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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#21

**अपडेट 19**

मम्मी के स्तन अब अंकल की छाती पर रगड़ने लगते हैं। मम्मी के इस बर्ताव से अंकल से भी अब रहा नहीं जाता।
अंकल भी अब मम्मी को नहीं रोकते।
मम्मी और अंकल के शरीर के टकराने की आवाज थप-थप-थप.... कमरे में गूँज रही है।

मम्मी झड़ने को वाली होती हैं तो अंकल मम्मी की हवस को और बढ़ा देते हैं। मम्मी अंकल के ऊपर पूरी तरह गिर अपनी गाँड उठा-उठा कर अंकल को चोदती हैं।

मम्मी की आँखें बंद हो जाती हैं।
और इस महान चुदाई का आनंद लेती हैं अपनी आँखें बंद करके। तभी मम्मी का शरीर अकड़ने लगता है, वहीं अंकल भी मम्मी को कमर से पकड़कर जकड़ लेते हैं, तभी मम्मी की चुत झड़ना शुरू हो जाती है।

चुत झड़ते ही मम्मी की बेचैनी जैसे शांत हो जाती है। मम्मी वहीं अंकल के ऊपर ढेर हो जाती हैं।
अंकल मम्मी को बेड पर लिटा देते हैं क्योंकि अब अंकल को भी झड़ना था। अंकल मम्मी की चुत में झटके मारने लगते हैं।

मम्मी अंकल को चुत में झड़ने से मना करती हैं पर अंकल मम्मी की एक नहीं सुनते और मम्मी की चुत को पेलते रहते हैं।
कुछ ही पलों में अंकल भी मम्मी की चुत में अपना माल डालकर मम्मी के पास लेट जाते हैं।

मम्मी को अब अहसास होता है कि उसने अपनी हवस की आग में आज अपना व्रत तोड़ दिया जिसमें पूरा दिन बिना खाए रहते हैं। उस व्रत को अंकल से अपनी चुदाई करवाकर तोड़ दिया।

मम्मी की आँखों से आँसू छलक जाते हैं पर उनके शरीर में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे वहाँ से उठ सकें।

मम्मी रोते हुए – “योगेश जी अब तो चले जाओ।”
अंकल – “चला जाऊँगा ना मेरी जान, इतनी चुदाई की है तूने थोड़ा तो आराम करने दे।”
अंकल मम्मी को हग करके फिर से चूमने की कोशिश करते हैं पर मम्मी अंकल का हाथ हटा देती हैं और कहती हैं “एक दिन चुदाई नहीं करते तो कौन सा फर्क पड़ जाता। आपकी मैं हमेशा आपसे चुदती हूँ पर आज मेरा व्रत टूटा। मैंने आपसे कहा आज मत चोदिए फिर भी आपने मेरी चुदाई की और मेरा व्रत टूट गया।”

मम्मी की बातों को सुनकर और मम्मी को रोता देख अंकल भी अब ज्यादा जोर-जबरदस्ती नहीं करते।

मम्मी वेट करती हैं कि अंकल अब चले जाएँ। मम्मी एक बेडशीट से खुद को ढक लेती हैं क्योंकि अंकल के सामने वे नंगी नहीं रहना चाहतीं।

पर अंकल अपने आप को ढकने की कोई कोशिश नहीं करते।

मम्मी की आँखों से आँसू आने लगते हैं जिन्हें देख अंकल समझ जाते हैं कि उन्हें बुरा लगने लगा है जो भी हुआ। आज उनका व्रत टूटा।

अंकल अब मम्मी को सपोर्ट करते हुए बोलते हैं और मम्मी की चादर में खुद भी घुस जाते हैं और मम्मी को हग कर लेते हैं। अंकल अपने बर्ताव में थोड़ी नरमी लाते हैं।

