Yesterday, 01:59 PM
**अपडेट 21**
दोस्तो आज के अपडेट में चुदाई नहीं है, सिर्फ नॉर्मल ही आना-जाना है।
मैं जानता हूँ आपको आज का अपडेट पसंद नहीं आएगा। सॉरी दोस्तो माफ करना।
फिर शाम को दादी भी आ गई थीं और अगले दिन पापा ऑफिस चले गए लेकिन दादी के डर की वजह से मम्मी अंकल से नहीं मिल रही थीं। इसी तरह 5 दिन निकल गए। 5 दिन मैंने सोचा अंकल-मम्मी को मिलाना जरूरी है इसलिए मैं दादी को अपने दोस्त के घर ले गया पापा के ऑफिस जाने के बाद और मम्मी को बोला “मम्मी आप अंकल को बुला लेना।” लेकिन मम्मी ने मना कर दिया।
जब मैं दोस्त के घर दादी को छोड़कर 9 am पर वापस आया तो अंकल-मम्मी अकेली थीं। मैंने मम्मी से कहा “मम्मी आप अंकल को बुलाओ कंप्यूटर सीखने के लिए।”
मम्मी : “नहीं मुझे अब नहीं सीखना कंप्यूटर-फुंप्यूटर।”
फिर मैंने सोचा ऐसे तो काम नहीं चलेगा। मैं ही अंकल को बोलता हूँ। फिर मैंने अंकल को बोल दिया।
और अपने रूम में आ गया। थोड़ी देर बाद अंकल का फोन आया “मैं आ रहा हूँ पीछे वाले गेट से।” और फिर थोड़ी देर बाद पीछे वाले गेट की घंटी बजी। मैं रूम से निकल ही रहा था कि मैंने देखा मम्मी गेट खोलने जा रही हैं और फिर मैं भी मम्मी के साथ आ गया और मम्मी ने गेट खोला।
मम्मी अंकल को देखकर –
मम्मी : “आप .............”
अंकल : “जी अंकुश ने बुलाया था।”
मम्मी ने मेरी तरफ देखा। मैंने कहा “हाँ मम्मी मैंने बुलाया अंकल।” और फिर ...............
मम्मी पलटीं और अपनी गाँड हिलाते हुए वापस जाने लगीं... मम्मी की गाँड इतनी सेक्सी हरकतें कर रही थी कि अंकल को अट्रैक्शन हो रहा था....
....... अंकल ने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ आँख मारकर मम्मी के पीछे मम्मी की गाँड को घूरते हुए हॉल में आ गए। मैं भी आ गया और सोफे पे बैठ गया और मम्मी किचन चली गईं।
फिर थोड़ी देर बाद अंकल बिना मुझसे कहे भी जा रहे थे किचन में और अंकल भी किचन में जाने लगे।
मम्मी किचन में काम कर रही थीं।
मैं भी सोचा मैं भी देखूँ।
......... तभी अंकल किचन के तरफ बढ़े ...... जब वे किचन के डोर पे पहुँचे तो अंकल ने और मैंने साथ में देखा मम्मी किचन में अपना काम कर रही हैं।
अंकल की नजर मम्मी की गाँड पर गई जो साड़ी में गजब लग रही थी.... मम्मी की गाँड मस्त गोल-मटोल और बाहर निकली हुई थी। अंकल के पैर वहीं जम गए और उनकी निगाहें मम्मी की गाँड से हट नहीं रही थीं..........
तभी मम्मी रैक के तरफ बढ़ीं... मम्मी की गाँड चलते वक्त मस्त हरकत कर रही थी ....... मम्मी रैक के ऊपर से कुछ निकालने के लिए कूदने लगीं........ तभी अंकल ने और मैंने ध्यान से देखा तो वो आटे का डिब्बा था.........
हमने देखा मम्मी के हाथ से आटे का डिब्बा गिरा जिससे सारा आटा मम्मी के ऊपर गिर गया था....
..... मम्मी साड़ी पर से आटा साफ करने लगीं......... ये सब मम्मी हल्की सी झुककर कर रही थीं.......... जिससे मम्मी की गाँड मस्त बाहर निकली हुई थी... मम्मी की साड़ी मम्मी की गाँड से पूरी चिपक गई थी... ....... जिससे मम्मी की गाँड के कटाव साफ दिख रहे थे..........
