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Fantasy Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font
#16

Update 13

अंकल: “वर्षा रानी, तू है ही गरम माल। और अब तो और भी गरम हो गई है। जब तू गरम हो जाती है तो तुझे चुदने में और मुझे चोदने में और मज़ा आ जाता है।”

मम्मी: “तो अब देर किस बात की? देखो आपका लंड महाराज कैसे देख रहा है मुझे।”
ये बोलकर मम्मी अंकल का मूसल लंड हाथ में लेकर ऊपर-नीचे (मुठियाने) लगती हैं।

अंकल के मुँह से हल्की आह निकल जाती है। तभी अंकल अपना हाथ मम्मी की चूची पर रखकर ज़ोर से भींच लेते हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स्स्स… आआआह्ह्ह्ह… ऐसे ही ज़ोर-ज़ोर से पीसो मेरी चूचियों को… उस अंकुश के नामर्द गंडू बाप में दम ही नहीं है… मर्द कहता है खुद को… आआआआह्ह्ह्ह्ह… म्म्म्म… स्स्स्स्स… निप्पल मत खींचो… आआआह्ह्ह्ह… नहीं… ना… दर्द होता है…”
ये कहते हुए अंकल का लंड ज़ोर से भींच देती हैं।

अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… साली कुतिया… इतने ज़ोर से भींच दिया… आआआह्ह्ह… रुक, अभी बताता हूँ।”

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… मज़ा… स्स्स्स… काटो मत… दर्द होता है जी… म्म्म्म… स्स्स्स…”

अंकल ने नीचे झुककर मम्मी की दाहिनी चूची मुँह में ले ली और निप्पल को दाँत से काट लिया। और अब निप्पल को दाँत में रखकर रगड़ रहे हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स्स… आआआआह्ह्ह्ह… योगेश जी… इतनी ज़ोर से काट रहे हो… रुको, अब बताती आपको।”

मम्मी ने इतना बोला कि दोनों अलग हो जाते हैं और ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगते हैं।

अंकल: “देखा, मैंने फोन पे कहा था… ऐसे खुलके मज़ा लेंगे आज।”

मम्मी: “सच में आज तो कुछ ज़्यादा ही गरम हो रहे हैं हम दोनों।”

अंकल: “वही तो बोल रहा था मैं। आज तुझको ऐसा मज़ा दूँगा कि तू उस गंडू को भूल जाएगी।”
ये बोलकर मम्मी की पुष्ट हुई गाँड पर एक चाँटा मार देते हैं।

मम्मी: “आआउउउच्च्च्छ… स्स्स्स… आआआह्ह्ह… मज़ा आ गया योगेश जी… और कितना गरम करोगे अपनी इस वर्षा को?”

अंकल: “हाहाहा… मेरी बुलबुल… अभी तो मज़ा शुरू हुआ है। और एक ज़ोर का चाँटा चाहिए क्या मेरी कुतिया को?”

मम्मी: “आज ये आपकी कुतिया कुछ भी सह लेगी। फुल बेशर्म होकर चुदेगी…”
इतना बोलकर मम्मी अंकल को बिस्तर के सामने वाले सोफे पर धक्का देती हैं और खुद ऊपर चढ़कर अंकल के लिप चूसने लगती हैं। और साथ में अंकल का नौ इंच का पावरफुल लंड मुठियाने लगती हैं।

अब पूरी कमान मम्मी ने संभाल ली है और वो अंकल को निचोड़ रही हैं, चूस रही हैं।

आज तो मुझे भी यक़ीन नहीं हो रहा था। आज मम्मी ने पागल कर रखा था… फुल बेशर्म रांडी बनकर।

मम्मी (किस तोड़ते हुए): “अब कैसा लग रहा है मेरे मालिक? अब मैं लग रही हूँ ना आपकी कुतिया?”