अंकल – “क्या हुआ वर्षा, रो क्यों रही हो आप?”
मम्मी कुछ नहीं कहतीं बस सुबकती रहती हैं।
अंकल – “वर्षा आप बताओगी नहीं तो मुझे पता कैसे चलेगा।” (अंकल थोड़ा और करीब आते हैं जिससे उनका लंड मम्मी की गाँड के साइड में प्रेस होने लगता है।)

मम्मी – “तुम सब जानते हो योगेश। आज जो भी हुआ सही नहीं हुआ, आज मेरा व्रत टूटा।”

अंकल : “वर्षा अपनी प्यास बुझाना गलत नहीं है। आपने जो किया वो अपने बदन की आग को शांत करने के लिए किया। और कौन कहता है व्रत में सेक्स नहीं करते। ये तो जीवन का एक अहम हिस्सा है। सेक्स के बिना तो बच्चे भी नहीं होते तो ये संसार आगे कैसे बढ़ता। और जो भी किया हम दोनों ने किया है, मैंने अकेले कुछ नहीं किया।”

मम्मी – “मैंने नहीं योगेश जी, तुमने मेरे साथ जबरदस्ती की।”
अंकल – “मैं मानता हूँ कि मैंने थोड़ी जोर-जबरदस्ती की पर क्या आप भी ये नहीं चाहती थीं? जरा पूछो अपने आप से वर्षा कि क्या सब मैंने ही किया।”
मम्मी चुप हो जाती हैं।

अंकल – “चुप मत रहो वर्षा। अपने मन में झाँकिए। क्या आपको सेक्स की जरूरत नहीं थी जो शाम को 5 बजे आप मेरे घर अकेली आई थीं। आप जानती हैं जब भी मैं आपको अकेली देखता हूँ तो मैं आपकी चुदाई करता हूँ, फिर भी आप मेरे घर आईं और मुझसे लिपट गई थीं और आपने मुझे किस किया। फिर मैंने आपकी चुत चाटी थी। और किसने कहा पति-पत्नी व्रत में सेक्स नहीं करते। माना कि मैं आपका पति नहीं पर आपके बेटे ने मुझे अपना पिता माना है। आप भी मुझे पति का दर्जा देती हैं क्योंकि आपका बेटा भी जानता है उसका बाप नामर्द है इसलिए तो उसने आपकी चुदाई में मेरी मदद की थी। और आग तो आपके अंदर भी बहुत है। और व्रत में पाप नहीं किया जाता है लेकिन पुण्य तो करते हैं। और किसी प्यासे की प्यास बुझाना पाप नहीं बल्कि पुण्य है। मैंने आपकी चुत की, आपने मेरे लंड की और आपके बेटे ने मुझे बुलाकर हम दोनों की प्यास बुझाने में मदद की है।
और आप और मैं कोई फर्क नहीं है। आप भी प्यासी, मैं भी प्यासा।”

मम्मी लगातार रोती हैं – “लेकिन एक दिन में क्या फर्क पड़ता।”

अंकल – “आप और मैं दोनों बदन की आग के आगे मजबूर हैं। बस फर्क इतना है कि मैं अपने आप को रोकता नहीं हूँ और आपने अपने आप को व्रत की मर्यादा की बेड़ियों में बाँधा हुआ है। जो मैंने आपसे जबरदस्ती करके तुड़वा दी।”

मम्मी खुद भी मानने लगती हैं कि अंकल सब सही कह रहे हैं। वे कुछ कहती तो नहीं पर सोच में डूब जाती हैं जिसका फायदा उठाकर अंकल मम्मी के ऊपर आ जाते हैं जिससे वे फिर एक बार मम्मी की आँखों में देख सकें।

अंकल अपना लंड मम्मी की जाँघों में दबाकर लेट जाते हैं और मम्मी का मुँह अपनी ओर कर मम्मी को अपनी बातों में लगाने लगते हैं।
मम्मी – “योगेश जी प्लीज अब हट जाओ।”
अंकल – “अब मैं कुछ नहीं करूँगा वर्षा, डरिए मत। बस बात कीजिए मुझसे।”

