3 hours ago
Update 15
चुदाई के कारण मम्मी थक गई थीं। रात को पापा-मम्मी साथ में सोए थे और मैं दूसरे रूम में। दादी मेरे दोस्त के घर ही रुक गई थीं।
नेक्स्ट डे मम्मी का व्रत था। मम्मी ने पापा से ऑफिस जाते समय कहा, “मेरा फास्ट है।”
पापा ने कहा, “तो आराम करना।” और पापा ऑफिस चले गए।
पापा के जाने के बाद मैंने मम्मी से कहा, “क्या मम्मी, आज आपने व्रत क्यों रखा?”
मम्मी: “क्यों? क्या मैं व्रत नहीं रख सकती हूँ?”
मैं: “नहीं मम्मी, मेरा मतलब… आप दिन भर भूखी रहोगी, इसलिए पूछा।”
मम्मी: “बेटा, मेरी आदत में है।”
मैं: “ओके मम्मी। और मम्मी, आज दादी भी घर पे नहीं, पापा ऑफिस गए हैं तो आप अंकल के घर चली जाओ कंप्यूटर सीखने।”
मम्मी: “नहीं, मेरा फास्ट है इसलिए मैं नहीं जाऊँगी और न ही उन्हें यहाँ बुलाना।”
मैं: “क्यों मम्मी? कंप्यूटर सीखने में क्या हरज़ है? आपको फास्ट से क्या?”
मम्मी: “बेटा, योगेश जी कंप्यूटर सिखाने आते हैं तो वो मुझे सेड्यूस करने की कोशिश करते हैं। मैं तुझे कितनी बार बता चुकी… जो कि गलत है। मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और तू मेरे बेटे होकर एक गैर मर्द के साथ…”
मैं: “मम्मी, इसमें कुछ गलत नहीं। अंकल आपको लाइक करते हैं। उनका डिवोर्स हो गया है, वो सिंगल हैं। और पापा आपको टाइम नहीं देते। आपको भी नीड है।”
मम्मी चिल्लाते हुए: “चुप! बकवास बंद कर!”
मैं: “मम्मी, मैं आपका बेटा हूँ। मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ। पापा आपको टाइम नहीं देते, ये मैं इतना समझता हूँ। आप अभी तैंतीस की हो और इस उम्र में प्यार की सख्त ज़रूरत होती है जो पापा आपको नहीं देते। और आप कब तक अपनी इच्छाओं को दबाते रहोगी? कब तक? और आप पति के होते हुए भी और माँग में सिंदूर होते हुए भी विधवा का जीवन जी रही हो। आपको भी एक मर्द की सख्त ज़रूरत है। मैं जानता हूँ पापा की उम्र ज़्यादा है आपसे… वो आपसे बीस साल बड़े हैं और वो आपको प्यार नहीं करते। प्लीज़ मम्मी, अंकल का प्यार स्वीकार कर लो।”
मम्मी: “नहीं बेटा। मैं बिना मर्द के अपना जीवन हर लूँगी। भले ही तेरे पापा का प्यार मुझे न मिले, लेकिन मैं एक गैर मर्द की बाँहों में नहीं जा सकती। मैं किस मुँह से समाज का सामना करूँगी?”
मैं: “मम्मी, मैंने आपको कितनी बार कहा है… आप दूसरों की बातों का ध्यान मत दो। कोई कुछ नहीं सोचेगा। मैंने आपको बताया था मेरे दोस्त की मम्मी उनके चाचा से प्यार करती हैं तो उनसे तो कोई कुछ नहीं कहता। मम्मी, आपको अपने दिल की ख्वाहिश पूरी करने का अधिकार है। और मम्मी, मैं आपके साथ हूँ। किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। सिर्फ़ आपको, मुझे और अंकल को पता रहेगा। और मम्मी, मैं आपसे वादा करता हूँ… मैं आपके साथ हूँ।”
मम्मी: “बेटा, ये गलत है। और एक न एक दिन किसी को पता चल ही जाएगा। और किसी ने देख लिया तो मैं मर जाऊँगी।”
मैं: “मम्मी, मैं वादा करता हूँ… जब भी आप अंकल से मिलोगी, मैं इस बात का ध्यान रखूँगा कि कोई देखे ना। मैं खुद आपको अंकल से मिलवाऊँगा और वादा करता हूँ।”
मम्मी: “क्या बेटा? ऐसे कैसे होगा? कोई देख ही लेगा। तू कब तक ध्यान देगा? मान ले कभी योगेश जी ने मुझे बुलाया अपने घर पे या वो अपने घर आए तो क्या करेगा? कोई क्या सोचेगा… ये रूम में एक गैर मर्द के साथ…”
मैं: “मम्मी, मैं किसी को पता नहीं चलने दूँगा। आप मुझ पे भरोसा करो। जब आप अंकल के साथ अकेली होंगी तब मैं आपके रूम के बाहर रहूँगा।”
मम्मी हँसते हुए: “चुप नालायक बेशरम! क्या बोल रहा है तू? तुझे पता है तूने क्या बोला? तू मम्मी को एक गैर मर्द के साथ रूम में भेजकर उनकी पहरेदारी करेगा? तुझे शर्म नहीं आएगी? तू तेरी ही मम्मी और एक गैर मर्द की पहरेदारी कर रहा है?”
मैं: “नहीं मम्मी, इसमें शर्म की क्या बात है? मैं तो एक बेटा होने का फ़र्ज़ निभाऊँगा। एक बेटे का फ़र्ज़ होता है अपनी माँ की खुशियों का ख्याल रखना, अपनी माँ को खुश रखना और अपनी माँ को खुशियाँ दिलाना… चाहे पापा से या फिर अंकल से। और अपनी माँ की रक्षा करना, अपनी माँ को सुरक्षा देना… एक बेटे का फ़र्ज़ है। हर बेटे का फ़र्ज़ होता है उसकी माँ की खुशियों में कोई बाधा न आए, उसकी माँ की खुशियाँ भंग न हों, उसकी माँ की खुशियों में कोई अड़चन न हो, उसकी माँ की खुशियों में कोई डिस्टर्बेंस न हो… उसके लिए माँ की पहरेदारी करना एक बेटे के लिए गर्व की बात है मम्मी।
मम्मी, जब आपने मुझे अपने पेट में नौ महीने रखकर मेरी सुरक्षा की और मुझे जन्म देने का अत्यंत दर्द सहा और मुझे अपना दूध पिलाकर पाला, मेरी लैटरिंग साफ की, मेरे कपड़े धोए… आपके इतने एहसान हैं मुझ पे कि मैं उन्हें अपनी जान देकर भी बेटा माँ के एहसानों को नहीं चुका सकता। तो क्या मैं आपकी पहरेदारी भी नहीं कर सकता?”
