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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#24
**अपडेट 22**

अगले दिन पापा सुबह ऑफिस निकल गए और मैं घर पे ही था और मम्मी रूम से नहाकर बाहर आईं और मेरे साथ बैठ गईं।

मम्मी : “बेटा क्या तू आज कॉलेज नहीं जाएगा?”

मैं : “मम्मी आज नहीं, कल जाऊँगा।”

मम्मी : “ओके।”

मैं : “मम्मी आज आप कंप्यूटर सीखने अंकल के घर चली जाना।”

मम्मी : “नहीं।”

और इतने में ही अंकल हमारे घर आ गए और उन्होंने घंटी बजाई तो मैं जाकर पीछे वाला गेट खोला और अंकल अंदर आकर सोफे पे बैठ गए।

और अंकल अंदर आए ही मम्मी को आँख मार देते हैं। मम्मी सिर्फ मुस्कुरा देती हैं।
अंकल मम्मी को ही देख रहे थे।
अंकल एकटक मम्मी को ही घूरते जा रहे हैं। मम्मी के बूब्स बहुत बड़े हैं। अंकल कपड़ों के ऊपर से ही मम्मी के बूब्स को घूरते जा रहे थे। अंकल का लंड उनके पैंट में ही मचलने लगा था। इस बात का पता मम्मी और मुझे दोनों को लग चुका था।

मम्मी उठकर जाने लगती हैं तो अंकल –

अंकल : “बैठो वर्षा कहाँ जा रही हो?”

मम्मी : “जी मैं आपके लिए चाय बनाकर लाती हूँ।”

अंकल : “अभी तो आया हूँ। आराम से बना लाना। कुछ देर बैठिए ना।”

मैं : “अंकल आप मम्मी को आज भी कंप्यूटर सिखाना।”

अंकल : “हाँ बेटा मैं उसी काम के लिए आया हूँ। मैं तो खुद चाहता हूँ तेरी मम्मी को रूम में ले जाकर कंप्यूटर सिखाऊँ।” और अंकल हँसने लगते हैं।

अंकल के रूम में ले जाने वाली बात पे और हँसने पे मम्मी थोड़ा झेंप जाती हैं पर वे पहले भी पिछले 6 महीनों में खूब चुदीं और इस घर में भी लेकिन आज अंकल ने उनके सामने मुझसे रूम में ले जाने वाली बात बोली तो उनको मेरे सामने शर्म आ गई क्योंकि मैं उनका बेटा हूँ और माँ-बेटे के बीच शर्म का पर्दा होता है। हालाँकि मम्मी को पता है मैं उनकी चुदाई के बारे में जानता हूँ फिर भी शर्म तो औरत का गहना है। फिर मैं मम्मी से कहता हूँ “मम्मी बैठ जाइए बाद में बना लाना।” और मम्मी बैठ जाती हैं।

अंकल बोले “बेटा उनको चाय बना लाने दे।” फिर मम्मी मुस्कुराते हुए किचन में जाती हैं और मैं-अंकल चुदाई की बातें करते हैं और थोड़ी देर में मम्मी चाय लाती हैं और हम तीनों चाय पीने लगते हैं।

अंकल से वेट नहीं किया जाता। वे जल्दी से मम्मी को रूम में ले जाना चाहते हैं। मम्मी भी अंकल के साथ टाइम स्पेंड करना चाहती हैं पर मेरे सामने कुछ कह नहीं पातीं।

मैं – “अंकल कुछ लोगे और?”