मम्मी – “अब क्या बचा है बात करने को।”
अंकल – “अच्छा ये बताइए क्या आपको आज मजा नहीं आया अपनी आग बुझाकर।”

मम्मी कुछ नहीं कहतीं तो अंकल मम्मी के चेहरे के ओर करीब आ जाते हैं। अब मम्मी के स्तन अंकल की सीने में धँस जाते हैं।

मम्मी – “योगेश जी प्लीज अब नहीं, समझो ना।”
अंकल – “तो मेरी बातों का जवाब तो दो ना आप।”
मम्मी – “हाँ आया था।”
अंकल : “क्या? पूरा बोलो।”
मम्मी : “मजा आया था।”
अंकल : “किसमें मजा आया था? पूरा बोलो, चुदाई में मजा आया था?”
मम्मी : “आप भी कितनी बार बुलवाओगे।”
अंकल : “एक बार और बोल दो – आपके लंड से मेरी चुत चुदाई में मजा आया था।”
मम्मी : “शर्माकर, प्लीज योगेश जी।”
अंकल : “प्लीज वर्षा, एक बार।”
मम्मी : “हाँ मजा आया था आपके लंड से चुद-चुदवाकर बहुत मजा आया था।”
अंकल : “फिर अब रोइए मत वर्षा। यही आपकी जरूरत है और अपनी जरूरत पूरी करना कोई गलत बात नहीं। जिस तरह आज आपने मेरा लंड लिया है उससे पता चलता है कि आप कितना तड़प रही थीं मेरे लंड के लिए क्योंकि कल मैंने आपको पूरा दिन चोदा था फिर भी आपकी आग ठंडी नहीं हुई। वर्षा तुम बहुत गर्म हो, तुम्हें 24 घंटे लंड की जरूरत है। तुम नंगी अच्छी लगती हो, तुम्हें 24 घंटे चुदाई चाहिए।”
मम्मी : “आप भी अब तो आपका मन भर गया ना? अब जाइए और कल दिल खोलकर चोद लेना मेरी चुत।”

अंकल अपना लंड और अंदर को प्रेस कर देते हैं जो अब मम्मी की चुत से टच होने लगता है। अंकल मम्मी की आँखों में देखते हैं।
अंकल – “आपको लगता है मेरा मन भर गया है? आप कोई एक बार में मन भरने वाली चीज नहीं हो वर्षा। मेरा लंड तो अभी भी बेताब है आपके लिए। और मैं जानता हूँ आप भी तड़प रही हो फिर से इसे लेने को।”
मम्मी – “नहीं ऐसा कुछ नहीं है योगेश जी।”
अंकल – “माँ या तो आप झूठ कह रही हैं या आपको भी नहीं पता कि आप कितनी प्यासी हैं।”

ये कहकर अंकल अपना हाथ नीचे ले जाकर मम्मी की चुत पर ले जाते हैं और उस पर अपनी उँगली रगड़कर वापस मम्मी को दिखाते हैं।
अंकल – “देखो वर्षा, आपकी चुत तो कुछ और कह रही है।”

अंकल की उँगली पूरी तरह से मम्मी की चुत से गीली हो जाती है। मम्मी भी शर्म से अपना चेहरा दूसरी ओर कर लेती हैं।

अंकल – “मेरी तरफ देखो वर्षा, इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। आप में और मुझमें कोई ज्यादा फर्क नहीं है वर्षा। मैं भी आपकी तरह अपने बदन की आग के आगे मजबूर हूँ बस मैंने अपने आप को व्रत की मर्यादाओं में नहीं जकड़ा हुआ।”
मम्मी को भी अंकल की बातें सच लगने लगती हैं कि वे अपनी प्यास के आगे बेबस हैं और ऊपर से अंकल का लंड मम्मी की चुत पर दस्तक दे रहा था।
अंकल – “वर्षा आपको सबसे ज्यादा पसंद क्या आता है?”
मम्मी – “पता नहीं योगेश जी।”
अंकल – “मैं जानता हूँ आप झूठ बोल रही हैं। आपको मेरा लंड पसंद है। आपने कई बार कहा है आप मेरे लंड के बिना नहीं रह सकतीं।”