मम्मी मेरी बातों को ध्यान से सुन रही थीं और बोलीं, “बेटा, मैं बहुत खुशनसीब हूँ जो मुझे तेरे जैसे लाल मिला। तू मेरे कलेजे का टुकड़ा है मेरे लाल।
पर बेटा, मैंने सोच लिया है… भले ही मुझे तेरे पापा प्यार करते हैं, मैं उसी में खुश हूँ। और योगेश जी के साथ कोई गलत काम नहीं करूँगी।”
मैं: “लेकिन मम्मी…”
मम्मी बीच में ही बोलीं, “चुप! एकदम चुप! अब एक भी शब्द नहीं बोलना। अब तू जाकर स्टडी कर। मैं नाश्ता बनाती हूँ।” और फिर मम्मी किचन में चली गईं।
फिर नाश्ते के बाद मम्मी अपने रूम में गईं और फिर पूरा दिन ऐसे ही निकल गया। शाम को पाँच बजे मम्मी बोलीं, “बेटा, मैं छत पे जा रही हूँ और तू नीचे ही रहना।” और मम्मी ऊपर चली गईं। तो मैंने सोचा आज तो उनका फास्ट है तो ये अंकल से दूर रहेगी, इसलिए मैं ऊपर नहीं गया। और फिर एक घंटे बाद मम्मी छत से दोस्ती हुई हँसती हुईं और सीधे रूम में चली गईं। मुझे कुछ समझ में नहीं आया और न ही मैंने इसपर ध्यान दिया।
रात को पापा ने मुझे फोन करके कहा वो आज नहीं आएँगे, कल आएँगे। मैंने मम्मी को भी बता दिया और आज घर पे सिर्फ़ मैं और मम्मी ही थे। ये जानकारी मैंने अंकल को भी दे दी।
मैंने फिर से मम्मी से कहा, “मम्मी, अंकल को कंप्यूटर सिखाने के लिए बोलो।”
मम्मी ने मुझे बीच में रोक दिया हाथ के इशारे से चुप रहने का कहा बिना कुछ बोले ही और मैं चुप हो गया।
मम्मी ने लाल कलर की ड्रेस पहनी। लाल कलर की ड्रेस में मम्मी आज अलग ही दिख रही थीं। बार-बार अपने आप को मिरर के आगे देख वो खुद ही खुश हो रही हैं कि भगवान ने उसे कितना सुंदर बनाया है।
अभी रात को आठ पीएम ही हुए थे तो मैं खाना खाकर अपने रूम में स्टडी करने चला गया तो मम्मी ने कहा, “बेटा, आज मेरे रूम में ही सो जाना।”
मैं जानता था मम्मी मुझे अपने रूम में सुलाना चाहती हैं ताकि वो अंकल से चुदने से बच जाएँ। लेकिन मुझे अंकल ने बोला था तू दूसरे रूम में सोना और मैं आठ बजे आकर तेरी मम्मी की चुत फाड़ूँगा। इसलिए मैं जल्दी आठ बजे रूम में आ गया था।
मैं: “नहीं मम्मी, मुझे नींद आ रही है इसलिए मैं अपने रूम में ही सोऊँगा।”
मम्मी: “ठीक है, मैं भी तेरी ही रूम में सो जाऊँगी।”
मैं: “नहीं मम्मी, मैं अकेला सोऊँगा।”
मम्मी: “नहीं, मैंने कहा ना… मैं तेरे साथ में सोऊँगी। इसलिए मैं किचन का काम करके एक घंटे में आकर तेरे साथ सो जाऊँगी। जब तक तू सो जा।” और मम्मी मेरे रूम से चली गईं।
मेरे पास अंकल का कॉल आया और बोले, “ज़ीने का गेट खोल जल्दी। मैं आ गया हूँ।”
मैं: “अंकल, आप मम्मी को बोलो तो वो खोल देंगी।”
अंकल: “मैंने वर्षा को बोला तो उसने मना कर दिया। बोली आज मेरा व्रत है इसलिए वो आज मुझसे दूर रहेगी।”
मैं: “तो फिर आज रहने दो।”
अंकल: “नहीं बेटा। जब तक तेरी मम्मी की चुदाई नहीं करूँगा मुझे नींद नहीं आएगी। इसलिए गेट खोल।”
फिर मैं धीरे से रूम से निकला और देखा मम्मी किचन में हैं। और मैंने जाकर ज़ीने का गेट खोल दिया। अंकल अंदर आए और मैं रूम में आ गया और रूम की विंडो से देखने लगा। मम्मी किचन में काम करती साफ नज़र आ रही थीं और अंकल हॉल में थे और धीरे-धीरे किचन में जाने लगे।
मम्मी किचन में काम कर रही थीं।
मम्मी की मखमली नाज़ुक सी गाँड अंकल की तरफ़ थी जिसे देख अंकल अपने आप को रोक नहीं पाए।
अचानक अंकल ने अपने पैंट की जेब से एक सोने की चेन निकाली और हाथ में चेन लिए मम्मी को पीछे से आकर अपनी गोद में उठा लेते हैं, जिसे देख मम्मी एकदम चौंक जाती हैं।
मम्मी: “आप अंदर कैसे आ गए?”
