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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#27
**अपडेट 25**

दो दिन ऐसे ही निकल गए। दो दिन बाद अंकल ने मुझसे कहा “बेटा मैं तेरी मम्मी के साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ।”

मैं : “वो तो आप पिछले 6 महीनों से मना रहे हो।”

अंकल : “नहीं बेटा मैं उसे दुल्हन की तरह सजाकर उसके साथ जैसे पहली रात होती है ठीक वैसे ही करना चाहता हूँ।”

मैं : “आप मम्मी से बात करो।”

अंकल : “वो मान जाएगी लेकिन मादरचोद तेरा नामर्द बाप और तेरी दादी घर में रहेंगे तो पॉसिबल नहीं है।”

मैं : “अंकल पापा दो दिन बाद ऑफिस के काम से आउट ऑफ सिटी जा रहे हैं 5 दिन के लिए।”

अंकल : “बेटा मैं इन 5 दिनों में ही करूँगा और तू तेरी दादी को दोस्त के घर भिजवा देना।”

मैं : “नहीं अंकल पापा दादी को भी लेकर जा रहे हैं उनकी आँखों का ऑपरेशन कराने।”

अंकल : “थैंक्स बेटा।”

फिर अंकल ने मम्मी को दिन में घर बुलाया तो मम्मी दादी से बोलीं “मम्मी जी मैं छत पे जा रही हूँ।” और बहाने से अंकल के घर चली गईं जहाँ उनके बीच बातें हुईं।

अंकल : “वर्षा मैं तेरे साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ।”

मम्मी : “वो तो आप पिछले 6 महीनों से मना रहे हो।”

अंकल : “नहीं एक दुल्हन की तरह मनाना है।”

मम्मी : “लेकिन होगा कैसे? मेरे पति और सास...”

अंकल : “अंकुश ने कहा तेरा नामर्द पति और सास 5 दिनों के लिए बाहर जाएँगे दो दिन बाद।”

मम्मी : “मुझे नहीं पता। ठीक है फिर तो पॉसिबल हो जाएगा।”

अंकल : “मैं चाहता हूँ तू एक दुल्हन की तरह सजे और मेहंदी और चुत के बाल...”

मम्मी : “मैं कर लूँगी।”

अंकल : “नहीं चुत के बाल मैं साफ करूँगा।”

मम्मी : “कर देना।”

अंकल : “लेकिन सामान अंकुश लाएगा।”

मम्मी : “क्या? आपका दिमाग तो ठीक है? मुझे शर्म आएगी।”

अंकल : “तो ठीक है सुहागरात कैंसल।”

मम्मी : “नो ठीक है। आप अंकुश से भिजवा देना।”

अंकल : “और शादी का जोड़ा लेना है।”

मम्मी : “वो मेरे पास है मेरी शादी का।”

अंकल : “नहीं वो पुराना हो गया है और उस नामर्द ने उसे खरीदा था। मैं चाहता हूँ तुम न्यू पहनो।
और कल तुम मेरे साथ मार्केट चलना और न्यू जोड़ा का ऑर्डर कर देंगे। पसंद कर लेना खुद।”

मम्मी : “लेकिन मैं कल घर से कैसे निकलूँगी?”

अंकल : “बोल देना अंकुश के कॉलेज जा रही हो।”

मम्मी : “ठीक है।”

अंकल : “दो दिन बाद मैं तुम्हें बीवी की तरह चोदूँगा सुहाग सेज पे।”

अंकल की बातें सुनकर मम्मी शर्म से पानी-पानी हुईं। निगाहें झुकाए खड़ी थीं।
फिर अंकल मम्मी के आगे आकर झुके और बोले “तो कल मैडम सुबह 11 बजे इस कॉलोनी के बाहर आपका गुलाम आपकी सेवा में हाजिर हो जाएगा।”

