21-08-2026, 06:23 PM
Update 7
मम्मी गांडू अंकल के साथ जेवर देखने के लिए गुड़िया के रूम में चली गईं।
वहाँ पे गुड़िया भी थी।
मम्मी: “अरे गुड़िया, कैसी है? शादी के बाद तो बहुत ही निखर गई हो तुम।”
गुड़िया: “क्या आंटी, कुछ भी कह रही हैं आप।”
गुड़िया: “वर्षा आंटी, आप तो मुझसे भी ज़्यादा बहुत खूबसूरत दिख रही हैं आज।”
मम्मी और गुड़िया दोनों एक-दूसरे को तालियाँ देकर मुस्कुराने लगीं।
मम्मी गुड़िया के पास जाकर बैठ गईं।
गांडू अंकल: “अरे गुड़िया, ज़रा अपने जेवर तो दिखाओ वर्षा जी को।”
गुड़िया: “जी, अभी दिखाती हूँ।”
गुड़िया अपने जेवर मम्मी को दिखाने लगीं। मम्मी वो जेवर देख रही थीं। काफ़ी महंगे और अच्छे जेवर उसके ससुराल वालों ने दिए थे।
मम्मी जब जेवर देख रही थीं तब वे बैठी हुई थीं और गांडू अंकल खड़े थे। उनको मम्मी की चूचियाँ आराम से दिख रही थीं। वे उन्हीं का लुत्फ़ उठा रहे थे।
तभी गुड़िया कुछ कहकर बाहर चली जाती है।
मम्मी भी बाहर जाने के लिए खड़ी हो जाती हैं।
मम्मी: “अब हम भी बाहर जाते हैं।”
गांडू: “अरे, आपने अभी देखा ही क्या है… आप आराम से देखिए। आपका ही घर समझिए।”
तभी गांडू अंकल मम्मी के पास चले जाते हैं।
गांडू अंकल: “वैसे आप भी आज बहुत अच्छे जेवर पहनकर आई हैं… बिल्कुल जन्नत की हूर लग रही हैं।”
गांडू अंकल अपने दोनों हाथ मम्मी के कंधों पर रखकर उनकी आँखों में देखकर कहने लगे।
मम्मी शर्म से आँखें नीचे कर दीं। उनकी साँस थोड़ी तेज़ हो गई थी।
मम्मी: “जी, ऐसा कुछ नहीं है।”
गांडू अंकल मम्मी की कमर में हाथ डालकर उनको धीरे से अपने पास खींच लेते हैं। अब मम्मी और उनमें ज़्यादा अंतर नहीं था।
मम्मी बहुत डर गई थीं कि वे ये क्या कर रहे हैं।
गांडू अंकल: “ऐसा कैसे कुछ नहीं है? ये देखिए, आप खुद आईने में देखिए।”
ये कहकर गांडू अंकल ने मम्मी को घुमाकर आईने के सामने खड़ा कर दिया और मम्मी की कमर को पकड़कर उनके पीछे खड़े हो गए।
गांडू अंकल: “ये देखिए वर्षा जी, आप कितनी खूबसूरत लग रही हैं।”
ये कहते हुए गांडू अंकल अपने हाथ मम्मी के पेट पर घुमा रहे थे और अपना लंड मम्मी की चूतड़ों को घिस रहे थे। उनका लंड अब सख्त होने लगा था।
मम्मी को उनका लंड और महसूस होने लगा। उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
मम्मी ने अपनी आँखें कुछ देर के लिए बंद कर दीं और गांडू अंकल की बाँहों से निकल गईं।
मम्मी: “मुझे लगता है अब हमें चलना चाहिए।”
और मम्मी वहाँ से निकल गईं…
गांडू अंकल ने तो मम्मी को गरम करने का पूरा इंतज़ाम किया हुआ था, लेकिन मम्मी वहाँ से बच निकल गईं… और सीधा मेरे पास आईं।
मम्मी: “बेटा, कुछ बात करनी है।”
मैं: “बोलो मम्मी।”
मम्मी: “बेटा, आज गुड़िया के ससुर ने मुझे सेड्यूस करने की कोशिश की।”
मैं: “क्या? मम्मी, आपने उसे चाँटा क्यों नहीं मारा?”
