Yesterday, 03:10 PM
**अपडेट 23**
मम्मी के हाँ करते ही अंकल मम्मी की लेग्स पर बैठ जाते हैं। मम्मी ने भी ये एक्सपेक्ट नहीं किया था।
अंकल अपने आप को मम्मी की टाँगों पर इस तरह एडजस्ट करते हैं कि वे जरा सा भी झुकें तो उनका लंड मम्मी की गाँड पर फील होगा।
अंकल का लंड पहले ही एकदम तना हुआ है, ऊपर से मम्मी की नरम गाँड का अहसास उसे और भी उकसा रहा है।
पर मम्मी की हालत हर पल और बिगड़ती जा रही है। अब मम्मी भी अंकल से नाराजगी खत्म होती जा रही थी।
अंकल अपने हाथों को मम्मी की कमर पे चलाने लगते हैं और बिना मम्मी की परमिशन के मम्मी के गाउन को ऊपर की ओर खिसकाने लगते हैं।
मम्मी थोड़ा रेसिस्ट करती हैं पर अंकल मम्मी को समझाते हैं कि अगर गाउन नहीं उतरेगा तो ऑयल से खराब हो जाएगा।
मम्मी अपने हाथों को ऊपर करके गाउन को उतारने देती हैं।
जब-जब अंकल मम्मी की कमर से कंधे की ओर अपने हाथों को ले जाते हैं वे अपने लंड को मम्मी की गाँड की दरार में और ज्यादा रगड़ने लगते हैं। मम्मी की चुत भी पूरी गीली हो चुकी है। वे भी अंकल का साथ देने लगती हैं और अपनी गाँड उठा-उठा कर अंकल के लंड की रगड़ को फील करने लगती हैं।
मम्मी की मोनिंग अब पहले से काफी तेज हो जाती है। अंकल पूरी तरह मम्मी के ऊपर झुक जाते हैं और कहते हैं –
अंकल – “क्या हुआ वर्षा? ज्यादा दर्द हो रहा है क्या? अगर कहो तो मसाज न करूँ।”
मम्मी : “नहीं दर्द नहीं हो रहा अब।”
अंकल (अपना लंड मम्मी की गाँड क्रैक में पूरी तरह गड़ा देते हैं) – “वो तुम सिसकियाँ ऐसे ले रही हो कि मुझे लगा शायद पेन हो रहा हो।”
अंकल इसके बाद मम्मी की ब्रा का हुक खोल देते हैं और मम्मी के क्यूट, ब्यूटीफुल, गोरे-गोरे बूब्स को फ्री कर देते हैं।
मम्मी भी सिर्फ “योगेश जी” कहकर चुप हो जाती हैं और अंकल के सख्त हाथों से अपनी मसाज के मजे लेती हैं।
अब अंकल अपने हाथों को मम्मी की गाँड पर फेरने लगते हैं। मम्मी के शरीर पर सिर्फ उनकी पैंटी ही बची है। वे नाराजगी के कारण अंकल से चुदना तो नहीं चाहतीं पर उनके जिस्म की आग इतनी भड़क चुकी है कि वे अंकल को मना भी नहीं कर पातीं।
मम्मी की मोन अब पूरे कमरे में गूँज रही है। वे चाहती हैं कि अब अंकल उन्हें चोद दें पर अंकल को मम्मी को तड़पाने में बहुत मजा आता है। अंकल का मानना था कि हर औरत में एक रांड छुपी होती है और वो तभी बाहर आती है जब उसे सेक्स की तड़प फील कराई जाए।
मम्मी अंकल से खुलकर कह नहीं पातीं कि उन्हें चुदना है पर अब मम्मी से भी रहा भी नहीं जाता और वे अपने हाथों को अपनी पैंटी पर ले आती हैं।
ये देखते ही अंकल अंदर ही अंदर खुश हो जाते हैं और मम्मी के हाथों को उनकी चुत से हटा देते हैं।
अंकल – “ये क्या कर रही हो वर्षा?”