ये कहकर अंकल नीचे की ओर चादर में घुसने लगते हैं। मम्मी मानो जैसे जम गई हों, वे अंकल को रोकने की कोशिश भी नहीं करतीं।

अंकल अपना मुँह सीधा मम्मी की चुत पर लगाकर उसे चाटना शुरू कर देते हैं जिससे मम्मी मचलने लगती हैं और अपने हाथों से बेडशीट को पकड़ लेती हैं।

मम्मी – “ओह्ह योगेश जी प्लीज। आआह आआहा आआ योगेशhhhh जीईईई शhhhh”

अंकल मम्मी की एक नहीं सुनते और अपना काम जारी रखते हैं।
तभी मम्मी अपनी चादर उठाकर देखती हैं तो अंकल मम्मी की चुत चाटना छोड़ मम्मी को हँसकर देखते हैं। और फिर से मम्मी की चुत चाटने लग जाते हैं।

अंकल अब मम्मी के साइड में आकर लेट जाते हैं और मम्मी के होठों की ओर अपने होठ बढ़ा देते हैं। जैसे ही मम्मी अपने होठ अंकल की ओर ले जाती हैं अंकल पीछे हट जाते हैं।
मम्मी जानती हैं कि अंकल उन्हें तड़पा रहे हैं, वे अंकल की ओर एकटक देखती रह जाती हैं। मम्मी की साँसें काफी तेज चल रही हैं जिसकी वजह से मम्मी के स्तन भी काफी ऊपर-नीचे हो रहे हैं। अंकल मम्मी को अपने लंड की ओर इशारा करते हैं।
अंकल – “वर्षा अब तो इसे भी मुँह में ले लीजिए ना एक बार। फिर से ले लो।”

मम्मी : “योगेश जी मैं ये सब फिर से नहीं कर सकती। एक बार मैं बहक गई थी तो मैंने उसे अपने मुँह में भी किया और अपनी चुत में भी लिया। और प्लीज तुम अब चले जाओ ना।”

अंकल – “बट इसमें आपको दिक्कत क्या है? जैसे आपको अपनी चुत चटवाने में मजा आता है वैसे ही मुझे भी इसे चुसाने में। प्लीज एक बार ट्राई तो करिए।”
मम्मी : “आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे मैं आपके लंड को चुसती नहीं। पिछले 6 महीनों में अनगिनत बार चुसा है और इसका रस पिया है और हमेशा अपनी चुत में लिया। और आज मेरा व्रत है इसलिए मना कर रही हूँ। फिर भी व्रत होने के बावजूद मैंने उसे अपने मुँह में लिया, चुसा और जीभ से चाटा भी और अपनी चुत में भी लिया। और आप कह रहे हैं आपकी अपनी चुत चटवाने में मजा आता है वैसे ही मुझे लंड चुसवाने में। क्या मैं आपके लंड से प्यार नहीं करती हूँ? क्या बताइए मैंने हमेशा आपका लंड चुसा और हर बार रस पिया और आपने भी हमेशा मेरी चुत चाटी, रस पिया तो इसमें आप आज ये बातें क्यों कर रहे हो? आप मेरी मजबूरी समझिए। आज मेरा फास्ट है प्लीज।”

फिर अंकल मम्मी को एक खिलौने की तरह उठाकर अपने ऊपर 69 के पोज़ में बैठा लेते हैं।

अंकल : “क्या एक बार और नहीं कर सकतीं वर्षा जी? यदि फिर से मुँह में नहीं लेना चाहती हो तो मत लो लेकिन उसे ऊपर से चाट तो सकती ही। प्लीज ऐसे ऊपर से चटाइए मेरे लंड को।”

