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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#30
**अपडेट 27**

मम्मी : “तो क्या समझूँ बेटा जब तू मुझे दुल्हन की तरह सजाकर एक गैर मर्द के पास भेज रहा है तो मुझे क्या पूरी रात आरती उतारेगा?”

मैं : “नहीं मम्मी।”

मम्मी : “तो तू ही सोच क्या करेगा पूरी रात? मुझे नंगी ही तो करेगा और तू भी तो यही चाहता है। पिछले 6 महीनों से तू कितनी बार कह चुका है अंकल का प्यार एक्सेप्ट कर लो और आज तो तू मुझे दुल्हन बनाकर भेज रहा है तो क्या वो मुझे नंगी नहीं करेगा?”

मैं : “मम्मी मैं आपके साथ रहूँगा। कुछ नहीं होने दूँगा।”

मम्मी : “बेटा जब तू साथ होगा तो मुझे और जलील होना पड़ेगा इसलिए तू यहीं रुक।”

मैं : “मम्मी अंकल कुछ नहीं करेंगे।”

मम्मी : “चुप। मैं जा रही हूँ।”

मैं : “मम्मी प्लीज आप एक बार ये जोड़ा पहन लो। अंकल कुछ नहीं करेंगे।”

मम्मी : “बेटा मैं जानती हूँ तू बहुत जिद्दी है और आज तू मुझे योगेश जी के साथ हमबिस्तर करवा के ही रहेगा और मैं पिछले 6 महीनों से अपने बदन को योगेश जी से बचाती आ रही हूँ लेकिन आज नहीं बचा पाऊँगी क्योंकि तू खुद नहीं चाहता मैं योगेश जी से बच जाऊँ।”

मैं : “मम्मी अंकल कुछ नहीं करेंगे। वो सिर्फ आपकी दुल्हन के रूप में देखेंगे।”

मम्मी : “क्या बेटा? ऐसा हो सकता है जब एक अकेली औरत साथ में पूरी रात रहे और एक मर्द उसे कुछ न करे?”

मैं : “प्लीज मम्मी।”

मम्मी : “मैं इसे योगेश जी घर जाकर पहन लूँगी और उसे मैं यहाँ से पहन कर जाऊँगी तो कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा इसलिए अभी मैं जाती हूँ पीछे वाले गेट से।”

मैं : “मम्मी मैं चलूँ?”

मम्मी : “क्या अपनी मम्मी को नंगी देखने जाएगा कैसे योगेश जी मुझे नंगी करेंगे और पूरी रात मेरे साथ क्या-क्या करेंगे?”

मैं चुप रहा तो मम्मी बोलीं –

मम्मी : “अब चुप क्यों हो गया?”

मैं : “सॉरी मम्मी।”

मम्मी : “अब सॉरी बोलने से कुछ नहीं होगा। अब मैं जा रही हूँ और तरीका सोचूँ जिससे मैं योगेश जी के हमबिस्तर होने से बच जाऊँ।”

मैं : “मम्मी मैं साथ चलता हूँ। मैं कुछ नहीं होने दूँगा। अंकल सिर्फ आपकी दुल्हन के रूप में देखेंगे और मैं आपको वापस ले आऊँगा।”

मम्मी : “बेटा वो योगेश जी वो मुझे वापस नहीं आने देंगे। अब तो मुझे ही अपने बदन को नंगा होने से बचाना होगा।”

मैं : “मम्मी आप क्या करोगी?”

मम्मी : “वो मैं खुद सोचूँगी। अब जा रही हूँ।”

मैं : “मम्मी मैं आपको छोड़ आता हूँ नहीं तो कोई आपको अकेली जाते हुए देखेगा तो...”

मम्मी : “हाँ तू छोड़ आ।”

और फिर मैं मम्मी को पीछे वाले गेट से लेकर अंकल के घर गया। अंकल का पीछे वाला गेट की एक्स्ट्रा की से गेट खोला और मैं-मम्मी अंदर गए। मैंने देखा अंकल हॉल में नहीं थे। शायद रूम में होंगे।

तो मम्मी ने कहा “अब तू जा।”

मैं : “मम्मी अंकल से मिल लेता हूँ।”

मम्मी : “अब तू जा।” चिल्लाकर।

मैं : “मम्मी मैं जाता हूँ।” और मैं सीढ़ियों से आया। सही कहूँ तो आने का नाटक किया क्योंकि मैं सीढ़ियों पे चढ़ा तो मम्मी को लगा मैं जा रहा हूँ और सीढ़ियों में रुक गया और मम्मी रूम में चली गईं जहाँ अंकल थे और मैं सीढ़ियों से उतरकर अंकल के रूम की खिड़की पे गया तो देखा मम्मी जाकर अंकल से गले लग गईं और अंकल एक दूल्हे की तरह सजे हुए थे और दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे।

अंकल : “क्या तुमने जोड़ा क्यों नहीं पहना?”

