Yesterday, 04:30 PM
**अपडेट 28**
अंकल जैसे ही बेड पर आकर बैठे मम्मी घूँघट में ही बेड से उठीं और अंकल के पैर छूने लगीं। मम्मी को अपने पैर छूते देख अंकल बोले “वर्षा ये क्या कर रही हो?”
मम्मी : “जी अपनी दासी को अपना धर्म निभाने से मत रोकिए। अब आपके चरणों में ही मेरा स्वर्ग है।” मम्मी हमेशा से अपने पति के प्रति समर्पण रही हैं। मम्मी हमेशा पापा के पैर छूती हैं लेकिन पापा मम्मी को लंड का सुख नहीं देते फिर भी और अब तो मम्मी को अंकल का लंड मिलता है इसलिए आज मम्मी ने अंकल के पैर छूने लगीं।
अंकल : “नहीं वर्षा।”
मम्मी : “मैं हमेशा से अपने पति के पैर छूती आई हूँ उस मर्द के जबकि वे मुझे सुख नहीं देते हैं और आप तो मुझे सुख देते हो इसलिए मैं अब आपके भी पैर छूँगी हमेशा।” मम्मी की बात सुन अंकल कुछ नहीं बोले और अंकल ने अपने पैर में पड़ी मम्मी को “खुश रहो” का आशीर्वाद दिया और मम्मी को कंधे से पकड़कर उठाकर अपने पास बिठा लिया।
मम्मी अभी भी घूँघट में सिमटी बैठी थीं। अब अंकल ने मम्मी का घूँघट उठाया तो मम्मी ने शर्म से अपनी आँखें झुका लीं और अपने चेहरे को शर्म से घुमाने लगीं तो अंकल किसी फिल्मी हीरो की तरह मम्मी की ठुड्डी पर हाथ रखकर उसको ऊपर उठाते बोले “वर्षा जब मेरा डिवोर्स हुआ था तो मैंने सोचा भी नहीं था मुझे इतनी सुंदर सेक्सी और मुझसे 14 साल छोटी एक 33 साल की औरत के रूप में तुम मिलोगी।”
अंकल की बात सुनकर मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें झुका लीं।
और धीरे से बोलीं “आप भी ना।”
अंकल : “वर्षा तुम्हारे जैसी औरत को पाकर मैं अपने आप को बड़ा खुशकिस्मत समझता हूँ।” अंकल के मुँह से ये सुनकर मम्मी अपना सर अंकल के कंधे पर रखती बोलीं “खुशकिस्मत तो मैं जो मुझ बदकिस्मत को आप जैसा प्यार करने वाला मर्द मिला। आपको पाकर तो मैं धन्य हो गई। मेरी शादी को 20 साल हो गए लेकिन कभी सुख नहीं मिला। मेरे नामर्द पति ने इन 20 सालों में मुझे 20 बार भी नहीं प्यार किया। जब मेरी शादी हुई तो शुरू में 10 बार ही प्यार किया फिर अंकुश के जन्म के बाद से तो उन्होंने मुझे मुश्किल से 19 बार भी नहीं प्यार किया और कभी किया तो 2 मिनट भी नहीं टिका।
मैं तो यही सोचती थी मेरे जीवन में सुख है ही नहीं लेकिन भगवान ने आपको भेज दिया।”
अंकल : “ये सब तेरे बेटे की हेल्प से हुआ है।”
मम्मी : “हाँ ये सब उसी ने किया।”
अंकल : “वर्षा आज की रात सिर्फ बातें ही करोगी या फिर कुछ प्यार भी करना है? वैसे आज बड़ी कमाल की लग रही हो।” तो धीरे चेहरा उठाकर अंकल को देखकर शर्माती मुस्कुराने लगीं तो अंकल मम्मी की आँखों में आँखें डालकर अपने होठों पर उँगली रखकर मम्मी को चुम्मी देने का इशारा करने लगे तो मम्मी शर्म से ना में सर हिलाने लगीं पर अंकल के बार-बार इशारा करने पर मम्मी शर्माते हुए अपनी बाहें अंकल के गले में डाल अपने होठों को अंकल के होठों की ओर बढ़ा दिया तो अंकल ने भी मम्मी के रस भरे होठों को अपने होठों में भर चूसते बिस्तर पर मम्मी के ऊपर लेटने लगे।