मम्मी – “योगेश जी प्लीज मेरे हाथ छोड़ दो।”
अंकल नहीं सुनते और मम्मी की चुत पर पीछे से हाथ ले जाकर मम्मी को थोड़ा ऊपर उठाते हैं। मम्मी एक कुतिया की तरह पोज़ में आ जाती हैं। तभी अंकल अपने हाथों से मम्मी की चुत से खेलने लगते हैं।
मम्मी का शरीर काँपने लगता है। अंकल मम्मी की चुत पर एक किस कर देते हैं।
मम्मी – कराहती हुई आवाज में – “ये क्या कर रहे हो योगेश जी?”
अंकल – “अब ये मत कहना कि आपने कभी मेरी चुत को चाटा नहीं।”
मम्मी चुप रहीं और अंकल ने मम्मी की पैंटी को नीचे खिसका दिया।
अब मम्मी पूरी नंगी पड़ी हैं और अंकल मम्मी की गाँड से कंधे की तरफ अपने हाथ को लाते हैं।
मम्मी बस आहें भरती रह जाती हैं। अंकल मम्मी के शरीर पर झुक जाते हैं और मम्मी के कानों में फिर से पूछते हैं –
“बताओ वर्षा क्या आज मुझसे अपनी गुलाबी सुंदर चुत को चटवाओगी या नहीं?”
अंकल के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मम्मी को अजीब लगता है पर वे कुछ नहीं कहतीं।
अंकल मम्मी को कहते हैं कि “वर्षा तुम्हारी खामोशी में ही तुम्हारा जवाब छुपा है।” और मम्मी को किस करते हुए ही नीचे आते हैं।
अंकल मम्मी की कमर पर किस करते हुए मम्मी की गाँड तक आ जाते हैं। अंकल अपनी टंग मम्मी के शरीर पर एक साँप की तरह फेर रहे थे।
अंकल अपना एक हाथ मम्मी की चुत पर रखकर मम्मी को थोड़ा ऊपर उठाते हैं जिससे मम्मी की गाँड थोड़ा ऊपर उठ जाती है। अंकल झट से अपनी टी-शर्ट उतार फेंकते हैं और मम्मी को कुतिया की तरह पोजीशन में देखकर अपनी टंग मम्मी की चुत पर फेरने लगते हैं।
हालाँकि मम्मी ने ऐसा अहसास पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार महसूस किया है। मम्मी एक जल बिन मछली की तरह तड़प उठती हैं। मम्मी की मोन करने की आवाज पूरे कमरे में गूँजने लगती है।
मम्मी की आवाजें सुनकर अंकल भी समझ जाते हैं कि वे किसी भी समय झड़ जाएँगी।
अंकल बार-बार अपनी जीभ मम्मी की चुत से हटा लेते हैं जिससे मम्मी की तड़प और बढ़ जाती है। मम्मी रह-रह कर अंकल का नाम लेती हैं – “योगेश जी... योगेश जी...”
अंकल : “क्या हुआ वर्षा?”
मम्मी – “कुछ नहीं बट...”
अंकल – “लेकिन क्या वर्षा?”
अंकल सब जानते हैं कि मम्मी क्या चाहती हैं पर मम्मी नखरे कर रही थीं क्योंकि औरतों की आदत होती है मर्दी को बाखरे दिखाने की। भले ही चुत में आग लगी हो लेकिन नखरे नहीं छोड़तीं साली रंडियाँ। लेकिन अंकल ने भी सोच लिया था वे मम्मी के मुँह से ही सब कहलवाना है।
मम्मी – “योगेश जी प्लीज।” (और इतना कहकर वे फिर चुप हो जाती हैं।)
अंकल मम्मी को अचानक कमर के बल लिटा देते हैं और मम्मी की आँखों में आँखें डालकर कहते हैं –
अंकल – “वर्षा चुदाई का असली मजा सती-सावित्री नहीं रांड बनकर चुदने में है।”
इतना कहकर अंकल फिर से अपना मुँह मम्मी की चुत पर लगा देते हैं।
मम्मी भी अब रह नहीं पातीं और अपनी चुत को अंकल के मुँह पर रगड़ने लगती हैं।
अंकल – “कैसा लग रहा है मेरी जान?”
