7 hours ago
Update 9
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मम्मी ने अपना चेहरा लंड के करीब ले गईं और जहाँ से लंड का टोपा था वहाँ पे किस किया।
मम्मी ने अंकल के 10 इंच बड़े लंड को हाथ में लिया और अपनी ज़ुबान बाहर निकालकर अंकल के लंड के ऊपर के हिस्से को चाट लिया।
अंकल ने मम्मी के बालों के जूड़े से फूलों का गजरा निकाल दिया और अपने एक हाथ पे लपेट लिया और उसे सूँघने लगे। सीन कुछ इस तरह का था कि मम्मी पलंग पे बैठकर अंकल को ब्लोजॉब दे रही थीं और अंकल पलंग के पास खड़े हुए आँखें मूँदे गजरा सूँघ रहे थे।
जितना हो सकता मम्मी अपना मुँह खोलकर अंकल का लंड अपने मुँह में लेतीं, तब भी सिर्फ़ लंड का आधा हिस्सा ही मुँह में जा पाता। लंड अपनी पूर्ण जाग्रत अवस्था में खड़ा था।
अंकल: “अच्छा लग रहा है ना वर्षा, चख के।”
मम्मी: “उम्म्म… यम्म… हम्म… ऐसा लग रहा है जैसे आम ही चूस रही हूँ।”
फिर मम्मी ने अंकल के मोटे गोल अंडों को भी चूसा। तब तो अंकल मज़े के मारे चिल्ला उठे थे—“आआआह्ह्ह्ह… वर्षा मेरी जान… मज़ा आ गया…”
काफ़ी देर तक अच्छी तरह से अंकल का लंड चूसने के बाद मम्मी ने अंकल का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला। और फिर अंकल ने मम्मी को खड़ा किया और दोनों खड़े-खड़े एक-दूसरे को स्मूच करने लगे।
फिर अंकल ने मम्मी को उनकी जाँघों से पकड़के उठा लिया और ड्रेसिंग टेबल पर बैठा दिया।
वे लगातार स्मूच किए ही जा रहे थे। और साथ में अंकल ने मम्मी की टाँगें चौड़ी करके बीच में खुद खड़े हो गए, और लगे हुए लंड को चुत के सुराख के बीच में सेट किया।
अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा, आज एक बार फिर से मैं तुम्हारी चुत में अपना लंड प्रवेश करने जा रहा हूँ। कैसा लग रहा है तुम्हें?”
वर्षा: “आआआआआ…”
मम्मी: “स्स्स्स… मैं बहुत भाग्यशाली हूँ जो मुझे पिछले छह महीनों से आपके जैसा मर्द मिला… आआह्ह… जल्दी करो, मेरी योनि तड़प रही है।”
फिर अंकल ने अपने लंड को ज़रा सा हिलाकर फुल टाइट किया और चुत की लाइन पे लंड को रखकर हल्का सा पुश किया। चिकनाहट की वजह से लंड का आगे का टोपा चुत की बंद लाइन को चीरता हुआ चुत में सरक गया। मम्मी की सेक्सी आह निकली।
फिर अंकल ने अपना लंड वापस से खींचा और दोबारा चुत में पुश किया। इस बार पहले से और ज़्यादा लंड अंदर चला गया था। साथ ही मम्मी ने अंकल को बाँहों से कसके जकड़ लिया और कामुकता भरी आहें भरने लगीं।
अंकल मम्मी के एक-एक अंग को मसलते जा रहे थे और साथ में मम्मी को स्मूच भी किए जा रहे थे।
