22-08-2026, 12:23 PM
Update 17
अंकल फील करते हैं कि मम्मी भी अपनी चुत का मिलान अंकल के लंड से करा रही हैं। मुझे इसलिए पता चला क्योंकि मम्मी भी अपनी कमर को लंड पे रगड़ रही थीं जो मुझे विंडो से दिखा।
अब अंकल समझ जाते हैं कि यही सही टाइम है मम्मी का पेटीकोट उतार फेंकने का।
अंकल मम्मी के बूब्स चूसते हुए अपना एक हाथ मम्मी के पेट पर फेरते हुए मम्मी के पेटीकोट में डाल देते हैं।
जैसे ही अंकल का हाथ मम्मी की चुत पर पहुँचता है मम्मी मचल उठती हैं।
अंकल अपनी उँगलियों से मम्मी की चुत को सहलाने लगते हैं। अंकल की उँगलियाँ पूरी तरह मम्मी के चुत के रस में भीग जाती हैं।
मम्मी: “आह योगेश्श्श्श जी… प्लीज़…”
अंकल: “हाँ मेरी जान… आआह… कितनी चिकनी चुत है तेरी।”
मम्मी: “बस योगेश जी… अब और नहीं।”
अंकल: “तूने बाल मेरे लिए हटाए हैं ना मेरी जान?”
मम्मी: “हम्म…”
अंकल: “अब से तेरी चुत ऐसे ही चिकनी रहनी चाहिए।”
अंकल मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोल देते हैं। मम्मी अंकल का हाथ बीच में ही रोक लेती हैं।
मम्मी: “प्लीज़ योगेश जी… ये मत उतारो। बस एक पेटीकोट ही बचा है मेरे शरीर पर।”
अंकल: “हटाने दे ना जान। मैं भी तो पूरा नंगा हो जाऊँगा। तू मेरा पैंट और अंडरवियर उतार देना।”
मम्मी: “समझो ना प्लीज़।”
अंकल: “आज मत रोक जान। आज तो मुझे भी तेरा व्रत पूरा करना है तेरी प्यास बुझाकर। मन भर के तेरी चुत पीने दे मुझे वर्षा।”
इतना कहकर अंकल मम्मी के पेट को किस करते हुए नीचे आने लगते हैं। जैसे-जैसे अंकल नीचे आते हैं मम्मी के पेटीकोट को भी नीचे सरकाते रहते हैं।
मम्मी की साँसें काफ़ी तेज़ हो चुकी हैं। वो जानती हैं कि अंकल अब क्या करने वाले हैं।
अंकल मम्मी की चुत के काफ़ी करीब आकर थोड़ा रुक जाते हैं।
मम्मी अंकल का इंतज़ार करती रह जाती हैं कि अब अंकल उनकी चुत को चाटेंगे। जब कुछ पलों तक अंकल चुत चाटना स्टार्ट नहीं करते तो मम्मी से रहा नहीं जाता। वो अपना सर उठाकर अंकल की ओर देखती हैं। अंकल भी इसी पल का इंतज़ार कर रहे थे। मम्मी से नज़रें मिलते ही वो अपना मुँह मम्मी की चुत से लगा देते हैं।
मम्मी ये सही नहीं पातीं। मम्मी के मुँह से सिर्फ़ एक ही शब्द निकलता है—“ओह फक…”
मम्मी के हाथ अपने आप अंकल के बालों में आ जाते हैं और जो सर मम्मी ने अंकल को देखने के लिए उठाया था वो वापस बिस्तर पर चला जाता है।
अंकल भी अपनी स्पीड बढ़ा देते हैं जिसकी वजह से मम्मी बिस्तर पर इधर-उधर मचलने लगती हैं।
अंकल बड़ी चालाकी से बीच-बीच में अपनी जीभ रोकते हैं कभी, तो कभी स्लो हो जाते हैं।
मम्मी की मोन करने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजने लगती है। मम्मी किसी भी समय झड़ सकती हैं पर अंकल ऐसा होने नहीं देते।
मम्मी: “आआह योगेश जी… प्लीज़ रुक मत।”
अंकल: “इतनी जल्दी क्या है वर्षा? अभी भी मुझे अधूरा छोड़ना है क्या जैसे शाम को तू मुझे तड़पता छोड़ आई थी?”
