21-08-2026, 06:24 PM
Update 8
अंकल अभी भी रूम के बाहर खड़े थे। वे मेरा इंतज़ार कर रहे थे।
मैं: “क्या अंकल, आप अंदर गए क्यों नहीं? मम्मी आपका वेट कर रही होंगी।”
अंकल: “मैंने तुझसे कहा था ना, तेरे आने के बाद रूम में जाऊँगा। और मैंने तेरे लिए खिड़की का बंदोबस्त भी किया है। ये देख।” अंकल ने मुझे विंडो दिखाई और बोले, “एक विंडो ऊपर देख। वो विंडो बाथरूम की थी।”
मैंने कहा, “क्या बाथरूम में भी?”
अंकल बोले, “हाँ।”
फिर अंकल अंदर चले गए और मैं विंडो पर अंदर देखने लगा।
मम्मी अपने बाल बनाते हुए शीशे के सामने बैठी हुई थीं।
और मम्मी ने थोड़ा सा और मेकअप लगाया हुआ था। मैंने देखा कि मम्मी ने लहंगा थोड़ा और नीचे पहना हुआ था। चुत से सिर्फ़ थोड़ा ही ऊपर था। और उनका मंगलसूत्र उनके क्लीवेज पे लटक रहा था।
अंकल मम्मी को पीछे से जाकर पकड़ते हैं और मम्मी की गोरी गर्दन पर अपने होठों से चूमते हैं।
अंकल: “आज तुम गज़ब की हसीन लग रही हो… जल्द ही मैं तुमसे शादी करके दुनिया के सामने तुम्हें अपनी पत्नी बना लूँगा।”
मम्मी: “मैं तो आपको तन-मन-धन से अपना पति मान ही चुकी हूँ। इसलिए आपके साथ अभी यहाँ इस सेज पर हूँ। पर शादी की क्या ज़रूरत है?”
अंकल: “ठीक है।”
फिर अंकल ने मम्मी के होठ चूमना शुरू किया। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार से चूमे जा रहे थे। एक-दूसरे के मुँह से सलाइवा लीक हो रहा था। मम्मी ने अपना मुँह चौड़ा किया तो अंकल ने अपनी ज़ुबान उनके मुँह में डाल दी। उनकी ज़ुबान अपने पूरे मुँह में घुमा के चूसने लगीं, अंकल भी अपनी ज़ुबान को मम्मी के पूरे मुँह में घुमा रहे थे, जो मम्मी के मुलायम गालों से पता चल रहा था।
उनके प्रगाढ़ चुंबन से ऐसी आवाज़ें निकल रही थीं—स्स्सूउउप्प्प… पुच्छ्छ… स्स्स्प्प्प्प…
अंकल मम्मी को स्मूच करते हुए उनकी चोली की पीछे डोरी खोल दी। और जब चोली हल्की हो गई तो अंकल ने अपने पंजे चोली के अंदर घुसा दिए और मम्मी के 36 के बूब्स मसलने लगे।
कुछ देर तक बूब्स मसलने के बाद अंकल ने मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया और मम्मी के पेट को चूमने लगे और अपनी जुबान मम्मी के चिकने मुलायम पेट पर घुमाने लगे।
मम्मी: “आआह्ह… उफ्फ्… आआह्ह…”
करके आवाज़ें निकाल रही थीं।
और अंकल के बालों में हाथ घुमाने लगीं। अंकल अपने मुँह से मम्मी के पेट पर दबाव बना रहे थे। इस वजह से मम्मी को गुदगुदी महसूस हो रही थी।
अब अंकल ने मम्मी की चोली निकालकर बाजू में रख दी। अब मम्मी के बूब्स नंगे थे। एकदम रसीले और फूले हुए।
पहले तो अंकल ने मम्मी के बूब्स पे जीभ फेरने लगे। बहुत देर तक जीभ से चाटते रहे।
फिर अंकल ने मम्मी की लेफ्ट चूची अपने हाथ में पकड़कर दबाई और निप्पल्स मुँह में भरकर चूसने लगे। और राइट चूची को ज़ोर से मसलने लगे। अंकल मम्मी के निप्पल को दाँतों तले दबाकर काटने लगे। मम्मी की उत्तेजना भरी सिसकारियाँ निकल रही थीं—स्स्स्स… आआह्ह्ह… स्स्स्स… आय्य्यी… उम्म्म…