मम्मी की लाजवाब गाँड देखकर अंकल का मन डोल गया था।
मैंने भी मम्मी को आज तक अपनी मम्मी को इतनी गंदी नजर से नहीं देखा था। मुझे अपने आप पर ग्लानि आने लगी। मैं ये क्या पाप कर गया अपनी मम्मी पे गलत नजर। छि-छि मैं जाने लगा तो अंकल बोले “देख मैं क्या करता हूँ।” और मैंने देखा अंकल का लंड में हलचल हो रही थी जो पैंट के ऊपर से दिख रही थी।
.तभी मम्मी अपना पल्लू अपनी जिस्म से हटाते हुए हमारी तरफ मुड़ीं...... और अपने ब्लाउज और साड़ी से आटा साफ करने लगीं..
लेकिन हम दरवाजे के साइड हो गए इसलिए मम्मी हमें नहीं देख पाईं। अंकल और मैं मम्मी को ध्यान से देख रहे थे।
मम्मी के बूब्स ब्लाउज में कैद थे जो काफी बड़े-बड़े थे। मम्मी का पेट बहुत गोरा और सेक्सी था जो मस्त चमक रहा था........ और मम्मी की नाभि मस्त गहरी और बेहद सेक्सी थी। ......... मम्मी को इस हाल में देखकर अंकल का लंड खड़ा हो गया था। अंकल बोले “अंकुश देख क्या हाल हो रहा है मेरे लंड का। अब मैं किचन में जाऊँ।”
मैं : “हाँ जाइए अंकल, मम्मी को प्यार कीजिए।”
........
अंकल ने कहा “अब तू दरवाजे की साइड से देखना।” और अंकल किचन में गए और जाकर मम्मी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया जिससे अंकल का लंड सीधा मम्मी की गाँड की दरार में साड़ी के ऊपर से घुस गया। मम्मी की एक मधुर सी सिसकारी निकल गई......... और अंकल ने मम्मी को उठाते हुए घुमाया... .... जिससे अंकल का लंड ने मम्मी की गाँड अधिक फील किया... मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं..........
मम्मी : “आहा!.... क्या कर रहे हो। अंकुश आ जाएगा .....”
अंकल : “आने दो वर्षा। तुम्हारे मजे तुम्हारे लाडले के सामने ही लूट लूँगा..........”
अंकल अपना लंड मम्मी की गाँड पे मसल रहे थे ...... और साथ ही मम्मी के गले को चूम रहे थे ...... मम्मी आहें भर रही थीं.........
मम्मी : “प्लीज अभी आप जाओ और अंकुश को किसी काम से भेज देना फिर जमकर कर लेना पर अभी जाओ।”
अंकल : “नहीं मुझे अभी करना है।”
मम्मी : मम्मी ने अंकल को धक्के देकर बाहर निकालने लगीं। बोलीं “बाद में करना।” फिर अंकल बाहर आ गए मेरे पास।
फिर थोड़ी देर बाद मम्मी भी किचन से वापस हॉल में आईं तो अंकल की नजर मम्मी की गाँड पे गई। मम्मी की गाँड मस्त हरकत कर रही थी.... मम्मी की गाँड जिस तरह स्विंग कर रही थी अंकल की नजर नहीं हट रही थी......... जब तक मम्मी किचन में वापस गईं नहीं तब तक अंकल मम्मी की हिलती हुई गाँड को देखते रहे..........
कुछ देर तक मैं-अंकल बातें करते रहे। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी नाश्ता बनाकर किचन से लाईं।
अभी 10:30 am हुआ था।
फिर मम्मी ने डाइनिंग टेबल पे नाश्ता लगाया।
मैं और अंकल नाश्ता करने डाइनिंग टेबल पे बैठे थे। मम्मी नाश्ता परोस रही थीं तभी अंकल की नजर मम्मी के ब्लाउज में गई। मम्मी के बूब्स के क्लीवेज अंकल को साफ दिख रहे थे........ जो बहुत गोरे और मिल्की थे.. और मुझे भी दिख रहे थे लेकिन मेरे लिए वो मेरी माँ हैं .......
अंकल बहुत धीमी आवाज में मम्मी से बोले “वाह वर्षा क्या बूब्स हैं तेरे कितने बड़े और मिल्की हैं। अब उनका मिल्क पिला दे।”
मम्मी भी धीमी आवाज में “अंकुश को बाहर भेज दो।” फिर मम्मी मेरे से बोलीं .........
मम्मी : “बेटा तुम्हें और पोहा दूँ........”
मैं : “नहीं मम्मी बस हो गया.........”
मम्मी : “क्यों तुम्हारी तबियत तो ठीक है इतना कम नाश्ता खाया..........”
मैं : “अरे मम्मी मेरी तबियत ठीक है बस भूख कम लगी थी...”