अंकल अब मम्मी के ऊपर आना शुरू कर देते हैं। अंकल का लंड भी मम्मी की जाँघों से होता हुआ मम्मी की चुत पर आ जाता है लेकिन अंकल अपना लंड मम्मी की चुत में नहीं डालते।
अंकल मम्मी की नेक को किस करते हुए मम्मी के होठों की ओर बढ़ते हैं। मम्मी झट से अंकल के होठों को चूमना शुरू कर देती हैं।
मम्मी: “आआह योगेश जी… प्लीज़ अब मत तरसाओ।”
अंकल: “तो डाल दूँ अपना लंड तेरी चुत में?”
मम्मी: “नहीं… प्लीज़।”
अंकल: “तो तू क्या चाहती है मैं तेरी चुत ही चाटता रहूँ?”
मम्मी: “प्लीज़ योगेश जी… तुमने पहले भी तो कई बार पिछले छह महीनों से किया है ऐसे।”
अंकल: “हाँ किया है पर आज तेरा व्रत… पर तेरी चुत में ही झड़ूँगा मैं। बोल ना एक बार कि तू मेरी रांड है।”
मम्मी: “मेरा आज व्रत है… प्लीज़ रहने दो आज। कल कर लेना। प्लीज़ मेरी बात मानो।”
अंकल: “कैसा व्रत जान? व्रत में किसने कहा चुदाई नहीं करते हैं? व्रत में गलत काम नहीं करते हैं लेकिन प्यास तो बुझाना ज़रूरी है मेरी जान। तू हा कह या ना कह… चुत तो तेरी मैं चोदूँगा ही आज।”
मम्मी: “प्लीज़ मैं आज नहीं… प्लीज़ मैं आपको आज अपनी चुत नहीं दे सकती हूँ। कल जितना मन करे चोद लेना मुझे। प्लीज़ आज व्रत में चुदाई पाप है।”
अंकल: “साली रांड… चुत चटाने में तू पाप नहीं कर रही है लेकिन मेरे मज़े की बात आए तो तू सती सावित्री बनकर पाप कह रही है। देख अब नखरे बंद कर और मैं तेरी चुत कैसे चोदता हूँ।”
ये कहकर अंकल अपना लंड पकड़कर मम्मी की चुत में डालने की कोशिश करते हैं। पर पता नहीं कहाँ से मम्मी के शरीर में इतनी जान आती है कि वो अंकल को अपने ऊपर से धक्का देकर बिस्तर से भागने लगती हैं। भागने की कोशिश में अंकल का शरीर मम्मी की दोनों टाँगों के बीच में आ जाता है।
मम्मी अंकल को क्रॉस करने की कोशिश करती हैं पर अंकल मम्मी को वहीं पकड़ लेते हैं और फिर से मम्मी की चुत पर अपना मुँह रख देते हैं।
मम्मी भी मानो जैसे वहीं रुक जाती हैं। अंकल मम्मी की चुत पर जीभ चलाते हुए मम्मी की टाँगों से पकड़कर मम्मी को वापस अपने शरीर पर बैठा लेते हैं और मम्मी की चुत को चाटते रहते हैं।
अंकल अपना एक हाथ मम्मी के बूब्स पर रखकर अपनी जीभ मम्मी की चुत में डालकर मम्मी की चुत का रस पीने लगते हैं। मम्मी की नज़रें भी अंकल को ऐसा करते देख वहीं टिक जाती हैं।
मम्मी उठना चाहती हैं और अंकल को ऐसे अपनी चुत चाटते हुए देख शर्म से पानी-पानी हो जाती हैं।
मम्मी की नज़रों में देख अंकल फिर थोड़ा रुकते हैं तो मम्मी अंकल का सर पकड़कर उसे अपनी चुत चटाने लगती हैं।
अंकल भी इस दौरान अपना लंड हिला रहे हैं जो मम्मी ने पैंट की ज़िप खोलकर और अंडरवियर के छेद में से निकाला था। वो ज़्यादा देर मम्मी को चुत नहीं चाटते जिससे मम्मी के सब्र का बाँध टूटने लगता है।
मम्मी: “आखिर तुम चाहते क्या हो योगेश जी?”