और फिर अंकल के मोबाइल पे किसी का कॉल आया तो रिसीव करते हुए बालकनी में चले गए। अंदर मम्मी थीं। ये सब मैं देख रहा था।
अंकल के जाने के बाद मम्मी कुछ सोच रही थीं। ये तो मुझे नहीं पता।
शायद सोचते-सोचते मम्मी की टाँगों के बीच एक्साइटमेंट होने लगी। मम्मी की चुत से पानी बहने लगा। मम्मी अपने हाथ को अपनी सलवार के ऊपर से ही अपनी चुत को सहलाने लगीं। मैं भी ध्यान से देख रहा था। फिर मम्मी ने अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर नीचे गिरा दिया और मम्मी ने अपना हाथ अपनी पैंटी में अपनी चुत पर चलाने लगा और अपनी चुत को अपनी उँगलियों से छेदने लगीं।
मम्मी साँसें भी भारी होने लगीं और उनके मुँह से “आआआआआआहhhhhhhhhhhhhhhhhhhh आआआआआआहhhhhhh” निकल रही थीं और वे अपनी चुत में अपनी उँगली गचा-गच अंदर-बाहर करने लगीं। उनकी चुत भी उस समय पानी का समुंदर बहा रही थी। मम्मी की उँगलियाँ और चुत पर बड़ी झाँटें उनकी चुत के रस से एकदम भीग चुकी थीं और जब मम्मी थोड़ा नॉर्मल हुईं तो अपने आप को इस हालत में देख खुद ही शर्मा गईं। फिर मैंने देखा अंकल भी मम्मी को देख रहे थे। फिर अंकल मम्मी के पास आए और मम्मी को उन्होंने उठा लिया और रूम में ले गए। खिड़की पे गया तो खिड़की बंद था। फिर मैं घर वापस आ गया और एक घंटे बाद मम्मी वापस आईं।

अगले दिन मैंने कॉलेज जाते समय दादी के सामने मम्मी से कहा –

मैं : “मम्मी आप 11 बजे कॉलेज आ जाना।”

मम्मी : चौंकते हुए क्योंकि मम्मी समझ गईं ये अंकल की योजना है।

दादी : “क्यों बेटा?”

मैं : “मम्मी या पापा को कॉलेज बुलाया है।”

दादी : “ठीक है 11 बजे उसे भेज दूँगी।”

फिर मम्मी मुस्कुराते हुए अपना काम करने लगीं और मैं कॉलेज चला गया।

आए शाम को 6 बजे वापस आया और अंकल से मिलने उनके घर गया कॉलेज से डायरेक्ट। और अंकल ने कहा “बहुत मजा आया आज तो मैंने तेरी मम्मी को शॉपिंग कराई और तू खुद देखना दो दिन बाद।”

मैं : “अंकल कल दादी-पापा जा रहे हैं तो आप कल ही सुहागरात मना लीजिए।”

अंकल : “ठीक है बेटा तेरी मम्मी से बात करूँगा अभी।”

फिर मैं घर आया तो दादी और मम्मी से मिला। मम्मी बहुत खुश लग रही थीं।

मम्मी : “बेटा तूने झूठ क्यों बोला कॉलेज में बुलाया है? पता है जब मैं तेरे कॉलेज जा रही थी तो योगेश जी मिल गए। फिर वे मुझे अपने घर ले गए कंप्यूटर सिखाने। मैंने उनसे कहा मुझे अंकुश के कॉलेज जाना है तो उन्होंने कहा ये अंकुश की प्लानिंग है कॉलेज नहीं जाना कंप्यूटर सीखने के लिए।”

मैं : “हाँ मम्मी सही कहा अंकल ने।”

फिर मम्मी किचन में अपना काम करने लगीं।
फिर रात को पापा नहीं आए। आज मम्मी अकेली सोई थीं और दादी मेरे साथ। फिर सुबह 6 बजे मेरी नींद खुली। मम्मी सो रही थीं सिर्फ पैंटी में।
मैंने मम्मी को उठाया तो उन्होंने कहा उन्हें थोड़ी देर और सोना है। मैंने कुछ नहीं कहा। मम्मी मेरे सामने पैंटी में रह लेती हैं इसलिए इस पर कोई शर्म नहीं थी। मम्मी पैंटी में थीं।

