6 hours ago
Update 12
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दोस्तों, अब मैं अंकित को अंकुश लिखूँगा।
आंटी के घर से आने के बाद मम्मी पूरे दिन सोती रहीं। पापा घर पे ही रहते थे। आंटी के घर से आए हुए तीन दिन हो गए थे तो अंकल ने मुझे अपने घर बुलाकर एक पार्सल दिया और बोले, “इसमें एक ड्रेस है तेरी मम्मी के लिए। इसे तू वर्षा को दे देना। और बेटे, तीन दिन हो गए वर्षा से मिले। जल्द ही कुछ कर।”
मैं: “अंकल, पापा घर से ऑफिस वर्क कर रहे हैं। जिस दिन पापा ऑफिस जाएँगे उस दिन मैं दादी को घर से बाहर ले जाऊँगा और आप मम्मी से मस्ती करना।”
अंकल खुश होकर मुझे सिगरेट पिलाई। फिर मैं घर आकर पार्सल मम्मी को दिया और कहा, “अंकल ने दिया है आपको देने के लिए।”
मम्मी: “क्या है इसमें?”
मैं: “पता नहीं।”
मम्मी: “तूने देखा तो होगा।”
मैं: “नहीं मम्मी। अंकल ने कहा तू देखना मत। और उन्होंने मुझे आपकी कसम दी, इसलिए मैंने नहीं देखा।”
मम्मी मेरी आँखों में देखती हुई बोलीं, “ठीक है… तू जा। मैं देख लूँगी।” उनकी आवाज़ में हल्की सी मिठास थी।
फिर दो दिन बाद पापा ऑफिस गए। सुबह आठ बजे पापा के जाने के बाद मैंने दादी से कहा, “दादी, आज मेरे दोस्त के घर भजन। आप चलोगी?” दादी खुश होकर बोलीं, “हाँ।”
मम्मी चुपचाप सुन रही थीं और मुझे आँख दिखा रही थीं।
दादी: “बेटा, कितने बजे चलेंगे?”
मैं: “दादी, आप जल्दी तैयार हो जाओ। नौ बजे से है।”
फिर दादी रूम में चली गईं तैयार होने। दादी के जाने के बाद मम्मी गुस्से में मेरा हाथ पकड़कर रूम में ले गईं।
मम्मी: “बेटा, क्या है ये सब?”
मैं: “क्या मम्मी? मैं समझा नहीं।”
मम्मी: “मैं जानती हूँ तू सब समझ रहा है। जानबूझकर दादी को ले जा रहा है ताकि मैं घर पे अकेली रहूँ और योगेश जी आ जाएँ।”
मैं उनकी आँखों में देखते हुए बोला, “हाँ मम्मी… आप सही कह रही हैं। ताकि अंकल आपको कंप्यूटर सिखाते रहें।”
मम्मी: “नालायक! तुझे क्या हो गया है? तू मुझे एक गैर मर्द के साथ अकेला छोड़ रहा है। मैंने तुझसे कितनी बार कहा है… वो मेरे साथ यहाँ तक कि एक बार तो उन्होंने मेरे कपड़े भी फाड़ दिए।”
मैं धीरे से बोला, “मम्मी… अंकल ने कुछ किया तो नहीं?”
मम्मी: “जब वो मुझे नंगी कर देते और फिर मेरा मुँह काला कर देते तब क्या?”