अंकल: “मैं तो अपनी जान की प्यास बुझाने आया था जो कल अधूरी रह गई।”
मम्मी: “आज नहीं… आज मेरा व्रत है इसलिए…”
अंकल: “नहीं जान… आज तो तेरी चुत में लंड डालकर तेरी प्यास बुझाऊँगा।”
मम्मी: “चुपचाप चले जाओ नहीं तो मैं चिल्लाकर अंकुश को बुला लूँगी।”
अंकल: “अंकुश ने ही तो गेट खोला है और उसी ने कहा है जाकर मम्मी को प्यार करो।”
इतना कहकर अंकल मम्मी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा देते हैं और अपने हाथ मम्मी के बूब्स की ओर बढ़ा देते हैं।
मम्मी अंदर की ओर भागने लगती हैं, लेकिन अचानक मम्मी को लगता है जैसे उनकी साड़ी का पल्लू कहीं अटक गया है।
आज अंकल मम्मी को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता था। अंकल ने पहले ही मम्मी की साड़ी पर अपना पैर रख दिया था।
अंकल मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ उसे खींचने लगते हैं और उसे खींचकर दूर फेंक देते हैं।
मम्मी अपने बूब्स को अपने हाथों से ढकने की नाकाम कोशिश करती हैं। अंकल भी मम्मी के पीछे आ कर मम्मी के हाथों को जकड़ लेते हैं।
अंकल का लंड मम्मी की गाँड में धँस जाता है। मम्मी के शरीर की कोमलता अंकल की हवस को और भड़का रही है।
मम्मी: “योगेश जी प्लीज़ मुझे छोड़ दो।”
अंकल: “मान जाओ ना वर्षा… क्यों खुद भी तरस रही हो और मेरी भी प्यास बढ़ा रही हो।”
मम्मी: “प्लीज़ आज रहने दो… मेरा फास्ट है… प्लीज़ मैं आज भूखी हूँ।”
अंकल: “मैं जानता हूँ आज तू भूखी है… इसलिए तो तुझे अपना लंड तेरी चुत में डालकर तेरी भूख मिटाऊँगा।”
मम्मी: “मेरा आज फास्ट है इसलिए मैं आज आपको मेरा फायदा नहीं उठाने दूँगी। आप हमेशा मेरा फायदा उठाते हैं।”
अंकल मम्मी की एक नहीं सुनते हैं और मम्मी के होठों को चूमना शुरू कर देते हैं।
अंकल अपनी जीभ से मम्मी के होठों को चाटते हुए उसके बदन को मसलना शुरू कर देते हैं।
अंकल: “मैंने आपका फायदा उठाया या आपने वर्षा?”
मम्मी: “क्यों? मैंने क्या किया?”
अंकल: “आप तो अपनी चुत झड़ने के बाद उठकर भाग गईं। प्यासा तो मुझे ही रहना पड़ा ना। अभी शाम को…”
(अब मुझे समझ में आया था कि मम्मी शाम को एक घंटे के ऊपर गई थीं और छह बजे दोस्ती हुई हँसती हुईं आई थीं और सीधे अपने रूम में चली गई थीं। इसका मतलब वो छत के रास्ते अंकल के घर जाकर चुत चटवाकर भागकर आई थीं।)
मम्मी: “तुम मेरी बात समझो योगेश जी… मैं शाम को भाग गई थी आपकी हरकतों की वजह से। लेकिन मैं आज ये सब नहीं करना चाहती हूँ। आज मेरा फास्ट है।”
अंकल: “वर्षा ये तो गलत है ना।”
मम्मी: “आखिर तुम चाहते क्या हो मुझसे फिर?”
अंकल: “ज़्यादा कुछ नहीं वर्षा… बस मेरा लंड झड़ने में मेरी मदद कर दो। मैं तुम्हारा फास्ट नहीं तुड़वा रहा हूँ… बस मेरे लंड का पानी निकाल दो।”
ये कहकर अंकल मम्मी के बदन से खेलना चालू रखते हैं और मम्मी के बूब्स को मसलने लगते हैं। न चाहते हुए भी मम्मी भी लगातार अंकल के द्वारा अपनी गाँड में लंड रगड़ने और उनके शरीर को चूमने की वजह से गरम होने लगती हैं।
मम्मी अंकल को मना तो करती हैं पर फिर भी अंकल समझ जाते हैं कि मम्मी गरम होने लगी हैं।
अंकल: “वर्षा मेरा लंड देखो ना कैसा तड़प रहा है आपके लिए। एक बार इसे मेरे पैंट से बाहर निकालकर अपने हाथ में ले लो प्लीज़।”
मम्मी: “श्श्श… योगेश जी मुझे प्लीज़ जाने दो… ये सब सही नहीं है आज के लिए। कल कर लेना।”
अंकल मम्मी के ब्लाउज़ को कंधे से नीचे खींचने लगते हैं जिससे मम्मी के ऊपर के दो बटन भी टूट जाते हैं। मम्मी थोड़ा आगे होने की कोशिश करती हैं पर अंकल मम्मी को ऐसे ही पीछे से खींचकर बेडरूम में ले जाने लगते हैं। तो मैं भी अपने रूम से निकलकर मम्मी के रूम की विंडो पे चला जाता हूँ और देखता हूँ अंकल ने मम्मी को बिस्तर पे पटक दिया है। और रूम का गेट ओपन रहता है।
मम्मी को ऐसा लगता है जैसे उसके शरीर में जान न रही हो। वो चाहकर भी उठ नहीं पातीं।
अंकल: “ठीक है… मैं कुछ नहीं करूँगा। लेकिन आप एक काम कर दीजिए।”
मम्मी: “क्या?”
