दो दिन रुकने के बाद, छोटे को वहीं छोड़कर मैं और मम्मी वापस घर आ जाएंगे।
इस तरह जब पापा , भाई और बहनें सब के चले जाने के बाद घर में मैं और मम्मी दोनों ही रह गए।अंकल रोजाना घर आ जाते,उन दोनों का पो पुराना chudai वाला
सिलसिला फिर से उसी रफ्तार से चल पड़ा।" अब धीरे धीरे
घर की स्थिति वैसी ही बन रही थी जैसा मैंने चाहा था।
अब अंकल के बताए गए प्लान पर अमल करने का समय आ चुका था।
और फिर वो दिन भी आ ही गया"रात का सन्नाटा गहरा चुका था। मम्मी को लगा के मैं आज भी मै(रवि) नींद की दवाई के नशे में गहरी नींद न में सोया हुआ हूँक्योंकि उनको लगा कि इस अंधेरे और खामोशी का फायदा उठाने का यह सबसे सही वक्त है।
मैं असल में सोया नहीं था, बस अपनी आँखें मूँदकर सोने का नाटक कर रहा था। तभी मैंने देखा कि मम्मी दबे पाँव अंकल के कमरे की तरफ बढ़ रही हैं। मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। थोड़ी देर बाद मैं धीरे से उठा और दबे पाँव उस कमरे के दरवाज़े तक जा पहुँचा। दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था, और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी साँसें थम सी गईं।
मम्मी अंकल के साथ बेहद उत्तेजक और बेबाक अंदाज़ में थीं। वह पूरी तरह से उस वर्जित खेल में डूबी हुई थीं, उनकी हर हरकत में एक अजीब सी बेताबी और प्यास थी। वह अंकल के साथ कुछ ऐसा कर रही थीं जो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। मैं दरवाज़े की दरार से यह सब देख रहा था और मेरा शरीर रोमांच से काँप रहा था। पर तभी, अचानक मम्मी की नज़र दरवाज़े की तरफ गई। उनकी आँखें मेरी आँखों से टकरा गईं। वह पल ऐसा था जैसे वक्त वहीं रुक गया हो मम्मी के चेहरे पर घबराहट थी पर मेरे मन में कोई डर नहीं था क्योंकि ये सब उसी प्लान का हिस्सा था जो अंकल और मैने मिल कर बनाया था,पर मम्मी को इस प्लान वाली साजिश के बारे में भौरा भी अंदाजा नहीं था।"
"मम्मी की आँखों में जो खौफ़ मैंने देखा, वह सिर्फ पकड़े जाने का नहीं था, बल्कि उस शर्मिंदगी का था जो उनके पूरे वजूद को झकझोर रही थी। हमारी आँखें टकराते ही उनके हाथ काँपने लगे और वह अंकल के साथ जो उत्तेजक हरकतें कर रही थीं, वे अचानक एक ठिठक सी गईं। उनके चेहरे का रंग उड़ चुका था। उन्हें लगा कि आज उनका सारा सच, उनकी सारी मर्यादा एक पल में तार तार हो जाएगी।
मम्मी के मन में डर का एक बवंडर उठ रहा था उन्हें लग रहा था कि अब पर्दाफाश हो चुका है। वह बार बार अपनी बिखरी हुई साड़ी और अस्त व्यस्त हालत को संभालने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनकी घबराहट उन्हें स्थिर नहीं होने दे रही थी। उनके दिमाग में बस एक ही ख्याल चल रहा था कि अगर मैंने ज़रा सी भी आवाज़ की या पापा को बता दिया, तो उनका क्या होगा? वह डर उन्हें अंदर से सुखा रहा था। वह इतनी डरी हुई थीं कि उनकी साँसें तेज़ चलने लगीं और वह बार बार दरवाज़े की तरफ और फिर मेरी तरफ देख रही थीं, जैसे किसी चमत्कार का इंतज़ार कर रही हों कि शायद मैं उन्हें अनदेखा कर दूँ।
मम्मी के उस डर और बेबसी को देखकर मुझे अहसास हुआ कि वह इस वक्त कितनी कमज़ोर पड़ चुकी हैं। वह खुद को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस डर की वजह से वह काँप रही हैं, वह डर ही अब इस खेल का सबसे बड़ा हथियार बनने वाला था। वह पर्दाफाश होने के डर से इतनी सहमी हुई थीं कि अब वह पूरी तरह से मेरे नियंत्रण में आने की कगार पर थीं।"