मैं उनका हाथ हल्के से पकड़ते हुए बोला, “मम्मी… अंकल जो भी करेंगे, आपकी सहमति से ही करेंगे। आप उनका प्रपोजल स्वीकार कर लो। आपको अंकल के प्यार की ज़रूरत है… और मुझे आपकी खुशी की।”
मम्मी: “नहीं करूँगी। और मैं योगेश जी को घर में आने भी नहीं दूँगी।”
मैं: “मम्मी, आपको मेरी कसम है… आप अंकल को आने दोगी। अंकल आपको कंप्यूटर सिखाने आएँगे। आप कंप्यूटर सीख लेना… और कुछ नहीं। और अगर आपकी इच्छा हो तो…” मैं चुप हो गया।
मम्मी मेरी तरफ़ देखते हुए बोलीं, “कसम देना ज़रूरी था क्या? तू जानता है… मैं तेरे लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ। ठीक है… सिर्फ़ कंप्यूटर सीखूँगी। और तू दादी को लेकर जल्दी आ जाना।”
मैं: “नहीं मम्मी। जब अंकल आपको कंप्यूटर सिखा देंगे उसके बाद आप मुझे आने के लिए कॉल कर देना। मैं दादी को लेकर आ जाऊँगा। और हाँ, मैं अंकल को बोल दूँगा वो नौ बजे आ जाएँगे। शाम को छह बजे तक आपको कंप्यूटर सीखना है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आप अंकल को एक घंटे में ही वापस भेज दो।”
मम्मी हँसते हुए बोलीं, “ठीक है मेरे लाल… नहीं भेजूँगी। लेकिन नौ बजे नहीं, ग्यारह बजे का बोलना। क्योंकि मुझे नहाना है और घर के कुछ काम भी करने हैं। ग्यारह से छह बजे तक… सात घंटों में थक जाऊँगी तो फिर रात का खाना कौन बनाएगा?”
मैं मुस्कुराते हुए: “मैं हूँ ना। मार्केट से ले आऊँगा।”
मम्मी: “जब तेरी दादी-पापा पूछेंगे वर्षा को क्या हुआ?”
मैं: “मम्मी, मैं बोल दूँगा आपकी तबीयत खराब है।”
मम्मी मेरा गाल हल्के से सहलाते हुए बोलीं, “ठीक है… अब जा। बुढ़िया को लेकर।”
फिर मैंने अंकल को सब बता दिया—ग्यारह बजे आ जाना।
फिर मैं दादी को लेकर नौ बजे चला गया। दादी को दोस्त के घर छोड़कर वापस आ गया और डुप्लीकेट चाबी से गेट खोलकर घर में छिप गया। मैं साढ़े दस पे वापस आ गया था। अभी अंकल को आने में तीस मिनट बाकी थे। मैंने अंकल को भी नहीं बताया था कि मैं वापस आ गया हूँ।
फिर मैं चुपके देख रहा था। मम्मी नहा चुकी थीं और पापा से फोन पे बात कर रही थीं लाउडस्पीकर पर।
(यहाँ पापा-मम्मी की बातें नहीं लिखूँगा क्योंकि फ़ालतू बातें थीं।)
मम्मी: “…जी ओके।”
इसी तरह फ़ालतू बातें चल रही थीं।
मम्मी (शर्माते हुए): “आप भी ना…”
तभी घर के पीछे वाले गेट की बेल बजी (शायद अंकल छत की बजाय पीछे वाले गेट से आए थे)। मम्मी पापा को होल्ड करने कहती हैं और डोर ओपन करने जाती हैं। अचानक की आवाज़ पापा को सुनाई देती है मम्मी की।
असल में मम्मी ने जैसे ही डोर ओपन किया, सामने अंकल खड़े थे। अंकल ने मम्मी की दाहिनी चूची पकड़के मसल दी कपड़ों के ऊपर से ही। क्योंकि उस समय मम्मी पूरी संस्कारी पतिव्रता औरत की तरह कपड़े पहने थीं।
मम्मी: “ओओउउउच्च्च्छ…” (पीछे हटकर आँख दिखाकर हाथ से इशारा करती हैं—चुप रहो—और फोन दिखाती हैं। अंकल को सोफे पे बैठने का इशारा करती हैं।)
पापा (घबराकर): “क्या हुआ जान? हेलो… हेलो…”
मम्मी: “आह… कुछ नहीं जी। वो डोर ओपन कर रही थी तो पाँव के अंगूठे को डोर लग गया।”
पापा: “ज़्यादा चोट तो नहीं लगी ना वर्षा…?” (थोड़ी फिक्र करके)
मम्मी: “नहीं जी, ज़्यादा नहीं लगी। आप टेंशन न लें। बस अब ठीक है।”
पापा: “थैंक गॉड ज़्यादा कुछ नहीं हुआ। तुमको वैसे कौन आया है?”
मम्मी: “अरे, पेपर वाला बिल देने आया है। मैं बाद में कॉल करती हूँ। वैसे आप कितने बजे तक आओगे?”
पापा: “रात को नौ बजे तक।”
मम्मी: “ऑफिस से निकलोगे तब एक बार कॉल करना। ओके?”