दोनों प्रेमी एक-दूसरे की बाहों में बाहें डाले एक-दूसरे के होठों का स्वाद ले रहे थे।
मम्मी भी दुल्हन के जैसे सजी खुद को नई-नवेली दुल्हन के जैसे ही महसूस कर रही थीं। अंकल मम्मी के ऊपर लेटे मम्मी के गाल चूम रहे थे तो मम्मी शर्म से अपना मुँह अंकल के चेहरे से हटा लिया था पर अंकल तो मम्मी के सेब जैसे गालों को चूम रहे थे। मम्मी अंकल के इस तरह गालों को चूमने पर मम्मी नीचे जोर-जोर से साँस लेने लगीं।
और बेड की चादर को अपने दोनों हाथों को फैलाकर खींचने लगीं। अंकल थोड़े से मम्मी के ऊपर से उठे तो मम्मी झट से अंकल के नीचे से निकलकर
वहीं बेड लंबी-लंबी साँसें लेने लगीं। अंकल मम्मी के पीछे मम्मी की गोरी पीठ चूमने लगे।
अंकल : “क्या हुआ मेरी वर्षा रानी?”
मम्मी : “मुझे शर्म आती है।”
अंकल : “पिछले 6 महीनों से तुम्हारी शर्म गई नहीं। आज पूरी तरह उतार दूँगा तुम्हारी शर्म।” और अंकल ने मम्मी को पकड़कर फिर से बेड पर सीधा लिटा दिया और खुद मम्मी के ऊपर आकर पागलों की तरह मम्मी के होठों-गालों को चूमने लगे। मम्मी को अंकल के साथ आज ये सब करते बड़ी शर्म आ रही थी।
अंकल मम्मी के होठों को अपने होठों में दबाए चूसते-चूसते
मम्मी को अपनी बाहों में लिए घुटनों के बल खड़े होने लगे जिससे मम्मी भी किसी बेल की तरह अंकल से लिपटी उनके साथ खड़ी होने लगीं। उन दोनों के होठ एक-दूसरे के होठों से चिपके हुए थे। अगर अंकल के होठ काले और मम्मी के होठ गुलाबी न होते उन दोनों के होठों के बीच ये बताना मुश्किल था कि किसका होठ कौन सा था। दोनों अपने मुँह को खोले एक-दूसरे के मुँह का रस चूस रहे थे। अंकल के हाथ मम्मी के होठों को चूसते-चूसते
हाथ मम्मी के बदन को सहला रहे थे। मम्मी भी अंकल का भरपूर साथ देते अपने कोमल हाथ से अंकल के चेहरे को सहलाकर बता रही थीं कि चूस लो अपनी जान के होठों का
रस। बहुत प्यासी हूँ। अंकल ने मम्मी को फिर से बेड पर लिटाया और खुद मम्मी के ऊपर लेटकर मम्मी के कान-गर्दन चूमने लगे।
वैसे तो अंकल अपना माल मम्मी के अंदर छोड़ें कोई उन्हें रोक नहीं सकता था और
फिर भी वे मम्मी के ऊपर लेटे मम्मी की रजामंदी जानने के लिए बोले “वर्षा आज की रात जितनी आग लगी हुई लगती है आज की रात 5-6 कंडोम से काम नहीं चलेगा बल्कि आज की रात कल से डबल कंडोम का इस्तेमाल करना पड़ेगा।” कंडोम के इस्तेमाल की बात सुनकर मम्मी अपने ऊपर लेटे अंकल का चेहरा अपने हाथों में पकड़कर अपनी नशीली आँखें
अंकल की आँखों में डालकर बोलीं “आज की रात ही क्यों? मैं तो कहती हूँ अब आपको कंडोम का इस्तेमाल करने की जरूरत ही क्या है। अब अपनी दासी के रोम-रोम में अपना प्यार भर दीजिए। अब मैं आई पिल लिया करूँगी।”
बोलिए जानू भरने ना अपनी अपनी दासी के रोम-रोम में अपना प्यार। और खुद अंकल को अपने ऊपर झुकाकर उनके होठों को चूमकर शर्म से बेड पर अपना मुँह घुमा लिया।
अंकल : “शर्मा क्यों रही हो जान?”