"मम्मी की आँखों में जो खौफ़ और घबराहट का समंदर उमड़ रहा था, मैं उसे बखूबी महसूस कर सकता था। वह थर थर काँप रही थीं, जैसे किसी ने उनके सीने से उनकी पूरी दुनिया ही छीन ली हो। उन्हें लग रहा था कि अब मैं चिल्लाऊँगा, हंगामा करूँगा या फिर इस शर्मनाक सच को पूरे घर में फैला दूँगा। वह अपनी बिखरी हुई हालत और अपनी उन उत्तेजक हरकतों के बीच बुरी तरह फंस चुकी थीं। वह डर के मारे जम सी गई थीं।
लेकिन मेरा मकसद उन्हें डराना या उनके इस डर का फायदा उठाकर उन्हें नीचा दिखाना नहीं था। मेरा इरादा इससे कहीं ज़्यादा गहरा और सोची समझी चाल का हिस्सा था। मैंने उनकी आँखों में देखा उस डर को, उस बेबसी को और बिना एक शब्द बोले, बिना कोई भाव दिखाए, मैं चुपचाप पीछे हट गया। मैंने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और बिना पीछे मुड़े अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
मैं अपने कमरे में वापस आया और बिना किसी शोर शराबे के चुपचाप अपने बिस्तर पर लेटकर सो गया। लेकिन उस सन्नाटे में, उस चुप्पी के पीछे एक गहरा खेल चल रहा था। मैंने उन्हें उनके ही डर के साथ उस कमरे में अकेला छोड़ दिया था। मम्मी के लिए वह सन्नाटा किसी चीख से भी ज़्यादा भयानक था। उन्हें लग रहा था कि मेरी यह चुप्पी किसी बड़े तूफान के आने से पहले की शांति है। वह उस कमरे में अंकल के साथ तो थीं, लेकिन उनका पूरा ध्यान अब उस डर पर था जो मैंने उन्हें दिया था एक ऐसा डर जो उन्हें अब और भी ज़्यादा बेचैन और मेरे ख्यालों में उलझाए रखने वाला था।"
अब सवाल यह है कि क्या मम्मी इस स्थिति का सामना कर पाएंगी,क्या रवि के बिछाये इस जाल से निकलने का कोई रास्ता निकाल पाएगी , क्या रवि कोई नया पैंतरा खेलेगा? आपके इन सब सवालों का जवाब अतिशीघ्र अगले अपडेट में मिलने वाला है।
एक दिन मैं, मम्मी, पापा और छोटा भाई सब मिलकर खाना खा रहे थे। दोनों बहनें दुकान पर थीं और खाना खा चुकी थीं। इधर उधर की बातें हो रही थीं, इसी बीच मुझे मम्मी के स्त्री चरित्र का वो रूप दिखा, जिसकी मुझे काफी दिनों बाद समझ आई।
मम्मी ने पापा की तरफ देखते हुए कहा, "भाई साहब (प्रदीप अंकल की तरफ इशारा करते हुए) को बोल दो न कि रात को घर आ जाया करें।कह तो आपने पहले भी रखा है पर ये बहुत कम आते हैं। मैं बच्चों के साथ अकेली रहती हूँ तो बहुत डर लगता है, वैसे भी हमारे घर के आस पास अंधेरा होते ही सन्नाटा छा जाता है।"
अंकल ने मुस्कुराते हुए मजाक में कहा, "अरे बहनजी, आ तो जाता हूँ! क्यों झूठी शिकायत लगा रही हो? कभी काम की वजह से देर हो जाती है तो कभी गाँव जाना पड़ता है।" फिर उन्होंने शरारत भरी नज़रों से मम्मी की तरफ देखा और हँसते हुए बोले, "तुम तो हो ही बड़ी
डरपोक हो! चूहे के खड़के की आवाज सुनकर ऐसे डर गईं थीं जैसे कोई चोर आ गया हो!" कहकर अंकल जोर से हंसने लगे,यह सुनकर पापा समेत घर के सब लोग ठहाका मारकर हँस पड़े।
मुझे समझ आ गया था कि मम्मी अंकल का घर आना सुनिश्चित करने के लिए डर का बहाना कर रही थी और अंकल ने वो चूहे वाली बात सुना कर पापा को यकीन दिला दिया था के सच में मम्मी अकेली घर रहने पर डरती है,इसीलिए पापा को कह रही थी के अंकल को रोजाना आने के लिए बोल दें।
"सच तो यह था कि यह सब कोई नई शुरुआत नहीं थी, बल्कि यह खेल तो काफी समय से पर्दे के पीछे चल रहा था। मम्मी ने यह बात पापा के सामने बड़ी ही चतुराई से कही थी ताकि कल को अगर कोई पापा के कान भरे भी, तो उन्हें ज़रा भी शक न हो। आखिर अंकल मम्मी को हमेशा 'बहन जी' कहकर ही बुलाते थे, और इसी वजह से पापा भी कभी गहराई से नहीं सोचते थे। उनके लिए तो यह सिर्फ एक भाई का अपनी बहन की सुरक्षा की फिक्र करना था।