पापा: “ओके, कर लूँगा। क्या कुछ लाना है?”
मम्मी: “हाँ जी, उसी लिए तो कह रही हूँ।”
पापा: “क्या लाना है?”
मम्मी: “मैं तब ही बता दूँगी। ओके… बाय्य्य…”
फिर पापा कॉल कट कर देते हैं।
मम्मी (मुँह बनाकर): “क्या आप भी योगेश जी… आते ही मस्ती शुरू कर देते हैं। अरे देखिए ना, मैं अंकुश के पापा से कॉल पे बात कर रही थी।”
अंकल: “अरे सॉरी वर्षा रानी… मैं तो हर बार की तरह मस्ती करने लगा। अब मुझे क्या पता तू उस गंडू के साथ बात कर रही है। और कितनी बार कहा है—सिर्फ़ योगेश बोला कर। योगेश जी नहीं, मेरी रानी।”
मम्मी (थोड़ा गुस्सा होकर): “योगेश जी… अंकुश के पापा मेरे पति हैं। आप उनको गंडू नहीं बोल सकते। आज के बाद याद रखना, समझे आप?”
अंकल: “गुस्सा क्यों करती हो वर्षा रानी? अब से नहीं कहूँगा। बस अब खुश।”
मम्मी (मुस्कुराकर): “वैसे अंकुश के पापा हैं ही गंडू… हेहेहे… आपने सही नाम रखा है।”
अंकल: “हाहाहा… डरा ही दिया मुझे। वैसे अंकुश ने कॉल किया था ग्यारह बजे आ जाना। और ग्यारह बज रहे हैं। तुम अभी तक रेडी क्यों नहीं हुईं?”
मम्मी: “बस इतनी सी बात। अभी आती हूँ तैयार होकर। वैसे भी आप तो मुझे ऐसे तैयार होने बोल रहे हैं जैसे कि बाहर जाना है। हमें सब निकाल के नंगी ही तो करेंगे ना… हुह्ह…”
अंकल: “हाँ, वो भी सही कह रही हो वर्षा रानी। पर जो मैंने गिफ्ट दिया था वो पहनने वाली थी ना तुम?”
मम्मी: “अच्छा तो मेरे राजा जी मुझे उस ड्रेस में देखना चाहते हैं?”
अंकल: “अरे वर्षा रानी… मैं तो दो दिन से मरा जा रहा हूँ तुमको उस ड्रेस में देखने। लेकिन तुम हो कि मुझे और तुम्हारे इस बाबू (लंड पर हाथ रखकर) पे ज़ुल्म किए जा रही हो।”
मम्मी: “अच्छा ये बात है। आप तो ऐसे कह रहे हो जैसे मैं तो रोज़ लंड ले रही हूँ। पिछले पाँच दिनों से आपके लंड के लिए तड़प रही हूँ। आपने दीदी के घर पे चोदा था, उसके बाद आज चुदूँगी भर-भर के।”
मम्मी अंकल के पास आकर थोड़ा झुककर अंकल के लंड को पैंट के ऊपर से मसल देती हैं।
अंकल के मुँह से “आआआह्ह्ह्ह” की हल्की सिसकारी निकलती है। मम्मी हँसकर बेडरूम की तरफ़ जाने मुड़ती हैं। तभी अंकल मम्मी की मटकती गाँड पर एक चाँटा मार देते हैं और हँस देते हैं।
मम्मी: “आआउउउच्च्च्छ… बदमाश कहीं के!”