फिर मैंने अपना नाश्ता खत्म किया तो मम्मी ने अंकल से कान में कुछ कहा जो मैंने नहीं सुना। फिर अंकल बोले “बेटा।”
अंकल : “बेटा पिछले 5 दिन से मैंने तेरी मम्मी को कंप्यूटर नहीं सिखाया। तू लगे तो आज सिखा दूँ।”
मैं : “जी अंकल सिखा दीजिए।”
मम्मी : “बेटा मुझे नहीं सीखना।”
मैं : “मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ और मुझे कुछ काम है तो मैं दोस्त के घर जा रहा हूँ। शाम को 4 बजे तक आऊँगा और आते समय खाना होटल से पैक करा लाऊँगा।”
मम्मी : “बेटा क्या जरूरत है मैं बना लूँगी।”
मैं : “है नहीं मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ। मैं खाना होटल से 4 बजे को लेकर आऊँगा। उससे पहले नहीं।”
मम्मी : “ठीक है।” फिर मैं अंकल और मम्मी के गले लगाकर बाय बोलकर घर से निकल गया। अभी 11 am हुए थे।
फिर शाम को 4 बजे मैं घर पहुँचा तो अंकल को फोन किया तो बोले “तेरे पास डुप्लीकेट की से गेट खोलकर आजा।” और मैं गेट खोलकर किचन में गया और खाना रखा ही था कि अंकल भी किचन में गए और मैंने मम्मी का पूछा तो बोले “नंगी थी तो साड़ी पहन रही है।”
मैं : “अंकल 5 घंटों में कितनी बार किया?”
अंकल : “3 बार चोदा वर्षा को। अभी भी नंगी थी। बोली आप चलो मैं साड़ी पहनकर आ रही हूँ और सुबह वाली साड़ी फट गई थी तो दूसरी साड़ी पहनकर आएगी। कुछ पूछना मत।”
फिर अंकल किचन से निकलकर गए और हॉल में बैठ गए। थोड़ी देर बाद मम्मी आ गईं किचन में। बोलीं “तू हॉल में जा मैं खाना लाती हूँ।” और
मैंने बोला “मम्मी पापा का फोन आया था। बताया था आज रात को वे 11 बजे तक आएंगे।”
मम्मी : “क्यों.............”
मैं : “शायद उन्हें कोई काम है.............”
मम्मी : “अच्छा.............”
फिर अंकल भी वापस किचन में आ गए।
मम्मी अपने काम में लगी हुई थीं और मैं देख रहा था अंकल वहीं खड़े होकर मम्मी की गाँड को घूर रहे थे .............. मम्मी की हर एक हरकत के साथ मम्मी की गाँड की मूवमेंट्स देखने लायक थीं....
..... मम्मी की गाँड मस्त सी हरकतें करते हुए हिल रही थी..... क्योंकि मम्मी खाने को प्लेट में लगा रही थीं या कहूँ जो पैकिंग में खाना आया था उसे खोल रही थीं।
क्योंकि खाना होटल से आया था।
....
मैं : देख रहा था मम्मी काम में और अंकल मम्मी को देखने में खोए हुए थे। फिर मैंने दोनों को देखकर बोला
मैं : “मम्मी पापा खाना खाकर आएंगे रात को 11 बजे।”
...............
मम्मी : “अच्छा तो फिर आज हम दोनों को ही साथ में खाना खाना है... रात को।”
मैं : “मम्मी लेकिन अभी तो हम तीनों को साथ में खाना खाना है आपको, मुझे, अंकल को।”
..........
अंकल : “हाँ वर्षा वैसे भी मुझे बहुत भूख लगी है जिसे आप ही शांत कर सकती हो.............”
मम्मी अंकल की बात पर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोलीं...............
मम्मी : “आप 2 मिनट बाहर बैठो योगेश जी मैं खाना लगाती हूँ..............”
फिर मैं-अंकल बाहर डाइनिंग टेबल पे जाकर बैठ गए और उसके बाद अंकल बोले “बेटा।”
अंकल : “बेटा तेरी मम्मी कितनी मस्त माल है। कोई ये नहीं कह सकता ये एक बेटे की माँ है और 33 की उम्र में भी 23 की कुँवारी लड़की लगती है। क्या मस्त गाँड है, क्या मस्त बूब्स हैं इसके। जब तेरी मम्मी चलती है तो क्या मस्त नजारा होता है। कैसे अपनी पतली कमर को हिला-हिलाकर चलती, अपनी मखमली गाँड को हिला-हिलाकर चलती है। बेटा तेरी मम्मी का चलने का तरीका और तेरी मम्मी की मुलायम गाँड की सेक्सी मूवमेंट तो किसी को भी पागल कर सकती है।
बेटा तेरी मम्मी साड़ी को नाभि से कितनी नीचे बाँधती है जिससे उसकी नाभि, गोरी चिकनी कमर और पेट का सुंदर नजारा नामर्द का भी लंड खड़ा कर देगा लेकिन तेरे बाप का खड़ा नहीं होता।”
मैं : “हाँ अंकल आप सही कह रहे हो। मेरी मम्मी सिर्फ आपके लिए बनी है। वो तो गलती से मम्मी-पापा को मिल गईं लेकिन अब मम्मी सिर्फ आपकी हैं।”
फिर थोड़ी देर में मम्मी किचन से
खाना लेकर आती हैं। अंकल मम्मी की मदक चाल को ही देख रहे थे। अंकल की नजर मम्मी की चिकनी और यमी नाभि पर थी..