फिर मैंने देखा मम्मी का मोबाइल उनके पास रखा था। मैंने मम्मी का मोबाइल उठाया और दूसरे रूम में आ गया और
मैंने देखा उसमें आंटी की कॉल थी जिसे मम्मी अंकल के बारे में पता था। वही आंटी जिनकी बेटी की शादी में हम गए थे।

मम्मी : “दीदी कल मैं योगेश जी घर गई तो उन्होंने मुझसे सुहागरात की डिमांड रखी। बोले मैं तेरे साथ वैसे ही सुहागरात मनाना चाहता हूँ जैसे पहली रात में होती है।”

आंटी : “तो मना ले।”

मम्मी : “हाँ आज वे मुझे शॉपिंग ले गए थे।”

आंटी : “बहुत बढ़िया। पूरा बता क्या हुआ।”

मम्मी : “दीदी जब मैं
सुबह में उठकर तैयार हो गई क्योंकि मुझे पता था आज मुझे योगेश जी के साथ शॉपिंग पे जाना है और 11 बजे मैं बुढ़िया से बहाना बनाकर मैं कॉलेज जा रही अंकुश के और घर से निकल गई और कॉलोनी के बाहर योगेश जी ने मुझे पिक किया। हम दोनों एक बड़े से साड़ियों के शोरूम में चले गए। वहाँ सेल्समैन मुझे साड़ियाँ खोल-खोल कर दिखा रहा था और मैं बार-बार योगेश जी से पूछ रही थी ‘योगेश जी ये कैसी है?’
फिर योगेश जी कहा ‘ये साड़ी अच्छी है वर्षा तुम पर बहुत अच्छी लगेगी’ और मेरी सब साड़ियाँ योगेश जी ने अपनी पसंद की लीं और जब सुहागरात का जोड़ा लेने की बात आई तो योगेश जी मुझसे पूछने लगे ‘वर्षा सुहागरात में साड़ी पहनोगी या फिर लहंगा-चोली?’ वैसे मैं बड़ी इच्छा थी कि मैं अपनी सुहागरात में लहंगा-चोली पहनूँ मेरे पति के साथ तो सब इतना जल्दी हो गया था कि मेरे सब अरमान मेरे दिल में ही रह गए थे लेकिन अब मुझे फिर से दुल्हन बनाने का मौका मिला था और अब मेरे यार योगेश जी ने मुझसे पूछा तो मैंने धीरे से कह दिया ‘जी लहंगा-चोली’ और फिर योगेश जी ने एक लहंगा-चोली उठाकर मुझे दिखाते हुए कहा,

‘वर्षा ये देखो ये कैसा है। तुम पर बहुत अच्छा लगेगा।’ योगेश जी की बात का क्या जवाब देती बस इतना ही कहा ‘जी अच्छा है’ और अपनी आँखें नीचे कर लीं। योगेश जी मेरे लिए ढेर सारी शॉपिंग की। मेरे लिए कीमती ज्वेलरी, मेकअप का सामान लिया। मेरी साड़ियों के सारे ब्लाउज सिलने के लिए दे दिए थे और मैंने अपने योगेश जी के कहने पर अपने सारे ब्लाउज डिजाइनर और स्लीवलेस के बनवा लिए थे। पता नहीं अब मैं इस सुहागरात के लिए काफी एक्साइटेड हो रही थी। मेरे दिल में मेरे सोए हुए अरमान जाग उठे थे और मैं भी गरम जोशी से अपने योगेश जी के साथ अपनी सुहागरात की तैयारी में लग गई थी। मैं जानती थी कि अगर मेरे योगेश जी इतना सब कुछ कर रहे हैं तो जरूर उनके दिल में कुछ और भी होगा पर मैं भी देखना चाहती थी कि वे मेरे हुस्न के जाल से कैसे मेरे गुलाम बनेंगे। मैंने भी उन पर अपने हुस्न की बिजलियाँ गिराने का फैसला कर लिया था। मैं मेनका से कम नहीं हूँ।