बात करते-करते अंकल का लंड मुठिया रही हैं।

अंकल: “हाँ… अब तू लग रही है मेरी कुतिया। ऐसे ही करती रह… म्म्म्म… मज़ा आ रहा है।”

मम्मी: “और भी मज़ा दूँगी मेरे मालिक। आपकी कुतिया हमेशा आपके लंड के लिए रेडी रहती है।”

अंकल: “हाँ मेरी कुतिया… आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह… ऐसे ही करती रह कुतरिया।”

ऐसे ही मम्मी कुछ देर तक अंकल का लंड मुठियाती रहीं।

अंकल: “वर्षा रांड… इसे अपने मुँह में लेकर थोड़ा इसपर अपनी जीभ भी फिराओ ना…”

अब मम्मी उठ जाती हैं और अंकल को सोफे के टॉप पर बैठने कहती हैं। अंकल भी हँसकर बैठ जाते हैं। मम्मी तुरंत साइड पर कुतिया की तरह हो जाती हैं और अंकल के लंड पर किस करती हैं। फिर अपनी जुबान अंकल के लंड के सुपाड़े पर फेरने लगती हैं जो कि अब पूरा लाल हो चुका है।

अंकल: “आआआआह्ह्ह्ह… कुतिया… म्म्म्म… क्या मस्त कर रही है आज तो… म्म्म्म… पूरा मुँह में लेकर चूस… म्म्म्म…”

मम्मी अंकल की ओर नज़र उठाकर देखती हैं और एक कामुक मुस्कान देकर अंकल का लंड मुँह में भर लेती हैं।

मम्मी: “उउउउम्म्म… उउउउउम्म्म… आआआह्ह्ह…”
आवाज़ें निकालते हुए लंड चूस रही हैं जैसे कोई बच्चा लॉलीपॉप चूसता है।

अंकल: “आआह्ह्ह… ऐसे ही मेरी कुतिया… बड़ा मज़ा आ रहा है। तेरे ये नरम ओठ… आआआह… गज़ब का मज़ा दे रहे हैं मेरे लंड को… म्म्म्म… ह्ह्ह्ह…”

मम्मी पूरी लगन से अंकल का लंड चूस रही हैं। करीब पाँच मिनट बाद अंकल मम्मी को सोफे से नीचे उतारके बैठने को कहते हैं। मम्मी तुरंत सोफे से नीचे उतर जाती हैं और बैठ जाती हैं।

अंकल: “अब मैं तुझे मज़ा दूँगा मेरी चामिया।”
इतना कहकर अंकल खड़े हो जाते हैं और मम्मी के मुँह में लंड डालकर मुँह धीरे-धीरे चोदने लगते हैं।

मम्मी अपनी आँखें बंद करके मज़े में डूबने लगती हैं। अंकल हल्के-हल्के धक्के मार रहे हैं।

मम्मी: “म्म्म्ममुउह्ह्ह… म्म्म्ममुउउह्ह्ह…”

अंकल बिना रुके शॉट मार रहे थे। अचानक अंकल अपना नौ इंच का लंड पूरा मम्मी के मुँह में दबा देते हैं।

मम्मी की साँस अटक जाती है। आँखों से पानी आने लगता है। पूरा चेहरा लाल हो जाता है। मम्मी अपने हाथ अंकल की जाँघों पर मारने लगती हैं। तभी अंकल अपने लंड को मम्मी के मुँह से बाहर खींच लेते हैं।

मम्मी: “खूक… खूक… जान निकाल दी पूरी मेरी… खूक… खूक…”

अंकल (हँसते हुए): “मज़ा आ गया मेरी रानी… हाहाहा… क्या तुझे मज़ा नहीं आया?”

मम्मी (अपनी साँसों पर काबू पाते हुए): “क्या खाक मज़ा आया… जान निकल रही थी मेरी और तुम कहते हो मज़ा आया… हुह्ह…”

अंकल: “कोई बात नहीं रानी वर्षा… मेरी जान… अब तेरी चुत का रस पिला दे। चल उठ और सोफे पे लेट जा मेरी वर्षा।”

मम्मी उठकर सोफे पे लेट गईं और अपने पाँव फैलाकर अपनी चुत की ओर इशारा करती हैं।

अंकल: “बिल्कुल मेरी रानी… तुझे चाखने में तो मुझे पूरा मज़ा आता है… हाहाहा।”
इतना बोलकर मम्मी की चुत पर झुक जाते हैं और अपनी ज़ुबान निकालकर चाटने लगते हैं।

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… म्म्म्म… ऐसे ही मेरे राजा… चाटो… आआह्ह… आपको पता है चुत कैसे चाटी जाती है… औरत को खुश कैसे करते हैं… दर्द भी… म्म्म्म… आआआ… और मज़ा भी दोनों आता है आपको।”

