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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#32
**अपडेट 30**

अंकल मेरी मम्मी के ऊपर चढ़े।
एक हाथ से मेरी मम्मी की चुची को मेरी मम्मी की चोली के अंदर हाथ डालकर दबाने लगे।
उनके होठ मेरी मम्मी के गुलाबी गालों पर थे।
वे कई बार काट भी रहे थे।

मस्ती के कारण मेरी मम्मी को तो आँखें ही नहीं खुल रही थीं।
अंकल मेरी मम्मी के गालों को चूमते एक हाथ से मेरी मम्मी की चुची दबा रहे थे।

तभी मैंने नोटिस किया कि वे अपने दूसरे हाथ को नीचे की ओर बढ़ा रहे थे।
अंकल का दूसरा हाथ मेरी मम्मी की नाभि से होता हुआ अब मेरी मम्मी के लहंगे की डोरी के ऊपर तक था।
अंकल अपने हाथ को मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे।

लेकिन मेरी मम्मी ने अपने लहंगे की डोरी इतनी कसकर बाँधी थी कि अंकल का हाथ मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर नहीं जा रहा था।

अंकल की हालत देखकर और मम्मी खुद भी गरम थीं तो मम्मी ने अपनी साँस जोर से छोड़ी।
जिससे मेरी मम्मी के लहंगे की डोरी ढीली हो गई।
और अंकल का पूरा हाथ अब मेरे मम्मी के लहंगे के अंदर चला गया।

अब अंकल का पूरा हाथ मेरी मम्मी के लहंगे के अंदर वहाँ पर था जहाँ मेरी मम्मी की पैंटी थी।
मेरी मम्मी के उस खजाने पर जिससे मैंने 19 साल पहले जन्म लिया था।
लेकिन पिछले 6 महीनों से उस खजाने पर अंकल का कब्जा था।
या तू कहूँ मैंने ही अंकल को वो खजाना दिलाया था।

मैंने मम्मी को चुदवाने में अंकल की मदद की थी।
और कई बार कंप्यूटर के बहाने से मम्मी को चुदवाया था पिछले 6 महीनों में।
लेकिन आज सुहागरात है।
और सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है।

उन्होंने अपना हाथ मेरी मम्मी की चुत पर रख दिया।
जिससे वे पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगे।
शर्म के मारे मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें बंद कर लीं।

अंकल एक हाथ मेरी मम्मी की चोली में मेरी मम्मी की चुची पर और दूसरा हाथ मेरी मम्मी के लहंगे में मेरी मम्मी की चुत पर था।
तो उन्होंने मेरी मम्मी के कान में कहा –
“वर्षा लगता है मुझे अपने हाथ निकालने के लिए तुम्हारी चोली और लहंगा खोलना पड़ेगा।
अगर तुम इजाजत दो तो क्या तुम्हारी चोली और लहंगा खोल सकता हूँ?”

मेरी मम्मी के मुँह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था।
जिससे अंकल जी ने मेरी मम्मी की सहमति समझकर मेरी मम्मी की चोली का पहला हुक खोल दिया।
और फिर दूसरा हुक।

जैसे-जैसे मेरी मम्मी की चोली के हुक खुल रहे थे वैसे-वैसे मेरी मम्मी की चोली की कसावट ढीली होती जा रही थी।
अंकल जी मेरी मम्मी की चोली के हुक खोलने में व्यस्त थे।

इससे पहले कि वे मेरी मम्मी की चोली का आखिरी हुक खोलते मेरी मम्मी ने उनका हाथ पकड़कर धीरे कहा –
“योगेश जी बस...”

पर उस समय अंकल जी कहाँ मानने वाले थे।
उन्होंने कहा –
“...बस वर्षा.. थोड़ा सा.. प्लीज... आज हमारी सुहागरात है और इसलिए आज ऐसे करेंगे जैसे पहली बार कर रहे हैं।
क्योंकि सुहागरात में सब कुछ पहली बार होता है.. प्लीज...”

और उन्होंने मेरी मम्मी की चोली का आखिरी हुक भी खोल दिया।

अब अंकल और मेरी मम्मी की नंगी पीठ के बीच में अगर कुछ बचा था तो वो था मेरी मम्मी की ब्रा का आखिरी हुक।
मैं और मम्मी जानते थे कि अब अंकल मम्मी की ब्रा का हुक खोलने में ज्यादा देर नहीं लगाएँगे।

मम्मी शर्म से अंकल से लिपट गई थीं।
तो अंकल मम्मी से थोड़ा अलग हुए।
और मम्मी की चोली को धीरे से मम्मी के कंधे पर से थामा और नीचे की ओर सरकाने लगे।
फिर अपने होठों को मेरी मम्मी के नंगे कंधों पर रखकर चूमने लगे।

मम्मी मस्ती में ही अंकल की बाहों में आआहhhhhhhh आहhhhhhhhhhh करने लगीं।
तो अंकल ने धीरे से मेरी मम्मी की चोली मेरी मम्मी की बाहों से निकाल दी।
और उसको एक तरफ जमीन की ओर उछाल दिया।