अंकल – “नहीं बस अब मैं अंदर जाता हूँ तेरी मम्मी को कंप्यूटर सिखाने।”

मैं – “हाँ हाँ क्यों नहीं चले जाओ।” और मम्मी और अंकल की तरफ देखकर मुस्कुरा देता हूँ।

मम्मी : “नहीं नहीं मुझे नहीं सीखना कंप्यूटर। आप जाइए योगेश जी।”

मैं : “मम्मी जाइए और कंप्यूटर सिखाओ।”

मम्मी : “मैं नहीं जा रही।”

मैं : “अंकल मम्मी ऐसे नहीं जाएँगी। आप मम्मी का हाथ पकड़ के ले जाइए।”

मम्मी : “मैंने कहा ना मुझे नहीं सीखना।”

मैं : “मम्मी जब मैं छोटा था तो आप मेरा हाथ पकड़ के जबरदस्ती कॉलेज ले जाती थीं। आज अंकल भी वैसा ही करेंगे।”

मम्मी : “नहीं नहीं बेटा तू तो समझ।”

मैं : “अंकल आप मम्मी का हाथ पकड़ के ले जाइए और कंप्यूटर सिखाइए। मम्मी छोटे बच्चों की तरह जिद कर रही हैं।” फिर

अंकल मम्मी का हाथ पकड़ते हैं और मम्मी सोफे पे से उठ जाती हैं और अंकल मम्मी का हाथ पकड़ के अंदर रूम में ले जाते हैं। रूम में जाते ही अंदर से अंकल रूम को लॉक कर देते हैं और मम्मी को बाहों में जकड़ लेते हैं।
मैं खिड़की से देख रहा था।

अंकल का लंड सीधा मम्मी की चुत के संपर्क में आता है।
अंकल – “तुम नहीं जानती वर्षा पूरी रात तुम्हें कितना मिस किया मैंने।”

मम्मी – “वो तो मुझे पता चल रहा है।” (हँसते हुए) “तभी तो आप मेरे बेटे के सामने मेरा हाथ पकड़ के लाए। थोड़ी तो शर्म करते। वो बेटा है मेरा। आप मुझे बेशरम बना दोगे। वो क्या सोचेगा मम्मी कितनी बेशरम है। और इसे देखो पैंट में कैसे मचल रहा है।”

अंकल समझ जाते हैं कि वे ऐसा उनके खड़े लंड की वजह से कह रही हैं। अंकल अपने होठों को मम्मी के होठों से सटा देते हैं।

और मम्मी के होठों पर एक जबरदस्त चुम्मा देते हैं।
मम्मी भी झट से अपने होठ खोल देती हैं। उनकी चुत पहले से ही गीली पड़ी है।
अंकल अपना पैंट से लंड निकालकर अपना लंड झट से मम्मी के हाथ में पकड़ा देते हैं और मम्मी के होठों को चूसना चालू रखते हैं।
अंकल मम्मी को थोड़ा नीचे बैठाकर कार्पेट पर लेट जाते हैं। मम्मी खुद ही अंकल की टी-शर्ट उतारकर उनकी आँखों में देखती हैं।

और मम्मी अंकल के होठों पर अपने होठ रखकर अंकल के मुँह में अपनी जीभ डाल देती हैं।
अभी तक दोनों के बदन पे कपड़े थे लेकिन मुझे दोस्त का कॉल आया है और मैं दोस्त से बात करने दूर आ जाता हूँ और कोई 30 मिनट के बाद वापस जाता हूँ खिड़की पे तो मम्मी पूरी नंगी हो चुकी थीं और अंकल भी नंगे हो चुके थे। दोनों के बदन पे एक भी कपड़ा नहीं था। अंकल मम्मी की चुत चाट रहे थे और मम्मी अंकल का लंड चूस रही थीं 69 पोजीशन में। फिर अंकल-मम्मी सीधे होकर चुमा-चाटी करते हैं फिर

दोनों एक-दूसरे के बदन से खेल रहे हैं और मैं ये सब खिड़की से देख रहा हूँ।
मम्मी बार-बार अंकल का लंड पकड़कर मसल रही हैं। वे अंकल के कान में लंड चुत में डालने के लिए कहती हैं। अंकल ने भी अब ज्यादा वेट नहीं कर पाते और अपना लंड मम्मी की चुत पर रख देते हैं।