अंकल बस अपने काम में लगे हुए थे। पहले से रस छोड़ रही मम्मी की चुत को चाट और चूसकर और गीला कर रहे हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स… आआआह्ह्ह्ह… यहाँ पर मत काटो योगेश जी… म्म्म्म… कैसे आप इतना मज़ा देते हो… और एक मेरा पति साला चूतिया, भड़वा, गंडू… कुछ काम का नहीं… बस मर्द बना फिरता है।”

अंकल (मुँह ऊपर करके): “उस गंडू को मैं सिखाऊँगा कि तेरी बीवी किस तरह खुश होती है। साले को एक दिन पकड़के उसकी गाँड मारूँगा।”

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… हेहेहे… हाँ यही करना होगा उसके साथ। खुद खाली होकर मुझे तड़पता छोड़ सो जाता था। मुश्किल से महीने में एक बार करता था। लेकिन पिछले छह महीनों से जब से आपसे चुद रही हूँ… उस कुत्ते को तो मैंने हाथ भी नहीं लगाने दिया। मेरी चुत पे सिर्फ़ आपका ही अधिकार है… इस नामर्द का नहीं।”

अंकल: “अरे तुझ जैसी गरम माल को वो गंडू क्या ठंडा करेगा… म्म्म्ममुउ… सुप… सुप… म्म्म्म…”

मम्मी: “अब ऐसे ही करते रहो… मेरा पानी छूटने वाला है… आआआआह्ह्ह्ह… स्स्स्ज़्ज़… म्म्म्म… आआआआह्ह्ह्ह… और ज़ोर से चूसो… अपनी ज़ुबान डालो अंदर… और चोदो मुझे… आआआआह्ह्ह… मैं आ… आ… इत…”
इतना बोलकर मम्मी झड़ने लगती हैं। मम्मी की चुत से मानो दरिया ही बहने लगता है। अंकल पूरा का पूरा पानी चाट जाते हैं और खड़े हो जाते हैं। मम्मी लंबी-लंबी साँसें ले रही थीं।

अंकल: “अब तैयार हो ना रानी? मेरा लंड अपनी चुत में समा लेने को?”

मम्मी: “हाँ मेरे राजा… अब देर मत करो। आ जाओ और चढ़ जाओ मुझ पर… और मेरी आग बुझा दो।”

अंकल को जैसे ही ये सुनता है, अपने हाथ पे थूक लगाके लंड पर मसलते हैं और मम्मी के दोनों पाँव के बीच आकर लंड के सुपाड़े को चुत पर रखकर रगड़ने लगते हैं।

मम्मी अंकल की इस हरकत से और गरम होने लगती हैं और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगती हैं।

मम्मी: “स्स्स्स्स्ज़्ज़… आआआआह्ह्ह्ह… अब क्यों तड़पा रहे हो राजा… डाल दो अंदर… और कर दो मेरी आग ठंडी।”

इतना सुनते ही अंकल लंड के सुपाड़े को मम्मी की चुत में घुसा देते हैं।
धीरे-धीरे अंकल का पूरा लंड मम्मी की चुत में समा जाता है।

मम्मी के मुँह से ज़ोर से सिसकारी निकल जाती है—“आआआआआह्ह्ह्ह… भ्ह्ह… स्स्स्स्स्ज़्ज़…”

मम्मी: “छह महीनों से आपसे चुद रही हूँ… पर आज भी आपका ये मूसल मेरी चुत में जाते ही दर्द देता है… स्स्स्स्स… आआआआह्ह्ह्ह…”

अंकल: “अरे मेरी रानी… तेरी चुत ही कमाल की है। कितनी कसी हुई है आज भी… और कितनी गरम। मैं तो तेरी इस चुत का दीवाना हूँ मेरी जान।”
ये बोलते हुए धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू करते हैं।

मम्मी: “आआह… ऐसे ही पेलो मेरे राजा… मज़ा आ रहा है… स्स्स्स… आआआह्ह्ह…”

पाँच मिनट तक अंकल धीरे-धीरे धक्के मारते हैं।

मम्मी: “आआआआह्ह्ह्ह… लगाओ ज़ोर मेरे राजा… ज़ोर से मारो… म्म्म्म… मज़ा आ रहा है।”