मम्मी : “प्लीज मुझे शर्म आती है।”
अंकल : “तो फिर ऐसे काम नहीं चलेगा।” और अंकल उठ गए तो मम्मी अंकल को ऐसे उठते देख संकोच से देखने लगीं।
वे चलते-चलते अपनी अलमारी के पास रुक गए और उन्होंने अपनी अलमारी खोली और उसमें कुछ बॉक्स निकाले। मम्मी तो बस उनको ही देख रही थीं। वे बॉक्स लेकर मम्मी के पास आए और मम्मी के सामने बेड पर उन्होंने उन बॉक्स को खोल दिया। उनमें बहुत ही कीमती नौलखा हार था और साथ कुछ पुराने डिजाइन की बहुत कीमती हीरों के हार थे। मम्मी तो बस चुपचाप उनको ही देख रही थीं कि तभी अंकल जी उनमें से एक बहुत ही कीमती हीरों के हार को निकाला और मेरी मम्मी की ओर बढ़ाकर बोले “वर्षा ये हमारा खानदानी हार है। मेरी माँ ने इसे अपनी बहू को दिया था लेकिन मेरी वाइफ से डिवोर्स के बाद से ये हार अलमारी में रखा है लेकिन ये तुम्हारी अमानत है।” और मम्मी को देकर बोले “कैसा लगा वर्षा ये तोहफा?” तो मम्मी धीरे से कहाँ “जी बहुत ही सुंदर और बहुत ही कीमती।”
फिर अंकल ने मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाले वहाँ ले गए थे जहाँ पहले से एक केक मँगवा रखा था। अंकल जी मम्मी के पीछे आकर खड़े हो गए और पीछे से अपने हाथों को निकालकर मम्मी के हाथों को पकड़ लिया और मम्मी से बोले “डार्लिंग आओ मिलकर अपनी सुहागरात को सेलिब्रेट करें।” फिर अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़ा और केक काटा।
अंकल जैसे ही बेड पर आकर बैठे मम्मी घूँघट में ही बेड से उठीं और अंकल के पैर छूने लगीं। मम्मी को अपने पैर छूते देख अंकल बोले “वर्षा ये क्या कर रही हो?”
मम्मी : “जी अपनी दासी को अपना धर्म निभाने से मत रोकिए। अब आपके चरणों में ही मेरा स्वर्ग है।” मम्मी हमेशा से अपने पति के प्रति समर्पण रही हैं। मम्मी हमेशा पापा के पैर छूती हैं लेकिन पापा मम्मी को लंड का सुख नहीं देते फिर भी और अब तो मम्मी को अंकल का लंड मिलता है इसलिए आज मम्मी ने अंकल के पैर छूने लगीं।
अंकल : “नहीं वर्षा।”
मम्मी : “मैं हमेशा से अपने पति के पैर छूती आई हूँ उस मर्द के जबकि वे मुझे सुख नहीं देते हैं और आप तो मुझे सुख देते हो इसलिए मैं अब आपके भी पैर छूँगी हमेशा।” मम्मी की बात सुन अंकल कुछ नहीं बोले और अंकल ने अपने पैर में पड़ी मम्मी को “खुश रहो” का आशीर्वाद दिया और मम्मी को कंधे से पकड़कर उठाकर अपने पास बिठा लिया।