मम्मी ने उन तीनों के लिए खाना लगाया.. अंकल-मम्मी-मैं तीनों साथ में खाना खाने लगे........... जब भी मम्मी अंकल को खाना परोसतीं अंकल एक नजर मम्मी के बड़े-बड़े बूब्स को जरूर देखते ............
अंकल को मम्मी के ब्लाउज के अंदर से मम्मी के बड़े बूब्स की झलक देखने मिल रही थी। मम्मी के बूब्स मस्त रसीले आमों जैसे थे....
..........
हम तीनों ने साथ में खाना खाया फिर मम्मी सारे बर्तन समेट के किचन में ले गईं और मैं-अंकल टीवी देखने लगे .......... कुछ देर बाद मम्मी सारा काम निपटाके आईं और साथ में चाय लाईं और हमारे साथ टीवी देखने लगीं.........
.....
अंकल : “वॉव वर्षा आप सच में बहुत ही यमी चाय बनाती हो..............”
मम्मी : “थैंक यू योगेश जी..............”
मैं : “हाहा मम्मी बहुत टेस्टी चाय बनाई आपने।”
मम्मी : “ठीक है मैं अपने बेटे को ऐसी चाय रोज पिलाऊँगी .............”
मैं : “मैं खुशनसीब हूँ कि आप मेरी मम्मी हो...........”
मम्मी मुस्कुराने लगीं....... मम्मी मुस्कुराते हुए बेहद खूबसूरत लग रही थीं...... अंकल का लंड उनके पैंट में खड़ा हो रहा था। मुझे लग रहा था उनके पैंट को देखकर उनका लंड पूरी हरकत में आ गया था। मम्मी भी उनके पैंट को ध्यान से देख रही थीं और मुस्कुराने लगीं।
तभी मैंने देखा अंकल मम्मी के पीछे आए और उन्होंने मेरे सामने ही मम्मी की गाँड को पीछे से साड़ी के ऊपर से हाथ फेर दिया।
लेकिन मैंने अपनी निगाहें जानबूझकर दूसरी तरफ कर लीं ताकि मम्मी को शर्मिंदा न होना पड़े। फिर मम्मी समझ तो गई थीं अंकल से कंट्रोल नहीं हो रहा है इसलिए उन्होंने मुझे भगाने के लिए बोलीं
मम्मी : “बेटा अब मैं रूम में जाती हूँ और आराम करूँगी।”
मैं : “मम्मी मुझे आज अपने दोस्त के साथ मूवी देखने जाना है और मैं रात को पापा के साथ वापस आ जाऊँगा। और हाँ मैं खाना होटल से खाकर आऊँगा और पापा भी। और आप अपने लिए ऑर्डर देकर खाना मँगवा लेना।”
मम्मी : “ठीक है बेटा...............”