मम्मी: “बेटा, वो गुड़िया का ससुर है और गुड़िया तेरी बहन जैसी है। मैं उसकी इन्सल्ट करती तो गुड़िया की ज़िंदगी में प्रॉब्लम होती। इसलिए मैं बाहर आ गई बेटा।”
मैं: “मम्मी, क्या उन्होंने आपके कपड़े…?”
मम्मी: “नहीं बेटा। उसने मुझे पकड़ा और मैं कुछ देर रूम में रुकती तो वो शायद…”
मैं: “मम्मी, अब आप उसके पास मत जाना। लेकिन योगेश अंकल के साथ…”
मम्मी (हँसती हुई): “नालायक! क्या तू मुझे योगेश के साथ सुलाकर ही रहेगा?”
मैं: “हाँ मम्मी। एक दिन योगेश अंकल और आप दोनों की दोस्ती करवाऊँगा।”
मम्मी: “मुझे ज़रूरत नहीं है। तेरे पापा हैं।”
मैं: “मम्मी, पापा तो ज़्यादातर आउट ऑफ़ सिटी रहते हैं। आपको अंकल की और अंकल को आपकी ज़रूरत है।”
और ये कहकर मैं वहाँ से दूर हो गया।
कुछ देर बाद योगेश अंकल भी आ गए।
योगेश अंकल ने जैसे ही मम्मी को देखा, वे एकदम देखते ही रह गए।
उन्होंने मम्मी को आँखों से ही इशारा करते हुए “बहुत अच्छी लग रही हो” कहा।
मम्मी भी उनको देखकर स्माइल देने लगीं।
लेकिन जब तक फंक्शन था तब मम्मी के दिमाग से गांडू अंकल का ख्याल नहीं गया था।
गांडू अंकल और मम्मी बार-बार एक-दूसरे को शर्म की आँखों से देख रहे थे।
मैं भी थोड़ा इधर-उधर गुड़िया के साथ घूम रहा था। गुड़िया भी काफ़ी हॉट थी। लेकिन मैंने जो अंदर देखा था उससे मेरा भी लंड खड़ा हो गया था। तो मैं भी कभी-कभी गुड़िया की कमर को और चूचियों का हाथ लगाकर मज़े ले रहा था। वो मुझे छोटा भाई ही मानती थी इसलिए उसको कुछ शक नहीं हो रहा था। मैंने बातों-बातों में उसके गाल पर किस भी कर दिया। वो मेरी तरफ़ देखने लगी। तब मुझे डर लगा कि लगता है ये कुछ ज़्यादा हो गया। लेकिन उसने मुस्कुराते हुए रिटर्न में मुझे भी किस कर दिया। उसका लिपस्टिक मेरे गाल पर लग गया। मेरा लंड तो वहीं पर झड़ गया।
जब रात नौ बजे गुड़िया और उनके ससुराल वाले चले गए…
अब रात के दस बज चुके थे।
आंटी ने मुझसे कहा—
आंटी: “बेटा, मैंने तुझसे कहा था वर्षा और योगेश के बारे में।”
मैं: “आंटी, मुझे कुछ नहीं कहना।”
आंटी: “बेटा, मैंने आज ऊपर वाला कमरा अच्छे से सजाया है जैसे सुहागरात में सजाते हैं। इसलिए मैं आज रात को वर्षा और योगेश को उसमें सुला दूँगी। अगर इनमें कुछ है तो सुबह पता चल जाएगा।”
मैं: “आंटी, मुझे कुछ पता नहीं करना है। मैं तो इतना चाहता हूँ मम्मी खुश रहें। आप चाहें तो दोनों को एक साथ सुला दें। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। और मुझे ये भी नहीं जानना है दोनों के बीच रात को कुछ होता है या नहीं। मम्मी की ज़िंदगी है, वे उनकी मर्ज़ी से जिएँ। मैं हमेशा मम्मी के साथ हूँ।”
आंटी: “ओके बेटा। मैं आज इन्हें ऊपर वाले रूम में सुलाऊँगी। बस तुझसे इतना कहूँगी—तू उनके बगल वाले रूम में सो जाना। कुछ होगा तो तुझे पता चल जाएगा और नहीं होगा तो मेरा शक दूर हो जाएगा।”
मैं: “नहीं आंटी। मुझे उनके पास वाले रूम में नहीं सोना। एक बेटा अपनी मम्मी की जासूसी करे ये ठीक नहीं।”
आंटी: “बेटा, मैं जासूसी करने का नहीं। मैं तो सिर्फ़ इतना कह रही हूँ—तू अपनी मम्मी से प्यार करता है, ये भी पता कर वे खुश हैं या नहीं। मैं तुझसे ये नहीं कह रही हूँ तू उनको देखना। मैं तो बस इतना कह रही हूँ अगर तू बगल वाले रूम में सोएगा तो तुझे शायद कुछ मालूम हो जाए। और तू वर्षा से प्यार करता है ये पता कर वे खुश हैं या नहीं। और दोनों रूम में एक खिड़की है जो हमेशा खुली रहती है।”