नीचे से उनका लंड भी मम्मी की चुत में अच्छे से काम कर रहा था। अभी तक उनका आधा लंड ही चुत में जाता और वे वापस खींचके दोबारा डालते और फिर मम्मी की चुत की क्लिटोरिस को मसलते-सहलाते जिसकी वजह से मम्मी की वासना बढ़ने लगती और वे मस्ती में ज़ोर-ज़ोर की सिसकारियाँ निकालतीं। चुत की चिकनाहट बता रही थी कि वे बहुत पानी छोड़ चुकी हैं। फिर एक बार अंकल ने अपना पूरा का पूरा मोटा लंड चुत की गहराइयों में समा दिया।
मम्मी की तो लंबी चीख ही निकल गई—“आआआआह्ह्ह्ह… आय्य्यीईईई… माँ… बाहर निकालो…”
पर अंकल ने मम्मी की नहीं सुनी। उन्होंने ऐसे ही चुत में अपना लंड रहने दिया और मम्मी को सहलाने लगे।
अंकल: “उउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा आ… तुम्हारी चुत की गर्मी पहले से काफ़ी बढ़ गई है। मेरे लंड को सुकून मिल गया… आआह्ह्ह… अब मैं हर रोज़ इस चुत का सुख लूँगा।”
मम्मी: “आय्य्य… स्स्स्स… उउह्ह्ह्ह… आपका लंड भी पहले से काफ़ी मोटा हो गया है। पर कोई बात नहीं, मैं बर्दाश्त कर लूँगी।”
अंकल: “रानी, इसी लंड पे मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊँगा। अब मज़े लो…”
मम्मी: “वो तो आप पिछले छह महीनों से करवा रहे हो।”
फिर अंकल ने हल्के से अपने कुल्हे हिलाने शुरू किए और लंड को चुत के अंदर घिसने लगे। मम्मी दर्द के साथ-साथ सिसकारियाँ भी निकाल रही थीं।
जब अंकल के धक्कों से मम्मी हिलतीं तो साथ में उनकी पाज़ेब की झंकार भी गूँजती जिसका आवाज़ बड़ा सुहाना लगता।
साथ में मम्मी के नग्न शरीर पे गहने और भी खिल उठे थे। चूड़ियों की खन-खनahat और भी सुर बिखेरती। ऐसा लग रहा था जैसे कामदेवता और कामदेवी का संभोग चल रहा हो। जैसे कामसूत्र के दो खिलाड़ी हों।
अब अंकल ने मम्मी के कुल्हों को मज़बूती के साथ पकड़ लिया और फिर मम्मी को कुछ कान में कहा तो मम्मी ने कहा कि नहीं, कहीं गिर-विर गए तो… अंकल ने कहा, कुछ नहीं होगा, तुम बस वैसे करो जैसा मैंने कहा।
फिर मम्मी ने अंकल की कमर के नीचे अपनी टाँगें मज़बूती के साथ लपेट लीं और अपने हाथों का घेरा बनाकर अंकल की बाँहों में कस लिया।
फिर अंकल ने मम्मी को कुल्हों से थामकर उचक लिया। इस दौरान अंकल का मूसल लंड मम्मी की चुत में ही था और फिर खड़े-खड़े वे मम्मी को कुल्हों से थामकर चोदने लगे।
थाप्प्प्प… थाप्प्प्प… थाप्प्प्प… की चुदाई भरी आवाज़ें कमरे को हिला रही थीं। और साथ ही अंकल मम्मी को अपने लंड पे उछलवाते तब बहुत ज़ोर-ज़ोर से गुर्राते—“उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… ओह्ह्ह…” मैं उस बहुत सहम गया था अंकल की ताक़त को देखकर।
