21-08-2026, 06:31 PM
Update 11
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मम्मी बोलीं, “मैं चाय बनाती हूँ।”
आंटी: “हाँ वर्षा, चाय बनाओ और मैं रूम में जाती हूँ।”
आंटी वापस रूम में चली गईं और मम्मी किचन में। फिर मैं भी मम्मी के साथ किचन में गया तो मम्मी मुझे देख रही थीं।
मैं: “मम्मी, क्या आप कुछ कहना चाहती हो?”
मम्मी: “बेटा, तुझे क्या लगता है? आज रात को मैं योगेश जी के साथ थी तो…”
मैं: “मम्मी, आप अंकल के साथ कंप्यूटर सीखने गई थीं, इसलिए उनके रूम में थीं।”
मम्मी: “सच बता। या फिर तुझे ऐसा तो नहीं लग रहा है कि हमारे बीच रात को कुछ…”
मैं: “नहीं मम्मी।”
मम्मी: “और हुआ होता तो?”
मैं: “मम्मी, ये तो अच्छा होता। आप अंकल एक हो जाते। आपको अंकल का प्यार मिलता और अंकल को भी आपका प्यार मिलता।”
मम्मी: “बेटा, तुझे क्या हो गया है जो तू मुझे गैर मर्द की बाँहों में सुलाना चाहता है?”
मैं: “मैं सिर्फ़ इतना चाहता हूँ—आपको प्यार की ज़रूरत है। वो पापा पूरी नहीं करते। पापा आउट ऑफ़ सिटी ज़्यादा रहते हैं और ऑफिस वर्क की वजह से पापा आपको प्यार नहीं कर पाते।”
मम्मी: “चुप बेशरम!”
मैं: “मम्मी, इसलिए मैं चाहता हूँ आपको अंकल से प्यार मिले।”
मम्मी: “लेकिन ये तो धोखा होगा तेरे पापा के साथ।”
मैं: “नहीं होगा मम्मी। मैं आपसे पिछले छह महीनों से कह रहा हूँ—आप अंकल के प्रपोज को एक्सेप्ट कर लीजिए। और जब पापा आपकी ज़रूरत पूरी कर सकते हैं तो आपको अपनी ज़रूरत पूरी करने का अधिकार है। और इसमें कुछ गलत नहीं। आप पापा को डिवोर्स थोड़ी दे रही हैं। आप तो सिर्फ़ अपनी ज़रूरत पूरी करेंगी।”
मम्मी: “लेकिन ये गलत है। इसलिए मैं तेरे पापा के अलावा किसी और के बारे में सोचूँगी भी नहीं। इसलिए मेरा हमेशा ना ही रहेगी।”
मैं: “मम्मी, आप और आंटी हँस क्यों रही थीं?”
मम्मी: “बेटा, वो सोच रही थीं मेरे और योगेश जी के बीच अफेयर है। इसलिए उन्होंने कल रूम को अच्छे से डेकोरेट करवाया था जैसे सुहागरात में होता है। और मैंने भी जानबूझकर लड़खड़ाने का नाटक करती हुई नीचे आई थी तो वे मेरी चाल देखकर समझीं कि रात को मेरे और योगेश जी के बीच कुछ हुआ है। जबकि बेटा, मेरे और योगेश जी के बीच कुछ नहीं हुआ। हालाँकि योगेश जी मेरे साथ ज़बरदस्ती करनी चाह रहे थे लेकिन मैंने उन्हें कुछ नहीं करने दिया। पिछले छह महीनों से वे मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश करते हैं जब भी तू मुझे उनके साथ अकेली छोड़ता है। लेकिन मैं हर बार उनको कुछ नहीं करने देती।”
मैं: “मम्मी, प्लीज़ एक बार अंकल के प्यार को एक्सेप्ट कर लो।”
मम्मी: “नेवर।”
मैं: “तो फिर आपने आंटी के सामने नाटक क्यों किया?”