बोलकर हँसते हुए बेडरूम में चली जाती हैं।
लगभग दस मिनट बाद…
मम्मी बेडरूम से बाहर आती हैं।
मम्मी रेड कलर की लॉन्ग नाइटी में खड़ी हो जाती हैं। पर अंकल को झटका तब लगता है जब मम्मी कुछ ऐसा कर देती हैं—एकदम से नाइटी को आगे से ओपन कर देती हैं और रेड ब्रा-पैंटी साफ दिखती है।
ये देख अंकल के चेहरे पर खुशी और कामुक भाव आ जाते हैं। अंकल अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही मसलने लगते हैं।
मम्मी ये देखकर हँस देती हैं।
मम्मी: “क्या हुआ? इतने उतावले हो रहे हो आप… जैसे कभी इस शरीर को देखा ही नहीं। कितना रगड़ा है आपने इन चूचियों को… आआआह्ह्ह्ह…”
ये बोलके मम्मी खुद की चूचियाँ मसल देती हैं।
अंकल: “अब कितना तड़पाओगी वर्षा रानी? आ जाओ मेरे पास।” (अंकल ये बात लंड मसलते हुए कहते हैं)
मम्मी: “हेहेहे…” (हँसते हुए अंकल की गोद में बैठ जाती हैं) “इतनी उम्र हो गई है फिर भी कितना जोश है।”
अंकल: “वर्षा रानी, तेरा ये सेक्सी बदन देखकर जोश तो दुगना हो जाता है। और किसने कहा मैं बूढ़ा हो गया हूँ? अभी तो सैंतालीस का ही हूँ। हाँ, इतना ज़रूर है तू तैंतीस की है और मुझसे चौदह साल छोटी है।”
मम्मी: “क्या करूँ? कम उम्र में ही मुझसे बीस साल बड़े एक नामर्द से शादी हो गई। और तैंतीस की उम्र में उन्नीस साल के बेटे की मम्मी हूँ। और उस नामर्द का लंड खड़ा ही नहीं होता। कहता है तिरपन का हो गया हूँ।”
अंकल: “उसी उन्नीस साल के बेटे ने अपनी तैंतीस साल की मम्मी को चुदवाने के लिए सैंतालीस साल के मर्द को बुलाया और दादी को लेकर बाहर चला गया है।”
और फिर अंकल मम्मी को कसके गले लगा लेते हैं और मम्मी की पीठ को सहलाने लगते हैं।
मम्मी भी अब थोड़ी गरम होने लगती हैं। मम्मी को अपनी गाँड पे अंकल का मोटा तगड़ा नौ इंच का लंड चुभ रहा है।
अंकल मम्मी के सर के पीछे हाथ ले जाकर मम्मी के चेहरे को अपनी ओर लाते हैं और शुरू हो जाती है एक जानदार किस।
मम्मी भी अपने हाथ अंकल की गर्दन पर हार जैसे लपेट लेती हैं।
मम्मी: “म्म्म्ममुउउउम्म्म…”
अंकल: “म्म्म्ममुउउम्म्म…”
दोनों किस में खो जाते हैं। पाँच मिनट बाद जब दोनों की साँसें भारी होने लगती हैं तो दोनों के लिप अलग हो जाते हैं।
अंकल और मम्मी अब लंबी-लंबी साँसें लेने लगते हैं।
अंकल मम्मी के लिप पर अपने हाथ का अंगूठा घुमाकर—
अंकल: “इस गुलाब की पंखुड़ी में तो कितना नशा भरा हुआ है।”
मम्मी अंकल का अंगूठा अपने मुँह में लेकर चूसने लगती हैं। ये करते हुए मम्मी की नज़र अंकल की नज़रों में ही है।
अंकल: “अब इन कपड़ों का क्या काम वर्षा रानी? उतार दो इन्हें।”
मम्मी झट से अंकल की गोद से उतरकर बेडरूम की तरफ़ जाते-जाते नाइटी उतार देती हैं। फिर ब्रा उतारके अंकल की तरफ़ उछाल देती हैं। और अब वो ऐसा कर देती हैं कि अंकल का खुद पर काबू नहीं रहता।
पर अंकल अपनी जगह सिर्फ़ खड़े हो जाते हैं। वो मम्मी को तड़पाना चाहते हैं।
मम्मी: “आआह… अब आ भी जाओ। क्यों तड़पा रहे हो?”
अंकल सिर्फ़ हँस देते हैं पर वहीं खड़े रहते हैं।
मम्मी को अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। वो खुद आगे आकर अंकल को धक्का देकर दीवार से लगा देती हैं और अंकल के कपड़े निकालने लगती हैं।
मम्मी अंकल को पूरा नंगा कर देती हैं और मम्मी अंकल का हाथ पकड़कर खींचती हुई बेडरूम में ले जाती हैं।
मम्मी: “क्यों तड़पा रहे हो जी? मूड नहीं था तो मुझे यूँ गरम क्यों कर दिया?”