अंकल का शरीर पसीने से भीग चुका था पर अंकल बिल्कुल भी नहीं हारे थे। वे मम्मी को अपने मूसल लंड पे बड़ी मज़बूती से उछाल-उछाल कर चोद रहे थे।
मम्मी का सफेद मांसली शरीर गुलाबी पड़ चुका था, और वे हाँफने लगी थीं। उन्होंने अंकल से कहा कि वे अब और इस पोज़ीशन में नहीं चुदवा सकतीं, उन्हें नीचे उतारो।
फिर मम्मी को सीधा सुलाकर वे उनके ऊपर चढ़ गए जैसे नॉर्मल पोज़ीशन में रहकर चोदते हैं वैसे ही चोदने लगे।
मम्मी ने अपनी टाँगें अंकल की जाँघों में घुमा दीं और अपने हाथ उनके की पीठ पर जकड़ लिया। और फिर अंकल ने अपने सख्त लंड से एक बड़ा शॉट लगाकर चुत की गहराई तक उतार दिया और फिर शुरू हो गया चुदाई का तांडव।
धप्प्प… थप्प्प… धप्प्प… थप्प्प… दोनों के शरीर की थाप पूरे कमरे में गूँज रही थी और साथ ही अंकल के कठोर धक्कों के कारण पुराना पलंग भी चर्र-चर्र की आवाज़ें कर रहा था और साथ ही डोल रहा था उनके चुदाई के साथ-साथ।
अंकल ने अपना मुँह मम्मी के मुँह में समा लिया था और मम्मी के गोल-गोल मोटे मम्मे अंकल के बालों भरे मज़बूत सीने में दब गए थे। दोनों एक-दूसरे के साथ जुड़कर ऐसे चुद रहे थे कि बीच से हवा भी न गुज़र सके।
इस दौरान मम्मी की चुत से तकरीबन तीन बार पानी निकल चुका होगा। मम्मी का शरीर हर एक धक्के पर काँप रहा था।
अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा, तुम अब सिर्फ़ मेरी ही रहोगी। तुम्हारी चुत में अब सिर्फ़ मेरा ही लंड जाएगा… आआह्ह्ह… रसीली चुत की मालकिन मेरी वर्षा…”
मम्मी: “हाँ मेरे राजा, सिर्फ़ तुम्हारा ही लंड जाता है मेरी चुत में… और किसी का नहीं…”
अंकल: “और मेरे अलावा किसी और का जाने भी नहीं दूँगा।”
कहते हुए अंकल ने आखिरी के ज़ोरदार झटके लगाए और फिर शांत होकर मम्मी के ऊपर ही ढेर हो गए। और मम्मी को चूमने लगे।
मम्मी: “य्य्यूम्म्म… योगेश जी… मुझे ऐसा लग रहा है, आपके साथ मेरी हर रात सुहागरात जैसी होती है। पिछले छह महीनों में आपने जो सुख दिया मैंने तो सोचा भी नहीं था।”
अंकल: “उम्म्म… मैंने कहा था ना, स्वर्ग की सैर कराऊँगा तुम्हें। मज़ा आया ना? मैं तुम्हारे साथ वो सब कर सकता हूँ जो सुख मुझे मेरी बीवी से नहीं मिलता है। इसलिए उस रात से ही मैं तुम्हारा दीवाना हो गया था जब छह महीने पहले अंकित ने मुझसे कहा था—‘मेरी मम्मी की चुदाई करो’—और मैंने तुम्हारी चुदाई की तब से…”
फिर उसके बाद पास पड़ी मम्मी की ब्रा से खुद का लंड साफ किया और मम्मी की चुत को भी जो पहले की तरह सिकुड़ गई थी और एक चुंबन दिया मम्मी की चुत को। फिर से चाटने लगे।
मम्मी: “अब सोते हैं।”
अंकल: “नहीं, पूरी रात जागना है। क्या मेरा साथ नहीं दोगी?”