मम्मी : “अभी पहनती हूँ मेरे राजा।”

अंकल : “नहीं मैंने एक लड़की को बुलाया। वो तुझे पहना देगी।”

मम्मी : “क्या? कहाँ है मुझे तो नजर नहीं आ रही है।”

अंकल : “अभी बुलाया हूँ।” और अंकल ने आवाज दी “बाहर आओ।” तो एक लड़की बाथरूम से निकली।

अंकल : “तुम इसे लहंगा पहनाओ।”

लड़की : “येस सर।” और अंकल रूम से निकल गए। शायद हॉल में आ गए।

फिर उस लड़की ने मम्मी को नंगी किया और ब्रा-पैंटी पहनाई और लहंगा-चोली। मम्मी एकदम 22 साल की नई-नवेली दुल्हन लग रही थीं।

और अचानक से किसी ने मेरे कंधे पे हाथ रखा तो मैंने पीछे मुड़कर देखा अंकल थे।

अंकल : “बेटा पूरी रात कैसे देखेगा?”

मैं : “यहीं छुपकर देखूँगा।”

अंकल : “मैं आज तेरी मम्मी के साथ इस रूम में नहीं बल्कि उस दूसरे रूम में सुहागरात मनाऊँगा।
और हाँ तेरे लिए मैंने खिड़की खोल रखी है।”

और मम्मी हॉल में आने लगीं तो अंकल बोले “मैं चलता हूँ।” और अंकल सोफे पे जाकर बैठ गए और मैं वहाँ छुपकर देख रहा था और कुछ ही पलों में चलती हुई मम्मी हॉल में आ गईं।

अंकल तो मेरी मम्मी का ये रूप देख मंत्रमुग्ध हो गए थे। वैसे अंकल तो क्या कोई भी मम्मी को इस रूप में कोई भी देख लेता उसका भी यही हाल होता। मम्मी के गोरे बदन में लाल रंग की चोली जो एकदम फिट थी मानो कि उससे मम्मी के बदन पर रखकर ही सिला हो और मेरी मम्मी की चोली सिर्फ मेरी मम्मी की चुची के नीचे तक थी।
और मम्मी ने अपना लहंगा नाभि से 4 इंच नीचे से शुरू किया था। कमर से लेकर मम्मी के चूतड़ तक और फिर थाईज के मिडिल तक एकदम टाइट फिट, और उसके बाद घेरा जो जमीन को छू रही थी। मेरी मम्मी की चोली का गला थोड़ा सा गहरा था पर ज्यादा नहीं।
मैं मन में एक्साइटमेंट में सब देख रहा था।

सच में मम्मी उस समय किसी अप्सरा से कम नहीं लगी थीं। सर पर पल्लू, चेहरे पर शर्म की लाली धीरे-धीरे चलते आ रही थीं कि मम्मी से हल्के से नजर उठाकर अंकल को देखा जो उस समय सिर्फ मम्मी को ही बिना पलक झपकाए देख रहे थे। अंकल की आँखों से आँखें मिलते ही मम्मी ने शर्माते-मुस्कुराते अपना मुँह दूसरी ओर घुमा लिया।

फिर वो लड़की दो वरमाला लाई और उस लड़की ने वरमाला मम्मी और अंकल को दी।
मम्मी वरमाला हाथ में पकड़े हुए निगाहें झुकाए अंकल की तरफ देखने लगीं और अंकल के सामने मम्मी ने अपने हाथों को धीरे से ऊपर उठाया और अंकल के गले में वरमाला डाल दी तो वहाँ खड़ी उस लड़की ने जोर-जोर से तालियाँ बजाईं और फिर अंकल ने भी मम्मी के गले में वरमाला डाल दी।

वरमाला के बाद अंकल मम्मी को मंगलसूत्र पहनाने लगे तो मम्मी –

मम्मी : “इसे क्यों पहना रहे हो? मेरे गले में तो किसी और का मंगलसूत्र पहले से ही है।”

अंकल : “तो आज उसे उतार दो।”

मम्मी : “लेकिन मैंने आपसे पहले ही कहा था मैं आपसे शादी नहीं करूँगी सिर्फ आपके साथ संबंध बनाऊँगी।”

अंकल : “मैं कब शादी कर रहा हूँ? ये तो सिर्फ एंजॉय के लिए मंगलसूत्र पहना रहा हूँ और माँग में सिंदूर।”