मम्मी – “आआह, बस रुकना मत कुछ देर प्लीज।”
अंकल – “सेक्स में सिर्फ मजे लेने ही नहीं होते, देने भी पड़ते हैं।”
मम्मी – “मैं सब करूँगी बस रुको मत अब।”
अंकल – “सब करोगी?”
मम्मी – “हाँ प्लीज रुकना मत।”
अंकल – अपना मुँह हटाकर मम्मी के ऊपर आ जाते हैं और मम्मी से कहते हैं कि “सोच लो वर्षा मेरी रांड बनना पड़ेगा तुम्हें।”
मम्मी को इस बात का अंदाजा नहीं था पर वे अब सिर्फ झड़ना चाहती हैं और अपनी आँखें झुका लेती हैं।
अंकल मम्मी के साइड में लेट जाते हैं और मम्मी से कहते हैं कि “मेरा लंड तुम्हारा है पर इसे खुश करना अब तुम्हारे हाथ में है। अगर चुदना है तो ये नाराजगी का नाटक करना बंद करो और अपनी प्यास बुझा लो।”
अंकल को लेटा हुआ देख मम्मी के पास कोई चारा नहीं बचता। वे अंकल से कहती हैं “मैं आपसे इसलिए नाराज थी आप मुझे प्यासी छोड़कर चले गए थे।”
अंकल : “अर्जेंट काम था।”
मम्मी : “सॉरी क्या मुझे इतना भी हक नहीं है मैं आपसे नाराज न हो सकूँ?”
अंकल : “है लेकिन मैं तुझे बहुत देर से मना रहा था पर तू...”
मम्मी : “सॉरी अब नाराज नहीं हूँ।” और इतना कहकर अंकल के ऊपर आ जाती हैं।
अंकल के लंड का उभार देखकर मम्मी मुस्कुराते हुए बोलती हैं “लगता है मेरे नाराज होने से ये भी काफी बड़ा हो गया है। लगता है आज तो मेरी फाड़ ही देगा।”
अंकल मम्मी को इशारा करते हैं और मम्मी अंकल का इशारा समझ जाती हैं। वे अंकल का अंडरवियर हटाना शुरू करती हैं।
मम्मी अंकल के नागराज को ध्यान से देखती रहती हैं क्योंकि अंकल का लंड अभी पूरा खड़ा भी नहीं है। मम्मी हैरान रह जाती हैं।
अंकल – “सोच क्या रही हो मेरी जान?”
ये कहकर वे मम्मी का मुँह अपने लंड की तरफ खींचते हैं।
मम्मी भी एक गुलाम की तरह अंकल के लंड पर अपनी टंग फेरने लगती हैं।
जल्द ही मम्मी लंड को अपने मुँह में डाल लेती हैं पर इतना लंबा और मोटा लंड पूरी तरह नहीं ले पातीं। ऐसा क्यों ये तो नहीं पता क्योंकि मम्मी पिछले 6 महीनों से ले रही थीं पर आज क्यों ये नहीं पता।
अंकल का लंड अब अपने विकराल रूप में आ जाता है। वे मम्मी को कई बार लंड पूरा लेने के लिए कहते हैं पर मम्मी हिम्मत नहीं हो पाती या मम्मी जानबूझकर नहीं ले रही थीं।
अंकल ये देख मम्मी के सामने खड़े हो जाते हैं। आज वे मम्मी को पूरी तरह मसल देना चाहते हैं। वे मम्मी के मुँह में लंड अंदर फोर्स करते हैं जिससे मम्मी छटपटाने लगती हैं।
पर अंकल एक नहीं सुनते।
मम्मी की साँसें उखड़ने लगती हैं।
मुझे दूर से देखने पे आज अंकल का लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा लग रहा था क्योंकि मम्मी रोज अंकल का लंड पूरा मुँह में ले लेती हैं लेकिन आज क्यों नहीं। इसका कारण मुझे बाद में पता चला। अंकल ने कोई जेल लगाया था जिससे अंकल का लंड ज्यादा मोटा और लंबा हो गया।
मम्मी – “योगेश जी मुझसे नहीं हो पाएगा। ये बहुत बड़ा है, मेरे गले में लग रहा है।”
अंकल मम्मी को हल्का सा रेस्ट देकर बिना कुछ कहे फिर से अपना लंड मम्मी के मुँह में पूरा डाल देते हैं और इस बार काफी देर तक डाले रखते हैं।