फिर मैं 5 बजे को घर से निकला और 11 pm को पापा के साथ घर पहुँचने वाला था तो मैंने अंकल को मैसेज किया। अंकल ने कहा “10 मिनट बाद आना।” तो फिर मैंने किसी तरह पापा को और रोके रखा और फिर 11:30 pm को घर पहुँचे तो देखा मम्मी ने गेट खोला। उन्होंने एक गाउन पहना था और वे गेट खोलकर साइड रूम में चली गईं और मैं अपने रूम में आकर अंकल को कॉल किया तो अंकल ने कहा “बेटा आज तो तेरी मम्मी को सुबह 11 से 4 और 5 से 11 बजे तक मस्त चोदा। 11 घंटे चुदी तेरी मम्मी। बेचारी थक गई है।”
मैंने कहा “हाँ अंकल जब उन्होंने गेट खोला था तभी पता चल रहा था।” फिर मैं भी सो गया लेकिन मैंने आज मम्मी की चुदाई नहीं देखी थी।
दोस्तो आज के अपडेट में चुदाई नहीं है, सिर्फ नॉर्मल ही आना-जाना है।
मैं जानता हूँ आपको आज का अपडेट पसंद नहीं आएगा। सॉरी दोस्तो माफ करना।
फिर शाम को दादी भी आ गई थीं और अगले दिन पापा ऑफिस चले गए लेकिन दादी के डर की वजह से मम्मी अंकल से नहीं मिल रही थीं। इसी तरह 5 दिन निकल गए। 5 दिन मैंने सोचा अंकल-मम्मी को मिलाना जरूरी है इसलिए मैं दादी को अपने दोस्त के घर ले गया पापा के ऑफिस जाने के बाद और मम्मी को बोला “मम्मी आप अंकल को बुला लेना।” लेकिन मम्मी ने मना कर दिया।
जब मैं दोस्त के घर दादी को छोड़कर 9 am पर वापस आया तो अंकल-मम्मी अकेली थीं। मैंने मम्मी से कहा “मम्मी आप अंकल को बुलाओ कंप्यूटर सीखने के लिए।”
मम्मी : “नहीं मुझे अब नहीं सीखना कंप्यूटर-फुंप्यूटर।”
फिर मैंने सोचा ऐसे तो काम नहीं चलेगा। मैं ही अंकल को बोलता हूँ। फिर मैंने अंकल को बोल दिया।
और अपने रूम में आ गया। थोड़ी देर बाद अंकल का फोन आया “मैं आ रहा हूँ पीछे वाले गेट से।” और फिर थोड़ी देर बाद पीछे वाले गेट की घंटी बजी। मैं रूम से निकल ही रहा था कि मैंने देखा मम्मी गेट खोलने जा रही हैं और फिर मैं भी मम्मी के साथ आ गया और मम्मी ने गेट खोला।
मम्मी अंकल को देखकर –
मम्मी : “आप .............”
अंकल : “जी अंकुश ने बुलाया था।”
मम्मी ने मेरी तरफ देखा। मैंने कहा “हाँ मम्मी मैंने बुलाया अंकल।” और फिर ...............
मम्मी पलटीं और अपनी गाँड हिलाते हुए वापस जाने लगीं... मम्मी की गाँड इतनी सेक्सी हरकतें कर रही थी कि अंकल को अट्रैक्शन हो रहा था....
....... अंकल ने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ आँख मारकर मम्मी के पीछे मम्मी की गाँड को घूरते हुए हॉल में आ गए। मैं भी आ गया और सोफे पे बैठ गया और मम्मी किचन चली गईं।
फिर थोड़ी देर बाद अंकल बिना मुझसे कहे भी जा रहे थे किचन में और अंकल भी किचन में जाने लगे।
मम्मी किचन में काम कर रही थीं।
मैं भी सोचा मैं भी देखूँ।
......... तभी अंकल किचन के तरफ बढ़े ...... जब वे किचन के डोर पे पहुँचे तो अंकल ने और मैंने साथ में देखा मम्मी किचन में अपना काम कर रही हैं।
अंकल की नजर मम्मी की गाँड पर गई जो साड़ी में गजब लग रही थी.... मम्मी की गाँड मस्त गोल-मटोल और बाहर निकली हुई थी। अंकल के पैर वहीं जम गए और उनकी निगाहें मम्मी की गाँड से हट नहीं रही थीं..........
तभी मम्मी रैक के तरफ बढ़ीं... मम्मी की गाँड चलते वक्त मस्त हरकत कर रही थी ....... मम्मी रैक के ऊपर से कुछ निकालने के लिए कूदने लगीं........ तभी अंकल ने और मैंने ध्यान से देखा तो वो आटे का डिब्बा था.........
हमने देखा मम्मी के हाथ से आटे का डिब्बा गिरा जिससे सारा आटा मम्मी के ऊपर गिर गया था....
..... मम्मी साड़ी पर से आटा साफ करने लगीं......... ये सब मम्मी हल्की सी झुककर कर रही थीं.......... जिससे मम्मी की गाँड मस्त बाहर निकली हुई थी... मम्मी की साड़ी मम्मी की गाँड से पूरी चिपक गई थी... ....... जिससे मम्मी की गाँड के कटाव साफ दिख रहे थे..........