मम्मी: “तू नहीं समझेगा। अब बाहर जा और मुझे चाय बनाने दे।”
मैं: “मम्मी, बना लीजिए और ऊपर रूम में अंकल को भी चाय दे आना।”
फिर मम्मी ने चाय बनाई और मैं आंटी को चाय देने रूम में गया। और वापस आकर किचन में मम्मी के साथ ऊपर रूम में जाने लगा तो मम्मी ने कहा, “तू यहीं रुक। मैं योगेश जी को चाय देकर आती हूँ।” मम्मी दो कप चाय लेकर ऊपर रूम में चली गईं। मैं नीचे हॉल में बैठकर चाय पीने लगा।
बहुत देर तक मम्मी-अंकल नीचे नहीं आए तो मैं आंटी के रूम में गया तो देखा वे बाथरूम में हैं। फिर मैं ऊपर गया और देखा रूम का गेट बंद है। विंडो पे गया तो देखा—
अंकल और मम्मी रूम में थे और कुछ बातें कर रहे थे।
मम्मी के कंधों पर अंकल का हाथ था और वे दोनों एकदम चिपके कर बैठे थे।
अंकल: “वर्षा, सच में कल की रात यादगार रहेगी मेरे लिए।”
मम्मी: “रात की बात छोड़िए। आज सुबह-सुबह जो किया उसका क्या?”
अंकल: “अरे, तुम हो ही ऐसी कि थोड़ी देर भी रहा नहीं जाता मुझसे।”
और अंकल ने मम्मी के गाल पर चूम लिया।
मम्मी: “अच्छा, आप भी कुछ कम नहीं हैं।”
अंकल: “फिर आज रुक जाओ ना और मज़ा करेंगे।”
मम्मी: “इतना मज़ा आज के लिए काफ़ी है। और अंकित के पापा-दादी क्या सोचेंगे? मुझे जाना होगा। और आपका मन करे तो अंकित से कह देना। वो मुझे आपके घर ले आएगा। वो तो आपका चमचा है और अपनी मम्मी को चुदवाने की मना नहीं करेगा।”
अंकल: “क्या कहा? चमचा? वो मेरा चमचा नहीं बल्कि मेरा बेटा है। और वो चाहता है उसकी मम्मी हमेशा मेरे बाँहों में मेरे लंड से चुदती रहे। जो काम उसके पापा नहीं करते वो काम वो मुझसे करवाता है।”
मम्मी: “हाँ तो मैं भी यही कह रही हूँ। आपका लंड जब खड़ा हो तो उससे बोल देना। मुझे लेकर आपके घर आ जाएगा।”
और मम्मी वहाँ से उठने लगीं।
तभी अंकल ने मम्मी को रोका।
अंकल: “रुको, मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ।”
और अंकल बिस्तर के नीचे से एक बॉक्स निकालते हैं और वो मम्मी को दे देते हैं।
मम्मी: “ये क्या है…?”
अंकल: “तोहफा है तुम्हारे लिए।”
मम्मी: “अब इसकी क्या ज़रूरत थी।”
मम्मी तोहफा पाकर खुश दिख रही थीं।
अंकल: “अब ज़्यादा नखरे मत करो और खोलो।”
मम्मी बॉक्स खोलती हैं…
उस बॉक्स में एक सैंडल थी। वो भी एक हाई हील्स वाली।
मम्मी: “अरे ये क्या? मैं तो ऐसे सैंडल्स नहीं पहनती।”
अंकल: “क्यों नहीं? ये तुम्हारी सुंदरता को और बढ़ाएँगे। चलो इसे पहनकर दिखाओ।”
मम्मी हँसते हुए पहन लेती हैं और खड़ी हो जाती हैं।
हाई हील्स की वजह से मम्मी लंबी दिख रही थीं और उनके चूतड़ और थोड़े से पीछे की ओर बाहर दिखाई देने लगे।
योगेश अंकल: “वाह मेरी जान, क्या लग रही हो तुम… ज़रा पीछे मुड़ो।”
मम्मी पीछे मुड़ जाती हैं।
तो उनके बड़े गदराए चूतड़ दिखने लगे।
अंकल: “वाह वर्षा, ऐसा नज़ारा तो कभी नहीं देखा।”
मम्मी अपनी तारीफ़ सुनकर शर्माने लगी थीं।
मम्मी: “कुछ भी बोल रहे हैं आप।”