मम्मी: “दूँगी राजा। चोदिए पूरी रात मेरी चुत। अभी तो सिर्फ़ एक बजा है।”
और फिर दोनों शुरू हो गए।
मुझे नींद आ रही थी तो आकर सो गया। और सुबह छह बजे नींद खुली तो ऊपर जाकर देखा तो अंकल मम्मी को चोद रहे थे घोड़ी बनाकर। फिर मैं वापस आ गया और एक घंटे बाद दोबारा गया तो देखा विंडो से…
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मम्मी ने अपना चेहरा लंड के करीब ले गईं और जहाँ से लंड का टोपा था वहाँ पे किस किया।
मम्मी ने अंकल के 10 इंच बड़े लंड को हाथ में लिया और अपनी ज़ुबान बाहर निकालकर अंकल के लंड के ऊपर के हिस्से को चाट लिया।
अंकल ने मम्मी के बालों के जूड़े से फूलों का गजरा निकाल दिया और अपने एक हाथ पे लपेट लिया और उसे सूँघने लगे। सीन कुछ इस तरह का था कि मम्मी पलंग पे बैठकर अंकल को ब्लोजॉब दे रही थीं और अंकल पलंग के पास खड़े हुए आँखें मूँदे गजरा सूँघ रहे थे।
जितना हो सकता मम्मी अपना मुँह खोलकर अंकल का लंड अपने मुँह में लेतीं, तब भी सिर्फ़ लंड का आधा हिस्सा ही मुँह में जा पाता। लंड अपनी पूर्ण जाग्रत अवस्था में खड़ा था।
अंकल: “अच्छा लग रहा है ना वर्षा, चख के।”
मम्मी: “उम्म्म… यम्म… हम्म… ऐसा लग रहा है जैसे आम ही चूस रही हूँ।”
फिर मम्मी ने अंकल के मोटे गोल अंडों को भी चूसा। तब तो अंकल मज़े के मारे चिल्ला उठे थे—“आआआह्ह्ह्ह… वर्षा मेरी जान… मज़ा आ गया…”
काफ़ी देर तक अच्छी तरह से अंकल का लंड चूसने के बाद मम्मी ने अंकल का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला। और फिर अंकल ने मम्मी को खड़ा किया और दोनों खड़े-खड़े एक-दूसरे को स्मूच करने लगे।
फिर अंकल ने मम्मी को उनकी जाँघों से पकड़के उठा लिया और ड्रेसिंग टेबल पर बैठा दिया।
वे लगातार स्मूच किए ही जा रहे थे। और साथ में अंकल ने मम्मी की टाँगें चौड़ी करके बीच में खुद खड़े हो गए, और लगे हुए लंड को चुत के सुराख के बीच में सेट किया।
अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा, आज एक बार फिर से मैं तुम्हारी चुत में अपना लंड प्रवेश करने जा रहा हूँ। कैसा लग रहा है तुम्हें?”
वर्षा: “आआआआआ…”
मम्मी: “स्स्स्स… मैं बहुत भाग्यशाली हूँ जो मुझे पिछले छह महीनों से आपके जैसा मर्द मिला… आआह्ह… जल्दी करो, मेरी योनि तड़प रही है।”
फिर अंकल ने अपने लंड को ज़रा सा हिलाकर फुल टाइट किया और चुत की लाइन पे लंड को रखकर हल्का सा पुश किया। चिकनाहट की वजह से लंड का आगे का टोपा चुत की बंद लाइन को चीरता हुआ चुत में सरक गया। मम्मी की सेक्सी आह निकली।
फिर अंकल ने अपना लंड वापस से खींचा और दोबारा चुत में पुश किया। इस बार पहले से और ज़्यादा लंड अंदर चला गया था। साथ ही मम्मी ने अंकल को बाँहों से कसके जकड़ लिया और कामुकता भरी आहें भरने लगीं।
अंकल मम्मी के एक-एक अंग को मसलते जा रहे थे और साथ में मम्मी को स्मूच भी किए जा रहे थे।