मम्मी अंकल के लंड को चाटना शुरू नहीं करतीं पर अंकल मम्मी की चुत पर जीभ फेरना स्टार्ट कर देते हैं। मम्मी भी विरोध नहीं कर पातीं और अंकल को अपनी चुत सौंप देती हैं।

अंकल जैसे ही फील करते हैं कि मम्मी अब हवस में डूब गई हैं वे मम्मी की चुत को चाटना बंद कर देते हैं।

मम्मी अपनी चुत अंकल के मुँह पर टिकाकर उसे रगड़ने की कोशिश करती हैं, अंकल भी मम्मी की चुत चाटते हुए मम्मी को आगे की ओर धकेल देते हैं।

मम्मी जानती हैं कि अंकल ऐसा क्यों कर रहे हैं। अब मम्मी को रहा नहीं जाता और मम्मी अंकल के लंड की ओर झुक जाती हैं। अंकल के लंड से काफी तेज गंध आ रही होगी शायद क्योंकि मैं खिड़की से देख रहा था तभी तो मम्मी ने अंकल के लंड को आँखें बंद करके सूँघा और मुस्कान के साथ “आह्ह क्या खुशबू है योगेश जी आपके लंड की”। तभी अंकल मम्मी की चुत पर एक-दो बार जीभ फेरकर फिर रुक जाते हैं।
अंकल : “वर्षा तुम्हें हमेशा मेरे लंड से खुशबू आती है तो आज नखरे क्यों कर रही थी मादरचोद रंडी साली वेश्या तेरी चुत में आग लगा दूँगा।”
मम्मी को गुस्सा तो आता है पर वे अंकल के लंड को साइड से चाटना शुरू कर ही देती हैं।

अंकल और मम्मी दोनों कुछ देर तक ऐसे ही एक-दूसरे को चाटते रहते हैं पर अंकल मम्मी को झड़ने नहीं देते।
अंकल अब मम्मी को बेड पर पलट देते हैं।
अंकल – “अब बोलो वर्षा, अब भी आप चाहती हो कि मैं चला जाऊँ?”

मम्मी कुछ नहीं कहतीं सिर्फ लंबी-लंबी साँसें लेती रहती हैं।
अंकल – “आप असलियत में ऐसी ही हो वर्षा। मैं आपको एक चांस देता हूँ। अगर आप चाहती हो कि मैं आगे कुछ न करूँ तो आप जा सकती हो।”

अंकल की ये बातें मम्मी को अंदर ही अंदर कचोटने लगती हैं। मम्मी न चाहते हुए भी बेड से उठकर वॉशरूम की ओर जाने लगती हैं।
अंकल ने ऐसा नहीं सोचा था। मम्मी बाथरूम में चली जाती हैं पर अब वे अपने होश में ही नहीं थीं और बाथरूम का गेट बंद करती हैं लेकिन पूरा नहीं। और अपने तन को शांत करने के लिए मम्मी शावर ऑन कर उसके नीचे खड़ी हो जाती हैं। मैं भी तुरंत बाथरूम की खिड़की पर चला जाता हूँ। बाथरूम में थोड़ी सी ऊँचाई पर खिड़की थी जो एयरजस्ट फैन के लिए है। मैं वहाँ से देखने लगा। मम्मी नंगी ही शावर ले रही हैं खड़ी होकर। मम्मी की आँखों में आँसू भी छलक रहे हैं कि वे ये सब कैसे होने दे रही हैं।
मम्मी धीमी आवाज में – “ये मुझे क्या हो गया है। आज मेरा फास्ट टूटा और मैं ये सब कैसे होने दे रही हूँ। मैंने सोचा था आज योगेश जी से दूर रहूँगी लेकिन आज मैंने वो सब कर लिया जो व्रत में नहीं करते।”
ये मुझे साफ सुनाई दे रहा था। मम्मी रोते हुए बोल रही थीं। मैं मम्मी से मुश्किल से 2 फीट की दूरी पर था लेकिन मम्मी मुझे नहीं देख सकती थीं।