अंकल: “अरे ज़रा चलके दिखाओ मेरी जान।”
मम्मी अब इधर-उधर अंकल के सामने अपनी कमर मटकाते हुए चलने लगती हैं।
चलते हुए मम्मी के चूतड़ एक रिदम में हिल रहे थे।
योगेश अंकल: “वाह मेरी चमकछल्लो… मज़ा आ गया… क्या चूतड़ हैं तुम्हारे।”
अंकल अब बिस्तर से उठकर मम्मी के करीब आते हैं और उनके कमर को पकड़कर मम्मी को घुमा-घुमा कर उनके चूतड़ देखने लगते हैं।
अंकल के ऐसे करने से मम्मी को हँसी आ रही थी।
मम्मी: “अरे ये आप क्या कर रहे हैं… बस कीजिए।”
अब अंकल रुकते हैं और मम्मी की कमर में हाथ डालकर उनको अपनी तरफ़ खींचते हैं और अपने होठों से मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं।
मम्मी भी अंकल का साथ देने लगती हैं।
अंकल और मम्मी एक-दूसरे को बड़े ज़ोरों से चूम रहे थे।
अंकल के हाथ पीछे मम्मी के चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही मसल रहे थे।
कुछ देर मम्मी के होठों का रसपान करने के बाद दोनों रुक गए।
अंकल: “वर्षा, आई लव यू… तुम बहुत खूबसूरत हो… तुझ जैसी औरत मुझे आज तक नहीं मिली।”
मम्मी: “अब बस। हमारे जाने का समय हो गया।”
और मम्मी सैंडल निकाल रही थीं। तो मम्मी एक स्माइल देते हुए वो पहनती हैं।
अंकल: “अरे इसे पहनकर ही जाओ ना। मुझे अच्छा लगेगा।”
मम्मी: “ठीक है। पर आप हमें आज छोड़ने मत आइए।”
अंकल: “क्यों? क्या हुआ?”
मम्मी: “कुछ नहीं। अगर आप बार-बार आए तो मेरे पति और सास को शक हो सकता है।”
अंकल: “अरे किसी को कोई शक नहीं होगा। मैं हूँ ना।”
मम्मी: “नहीं। ज़्यादा दूर थोड़ी है। हम चले जाएँगे।”
अंकल: “पक्का चली जाओगी?”
मम्मी: “हाँ, पक्का।”
अंकल: “ठीक है, चलो।”
फिर दोनों नीचे आने लगते हैं तो मैं दौड़कर नीचे आ जाता हूँ। आंटी अभी भी उनके रूम में थीं। फिर मैं सोफे पे बैठ जाता हूँ। अंकल-मम्मी साथ में नीचे आते हैं और सोफे पे बैठ जाते हैं। और फिर आंटी भी अपने रूम से बाहर आती हैं।
आंटी: “हो गया तुम्हारा? बड़ी जल्दी आ गए।”
और सब हँसने लगते हैं।
हँसते हुए सब मेरी तरफ़ देख रहे थे।
मैं: “मैं कुछ समझा नहीं।”
मम्मी: “बेटा, आंटी कह रही हैं—हो गई तुम्हारी कंप्यूटर क्लास।”
मैं: “हाँ, हो गई आंटी। क्लास तो हमेशा चलेगी।”
मेरी इस बात पे सब फिर से हँसने लगे। और फिर मैं और मम्मी टैक्सी से घर आ जाते हैं। अभी 10 AM हो चुके थे।
दादी ने देरी से आने का पूछा तो मैंने कह दिया आंटी ने रोक लिया। फिर मम्मी ने कहा उन्हें सोना है तो मैंने दादी और पापा को कहा, “पापा, मम्मी की तबीयत खराब है तो उन्हें सोने देना।” तो फिर मम्मी पूरे दिन सोती रहीं।
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मम्मी बोलीं, “मैं चाय बनाती हूँ।”
आंटी: “हाँ वर्षा, चाय बनाओ और मैं रूम में जाती हूँ।”
आंटी वापस रूम में चली गईं और मम्मी किचन में। फिर मैं भी मम्मी के साथ किचन में गया तो मम्मी मुझे देख रही थीं।
मैं: “मम्मी, क्या आप कुछ कहना चाहती हो?”