नीचे से उनका लंड भी मम्मी की चुत में अच्छे से काम कर रहा था। अभी तक उनका आधा लंड ही चुत में जाता और वे वापस खींचके दोबारा डालते और फिर मम्मी की चुत की क्लिटोरिस को मसलते-सहलाते जिसकी वजह से मम्मी की वासना बढ़ने लगती और वे मस्ती में ज़ोर-ज़ोर की सिसकारियाँ निकालतीं। चुत की चिकनाहट बता रही थी कि वे बहुत पानी छोड़ चुकी हैं। फिर एक बार अंकल ने अपना पूरा का पूरा मोटा लंड चुत की गहराइयों में समा दिया।
मम्मी की तो लंबी चीख ही निकल गई—“आआआआह्ह्ह्ह… आय्य्यीईईई… माँ… बाहर निकालो…”
पर अंकल ने मम्मी की नहीं सुनी। उन्होंने ऐसे ही चुत में अपना लंड रहने दिया और मम्मी को सहलाने लगे।
अंकल: “उउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा आ… तुम्हारी चुत की गर्मी पहले से काफ़ी बढ़ गई है। मेरे लंड को सुकून मिल गया… आआह्ह्ह… अब मैं हर रोज़ इस चुत का सुख लूँगा।”
मम्मी: “आय्य्य… स्स्स्स… उउह्ह्ह्ह… आपका लंड भी पहले से काफ़ी मोटा हो गया है। पर कोई बात नहीं, मैं बर्दाश्त कर लूँगी।”
अंकल: “रानी, इसी लंड पे मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊँगा। अब मज़े लो…”
मम्मी: “वो तो आप पिछले छह महीनों से करवा रहे हो।”
फिर अंकल ने हल्के से अपने कुल्हे हिलाने शुरू किए और लंड को चुत के अंदर घिसने लगे। मम्मी दर्द के साथ-साथ सिसकारियाँ भी निकाल रही थीं।
जब अंकल के धक्कों से मम्मी हिलतीं तो साथ में उनकी पाज़ेब की झंकार भी गूँजती जिसका आवाज़ बड़ा सुहाना लगता।
साथ में मम्मी के नग्न शरीर पे गहने और भी खिल उठे थे। चूड़ियों की खन-खनahat और भी सुर बिखेरती। ऐसा लग रहा था जैसे कामदेवता और कामदेवी का संभोग चल रहा हो। जैसे कामसूत्र के दो खिलाड़ी हों।
अब अंकल ने मम्मी के कुल्हों को मज़बूती के साथ पकड़ लिया और फिर मम्मी को कुछ कान में कहा तो मम्मी ने कहा कि नहीं, कहीं गिर-विर गए तो… अंकल ने कहा, कुछ नहीं होगा, तुम बस वैसे करो जैसा मैंने कहा।
फिर मम्मी ने अंकल की कमर के नीचे अपनी टाँगें मज़बूती के साथ लपेट लीं और अपने हाथों का घेरा बनाकर अंकल की बाँहों में कस लिया।
फिर अंकल ने मम्मी को कुल्हों से थामकर उचक लिया। इस दौरान अंकल का मूसल लंड मम्मी की चुत में ही था और फिर खड़े-खड़े वे मम्मी को कुल्हों से थामकर चोदने लगे।
थाप्प्प्प… थाप्प्प्प… थाप्प्प्प… की चुदाई भरी आवाज़ें कमरे को हिला रही थीं। और साथ ही अंकल मम्मी को अपने लंड पे उछलवाते तब बहुत ज़ोर-ज़ोर से गुर्राते—“उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… ओह्ह्ह…” मैं उस बहुत सहम गया था अंकल की ताक़त को देखकर।
अंकल का शरीर पसीने से भीग चुका था पर अंकल बिल्कुल भी नहीं हारे थे। वे मम्मी को अपने मूसल लंड पे बड़ी मज़बूती से उछाल-उछाल कर चोद रहे थे।