अंकल ने बूब्स को दबा-दबा कर और दाँतों तले कुचलकर उसपे लाल निशान बना दिए थे। इस प्रक्रिया के बाद तो मम्मी के 36 के बूब्स और भी मोटे और भरावदार हो गए थे। जो मम्मी के हुस्न में चार चाँद लगा रहे थे।
अंकल: “आआह्ह्ह्ह… मज़ा आ गया। मेरी वर्षा रानी, तुम्हारे नाम के साथ तुम्हारी चूचियाँ भी वाकई में रसीली हैं। मज़ा आ गया। अब तो हर रोज़ इसको चूसूँगा। पिछले बारह दिनों से नहीं चूसी थी।”
मम्मी: “आपका यही प्यार करने का अंदाज़ मुझे आपके लिए पागल बना देता है… आप जैसा मर्द पूरी दुनिया में कोई नहीं होगा।”
अंकल: “तुम्हारे जैसी जन्नत की हूर को पाकर मैं भी अपने आप को बड़ा मानता हूँ। तुम्हारे ये मम्मे तो छह महीने पहले जो थे उससे और भी ज़्यादा बड़े और हसीन हो गए हैं।”
मम्मी: “ये आपका ही काम है। छह महीनों में आपने कर दिए हैं।”
अंकल: “तेरे बेटे ने करवाए हैं।”
मम्मी: “हाँ, उस नालायक ने करवाए हैं। और आज भी कितना मासूम बनकर बोल रहा था—‘मम्मी, कंप्यूटर सीख लेना’—ये जानते हुए भी मैं आपसे चुदवाऊँगी।”
फिर अंकल ने मम्मी के लहंगे का नाड़ा खींचकर खोल दिया और लहंगे को पलंग के नीचे फेंक दिया। लहंगे के नीचे मम्मी ने कुछ नहीं पहना था, पूरी नंगी थीं।
उनकी गोरी मांसली जाँघों के बीच गोरी चिकनी चुत के द्वार की हल्की लकीर बड़ी आकर्षक लग रही थी। चुत के पास एक भी बाल नहीं थे। लगता है आज ही साफ की होगी।
मम्मी के शरीर पे एक भी वस्त्र नहीं थे। सिर्फ़ गहने पहने हुए थे जो वे उतारने लगीं।
अंकल ने मना किया कि गहने मत निकालो। ये तुम्हारी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। और ये बालों में गजरा भी रहने ही दो। हाथों में चूड़ियाँ, कानों में झुमके, माथे पे टीका, पैरों में पाज़ेब, गले में दोनों बूब्स के दरम्यान लटकता हार—ये सब साज-शृंगार मम्मी के नग्न शरीर को किसी कामदेवी जैसा बना रहा था।
अंकल ने मम्मी को पलंग के किनारे पर इस तरह लिटा दिया कि मम्मी की टाँगें पलंग के नीचे झूल रही थीं। अंकल पलंग के नीचे इस तरह बैठ गए कि उनका मुँह मम्मी की चुत के सामने था।
उसके बाद अंकल पहले मम्मी की चुत को सूँघने लगे। फिर चुत के द्वार पे अपने होठ जोड़कर एक हल्का किस किया, और फिर उसपे हल्के से अपनी उँगली घुमाने लगे।
अंकल: “आआह्ह… बिल्कुल फूल जैसी महक है तुम्हारी प्यारी चुत की। मन करता है इस महक में घंटों खोया रहूँ। बहुत बदकिस्मत था तुम्हारा पति जिसे इतने अनमोल फूल की कद्र नहीं थी। ये मेरे लिए एक अनमोल तोहफा है। इसको मैं हमेशा प्यार से इस्तेमाल करूँगा। वर्षा, इसका तुम मेरे लिए हमेशा जतन करके रखना।”
योगेश अंकल ने मम्मी की गुलाब के फूल की तरह गुलाबी चुत को सहलाते हुए कहा। मम्मी अपनी आँखें बंद किए हुए अंकल की बातों में खो गई थीं।
फिर अंकल ने अपनी प्यासी ज़ुबान को चुत के द्वार में ऊपर-ऊपर फेरने लगे। ज़रा सी ज़ुबान टच होने से मम्मी ऐसे काँपीं कि जैसे उनके पूरे शरीर में करंट लग गया हो।
