10 hours ago
Update 10
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जब सुबह छह बजे गया तो देखा दोनों चुदाई कर रहे थे। फिर मैं वापस आ गया। आंटी अभी भी सो रही थीं क्योंकि आंटी नींद की गोली लेती हैं। फिर मैं दोबारा सात बजे गया तो विंडो से देखा कि मम्मी और अंकल एक ही चादर में सोए हुए थे। मम्मी का मुँह अंकल की तरफ़ था और उनकी पीठ विंडो की तरफ़ थी। मम्मी अभी भी नंगी ही थीं। उनकी नंगी पीठ मुझे दिख रही थी और वे अंकल की बाँहों में सोई हुई थीं।
कुछ देर मैं देखता रहता हूँ। अचानक मम्मी का मोबाइल वाइब्रेंट हुआ। शायद उन्होंने अलार्म लगाया होगा। इसलिए शायद थोड़ी पहले ही सोए होंगे, इसलिए अलार्म लगाया होगा क्योंकि एक घंटे पहले तो चुदाई चल रही थी। फिर मम्मी उठ जाती हैं। अंकल वैसे ही सोए हुए थे। मम्मी की हालत बहुत खराब लग रही थी। उनका गजरा नीचे लटक रहा था, बाल बिखर गए थे, होठों की लिपस्टिक बिखर गई थी। चूचियों पे और चूतड़ पर लाल निशान दिख रहे थे।
अंकल ने पूरे मज़े किए थे।
अब मम्मी उठकर बाथरूम में चली जाती हैं और दरवाज़ा बंद कर देती हैं। बाथरूम भी विंडो के सामने ही था। सब कुछ दिख रहा था मुझे। तभी मम्मी ने डोर बंद कर दिया और शावर लेने की आवाज़ आने लगी।
शावर की आवाज़ से अंकल जाग गए और बाथरूम की तरफ़ देखने लगे।
अब अंकल उठकर बाथरूम की तरफ़ चले गए और डोर खटखटाने लगे।
अंकल: “अरे वर्षा मेरी जान, मुझे भी नहाना है। मुझे भी अपने साथ नहलाओ ना।”
मम्मी: “नहीं, अभी आप जाइए। मैं नहाकर आती हूँ।”
अंकल: “अरे कुछ नहीं। बस थोड़ी देर नहाकर चला जाऊँगा। मेरा एक ज़रूरी काम है।”
मम्मी डोर खोलती हैं और अंकल को अंदर आने देती हैं।
फिर मैं भी तुरंत बाथरूम की विंडो पे चला जाता हूँ जो अंकल ने रात को दिखाई थी। वो ऊँचाई पे थी जहाँ पे एक बड़ा स्टूल रखा था। शायद अंकल ने ही रखा होगा मेरे लिए। मैं स्टूल पे चढ़कर अंदर बाथरूम में देखने लगा।
अंकल अंदर आते ही मम्मी को घूरने लगे। मम्मी पूरी भीगी हुई थीं। उनका भरा हुआ जिस्म पानी में और भी सुंदर लग रहा था।
मम्मी ने अपने शरीर पर एक सफेद कपड़ा ढक रखा था जिससे उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और भरी हुई जाँघें आराम से दिख रही थीं।
मम्मी थोड़ा मुस्कुरा रही थीं और अपने बदन को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थीं।
लेकिन अंकल चुप थोड़ी ही बैठने वाले थे। वे किसी-न-किसी बहाने मम्मी की चूचियों को और चूतड़ को मसल रहे थे।
मम्मी: “आप अब थोड़ा चुप बैठिए ना…”
अब अंकल ने भी शावर लेना शुरू किया और अपने शरीर पर साबुन मलने लगे। उन्होंने अपना अंडरवियर निकालकर कोने में रख दिया और पूरे नंगे हो गए। और मम्मी की तरफ़ देखकर मुस्कुराकर कहा—
अंकल: “वर्षा, ज़रा मेरी पीठ पर साबुन लगाओ ज़रा…”
मम्मी को थोड़ी शर्म आ रही थी। वे मुस्कुराकर…
मम्मी अंकल के पीछे गईं और साबुन लेकर अंकल की पीठ पे मलने लगीं। मम्मी के हाथों का स्पर्श पाकर अंकल का लंड खड़ा होने लगा।
अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़के अपने लंड पे रखा और कहा कि मेरे हथियार पे भी अच्छे से साबुन मल दो।
मम्मी ने पहले अपना हाथ झटक दिया।
मम्मी: “धत्त… आप तो यहाँ भी शुरू हो गए…”
अंकल: “अरे इसका भी ख्याल रखना ज़रूरी है। तुम इसका ख्याल नहीं रखोगी तो कौन रखेगा।”
फिर दोबारा से अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़के अपने लंड पे रख दिया और फिर मम्मी भी साबुन लगाकर अंकल का लंड मलने लगीं।
मम्मी के साबुन मले मुलायम हाथों के स्पर्श से अंकल का लंड पूरे नब्बे डिग्री एंगल से तन के खड़ा था।
मम्मी धीरे-धीरे अपने हाथ से लंड को सहला रही थीं। अंकल मज़े लेकर आहें भर रहे थे। फिर अंकल ने मम्मी के बदन से वो कपड़ा निकाल दिया। अब मम्मी भी अंकल की तरह पूरी नंगी हो गई थीं।
मम्मी: “हाय, ये आप क्या कर रहे हो? मैंने आपको पहले ही कहा था ना, अभी कुछ मत करो। हमें नहाकर तैयार होना है।”
अंकल: “वो भी हो लेंगे। पहले इस पल के तो मज़े लेने दो।”
फिर अंकल ने साबुन लिया और मम्मी के मम्मों पे मसलने लगे। चूचियों को उँगलियों से दबाने लगे। मम्मी की सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मम्मी ने अंकल को थाम लिया और वे भी अंकल के बदन पे साबुन मलने लगीं। दोनों के बदन साबुन के झाग से सने हुए थे। फिर दोनों एक-दूसरे के होठ चूसने लगे।
अंकल मम्मी की चूचियाँ मसल रहे थे और शावर में ही मम्मी के होठों को चूस रहे थे।
अंकल का लंड मम्मी की चुत के द्वार पे दस्तक दे रहा था और मम्मी के सख्त बूब्स अंकल के सीने पर गोते खा रहे थे। अंकल ने मम्मी की एक टाँग हवा में उठाई और अपने लंड को चुत के द्वार पे सेट किया और एक शॉट लगाकर चुत द्वार को चीरकर अंदर घुसा दिया।
साबुन की चिकनाहट की वजह से आधा लंड बड़ी आसानी से चुत में घुस गया और मम्मी छटपटा गईं। मम्मी चीखने ही वाली थीं पर अंकल ने उनका मुँह अपने मुँह में जकड़ रखा था इसलिए मम्मी की चीख उनके गले में ही अटक गई।
खड़े-खड़े ही अंकल लंड को चुत से अंदर-बाहर घिसने लगे। साथ ही मम्मी के एक-एक अंग मसलते जा रहे थे। मम्मी ने भी उनको अच्छे से जकड़ रखा था और चुदाई का मज़ा ले रही थीं हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकालकर।
दोनों बाथरूम में शावर के नीचे पूरे नंगे साबुन के झाग से लिपटे खड़े हुए एक-दूसरे से चुदाई करने में मस्त थे। अब फिर से मेरा लंड टाइट होने लगा था। पर मैं अभी जहाँ खड़ा था वहाँ अपना लंड निकालकर हिला नहीं सकता था।
फिर अंकल ने मम्मी को बाथरूम की दीवार को पकड़ने को कहा तो मम्मी ने वैसा ही किया। अंकल मम्मी के पीछे से खड़े होकर उनके चूतड़ से अंदर चुत में लंड डालकर चोदने लगे।
मम्मी ने दीवार को मज़बूती से पकड़ रखा था और पीछे से अंकल मर्दानगी भरे धक्कों के मज़े ले रही थीं।
अंकल ने मम्मी के दोनों बूब्स को अपने सख्त हाथों में जकड़ लिया था और बड़ी ताक़त से पीछे से चोदे जा रहे थे। फाच… फाच… की आवाज़ दोनों की जाँघों के टकराने से हो रही थी।