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दोस्तों, अब मैं अंकित को अंकुश लिखूँगा।
आंटी के घर से आने के बाद मम्मी पूरे दिन सोती रहीं। पापा घर पे ही रहते थे। आंटी के घर से आए हुए तीन दिन हो गए थे तो अंकल ने मुझे अपने घर बुलाकर एक पार्सल दिया और बोले, “इसमें एक ड्रेस है तेरी मम्मी के लिए। इसे तू वर्षा को दे देना। और बेटे, तीन दिन हो गए वर्षा से मिले। जल्द ही कुछ कर।”
मैं: “अंकल, पापा घर से ऑफिस वर्क कर रहे हैं। जिस दिन पापा ऑफिस जाएँगे उस दिन मैं दादी को घर से बाहर ले जाऊँगा और आप मम्मी से मस्ती करना।”
अंकल खुश होकर मुझे सिगरेट पिलाई। फिर मैं घर आकर पार्सल मम्मी को दिया और कहा, “अंकल ने दिया है आपको देने के लिए।”
मम्मी: “क्या है इसमें?”
मैं: “पता नहीं।”
मम्मी: “तूने देखा तो होगा।”
मैं: “नहीं मम्मी। अंकल ने कहा तू देखना मत। और उन्होंने मुझे आपकी कसम दी, इसलिए मैंने नहीं देखा।”
मम्मी मेरी आँखों में देखती हुई बोलीं, “ठीक है… तू जा। मैं देख लूँगी।” उनकी आवाज़ में हल्की सी मिठास थी।
फिर दो दिन बाद पापा ऑफिस गए। सुबह आठ बजे पापा के जाने के बाद मैंने दादी से कहा, “दादी, आज मेरे दोस्त के घर भजन। आप चलोगी?” दादी खुश होकर बोलीं, “हाँ।”
मम्मी चुपचाप सुन रही थीं और मुझे आँख दिखा रही थीं।
दादी: “बेटा, कितने बजे चलेंगे?”
मैं: “दादी, आप जल्दी तैयार हो जाओ। नौ बजे से है।”
फिर दादी रूम में चली गईं तैयार होने। दादी के जाने के बाद मम्मी गुस्से में मेरा हाथ पकड़कर रूम में ले गईं।
मम्मी: “बेटा, क्या है ये सब?”
मैं: “क्या मम्मी? मैं समझा नहीं।”
मम्मी: “मैं जानती हूँ तू सब समझ रहा है। जानबूझकर दादी को ले जा रहा है ताकि मैं घर पे अकेली रहूँ और योगेश जी आ जाएँ।”
मैं उनकी आँखों में देखते हुए बोला, “हाँ मम्मी… आप सही कह रही हैं। ताकि अंकल आपको कंप्यूटर सिखाते रहें।”
मम्मी: “नालायक! तुझे क्या हो गया है? तू मुझे एक गैर मर्द के साथ अकेला छोड़ रहा है। मैंने तुझसे कितनी बार कहा है… वो मेरे साथ यहाँ तक कि एक बार तो उन्होंने मेरे कपड़े भी फाड़ दिए।”
मैं धीरे से बोला, “मम्मी… अंकल ने कुछ किया तो नहीं?”
मम्मी: “जब वो मुझे नंगी कर देते और फिर मेरा मुँह काला कर देते तब क्या?”