मम्मी: “बेटा, तुझे क्या लगता है? आज रात को मैं योगेश जी के साथ थी तो…”
मैं: “मम्मी, आप अंकल के साथ कंप्यूटर सीखने गई थीं, इसलिए उनके रूम में थीं।”
मम्मी: “सच बता। या फिर तुझे ऐसा तो नहीं लग रहा है कि हमारे बीच रात को कुछ…”
मैं: “नहीं मम्मी।”
मम्मी: “और हुआ होता तो?”
मैं: “मम्मी, ये तो अच्छा होता। आप अंकल एक हो जाते। आपको अंकल का प्यार मिलता और अंकल को भी आपका प्यार मिलता।”
मम्मी: “बेटा, तुझे क्या हो गया है जो तू मुझे गैर मर्द की बाँहों में सुलाना चाहता है?”
मैं: “मैं सिर्फ़ इतना चाहता हूँ—आपको प्यार की ज़रूरत है। वो पापा पूरी नहीं करते। पापा आउट ऑफ़ सिटी ज़्यादा रहते हैं और ऑफिस वर्क की वजह से पापा आपको प्यार नहीं कर पाते।”
मम्मी: “चुप बेशरम!”
मैं: “मम्मी, इसलिए मैं चाहता हूँ आपको अंकल से प्यार मिले।”
मम्मी: “लेकिन ये तो धोखा होगा तेरे पापा के साथ।”
मैं: “नहीं होगा मम्मी। मैं आपसे पिछले छह महीनों से कह रहा हूँ—आप अंकल के प्रपोज को एक्सेप्ट कर लीजिए। और जब पापा आपकी ज़रूरत पूरी कर सकते हैं तो आपको अपनी ज़रूरत पूरी करने का अधिकार है। और इसमें कुछ गलत नहीं। आप पापा को डिवोर्स थोड़ी दे रही हैं। आप तो सिर्फ़ अपनी ज़रूरत पूरी करेंगी।”
मम्मी: “लेकिन ये गलत है। इसलिए मैं तेरे पापा के अलावा किसी और के बारे में सोचूँगी भी नहीं। इसलिए मेरा हमेशा ना ही रहेगी।”
मैं: “मम्मी, आप और आंटी हँस क्यों रही थीं?”
मम्मी: “बेटा, वो सोच रही थीं मेरे और योगेश जी के बीच अफेयर है। इसलिए उन्होंने कल रूम को अच्छे से डेकोरेट करवाया था जैसे सुहागरात में होता है। और मैंने भी जानबूझकर लड़खड़ाने का नाटक करती हुई नीचे आई थी तो वे मेरी चाल देखकर समझीं कि रात को मेरे और योगेश जी के बीच कुछ हुआ है। जबकि बेटा, मेरे और योगेश जी के बीच कुछ नहीं हुआ। हालाँकि योगेश जी मेरे साथ ज़बरदस्ती करनी चाह रहे थे लेकिन मैंने उन्हें कुछ नहीं करने दिया। पिछले छह महीनों से वे मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश करते हैं जब भी तू मुझे उनके साथ अकेली छोड़ता है। लेकिन मैं हर बार उनको कुछ नहीं करने देती।”
मैं: “मम्मी, प्लीज़ एक बार अंकल के प्यार को एक्सेप्ट कर लो।”
मम्मी: “नेवर।”
मैं: “तो फिर आपने आंटी के सामने नाटक क्यों किया?”