अंकल मम्मी के साथ ऐसा कई बार करते हैं। कुछ ही देर में मम्मी को लंड पूरा लेने की आदत सी हो जाती है।
अब मम्मी अंकल के हाथों के हल्के से इशारे से लंड खुद ही मुँह में लेने लगती हैं।
अंकल मम्मी का नाम पुकारते हैं तो मम्मी नजरें ऊपर उठ जाती हैं।
अंकल ऊपर हँसकर मम्मी को देखते हैं।
अंकल – “मुझे नहीं पता था तू इतनी जल्दी मान जाएगी। जब मैं रूम में आया तो ऐसा लग रहा था तू आज मुझसे नहीं मानेगी लेकिन तू तो मान गई और तेरी नाराजगी भी दूर हो गई। और मेरी रांड चूस मेरा लौड़ा मादरचोद रंडी चूस रांड चूस रांड मेरा लौड़ा।”
अंकल से बार-बार अपने लिए रांड सुनकर मम्मी को बुरा तो लगता है पर मम्मी को अपने बदन की आग को बुझाने के सिवा कुछ और नहीं दिखता।
अंकल भी मम्मी का मुँह चोदने की स्पीड बढ़ा देते हैं।
मम्मी एक तरफ लंड चूस रही हैं वहीं दूसरी ओर अपनी चुत सहला रही हैं।
अंकल – “बहुत आग लगी है ना वर्षा?”
मम्मी – “हाँ लगी है आग। यही सुनना चाहते हो ना?”
अंकल हँसते हैं और मम्मी को बेड पर लिटा देते हैं।
अंकल – “ये बात हुई ना मेरी रांड। अब देख तेरी आग ऐसी बुझाऊँगा कि तू पूरे दिन ढंग से नहीं चल पाएगी।”
मम्मी के हाँ करते ही अंकल मम्मी की लेग्स पर बैठ जाते हैं। मम्मी ने भी ये एक्सपेक्ट नहीं किया था।
अंकल अपने आप को मम्मी की टाँगों पर इस तरह एडजस्ट करते हैं कि वे जरा सा भी झुकें तो उनका लंड मम्मी की गाँड पर फील होगा।
अंकल का लंड पहले ही एकदम तना हुआ है, ऊपर से मम्मी की नरम गाँड का अहसास उसे और भी उकसा रहा है।
पर मम्मी की हालत हर पल और बिगड़ती जा रही है। अब मम्मी भी अंकल से नाराजगी खत्म होती जा रही थी।
अंकल अपने हाथों को मम्मी की कमर पे चलाने लगते हैं और बिना मम्मी की परमिशन के मम्मी के गाउन को ऊपर की ओर खिसकाने लगते हैं।
मम्मी थोड़ा रेसिस्ट करती हैं पर अंकल मम्मी को समझाते हैं कि अगर गाउन नहीं उतरेगा तो ऑयल से खराब हो जाएगा।
मम्मी अपने हाथों को ऊपर करके गाउन को उतारने देती हैं।
जब-जब अंकल मम्मी की कमर से कंधे की ओर अपने हाथों को ले जाते हैं वे अपने लंड को मम्मी की गाँड की दरार में और ज्यादा रगड़ने लगते हैं। मम्मी की चुत भी पूरी गीली हो चुकी है। वे भी अंकल का साथ देने लगती हैं और अपनी गाँड उठा-उठा कर अंकल के लंड की रगड़ को फील करने लगती हैं।
मम्मी की मोनिंग अब पहले से काफी तेज हो जाती है। अंकल पूरी तरह मम्मी के ऊपर झुक जाते हैं और कहते हैं –
अंकल – “क्या हुआ वर्षा? ज्यादा दर्द हो रहा है क्या? अगर कहो तो मसाज न करूँ।”
मम्मी : “नहीं दर्द नहीं हो रहा अब।”
अंकल (अपना लंड मम्मी की गाँड क्रैक में पूरी तरह गड़ा देते हैं) – “वो तुम सिसकियाँ ऐसे ले रही हो कि मुझे लगा शायद पेन हो रहा हो।”
अंकल इसके बाद मम्मी की ब्रा का हुक खोल देते हैं और मम्मी के क्यूट, ब्यूटीफुल, गोरे-गोरे बूब्स को फ्री कर देते हैं।
मम्मी भी सिर्फ “योगेश जी” कहकर चुप हो जाती हैं और अंकल के सख्त हाथों से अपनी मसाज के मजे लेती हैं।