मैं उनका हाथ हल्के से पकड़ते हुए बोला, “मम्मी… अंकल जो भी करेंगे, आपकी सहमति से ही करेंगे। आप उनका प्रपोजल स्वीकार कर लो। आपको अंकल के प्यार की ज़रूरत है… और मुझे आपकी खुशी की।”
मम्मी: “नहीं करूँगी। और मैं योगेश जी को घर में आने भी नहीं दूँगी।”
मैं: “मम्मी, आपको मेरी कसम है… आप अंकल को आने दोगी। अंकल आपको कंप्यूटर सिखाने आएँगे। आप कंप्यूटर सीख लेना… और कुछ नहीं। और अगर आपकी इच्छा हो तो…” मैं चुप हो गया।
मम्मी मेरी तरफ़ देखते हुए बोलीं, “कसम देना ज़रूरी था क्या? तू जानता है… मैं तेरे लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ। ठीक है… सिर्फ़ कंप्यूटर सीखूँगी। और तू दादी को लेकर जल्दी आ जाना।”
मैं: “नहीं मम्मी। जब अंकल आपको कंप्यूटर सिखा देंगे उसके बाद आप मुझे आने के लिए कॉल कर देना। मैं दादी को लेकर आ जाऊँगा। और हाँ, मैं अंकल को बोल दूँगा वो नौ बजे आ जाएँगे। शाम को छह बजे तक आपको कंप्यूटर सीखना है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आप अंकल को एक घंटे में ही वापस भेज दो।”
मम्मी हँसते हुए बोलीं, “ठीक है मेरे लाल… नहीं भेजूँगी। लेकिन नौ बजे नहीं, ग्यारह बजे का बोलना। क्योंकि मुझे नहाना है और घर के कुछ काम भी करने हैं। ग्यारह से छह बजे तक… सात घंटों में थक जाऊँगी तो फिर रात का खाना कौन बनाएगा?”
मैं मुस्कुराते हुए: “मैं हूँ ना। मार्केट से ले आऊँगा।”
मम्मी: “जब तेरी दादी-पापा पूछेंगे वर्षा को क्या हुआ?”
मैं: “मम्मी, मैं बोल दूँगा आपकी तबीयत खराब है।”
मम्मी मेरा गाल हल्के से सहलाते हुए बोलीं, “ठीक है… अब जा। बुढ़िया को लेकर।”
फिर मैंने अंकल को सब बता दिया—ग्यारह बजे आ जाना।
फिर मैं दादी को लेकर नौ बजे चला गया। दादी को दोस्त के घर छोड़कर वापस आ गया और डुप्लीकेट चाबी से गेट खोलकर घर में छिप गया। मैं साढ़े दस पे वापस आ गया था। अभी अंकल को आने में तीस मिनट बाकी थे। मैंने अंकल को भी नहीं बताया था कि मैं वापस आ गया हूँ।
फिर मैं चुपके देख रहा था। मम्मी नहा चुकी थीं और पापा से फोन पे बात कर रही थीं लाउडस्पीकर पर।
(यहाँ पापा-मम्मी की बातें नहीं लिखूँगा क्योंकि फ़ालतू बातें थीं।)
मम्मी: “…जी ओके।”
इसी तरह फ़ालतू बातें चल रही थीं।
मम्मी (शर्माते हुए): “आप भी ना…”
तभी घर के पीछे वाले गेट की बेल बजी (शायद अंकल छत की बजाय पीछे वाले गेट से आए थे)। मम्मी पापा को होल्ड करने कहती हैं और डोर ओपन करने जाती हैं। अचानक की आवाज़ पापा को सुनाई देती है मम्मी की।
असल में मम्मी ने जैसे ही डोर ओपन किया, सामने अंकल खड़े थे। अंकल ने मम्मी की दाहिनी चूची पकड़के मसल दी कपड़ों के ऊपर से ही। क्योंकि उस समय मम्मी पूरी संस्कारी पतिव्रता औरत की तरह कपड़े पहने थीं।
मम्मी: “ओओउउउच्च्च्छ…” (पीछे हटकर आँख दिखाकर हाथ से इशारा करती हैं—चुप रहो—और फोन दिखाती हैं। अंकल को सोफे पे बैठने का इशारा करती हैं।)
पापा (घबराकर): “क्या हुआ जान? हेलो… हेलो…”
मम्मी: “आह… कुछ नहीं जी। वो डोर ओपन कर रही थी तो पाँव के अंगूठे को डोर लग गया।”
पापा: “ज़्यादा चोट तो नहीं लगी ना वर्षा…?” (थोड़ी फिक्र करके)
मम्मी: “नहीं जी, ज़्यादा नहीं लगी। आप टेंशन न लें। बस अब ठीक है।”
पापा: “थैंक गॉड ज़्यादा कुछ नहीं हुआ। तुमको वैसे कौन आया है?”
मम्मी: “अरे, पेपर वाला बिल देने आया है। मैं बाद में कॉल करती हूँ। वैसे आप कितने बजे तक आओगे?”
पापा: “रात को नौ बजे तक।”
मम्मी: “ऑफिस से निकलोगे तब एक बार कॉल करना। ओके?”