मम्मी अभी भी घूँघट में सिमटी बैठी थीं। अब अंकल ने मम्मी का घूँघट उठाया तो मम्मी ने शर्म से अपनी आँखें झुका लीं और अपने चेहरे को शर्म से घुमाने लगीं तो अंकल किसी फिल्मी हीरो की तरह मम्मी की ठुड्डी पर हाथ रखकर उसको ऊपर उठाते बोले “वर्षा जब मेरा डिवोर्स हुआ था तो मैंने सोचा भी नहीं था मुझे इतनी सुंदर सेक्सी और मुझसे 14 साल छोटी एक 33 साल की औरत के रूप में तुम मिलोगी।”
अंकल की बात सुनकर मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें झुका लीं।
और धीरे से बोलीं “आप भी ना।”
अंकल : “वर्षा तुम्हारे जैसी औरत को पाकर मैं अपने आप को बड़ा खुशकिस्मत समझता हूँ।” अंकल के मुँह से ये सुनकर मम्मी अपना सर अंकल के कंधे पर रखती बोलीं “खुशकिस्मत तो मैं जो मुझ बदकिस्मत को आप जैसा प्यार करने वाला मर्द मिला। आपको पाकर तो मैं धन्य हो गई। मेरी शादी को 20 साल हो गए लेकिन कभी सुख नहीं मिला। मेरे नामर्द पति ने इन 20 सालों में मुझे 20 बार भी नहीं प्यार किया। जब मेरी शादी हुई तो शुरू में 10 बार ही प्यार किया फिर अंकुश के जन्म के बाद से तो उन्होंने मुझे मुश्किल से 19 बार भी नहीं प्यार किया और कभी किया तो 2 मिनट भी नहीं टिका।
मैं तो यही सोचती थी मेरे जीवन में सुख है ही नहीं लेकिन भगवान ने आपको भेज दिया।”
अंकल : “ये सब तेरे बेटे की हेल्प से हुआ है।”
मम्मी : “हाँ ये सब उसी ने किया।”
अंकल : “वर्षा आज की रात सिर्फ बातें ही करोगी या फिर कुछ प्यार भी करना है? वैसे आज बड़ी कमाल की लग रही हो।” तो धीरे चेहरा उठाकर अंकल को देखकर शर्माती मुस्कुराने लगीं तो अंकल मम्मी की आँखों में आँखें डालकर अपने होठों पर उँगली रखकर मम्मी को चुम्मी देने का इशारा करने लगे तो मम्मी शर्म से ना में सर हिलाने लगीं पर अंकल के बार-बार इशारा करने पर मम्मी शर्माते हुए अपनी बाहें अंकल के गले में डाल अपने होठों को अंकल के होठों की ओर बढ़ा दिया तो अंकल ने भी मम्मी के रस भरे होठों को अपने होठों में भर चूसते बिस्तर पर मम्मी के ऊपर लेटने लगे।
दोनों प्रेमी एक-दूसरे की बाहों में बाहें डाले एक-दूसरे के होठों का स्वाद ले रहे थे।
मम्मी भी दुल्हन के जैसे सजी खुद को नई-नवेली दुल्हन के जैसे ही महसूस कर रही थीं। अंकल मम्मी के ऊपर लेटे मम्मी के गाल चूम रहे थे तो मम्मी शर्म से अपना मुँह अंकल के चेहरे से हटा लिया था पर अंकल तो मम्मी के सेब जैसे गालों को चूम रहे थे। मम्मी अंकल के इस तरह गालों को चूमने पर मम्मी नीचे जोर-जोर से साँस लेने लगीं।
और बेड की चादर को अपने दोनों हाथों को फैलाकर खींचने लगीं। अंकल थोड़े से मम्मी के ऊपर से उठे तो मम्मी झट से अंकल के नीचे से निकलकर
वहीं बेड लंबी-लंबी साँसें लेने लगीं। अंकल मम्मी के पीछे मम्मी की गोरी पीठ चूमने लगे।
अंकल : “क्या हुआ मेरी वर्षा रानी?”