अंकल: “जब तक तू मुझे मज़े नहीं देगी मैं आज पूरी रात तुझे तड़पाऊँगा। व्रत का बहाना करके सती सावित्री बनने का नाटक छोड़ जान और मेरा लंड पकड़ ले जान। जैसे पिछले छह महीनों से रोज़ पकड़ती है वैसे ही।”
मम्मी कुछ बोलती नहीं तो अंकल मम्मी को घूमकर बैठने के लिए कहते हैं।
अब मम्मी का मुँह अंकल के लंड की तरफ़ है और मम्मी की चुत अंकल के मुँह पर।
अंकल मम्मी की गाँड पर एक ज़ोर से थप्पड़ मारते हैं जिससे मम्मी की चीख सी निकल जाती है।
अंकल मम्मी की चुत पर जीभ रखकर मम्मी को आगे को झुकाते हैं।
अंकल: “चल अब शुरू भी हो जा।”
मम्मी भी अंकल का लंड हाथ में लेकर हिलाने लगती हैं।
मम्मी के लंड को हिलाने से अंकल और उत्तेजित हो जाते हैं। वो मम्मी की चुत में अंदर तक जीभ डालकर घुमाने लगते हैं।
लंड को हिलाते हुए मम्मी रुक गईं और लंड को गौर से देखने लगीं और फिर से सहलाना चालू कर दिया। मम्मी ने लंड को थोड़ी देर लंड सहलाने के बाद मम्मी ने अंकल के लंड को अपने चेहरे पर किया और उसे अपने चेहरे पर फिराने लगीं… थोड़ी देर लंड अपने चेहरे पर फिराने के बाद मम्मी ने अपनी जीभ निकाली और अंकल के लंड को चाटने लगीं। मम्मी अपनी जीभ पूरे लंड पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक फिराने लगीं।
अंकल: “स्स्स्स… आआआह्ह्ह्ह… रांड तू मुझे पागल कर देगी… आआआह्ह्ह… रांड इसे मुँह में लो… चूसो… म्म्म्म…”
मम्मी को शैतानी सूझती है। वो अंकल के लंड के सुपाड़े पर ज़ुबान हल्के से फेर देती हैं। वो ऐसा बार-बार करती हैं। सुपाड़े को जीभ से चाटती हैं और पेशाब करने वाले छेद में भी जीभ फिराने लगती हैं।
मम्मी बहुत ही कामुक हो रही थीं। पेशाब करने वाला छेद बहुत ही छोटा होता है लेकिन उसके छेद को चाटने से लग रहा था जैसे वो छेद में अपनी जीभ घुसाना चाहती हों।
अंकल: “आआआह्ह्ह… वर्षा… तुम्हारे नरम ओठ कितने गरम हैं… आआह… मज़ा आ रहा है।”
अंकल: “स्स्स्स… आआह… रांड ये क्या कर रही हो… बड़ा मज़ा आ रहा है… आआआह्ह्ह…”
मम्मी अपनी आँखें ऊपर करके अंकल को शरारत भरी मुस्कान देते हुए अपना काम जारी रखती हैं।
अंकल: “आआह… तुम्हें पता है रांड… आदमियों को कैसे खुश करें।”
मम्मी: “तो शुरुआत है… आगे-आगे देखो… होता है क्या।” वो अभी भी अंकल को देख रही हैं।
अंकल: “स्स्स्स… आआआह्ह्ह… रांड तुम मुझे पागल कर दोगी… आआआह्ह्ह… रांड मुँह में लो… चूसो… म्म्म्म…”
मम्मी इतना सुनते ही अंकल का लंड मुँह में ले लेती हैं और चूसने लगती हैं।