धीरे-धीरे अंकल अपनी ज़ुबान को चुत के द्वार से अंदर गहराइयों में घुमाने लगे थे।
मम्मी ने अंकल का सर पकड़ रखा था और अपनी उँगलियाँ उनके बालों में घुमा रही थीं। और अंकल अपनी ज़ुबान से मम्मी की चुत की खाई में गोते लगा रहे थे।
कुछ देर में मम्मी की चुत गीली होने लगी थी। मैं ये तो नहीं कह सकता था कि वो गीलापन अंकल के थूक का था या मम्मी का नमकीन पानी का या दोनों मिक्स हो सकते हैं।
उनकी चुत जो पहले से क्लीन शेव थी, उसपे वो पानी के कतरे बड़े आकर्षक लग रहे थे जैसे एक खिले हुए फूल पे शबनम के कतरे खिलते हैं।
अंकल ने चुत को अच्छे से चाट-चाट के और भी खूबसूरत चिकनी बना दी थी। फिर वे उठे और ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉअर से मम्मी की लिपस्टिक निकाली और फिर वापस बैठकर चुत के पास कुछ कर रहे थे। बाद में देखा कि उन्होंने लाल लिपस्टिक से चुत के ऊपर दिल वाला निशान बनाया था। यानी जो दिल ड्रॉ किया था उसके सेंटर में चुत थी और दिल के ऊपर क्रॉस निशान बनाके अपना नाम लिखा—“योगेश वर्षा”। फिर चुत को बड़े प्यार से चूमा।
मम्मी ने जब अपनी चुत पे ये सब देखा तो अंकल को कसके गले लगा लिया और अपने होठ उनके होठ से मिलाकर चूमने लगीं।
फिर अंकल ने कहा, “क्या मेरे कपड़े नहीं उतारोगी?”
तो मम्मी ने—
मम्मी: “उतारती हूँ मेरे राजा… मेरे आशिक… मेरे बेटे अंकित के अंकल… उसकी मम्मी वर्षा को कंप्यूटर सिखाने के बहाने चुत फाड़ने वाले योगेश जी…”
अंकल: “आआह… वर्षा, ये हुई ना बात।”
और मम्मी ने अंकल के सारे कपड़े उतार दिए। और लास्ट में अंडरवियर उतारते ही उनका फनफनाता हुआ लंड स्प्रिंग की तरह निकल आया। मम्मी पलंग पे बैठ गईं। अंकल पास में खड़े थे।
मम्मी ने लंड को अपनी हथेली में थामा और सहलाने लगीं। जैसे-जैसे मम्मी के नाज़ुक गोरे हाथ लंड को सहलाते, वो और फूलता चला जाता और बड़ा होता जाता।
मम्मी: “आपने कहा था मेरे से—‘वर्षा, तुम्हारे ये मम्मे तो छह महीने पहले जो थे उससे और भी ज़्यादा बड़े और हसीन हो गए हैं’—तो मैं आपसे कहती हूँ। मैंने छह महीने पहले आपका ये लंड देखा था तो उस हिसाब से अभी भी साइज़ में वैसा ही है। मेरे मम्मे तो आपने बड़े कर दिए लेकिन मैं आपका लंड बड़ा नहीं कर पाती। आज भी आपका लंड वैसा ही घोड़े जैसा है। आपका लंड तो पहले से ही शेर है। मैं तो कुछ नहीं कर पाती।”
अंकल: “तुझे बस इसकी खुशी रखना है। हमेशा अपने मुँह और चुत में लेना है।”
मम्मी: “हाँ, हमेशा इसे अपनी चुत और मुँह में रखूँगी। देखो इसे कैसे मज़बूती के साथ मेरे चेहरे को सलामी दे रहा है।”
अंकल अभी भी रूम के बाहर खड़े थे। वे मेरा इंतज़ार कर रहे थे।
मैं: “क्या अंकल, आप अंदर गए क्यों नहीं? मम्मी आपका वेट कर रही होंगी।”
अंकल: “मैंने तुझसे कहा था ना, तेरे आने के बाद रूम में जाऊँगा। और मैंने तेरे लिए खिड़की का बंदोबस्त भी किया है। ये देख।” अंकल ने मुझे विंडो दिखाई और बोले, “एक विंडो ऊपर देख। वो विंडो बाथरूम की थी।”
मैंने कहा, “क्या बाथरूम में भी?”