अंकल: “मुझसे अपना पाँव चटवा लो और मैं चला जाऊँगा।”
मम्मी: “छी… आप क्या बोल रहे हो? मैं ऐसा नहीं कर सकती हूँ। मैं आपको पति मानती हूँ और आप… छी…”
अंकल: “आपको मेरी कसम वर्षा।”
मम्मी: “नहीं… मैं आपसे अपना पाँव नहीं चटवाऊँगी। और मुझे माफ कर देना… मैं आपको आज खुश नहीं कर पाऊँगी।”
लेकिन अंकल ने मम्मी का एक पाँव उठाया और अपने चेहरे के पास ले आए। और मम्मी बार-बार मना कर रही थीं—“नहीं… नहीं… प्लीज़ ऐसा मत करो… मेरे पैर गंदे हैं… प्लीज़ रुक जाओ।” लेकिन अंकल नहीं रुके।
अंकल बड़े गौर से मम्मी को रिक्वेस्ट करते देख रहे थे कैसे वो अंकल को मना कर रही थीं—“मेरा पैर मत चाटो।”
अब अंकल को भी मज़ा आने लगा था मम्मी को गिड़गिड़ाते देख। और वो मम्मी के पैर का अंगूठा अपने होठों पर रख लेते हैं और अंगूठे को अपने होठों पे धीरे-धीरे फेरने लगते हैं। फिर अंकल अपना मुँह खोल लेते हैं और मम्मी के अंगूठे को मुँह में लेकर चूसने लगते हैं। अंकल की इस हरकत से मम्मी के जिस्म के रोएँ एक बार फिर से खड़े हो जाते हैं और मम्मी की साँसें एक बार फिर से तेज़ हो जाती हैं।
मम्मी भी बड़े गौर से अंकल के चेहरे को देखे जा रही थीं… हवस अब मम्मी की आँखों में भी साफ देखी जा सकती थी। अंकल अब सब कुछ भूलकर मम्मी के पाँव और उसके तलवे को अपने होठों में लेकर चूस और चाट रहे थे। अंकल को देखने में ऐसा लग रहा था जैसे अंकल को दुनिया की सबसे प्यारी चीज़ मिल गई हो। मम्मी की साँसें अब भारी होने लगी थीं… अब मम्मी की भी आँखें सुरख लाल हो चुकी थीं… काफ़ी देर तक अंकल मम्मी के पाँव के हर उँगली को बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर चूसते जा रहे थे… आज उन्हें भी इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था।
मम्मी के मुँह से एक बहुत ही धीमी सिसकारी निकल रही थी… लज़्ज़त से मम्मी की आँखें एक बार फिर से बंद हो गई थीं… इधर धीरे-धीरे अंकल अपनी जीभ की रफ्तार बढ़ाते जा रहे थे। मम्मी फिर से अंकल का सर अपने हाथों में पकड़ लेती हैं और कसकर उसे अपने सीने पर ज़ोर से दबाने लगती हैं। अंकल भी अब कहाँ रुकने वाले थे… इस वक्त अंकल का लंड अब पूरा खड़ा हो गया था…
मम्मी की आँखें बिल्कुल नशीली हो चुकी थीं… वो अब इस समय मदहोशी के आलम में थीं… कुछ देर बाद अंकल अपनी जीभ मम्मी के निप्पल्स पर ब्लाउज़ के ऊपर से ही फेरते हैं… तभी मम्मी झट से अंकल से दूर होने की कोशिश करती हैं लेकिन अंकल मम्मी की टाँगों को लड़के पकड़ लेते हैं और फिर…
अंकल मम्मी की टाँगों को चूमते हुए ऊपर की ओर बढ़ जाते हैं।
अंकल के ऐसे करने से मम्मी का पेटीकोट भी ऊपर को खिसक जाता है।
मम्मी की गोरी जाँघों को देख अंकल मम्मी के पेटीकोट में हाथ डाल देते हैं और मम्मी की गाँड को मसलना शुरू कर देते हैं।
मम्मी धीरे-धीरे आहें भरने लगती हैं।
अंकल अपना हाथ मम्मी की पैंटी की इलास्टिक पर ले जाते हैं।
मम्मी समझ जाती हैं कि अंकल उनकी पैंटी उतारने वाले हैं।
मम्मी अंकल को मना करती हैं पर अंकल मम्मी की पैंटी को नीचे खींच देते हैं, और मम्मी के कानों में कहते हैं कि जान आज अपनी चुत नहीं चटवाना चाहोगी मुझे।
अंकल जानते हैं कि मम्मी चुत चाटने से पागल सी हो जाती हैं। वो मम्मी के मना करने के बावजूद अपनी जीभ मम्मी की चुत पर लगा देते हैं।
अब मम्मी का सारा विरोध लगभग खत्म हो जाता है। अंकल एक कुत्ते की तरह मम्मी की चुत को चाटकर मम्मी को हवस की आग में डूबने को मजबूर कर देते हैं। मम्मी बार-बार अंकल का नाम लेने लगती हैं जिसे सुन अंकल मम्मी की चुत में अपनी जीभ डाल-डाल कर उसे हल्का-हल्का बाइट करते हुए मम्मी की चुत का रस पीने लगते हैं।
मम्मी की सिसकारियाँ बढ़ती देख अंकल मम्मी को और तड़पाने लगते हैं। मम्मी अंकल के बालों में हाथ डाल उसे अपनी चुत पर प्रेस करने लगती हैं और अपनी लेग्स में अंकल को बाँधने की कोशिश करती हैं।
अंकल समझ जाते हैं कि मम्मी झड़ने के लिए ऐसा कर रही हैं, क्योंकि एक बार पहले भी उनके साथ ऐसा हो चुका है शाम को। पर अब अंकल किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहते थे। अंकल मम्मी की चुत चाटना उसी समय रोक देते हैं और सामने खड़े होकर अपने कपड़े उतारने लगते हैं।
मम्मी अंकल की ओर तरसती निगाहों से देखती हैं तो अंकल मम्मी को देख हँस पड़ते हैं। अंकल की हँसी मम्मी को झकझोर देती है। वो अपने शरीर की सारी इच्छाशक्ति बटोर कर एक बार फिर अपने आप को सँभालने की कोशिश करती हैं। अंकल को कपड़े उतारते देख मम्मी न चाहते हुए भी बिस्तर से उठ जाती हैं पर अंकल मम्मी को वहीं पकड़ लेते हैं।
अंकल मम्मी की कमर में हाथ डाल उसे सहलाने लगते हैं।
अंकल: “क्या हुआ वर्षा? कहाँ चली?”
मम्मी: “योगेश जी… मैं ये सब नहीं कर सकती… मुझे जाने दो प्लीज़।”
अंकल: “मैंने तो पहले ही कहा है आपको कि आज मेरा लंड आपको झड़ना ही होगा। बिना लंड झड़े तो मैं आपको जाने नहीं दूँगा। वैसे भी आप भी तो प्यासी हो।”
ये कहकर अंकल मम्मी की कमर को मसलते हुए अपनी उँगली उसकी नाभि में फिराने लगते हैं।
मम्मी: “आह… योगेश जी समझो ना प्लीज़।”
अंकल: “मेरा लंड मेरे पैंट से बाहर निकालकर हिलाओ वर्षा।”
लेकिन मम्मी चुप रहीं। मम्मी ने अंकल का पैंट नहीं उतारा।
अंकल: “वर्षा… अब मेरी पैंट भी उतारकर इसे प्यार करो। ये तुम्हारे प्यार के लिए तरस रहा है।”
मम्मी फिर आगे बढ़ती हैं और अंकल का पैंट पे हाथ रखती हैं लेकिन खोलती नहीं। अंकल फिर से बोलते हैं तो मम्मी पैंट की ज़िप खोलती हैं और अंदर अंडरवियर पहना था अंकल ने तो मम्मी अंडरवियर के अंदर से लंड निकालती हैं तो लंड एकदम से बाहर निकलता है जैसे स्प्रिंग की तरह एकदम तना हुआ रॉड की तरह था।
चुदाई के कारण मम्मी थक गई थीं। रात को पापा-मम्मी साथ में सोए थे और मैं दूसरे रूम में। दादी मेरे दोस्त के घर ही रुक गई थीं।
नेक्स्ट डे मम्मी का व्रत था। मम्मी ने पापा से ऑफिस जाते समय कहा, “मेरा फास्ट है।”
पापा ने कहा, “तो आराम करना।” और पापा ऑफिस चले गए।
पापा के जाने के बाद मैंने मम्मी से कहा, “क्या मम्मी, आज आपने व्रत क्यों रखा?”