मैं: “नहीं आंटी।”
आंटी: “बेटा, इतना तो कर सकता है तू। कुछ देखना मत, पर तुझे ये तो पता चल जाएगा कि दोनों खुश हैं या नहीं। और वर्षा ने कहा है तू उसे योगेश के घर भेजा है कंप्यूटर सीखने।”
मैं: “हाँ, इसमें क्या गलत है? अंकल मम्मी को कंप्यूटर सिखाते हैं।”
आंटी: “तो ठीक है। मैं उनसे बोल दूँगी वे आज भी कंप्यूटर सीख लेंगे।”
मैं: “जो आपको ठीक लगे।”
फिर उसके बाद मम्मी ने आंटी से घर जाने की बात कही तो—
आंटी ने मेरी तरफ़ देखते हुए: “वर्षा, आज तू यहीं रुक। कल जाना। मैंने तेरे सोने के लिए ऊपर कमरा खाली कर दिया है। तू ऊपर सो जाना और अंकित मेरे पास सोएगा। आखिर वो मेरा भी तो बेटा है।”
मम्मी: “क्या दीदी? मैं अकेली कैसे सोऊँगी?”
आंटी (हँसते हुए): “वैसे ही जैसे शादी वाली रात सोई थी।”
मम्मी ने शर्म से अपना सिर नीचे झुका लिया और कुछ नहीं बोलीं।
अंकल: “दीदी, मैं वर्षा को कंप्यूटर सिखाता हूँ। आप कहें तो क्या मैं आज भी इसे कंप्यूटर सिखा दूँ?”
आंटी: “मुझसे क्यों पूछ रहे हो? अंकित से पूछो। वो इसका बेटा है।”
मम्मी: “नहीं दीदी… नहीं दीदी…”
मैं: “क्यों मम्मी? आप चाहें तो सीख लीजिए। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं।”
आंटी: “देख, तेरा बेटा भी बोल रहा है। सीख ले आज रात। वैसे भी तो पहले से सीख रही है। चल, मैं तुझे ऊपर रूम में छोड़कर आती हूँ। योगेश, तुम भी आ जाओ। ऊपर रूम में कंप्यूटर भी रखा है।”
फिर आंटी मम्मी का हाथ पकड़के ऊपर ले गईं। मम्मी पीछे से मुझे देख रही थीं और थोड़ी देर में मम्मी-आंटी ऊपर चली गईं।
अंकल मेरे पास आए।
योगेश अंकल: “बेटा, ऊपर रूम रेडी है सुहागरात का।”
मैं: “अंकल, तो जाइए ना और फाड़िए मम्मी की चुत पूरी रात।”
फिर अंकल बोले: “चल ऊपर, मुझे छोड़ने।”
तो मैं और अंकल ऊपर चले गए और रूम के बाहर—
मैं: “अंकल, मैं दूर छिप जाता हूँ। नहीं तो मम्मी को शर्म आएगी।”
अंकल: “हाँ, तू ज़ीने में रुक और दीदी के साथ नीचे चले जाना। फिर बाद में आकर लाइव देखना। मैं खिड़की खोल दूँगा।”
मैं: “नहीं अंकल। मैं आज आंटी के साथ सोऊँगा। मैं नहीं आऊँगा।”
अंकल: “बेटा, आज तू ज़रूर देखना। और मैं तेरे वापस आने के बाद ही रूम में जाऊँगा।”
मैं: “लेकिन नीचे आंटी हैं। मैं उनके सोने के बाद आऊँगा।”
अंकल: “बेटा, वे रोज़ रात को नींद की टैबलेट लेती हैं। वे जल्दी सो जाएँगी। तू आ जाना।”
मैं: “ओके अंकल।”
फिर मैं ज़ीने में आ गया।
अंकल ने दरवाज़ा खटखटाने लगे।
तभी आंटी बाहर आईं और—
आंटी: “हा हा भाई, बहुत जल्दी है आपको अंदर जाने की।”
अंकल: “अरे दीदी, तुमने तो कमाल ही कर दिया। वर्षा बहुत खूबसूरत लग रही थी आज।”
दीदी: “हाँ, जाइए अंदर। आपकी दुल्हन इंतज़ार कर रही है।”
योगेश अंकल एक दो हज़ार का नोट निकालते हैं और आंटी को दे देते हैं। और रूम के अंदर चले जाते हैं।
फिर आंटी नीचे आने लगती हैं तो मैं वहाँ से जल्दी से नीचे आ जाता हूँ और सोफे पर बैठ जाता हूँ।
फिर आंटी भी आ जाती हैं और बोलती हैं—
“क्या तू देखने जाएगा?”