वो सुहागरात को जब मैं उनके पास इतने करीब उनके बेड पर उनके साथ हूँगी तो मुझे जरूर नंगी करेंगे और जब मेरे योगेश जी सुहागरात को मेरे बदन से मेरा लहंगा-चोली उतारेंगे तो हर मर्द की उनकी इच्छा होगी कि उनकी खूबसूरत बीवी सेक्सी ब्रा और पैंटी में उनकी बाहों में हो। यही सब सोचकर मैंने सुहागरात के लिए बहुत ही सेक्सी रेड कलर की ब्रा और बहुत ही हॉट उसी कलर यानी रेड कलर का थॉन्ग लिया। थॉन्ग क्या था सिर्फ आगे एक छोटा सा कपड़ा था और पीछे सिर्फ एक रस्सी। मैं जानती थी ये मुझ पर बहुत सूट करेगा और मुझे ये देखकर तो मेरे योगेश जी किसी भूखे शेर की तरह मुझ पर टूट पड़ेंगे। मेरे लिए ब्रा और थॉन्ग कुछ ऐसे थे इस पिक की तरह।

फिर हम शॉपिंग से आते हैं और घर आकर मैं अपने रूम में गई और नंगी हो गई और सोचने लगी
मेरे जैसी सुंदर सेक्सी औरत किसी मर्द के बगल में लेटी हो तो उसका खड़ा नहीं हो और वे मुझे बिना चोदे छोड़ दें। मैं कैसे उनको रोक सकती हूँ।

और यही सोचते मैं मुस्कुराते अपनी सेक्सी ट्रांसपेरेंट नाइटी उठाई और पहन ली। उस नाइटी में सच में बहुत ही हॉट लग रही थी।

और मुझे यकीन था कि अगर इस नाइटी में मुझे मेरे योगेश जी कहीं देख लें तो उनका लौड़ा रॉकेट की तरह खड़ा होकर उनकी पैंट को फाड़कर बाहर आ धमकेगा।

मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं बिस्तर से खड़ी हो गई।

मैं इस नाइटी में दीदी बाहर निकलना चाहती थी पर बुढ़िया घर में थी। फिर मैंने सोचा अब तो काफी रात हो गई है बुढ़िया सो गई होगी और मैं बालकनी में चली गई।
वैसे तो बाहर बहुत ठंडी हवा चल रही थी पर आज मुझे ये ठंड परेशान नहीं कर रही थी। ठंडी हवा में मेरे रेशमी बाल लहरा रहे थे जिसको मैं बार-बार अपने हाथों से ठीक करके योगेश जी के बारे में सोचने लगी। कि क्या मैं इतनी खूबसूरत हूँ कि योगेश जी का मन मुझ पर डोल गया। मैं उनके बारे में सोचने लगी कि कैसे मेरे योगेश जी जब मैं उनके सामने बैठी थी तो कैसे मेरी चुचियों को घूर रहे थे बिना पलक झपकाए। एकटक बस देखे ही जा रहे थे मेरी चुचियों को। पिछले 6 महीनों में जैसे उन्होंने कभी मुझे चोदा न हो और ना ही मेरी चुचियों का रस पिया हो और तो और उन्होंने बताया था मुझसे पहले वे कई लड़कियों की सील खोल चुके हैं और उनके बूब्स को निचोड़ चुके हैं और कई औरतों को प्रेग्नेंट भी कर चुके हैं।
यही सोचते-सोचते मेरा हाथ अपनी छातियों पे चला गया। और मैंने अपनी बाईं चुची को नाइटी के ऊपर से हल्का सा दबाया.....