मम्मी: “क्यों? क्या मैं व्रत नहीं रख सकती हूँ?”
मैं: “नहीं मम्मी, मेरा मतलब… आप दिन भर भूखी रहोगी, इसलिए पूछा।”
मम्मी: “बेटा, मेरी आदत में है।”
मैं: “ओके मम्मी। और मम्मी, आज दादी भी घर पे नहीं, पापा ऑफिस गए हैं तो आप अंकल के घर चली जाओ कंप्यूटर सीखने।”
मम्मी: “नहीं, मेरा फास्ट है इसलिए मैं नहीं जाऊँगी और न ही उन्हें यहाँ बुलाना।”
मैं: “क्यों मम्मी? कंप्यूटर सीखने में क्या हरज़ है? आपको फास्ट से क्या?”
मम्मी: “बेटा, योगेश जी कंप्यूटर सिखाने आते हैं तो वो मुझे सेड्यूस करने की कोशिश करते हैं। मैं तुझे कितनी बार बता चुकी… जो कि गलत है। मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और तू मेरे बेटे होकर एक गैर मर्द के साथ…”
मैं: “मम्मी, इसमें कुछ गलत नहीं। अंकल आपको लाइक करते हैं। उनका डिवोर्स हो गया है, वो सिंगल हैं। और पापा आपको टाइम नहीं देते। आपको भी नीड है।”
मम्मी चिल्लाते हुए: “चुप! बकवास बंद कर!”
मैं: “मम्मी, मैं आपका बेटा हूँ। मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ। पापा आपको टाइम नहीं देते, ये मैं इतना समझता हूँ। आप अभी तैंतीस की हो और इस उम्र में प्यार की सख्त ज़रूरत होती है जो पापा आपको नहीं देते। और आप कब तक अपनी इच्छाओं को दबाते रहोगी? कब तक? और आप पति के होते हुए भी और माँग में सिंदूर होते हुए भी विधवा का जीवन जी रही हो। आपको भी एक मर्द की सख्त ज़रूरत है। मैं जानता हूँ पापा की उम्र ज़्यादा है आपसे… वो आपसे बीस साल बड़े हैं और वो आपको प्यार नहीं करते। प्लीज़ मम्मी, अंकल का प्यार स्वीकार कर लो।”
मम्मी: “नहीं बेटा। मैं बिना मर्द के अपना जीवन हर लूँगी। भले ही तेरे पापा का प्यार मुझे न मिले, लेकिन मैं एक गैर मर्द की बाँहों में नहीं जा सकती। मैं किस मुँह से समाज का सामना करूँगी?”
मैं: “मम्मी, मैंने आपको कितनी बार कहा है… आप दूसरों की बातों का ध्यान मत दो। कोई कुछ नहीं सोचेगा। मैंने आपको बताया था मेरे दोस्त की मम्मी उनके चाचा से प्यार करती हैं तो उनसे तो कोई कुछ नहीं कहता। मम्मी, आपको अपने दिल की ख्वाहिश पूरी करने का अधिकार है। और मम्मी, मैं आपके साथ हूँ। किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। सिर्फ़ आपको, मुझे और अंकल को पता रहेगा। और मम्मी, मैं आपसे वादा करता हूँ… मैं आपके साथ हूँ।”
मम्मी: “बेटा, ये गलत है। और एक न एक दिन किसी को पता चल ही जाएगा। और किसी ने देख लिया तो मैं मर जाऊँगी।”
मैं: “मम्मी, मैं वादा करता हूँ… जब भी आप अंकल से मिलोगी, मैं इस बात का ध्यान रखूँगा कि कोई देखे ना। मैं खुद आपको अंकल से मिलवाऊँगा और वादा करता हूँ।”
मम्मी: “क्या बेटा? ऐसे कैसे होगा? कोई देख ही लेगा। तू कब तक ध्यान देगा? मान ले कभी योगेश जी ने मुझे बुलाया अपने घर पे या वो अपने घर आए तो क्या करेगा? कोई क्या सोचेगा… ये रूम में एक गैर मर्द के साथ…”
मैं: “मम्मी, मैं किसी को पता नहीं चलने दूँगा। आप मुझ पे भरोसा करो। जब आप अंकल के साथ अकेली होंगी तब मैं आपके रूम के बाहर रहूँगा।”
मम्मी हँसते हुए: “चुप नालायक बेशरम! क्या बोल रहा है तू? तुझे पता है तूने क्या बोला? तू मम्मी को एक गैर मर्द के साथ रूम में भेजकर उनकी पहरेदारी करेगा? तुझे शर्म नहीं आएगी? तू तेरी ही मम्मी और एक गैर मर्द की पहरेदारी कर रहा है?”
मैं: “नहीं मम्मी, इसमें शर्म की क्या बात है? मैं तो एक बेटा होने का फ़र्ज़ निभाऊँगा। एक बेटे का फ़र्ज़ होता है अपनी माँ की खुशियों का ख्याल रखना, अपनी माँ को खुश रखना और अपनी माँ को खुशियाँ दिलाना… चाहे पापा से या फिर अंकल से। और अपनी माँ की रक्षा करना, अपनी माँ को सुरक्षा देना… एक बेटे का फ़र्ज़ है। हर बेटे का फ़र्ज़ होता है उसकी माँ की खुशियों में कोई बाधा न आए, उसकी माँ की खुशियाँ भंग न हों, उसकी माँ की खुशियों में कोई अड़चन न हो, उसकी माँ की खुशियों में कोई डिस्टर्बेंस न हो… उसके लिए माँ की पहरेदारी करना एक बेटे के लिए गर्व की बात है मम्मी।
मम्मी, जब आपने मुझे अपने पेट में नौ महीने रखकर मेरी सुरक्षा की और मुझे जन्म देने का अत्यंत दर्द सहा और मुझे अपना दूध पिलाकर पाला, मेरी लैटरिंग साफ की, मेरे कपड़े धोए… आपके इतने एहसान हैं मुझ पे कि मैं उन्हें अपनी जान देकर भी बेटा माँ के एहसानों को नहीं चुका सकता। तो क्या मैं आपकी पहरेदारी भी नहीं कर सकता?”