पर मैं पास ही बैठा यह सब देख रहा था और मुझे मम्मी की इस सोची समझी चाल का पूरा अंदाज़ा था। मम्मी ने इस 'डर' के बहाने को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया था ताकि अंकल के घर आने का सिलसिला और भी गहरा हो सके। यह कोई अचानक हुआ फैसला नहीं था, बल्कि यह तो उस खेल का हिस्सा था जो काफी समय से धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था। पापा को लग रहा था कि घर में सुरक्षा बढ़ रही है, पर मुझे पता था कि असल में घर के भीतर वह वर्जित खेल पहले से ही अपनी जड़ें जमा चुका था। अंकल का 'बहन जी' कहना और पापा का उन पर आँख मूँदकर भरोसा करना ही तो इस खेल को अब तक सुरक्षित बनाए हुए था। जिसे पापा सुरक्षा समझ रहे थे, वह दरअसल उस गुनाह को और भी ज्यादा गति देने की तैयारी थी जो काफी समय से परदे के पीछे पक रहा था।"
पापा दो महीने घर में रहने के बाद अब वापस विदेश जाने वाले थे। मेरी दोनों बहनें भी हॉस्टल जाने वाली थीं। उन्हें तो पहले ही जाना था, पर वो चार पांच दिन और रुक गई थीं क्योंकि सबने सोचा था कि जब पापा को एयरपोर्ट छोड़ने जाएंगे, तो वहीं से सीधा हॉस्टल चली जाएंगी।
मेरा छोटा भाई भी कुछ दिनों के लिए मामा के घर से आया हुआ था(बता चुका हूं शुरू में के छोटा भाई मामा के पास ही रहता था)। तो सबने मिलकर यह तय किया कि जब पापा को एयरपोर्ट छोड़ने का वक्त आएगा, तब घर के बाकी सभी लोग एक साथ निकल जाएंगे। प्लान के मुताबिक, पापा को छोड़ने के बाद मैं,मेरी मम्मी और छोटा भाई मामा के घर चले जाएंगे। वहाँ एक दो दिन रुकने के बाद, छोटे को वहीं छोड़कर मैं और मम्मी वापस घर आ जाएंगे।
इस तरह जब पापा , भाई और बहनें सब के चले जाने के बाद घर में मैं और मम्मी दोनों ही रह गए।अंकल रोजाना घर आ जाते,उन दोनों का पो पुराना chudai वाला
सिलसिला फिर से उसी रफ्तार से चल पड़ा।" अब धीरे धीरे
घर की स्थिति वैसी ही बन रही थी जैसा मैंने चाहा था।
अब अंकल के बताए गए प्लान पर अमल करने का समय आ चुका था।
और फिर वो दिन भी आ ही गया"रात का सन्नाटा गहरा चुका था। मम्मी को लगा के मैं आज भी मै(रवि) नींद की दवाई के नशे में गहरी नींद न में सोया हुआ हूँक्योंकि उनको लगा कि इस अंधेरे और खामोशी का फायदा उठाने का यह सबसे सही वक्त है।
मैं असल में सोया नहीं था, बस अपनी आँखें मूँदकर सोने का नाटक कर रहा था। तभी मैंने देखा कि मम्मी दबे पाँव अंकल के कमरे की तरफ बढ़ रही हैं। मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। थोड़ी देर बाद मैं धीरे से उठा और दबे पाँव उस कमरे के दरवाज़े तक जा पहुँचा। दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था, और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी साँसें थम सी गईं।
मम्मी अंकल के साथ बेहद उत्तेजक और बेबाक अंदाज़ में थीं। वह पूरी तरह से उस वर्जित खेल में डूबी हुई थीं, उनकी हर हरकत में एक अजीब सी बेताबी और प्यास थी। वह अंकल के साथ कुछ ऐसा कर रही थीं जो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। मैं दरवाज़े की दरार से यह सब देख रहा था और मेरा शरीर रोमांच से काँप रहा था। पर तभी, अचानक मम्मी की नज़र दरवाज़े की तरफ गई। उनकी आँखें मेरी आँखों से टकरा गईं। वह पल ऐसा था जैसे वक्त वहीं रुक गया हो मम्मी के चेहरे पर घबराहट थी पर मेरे मन में कोई डर नहीं था क्योंकि ये सब उसी प्लान का हिस्सा था जो अंकल और मैने मिल कर बनाया था,पर मम्मी को इस प्लान वाली साजिश के बारे में भौरा भी अंदाजा नहीं था।"