पापा: “ओके, कर लूँगा। क्या कुछ लाना है?”
मम्मी: “हाँ जी, उसी लिए तो कह रही हूँ।”
पापा: “क्या लाना है?”
मम्मी: “मैं तब ही बता दूँगी। ओके… बाय्य्य…”
फिर पापा कॉल कट कर देते हैं।
मम्मी (मुँह बनाकर): “क्या आप भी योगेश जी… आते ही मस्ती शुरू कर देते हैं। अरे देखिए ना, मैं अंकुश के पापा से कॉल पे बात कर रही थी।”
अंकल: “अरे सॉरी वर्षा रानी… मैं तो हर बार की तरह मस्ती करने लगा। अब मुझे क्या पता तू उस गंडू के साथ बात कर रही है। और कितनी बार कहा है—सिर्फ़ योगेश बोला कर। योगेश जी नहीं, मेरी रानी।”
मम्मी (थोड़ा गुस्सा होकर): “योगेश जी… अंकुश के पापा मेरे पति हैं। आप उनको गंडू नहीं बोल सकते। आज के बाद याद रखना, समझे आप?”
अंकल: “गुस्सा क्यों करती हो वर्षा रानी? अब से नहीं कहूँगा। बस अब खुश।”
मम्मी (मुस्कुराकर): “वैसे अंकुश के पापा हैं ही गंडू… हेहेहे… आपने सही नाम रखा है।”
अंकल: “हाहाहा… डरा ही दिया मुझे। वैसे अंकुश ने कॉल किया था ग्यारह बजे आ जाना। और ग्यारह बज रहे हैं। तुम अभी तक रेडी क्यों नहीं हुईं?”
मम्मी: “बस इतनी सी बात। अभी आती हूँ तैयार होकर। वैसे भी आप तो मुझे ऐसे तैयार होने बोल रहे हैं जैसे कि बाहर जाना है। हमें सब निकाल के नंगी ही तो करेंगे ना… हुह्ह…”
अंकल: “हाँ, वो भी सही कह रही हो वर्षा रानी। पर जो मैंने गिफ्ट दिया था वो पहनने वाली थी ना तुम?”
मम्मी: “अच्छा तो मेरे राजा जी मुझे उस ड्रेस में देखना चाहते हैं?”
अंकल: “अरे वर्षा रानी… मैं तो दो दिन से मरा जा रहा हूँ तुमको उस ड्रेस में देखने। लेकिन तुम हो कि मुझे और तुम्हारे इस बाबू (लंड पर हाथ रखकर) पे ज़ुल्म किए जा रही हो।”
मम्मी: “अच्छा ये बात है। आप तो ऐसे कह रहे हो जैसे मैं तो रोज़ लंड ले रही हूँ। पिछले पाँच दिनों से आपके लंड के लिए तड़प रही हूँ। आपने दीदी के घर पे चोदा था, उसके बाद आज चुदूँगी भर-भर के।”
मम्मी अंकल के पास आकर थोड़ा झुककर अंकल के लंड को पैंट के ऊपर से मसल देती हैं।
अंकल के मुँह से “आआआह्ह्ह्ह” की हल्की सिसकारी निकलती है। मम्मी हँसकर बेडरूम की तरफ़ जाने मुड़ती हैं। तभी अंकल मम्मी की मटकती गाँड पर एक चाँटा मार देते हैं और हँस देते हैं।
मम्मी: “आआउउउच्च्च्छ… बदमाश कहीं के!”