आआहsssssss... मेरे मुँह से हल्की सी आआआआआआआआहhhhhhhhhhhhhhh निकल गई थी। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने अपनी नाइटी की गाँठ को धीरे से खोल दिया और अपनी नाइटी को एक तरफ से सरकाकर अपनी एक चुची को बाहर निकाल लिया। और खुद ही अपनी चुचियों को निहारने लगी और मन में सोचने लगी कितने गोरे हैं मेरे बूब्स। एक टाइट और सुडौल और उस पर गुलाबी रंग के निप्पल किसी भी मर्द का ईमान इनको देखकर डोल जाए। मैं अपनी चुची के निप्पल को पकड़कर हाथ से सहलाने और मसलने लगी और अपने योगेश जी के बारे में सोचने लगी कि तभी मेरी आँखों के सामने अपने योगेश जी का मर्दाना जिस्म घूमने लगा। मैंने अपना ध्यान उस ओर हटाने की बहुत कोशिश की पर कामयाब नहीं हो रही थी। मैंने अपने आप ही शर्माते ही जैसे अपने होठों पर उँगली रखी। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैं अपनी उँगली को मुँह में लेकर चूसने लगी। अपनी उँगली को चूसते उस समय मुझे ऐसा महसूस होने लगा कि मैं अपनी उँगली नहीं बल्कि अपने योगेश जी का लंड चूस रही हूँ और मेरी नजर मेरे बेड के पास रखी योगेश जी की पिक पर गई तो मुझे लगा कि मानो मेरे सामने ही खड़े मेरी चुचियों को देख रहे हैं। उनकी पिक को देख उनसे बातें करने लगी, और बड़ी ही सेक्सी अंदाज में उनकी पिक को देखकर बोली ‘ऐसे क्या देख रहे हैं जी.. जैसे कभी देखा ही न हो.. जैसे पिछले 6 महीनों से मुझे देखा न हो। इन 6 महीनों में मुझे इतना कुचला है आपने अपने लंड से मेरी चुत को और अपने हाथों से मेरे बूब्स को। अब क्यों बड़े घूर-घूर के देख रहे थे ना दिन में। नजर भी नहीं हटा पा रहे थे। कितने बेशरम हो आप। अब देखिए ना।
मैंने मना किया है ना देखने के लिए। अब आपकी ही हूँ। जैसे आपका दिल करे देखें और देखना ही क्या आपका दिल करे तो इनसे खेलिए। लेकिन अकेले में सबके सामने नहीं। अगर आपका देखने का इतना ही मन है तो लीजिए मैं खुद ही दिखा देती हूँ आज..’ और अपनी ब्रा की डोरी को जो आगे बीच में बंधी थी उसको खींच दिया।

और डोरी को पकड़कर मुस्कुराते हुए उनकी पिक को देखने लगी। और अपनी ब्रा को अपनी चुचियों से हटा दिया। ‘कैसा लगा ये नजारा.. मजा आया ना!’.. मैं अपने योगेश जी की पिक के सामने मुस्कुराती अदा से घूमकर उनको अपनी जवानी दिखा रही थी।

मैं बहुत ही ज्यादा गरम हो गई थी। मुझे लग रहा था कि मैं उनकी पिक से नहीं बल्कि उनसे बात कर रही हूँ और उनकी पिक की ओर देखकर मैं बोली, ‘क्या इसको देखते ही रहेंगे? आपका दिल नहीं इनको प्यार करने को? आइए ना जी भरकर इनको प्यार कीजिए आआआआआआआहhhhhhhhhhhhhhh आइए ना क्यों तड़पा रहे हैं।’
फिर मैं उनकी पिक से बोली ‘सिर्फ इनको ही देखना चाहते हैं या फिर और भी देखना चाहोगे!.. तो वो भी दिखा देती हूँ..’ और फिर मैंने अपनी पूरी नाइटी खोल दी और अपनी दोनों चुचियों को पकड़कर योगेश जी की पिक के पास करते बोली, ‘देखो.. जी भरके देख लो इन्हें.. यही देखना चाहते थे ना आप.. तो दिखा दिया मैंने आपको.. अब खुश..? नटखट।
वैसे एक बात कहूँ आप तो उनको पिछले 6 महीनों से देख रहे हो तो फिर आप शॉपिंग मॉल में सेल्स गर्ल के सामने क्यों घूर रहे थे?
अच्छा मैं समझ गई आप मेरे साथ सुहागरात मनाने के लिए। जब सुहागरात होती है तो पहली बार ही देखा जाता है। सुहागरात से पहले तो घूरा ही जाता है। तो अब देखो दिल खोलकर मेरे राजा योगेश जी।