अब अंकल अपने हाथों को मम्मी की गाँड पर फेरने लगते हैं। मम्मी के शरीर पर सिर्फ उनकी पैंटी ही बची है। वे नाराजगी के कारण अंकल से चुदना तो नहीं चाहतीं पर उनके जिस्म की आग इतनी भड़क चुकी है कि वे अंकल को मना भी नहीं कर पातीं।
मम्मी की मोन अब पूरे कमरे में गूँज रही है। वे चाहती हैं कि अब अंकल उन्हें चोद दें पर अंकल को मम्मी को तड़पाने में बहुत मजा आता है। अंकल का मानना था कि हर औरत में एक रांड छुपी होती है और वो तभी बाहर आती है जब उसे सेक्स की तड़प फील कराई जाए।
मम्मी अंकल से खुलकर कह नहीं पातीं कि उन्हें चुदना है पर अब मम्मी से भी रहा भी नहीं जाता और वे अपने हाथों को अपनी पैंटी पर ले आती हैं।
ये देखते ही अंकल अंदर ही अंदर खुश हो जाते हैं और मम्मी के हाथों को उनकी चुत से हटा देते हैं।
अंकल – “ये क्या कर रही हो वर्षा?”
मम्मी – “योगेश जी प्लीज मेरे हाथ छोड़ दो।”
अंकल नहीं सुनते और मम्मी की चुत पर पीछे से हाथ ले जाकर मम्मी को थोड़ा ऊपर उठाते हैं। मम्मी एक कुतिया की तरह पोज़ में आ जाती हैं। तभी अंकल अपने हाथों से मम्मी की चुत से खेलने लगते हैं।
मम्मी का शरीर काँपने लगता है। अंकल मम्मी की चुत पर एक किस कर देते हैं।
मम्मी – कराहती हुई आवाज में – “ये क्या कर रहे हो योगेश जी?”
अंकल – “अब ये मत कहना कि आपने कभी मेरी चुत को चाटा नहीं।”
मम्मी चुप रहीं और अंकल ने मम्मी की पैंटी को नीचे खिसका दिया।
अब मम्मी पूरी नंगी पड़ी हैं और अंकल मम्मी की गाँड से कंधे की तरफ अपने हाथ को लाते हैं।
मम्मी बस आहें भरती रह जाती हैं। अंकल मम्मी के शरीर पर झुक जाते हैं और मम्मी के कानों में फिर से पूछते हैं –
“बताओ वर्षा क्या आज मुझसे अपनी गुलाबी सुंदर चुत को चटवाओगी या नहीं?”
अंकल के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मम्मी को अजीब लगता है पर वे कुछ नहीं कहतीं।
अंकल मम्मी को कहते हैं कि “वर्षा तुम्हारी खामोशी में ही तुम्हारा जवाब छुपा है।” और मम्मी को किस करते हुए ही नीचे आते हैं।
अंकल मम्मी की कमर पर किस करते हुए मम्मी की गाँड तक आ जाते हैं। अंकल अपनी टंग मम्मी के शरीर पर एक साँप की तरह फेर रहे थे।
अंकल अपना एक हाथ मम्मी की चुत पर रखकर मम्मी को थोड़ा ऊपर उठाते हैं जिससे मम्मी की गाँड थोड़ा ऊपर उठ जाती है। अंकल झट से अपनी टी-शर्ट उतार फेंकते हैं और मम्मी को कुतिया की तरह पोजीशन में देखकर अपनी टंग मम्मी की चुत पर फेरने लगते हैं।
हालाँकि मम्मी ने ऐसा अहसास पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार महसूस किया है। मम्मी एक जल बिन मछली की तरह तड़प उठती हैं। मम्मी की मोन करने की आवाज पूरे कमरे में गूँजने लगती है।
मम्मी की आवाजें सुनकर अंकल भी समझ जाते हैं कि वे किसी भी समय झड़ जाएँगी।
अंकल बार-बार अपनी जीभ मम्मी की चुत से हटा लेते हैं जिससे मम्मी की तड़प और बढ़ जाती है। मम्मी रह-रह कर अंकल का नाम लेती हैं – “योगेश जी... योगेश जी...”