अंकल बोले, “हाँ।”
फिर अंकल अंदर चले गए और मैं विंडो पर अंदर देखने लगा।
मम्मी अपने बाल बनाते हुए शीशे के सामने बैठी हुई थीं।
और मम्मी ने थोड़ा सा और मेकअप लगाया हुआ था। मैंने देखा कि मम्मी ने लहंगा थोड़ा और नीचे पहना हुआ था। चुत से सिर्फ़ थोड़ा ही ऊपर था। और उनका मंगलसूत्र उनके क्लीवेज पे लटक रहा था।
अंकल मम्मी को पीछे से जाकर पकड़ते हैं और मम्मी की गोरी गर्दन पर अपने होठों से चूमते हैं।
अंकल: “आज तुम गज़ब की हसीन लग रही हो… जल्द ही मैं तुमसे शादी करके दुनिया के सामने तुम्हें अपनी पत्नी बना लूँगा।”
मम्मी: “मैं तो आपको तन-मन-धन से अपना पति मान ही चुकी हूँ। इसलिए आपके साथ अभी यहाँ इस सेज पर हूँ। पर शादी की क्या ज़रूरत है?”
अंकल: “ठीक है।”
फिर अंकल ने मम्मी के होठ चूमना शुरू किया। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार से चूमे जा रहे थे। एक-दूसरे के मुँह से सलाइवा लीक हो रहा था। मम्मी ने अपना मुँह चौड़ा किया तो अंकल ने अपनी ज़ुबान उनके मुँह में डाल दी। उनकी ज़ुबान अपने पूरे मुँह में घुमा के चूसने लगीं, अंकल भी अपनी ज़ुबान को मम्मी के पूरे मुँह में घुमा रहे थे, जो मम्मी के मुलायम गालों से पता चल रहा था।
उनके प्रगाढ़ चुंबन से ऐसी आवाज़ें निकल रही थीं—स्स्सूउउप्प्प… पुच्छ्छ… स्स्स्प्प्प्प…
अंकल मम्मी को स्मूच करते हुए उनकी चोली की पीछे डोरी खोल दी। और जब चोली हल्की हो गई तो अंकल ने अपने पंजे चोली के अंदर घुसा दिए और मम्मी के 36 के बूब्स मसलने लगे।
कुछ देर तक बूब्स मसलने के बाद अंकल ने मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया और मम्मी के पेट को चूमने लगे और अपनी जुबान मम्मी के चिकने मुलायम पेट पर घुमाने लगे।
मम्मी: “आआह्ह… उफ्फ्… आआह्ह…”
करके आवाज़ें निकाल रही थीं।
और अंकल के बालों में हाथ घुमाने लगीं। अंकल अपने मुँह से मम्मी के पेट पर दबाव बना रहे थे। इस वजह से मम्मी को गुदगुदी महसूस हो रही थी।
अब अंकल ने मम्मी की चोली निकालकर बाजू में रख दी। अब मम्मी के बूब्स नंगे थे। एकदम रसीले और फूले हुए।
पहले तो अंकल ने मम्मी के बूब्स पे जीभ फेरने लगे। बहुत देर तक जीभ से चाटते रहे।
फिर अंकल ने मम्मी की लेफ्ट चूची अपने हाथ में पकड़कर दबाई और निप्पल्स मुँह में भरकर चूसने लगे। और राइट चूची को ज़ोर से मसलने लगे। अंकल मम्मी के निप्पल को दाँतों तले दबाकर काटने लगे। मम्मी की उत्तेजना भरी सिसकारियाँ निकल रही थीं—स्स्स्स… आआह्ह्ह… स्स्स्स… आय्य्यी… उम्म्म…
अंकल ने बूब्स को दबा-दबा कर और दाँतों तले कुचलकर उसपे लाल निशान बना दिए थे। इस प्रक्रिया के बाद तो मम्मी के 36 के बूब्स और भी मोटे और भरावदार हो गए थे। जो मम्मी के हुस्न में चार चाँद लगा रहे थे।