वहीं अंकल भी मम्मी को आज किसी भी तरह बख्शने के मूड में नहीं हैं।
फिर अंकल भी बाथरूम की ओर चल देते हैं और बाथरूम का गेट जो थोड़ा खुला था उसे अंकल पूरा खोल देते हैं। और बाथरूम का गेट खुलते ही मम्मी अंकल की ओर देखती हैं और मम्मी अंकल को अंदर आने से मना करती हैं “प्लीज आप अंदर मत आइए आप बाहर जाइए” पर अंकल बिना कुछ बोले बाथरूम के अंदर घुस जाते हैं और मम्मी को दीवार से लगा देते हैं और नीचे बैठ मम्मी की चुत पर फिर से अपना मुँह लगा देते हैं।

अंकल अपना एक हाथ मम्मी के स्तनों पर रखकर उसे दबाने लगते हैं। मम्मी के हाथ भी अपने स्तनों पर आ जाते हैं। मम्मी अंकल को अपनी चुत चाटते हुए देख सिसकियाँ भरने लगती हैं। अंकल भी मम्मी की चुत चाटते हुए मम्मी की चुत में अपनी उँगलियाँ डाल देते हैं और मम्मी की चुत को उँगलियों से चोदना शुरू कर देते हैं।

मम्मी – “आआह योगेशजीईईई तुमने तो मुझे छोड़ने का वादा किया था।”
अंकल – “मैं जानता हूँ तुझे क्या चाहिए मेरी जान। तू चाहे कितना ही नाटक कर ले।”

मम्मी – “आह योगेशजीईईई आह्ह आह। प्लीज आआह।”
अंकल अब मम्मी के बदन को चूमते हुए खड़े हो जाते हैं और मम्मी का हाथ अपने लंड पर रखकर मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं। मम्मी के लिए इतना इशारा बहुत था। वे अंकल का लंड हिलाना शुरू कर देती हैं और अपना मुँह अंकल के लिए खोल देती हैं।

मम्मी अंकल का लंड हिलाते हुए अपनी चुत से रगड़ने लगती हैं जिससे अंकल भी काफी उत्तेजित हो जाते हैं।
अंकल मम्मी का मुँह दीवार की ओर घुमा देते हैं और पीछे से मम्मी को हग कर मम्मी की चुत पर अपना हाथ फेरने लगते हैं।

अंकल का लंड मम्मी और अंकल के शरीर के बीच दब जाता है। मम्मी अब पागल सी होने लगती हैं। अंकल मम्मी की चुत सहलाते हुए मम्मी के कानों में कहते हैं –
अंकल – “मेरी जान अब फिर से तैयार हो जा मेरा लंड लेने के लिए।”
इतना कहकर अंकल मम्मी की एक टाँग ऊपर उठाने लगते हैं। मम्मी भी अंकल के इशारे से अपनी टाँग उठा लेती हैं। मम्मी का दिल जोर से धड़कने लगता है क्योंकि वे जानती हैं कि अब अंकल क्या करने वाले हैं। मम्मी के लिए ये अहसास एकदम नया सा है क्योंकि अंकल ने मम्मी को कभी इस तरह बाथरूम में नहीं चोदा था।

अंकल अपना लंड मम्मी की चुत में डालकर धीरे-धीरे मम्मी को चोदना शुरू कर देते हैं।

मम्मी – “आह अह अह योगेश जी प्लीज थोड़ा धीरे करो।”
अंकल – “क्यों मेरी जान मजा आ रहा है ना।”
मम्मी – “आआहा आआहहह”

मम्मी की आहें सुन अंकल मम्मी को वॉशरूम के ग्लास से सटा देते हैं और मम्मी की चुत को अच्छे से चोदने लगते हैं। मम्मी भी अब अंकल के लंड के साथ चुदने को पूरी तरह तैयार हो चुकी थीं। वे भी अंकल का भरपूर साथ देती हैं।