फिर काफ़ी देर तक इस तरह चोदने के बाद अंकल ने मम्मी की चुत से लंड निकाला और मम्मी से कहा कि मैं अपना वीर्य अभी तुम्हारी कोख में नहीं भरना चाहता।
मम्मी अपने कुल्हे चौड़े करके नीचे बैठ गईं और अंकल का लंड अपने मुँह में ले लिया और अपने होठों से चूसने लगीं। अंकल भी मम्मी का सर पकड़के हिला रहे थे, और उनकी आँखें मज़े में बंद थीं।
अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह… वर्षा… मज़ा आ गया… ऐसी मज़े की सुबह कभी नहीं हुई है… इसलिए मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ… आआह्ह… निकल गया मेरा… उग्ग्ग्ह्ह्ह…”
अंकल ने मम्मी का सर मज़बूती से पकड़ रखा था और झटके मारके अपना सारा लावा मम्मी के मुँह में भर दिया था। मम्मी भी सुरूप-सुरूप करके उनका वीर्य गटकने लगीं। थोड़ा सा उनके मुँह से बाहर भी निकल गया था।
अंकल ने मम्मी को खड़ा किया और अपना मुँह खोलकर मम्मी का मुँह में जकड़ लिया। मम्मी ने भी अपने होठ खोल दिए। ऐसा लग रहा था, अंकल अपने वीर्य को मम्मी के मुँह से चूस रहे थे। दोनों कुछ देर तक ऐसे ही स्मूच करते खड़े रहे।
अंकल: “वाह… मज़ा आ गया।”
मम्मी: “आपका वीर्य मेरे लिए जूस जैसा है, इसलिए पी गई।”
अंकल: “मुझे भी अच्छा लगा, तुम्हारे मुँह से अपना वीर्य चाट कर।”
मम्मी: “चलिए अब बदन धो लें। बहुत देर हो गई।”
अंकल: “आओ साथ में करते हैं।”
फिर अंकल ने पूरी बाल्टी पानी भरा और मम्मी को अपने बदन से सटा लिया। दोनों एक-दूसरे से नंगे ऐसे चिपके खड़े थे जैसे एक-दूसरे से जुड़े हुए हों।
अंकल ने मम्मी के होठ भी अपने मुँह में भर लिए और फिर बाल्टी उठाकर ऊपर से पूरी की पूरी पलट दी। दोनों के ऊपर से पानी बहने लगा और दोनों के शरीर का झाग साफ हो गया।
फिर दोनों अलग हुए और मम्मी ने तौलिया लिया और अंकल का शरीर पोंछने लगीं। अंकल ने भी मम्मी का शरीर पोंछा।
अब दोनों बाहर आ गए और मैं भी स्टूल से उतरकर रूम की विंडो पे आ गया। जब तक अंकल ने सिर्फ़ अंडरवियर पहनी और बिस्तर पर लेट गए और मम्मी को देखने लगे।
मम्मी अंदर कपड़े पहन रही थीं। मैंने कई बार मम्मी को कपड़े बदलते देखा था। लेकिन आज कुछ अलग ही लग रहा था।
मम्मी अंकल के सामने ही पैंटी, ब्रा और ब्लाउज़ पहन रही थीं और अंकल मम्मी के बदन की तारीफ़ कर रहे थे।
मम्मी ने साड़ी पहनी। अब अंकल के पास जाकर उन्हें एक किस कर दिया।
मम्मी: “चलिए, मैं दीदी के पास जाती हूँ। आप बाहर आइए नाश्ते के लिए।”
और मम्मी बाहर आने लगीं।
मम्मी को बाहर आता देख मैं विंडो से हटकर नीचे आंटी के रूम में आ गया। अब 9:30 AM हो चुका था। आंटी अभी भी सो रही थीं। शायद नींद की टैबलेट और कल फंक्शन की थकान की वजह से। फिर मैंने आंटी को उठाया। आंटी ने पूछा, “बेटा, क्या टाइम हुआ?” मैं बोला, “9:30 AM हो गया।” आंटी: “बेटा, मेरी तो नींद ही नहीं खुली। तू कब उठा?” मैं बोला, “आंटी, जस्ट अभी।”
आंटी: “बेटा, तेरी मम्मी और योगेश…?”