मम्मी के मुँह से ये सुनते ही अंकल अपनी गति बढ़ा देते हैं। कुछ देर बाद अंकल अपना लंड मम्मी की चुत से निकाल लेते हैं और मम्मी को घोड़ी बनाते हैं और पीछे होकर ज़ोरदार शॉट मम्मी की चुत में मारते हैं। मम्मी के मुँह से एक बड़ी चीख निकलती है। फिर शुरू होती है धक्कों की रेस। अंकल पूरे जोश में मम्मी को चोद रहे थे। मम्मी अंकल का पूरा साथ दे रही थीं। तभी—

मम्मी: “आआआआ… योगेश जी… ऐसे ही ज़ोर से मारो… आआआह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चुत को… मारो ज़ोर से शॉट… मैं झड़ने वाली हूँ… आआआह्ह्ह…”

अंकल पूरे जोश में मम्मी की ठुकाई करने में लगे हैं। दोनों के शरीर पूरे पसीने से भीग चुके हैं। तभी अंकल हाथ आगे ले जाके मम्मी के दोनों निप्पल्स दोनों हाथों की चुटकी में दबाकर आगे की ओर खींच देते हैं।

मम्मी (चिल्लाते हुए): “आआह… और ज़ोर से खींचो… दबाओ… आआआह्ह्ह… मैं गई… मैं गई…”
कहते हुए झड़ने लगती हैं। पर अंकल रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। मम्मी सोफे पर पेट के बल पड़ी हुई हैं पर अंकल मम्मी को चोदे जा रहे हैं।

मम्मी की जान ही निकल रही है पर अंकल धक्के मार रहे थे। कुछ तीस-पैंतीस धक्कों के बाद अंकल अपना लंड मम्मी की चुत से निकाल लेते हैं और मम्मी को कहते हैं—

अंकल: “आजा मेरी रानी… मेरा निकलने वाला है। ये आजा… पी ले मेरा पूरा माल। तुझे बहुत पसंद है ना?”

मम्मी (अपनी साँसें सँभालते हुए): “हाँ मेरे राजा।”

मम्मी उठकर अंकल के सामने घुटनों पर बैठ जाती हैं। अंकल का पानी निकलने वाला होता है। वो लंड को ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगते हैं और उनके लंड से वीर्य की पिचकारी मम्मी के मुँह में जाने लगती है। कुछ मम्मी के चेहरे पे और कुछ मम्मी की चूचियों पर भी अंकल का वीर्य गिर जाता है।

दोनों शांत होकर सोफे पर बैठ जाते हैं।

फिर मैं देखता हूँ—दो बज चुके थे। मुझे भूख लगी थी तो मैं घर में नहीं खा सकता था क्योंकि मम्मी-अंकल को नहीं पता था मैं घर में हूँ। इसलिए मैं उन्हें छोड़कर चुपचाप घर से निकल गया।

और फिर होटल में खाना खाकर मैं दोस्त के घर चला गया। फिर दोस्त के घर से सात बजे वापस आया और देखता हूँ दोनों अभी भी लगे हैं चुदाई में। फिर थोड़ी देर बाद थक जाते हैं और एक-दूसरे के ऊपर ढले रहते हैं।

दोनों सोफे पर बैठे-बैठे कुछ देर आराम करते हैं। अचानक मम्मी घड़ी की तरफ़ देखती हैं—“अब आप जाइए… सात बज गए हैं।” और बाथरूम में घुस जाती हैं। अंकल भी अपना अंडरवियर पहनकर फिर से सोफे पर बैठ जाते हैं और अपनी पैंट उठाके उसमें से एक सिगरेट केस निकालके उसमें से एक सिगरेट निकालके जलाकर उसका लुत्फ़ उठा रहे थे। तभी बाथरूम का डोर ओपन होता है और मम्मी सिर्फ़ एक तौलिया में बाहर आती हैं। गोरे दूध जैसे बदन को वो तौलिया से लपेटकर छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थीं। मम्मी की चूचियाँ आधे से ज़्यादा तौलिया से दिख रही थीं। नीचे तो जाँघों को छुपाने की कोशिश ही नहीं… सिर्फ़ मम्मी की मादक और भरी हुई गाँड के थोड़ा नीचे तक ही छुप रहा था। मम्मी के बाल भी थोड़े गीले थे।

मम्मी को देख अंकल मेरी मम्मी को एक आँख मार देते हैं और कहते हैं, “गज़ब की क़यामत लग रही हो तुम तो वर्षा।”