अब खुश? या फिर और कुछ देखना चाहते तो बता दो फिर मत कहना कि मैंने दिखाया नहीं।’ और फिर खुद ही बोली ‘बड़े शैतान हो। वो भी देखना चाहते हैं तो मेरी टाँगों के बीच ही।’ और खुद ही उनकी पिक के सामने अपनी दोनों टाँगों को खोल दिया तो अपनी कमर को गोल-गोल चलाने लगी और बोली ‘लीजिए देख लिए मेरे इस खजाने को भी।’
मैं खुद ही योगेश जी मान की बात करने लगी थी और अपनी चुत पर पैंटी के ऊपर से ही हाथ फेरते बोली ‘हाय क्या कह रहे हैं इसको भी हटा दूँ? उई माँ नहीं नहीं मैं इसको नहीं उतार सकती। मुझे शर्म आती है। आप ही उतार दीजिए ना। मैं भी देखती हूँ कब तक इसको नहीं उतारते। एक बार ऐसे सामने आ गई ना तो देखना फिर आप मुझे पहनने भी नहीं देंगे।
मैं; लीजिए आज मैं खुद ही उतार देती हूँ।’ और मैंने खुद ही अपनी पैंटी उतारकर फेंक दी और अपनी नंगी चुत को अपने हाथ से सहलाने लगी। मैं इतनी गरम हो गई थी कि अपनी उँगली को अपनी चुत में गचा-गच अंदर-बाहर करते हुए बड़बड़ाने लगी थी।

आआआहhhhhhhhhhhhhhhh योगेश जी ऐसे ही ऐसे ही पूरा अंदर तक डालिए आआआहhhhhhhhhhhhhhhhhhhh आहhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मेरे दिलो-दिमाग पर उस समय अपने योगेश जी की मर्दानगी ही छा रही थी जिस से मेरी उँगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर हो रही थीं और अपनी उँगलियाँ अपनी चुत में अंदर-बाहर करते कब मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया मुझे पता ही नहीं चला। खैर जो भी था मैं अब उसके लिए भी तैयार थी क्योंकि मैं जानती थी कि योगेश जी भले ही मुझे पिछले 6 महीनों से लगातार चोद रहे हैं लेकिन कल वे मेरे साथ सुहागरात मनाएँगे और इस सुहागरात में पहली बार चोदा जाता है। सब कुछ पहली बार होता है इसलिए मैंने सोच लिया था अभी तक योगेश जी ने मुझे नहीं चोदा है। जो भी होगा पहली बार होगा।

अब मम्मी चुप हुई थीं तो आंटी बोलीं –

आंटी : “वर्षा चली। अच्छा हुआ तू बेशरम बन गई और तूने मुझसे क्या कहा था उस दिन दीदी पहली बार...”

मम्मी : “सॉरी दीदी। पता नहीं मैं डर गई थी इसलिए झूठ बोला। हमारे बीच पिछले 6 महीनों से चल रहा है।”

आंटी : “ठीक है मैं कल शाम को 3 बजे आ जाऊँगी तेरे मेहंदी लगाने।”

मम्मी : “नहीं दीदी आप मत आना बल्कि किसी लड़की को भेज देना।”

आंटी : “देखती हूँ।”

फिर दोनों की बातें बंद हो गईं।

फिर 8 am बजे पापा आए और आते ही जल्दी करने लगे और दादी को लेकर 9 बजे निकल गए। अब घर पे मैं-मम्मी थे।
मैंने पापा-दादी के जाने के बाद मम्मी को एक पैकेट दिया जिसे मैं अंकल के कहने पे खरीद के लाया था।

मम्मी : “क्या है इसमें?”

मैं : “मम्मी नहीं पता। आप खोलकर देखो। अंकल ने दिया है। बोले बेटा मम्मी को दे देना।”

मम्मी : मम्मी ने मेरे सामने खोला तो उसमें एक शेविंग किट थी सब कुछ और वीट थी।

मम्मी चिल्लाते हुए –

मम्मी : “बेटा देख योगेश जी की हिम्मत! उन्होंने बेशरमी की हद पार दी है और क्या भेजा?”

