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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#18
Update 16

अंकल: “वर्षा, अब मेरी पैंट भी उतारकर इसे प्यार करो। ये तुम्हारे प्यार के लिए तरस रहा है।”

मम्मी फिर आगे बढ़ती हैं और अंकल का पैंट पे हाथ रखती हैं लेकिन खोलती नहीं। अंकल फिर से बोलते हैं तो मम्मी पैंट की ज़िप खोलती हैं और अंदर अंडरवियर पहना था अंकल ने तो मम्मी अंडरवियर के अंदर से लंड निकालती हैं तो लंड एकदम से बाहर निकलता है जैसे स्प्रिंग की तरह एकदम तना हुआ रॉड की तरह था।

मम्मी: “आआआह्ह्ह… ये तो काफ़ी मोटा और टाइट है। देखो कैसे गरम हो रहा है।”
लंड को देखने के बाद…

मम्मी अपने हाथों को अंकल के लंड की ओर बढ़ा तो देती हैं पर उसे सही से हिलाती नहीं।

मम्मी के हाथ में लंड आते ही अंकल मम्मी के बूब्स दबाने लगते हैं।

वहीं दूसरी ओर अंकल का लंड हाथ में लेते ही मम्मी के शरीर में मानो करंट दौड़ जाता है।

अंकल: “सही से पकड़कर हिलाओ ना वर्षा।”

मम्मी: “अब नहीं योगेश जी… प्लीज़। (लेकिन अपना हाथ वो लंड पर चलाती रहती हैं) आज मेरा व्रत है… प्लीज़।”

अंकल: “लगता है तेरी शर्म को मुझे ही उतारना पड़ेगा।”

अंकल मम्मी को वापस बिस्तर पर पटक देते हैं और मम्मी के ब्लाउज़ के हुक तोड़ मम्मी की ब्रा नीचे खींच देते हैं।

मम्मी के गोरे 36 के बूब्स मानो अंकल के हाथों में झूल जाते हैं।
अंकल मम्मी की चूचियों को मसलने लगते हैं।

अंकल: “आह वर्षा जान… तेरे ये बूब्स। आज इनका सारा रस पीना है मुझे। तूने शाम को मुझे धोखा देकर भाग आई तू।”

मम्मी को तड़पता देख अब अंकल कोई चांस नहीं छोड़ना चाहते थे। मम्मी अंकल को नंगा देखना नहीं चाहती थीं इसलिए वो अपनी आँखें बंद कर लेती हैं। अंकल इस बात का फायदा उठाने की सोचते हैं और मम्मी के ऊपर आने लगते हैं।

मम्मी अंकल को अपने ऊपर आता फील कर खुद को रोकने की कोशिश करती हैं पर शायद तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी।

मम्मी को अपने होठों पर अंकल की साँसें फील होने लगती हैं। वो समझ जाती हैं कि अंकल क्या करने वाले हैं। अंकल का लंड मम्मी की जाँघों में गड़ने लगता है जिसकी मदहोशी में न चाहते हुए भी वो अपने होठ अंकल के लिए खोल देती हैं।

मम्मी का इस तरह अपना मुँह खोलना अंकल के लिए जैसे खुला इशारा था। अंकल मम्मी की जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगते हैं।
अंकल के लंड और मम्मी की चुत के बीच अभी भी मम्मी का पेटीकोट एक बाधा बना हुआ था। हालाँकि अंकल ने पैंट और अंडरवियर पहना था लेकिन लंड बाहर था जैसे हम पेशाब करने के लिए निकालते हैं वैसे ही।

अंकल बड़ी चतुराई से मम्मी के होठों को चूसते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगते हैं। अंकल मम्मी के बूब्स को अपने हाथों में लेकर मसलने लगते हैं।

मम्मी को अहसास भी नहीं हो पाता कब अंकल मम्मी को अपने ऊपर लाकर मम्मी का ब्लाउज़ खींच देते हैं।
अंकल मम्मी की ब्रा की डोर भी खींच देते हैं।

ब्रा की डोर खुलते ही मम्मी समझ जाती हैं कि अब उनकी ब्रा पूरी तरह से उतारने वाली है। मम्मी झट से अंकल से चिपक जाती हैं जिससे अंकल उनकी ब्रा को पूरी तरह से न हटा पाएँ।
पर अंकल जानते थे कि उन्होंने मम्मी के शरीर पर कब्जा कर लिया है।

वैसे भी मम्मी अंकल के ताकतवर हाथों में एक कठपुतली सी बन चुकी थीं।
अंकल मम्मी को वापस पलटकर नीचे की ओर लिटा देते हैं और मम्मी की ब्रा को खींचने लगते हैं।

मम्मी: “प्लीज़ योगेश जी… मुझे अब छोड़ दो।”

अंकल: “क्यों अपनी तड़प मुझे नहीं मिटाने दे रही हो वर्षा?”

मम्मी: “मेरा आज फास्ट है इसलिए मैं आज ये काम नहीं करना चाहती हूँ। कल आप दिन भर मुझे चोद लेना।”

अंकल जानते हैं कि मम्मी सिर्फ़ मना कर रही हैं पर वो भी इस समय पूरी तरह अपने बदन की आग बुझाना चाहती हैं।
अंकल मम्मी के दोनों बूब्स अपने हाथों में लेकर मम्मी की निप्पल के चारों ओर अपनी जीभ फेरने लगते हैं।

मम्मी: “आआह… योोोगेेश्श्श्श जी…”

अंकल मम्मी की चुत पर अपना लंड लगा देते हैं और मम्मी के बूब्स को चूसना चालू रखते हैं लेकिन पेटीकोट के ऊपर से ही क्योंकि अभी पेटीकोट नहीं उतारा था। दोनों ही ऊपर से नंगे थे लेकिन नीचे से नहीं।

अंकल फील करते हैं कि मम्मी भी अपनी चुत का मिलान अंकल के लंड से करा रही हैं। मुझे इसलिए पता चला क्योंकि मम्मी भी अपनी कमर को लंड पे रगड़ रही थीं जो मुझे विंडो से दिखा।
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - Yesterday, 07:56 AM



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