मम्मी : “मुझे शर्म आती है।”
अंकल : “पिछले 6 महीनों से तुम्हारी शर्म गई नहीं। आज पूरी तरह उतार दूँगा तुम्हारी शर्म।” और अंकल ने मम्मी को पकड़कर फिर से बेड पर सीधा लिटा दिया और खुद मम्मी के ऊपर आकर पागलों की तरह मम्मी के होठों-गालों को चूमने लगे। मम्मी को अंकल के साथ आज ये सब करते बड़ी शर्म आ रही थी।
अंकल मम्मी के होठों को अपने होठों में दबाए चूसते-चूसते
मम्मी को अपनी बाहों में लिए घुटनों के बल खड़े होने लगे जिससे मम्मी भी किसी बेल की तरह अंकल से लिपटी उनके साथ खड़ी होने लगीं। उन दोनों के होठ एक-दूसरे के होठों से चिपके हुए थे। अगर अंकल के होठ काले और मम्मी के होठ गुलाबी न होते उन दोनों के होठों के बीच ये बताना मुश्किल था कि किसका होठ कौन सा था। दोनों अपने मुँह को खोले एक-दूसरे के मुँह का रस चूस रहे थे। अंकल के हाथ मम्मी के होठों को चूसते-चूसते
हाथ मम्मी के बदन को सहला रहे थे। मम्मी भी अंकल का भरपूर साथ देते अपने कोमल हाथ से अंकल के चेहरे को सहलाकर बता रही थीं कि चूस लो अपनी जान के होठों का
रस। बहुत प्यासी हूँ। अंकल ने मम्मी को फिर से बेड पर लिटाया और खुद मम्मी के ऊपर लेटकर मम्मी के कान-गर्दन चूमने लगे।
वैसे तो अंकल अपना माल मम्मी के अंदर छोड़ें कोई उन्हें रोक नहीं सकता था और
फिर भी वे मम्मी के ऊपर लेटे मम्मी की रजामंदी जानने के लिए बोले “वर्षा आज की रात जितनी आग लगी हुई लगती है आज की रात 5-6 कंडोम से काम नहीं चलेगा बल्कि आज की रात कल से डबल कंडोम का इस्तेमाल करना पड़ेगा।” कंडोम के इस्तेमाल की बात सुनकर मम्मी अपने ऊपर लेटे अंकल का चेहरा अपने हाथों में पकड़कर अपनी नशीली आँखें
अंकल की आँखों में डालकर बोलीं “आज की रात ही क्यों? मैं तो कहती हूँ अब आपको कंडोम का इस्तेमाल करने की जरूरत ही क्या है। अब अपनी दासी के रोम-रोम में अपना प्यार भर दीजिए। अब मैं आई पिल लिया करूँगी।”
बोलिए जानू भरने ना अपनी अपनी दासी के रोम-रोम में अपना प्यार। और खुद अंकल को अपने ऊपर झुकाकर उनके होठों को चूमकर शर्म से बेड पर अपना मुँह घुमा लिया।
अंकल : “शर्मा क्यों रही हो जान?”
मम्मी : “प्लीज मुझे शर्म आती है।”
अंकल : “तो फिर ऐसे काम नहीं चलेगा।” और अंकल उठ गए तो मम्मी अंकल को ऐसे उठते देख संकोच से देखने लगीं।
वे चलते-चलते अपनी अलमारी के पास रुक गए और उन्होंने अपनी अलमारी खोली और उसमें कुछ बॉक्स निकाले। मम्मी तो बस उनको ही देख रही थीं। वे बॉक्स लेकर मम्मी के पास आए और मम्मी के सामने बेड पर उन्होंने उन बॉक्स को खोल दिया। उनमें बहुत ही कीमती नौलखा हार था और साथ कुछ पुराने डिजाइन की बहुत कीमती हीरों के हार थे। मम्मी तो बस चुपचाप उनको ही देख रही थीं कि तभी अंकल जी उनमें से एक बहुत ही कीमती हीरों के हार को निकाला और मेरी मम्मी की ओर बढ़ाकर बोले “वर्षा ये हमारा खानदानी हार है। मेरी माँ ने इसे अपनी बहू को दिया था लेकिन मेरी वाइफ से डिवोर्स के बाद से ये हार अलमारी में रखा है लेकिन ये तुम्हारी अमानत है।” और मम्मी को देकर बोले “कैसा लगा वर्षा ये तोहफा?” तो मम्मी धीरे से कहाँ “जी बहुत ही सुंदर और बहुत ही कीमती।”
फिर अंकल ने मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाले वहाँ ले गए थे जहाँ पहले से एक केक मँगवा रखा था। अंकल जी मम्मी के पीछे आकर खड़े हो गए और पीछे से अपने हाथों को निकालकर मम्मी के हाथों को पकड़ लिया और मम्मी से बोले “डार्लिंग आओ मिलकर अपनी सुहागरात को सेलिब्रेट करें।” फिर अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़ा और केक काटा।


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