अंकल मम्मी की चुत पर अपना लंड रखकर उसे टीज करने लगते हैं। मम्मी की तड़प और बढ़ने लगती है। इसमें अंकल को और मजा आने लगता है। वहीं बाहर मैं भी सब कुछ अपनी आँखों से देख रहा था।

अंकल मम्मी को डॉगी पोज़ में लाकर मम्मी की चुत में आखिर अपना लंड डाल ही देते हैं जिससे मम्मी को थोड़ी राहत सी फील होती है। अब अंकल मम्मी की चुत में हल्के-हल्के धक्के लगाना शुरू करते हैं।

मम्मी भी अंकल का साथ देने लगती हैं। लगातार 15 मिनट धक्के लगाने के बाद अचानक अंकल के मोबाइल पे किसी का कॉल आया। अंकल कॉल रिसीव करते हैं और बोलते हैं “मैं बस अभी आया।” और कॉल कट कर देते हैं।

मम्मी – “क्या हुआ? किसकी कॉल थी?”

अंकल – “यार कुछ अर्जेंट काम है मुझे जाना होगा बट हाफ आवर में आ जाऊँगा।”

मम्मी – “यार कुछ टाइम और रुक जाओ।” (मम्मी इस समय झड़ना चाहती थीं, वे नहीं चाहती थीं कि अंकल अभी कहीं भी जाएँ।)

अंकल – “यार समझ बस गया और आया। तू थोड़ा वेट कर।”

मम्मी मायूस मन से वेट करने के लिए राजी हो जाती हैं। साथ ही अंकल भी कुछ खुश नहीं लगते।
फिर अंकल कपड़े पहनते हैं और मम्मी अंकल को देखती रहती हैं।
फिर अंकल बाहर आते हैं। मुझे बोलते हैं “बेटा अभी आधे घंटे में आया। अर्जेंट वर्क है और तेरी मम्मी रूम में नंगी है। अभी अंदर मत जाना।” और अंकल चले गए।

अंकल के जाने के बाद मैं खिड़की से देखता हूँ मम्मी कपड़े पहनने लगती हैं। शायद उन्हें लगा होगा अंकल के जाने के बाद मैं रूम में न चला जाऊँ और मम्मी उन्हीं कपड़ों को पहनने लगीं जिनको पहनकर मम्मी अंकल के साथ रूम में गई थीं। और कपड़े पहनने के बाद फिर मैं डोर बजाता हूँ तो मम्मी थोड़ा असहज महसूस करती हैं और मम्मी बोलती हैं “बेटा आजा अंदर।” और मैं अंदर जाता हूँ।

मम्मी की हालत देखकर कोई भी कह सकता है अंदर क्या चल रहा था पर फिर भी मम्मी ऐसा शो करती हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
और बोलती हैं “बेटा तुझे मेरे रूम में आने के लिए कब से डोर खटखटाने की जरूरत पड़ने लगी? मैं तेरी माँ हूँ और एक बेटा माँ के कमरे में भी कभी भी किसी भी समय जा सकता है। माँ-बेटे के बीच परमिशन की जरूरत नहीं होती है।
और तूने परमिशन क्यों माँगी? कहीं तुझे ऐसा तो नहीं लग रहा कि मैं योगेश जी के साथ कुछ गलत कर रही थी?”

मैं : “नहीं नहीं मम्मी ऐसा नहीं है। मैंने तो वैसे ही गेट खटखटा दिया था। सॉरी मम्मी।”

मम्मी : “इट्स ओके बेटा लेकिन दोबारा परमिशन लेने की जरूरत नहीं है और जब दिल करे मेरे रूम में आ जाना।”

मैं : “ओके मम्मी और अंकल कहाँ गए?”