अंकल भी पूरे मज़े से लंड चुसवा रहे हैं। मम्मी के मुँह की गरमाहट ने अंकल के लंड में मानो हलचल सी मचा दी थी… फिर मम्मी ने अंकल के पैंट का हुक भी खोल दिया और पैंट और अंडरवियर को नीचे खिसका दिया।
मम्मी फिर अपनी जीभ अंकल के लंड के टोपे पर ले जाती हैं और उनके सुपाड़े को बड़े आराम से चाटने लगती हैं… फिर धीरे-धीरे वो अपने चूसने की रफ्तार बढ़ाने लगती हैं।
अंकल इस समय जन्नत में थे… मम्मी अपनी जीभ अंकल के लंड पर चला रही थीं जिससे अंकल अब झड़ने के बेहद करीब थे… कभी-कभी वो नीचे अपनी जीभ फेरते हुए उनके लंड के दोनों बॉल्स पर ले जातीं और वहाँ भी चाट लेतीं… फिर अंकल ने मम्मी को अपने ऊपर से हटा दिया और अब मम्मी अकेली अंकल का लंड चूस रही थीं। अंकल मम्मी की चुत नहीं चूस रहे थे।
इस वक्त अंकल का लंड मम्मी के थूक से पूरा गीला हो गया था और चमक रहा था… मम्मी एक बार तो अंकल के बॉल्स को अपने मुँह में पूरा लेकर चूस लेतीं जिससे अंकल और उछल पड़ते हैं… ऐसे ही काफ़ी देर तक मम्मी अंकल के लंड से खेलती हैं… और इधर अंकल का भी लंड पर प्रेशर बढ़ने लगा था। वो अब बहुत जल्दी उनका होने वाला था इसलिए वो झट से अपना लंड मम्मी के मुँह से हटा लेते हैं…
मम्मी अंकल को देखकर बहुत हौले-हौले मुस्कुराने लगती हैं… तभी अंकल वहाँ से उठते हैं और दोनों फिर से किस करने लगते हैं। दोनों अपने हाथों को एक-दूसरे के नंगे बदन पर घुमाने लगते हैं।
अब मम्मी ने किस करते हुए अंकल के नौ इंच के तगड़े लंड को हाथ में लेकर मुठियाने लगीं और अंकल तो मम्मी के ओठ चूसने में लगे थे।
अंकल फील करते हैं कि मम्मी भी अपनी चुत का मिलान अंकल के लंड से करा रही हैं। मुझे इसलिए पता चला क्योंकि मम्मी भी अपनी कमर को लंड पे रगड़ रही थीं जो मुझे विंडो से दिखा।
अब अंकल समझ जाते हैं कि यही सही टाइम है मम्मी का पेटीकोट उतार फेंकने का।
अंकल मम्मी के बूब्स चूसते हुए अपना एक हाथ मम्मी के पेट पर फेरते हुए मम्मी के पेटीकोट में डाल देते हैं।
जैसे ही अंकल का हाथ मम्मी की चुत पर पहुँचता है मम्मी मचल उठती हैं।
अंकल अपनी उँगलियों से मम्मी की चुत को सहलाने लगते हैं। अंकल की उँगलियाँ पूरी तरह मम्मी के चुत के रस में भीग जाती हैं।
मम्मी: “आह योगेश्श्श्श जी… प्लीज़…”
अंकल: “हाँ मेरी जान… आआह… कितनी चिकनी चुत है तेरी।”
मम्मी: “बस योगेश जी… अब और नहीं।”
अंकल: “तूने बाल मेरे लिए हटाए हैं ना मेरी जान?”