मैं: “पता नहीं।”
आंटी हँसते हुए: “मैं देखती हूँ।” और फिर आंटी और मैं हॉल में आए। आंटी बोलीं, “तू बैठ। मैं देखकर आती हूँ।” आंटी ऊपर जाने ही वाली थीं कि मुझे और आंटी को मम्मी सीढ़ियों से उतरती नज़र आईं।
अंकल के साथ की दमदार चुदाई के बाद मम्मी ज़रा अटक-अटक कर चल रही थीं। मम्मी मेरे और आंटी के पास आईं तो आंटी ने धीमी आवाज़ में मम्मी से कहा—
आंटी: “हाय, भाभी जी, लगता है कल रात योगेश भैया ने बड़े मज़े लिए हैं। देखिए ना, बहुत सारे निशान छोड़े हैं आपके बदन पे।” (मम्मी के गले के पास अंकल के काटने के निशान को देखकर कहा)
मम्मी (शर्माते हुए): “अब क्या छिपाऊँ आपसे। योगेश जी का प्यार है ये सब।” मम्मी ने धीमी आवाज़ में बोला लेकिन मैं सुन रहा था। आंटी और मम्मी को लगा होगा मैं सुन रहा हूँ पर उन दोनों को कोई फ़र्क नहीं पड़ा हालाँकि उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में बोला था।
आंटी: “ऊपरवाला आप दोनों का प्यार ऐसे ही बनाए रखे।”
और दोनों हँसने लगीं…
मैं: “क्या हुआ मम्मी? आप दोनों क्यों हँस रही हो?”
आंटी: “बेटा, कह रही हूँ योगेश हमेशा तेरी मम्मी को कंप्यूटर सिखाते रहें।”
मम्मी: “हाँ बेटा, इसीलिए हँसी आ गई। अब तू ही बता क्या कंप्यूटर सारी ज़िंदगी सीखा जाता है क्या?”
मैं: “हाँ मम्मी, कंप्यूटर सारी ज़िंदगी सीखा जाए तो वो भी कम है।”
फिर से दोनों हँसने लगीं।
मम्मी: “ऐसे तो मैं मर जाऊँगी…” और फिर से हँसने लगीं…
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जब सुबह छह बजे गया तो देखा दोनों चुदाई कर रहे थे। फिर मैं वापस आ गया। आंटी अभी भी सो रही थीं क्योंकि आंटी नींद की गोली लेती हैं। फिर मैं दोबारा सात बजे गया तो विंडो से देखा कि मम्मी और अंकल एक ही चादर में सोए हुए थे। मम्मी का मुँह अंकल की तरफ़ था और उनकी पीठ विंडो की तरफ़ थी। मम्मी अभी भी नंगी ही थीं। उनकी नंगी पीठ मुझे दिख रही थी और वे अंकल की बाँहों में सोई हुई थीं।
कुछ देर मैं देखता रहता हूँ। अचानक मम्मी का मोबाइल वाइब्रेंट हुआ। शायद उन्होंने अलार्म लगाया होगा। इसलिए शायद थोड़ी पहले ही सोए होंगे, इसलिए अलार्म लगाया होगा क्योंकि एक घंटे पहले तो चुदाई चल रही थी। फिर मम्मी उठ जाती हैं। अंकल वैसे ही सोए हुए थे। मम्मी की हालत बहुत खराब लग रही थी। उनका गजरा नीचे लटक रहा था, बाल बिखर गए थे, होठों की लिपस्टिक बिखर गई थी। चूचियों पे और चूतड़ पर लाल निशान दिख रहे थे।
अंकल ने पूरे मज़े किए थे।
अब मम्मी उठकर बाथरूम में चली जाती हैं और दरवाज़ा बंद कर देती हैं। बाथरूम भी विंडो के सामने ही था। सब कुछ दिख रहा था मुझे। तभी मम्मी ने डोर बंद कर दिया और शावर लेने की आवाज़ आने लगी।
शावर की आवाज़ से अंकल जाग गए और बाथरूम की तरफ़ देखने लगे।
अब अंकल उठकर बाथरूम की तरफ़ चले गए और डोर खटखटाने लगे।
अंकल: “अरे वर्षा मेरी जान, मुझे भी नहाना है। मुझे भी अपने साथ नहलाओ ना।”
मम्मी: “नहीं, अभी आप जाइए। मैं नहाकर आती हूँ।”