मेरी मम्मी की टाइट कड़कदार चुचियाँ जो रेड ब्रा में कैद थीं पूरी तरह से अंकल की आँखों के सामने थीं।
और ब्रा से निकलने को मचल रही थीं।

मेरी मम्मी की चुचियों को देखकर अंकल तो एकदम पागल से हो गए।
तो मेरी मम्मी ने शर्म से अपनी चुचियों को अपने हाथों से ढकते कहा –
“योगेश जी लाइट तो बंद कर दीजिए। मुझे शर्म आ रही है।”

अंकल : “तू तो ऐसे शर्मा रही है जैसे पिछले 6 महीनों से तू मुझसे नहीं बल्कि किसी और से चुदी है।”

मम्मी : “आप ही ने तो कहा है सुहागरात में सब पहली बार होता है इसलिए मैं सब कुछ पहली बार ही कर रही हूँ।”

अंकल : “तो तू आज कुँवारी लड़की बनकर चुदना चाहती है?”

मम्मी ने कुछ नहीं कहा लेकिन अपनी गर्दन हाँ में हिला दी।

“प्लीज मुझे शर्म आ रही है अपनी सुहागरात में। प्लीज लाइट बंद कर दो।”

अंकल : “तो तुझे मेरे साथ जवानी का खेल नहीं खेलना?”

मम्मी : “मुझे आपके साथ जवानी का खेल खेलना है जैसे सुहागरात में होता है वैसे ही आज मैं आपसे पहला मिलन करूँगी कुँवारी लड़की की तरह।
और कुँवारी लड़की को शर्म आती है पहली बार और पहली बार में शर्म तो आनी ही चाहिए इसलिए लाइट बंद कर दो।”

लेकिन अंकल ने भी कहा –
“जब तू एक कुँवारी लड़की की तरह आज जवानी का खेल खेलेगी तो लाइट चालू रहने दे।
पिछले 6 महीनों से तुझे चोद रहा हूँ फिर भी आज तो तुझे एक कुँवारी लड़की की तरह चोदूँगा इसलिए लाइट चालू रहेगी।”

और अंकल ने कहा –
“आज मैं सुहागरात में तेरी जवानी का पूरा मजा लूँगा।”

लेकिन मम्मी जिद करती रहीं।
और अंकल भी कहाँ सुनने वाले थे।
आज वे मेरी मम्मी की जवानी का पूरा मजा लेना चाहते थे।
हालाँकि वे पिछले 6 महीनों से ले रहे पर आज कुछ नया।

और अंकल ने मेरी मम्मी के हाथों को मेरी मम्मी की चुचियों से हटाया।

और बोले –
“आआहhh वर्षा... तुम्हें भगवान ने सिर्फ मेरे लिए बनाया है.. तुम मेरी हो मेरी जान हो मेरी महबूबा हो मेरी डार्लिंग हो मेरी लैला हो।
इतना खूबसूरत बदन ये मस्त जवानी शायद मेरे किस्मत में लिखा था।
और आज तुम्हें अपनी बाहों में पाकर मुझे अपने किस्मत पर नाज होने लगा है कि इतना खूबसूरत और सुगंधित फूल मेरे पहलू में पड़ा है।
और शायद भगवान को भी तुम्हें मुझे देने में दुख नहीं हुआ होगा।”

इतना कहते ही अंकल जी ने आज सुहागरात में पहली बार मेरी मम्मी की चुची को ब्रा के ऊपर से दबाया।

मेरी मम्मी के बदन पर अब ब्रा और घाघरा था।
और मेरी मम्मी शर्म से आँखें बंद करके बेड पर लेटी हुई थीं।

मम्मी ने हिम्मत करके लड़खड़ाती आवाज में कहा –
“योगेश जी आपने कहा था कि मैं तुम्हारी इच्छा के बिना कुछ नहीं करूँगा और पूरा कंट्रोल करूँगा।”

तो अंकल बोले –
“हाँ वर्षा मुझे यकीन है हम अपने आप पर कंट्रोल करेंगे। बस तू थोड़ा सा ही।
मैं समझता हूँ मेरे साथ तुम भी अपने आप पर कंट्रोल कर लोगे।
इस थोड़े से प्यार से कुछ नहीं होगा।
और मैंने लगा था तुम्हारे बेटे के सामने ताकि उसे लगे तू चुदने नहीं बल्कि सती-सावित्री बन सको।”

मम्मी फिर और कुछ बोल न सकीं।
अंकल मम्मी के ऊपर चढ़ आए।
और मेरी मम्मी की दोनों चुचियों को ब्रा के ऊपर से पकड़ मम्मी को चूम रहे थे।

अंकल का लंड अब ठीक मेरी मम्मी के घाघरे के ऊपर से मेरी मम्मी की चुत को टच कर रहा था।
और मम्मी अंकल के मोटे लंबे लंड को अच्छे से अपनी चुत पर महसूस कर रही थीं।

मम्मी से भी कंट्रोल करना मुश्किल था।
अंकल ने मेरी मम्मी की चुची मसलते धीरे-धीरे मेरी मम्मी की चुत पर धक्के मार रहे थे।
अंकल जी के नीचे लेटी मेरी मम्मी अलग ही दुनिया में थीं।

अंकल ने मम्मी को गुमसुम देखा तो बोले –

अंकल : “वर्षा क्या हुआ? कहाँ खो गईं?”