मम्मी : “नहीं ये सही नहीं है।”

अंकल : “वर्षा सिर्फ ये नाटक है माँग में सिंदूर और मंगलसूत्र का।”

मम्मी : “ठीक है। पहले वाला भी नहीं उतारूँगी।”

अंकल : “ओके।” और फिर अंकल ने मम्मी के गले में मंगलसूत्र पहनाया और मंगलसूत्र मम्मी के गले में पहनाने के बाद जैसे ही अंकल ने मम्मी की माँग में सिंदूर भरा। अंकल के मम्मी की माँग में सिंदूर भरते ही मम्मी बोलीं “ये सही नहीं है।”

अंकल : “सिर्फ एंजॉय के लिए।”

फिर अंकल मम्मी का हाथ पकड़कर रूम में ले जाने लगे और उस लड़की से बोले “तुम दूसरे रूम में रेस्ट करो।” और मम्मी का हाथ पकड़के रूम में ले जाने लगे और

बेडरूम के दरवाजे तक पहुँचते ही मेरी मम्मी की साँसें किसी ट्रेन की तरह चलने लगीं।
जैसे-जैसे बेडरूम का दरवाजा नजदीक आ रहा था मम्मी के पूरे बदन में हलचल सी होने लगी।

जैसे ही अंकल जी ने बेडरूम का दरवाजा खोला फूलों की खुशबू ने इन दोनों का स्वागत किया। मम्मी ने धीरे से नजर उठाकर देखा पूरा कमरा गुलाब के फूलों से सजा हुआ था और जैसे ही मेरी मम्मी की नजर वहाँ पड़े बेड पर पड़ी मानो शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लीं।

वहाँ एक आलीशान बेड था जो फूलों से सजा हुआ था। उसके फूलों से दिल बना हुआ था और उसमें मेरी मम्मी का नाम लिखा हुआ था और साथ ही वहाँ उस बेड के ऊपर लिखा हुआ था “हैप्पी सुहागरात”।

बेडरूम और बेड की हालत देखकर ही कोई बता सकता है अंकल ने कितनी जबरदस्त तैयारी की है।

अंकल ने मेरी मम्मी की कमर में हाथ डाले मम्मी को सुहाग सेज की ओर चल रहे थे कि तभी अंकल मम्मी के आगे आए और मम्मी के सामने झुककर बोले “वर्षा मेरी रानी साहिबा।
आपको दास की छोटी सी कोशिश कैसी लगी रानी साहिबा? कहीं इस दास से आपकी शान में कुछ गलती तो नहीं हो गई। वैसे महारानी साहिबा दास को उम्मीद है आपको अच्छा लगा होगा।” अंकल के इस तरह पूछने पर मम्मी का शर्म से बुरा हाल था। मम्मी धीरे से बोलीं “योगेश जी ये आप क्या कह रहे हैं?” तो अंकल जी मुस्कुराते बोले “सही कह रहा हूँ। अब से तुम इस घर की ही नहीं बल्कि मेरे दिल की भी महारानी हो और मैं तुम्हारा नौकर।”

अंकल का ये अंदाज देख मम्मी के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ गई।

मम्मी : धीरे से “इन सब की क्या जरूरत थी?”

अंकल : “वर्षा ये तो कुछ भी नहीं है। मैं आज की रात को यादगार बनाना चाहता हूँ।”

फिर अंकल ने मम्मी से कहा “इस बेड पे आज रात तुम्हारे साथ सुहागरात मनाऊँगा।”

मम्मी : “आप प्लीज 2 मिनट बाद आइएगा। प्लीज 2 मिनट के लिए बाहर जाइए।” और अंकल बाहर आ गए और मम्मी ने वहाँ पे रखे गुलाब के फूल बेड पे डाल दिए और उनके पंखुड़ियों को बिखेर दिया और फिर मम्मी ने अंकल को आवाज दी और अंकल अंदर आए तो अंकल ने देखा बेड पे गुलाब के फूल की पंखुड़ियों से सजा दिया है और

बिखरे हुए थे और उन गुलाबों के फूलों में मम्मी घूँघट निकालकर बैठीं अपने राजकुमार का इंतजार कर रही थीं।

वैसे तो मम्मी और अंकल दोनों का आपस में मन से मन और तन से तन का मिलन हो चुका था पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार पर आज अंकल मम्मी के गले में मंगलसूत्र और माँग में सिंदूर डालकर सुहागरात मनाने वाले थे।
अंकल धीरे-धीरे बेड की ओर बढ़ने लगे।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 04:26 PM



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