मम्मी : “वे किसी अर्जेंट काम से गए हैं।” और फिर मम्मी ने मेरे सामने ही अपने कपड़े वापस उतारे।
(मम्मी अक्सर मेरे सामने ही कपड़े चेंज कर लेती हैं। बचपन से ही कभी भी कपड़े चेंज करते समय मम्मी ने मुझे रूम से बाहर नहीं भेजा। जब वे नहाकर आती हैं और मैं रूम में रहता हूँ तो वे केवल पेटीकोट में ही आ जातीं ऊपर से नंगी बिना ब्रा-ब्लाउज के। वे मुझे अपने दूध हमेशा दिखाती हैं और जब मैं बाहर जाने लगता हूँ तो कहती हैं “बेटा मैं माँ हूँ तेरी। मैंने तुझे अपने इन दोनों बूब्स को तुझे पिलाया। पहले तू इन्हें देखता था अब तू इन्हें देखकर बाहर क्यों जाता है।” इसलिए मम्मी कभी-कभी तो मेरे सामने पैंटी में भी रह लेती हैं। वे मुझे आज भी बच्चा ही मानती हैं और कहती हैं “जब तेरी शादी के बाद बच्चे हो जाएँगे तब भी तू मेरा बच्चा ही रहेगा।” और पैंटी में ही मेरे सामने बाथरूम से बाहर आती हैं या पेटीकोट में।)

फिर मम्मी ने मेरे सामने ही कपड़े उतारे।

पहले साड़ी फिर ब्लाउज फिर पेटीकोट फिर ब्रा। अब मम्मी केवल पैंटी में थीं। फिर मम्मी ने कहा “बेटा मेरा गाउन निकालना अलमारी से।” मैं मम्मी की अलमारी का गेट खोलकर मम्मी के कई गाउन देखे। उनमें से एक गाउन उठाया और मम्मी को लाकर दिया।

मुझे नहीं पता था कि ये गाउन छोटा है। जो
मैंने जब मम्मी को गाउन दिया तो मम्मी हँसने लगीं।

मैं : “क्या हुआ मम्मी?”

मम्मी : “बेटा ये गाउन तो छोटा है।”

मैं : “सॉरी मम्मी पता नहीं था। मैं दूसरा लाता हूँ।”

मम्मी : “रहने दे आज उसे ही पहन लेती हूँ। आखिर मेरे बेटे ने दिया है पहनने को।”

मैं : “रहने दो मम्मी दूसरा पहन लो।”

मम्मी : “नहीं इसी को पहनूँगी। आखिर तूने सिलेक्ट किया है।”

फिर मैंने कहा “मम्मी आप ब्रा नहीं पहनोगी?” तो मम्मी ने कहा “नहीं बेटा तू कहता है तो पहन लेती हूँ।” फिर मम्मी ने ब्रा पहन ली। अब मम्मी ब्रा-पैंटी में थीं। फिर मम्मी ने गाउन को पहना जो कि घुटनों के ऊपर ही रह गया।
और मम्मी के घुटनों पे मैंने ध्यान दिया तो लाल हो रहे थे। शायद मम्मी फर्श पे घोड़ी बनी थीं इसलिए और वे स्पष्ट दिख रहे थे क्योंकि गाउन तो घुटनों से ऊपर था।

फिर मैं-मम्मी रूम में ही बेड पे बैठ जाते हैं और बातें करते हैं कि तभी अंकल वापस आ जाते हैं। अंकल को देख मम्मी के चेहरे पे गुस्सा आ जाता है जो साफ दिखाई देता है क्योंकि अंकल मम्मी को प्यासी छोड़ गए थे। और अंकल आकर बेड पे बैठ जाते हैं और मुझे बाहर जाने का इशारा करते हैं।
मैं बाहर जाने लगता हूँ।

मम्मी : “बेटा बाहर क्यों जा रहा है?”