मम्मी मेरी बातों को ध्यान से सुन रही थीं और बोलीं, “बेटा, मैं बहुत खुशनसीब हूँ जो मुझे तेरे जैसे लाल मिला। तू मेरे कलेजे का टुकड़ा है मेरे लाल।
पर बेटा, मैंने सोच लिया है… भले ही मुझे तेरे पापा प्यार करते हैं, मैं उसी में खुश हूँ। और योगेश जी के साथ कोई गलत काम नहीं करूँगी।”
मैं: “लेकिन मम्मी…”
मम्मी बीच में ही बोलीं, “चुप! एकदम चुप! अब एक भी शब्द नहीं बोलना। अब तू जाकर स्टडी कर। मैं नाश्ता बनाती हूँ।” और फिर मम्मी किचन में चली गईं।
फिर नाश्ते के बाद मम्मी अपने रूम में गईं और फिर पूरा दिन ऐसे ही निकल गया। शाम को पाँच बजे मम्मी बोलीं, “बेटा, मैं छत पे जा रही हूँ और तू नीचे ही रहना।” और मम्मी ऊपर चली गईं। तो मैंने सोचा आज तो उनका फास्ट है तो ये अंकल से दूर रहेगी, इसलिए मैं ऊपर नहीं गया। और फिर एक घंटे बाद मम्मी छत से दोस्ती हुई हँसती हुईं और सीधे रूम में चली गईं। मुझे कुछ समझ में नहीं आया और न ही मैंने इसपर ध्यान दिया।
रात को पापा ने मुझे फोन करके कहा वो आज नहीं आएँगे, कल आएँगे। मैंने मम्मी को भी बता दिया और आज घर पे सिर्फ़ मैं और मम्मी ही थे। ये जानकारी मैंने अंकल को भी दे दी।
मैंने फिर से मम्मी से कहा, “मम्मी, अंकल को कंप्यूटर सिखाने के लिए बोलो।”
मम्मी ने मुझे बीच में रोक दिया हाथ के इशारे से चुप रहने का कहा बिना कुछ बोले ही और मैं चुप हो गया।
मम्मी ने लाल कलर की ड्रेस पहनी। लाल कलर की ड्रेस में मम्मी आज अलग ही दिख रही थीं। बार-बार अपने आप को मिरर के आगे देख वो खुद ही खुश हो रही हैं कि भगवान ने उसे कितना सुंदर बनाया है।
अभी रात को आठ पीएम ही हुए थे तो मैं खाना खाकर अपने रूम में स्टडी करने चला गया तो मम्मी ने कहा, “बेटा, आज मेरे रूम में ही सो जाना।”
मैं जानता था मम्मी मुझे अपने रूम में सुलाना चाहती हैं ताकि वो अंकल से चुदने से बच जाएँ। लेकिन मुझे अंकल ने बोला था तू दूसरे रूम में सोना और मैं आठ बजे आकर तेरी मम्मी की चुत फाड़ूँगा। इसलिए मैं जल्दी आठ बजे रूम में आ गया था।
मैं: “नहीं मम्मी, मुझे नींद आ रही है इसलिए मैं अपने रूम में ही सोऊँगा।”
मम्मी: “ठीक है, मैं भी तेरी ही रूम में सो जाऊँगी।”
मैं: “नहीं मम्मी, मैं अकेला सोऊँगा।”
मम्मी: “नहीं, मैंने कहा ना… मैं तेरे साथ में सोऊँगी। इसलिए मैं किचन का काम करके एक घंटे में आकर तेरे साथ सो जाऊँगी। जब तक तू सो जा।” और मम्मी मेरे रूम से चली गईं।
मेरे पास अंकल का कॉल आया और बोले, “ज़ीने का गेट खोल जल्दी। मैं आ गया हूँ।”
मैं: “अंकल, आप मम्मी को बोलो तो वो खोल देंगी।”
अंकल: “मैंने वर्षा को बोला तो उसने मना कर दिया। बोली आज मेरा व्रत है इसलिए वो आज मुझसे दूर रहेगी।”
मैं: “तो फिर आज रहने दो।”
अंकल: “नहीं बेटा। जब तक तेरी मम्मी की चुदाई नहीं करूँगा मुझे नींद नहीं आएगी। इसलिए गेट खोल।”
फिर मैं धीरे से रूम से निकला और देखा मम्मी किचन में हैं। और मैंने जाकर ज़ीने का गेट खोल दिया। अंकल अंदर आए और मैं रूम में आ गया और रूम की विंडो से देखने लगा। मम्मी किचन में काम करती साफ नज़र आ रही थीं और अंकल हॉल में थे और धीरे-धीरे किचन में जाने लगे।
मम्मी किचन में काम कर रही थीं।
मम्मी की मखमली नाज़ुक सी गाँड अंकल की तरफ़ थी जिसे देख अंकल अपने आप को रोक नहीं पाए।
अचानक अंकल ने अपने पैंट की जेब से एक सोने की चेन निकाली और हाथ में चेन लिए मम्मी को पीछे से आकर अपनी गोद में उठा लेते हैं, जिसे देख मम्मी एकदम चौंक जाती हैं।
मम्मी: “आप अंदर कैसे आ गए?”