मम्मी का सफेद मांसली शरीर गुलाबी पड़ चुका था, और वे हाँफने लगी थीं। उन्होंने अंकल से कहा कि वे अब और इस पोज़ीशन में नहीं चुदवा सकतीं, उन्हें नीचे उतारो।
फिर मम्मी को सीधा सुलाकर वे उनके ऊपर चढ़ गए जैसे नॉर्मल पोज़ीशन में रहकर चोदते हैं वैसे ही चोदने लगे।
मम्मी ने अपनी टाँगें अंकल की जाँघों में घुमा दीं और अपने हाथ उनके की पीठ पर जकड़ लिया। और फिर अंकल ने अपने सख्त लंड से एक बड़ा शॉट लगाकर चुत की गहराई तक उतार दिया और फिर शुरू हो गया चुदाई का तांडव।
धप्प्प… थप्प्प… धप्प्प… थप्प्प… दोनों के शरीर की थाप पूरे कमरे में गूँज रही थी और साथ ही अंकल के कठोर धक्कों के कारण पुराना पलंग भी चर्र-चर्र की आवाज़ें कर रहा था और साथ ही डोल रहा था उनके चुदाई के साथ-साथ।
अंकल ने अपना मुँह मम्मी के मुँह में समा लिया था और मम्मी के गोल-गोल मोटे मम्मे अंकल के बालों भरे मज़बूत सीने में दब गए थे। दोनों एक-दूसरे के साथ जुड़कर ऐसे चुद रहे थे कि बीच से हवा भी न गुज़र सके।
इस दौरान मम्मी की चुत से तकरीबन तीन बार पानी निकल चुका होगा। मम्मी का शरीर हर एक धक्के पर काँप रहा था।
अंकल: “उउउग्ग्ग्ह्ह्ह… वर्षा, तुम अब सिर्फ़ मेरी ही रहोगी। तुम्हारी चुत में अब सिर्फ़ मेरा ही लंड जाएगा… आआह्ह्ह… रसीली चुत की मालकिन मेरी वर्षा…”
मम्मी: “हाँ मेरे राजा, सिर्फ़ तुम्हारा ही लंड जाता है मेरी चुत में… और किसी का नहीं…”
अंकल: “और मेरे अलावा किसी और का जाने भी नहीं दूँगा।”
कहते हुए अंकल ने आखिरी के ज़ोरदार झटके लगाए और फिर शांत होकर मम्मी के ऊपर ही ढेर हो गए। और मम्मी को चूमने लगे।
मम्मी: “य्य्यूम्म्म… योगेश जी… मुझे ऐसा लग रहा है, आपके साथ मेरी हर रात सुहागरात जैसी होती है। पिछले छह महीनों में आपने जो सुख दिया मैंने तो सोचा भी नहीं था।”
अंकल: “उम्म्म… मैंने कहा था ना, स्वर्ग की सैर कराऊँगा तुम्हें। मज़ा आया ना? मैं तुम्हारे साथ वो सब कर सकता हूँ जो सुख मुझे मेरी बीवी से नहीं मिलता है। इसलिए उस रात से ही मैं तुम्हारा दीवाना हो गया था जब छह महीने पहले अंकित ने मुझसे कहा था—‘मेरी मम्मी की चुदाई करो’—और मैंने तुम्हारी चुदाई की तब से…”
फिर उसके बाद पास पड़ी मम्मी की ब्रा से खुद का लंड साफ किया और मम्मी की चुत को भी जो पहले की तरह सिकुड़ गई थी और एक चुंबन दिया मम्मी की चुत को। फिर से चाटने लगे।
मम्मी: “अब सोते हैं।”
अंकल: “नहीं, पूरी रात जागना है। क्या मेरा साथ नहीं दोगी?”
मम्मी: “दूँगी राजा। चोदिए पूरी रात मेरी चुत। अभी तो सिर्फ़ एक बजा है।”
और फिर दोनों शुरू हो गए।
मुझे नींद आ रही थी तो आकर सो गया। और सुबह छह बजे नींद खुली तो ऊपर जाकर देखा तो अंकल मम्मी को चोद रहे थे घोड़ी बनाकर। फिर मैं वापस आ गया और एक घंटे बाद दोबारा गया तो देखा विंडो से…


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