मम्मी: “हम्म…”
अंकल: “अब से तेरी चुत ऐसे ही चिकनी रहनी चाहिए।”
अंकल मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोल देते हैं। मम्मी अंकल का हाथ बीच में ही रोक लेती हैं।
मम्मी: “प्लीज़ योगेश जी… ये मत उतारो। बस एक पेटीकोट ही बचा है मेरे शरीर पर।”
अंकल: “हटाने दे ना जान। मैं भी तो पूरा नंगा हो जाऊँगा। तू मेरा पैंट और अंडरवियर उतार देना।”
मम्मी: “समझो ना प्लीज़।”
अंकल: “आज मत रोक जान। आज तो मुझे भी तेरा व्रत पूरा करना है तेरी प्यास बुझाकर। मन भर के तेरी चुत पीने दे मुझे वर्षा।”
इतना कहकर अंकल मम्मी के पेट को किस करते हुए नीचे आने लगते हैं। जैसे-जैसे अंकल नीचे आते हैं मम्मी के पेटीकोट को भी नीचे सरकाते रहते हैं।
मम्मी की साँसें काफ़ी तेज़ हो चुकी हैं। वो जानती हैं कि अंकल अब क्या करने वाले हैं।
अंकल मम्मी की चुत के काफ़ी करीब आकर थोड़ा रुक जाते हैं।
मम्मी अंकल का इंतज़ार करती रह जाती हैं कि अब अंकल उनकी चुत को चाटेंगे। जब कुछ पलों तक अंकल चुत चाटना स्टार्ट नहीं करते तो मम्मी से रहा नहीं जाता। वो अपना सर उठाकर अंकल की ओर देखती हैं। अंकल भी इसी पल का इंतज़ार कर रहे थे। मम्मी से नज़रें मिलते ही वो अपना मुँह मम्मी की चुत से लगा देते हैं।
मम्मी ये सही नहीं पातीं। मम्मी के मुँह से सिर्फ़ एक ही शब्द निकलता है—“ओह फक…”
मम्मी के हाथ अपने आप अंकल के बालों में आ जाते हैं और जो सर मम्मी ने अंकल को देखने के लिए उठाया था वो वापस बिस्तर पर चला जाता है।
अंकल भी अपनी स्पीड बढ़ा देते हैं जिसकी वजह से मम्मी बिस्तर पर इधर-उधर मचलने लगती हैं।
अंकल बड़ी चालाकी से बीच-बीच में अपनी जीभ रोकते हैं कभी, तो कभी स्लो हो जाते हैं।
मम्मी की मोन करने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजने लगती है। मम्मी किसी भी समय झड़ सकती हैं पर अंकल ऐसा होने नहीं देते।
मम्मी: “आआह योगेश जी… प्लीज़ रुक मत।”
अंकल: “इतनी जल्दी क्या है वर्षा? अभी भी मुझे अधूरा छोड़ना है क्या जैसे शाम को तू मुझे तड़पता छोड़ आई थी?”
अंकल अब मम्मी के ऊपर आना शुरू कर देते हैं। अंकल का लंड भी मम्मी की जाँघों से होता हुआ मम्मी की चुत पर आ जाता है लेकिन अंकल अपना लंड मम्मी की चुत में नहीं डालते।
अंकल मम्मी की नेक को किस करते हुए मम्मी के होठों की ओर बढ़ते हैं। मम्मी झट से अंकल के होठों को चूमना शुरू कर देती हैं।
मम्मी: “आआह योगेश जी… प्लीज़ अब मत तरसाओ।”
अंकल: “तो डाल दूँ अपना लंड तेरी चुत में?”
मम्मी: “नहीं… प्लीज़।”
अंकल: “तो तू क्या चाहती है मैं तेरी चुत ही चाटता रहूँ?”