अंकल: “आआह्ह्ह्ह… मज़ा आ गया। मेरी वर्षा रानी, तुम्हारे नाम के साथ तुम्हारी चूचियाँ भी वाकई में रसीली हैं। मज़ा आ गया। अब तो हर रोज़ इसको चूसूँगा। पिछले बारह दिनों से नहीं चूसी थी।”
मम्मी: “आपका यही प्यार करने का अंदाज़ मुझे आपके लिए पागल बना देता है… आप जैसा मर्द पूरी दुनिया में कोई नहीं होगा।”
अंकल: “तुम्हारे जैसी जन्नत की हूर को पाकर मैं भी अपने आप को बड़ा मानता हूँ। तुम्हारे ये मम्मे तो छह महीने पहले जो थे उससे और भी ज़्यादा बड़े और हसीन हो गए हैं।”
मम्मी: “ये आपका ही काम है। छह महीनों में आपने कर दिए हैं।”
अंकल: “तेरे बेटे ने करवाए हैं।”
मम्मी: “हाँ, उस नालायक ने करवाए हैं। और आज भी कितना मासूम बनकर बोल रहा था—‘मम्मी, कंप्यूटर सीख लेना’—ये जानते हुए भी मैं आपसे चुदवाऊँगी।”
फिर अंकल ने मम्मी के लहंगे का नाड़ा खींचकर खोल दिया और लहंगे को पलंग के नीचे फेंक दिया। लहंगे के नीचे मम्मी ने कुछ नहीं पहना था, पूरी नंगी थीं।
उनकी गोरी मांसली जाँघों के बीच गोरी चिकनी चुत के द्वार की हल्की लकीर बड़ी आकर्षक लग रही थी। चुत के पास एक भी बाल नहीं थे। लगता है आज ही साफ की होगी।
मम्मी के शरीर पे एक भी वस्त्र नहीं थे। सिर्फ़ गहने पहने हुए थे जो वे उतारने लगीं।
अंकल ने मना किया कि गहने मत निकालो। ये तुम्हारी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। और ये बालों में गजरा भी रहने ही दो। हाथों में चूड़ियाँ, कानों में झुमके, माथे पे टीका, पैरों में पाज़ेब, गले में दोनों बूब्स के दरम्यान लटकता हार—ये सब साज-शृंगार मम्मी के नग्न शरीर को किसी कामदेवी जैसा बना रहा था।
अंकल ने मम्मी को पलंग के किनारे पर इस तरह लिटा दिया कि मम्मी की टाँगें पलंग के नीचे झूल रही थीं। अंकल पलंग के नीचे इस तरह बैठ गए कि उनका मुँह मम्मी की चुत के सामने था।
उसके बाद अंकल पहले मम्मी की चुत को सूँघने लगे। फिर चुत के द्वार पे अपने होठ जोड़कर एक हल्का किस किया, और फिर उसपे हल्के से अपनी उँगली घुमाने लगे।
अंकल: “आआह्ह… बिल्कुल फूल जैसी महक है तुम्हारी प्यारी चुत की। मन करता है इस महक में घंटों खोया रहूँ। बहुत बदकिस्मत था तुम्हारा पति जिसे इतने अनमोल फूल की कद्र नहीं थी। ये मेरे लिए एक अनमोल तोहफा है। इसको मैं हमेशा प्यार से इस्तेमाल करूँगा। वर्षा, इसका तुम मेरे लिए हमेशा जतन करके रखना।”
योगेश अंकल ने मम्मी की गुलाब के फूल की तरह गुलाबी चुत को सहलाते हुए कहा। मम्मी अपनी आँखें बंद किए हुए अंकल की बातों में खो गई थीं।
फिर अंकल ने अपनी प्यासी ज़ुबान को चुत के द्वार में ऊपर-ऊपर फेरने लगे। ज़रा सी ज़ुबान टच होने से मम्मी ऐसे काँपीं कि जैसे उनके पूरे शरीर में करंट लग गया हो।