अंकल: “मैं तो अपनी जान की प्यास बुझाने आया था जो कल अधूरी रह गई।”
मम्मी: “आज नहीं… आज मेरा व्रत है इसलिए…”
अंकल: “नहीं जान… आज तो तेरी चुत में लंड डालकर तेरी प्यास बुझाऊँगा।”
मम्मी: “चुपचाप चले जाओ नहीं तो मैं चिल्लाकर अंकुश को बुला लूँगी।”
अंकल: “अंकुश ने ही तो गेट खोला है और उसी ने कहा है जाकर मम्मी को प्यार करो।”
इतना कहकर अंकल मम्मी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा देते हैं और अपने हाथ मम्मी के बूब्स की ओर बढ़ा देते हैं।
मम्मी अंदर की ओर भागने लगती हैं, लेकिन अचानक मम्मी को लगता है जैसे उनकी साड़ी का पल्लू कहीं अटक गया है।
आज अंकल मम्मी को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता था। अंकल ने पहले ही मम्मी की साड़ी पर अपना पैर रख दिया था।
अंकल मम्मी की साड़ी का पल्लू पकड़ उसे खींचने लगते हैं और उसे खींचकर दूर फेंक देते हैं।
मम्मी अपने बूब्स को अपने हाथों से ढकने की नाकाम कोशिश करती हैं। अंकल भी मम्मी के पीछे आ कर मम्मी के हाथों को जकड़ लेते हैं।
अंकल का लंड मम्मी की गाँड में धँस जाता है। मम्मी के शरीर की कोमलता अंकल की हवस को और भड़का रही है।
मम्मी: “योगेश जी प्लीज़ मुझे छोड़ दो।”
अंकल: “मान जाओ ना वर्षा… क्यों खुद भी तरस रही हो और मेरी भी प्यास बढ़ा रही हो।”
मम्मी: “प्लीज़ आज रहने दो… मेरा फास्ट है… प्लीज़ मैं आज भूखी हूँ।”
अंकल: “मैं जानता हूँ आज तू भूखी है… इसलिए तो तुझे अपना लंड तेरी चुत में डालकर तेरी भूख मिटाऊँगा।”
मम्मी: “मेरा आज फास्ट है इसलिए मैं आज आपको मेरा फायदा नहीं उठाने दूँगी। आप हमेशा मेरा फायदा उठाते हैं।”
अंकल मम्मी की एक नहीं सुनते हैं और मम्मी के होठों को चूमना शुरू कर देते हैं।
अंकल अपनी जीभ से मम्मी के होठों को चाटते हुए उसके बदन को मसलना शुरू कर देते हैं।
अंकल: “मैंने आपका फायदा उठाया या आपने वर्षा?”
मम्मी: “क्यों? मैंने क्या किया?”
अंकल: “आप तो अपनी चुत झड़ने के बाद उठकर भाग गईं। प्यासा तो मुझे ही रहना पड़ा ना। अभी शाम को…”
(अब मुझे समझ में आया था कि मम्मी शाम को एक घंटे के ऊपर गई थीं और छह बजे दोस्ती हुई हँसती हुईं आई थीं और सीधे अपने रूम में चली गई थीं। इसका मतलब वो छत के रास्ते अंकल के घर जाकर चुत चटवाकर भागकर आई थीं।)
मम्मी: “तुम मेरी बात समझो योगेश जी… मैं शाम को भाग गई थी आपकी हरकतों की वजह से। लेकिन मैं आज ये सब नहीं करना चाहती हूँ। आज मेरा फास्ट है।”
अंकल: “वर्षा ये तो गलत है ना।”
मम्मी: “आखिर तुम चाहते क्या हो मुझसे फिर?”
अंकल: “ज़्यादा कुछ नहीं वर्षा… बस मेरा लंड झड़ने में मेरी मदद कर दो। मैं तुम्हारा फास्ट नहीं तुड़वा रहा हूँ… बस मेरे लंड का पानी निकाल दो।”
ये कहकर अंकल मम्मी के बदन से खेलना चालू रखते हैं और मम्मी के बूब्स को मसलने लगते हैं। न चाहते हुए भी मम्मी भी लगातार अंकल के द्वारा अपनी गाँड में लंड रगड़ने और उनके शरीर को चूमने की वजह से गरम होने लगती हैं।
मम्मी अंकल को मना तो करती हैं पर फिर भी अंकल समझ जाते हैं कि मम्मी गरम होने लगी हैं।
अंकल: “वर्षा मेरा लंड देखो ना कैसा तड़प रहा है आपके लिए। एक बार इसे मेरे पैंट से बाहर निकालकर अपने हाथ में ले लो प्लीज़।”
मम्मी: “श्श्श… योगेश जी मुझे प्लीज़ जाने दो… ये सब सही नहीं है आज के लिए। कल कर लेना।”
अंकल मम्मी के ब्लाउज़ को कंधे से नीचे खींचने लगते हैं जिससे मम्मी के ऊपर के दो बटन भी टूट जाते हैं। मम्मी थोड़ा आगे होने की कोशिश करती हैं पर अंकल मम्मी को ऐसे ही पीछे से खींचकर बेडरूम में ले जाने लगते हैं। तो मैं भी अपने रूम से निकलकर मम्मी के रूम की विंडो पे चला जाता हूँ और देखता हूँ अंकल ने मम्मी को बिस्तर पे पटक दिया है। और रूम का गेट ओपन रहता है।
मम्मी को ऐसा लगता है जैसे उसके शरीर में जान न रही हो। वो चाहकर भी उठ नहीं पातीं।
अंकल: “ठीक है… मैं कुछ नहीं करूँगा। लेकिन आप एक काम कर दीजिए।”
मम्मी: “क्या?”