अंकल : “क्या हुआ वर्षा?”
मम्मी – “कुछ नहीं बट...”
अंकल – “लेकिन क्या वर्षा?”
अंकल सब जानते हैं कि मम्मी क्या चाहती हैं पर मम्मी नखरे कर रही थीं क्योंकि औरतों की आदत होती है मर्दी को बाखरे दिखाने की। भले ही चुत में आग लगी हो लेकिन नखरे नहीं छोड़तीं साली रंडियाँ। लेकिन अंकल ने भी सोच लिया था वे मम्मी के मुँह से ही सब कहलवाना है।
मम्मी – “योगेश जी प्लीज।” (और इतना कहकर वे फिर चुप हो जाती हैं।)
अंकल मम्मी को अचानक कमर के बल लिटा देते हैं और मम्मी की आँखों में आँखें डालकर कहते हैं –
अंकल – “वर्षा चुदाई का असली मजा सती-सावित्री नहीं रांड बनकर चुदने में है।”
इतना कहकर अंकल फिर से अपना मुँह मम्मी की चुत पर लगा देते हैं।
मम्मी भी अब रह नहीं पातीं और अपनी चुत को अंकल के मुँह पर रगड़ने लगती हैं।
अंकल – “कैसा लग रहा है मेरी जान?”
मम्मी – “आआह, बस रुकना मत कुछ देर प्लीज।”
अंकल – “सेक्स में सिर्फ मजे लेने ही नहीं होते, देने भी पड़ते हैं।”
मम्मी – “मैं सब करूँगी बस रुको मत अब।”
अंकल – “सब करोगी?”
मम्मी – “हाँ प्लीज रुकना मत।”
अंकल – अपना मुँह हटाकर मम्मी के ऊपर आ जाते हैं और मम्मी से कहते हैं कि “सोच लो वर्षा मेरी रांड बनना पड़ेगा तुम्हें।”
मम्मी को इस बात का अंदाजा नहीं था पर वे अब सिर्फ झड़ना चाहती हैं और अपनी आँखें झुका लेती हैं।
अंकल मम्मी के साइड में लेट जाते हैं और मम्मी से कहते हैं कि “मेरा लंड तुम्हारा है पर इसे खुश करना अब तुम्हारे हाथ में है। अगर चुदना है तो ये नाराजगी का नाटक करना बंद करो और अपनी प्यास बुझा लो।”
अंकल को लेटा हुआ देख मम्मी के पास कोई चारा नहीं बचता। वे अंकल से कहती हैं “मैं आपसे इसलिए नाराज थी आप मुझे प्यासी छोड़कर चले गए थे।”
अंकल : “अर्जेंट काम था।”
मम्मी : “सॉरी क्या मुझे इतना भी हक नहीं है मैं आपसे नाराज न हो सकूँ?”
अंकल : “है लेकिन मैं तुझे बहुत देर से मना रहा था पर तू...”
मम्मी : “सॉरी अब नाराज नहीं हूँ।” और इतना कहकर अंकल के ऊपर आ जाती हैं।
अंकल के लंड का उभार देखकर मम्मी मुस्कुराते हुए बोलती हैं “लगता है मेरे नाराज होने से ये भी काफी बड़ा हो गया है। लगता है आज तो मेरी फाड़ ही देगा।”
अंकल मम्मी को इशारा करते हैं और मम्मी अंकल का इशारा समझ जाती हैं। वे अंकल का अंडरवियर हटाना शुरू करती हैं।
मम्मी अंकल के नागराज को ध्यान से देखती रहती हैं क्योंकि अंकल का लंड अभी पूरा खड़ा भी नहीं है। मम्मी हैरान रह जाती हैं।
अंकल – “सोच क्या रही हो मेरी जान?”