मम्मी: “प्लीज़ योगेश जी… तुमने पहले भी तो कई बार पिछले छह महीनों से किया है ऐसे।”
अंकल: “हाँ किया है पर आज तेरा व्रत… पर तेरी चुत में ही झड़ूँगा मैं। बोल ना एक बार कि तू मेरी रांड है।”
मम्मी: “मेरा आज व्रत है… प्लीज़ रहने दो आज। कल कर लेना। प्लीज़ मेरी बात मानो।”
अंकल: “कैसा व्रत जान? व्रत में किसने कहा चुदाई नहीं करते हैं? व्रत में गलत काम नहीं करते हैं लेकिन प्यास तो बुझाना ज़रूरी है मेरी जान। तू हा कह या ना कह… चुत तो तेरी मैं चोदूँगा ही आज।”
मम्मी: “प्लीज़ मैं आज नहीं… प्लीज़ मैं आपको आज अपनी चुत नहीं दे सकती हूँ। कल जितना मन करे चोद लेना मुझे। प्लीज़ आज व्रत में चुदाई पाप है।”
अंकल: “साली रांड… चुत चटाने में तू पाप नहीं कर रही है लेकिन मेरे मज़े की बात आए तो तू सती सावित्री बनकर पाप कह रही है। देख अब नखरे बंद कर और मैं तेरी चुत कैसे चोदता हूँ।”
ये कहकर अंकल अपना लंड पकड़कर मम्मी की चुत में डालने की कोशिश करते हैं। पर पता नहीं कहाँ से मम्मी के शरीर में इतनी जान आती है कि वो अंकल को अपने ऊपर से धक्का देकर बिस्तर से भागने लगती हैं। भागने की कोशिश में अंकल का शरीर मम्मी की दोनों टाँगों के बीच में आ जाता है।
मम्मी अंकल को क्रॉस करने की कोशिश करती हैं पर अंकल मम्मी को वहीं पकड़ लेते हैं और फिर से मम्मी की चुत पर अपना मुँह रख देते हैं।
मम्मी भी मानो जैसे वहीं रुक जाती हैं। अंकल मम्मी की चुत पर जीभ चलाते हुए मम्मी की टाँगों से पकड़कर मम्मी को वापस अपने शरीर पर बैठा लेते हैं और मम्मी की चुत को चाटते रहते हैं।
अंकल अपना एक हाथ मम्मी के बूब्स पर रखकर अपनी जीभ मम्मी की चुत में डालकर मम्मी की चुत का रस पीने लगते हैं। मम्मी की नज़रें भी अंकल को ऐसा करते देख वहीं टिक जाती हैं।
मम्मी उठना चाहती हैं और अंकल को ऐसे अपनी चुत चाटते हुए देख शर्म से पानी-पानी हो जाती हैं।
मम्मी की नज़रों में देख अंकल फिर थोड़ा रुकते हैं तो मम्मी अंकल का सर पकड़कर उसे अपनी चुत चटाने लगती हैं।
अंकल भी इस दौरान अपना लंड हिला रहे हैं जो मम्मी ने पैंट की ज़िप खोलकर और अंडरवियर के छेद में से निकाला था। वो ज़्यादा देर मम्मी को चुत नहीं चाटते जिससे मम्मी के सब्र का बाँध टूटने लगता है।
मम्मी: “आखिर तुम चाहते क्या हो योगेश जी?”
अंकल: “जब तक तू मुझे मज़े नहीं देगी मैं आज पूरी रात तुझे तड़पाऊँगा। व्रत का बहाना करके सती सावित्री बनने का नाटक छोड़ जान और मेरा लंड पकड़ ले जान। जैसे पिछले छह महीनों से रोज़ पकड़ती है वैसे ही।”
मम्मी कुछ बोलती नहीं तो अंकल मम्मी को घूमकर बैठने के लिए कहते हैं।
अब मम्मी का मुँह अंकल के लंड की तरफ़ है और मम्मी की चुत अंकल के मुँह पर।
अंकल मम्मी की गाँड पर एक ज़ोर से थप्पड़ मारते हैं जिससे मम्मी की चीख सी निकल जाती है।
अंकल मम्मी की चुत पर जीभ रखकर मम्मी को आगे को झुकाते हैं।
अंकल: “चल अब शुरू भी हो जा।”
मम्मी भी अंकल का लंड हाथ में लेकर हिलाने लगती हैं।
मम्मी के लंड को हिलाने से अंकल और उत्तेजित हो जाते हैं। वो मम्मी की चुत में अंदर तक जीभ डालकर घुमाने लगते हैं।