अंकल: “मुझसे अपना पाँव चटवा लो और मैं चला जाऊँगा।”
मम्मी: “छी… आप क्या बोल रहे हो? मैं ऐसा नहीं कर सकती हूँ। मैं आपको पति मानती हूँ और आप… छी…”
अंकल: “आपको मेरी कसम वर्षा।”
मम्मी: “नहीं… मैं आपसे अपना पाँव नहीं चटवाऊँगी। और मुझे माफ कर देना… मैं आपको आज खुश नहीं कर पाऊँगी।”
लेकिन अंकल ने मम्मी का एक पाँव उठाया और अपने चेहरे के पास ले आए। और मम्मी बार-बार मना कर रही थीं—“नहीं… नहीं… प्लीज़ ऐसा मत करो… मेरे पैर गंदे हैं… प्लीज़ रुक जाओ।” लेकिन अंकल नहीं रुके।
अंकल बड़े गौर से मम्मी को रिक्वेस्ट करते देख रहे थे कैसे वो अंकल को मना कर रही थीं—“मेरा पैर मत चाटो।”
अब अंकल को भी मज़ा आने लगा था मम्मी को गिड़गिड़ाते देख। और वो मम्मी के पैर का अंगूठा अपने होठों पर रख लेते हैं और अंगूठे को अपने होठों पे धीरे-धीरे फेरने लगते हैं। फिर अंकल अपना मुँह खोल लेते हैं और मम्मी के अंगूठे को मुँह में लेकर चूसने लगते हैं। अंकल की इस हरकत से मम्मी के जिस्म के रोएँ एक बार फिर से खड़े हो जाते हैं और मम्मी की साँसें एक बार फिर से तेज़ हो जाती हैं।
मम्मी भी बड़े गौर से अंकल के चेहरे को देखे जा रही थीं… हवस अब मम्मी की आँखों में भी साफ देखी जा सकती थी। अंकल अब सब कुछ भूलकर मम्मी के पाँव और उसके तलवे को अपने होठों में लेकर चूस और चाट रहे थे। अंकल को देखने में ऐसा लग रहा था जैसे अंकल को दुनिया की सबसे प्यारी चीज़ मिल गई हो। मम्मी की साँसें अब भारी होने लगी थीं… अब मम्मी की भी आँखें सुरख लाल हो चुकी थीं… काफ़ी देर तक अंकल मम्मी के पाँव के हर उँगली को बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर चूसते जा रहे थे… आज उन्हें भी इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था।
मम्मी के मुँह से एक बहुत ही धीमी सिसकारी निकल रही थी… लज़्ज़त से मम्मी की आँखें एक बार फिर से बंद हो गई थीं… इधर धीरे-धीरे अंकल अपनी जीभ की रफ्तार बढ़ाते जा रहे थे। मम्मी फिर से अंकल का सर अपने हाथों में पकड़ लेती हैं और कसकर उसे अपने सीने पर ज़ोर से दबाने लगती हैं। अंकल भी अब कहाँ रुकने वाले थे… इस वक्त अंकल का लंड अब पूरा खड़ा हो गया था…
मम्मी की आँखें बिल्कुल नशीली हो चुकी थीं… वो अब इस समय मदहोशी के आलम में थीं… कुछ देर बाद अंकल अपनी जीभ मम्मी के निप्पल्स पर ब्लाउज़ के ऊपर से ही फेरते हैं… तभी मम्मी झट से अंकल से दूर होने की कोशिश करती हैं लेकिन अंकल मम्मी की टाँगों को लड़के पकड़ लेते हैं और फिर…
अंकल मम्मी की टाँगों को चूमते हुए ऊपर की ओर बढ़ जाते हैं।
अंकल के ऐसे करने से मम्मी का पेटीकोट भी ऊपर को खिसक जाता है।
मम्मी की गोरी जाँघों को देख अंकल मम्मी के पेटीकोट में हाथ डाल देते हैं और मम्मी की गाँड को मसलना शुरू कर देते हैं।
मम्मी धीरे-धीरे आहें भरने लगती हैं।
अंकल अपना हाथ मम्मी की पैंटी की इलास्टिक पर ले जाते हैं।
मम्मी समझ जाती हैं कि अंकल उनकी पैंटी उतारने वाले हैं।
मम्मी अंकल को मना करती हैं पर अंकल मम्मी की पैंटी को नीचे खींच देते हैं, और मम्मी के कानों में कहते हैं कि जान आज अपनी चुत नहीं चटवाना चाहोगी मुझे।
अंकल जानते हैं कि मम्मी चुत चाटने से पागल सी हो जाती हैं। वो मम्मी के मना करने के बावजूद अपनी जीभ मम्मी की चुत पर लगा देते हैं।
अब मम्मी का सारा विरोध लगभग खत्म हो जाता है। अंकल एक कुत्ते की तरह मम्मी की चुत को चाटकर मम्मी को हवस की आग में डूबने को मजबूर कर देते हैं। मम्मी बार-बार अंकल का नाम लेने लगती हैं जिसे सुन अंकल मम्मी की चुत में अपनी जीभ डाल-डाल कर उसे हल्का-हल्का बाइट करते हुए मम्मी की चुत का रस पीने लगते हैं।
मम्मी की सिसकारियाँ बढ़ती देख अंकल मम्मी को और तड़पाने लगते हैं। मम्मी अंकल के बालों में हाथ डाल उसे अपनी चुत पर प्रेस करने लगती हैं और अपनी लेग्स में अंकल को बाँधने की कोशिश करती हैं।
अंकल समझ जाते हैं कि मम्मी झड़ने के लिए ऐसा कर रही हैं, क्योंकि एक बार पहले भी उनके साथ ऐसा हो चुका है शाम को। पर अब अंकल किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहते थे। अंकल मम्मी की चुत चाटना उसी समय रोक देते हैं और सामने खड़े होकर अपने कपड़े उतारने लगते हैं।
मम्मी अंकल की ओर तरसती निगाहों से देखती हैं तो अंकल मम्मी को देख हँस पड़ते हैं। अंकल की हँसी मम्मी को झकझोर देती है। वो अपने शरीर की सारी इच्छाशक्ति बटोर कर एक बार फिर अपने आप को सँभालने की कोशिश करती हैं। अंकल को कपड़े उतारते देख मम्मी न चाहते हुए भी बिस्तर से उठ जाती हैं पर अंकल मम्मी को वहीं पकड़ लेते हैं।
अंकल मम्मी की कमर में हाथ डाल उसे सहलाने लगते हैं।
अंकल: “क्या हुआ वर्षा? कहाँ चली?”
मम्मी: “योगेश जी… मैं ये सब नहीं कर सकती… मुझे जाने दो प्लीज़।”
अंकल: “मैंने तो पहले ही कहा है आपको कि आज मेरा लंड आपको झड़ना ही होगा। बिना लंड झड़े तो मैं आपको जाने नहीं दूँगा। वैसे भी आप भी तो प्यासी हो।”
ये कहकर अंकल मम्मी की कमर को मसलते हुए अपनी उँगली उसकी नाभि में फिराने लगते हैं।
मम्मी: “आह… योगेश जी समझो ना प्लीज़।”
अंकल: “मेरा लंड मेरे पैंट से बाहर निकालकर हिलाओ वर्षा।”
लेकिन मम्मी चुप रहीं। मम्मी ने अंकल का पैंट नहीं उतारा।
अंकल: “वर्षा… अब मेरी पैंट भी उतारकर इसे प्यार करो। ये तुम्हारे प्यार के लिए तरस रहा है।”
मम्मी फिर आगे बढ़ती हैं और अंकल का पैंट पे हाथ रखती हैं लेकिन खोलती नहीं। अंकल फिर से बोलते हैं तो मम्मी पैंट की ज़िप खोलती हैं और अंदर अंडरवियर पहना था अंकल ने तो मम्मी अंडरवियर के अंदर से लंड निकालती हैं तो लंड एकदम से बाहर निकलता है जैसे स्प्रिंग की तरह एकदम तना हुआ रॉड की तरह था।


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