अंकल: “अरे कुछ नहीं। बस थोड़ी देर नहाकर चला जाऊँगा। मेरा एक ज़रूरी काम है।”
मम्मी डोर खोलती हैं और अंकल को अंदर आने देती हैं।
फिर मैं भी तुरंत बाथरूम की विंडो पे चला जाता हूँ जो अंकल ने रात को दिखाई थी। वो ऊँचाई पे थी जहाँ पे एक बड़ा स्टूल रखा था। शायद अंकल ने ही रखा होगा मेरे लिए। मैं स्टूल पे चढ़कर अंदर बाथरूम में देखने लगा।
अंकल अंदर आते ही मम्मी को घूरने लगे। मम्मी पूरी भीगी हुई थीं। उनका भरा हुआ जिस्म पानी में और भी सुंदर लग रहा था।
मम्मी ने अपने शरीर पर एक सफेद कपड़ा ढक रखा था जिससे उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और भरी हुई जाँघें आराम से दिख रही थीं।
मम्मी थोड़ा मुस्कुरा रही थीं और अपने बदन को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थीं।
लेकिन अंकल चुप थोड़ी ही बैठने वाले थे। वे किसी-न-किसी बहाने मम्मी की चूचियों को और चूतड़ को मसल रहे थे।
मम्मी: “आप अब थोड़ा चुप बैठिए ना…”
अब अंकल ने भी शावर लेना शुरू किया और अपने शरीर पर साबुन मलने लगे। उन्होंने अपना अंडरवियर निकालकर कोने में रख दिया और पूरे नंगे हो गए। और मम्मी की तरफ़ देखकर मुस्कुराकर कहा—
अंकल: “वर्षा, ज़रा मेरी पीठ पर साबुन लगाओ ज़रा…”
मम्मी को थोड़ी शर्म आ रही थी। वे मुस्कुराकर…
मम्मी अंकल के पीछे गईं और साबुन लेकर अंकल की पीठ पे मलने लगीं। मम्मी के हाथों का स्पर्श पाकर अंकल का लंड खड़ा होने लगा।
अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़के अपने लंड पे रखा और कहा कि मेरे हथियार पे भी अच्छे से साबुन मल दो।
मम्मी ने पहले अपना हाथ झटक दिया।
मम्मी: “धत्त… आप तो यहाँ भी शुरू हो गए…”
अंकल: “अरे इसका भी ख्याल रखना ज़रूरी है। तुम इसका ख्याल नहीं रखोगी तो कौन रखेगा।”
फिर दोबारा से अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़के अपने लंड पे रख दिया और फिर मम्मी भी साबुन लगाकर अंकल का लंड मलने लगीं।
मम्मी के साबुन मले मुलायम हाथों के स्पर्श से अंकल का लंड पूरे नब्बे डिग्री एंगल से तन के खड़ा था।
मम्मी धीरे-धीरे अपने हाथ से लंड को सहला रही थीं। अंकल मज़े लेकर आहें भर रहे थे। फिर अंकल ने मम्मी के बदन से वो कपड़ा निकाल दिया। अब मम्मी भी अंकल की तरह पूरी नंगी हो गई थीं।
मम्मी: “हाय, ये आप क्या कर रहे हो? मैंने आपको पहले ही कहा था ना, अभी कुछ मत करो। हमें नहाकर तैयार होना है।”
अंकल: “वो भी हो लेंगे। पहले इस पल के तो मज़े लेने दो।”
फिर अंकल ने साबुन लिया और मम्मी के मम्मों पे मसलने लगे। चूचियों को उँगलियों से दबाने लगे। मम्मी की सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मम्मी ने अंकल को थाम लिया और वे भी अंकल के बदन पे साबुन मलने लगीं। दोनों के बदन साबुन के झाग से सने हुए थे। फिर दोनों एक-दूसरे के होठ चूसने लगे।
अंकल मम्मी की चूचियाँ मसल रहे थे और शावर में ही मम्मी के होठों को चूस रहे थे।