मम्मी की लाजवाब गाँड देखकर अंकल का मन डोल गया था।
मैंने भी मम्मी को आज तक अपनी मम्मी को इतनी गंदी नजर से नहीं देखा था। मुझे अपने आप पर ग्लानि आने लगी। मैं ये क्या पाप कर गया अपनी मम्मी पे गलत नजर। छि-छि मैं जाने लगा तो अंकल बोले “देख मैं क्या करता हूँ।” और मैंने देखा अंकल का लंड में हलचल हो रही थी जो पैंट के ऊपर से दिख रही थी।
.तभी मम्मी अपना पल्लू अपनी जिस्म से हटाते हुए हमारी तरफ मुड़ीं...... और अपने ब्लाउज और साड़ी से आटा साफ करने लगीं..
लेकिन हम दरवाजे के साइड हो गए इसलिए मम्मी हमें नहीं देख पाईं। अंकल और मैं मम्मी को ध्यान से देख रहे थे।
मम्मी के बूब्स ब्लाउज में कैद थे जो काफी बड़े-बड़े थे। मम्मी का पेट बहुत गोरा और सेक्सी था जो मस्त चमक रहा था........ और मम्मी की नाभि मस्त गहरी और बेहद सेक्सी थी। ......... मम्मी को इस हाल में देखकर अंकल का लंड खड़ा हो गया था। अंकल बोले “अंकुश देख क्या हाल हो रहा है मेरे लंड का। अब मैं किचन में जाऊँ।”
मैं : “हाँ जाइए अंकल, मम्मी को प्यार कीजिए।”
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अंकल ने कहा “अब तू दरवाजे की साइड से देखना।” और अंकल किचन में गए और जाकर मम्मी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया जिससे अंकल का लंड सीधा मम्मी की गाँड की दरार में साड़ी के ऊपर से घुस गया। मम्मी की एक मधुर सी सिसकारी निकल गई......... और अंकल ने मम्मी को उठाते हुए घुमाया... .... जिससे अंकल का लंड ने मम्मी की गाँड अधिक फील किया... मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं..........
मम्मी : “आहा!.... क्या कर रहे हो। अंकुश आ जाएगा .....”
अंकल : “आने दो वर्षा। तुम्हारे मजे तुम्हारे लाडले के सामने ही लूट लूँगा..........”
अंकल अपना लंड मम्मी की गाँड पे मसल रहे थे ...... और साथ ही मम्मी के गले को चूम रहे थे ...... मम्मी आहें भर रही थीं.........
मम्मी : “प्लीज अभी आप जाओ और अंकुश को किसी काम से भेज देना फिर जमकर कर लेना पर अभी जाओ।”
अंकल : “नहीं मुझे अभी करना है।”
मम्मी : मम्मी ने अंकल को धक्के देकर बाहर निकालने लगीं। बोलीं “बाद में करना।” फिर अंकल बाहर आ गए मेरे पास।
फिर थोड़ी देर बाद मम्मी भी किचन से वापस हॉल में आईं तो अंकल की नजर मम्मी की गाँड पे गई। मम्मी की गाँड मस्त हरकत कर रही थी.... मम्मी की गाँड जिस तरह स्विंग कर रही थी अंकल की नजर नहीं हट रही थी......... जब तक मम्मी किचन में वापस गईं नहीं तब तक अंकल मम्मी की हिलती हुई गाँड को देखते रहे..........
कुछ देर तक मैं-अंकल बातें करते रहे। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी नाश्ता बनाकर किचन से लाईं।
अभी 10:30 am हुआ था।
फिर मम्मी ने डाइनिंग टेबल पे नाश्ता लगाया।
मैं और अंकल नाश्ता करने डाइनिंग टेबल पे बैठे थे। मम्मी नाश्ता परोस रही थीं तभी अंकल की नजर मम्मी के ब्लाउज में गई। मम्मी के बूब्स के क्लीवेज अंकल को साफ दिख रहे थे........ जो बहुत गोरे और मिल्की थे.. और मुझे भी दिख रहे थे लेकिन मेरे लिए वो मेरी माँ हैं .......
अंकल बहुत धीमी आवाज में मम्मी से बोले “वाह वर्षा क्या बूब्स हैं तेरे कितने बड़े और मिल्की हैं। अब उनका मिल्क पिला दे।”
मम्मी भी धीमी आवाज में “अंकुश को बाहर भेज दो।” फिर मम्मी मेरे से बोलीं .........
मम्मी : “बेटा तुम्हें और पोहा दूँ........”
मैं : “नहीं मम्मी बस हो गया.........”
मम्मी : “क्यों तुम्हारी तबियत तो ठीक है इतना कम नाश्ता खाया..........”
मैं : “अरे मम्मी मेरी तबियत ठीक है बस भूख कम लगी थी...”