मैं : “मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ। मैं बाहर हॉल में टीवी देखता हूँ।”

मम्मी : “नहीं यहीं बैठ।”

मैं कुछ नहीं बोलता और मम्मी के आदेश का पालन भी नहीं करता हूँ और मम्मी को जवाब दिए बिना बाहर हॉल में आ जाता हूँ और सोफे पे बैठने की बजाय खिड़की पे जाता हूँ। अब रूम में सिर्फ मम्मी-अंकल थे।

अंकल भी समझ रहे थे मम्मी गुस्से में हैं। मम्मी चुप थीं।
मम्मी के गुस्से को देखते हुए अंकल कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे। अंकल की नजर मम्मी के घुटनों पर पड़ती है जो कि गाउन से बाहर थे और लाल थे। अंकल को याद आता है वे मम्मी को घोड़ी बनाकर प्यासी छोड़ गए थे। फिर अंकल मम्मी के थोड़ा पास जाकर बैठ जाते हैं लेकिन मम्मी गुस्से में थीं और चुप थीं।

अंकल : “क्या हुआ वर्षा आप गुस्से में लग रही हो और थकी हुई भी।”

मम्मी : “नहीं मुझे नींद आ रही है।” दरअसल मम्मी प्यासी रहने के कारण गुस्से में थीं। वे अंकल को यह जताना चाह रही थीं मेरी चुत चाहिए तो मुझे मनाओ लेकिन अंकल को देख मम्मी की प्यास फिर से बढ़ जाती है।

अंकल : “तो फिर मैं चलता हूँ आप सो जाओ।”

मम्मी : “नहीं नहीं बैठो।”

अंकल : “वर्षा तुम्हारे घुटने तो एकदम लाल हो गए हैं। लगता है ज्यादा रगड़ लग गई।”

मम्मी : आँख दिखाकर “हाँ।”

अंकल : “मैं मालिश कर दूँ?”

मम्मी : “नहीं रहने दो। ये बताओ आप जिस काम से गए थे वो हो गया क्या?”

अंकल : “हाँ हो गया। अब मालिश कर दूँ?”

मम्मी : “नहीं रहने दो। कोई जरूरत नहीं है।”

अंकल : “क्यों नाराज हो?”

मम्मी : “पता नहीं।”

अंकल : “तो मेरी जान नाराज है और पता नहीं।”

मम्मी : कोई जवाब नहीं देतीं।

अंकल : “कर दूँ मालिश? सही हो जाएगी तेरे घुटने।”

मम्मी : “परेशान मत होइए। अपने आप ठीक हो जाएगा।”

अंकल : “अरे परेशानी की क्या बात है। तू मेरी जान है। मेरी मालिश करना ही मेरा काम है।” और अंकल तेल की शीशी उठाने के लिए खड़े होते हैं तो अंकल का लंड मम्मी के फेस के एकदम सामने आ जाता है। शायद अंकल जानबूझकर लाए थे क्योंकि वे जानते हैं मम्मी को लंड पसंद है। शायद मम्मी को मनाने के लिए। मम्मी भी समझ जाती हैं अंकल ने मम्मी को मनाने के लिए किए हैं। हालाँकि अंकल ने पैंट पहना था लेकिन लंड का पता मम्मी को चल ही गया लेकिन मम्मी कुछ नहीं कहतीं। अंकल भी जानबूझकर
मम्मी के करीब हो रहे थे ताकि उनका पैंट के अंदर से लंड मम्मी के मुँह के पास जाए और मम्मी मान जाएँ। मम्मी को लंड की खुशबू आती है। फिर अंकल तेल की बोतल लेते हैं और हाथ में तेल लेकर मम्मी के पैरों के पास बैठ जाते हैं।

मम्मी की गोरी मखमली लेग्स देखकर अंकल का लंड और कड़क हो जाता है।
अंकल अपने हाथों को मम्मी के घुटनों पर रखकर हल्का सा मसलते हैं। अंकल के हाथ लगते ही मम्मी के शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ जाती है। मम्मी की प्यास और ज्यादा भड़कने लगती है।
मम्मी की आँखें बंद होने लगती हैं...