अंकल का लंड मम्मी की चुत के द्वार पे दस्तक दे रहा था और मम्मी के सख्त बूब्स अंकल के सीने पर गोते खा रहे थे। अंकल ने मम्मी की एक टाँग हवा में उठाई और अपने लंड को चुत के द्वार पे सेट किया और एक शॉट लगाकर चुत द्वार को चीरकर अंदर घुसा दिया।
साबुन की चिकनाहट की वजह से आधा लंड बड़ी आसानी से चुत में घुस गया और मम्मी छटपटा गईं। मम्मी चीखने ही वाली थीं पर अंकल ने उनका मुँह अपने मुँह में जकड़ रखा था इसलिए मम्मी की चीख उनके गले में ही अटक गई।
खड़े-खड़े ही अंकल लंड को चुत से अंदर-बाहर घिसने लगे। साथ ही मम्मी के एक-एक अंग मसलते जा रहे थे। मम्मी ने भी उनको अच्छे से जकड़ रखा था और चुदाई का मज़ा ले रही थीं हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकालकर।
दोनों बाथरूम में शावर के नीचे पूरे नंगे साबुन के झाग से लिपटे खड़े हुए एक-दूसरे से चुदाई करने में मस्त थे। अब फिर से मेरा लंड टाइट होने लगा था। पर मैं अभी जहाँ खड़ा था वहाँ अपना लंड निकालकर हिला नहीं सकता था।
फिर अंकल ने मम्मी को बाथरूम की दीवार को पकड़ने को कहा तो मम्मी ने वैसा ही किया। अंकल मम्मी के पीछे से खड़े होकर उनके चूतड़ से अंदर चुत में लंड डालकर चोदने लगे।
मम्मी ने दीवार को मज़बूती से पकड़ रखा था और पीछे से अंकल मर्दानगी भरे धक्कों के मज़े ले रही थीं।
अंकल ने मम्मी के दोनों बूब्स को अपने सख्त हाथों में जकड़ लिया था और बड़ी ताक़त से पीछे से चोदे जा रहे थे। फाच… फाच… की आवाज़ दोनों की जाँघों के टकराने से हो रही थी।
फिर काफ़ी देर तक इस तरह चोदने के बाद अंकल ने मम्मी की चुत से लंड निकाला और मम्मी से कहा कि मैं अपना वीर्य अभी तुम्हारी कोख में नहीं भरना चाहता।
मम्मी अपने कुल्हे चौड़े करके नीचे बैठ गईं और अंकल का लंड अपने मुँह में ले लिया और अपने होठों से चूसने लगीं। अंकल भी मम्मी का सर पकड़के हिला रहे थे, और उनकी आँखें मज़े में बंद थीं।
अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह… वर्षा… मज़ा आ गया… ऐसी मज़े की सुबह कभी नहीं हुई है… इसलिए मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ… आआह्ह… निकल गया मेरा… उग्ग्ग्ह्ह्ह…”
अंकल ने मम्मी का सर मज़बूती से पकड़ रखा था और झटके मारके अपना सारा लावा मम्मी के मुँह में भर दिया था। मम्मी भी सुरूप-सुरूप करके उनका वीर्य गटकने लगीं। थोड़ा सा उनके मुँह से बाहर भी निकल गया था।
अंकल ने मम्मी को खड़ा किया और अपना मुँह खोलकर मम्मी का मुँह में जकड़ लिया। मम्मी ने भी अपने होठ खोल दिए। ऐसा लग रहा था, अंकल अपने वीर्य को मम्मी के मुँह से चूस रहे थे। दोनों कुछ देर तक ऐसे ही स्मूच करते खड़े रहे।
अंकल: “वाह… मज़ा आ गया।”
मम्मी: “आपका वीर्य मेरे लिए जूस जैसा है, इसलिए पी गई।”
अंकल: “मुझे भी अच्छा लगा, तुम्हारे मुँह से अपना वीर्य चाट कर।”
मम्मी: “चलिए अब बदन धो लें। बहुत देर हो गई।”
अंकल: “आओ साथ में करते हैं।”
फिर अंकल ने पूरी बाल्टी पानी भरा और मम्मी को अपने बदन से सटा लिया। दोनों एक-दूसरे से नंगे ऐसे चिपके खड़े थे जैसे एक-दूसरे से जुड़े हुए हों।