फिर मैंने अपना नाश्ता खत्म किया तो मम्मी ने अंकल से कान में कुछ कहा जो मैंने नहीं सुना। फिर अंकल बोले “बेटा।”
अंकल : “बेटा पिछले 5 दिन से मैंने तेरी मम्मी को कंप्यूटर नहीं सिखाया। तू लगे तो आज सिखा दूँ।”
मैं : “जी अंकल सिखा दीजिए।”
मम्मी : “बेटा मुझे नहीं सीखना।”
मैं : “मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ और मुझे कुछ काम है तो मैं दोस्त के घर जा रहा हूँ। शाम को 4 बजे तक आऊँगा और आते समय खाना होटल से पैक करा लाऊँगा।”
मम्मी : “बेटा क्या जरूरत है मैं बना लूँगी।”
मैं : “है नहीं मम्मी आप कंप्यूटर सिखाओ। मैं खाना होटल से 4 बजे को लेकर आऊँगा। उससे पहले नहीं।”
मम्मी : “ठीक है।” फिर मैं अंकल और मम्मी के गले लगाकर बाय बोलकर घर से निकल गया। अभी 11 am हुए थे।
फिर शाम को 4 बजे मैं घर पहुँचा तो अंकल को फोन किया तो बोले “तेरे पास डुप्लीकेट की से गेट खोलकर आजा।” और मैं गेट खोलकर किचन में गया और खाना रखा ही था कि अंकल भी किचन में गए और मैंने मम्मी का पूछा तो बोले “नंगी थी तो साड़ी पहन रही है।”
मैं : “अंकल 5 घंटों में कितनी बार किया?”
अंकल : “3 बार चोदा वर्षा को। अभी भी नंगी थी। बोली आप चलो मैं साड़ी पहनकर आ रही हूँ और सुबह वाली साड़ी फट गई थी तो दूसरी साड़ी पहनकर आएगी। कुछ पूछना मत।”
फिर अंकल किचन से निकलकर गए और हॉल में बैठ गए। थोड़ी देर बाद मम्मी आ गईं किचन में। बोलीं “तू हॉल में जा मैं खाना लाती हूँ।” और
मैंने बोला “मम्मी पापा का फोन आया था। बताया था आज रात को वे 11 बजे तक आएंगे।”
मम्मी : “क्यों.............”
मैं : “शायद उन्हें कोई काम है.............”
मम्मी : “अच्छा.............”
फिर अंकल भी वापस किचन में आ गए।
मम्मी अपने काम में लगी हुई थीं और मैं देख रहा था अंकल वहीं खड़े होकर मम्मी की गाँड को घूर रहे थे .............. मम्मी की हर एक हरकत के साथ मम्मी की गाँड की मूवमेंट्स देखने लायक थीं....
..... मम्मी की गाँड मस्त सी हरकतें करते हुए हिल रही थी..... क्योंकि मम्मी खाने को प्लेट में लगा रही थीं या कहूँ जो पैकिंग में खाना आया था उसे खोल रही थीं।
क्योंकि खाना होटल से आया था।
....
मैं : देख रहा था मम्मी काम में और अंकल मम्मी को देखने में खोए हुए थे। फिर मैंने दोनों को देखकर बोला
मैं : “मम्मी पापा खाना खाकर आएंगे रात को 11 बजे।”
...............
मम्मी : “अच्छा तो फिर आज हम दोनों को ही साथ में खाना खाना है... रात को।”
मैं : “मम्मी लेकिन अभी तो हम तीनों को साथ में खाना खाना है आपको, मुझे, अंकल को।”
..........
अंकल : “हाँ वर्षा वैसे भी मुझे बहुत भूख लगी है जिसे आप ही शांत कर सकती हो.............”
मम्मी अंकल की बात पर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोलीं...............
मम्मी : “आप 2 मिनट बाहर बैठो योगेश जी मैं खाना लगाती हूँ..............”
फिर मैं-अंकल बाहर डाइनिंग टेबल पे जाकर बैठ गए और उसके बाद अंकल बोले “बेटा।”
अंकल : “बेटा तेरी मम्मी कितनी मस्त माल है। कोई ये नहीं कह सकता ये एक बेटे की माँ है और 33 की उम्र में भी 23 की कुँवारी लड़की लगती है। क्या मस्त गाँड है, क्या मस्त बूब्स हैं इसके। जब तेरी मम्मी चलती है तो क्या मस्त नजारा होता है। कैसे अपनी पतली कमर को हिला-हिलाकर चलती, अपनी मखमली गाँड को हिला-हिलाकर चलती है। बेटा तेरी मम्मी का चलने का तरीका और तेरी मम्मी की मुलायम गाँड की सेक्सी मूवमेंट तो किसी को भी पागल कर सकती है।
बेटा तेरी मम्मी साड़ी को नाभि से कितनी नीचे बाँधती है जिससे उसकी नाभि, गोरी चिकनी कमर और पेट का सुंदर नजारा नामर्द का भी लंड खड़ा कर देगा लेकिन तेरे बाप का खड़ा नहीं होता।”
मैं : “हाँ अंकल आप सही कह रहे हो। मेरी मम्मी सिर्फ आपके लिए बनी है। वो तो गलती से मम्मी-पापा को मिल गईं लेकिन अब मम्मी सिर्फ आपकी हैं।”
फिर थोड़ी देर में मम्मी किचन से
खाना लेकर आती हैं। अंकल मम्मी की मदक चाल को ही देख रहे थे। अंकल की नजर मम्मी की चिकनी और यमी नाभि पर थी..