लंड को हिलाते हुए मम्मी रुक गईं और लंड को गौर से देखने लगीं और फिर से सहलाना चालू कर दिया। मम्मी ने लंड को थोड़ी देर लंड सहलाने के बाद मम्मी ने अंकल के लंड को अपने चेहरे पर किया और उसे अपने चेहरे पर फिराने लगीं… थोड़ी देर लंड अपने चेहरे पर फिराने के बाद मम्मी ने अपनी जीभ निकाली और अंकल के लंड को चाटने लगीं। मम्मी अपनी जीभ पूरे लंड पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक फिराने लगीं।
अंकल: “स्स्स्स… आआआह्ह्ह्ह… रांड तू मुझे पागल कर देगी… आआआह्ह्ह… रांड इसे मुँह में लो… चूसो… म्म्म्म…”
मम्मी को शैतानी सूझती है। वो अंकल के लंड के सुपाड़े पर ज़ुबान हल्के से फेर देती हैं। वो ऐसा बार-बार करती हैं। सुपाड़े को जीभ से चाटती हैं और पेशाब करने वाले छेद में भी जीभ फिराने लगती हैं।
मम्मी बहुत ही कामुक हो रही थीं। पेशाब करने वाला छेद बहुत ही छोटा होता है लेकिन उसके छेद को चाटने से लग रहा था जैसे वो छेद में अपनी जीभ घुसाना चाहती हों।
अंकल: “आआआह्ह्ह… वर्षा… तुम्हारे नरम ओठ कितने गरम हैं… आआह… मज़ा आ रहा है।”
अंकल: “स्स्स्स… आआह… रांड ये क्या कर रही हो… बड़ा मज़ा आ रहा है… आआआह्ह्ह…”
मम्मी अपनी आँखें ऊपर करके अंकल को शरारत भरी मुस्कान देते हुए अपना काम जारी रखती हैं।
अंकल: “आआह… तुम्हें पता है रांड… आदमियों को कैसे खुश करें।”
मम्मी: “तो शुरुआत है… आगे-आगे देखो… होता है क्या।” वो अभी भी अंकल को देख रही हैं।
अंकल: “स्स्स्स… आआआह्ह्ह… रांड तुम मुझे पागल कर दोगी… आआआह्ह्ह… रांड मुँह में लो… चूसो… म्म्म्म…”
मम्मी इतना सुनते ही अंकल का लंड मुँह में ले लेती हैं और चूसने लगती हैं।
अंकल भी पूरे मज़े से लंड चुसवा रहे हैं। मम्मी के मुँह की गरमाहट ने अंकल के लंड में मानो हलचल सी मचा दी थी… फिर मम्मी ने अंकल के पैंट का हुक भी खोल दिया और पैंट और अंडरवियर को नीचे खिसका दिया।
मम्मी फिर अपनी जीभ अंकल के लंड के टोपे पर ले जाती हैं और उनके सुपाड़े को बड़े आराम से चाटने लगती हैं… फिर धीरे-धीरे वो अपने चूसने की रफ्तार बढ़ाने लगती हैं।
अंकल इस समय जन्नत में थे… मम्मी अपनी जीभ अंकल के लंड पर चला रही थीं जिससे अंकल अब झड़ने के बेहद करीब थे… कभी-कभी वो नीचे अपनी जीभ फेरते हुए उनके लंड के दोनों बॉल्स पर ले जातीं और वहाँ भी चाट लेतीं… फिर अंकल ने मम्मी को अपने ऊपर से हटा दिया और अब मम्मी अकेली अंकल का लंड चूस रही थीं। अंकल मम्मी की चुत नहीं चूस रहे थे।
इस वक्त अंकल का लंड मम्मी के थूक से पूरा गीला हो गया था और चमक रहा था… मम्मी एक बार तो अंकल के बॉल्स को अपने मुँह में पूरा लेकर चूस लेतीं जिससे अंकल और उछल पड़ते हैं… ऐसे ही काफ़ी देर तक मम्मी अंकल के लंड से खेलती हैं… और इधर अंकल का भी लंड पर प्रेशर बढ़ने लगा था। वो अब बहुत जल्दी उनका होने वाला था इसलिए वो झट से अपना लंड मम्मी के मुँह से हटा लेते हैं…
मम्मी अंकल को देखकर बहुत हौले-हौले मुस्कुराने लगती हैं… तभी अंकल वहाँ से उठते हैं और दोनों फिर से किस करने लगते हैं। दोनों अपने हाथों को एक-दूसरे के नंगे बदन पर घुमाने लगते हैं।
अब मम्मी ने किस करते हुए अंकल के नौ इंच के तगड़े लंड को हाथ में लेकर मुठियाने लगीं और अंकल तो मम्मी के ओठ चूसने में लगे थे।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)