ये कहकर वे मम्मी का मुँह अपने लंड की तरफ खींचते हैं।
मम्मी भी एक गुलाम की तरह अंकल के लंड पर अपनी टंग फेरने लगती हैं।
जल्द ही मम्मी लंड को अपने मुँह में डाल लेती हैं पर इतना लंबा और मोटा लंड पूरी तरह नहीं ले पातीं। ऐसा क्यों ये तो नहीं पता क्योंकि मम्मी पिछले 6 महीनों से ले रही थीं पर आज क्यों ये नहीं पता।
अंकल का लंड अब अपने विकराल रूप में आ जाता है। वे मम्मी को कई बार लंड पूरा लेने के लिए कहते हैं पर मम्मी हिम्मत नहीं हो पाती या मम्मी जानबूझकर नहीं ले रही थीं।
अंकल ये देख मम्मी के सामने खड़े हो जाते हैं। आज वे मम्मी को पूरी तरह मसल देना चाहते हैं। वे मम्मी के मुँह में लंड अंदर फोर्स करते हैं जिससे मम्मी छटपटाने लगती हैं।
पर अंकल एक नहीं सुनते।
मम्मी की साँसें उखड़ने लगती हैं।
मुझे दूर से देखने पे आज अंकल का लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा लग रहा था क्योंकि मम्मी रोज अंकल का लंड पूरा मुँह में ले लेती हैं लेकिन आज क्यों नहीं। इसका कारण मुझे बाद में पता चला। अंकल ने कोई जेल लगाया था जिससे अंकल का लंड ज्यादा मोटा और लंबा हो गया।
मम्मी – “योगेश जी मुझसे नहीं हो पाएगा। ये बहुत बड़ा है, मेरे गले में लग रहा है।”
अंकल मम्मी को हल्का सा रेस्ट देकर बिना कुछ कहे फिर से अपना लंड मम्मी के मुँह में पूरा डाल देते हैं और इस बार काफी देर तक डाले रखते हैं।
अंकल मम्मी के साथ ऐसा कई बार करते हैं। कुछ ही देर में मम्मी को लंड पूरा लेने की आदत सी हो जाती है।
अब मम्मी अंकल के हाथों के हल्के से इशारे से लंड खुद ही मुँह में लेने लगती हैं।
अंकल मम्मी का नाम पुकारते हैं तो मम्मी नजरें ऊपर उठ जाती हैं।
अंकल ऊपर हँसकर मम्मी को देखते हैं।
अंकल – “मुझे नहीं पता था तू इतनी जल्दी मान जाएगी। जब मैं रूम में आया तो ऐसा लग रहा था तू आज मुझसे नहीं मानेगी लेकिन तू तो मान गई और तेरी नाराजगी भी दूर हो गई। और मेरी रांड चूस मेरा लौड़ा मादरचोद रंडी चूस रांड चूस रांड मेरा लौड़ा।”
अंकल से बार-बार अपने लिए रांड सुनकर मम्मी को बुरा तो लगता है पर मम्मी को अपने बदन की आग को बुझाने के सिवा कुछ और नहीं दिखता।
अंकल भी मम्मी का मुँह चोदने की स्पीड बढ़ा देते हैं।
मम्मी एक तरफ लंड चूस रही हैं वहीं दूसरी ओर अपनी चुत सहला रही हैं।
अंकल – “बहुत आग लगी है ना वर्षा?”
मम्मी – “हाँ लगी है आग। यही सुनना चाहते हो ना?”
अंकल हँसते हैं और मम्मी को बेड पर लिटा देते हैं।
अंकल – “ये बात हुई ना मेरी रांड। अब देख तेरी आग ऐसी बुझाऊँगा कि तू पूरे दिन ढंग से नहीं चल पाएगी।”



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