धीरे-धीरे अंकल अपनी ज़ुबान को चुत के द्वार से अंदर गहराइयों में घुमाने लगे थे।
मम्मी ने अंकल का सर पकड़ रखा था और अपनी उँगलियाँ उनके बालों में घुमा रही थीं। और अंकल अपनी ज़ुबान से मम्मी की चुत की खाई में गोते लगा रहे थे।
कुछ देर में मम्मी की चुत गीली होने लगी थी। मैं ये तो नहीं कह सकता था कि वो गीलापन अंकल के थूक का था या मम्मी का नमकीन पानी का या दोनों मिक्स हो सकते हैं।
उनकी चुत जो पहले से क्लीन शेव थी, उसपे वो पानी के कतरे बड़े आकर्षक लग रहे थे जैसे एक खिले हुए फूल पे शबनम के कतरे खिलते हैं।
अंकल ने चुत को अच्छे से चाट-चाट के और भी खूबसूरत चिकनी बना दी थी। फिर वे उठे और ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉअर से मम्मी की लिपस्टिक निकाली और फिर वापस बैठकर चुत के पास कुछ कर रहे थे। बाद में देखा कि उन्होंने लाल लिपस्टिक से चुत के ऊपर दिल वाला निशान बनाया था। यानी जो दिल ड्रॉ किया था उसके सेंटर में चुत थी और दिल के ऊपर क्रॉस निशान बनाके अपना नाम लिखा—“योगेश वर्षा”। फिर चुत को बड़े प्यार से चूमा।
मम्मी ने जब अपनी चुत पे ये सब देखा तो अंकल को कसके गले लगा लिया और अपने होठ उनके होठ से मिलाकर चूमने लगीं।
फिर अंकल ने कहा, “क्या मेरे कपड़े नहीं उतारोगी?”
तो मम्मी ने—
मम्मी: “उतारती हूँ मेरे राजा… मेरे आशिक… मेरे बेटे अंकित के अंकल… उसकी मम्मी वर्षा को कंप्यूटर सिखाने के बहाने चुत फाड़ने वाले योगेश जी…”
अंकल: “आआह… वर्षा, ये हुई ना बात।”
और मम्मी ने अंकल के सारे कपड़े उतार दिए। और लास्ट में अंडरवियर उतारते ही उनका फनफनाता हुआ लंड स्प्रिंग की तरह निकल आया। मम्मी पलंग पे बैठ गईं। अंकल पास में खड़े थे।
मम्मी ने लंड को अपनी हथेली में थामा और सहलाने लगीं। जैसे-जैसे मम्मी के नाज़ुक गोरे हाथ लंड को सहलाते, वो और फूलता चला जाता और बड़ा होता जाता।
मम्मी: “आपने कहा था मेरे से—‘वर्षा, तुम्हारे ये मम्मे तो छह महीने पहले जो थे उससे और भी ज़्यादा बड़े और हसीन हो गए हैं’—तो मैं आपसे कहती हूँ। मैंने छह महीने पहले आपका ये लंड देखा था तो उस हिसाब से अभी भी साइज़ में वैसा ही है। मेरे मम्मे तो आपने बड़े कर दिए लेकिन मैं आपका लंड बड़ा नहीं कर पाती। आज भी आपका लंड वैसा ही घोड़े जैसा है। आपका लंड तो पहले से ही शेर है। मैं तो कुछ नहीं कर पाती।”
अंकल: “तुझे बस इसकी खुशी रखना है। हमेशा अपने मुँह और चुत में लेना है।”
मम्मी: “हाँ, हमेशा इसे अपनी चुत और मुँह में रखूँगी। देखो इसे कैसे मज़बूती के साथ मेरे चेहरे को सलामी दे रहा है।”


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