मम्मी : “कुछ नहीं।”

अंकल : “कुछ तो है। क्या तुझे अच्छा नहीं लग रहा है?”

मम्मी : “अच्छा लग रहा है।”

अंकल : “तो सच बता क्या सोच रही है?”

मम्मी : “सोच रही हूँ मैं 33 साल की हो गई और शादी को 20 साल हो गए हैं।
पर जो सुख आपने मुझे दिया वो मैं कभी नहीं भूल सकती।
उस नामर्द ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी 20 साल।

पहले भले ही मुझे मेरे पहले पति उस नामर्द ने पूरी तरह नंगी किया था मेरे बदन को सहलाया रौंदा था।
पर आज जो मजा मुझे आपके हाथों से नंगी होने और आपसे अपना बदन सहलाने में मिल रहा वैसा मजा मुझे पहले कभी नहीं मिला था।”

अंकल : “क्या पिछले 6 महीनों से भी नहीं?”

मम्मी : “हाँ पिछले 6 महीनों से तो मिल रहा है आपसे।
लेकिन उस नामर्द ने तो नहीं दिया।
और वैसे भी आज मेरी दूसरी सुहागरात है।
20 साल पहले उस नामर्द के साथ और 20 साल बाद आज आपके साथ।”

अंकल : “क्या आज के दिन तेरी सुहागरात थी?”

मम्मी : “नहीं लेकिन लेकिन 20 साल होने वाले हैं।”

अंकल : “अब भूल जा। अब मजे ले।”

और फिर से अंकल ने मम्मी को मसलने लगे।
फिर से मम्मी गरम हो गईं।

अब मम्मी अपनी साँसें कंट्रोल करने की बहुत कोशिश कर रही थीं।
मेरी मम्मी के नाजुक बदन के ऊपर अंकल जो कि शरीर में बहुत ही हट्टे-कट्टे थे लेटे हुए थे।

कभी मेरी मम्मी के होठों को किस और कभी मेरी मम्मी की चुचियों को ब्रा के ऊपर से चूम रहे थे।
मस्ती में मेरी मम्मी की चुची को ब्रा के ऊपर से चूमते बोले –

“वर्षा मेरी जान मुझे 6 महीने पहले यकीन नहीं था तुम मेरी हो जाओगी।
और जब तुमने 6 महीने पहले मेरा प्रपोजल ठुकरा दिया था और गुस्सा हो गई थीं तो मैं तुम्हारे गुस्से को देख डर गया था।
मैंने सोच लिया था मैं तुम्हें कभी नहीं पा सकूँगा।
लेकिन तुम्हारे बेटे ने मुझे तुम्हें दिला दिया।
यदि तुम्हारा बेटा मेरा साथ नहीं देता तो आज तुम मेरी नहीं हो पातीं।
मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि तुम मेरी हो गईं मेरी बुलबुल।
मुझे अपनी किस्मत पर आज बड़ा नाज है।”

और मेरी मम्मी की ब्रा के ऊपर से अपने मुँह से मेरे मम्मी के निप्पल को पकड़कर धीरे से काट लिया।

जैसे ही अंकल ने मम्मी के निप्पल को काटा मेरी मम्मी के मुँह से बस यही निकला –
“आआहhhhhh योगेशhhhh जीईईईईई धीरे दर्द होता है।”

कुछ देर ऐसे ही ब्रा के ऊपर से मेरी मम्मी की चुची चूसने के बाद अंकल ने मेरी मम्मी को उल्टा लिटाया।
अब मेरी मम्मी पीठ बल लेटी थीं।
मेरी मम्मी की नंगी पीठ अंकल जी के सामने थी।

इससे पहले मम्मी कुछ समझ पातीं अंकल फिर से मेरी मम्मी के ऊपर चढ़ गए।
और मेरी मम्मी की नंगी पीठ को चाटने लगे।

अंकल का लंड अब मेरी मम्मी की उभरी हुई गाँड को टच कर रहा था।
अंकल शरीर में इतने बड़े हैं कि मेरी मम्मी बिल्कुल उनके नीचे छुप ही गईं।
और अंकल का बिल्कुल लोहे की रॉड जैसे लंड मेरी मम्मी की गाँड पर ऐसा हमला कर रहा था कि वो किसी भी पल मेरी मम्मी का लहंगा फाड़कर मेरी मम्मी की गाँड पर अपना कब्जा कर लेगा।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 04:32 PM



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