मम्मी: “तू नहीं समझेगा। अब बाहर जा और मुझे चाय बनाने दे।”
मैं: “मम्मी, बना लीजिए और ऊपर रूम में अंकल को भी चाय दे आना।”
फिर मम्मी ने चाय बनाई और मैं आंटी को चाय देने रूम में गया। और वापस आकर किचन में मम्मी के साथ ऊपर रूम में जाने लगा तो मम्मी ने कहा, “तू यहीं रुक। मैं योगेश जी को चाय देकर आती हूँ।” मम्मी दो कप चाय लेकर ऊपर रूम में चली गईं। मैं नीचे हॉल में बैठकर चाय पीने लगा।
बहुत देर तक मम्मी-अंकल नीचे नहीं आए तो मैं आंटी के रूम में गया तो देखा वे बाथरूम में हैं। फिर मैं ऊपर गया और देखा रूम का गेट बंद है। विंडो पे गया तो देखा—
अंकल और मम्मी रूम में थे और कुछ बातें कर रहे थे।
मम्मी के कंधों पर अंकल का हाथ था और वे दोनों एकदम चिपके कर बैठे थे।
अंकल: “वर्षा, सच में कल की रात यादगार रहेगी मेरे लिए।”
मम्मी: “रात की बात छोड़िए। आज सुबह-सुबह जो किया उसका क्या?”
अंकल: “अरे, तुम हो ही ऐसी कि थोड़ी देर भी रहा नहीं जाता मुझसे।”
और अंकल ने मम्मी के गाल पर चूम लिया।
मम्मी: “अच्छा, आप भी कुछ कम नहीं हैं।”
अंकल: “फिर आज रुक जाओ ना और मज़ा करेंगे।”
मम्मी: “इतना मज़ा आज के लिए काफ़ी है। और अंकित के पापा-दादी क्या सोचेंगे? मुझे जाना होगा। और आपका मन करे तो अंकित से कह देना। वो मुझे आपके घर ले आएगा। वो तो आपका चमचा है और अपनी मम्मी को चुदवाने की मना नहीं करेगा।”
अंकल: “क्या कहा? चमचा? वो मेरा चमचा नहीं बल्कि मेरा बेटा है। और वो चाहता है उसकी मम्मी हमेशा मेरे बाँहों में मेरे लंड से चुदती रहे। जो काम उसके पापा नहीं करते वो काम वो मुझसे करवाता है।”
मम्मी: “हाँ तो मैं भी यही कह रही हूँ। आपका लंड जब खड़ा हो तो उससे बोल देना। मुझे लेकर आपके घर आ जाएगा।”
और मम्मी वहाँ से उठने लगीं।
तभी अंकल ने मम्मी को रोका।
अंकल: “रुको, मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ।”
और अंकल बिस्तर के नीचे से एक बॉक्स निकालते हैं और वो मम्मी को दे देते हैं।
मम्मी: “ये क्या है…?”
अंकल: “तोहफा है तुम्हारे लिए।”
मम्मी: “अब इसकी क्या ज़रूरत थी।”
मम्मी तोहफा पाकर खुश दिख रही थीं।
अंकल: “अब ज़्यादा नखरे मत करो और खोलो।”
मम्मी बॉक्स खोलती हैं…
उस बॉक्स में एक सैंडल थी। वो भी एक हाई हील्स वाली।
मम्मी: “अरे ये क्या? मैं तो ऐसे सैंडल्स नहीं पहनती।”
अंकल: “क्यों नहीं? ये तुम्हारी सुंदरता को और बढ़ाएँगे। चलो इसे पहनकर दिखाओ।”
मम्मी हँसते हुए पहन लेती हैं और खड़ी हो जाती हैं।
हाई हील्स की वजह से मम्मी लंबी दिख रही थीं और उनके चूतड़ और थोड़े से पीछे की ओर बाहर दिखाई देने लगे।
योगेश अंकल: “वाह मेरी जान, क्या लग रही हो तुम… ज़रा पीछे मुड़ो।”
मम्मी पीछे मुड़ जाती हैं।
तो उनके बड़े गदराए चूतड़ दिखने लगे।