अंकल ने मम्मी के होठ भी अपने मुँह में भर लिए और फिर बाल्टी उठाकर ऊपर से पूरी की पूरी पलट दी। दोनों के ऊपर से पानी बहने लगा और दोनों के शरीर का झाग साफ हो गया।
फिर दोनों अलग हुए और मम्मी ने तौलिया लिया और अंकल का शरीर पोंछने लगीं। अंकल ने भी मम्मी का शरीर पोंछा।
अब दोनों बाहर आ गए और मैं भी स्टूल से उतरकर रूम की विंडो पे आ गया। जब तक अंकल ने सिर्फ़ अंडरवियर पहनी और बिस्तर पर लेट गए और मम्मी को देखने लगे।
मम्मी अंदर कपड़े पहन रही थीं। मैंने कई बार मम्मी को कपड़े बदलते देखा था। लेकिन आज कुछ अलग ही लग रहा था।
मम्मी अंकल के सामने ही पैंटी, ब्रा और ब्लाउज़ पहन रही थीं और अंकल मम्मी के बदन की तारीफ़ कर रहे थे।
मम्मी ने साड़ी पहनी। अब अंकल के पास जाकर उन्हें एक किस कर दिया।
मम्मी: “चलिए, मैं दीदी के पास जाती हूँ। आप बाहर आइए नाश्ते के लिए।”
और मम्मी बाहर आने लगीं।
मम्मी को बाहर आता देख मैं विंडो से हटकर नीचे आंटी के रूम में आ गया। अब 9:30 AM हो चुका था। आंटी अभी भी सो रही थीं। शायद नींद की टैबलेट और कल फंक्शन की थकान की वजह से। फिर मैंने आंटी को उठाया। आंटी ने पूछा, “बेटा, क्या टाइम हुआ?” मैं बोला, “9:30 AM हो गया।” आंटी: “बेटा, मेरी तो नींद ही नहीं खुली। तू कब उठा?” मैं बोला, “आंटी, जस्ट अभी।”
आंटी: “बेटा, तेरी मम्मी और योगेश…?”
मैं: “पता नहीं।”
आंटी हँसते हुए: “मैं देखती हूँ।” और फिर आंटी और मैं हॉल में आए। आंटी बोलीं, “तू बैठ। मैं देखकर आती हूँ।” आंटी ऊपर जाने ही वाली थीं कि मुझे और आंटी को मम्मी सीढ़ियों से उतरती नज़र आईं।
अंकल के साथ की दमदार चुदाई के बाद मम्मी ज़रा अटक-अटक कर चल रही थीं। मम्मी मेरे और आंटी के पास आईं तो आंटी ने धीमी आवाज़ में मम्मी से कहा—
आंटी: “हाय, भाभी जी, लगता है कल रात योगेश भैया ने बड़े मज़े लिए हैं। देखिए ना, बहुत सारे निशान छोड़े हैं आपके बदन पे।” (मम्मी के गले के पास अंकल के काटने के निशान को देखकर कहा)
मम्मी (शर्माते हुए): “अब क्या छिपाऊँ आपसे। योगेश जी का प्यार है ये सब।” मम्मी ने धीमी आवाज़ में बोला लेकिन मैं सुन रहा था। आंटी और मम्मी को लगा होगा मैं सुन रहा हूँ पर उन दोनों को कोई फ़र्क नहीं पड़ा हालाँकि उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में बोला था।
आंटी: “ऊपरवाला आप दोनों का प्यार ऐसे ही बनाए रखे।”
और दोनों हँसने लगीं…
मैं: “क्या हुआ मम्मी? आप दोनों क्यों हँस रही हो?”
आंटी: “बेटा, कह रही हूँ योगेश हमेशा तेरी मम्मी को कंप्यूटर सिखाते रहें।”
मम्मी: “हाँ बेटा, इसीलिए हँसी आ गई। अब तू ही बता क्या कंप्यूटर सारी ज़िंदगी सीखा जाता है क्या?”
मैं: “हाँ मम्मी, कंप्यूटर सारी ज़िंदगी सीखा जाए तो वो भी कम है।”
फिर से दोनों हँसने लगीं।
मम्मी: “ऐसे तो मैं मर जाऊँगी…” और फिर से हँसने लगीं…


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