लगभग एक आधे घंटे तक अंकल मम्मी को उसी पोजीशन में चोदते हैं। मम्मी दो बार डिस्चार्ज हो गई थीं लेकिन अंकल अभी तक नहीं हुए थे। फिर थोड़ी देर बाद
अंकल और मम्मी दोनों झड़ने वाले होते हैं तो अंकल भी अपनी गति बढ़ा देते हैं।

मम्मी के स्तन शीशे से दब जाते हैं और अंकल का लंड मम्मी की चुत की गहराइयों में खो जाता है।
मम्मी अपने दोनों हाथ शीशे पर सपोर्ट के लिए रख लेती हैं और अंकल का साथ देती हैं।

आआह योगेशजीईईई आआह की आवाज गूँजने लगती है।

अंकल – “मेरा झड़ने वाला है मेरी जान।”
ये कह अंकल मम्मी के स्तन पकड़ अपना लंड मम्मी की चुत में झड़ने लगते हैं। ठीक उसी समय मम्मी भी अपना सारा रस अंकल के लंड पर छोड़ देती हैं।

अंकल का लंड मम्मी की चुत में झटके लेने लगता है और दोनों इसी पोजीशन में कुछ देर खड़े रहते हैं।
चुत झड़ने के बाद मम्मी अपने होश में आती हैं। और अंकल के आगे हाथ जोड़कर अंकल से जाने को कहती हैं।
अंकल मम्मी को अपनी बाहों में उठाकर रूम में बेडरूम में ले आते हैं और अंकल मम्मी को बेड पर लिटा देते हैं और मम्मी के पास लेटने लगते हैं।

मम्मी – “योगेश जी अब जाओ प्लीज। कुछ देर में उजाला भी हो जाएगा। आप सामने घड़ी में देखो 5 बज गए हैं। आपकी आए हुए पूरे 8 घंटे ही गए हैं।”

(मैंने भी मोबाइल में देखा। अरे बाप रे मैं 8 घंटे से दोनों की चुदाई देख रहा था। मुझे टाइम का पता नहीं चला। अंकल रात को 8 बजे के बाद 9 बजे से पहले आए थे।)
अंकल – “तो क्या हुआ मेरी जान। पता चलने दो सबको, मैं किसी से नहीं डरता। और वैसे भी तुम्हारे बेटे को पता है मैं इस समय तुम्हें चोद रहा हूँ। मैंने आने से पहले उससे मैसेज कर दिया था और वही देखेगा घर में। और कौन देखेगा? तुम्हारा पति और सास घर में नहीं हैं।”