अंकल: “वाह वर्षा, ऐसा नज़ारा तो कभी नहीं देखा।”
मम्मी अपनी तारीफ़ सुनकर शर्माने लगी थीं।
मम्मी: “कुछ भी बोल रहे हैं आप।”
अंकल: “अरे ज़रा चलके दिखाओ मेरी जान।”
मम्मी अब इधर-उधर अंकल के सामने अपनी कमर मटकाते हुए चलने लगती हैं।
चलते हुए मम्मी के चूतड़ एक रिदम में हिल रहे थे।
योगेश अंकल: “वाह मेरी चमकछल्लो… मज़ा आ गया… क्या चूतड़ हैं तुम्हारे।”
अंकल अब बिस्तर से उठकर मम्मी के करीब आते हैं और उनके कमर को पकड़कर मम्मी को घुमा-घुमा कर उनके चूतड़ देखने लगते हैं।
अंकल के ऐसे करने से मम्मी को हँसी आ रही थी।
मम्मी: “अरे ये आप क्या कर रहे हैं… बस कीजिए।”
अब अंकल रुकते हैं और मम्मी की कमर में हाथ डालकर उनको अपनी तरफ़ खींचते हैं और अपने होठों से मम्मी के होठों को चूसने लगते हैं।
मम्मी भी अंकल का साथ देने लगती हैं।
अंकल और मम्मी एक-दूसरे को बड़े ज़ोरों से चूम रहे थे।
अंकल के हाथ पीछे मम्मी के चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही मसल रहे थे।
कुछ देर मम्मी के होठों का रसपान करने के बाद दोनों रुक गए।
अंकल: “वर्षा, आई लव यू… तुम बहुत खूबसूरत हो… तुझ जैसी औरत मुझे आज तक नहीं मिली।”
मम्मी: “अब बस। हमारे जाने का समय हो गया।”
और मम्मी सैंडल निकाल रही थीं। तो मम्मी एक स्माइल देते हुए वो पहनती हैं।
अंकल: “अरे इसे पहनकर ही जाओ ना। मुझे अच्छा लगेगा।”
मम्मी: “ठीक है। पर आप हमें आज छोड़ने मत आइए।”
अंकल: “क्यों? क्या हुआ?”
मम्मी: “कुछ नहीं। अगर आप बार-बार आए तो मेरे पति और सास को शक हो सकता है।”
अंकल: “अरे किसी को कोई शक नहीं होगा। मैं हूँ ना।”
मम्मी: “नहीं। ज़्यादा दूर थोड़ी है। हम चले जाएँगे।”
अंकल: “पक्का चली जाओगी?”
मम्मी: “हाँ, पक्का।”
अंकल: “ठीक है, चलो।”
फिर दोनों नीचे आने लगते हैं तो मैं दौड़कर नीचे आ जाता हूँ। आंटी अभी भी उनके रूम में थीं। फिर मैं सोफे पे बैठ जाता हूँ। अंकल-मम्मी साथ में नीचे आते हैं और सोफे पे बैठ जाते हैं। और फिर आंटी भी अपने रूम से बाहर आती हैं।
आंटी: “हो गया तुम्हारा? बड़ी जल्दी आ गए।”
और सब हँसने लगते हैं।
हँसते हुए सब मेरी तरफ़ देख रहे थे।
मैं: “मैं कुछ समझा नहीं।”
मम्मी: “बेटा, आंटी कह रही हैं—हो गई तुम्हारी कंप्यूटर क्लास।”
मैं: “हाँ, हो गई आंटी। क्लास तो हमेशा चलेगी।”
मेरी इस बात पे सब फिर से हँसने लगे। और फिर मैं और मम्मी टैक्सी से घर आ जाते हैं। अभी 10 AM हो चुके थे।
दादी ने देरी से आने का पूछा तो मैंने कह दिया आंटी ने रोक लिया। फिर मम्मी ने कहा उन्हें सोना है तो मैंने दादी और पापा को कहा, “पापा, मम्मी की तबीयत खराब है तो उन्हें सोने देना।” तो फिर मम्मी पूरे दिन सोती रहीं।


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