मैं : “मम्मी इसमें क्या गलत है? मम्मी मैं जानता हूँ जैसे जेंट्स यूज करते हैं वैसे ही लेडीज भी करती हैं।”

मम्मी : “बेटा तू सही कह रहा है लेकिन वे एक गैर मर्द होकर किसी शादीशुदा को ऐसे भेज रहे हैं और आज उनका मैसेज भी आया था। वे बहुत गलत कमेंट्स करते हैं मुझे।”

मैं : “मम्मी मैंने आपसे कितनी बार कहा है आप अंकल का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लो। अंकल आपसे बहुत प्यार करते हैं।”

मम्मी : “मैंने भी तुझसे कई बार कहा है मैं उनके साथ हमबिस्तर नहीं हो सकती हूँ और तू कैसे बेटा है जो अपनी मम्मी को किसी और के साथ सुलाना चाहता है?”

मैं : “मम्मी मैं जानता हूँ पापा आपको बिल्कुल भी प्यार नहीं करते हैं और आपको भी एक मर्द की जरूरत है और अंकल आपको बहुत प्यार करेंगे।”

मम्मी : “चुप।”

मैं : “मम्मी प्लीज आपको मेरी कसम आप ये सब रख लो।”

मम्मी : “अब तूने कसम से दी इसलिए रख रही हूँ।”

मैं : “मम्मी आप उनको यूज करना।”

मम्मी : “बेटा मेरे पास है और तू तो कुछ शर्म कर। क्या माँ से ऐसे बात करते हैं?”

मैं : “सॉरी मम्मी पर आपने कहा था आप मुझसे दोस्ती की है।”

मम्मी : “हाँ बेटा ठीक है पर यूज नहीं करूँगी। मेरे पास ऑलरेडी है।”

मैं : “प्लीज यूज कर लेना।”

मम्मी : मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखकर “ठीक है कर लूँगी।” और बहुत ज्यादा शर्माने लगीं।

मैं : “मम्मी आप शर्मा क्यों रही हो?”

मम्मी : “बेटा शर्म तो आएगी जब एक बेटा मम्मी से इस तरह की बातें करेगा और किसी गैर मर्द के द्वारा भेजे गए।” और इतना बोलकर बोलीं “अब इन सबको रूम में रख आ।” और मैं सामान मम्मी के बेड पे रख आया और तभी मम्मी के सेल पे कॉल आया तो मम्मी बोलीं “देख उस योगेश का ही फोन। बेशरम कॉल कर रहा है।” तो मम्मी कॉल रिसीव करतीं उससे पहले ही मैं वहाँ से अपने रूम में आ गया और फिर थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे आवाज देकर बुलाया और मैं गया तो मम्मी बोलीं “वे बोल रहे थे वे आ रहे हैं मुझे कंप्यूटर सिखाने। तू उनसे बोल वे न आएँ।”

मैं : “क्यों मम्मी क्यों न बोलूँ? ये तो अच्छी बात है वे आपको कंप्यूटर सिखाने आ रहे हैं और मम्मी क्या आपने अंकल को बता दिया पापा-दादी चले गए इस बारे में?”

मम्मी : “बेटा वो गलती से मुँह से निकल गया और तू जाकर मेरे मोबाइल को चार्ज पे लगा दे।” और मैं मम्मी के मोबाइल को लेकर अपने रूम में आ गया और अंकल-मम्मी की रिकॉर्डिंग सुनने लगा।

मम्मी : “हैलो जी।”

अंकल : “साथ में कौन है?”

मम्मी : “अकेली हूँ।”

अंकल : “क्या तेरी सास और नामर्द?”

मम्मी : “दोनों चले गए।”

अंकल : “अंकुश कहाँ है?”

मम्मी : “जब आपका कॉल आया तो वे अपने रूम में चले गए ताकि मैं आपसे बात कर सकूँ।”

अंकल : “ओह्ह कैसी है मेरी रांड?”

मम्मी : “अच्छी है आपकी रांड।”

अंकल : “और तेरी चुत?”

मम्मी : “मेरी चुत को आपके लंड की याद आ रही है।”

अंकल : “आज रात को फाड़ूँगा।”

मम्मी : “फाड़ लेना जितना मन करे इन 5 दिनों में।”

अंकल : “अंकुश ने सेविंग्स किट दी?”