बोलकर हँसते हुए बेडरूम में चली जाती हैं।
लगभग दस मिनट बाद…
मम्मी बेडरूम से बाहर आती हैं।
मम्मी रेड कलर की लॉन्ग नाइटी में खड़ी हो जाती हैं। पर अंकल को झटका तब लगता है जब मम्मी कुछ ऐसा कर देती हैं—एकदम से नाइटी को आगे से ओपन कर देती हैं और रेड ब्रा-पैंटी साफ दिखती है।
ये देख अंकल के चेहरे पर खुशी और कामुक भाव आ जाते हैं। अंकल अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही मसलने लगते हैं।
मम्मी ये देखकर हँस देती हैं।
मम्मी: “क्या हुआ? इतने उतावले हो रहे हो आप… जैसे कभी इस शरीर को देखा ही नहीं। कितना रगड़ा है आपने इन चूचियों को… आआआह्ह्ह्ह…”
ये बोलके मम्मी खुद की चूचियाँ मसल देती हैं।
अंकल: “अब कितना तड़पाओगी वर्षा रानी? आ जाओ मेरे पास।” (अंकल ये बात लंड मसलते हुए कहते हैं)
मम्मी: “हेहेहे…” (हँसते हुए अंकल की गोद में बैठ जाती हैं) “इतनी उम्र हो गई है फिर भी कितना जोश है।”
अंकल: “वर्षा रानी, तेरा ये सेक्सी बदन देखकर जोश तो दुगना हो जाता है। और किसने कहा मैं बूढ़ा हो गया हूँ? अभी तो सैंतालीस का ही हूँ। हाँ, इतना ज़रूर है तू तैंतीस की है और मुझसे चौदह साल छोटी है।”
मम्मी: “क्या करूँ? कम उम्र में ही मुझसे बीस साल बड़े एक नामर्द से शादी हो गई। और तैंतीस की उम्र में उन्नीस साल के बेटे की मम्मी हूँ। और उस नामर्द का लंड खड़ा ही नहीं होता। कहता है तिरपन का हो गया हूँ।”
अंकल: “उसी उन्नीस साल के बेटे ने अपनी तैंतीस साल की मम्मी को चुदवाने के लिए सैंतालीस साल के मर्द को बुलाया और दादी को लेकर बाहर चला गया है।”
और फिर अंकल मम्मी को कसके गले लगा लेते हैं और मम्मी की पीठ को सहलाने लगते हैं।
मम्मी भी अब थोड़ी गरम होने लगती हैं। मम्मी को अपनी गाँड पे अंकल का मोटा तगड़ा नौ इंच का लंड चुभ रहा है।
अंकल मम्मी के सर के पीछे हाथ ले जाकर मम्मी के चेहरे को अपनी ओर लाते हैं और शुरू हो जाती है एक जानदार किस।
मम्मी भी अपने हाथ अंकल की गर्दन पर हार जैसे लपेट लेती हैं।
मम्मी: “म्म्म्ममुउउउम्म्म…”
अंकल: “म्म्म्ममुउउम्म्म…”
दोनों किस में खो जाते हैं। पाँच मिनट बाद जब दोनों की साँसें भारी होने लगती हैं तो दोनों के लिप अलग हो जाते हैं।
अंकल और मम्मी अब लंबी-लंबी साँसें लेने लगते हैं।
अंकल मम्मी के लिप पर अपने हाथ का अंगूठा घुमाकर—
अंकल: “इस गुलाब की पंखुड़ी में तो कितना नशा भरा हुआ है।”
मम्मी अंकल का अंगूठा अपने मुँह में लेकर चूसने लगती हैं। ये करते हुए मम्मी की नज़र अंकल की नज़रों में ही है।
अंकल: “अब इन कपड़ों का क्या काम वर्षा रानी? उतार दो इन्हें।”
मम्मी झट से अंकल की गोद से उतरकर बेडरूम की तरफ़ जाते-जाते नाइटी उतार देती हैं। फिर ब्रा उतारके अंकल की तरफ़ उछाल देती हैं। और अब वो ऐसा कर देती हैं कि अंकल का खुद पर काबू नहीं रहता।
पर अंकल अपनी जगह सिर्फ़ खड़े हो जाते हैं। वो मम्मी को तड़पाना चाहते हैं।
मम्मी: “आआह… अब आ भी जाओ। क्यों तड़पा रहे हो?”
अंकल सिर्फ़ हँस देते हैं पर वहीं खड़े रहते हैं।
मम्मी को अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। वो खुद आगे आकर अंकल को धक्का देकर दीवार से लगा देती हैं और अंकल के कपड़े निकालने लगती हैं।
मम्मी अंकल को पूरा नंगा कर देती हैं और मम्मी अंकल का हाथ पकड़कर खींचती हुई बेडरूम में ले जाती हैं।
मम्मी: “क्यों तड़पा रहे हो जी? मूड नहीं था तो मुझे यूँ गरम क्यों कर दिया?”


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