मम्मी – “समझो ना, मेरे बारे में तो सोचो। मैं अब आराम करना चाहती हूँ। आप जाओ।”
अंकल : “नहीं जान आज तुझे पूरे दिन चोदूँगा क्योंकि तेरा पति रात को आएगा और सास तो अंकुश के दोस्त के घर पे है।”
मम्मी : “थोड़ी देर बाद अंकुश उठ जाएगा और मुझे आपके साथ रूम में देखेगा तो मुझे शर्म आएगी उसके सामने। मैं जानती हूँ उसे पता है आप मेरी चुदाई कर रहे हो पर वह बेटा है मेरा और माँ-बेटे के बीच शर्म का पर्दा होना चाहिए।”
अंकल : अंकल मम्मी के होठों को चूमकर बोलते हैं –
अंकल : “मैं उसे कॉल करता हूँ। बोल दूँगा उठकर अपने रूम में ही तैयार होकर कॉलेज चला जाएगा और नाश्ता कैंटीन में कर लेगा। मम्मी के रूम में नहीं आएगा।”
मम्मी : “नहीं उसे कुछ मत बोलो। मुझे शर्म आएगी।”
अंकल तू चुप, मैं अंकुश को कॉल करता हूँ। अंकल मुझे कॉल करने वाले थे तो मैं खिड़की से दूर हट गया और अपने रूम में आ गया और इतने में ही अंकल का कॉल आया।
मैं : “हैलो अंकल कैसे कॉल किया?”
अंकल : “बेटा कैसा क्या कर रहा है?”
मैं : “सो रहा था। आपका कॉल आया तो रिसीव किया। बोलिए।”
अंकल : “बेटा मैं तेरी मम्मी को रात 9 बजे से चोद रहा हूँ और आज पूरे दिन चोदना चाहता हूँ इसलिए तेरी मदद चाहिए।”
मैं : “जी अंकल और मम्मी कहाँ हैं?”
अंकल : “वो बाथरूम में गई हैं।”
अंकल ने झूठ बोला। मम्मी उनके पास में थीं। मुझे मम्मी की धीमी-धीमी आवाज आ रही थी।
अंकल : “वो बाथरूम में है और मैं चाहता हूँ तू चुपचाप तेरे रूम से ही रेडी होकर चाय-नाश्ता कैंटीन में कर लेना और कॉलेज चले जाना और तेरी मम्मी के रूम में मत आना। उसे शर्म आएगी। उसने कहा कि तुझे बोलूँ तू रूम की तरफ न आए क्योंकि यहाँ तेरी मम्मी नंगी होकर पूरे दिन मुझसे चुदवाएगी। और हाँ कॉलेज से आने के बाद उससे ये बोलना – मम्मी मेरी नींद लेट खुली थी तो आपसे मिले बिना और बिना नाश्ते के ही कॉलेज गया ताकि उसे तेरे सामने शर्म न आए।
और सुन जब तू कॉलेज से आएगा तो मैं तुझे घर पे ही मिलूँगा क्योंकि आज पूरे दिन मैं तेरे घर पे ही रहूँगा इसलिए मुझे देखकर बोलना अंकल कब आए। मैं बोल दूँगा अभी आया कुछ देर पहले। और कॉलेज का बैग रखकर घर से निकल जाना। मम्मी से बोलना मम्मी मुझे दोस्त के घर जाना है। और मैं तेरी माँ को पूरा दिन नंगी रखूँगा। केवल दोपहर 3 बजे को तू कॉलेज से आएगा तब ही तेरी मम्मी को कपड़े पहनने दूँगा और मैं भी पहनूँगा। और तू 3:20 बजे को वापस घर से निकल जाना। तेरे जाते ही उसको नंगी कर दूँगा। फिर रात को तेरे पापा को 9 बजे से पहले मत आने देना। और ठीक है फोन रखता हूँ।” मुझे मम्मी के हँसने की आवाज आ रही थी। अंकल ने बिना फोन कट किए ही रख दिया।
मम्मी : हँसती हुई – “क्या आप भी उसी से बोल रहे थे तू तेरी मम्मी को चुदने का मौका दे और घर से भाग जा।” हँसती हुई बोल रही थीं।
अंकल : “अब तो दूसरा दिन चालू हो गया। आज तो तेरा व्रत नहीं है। व्रत वाला दिन तो निकल गया। अब तो आजा मेरे लंड पे।”
मम्मी : “तो उछालो मुझे पूरे दिन अपने लंड पे।”
और फिर उन्होंने कॉल कट नहीं किया। मैंने ही कर दिया। फिर मैं 3 घंटे सोया और सुबह 9 बजे कॉलेज चला गया और मम्मी के रूम की तरफ भी नहीं गया। और 3 pm को वापस आया तो घर की घंटी बजाई।

तो मम्मी ने गेट खोला और गेट खोलकर तुरंत पीछे मुड़ गईं। शायद वे मुझसे बात नहीं करना चाहती थीं। शायद वे शर्म के कारण मेरी तरफ नहीं देखना चाहती थीं। ये मम्मी ने साड़ी पहनी थी। वो इस प्रकार है –

मम्मी की होट साड़ी किसी का भी लंड खड़ा कर सकती है। शायद ये साड़ी मम्मी ने अंकल के लिए पहनी होगी।
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Messages In This Thread
Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 03:05 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:12 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:13 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:17 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:18 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:19 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:20 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:22 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:23 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:24 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:25 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 06:27 PM
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