अंकल मम्मी की प्यास को बढ़ता देख मन ही मन खुश हो रहे हैं। वे जानते हैं कि ये लंड के बिना नहीं रह सकतीं इसलिए ये जल्दी मान जाएँगी क्योंकि अभी मम्मी की चुत प्यासी है और वे थोड़ी देर पहले मम्मी को तड़पता छोड़ गए थे इसलिए मम्मी खुद को ज्यादा देर नहीं संभाल पाएंगी और खुद अपने जिस्म को अपने आप ही अंकल के हवाले कर देंगी।

अंकल – “क्या हुआ वर्षा? ज्यादा पेन हो रहा है क्या?”

मम्मी – “नहीं अब थोड़ा बेटर फील कर रही हूँ।”

अंकल – “फिर तुम आँखें बंद क्यों करके लेट गईं? ऐसा लग रहा है जैसे काफी पेन में हो।”

मम्मी – “वो बस थोड़ा थकान फील हो रही है इसलिए।” (वे अपनी प्यास छुपाने की कोशिश करती हैं।)

अंकल – “तुम परेशान मत हो। मैं तुम्हारी सारी थकान दूर कर दूँगा। ऐसा कहते हैं मैं मसाज करने में बहुत अच्छा हूँ। मैं जानता हूँ तुम मुझसे नाराज हो। मैं तुम्हें प्यासी छोड़ गया था।”

मम्मी : अपनी आँखें अंकल को दिखाने लगीं लेकिन कुछ बोलीं नहीं।

अंकल : “वर्षा मैं जानता हूँ। प्लीज मान जाओ। अर्जेंट वर्क था।” और अंकल अपने हाथों को थोड़ा मम्मी की घुटनों से ऊपर बढ़ा देते हैं।

अंकल – “वर्षा तुम्हारे पैर तो बहुत ही मुलायम हैं। तुम कुछ स्पेशल लगाती हो क्या अपनी बॉडी पर?”

मम्मी – “नहीं ऐसा तो कुछ नहीं लगाती।” (मम्मी की आवाज काफी धीमी और लड़खड़ाती हुई आती है।)

अंकल – (अपने हाथों को थोड़ा और आगे बढ़ाते हैं) “वर्षा एक बात कहूँ तुमसे।”

मम्मी – “हम्म्म।”

अंकल – “मैंने ऐसी मुलायम और सेक्सी लेग्स तुम्हारे अलावा किसी की नहीं देखीं।”

(अंकल के सख्त हाथ मम्मी को मदहोश करने लगते हैं। मम्मी की साँसें इतनी तेज हो जाती हैं कि अंकल भी सुन सकते हैं उसे। अंकल मम्मी की गाउन मम्मी के पेट पर कर देते हैं।

अब अंकल के हाथ मम्मी की जाँघों से खेलने लगते हैं। उनकी उँगलियाँ बार-बार मम्मी की पैंटी की लाइन के आस-पास टच होने लगती हैं। मम्मी भी ये सब जानती हैं पर कुछ बोल नहीं पातीं।)

मम्मी का शरीर अकड़ने लगता है। रह-रह कर वे मोन करने लगती हैं।

तभी अंकल मम्मी को पलटने की कोशिश करते हैं। मम्मी भी अंकल के हाथ के इशारे पर ही उल्टा घूम जाती हैं।

अंकल – “वर्षा अभी तो मुझे यहाँ काफी टाइम रुकना है ना।”

मम्मी – “हाँ कुछ टाइम तो है।”

अंकल – “तुम कहो तो मैं तुम्हारी बॉडी पर मसाज कर दूँ। तुम्हारी सारी थकान दूर हो जाएगी।”

(मम्मी कुछ कह नहीं पातीं। अंकल अपने हाथ मम्मी की जाँघ में एकदम ऊपर तक ले जाते हैं। मम्मी का शरीर काँप उठता है।)

अंकल – मम्मी की जाँघों को हल्का मसल कर फिर मम्मी से पूछते हैं – “बोलो वर्षा कहो तो थोड़ा मसाज कर दूँ तुम्हें?”

मम्मी कुछ ज्यादा नहीं कह पातीं सिवाय हल्की सी हामी भर देती हैं।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 02:08 PM



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