मम्मी : “हाँ दी पर मैंने नखरे किए।”

अंकल : “रांड तू बहुत नखरे करती है।”

मम्मी : “क्या करूँ बेटा हीरा। आप भी उससे क्यों भिजवाई?”

अंकल : “यही तो बात है रांड। उसे भी पता चलना चाहिए। आज तेरी चुत की झाँटें साफ करूँगा।”

मम्मी : “वो तो आप उसे वैसे भी बता देते हो।”

अंकल : “हाँ तो आ जाऊँ तेरी झाँटें साफ करने?”

मम्मी : “आ जाओ लेकिन उसे घर से बाहर भेज देना।”

अंकल : “नहीं भेजूँगा।”

मम्मी : “प्लीज मुझे शर्म आएगी।”

अंकल : “मैं उससे बोल दूँगा रूम में जाकर स्टडी करे।”

मम्मी : “नहीं उसे बाहर भेज देना।”

अंकल : “नहीं मैं 20 मिनट में आ रहा हूँ।” और कॉल कट हो गया। फिर मैंने मम्मी का मोबाइल चार्ज पे लगाया और रूम में ही रहा और रूम से देख रहा था मम्मी सोफे पे बैठकर मुस्कुरा रही थीं।

फिर कुछ ही देर में घर के पीछे वाली घंटी बजी तो मम्मी उठीं और अपनी कमर मटकाती हुई गेट खोलने गईं। गेट खोला तो सामने अंकल थे और अंकल से लिपट गईं और दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे। थोड़ी देर बाद मम्मी को होश आया तो अंकल से अलग हुईं और “अंकुश रूम में है” और फिर पीछे वाला गेट बंद करके दोनों सोफे पे बैठ गए और बातें करने लगे तो मैं भी रूम से निकला और अंकल से मिला।

अंकल : “बेटा कैसे हो?”

मैं : “ठीक हूँ अंकल। आप कैसे हैं?”

अंकल : “बेटा मैं भी ठीक हूँ। वो कल तुमने बताया था ना तुम्हारी दादी और पापा बाहर गए तो सोचा आकर वर्षा को कंप्यूटर सिखा दूँ इसलिए आ गया।”

मैं : “जी अंकल अच्छा। क्या आप मम्मी को कंप्यूटर सिखा दो?”

मम्मी : “नहीं मुझसे नहीं सीखना। अभी बहुत काम है किचन का। खाना बनाना है।”

मैं : “मम्मी खाना मैं ऑर्डर कर दूँगा।”

मम्मी : “फिर भी बेटा बहुत काम है।”

अंकल : “वर्षा देखो वो कितना ख्याल रखता है उसकी मम्मी का और तुम हो कि...”

मम्मी : “लेकिन...”

मैं : “मम्मी आप जाइए।”

मम्मी : “मैं नहीं जा रही हूँ।”

मैं : “अंकल आप मम्मी को ले जाइए हाथ पकड़कर।”

फिर
अंकल ने मेरे सामने ही धीमी आवाज में मम्मी से कुछ कहा।

अंकल : “बाल साफ करना है।”

तो मम्मी शर्माने लगीं और अपना सिर अपने घुटनों में घुसा लिया। शायद मम्मी ने सोचा मैंने सुन लिया।
फिर मैंने अनजान बनते हुए पूछा “अंकल आपने क्या कहा? मम्मी शर्मा रही हैं।”

अंकल : “तूने नहीं सुना क्या?”

मैं : “अंकल आपने इतना धीमा बोला तो सुन नहीं पाया।”
फिर मम्मी एकदम से अपना सिर ऊपर उठाकर बोलीं “क्या तूने नहीं सुना?”

मैं : “नहीं मम्मी।”

मम्मी : “बोल रहे थे कंप्यूटर सीखने चलो।”

मैं : “तो मम्मी इसमें शर्माने की क्या बात? जाइए।”

फिर अंकल ने मेरे सामने ही मम्मी का हाथ पकड़ा और रूम में खींचकर ले गए।
मम्मी : “नहीं नहीं छोड़िए मेरा हाथ” कहती हुई अंकल के साथ रूम में चली गईं।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 03:32 PM



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