"मम्मी की आँखों में जो खौफ़ मैंने देखा, वह सिर्फ पकड़े जाने का नहीं था, बल्कि उस शर्मिंदगी का था जो उनके पूरे वजूद को झकझोर रही थी। हमारी आँखें टकराते ही उनके हाथ काँपने लगे और वह अंकल के साथ जो उत्तेजक हरकतें कर रही थीं, वे अचानक एक ठिठक सी गईं। उनके चेहरे का रंग उड़ चुका था। उन्हें लगा कि आज उनका सारा सच, उनकी सारी मर्यादा एक पल में तार तार हो जाएगी।
मम्मी के मन में डर का एक बवंडर उठ रहा था उन्हें लग रहा था कि अब पर्दाफाश हो चुका है। वह बार बार अपनी बिखरी हुई साड़ी और अस्त व्यस्त हालत को संभालने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनकी घबराहट उन्हें स्थिर नहीं होने दे रही थी। उनके दिमाग में बस एक ही ख्याल चल रहा था कि अगर मैंने ज़रा सी भी आवाज़ की या पापा को बता दिया, तो उनका क्या होगा? वह डर उन्हें अंदर से सुखा रहा था। वह इतनी डरी हुई थीं कि उनकी साँसें तेज़ चलने लगीं और वह बार बार दरवाज़े की तरफ और फिर मेरी तरफ देख रही थीं, जैसे किसी चमत्कार का इंतज़ार कर रही हों कि शायद मैं उन्हें अनदेखा कर दूँ।
मम्मी के उस डर और बेबसी को देखकर मुझे अहसास हुआ कि वह इस वक्त कितनी कमज़ोर पड़ चुकी हैं। वह खुद को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस डर की वजह से वह काँप रही हैं, वह डर ही अब इस खेल का सबसे बड़ा हथियार बनने वाला था। वह पर्दाफाश होने के डर से इतनी सहमी हुई थीं कि अब वह पूरी तरह से मेरे नियंत्रण में आने की कगार पर थीं।"
"मम्मी की आँखों में जो खौफ़ और घबराहट का समंदर उमड़ रहा था, मैं उसे बखूबी महसूस कर सकता था। वह थर थर काँप रही थीं, जैसे किसी ने उनके सीने से उनकी पूरी दुनिया ही छीन ली हो। उन्हें लग रहा था कि अब मैं चिल्लाऊँगा, हंगामा करूँगा या फिर इस शर्मनाक सच को पूरे घर में फैला दूँगा। वह अपनी बिखरी हुई हालत और अपनी उन उत्तेजक हरकतों के बीच बुरी तरह फंस चुकी थीं। वह डर के मारे जम सी गई थीं।
लेकिन मेरा मकसद उन्हें डराना या उनके इस डर का फायदा उठाकर उन्हें नीचा दिखाना नहीं था। मेरा इरादा इससे कहीं ज़्यादा गहरा और सोची समझी चाल का हिस्सा था। मैंने उनकी आँखों में देखा उस डर को, उस बेबसी को और बिना एक शब्द बोले, बिना कोई भाव दिखाए, मैं चुपचाप पीछे हट गया। मैंने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और बिना पीछे मुड़े अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
मैं अपने कमरे में वापस आया और बिना किसी शोर शराबे के चुपचाप अपने बिस्तर पर लेटकर सो गया। लेकिन उस सन्नाटे में, उस चुप्पी के पीछे एक गहरा खेल चल रहा था। मैंने उन्हें उनके ही डर के साथ उस कमरे में अकेला छोड़ दिया था। मम्मी के लिए वह सन्नाटा किसी चीख से भी ज़्यादा भयानक था। उन्हें लग रहा था कि मेरी यह चुप्पी किसी बड़े तूफान के आने से पहले की शांति है। वह उस कमरे में अंकल के साथ तो थीं, लेकिन उनका पूरा ध्यान अब उस डर पर था जो मैंने उन्हें दिया था एक ऐसा डर जो उन्हें अब और भी ज़्यादा बेचैन और मेरे ख्यालों में उलझाए रखने वाला था।"
अब सवाल यह है कि क्या मम्मी इस स्थिति का सामना कर पाएंगी,क्या रवि के बिछाये इस जाल से निकलने का कोई रास्ता निकाल पाएगी , क्या रवि कोई नया पैंतरा खेलेगा? आपके इन सब सवालों का जवाब अतिशीघ्र अगले अपडेट में मिलने वाला है।


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