मम्मी शर्मा जाती हैं और कहती हैं—

मम्मी (शर्माकर): “अभी भी मन नहीं भरा आपका? कितना थका दिया आपने तो आज। आप सैंतालीस की उम्र में भी कितनी मस्ती करते हो कि मेरे जैसी तैंतीस साल की औरत को खुश कर देते हो… हेहेहे।”

अंकल: “सिर्फ़ तुम्हें मेरी वर्षा रानी… मेरी ज़िंदगी में वीरान ही थी। पर जब से तुमने मेरा प्यार और (लंड पर हाथ रखकर) तुम्हारे इस बाबू को अपनाया है… मेरी ज़िंदगी में भी अब रंगीन बन गई है। थैंक्स फॉर एवरीथिंग माय लव।”

मम्मी: “अब बस कीजिए और जाकर फ्रेश हो जाइए।”

अंकल अपनी सिगरेट बुझाते हैं और किसी आज्ञाकारी बंदे जैसा हँसकर बाथरूम में चले जाते हैं।
मम्मी भी अब कपड़े पहनकर तैयार हो जाती हैं और किचन में जाकर कॉफी बनाने लगती हैं।

थोड़ी देर बाद अंकल मम्मी को आवाज़ देते हैं—“वर्षा…”

मम्मी: “कॉफी लेके आ रही हूँ जी। आप ज़रा हॉल में साइड पर बैठिए।”

अंकल तैयार होकर सोफे पर बैठे मम्मी का इंतज़ार करने लगते हैं। कुछ पाँच मिनट में मम्मी किचन से हाथ में ट्रे लेके आती हैं। ट्रे में दो कॉफी मग और कुछ स्नैक्स होते हैं। मम्मी ट्रे टेबल पर रखकर एक मग अंकल को देती हैं, एक खुद लेके सोफे पर अंकल के पास बैठ जाती हैं।

मम्मी: “लीजिए कॉफी… और कुछ खा भी लीजिए थोड़ा।”

अंकल कॉफी मग लेते हैं और चुस्कियाँ लेते पीने लगते हैं। कोई कुछ नहीं बोल रहा। दोनों बस खामोश कॉफी ही पी रहे थे। खामोशी तोड़ते हुए—

अंकल: “वर्षा… क्या बात है? चुप कैसे हो? अपने गुलाम से नाराज़ हो?”

Update 14

मम्मी: “क्या आप भी योगेश जी… कुछ भी। आप गुलाम नहीं, मेरे दिल के राजा हो आप… हेहेहे। चलिए अब देर नहीं हो रही क्या? मेरा बेटा और वो बुढ़िया आने वाली होगी। अंकुश ने कहा था छह बजे तक आ जाएँगे… लेकिन उनसे हारी चुदाई के लिए एक घंटा ज़्यादा दे दिया है। अब आपकी जाना चाहिए।”

अंकल: “हाँ, काफ़ी देर हो गई। चलो मैं चलता हूँ। पर कुछ मीठा मिल जाता तो मज़ा आ जाता।”
ये बोलकर सोफे से उठ जाते हैं और एक शरारती मुस्कान से मम्मी को देखते हैं।

मम्मी को समझ में आता है। वो शर्मा जाती हैं और उठके अंकल के पास जाकर अंकल के लिप पर अपने नरम गुलाबी लिप रख देती हैं। और अंकल के ओठ चूसने लगती हैं। किस थोड़ी देर बाद तोड़ देती हैं और अंकल उसे बाय बोलकर निकल जाते हैं।

मम्मी मुस्कुराते हुए डोर बंद कर लेती हैं। और बेडरूम में जाकर बिस्तर पर लेटकर सोचने लगती हैं।

फिर मैं घर से चुपचाप निकल जाता हूँ और आठ बजे मम्मी को कॉल करता हूँ।
मम्मी को बता देता हूँ दादी कल आएगी और खाना पैक कराकर लाऊँगा। फिर मैं खाना पैक कराकर लाता हूँ और मम्मी एक संस्कारी पतिव्रता औरत की तरह साड़ी पहनकर तैयार हो जाती हैं। फिर पापा भी आ जाते हैं और खाने के बाद सो जाते हैं।
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Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 21-08-2026, 03:05 PM
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RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Rahulraj306 - 24-08-2026, 05:32 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Wasifahim - 25-08-2026, 07:39 PM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by Wasifahim - 27-08-2026, 06:39 AM
RE: Mummy aur Uncle. Part 2 in hindi font - by ramumargaya - 13-09-2026, 04:42 PM



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