मम्मी ने उन तीनों के लिए खाना लगाया.. अंकल-मम्मी-मैं तीनों साथ में खाना खाने लगे........... जब भी मम्मी अंकल को खाना परोसतीं अंकल एक नजर मम्मी के बड़े-बड़े बूब्स को जरूर देखते ............
अंकल को मम्मी के ब्लाउज के अंदर से मम्मी के बड़े बूब्स की झलक देखने मिल रही थी। मम्मी के बूब्स मस्त रसीले आमों जैसे थे....
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हम तीनों ने साथ में खाना खाया फिर मम्मी सारे बर्तन समेट के किचन में ले गईं और मैं-अंकल टीवी देखने लगे .......... कुछ देर बाद मम्मी सारा काम निपटाके आईं और साथ में चाय लाईं और हमारे साथ टीवी देखने लगीं.........
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अंकल : “वॉव वर्षा आप सच में बहुत ही यमी चाय बनाती हो..............”
मम्मी : “थैंक यू योगेश जी..............”
मैं : “हाहा मम्मी बहुत टेस्टी चाय बनाई आपने।”
मम्मी : “ठीक है मैं अपने बेटे को ऐसी चाय रोज पिलाऊँगी .............”
मैं : “मैं खुशनसीब हूँ कि आप मेरी मम्मी हो...........”
मम्मी मुस्कुराने लगीं....... मम्मी मुस्कुराते हुए बेहद खूबसूरत लग रही थीं...... अंकल का लंड उनके पैंट में खड़ा हो रहा था। मुझे लग रहा था उनके पैंट को देखकर उनका लंड पूरी हरकत में आ गया था। मम्मी भी उनके पैंट को ध्यान से देख रही थीं और मुस्कुराने लगीं।
तभी मैंने देखा अंकल मम्मी के पीछे आए और उन्होंने मेरे सामने ही मम्मी की गाँड को पीछे से साड़ी के ऊपर से हाथ फेर दिया।
लेकिन मैंने अपनी निगाहें जानबूझकर दूसरी तरफ कर लीं ताकि मम्मी को शर्मिंदा न होना पड़े। फिर मम्मी समझ तो गई थीं अंकल से कंट्रोल नहीं हो रहा है इसलिए उन्होंने मुझे भगाने के लिए बोलीं
मम्मी : “बेटा अब मैं रूम में जाती हूँ और आराम करूँगी।”
मैं : “मम्मी मुझे आज अपने दोस्त के साथ मूवी देखने जाना है और मैं रात को पापा के साथ वापस आ जाऊँगा। और हाँ मैं खाना होटल से खाकर आऊँगा और पापा भी। और आप अपने लिए ऑर्डर देकर खाना मँगवा लेना।”
मम्मी : “ठीक है बेटा...............”
फिर मैं 5 बजे को घर से निकला और 11 pm को पापा के साथ घर पहुँचने वाला था तो मैंने अंकल को मैसेज किया। अंकल ने कहा “10 मिनट बाद आना।” तो फिर मैंने किसी तरह पापा को और रोके रखा और फिर 11:30 pm को घर पहुँचे तो देखा मम्मी ने गेट खोला। उन्होंने एक गाउन पहना था और वे गेट खोलकर साइड रूम में चली गईं और मैं अपने रूम में आकर अंकल को कॉल किया तो अंकल ने कहा “बेटा आज तो तेरी मम्मी को सुबह 11 से 4 और 5 से 11 बजे तक मस्त चोदा। 11 घंटे चुदी तेरी मम्मी। बेचारी थक गई है।”
मैंने कहा “हाँ अंकल जब उन्होंने गेट खोला था तभी पता चल रहा था।” फिर मैं भी सो गया लेकिन मैंने आज मम्मी की चुदाई नहीं देखी थी।


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