मैं: “नहीं आंटी।
वो मेरी मम्मी हैं। मैं चाहता हूँ वे खुश रहें। यदि उनके बीच कुछ होगा तो वे एन्जॉय करें। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। और उनके बीच कोई ऐसा रिलेशन नहीं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। उनकी ज़िंदगी, वे जानें। अब मुझे नींद आ रही है। मैं सोता हूँ।”
आंटी: “तू चाहे तो मेरे साथ रूम में सो ले।”
मैं: “हाँ आंटी। लेकिन मैं रात को मोबाइल पे मूवी देखता हूँ।”
आंटी: “देख लेना।”
और फिर मैं आंटी के साथ उनके रूम में आ गया।
और आंटी ने टैबलेट ली।
मैं: “ये टैबलेट आप क्यों लेती हो?”
आंटी: “बेटा, मुझे नींद की प्रॉब्लम है। इसलिए टैबलेट लेती हूँ।”
और आंटी सो गईं। थोड़ी देर बाद मैंने आवाज़ लगाकर आंटी को चेक किया लेकिन आंटी नहीं उठीं। फिर मैं जल्दी से ऊपर गया।
मम्मी गांडू अंकल के साथ जेवर देखने के लिए गुड़िया के रूम में चली गईं।
वहाँ पे गुड़िया भी थी।
मम्मी: “अरे गुड़िया, कैसी है? शादी के बाद तो बहुत ही निखर गई हो तुम।”
गुड़िया: “क्या आंटी, कुछ भी कह रही हैं आप।”
गुड़िया: “वर्षा आंटी, आप तो मुझसे भी ज़्यादा बहुत खूबसूरत दिख रही हैं आज।”
मम्मी और गुड़िया दोनों एक-दूसरे को तालियाँ देकर मुस्कुराने लगीं।
मम्मी गुड़िया के पास जाकर बैठ गईं।
गांडू अंकल: “अरे गुड़िया, ज़रा अपने जेवर तो दिखाओ वर्षा जी को।”
गुड़िया: “जी, अभी दिखाती हूँ।”
गुड़िया अपने जेवर मम्मी को दिखाने लगीं। मम्मी वो जेवर देख रही थीं। काफ़ी महंगे और अच्छे जेवर उसके ससुराल वालों ने दिए थे।
मम्मी जब जेवर देख रही थीं तब वे बैठी हुई थीं और गांडू अंकल खड़े थे। उनको मम्मी की चूचियाँ आराम से दिख रही थीं। वे उन्हीं का लुत्फ़ उठा रहे थे।
तभी गुड़िया कुछ कहकर बाहर चली जाती है।
मम्मी भी बाहर जाने के लिए खड़ी हो जाती हैं।
मम्मी: “अब हम भी बाहर जाते हैं।”
गांडू: “अरे, आपने अभी देखा ही क्या है… आप आराम से देखिए। आपका ही घर समझिए।”
तभी गांडू अंकल मम्मी के पास चले जाते हैं।
गांडू अंकल: “वैसे आप भी आज बहुत अच्छे जेवर पहनकर आई हैं… बिल्कुल जन्नत की हूर लग रही हैं।”
गांडू अंकल अपने दोनों हाथ मम्मी के कंधों पर रखकर उनकी आँखों में देखकर कहने लगे।
मम्मी शर्म से आँखें नीचे कर दीं। उनकी साँस थोड़ी तेज़ हो गई थी।
मम्मी: “जी, ऐसा कुछ नहीं है।”
गांडू अंकल मम्मी की कमर में हाथ डालकर उनको धीरे से अपने पास खींच लेते हैं। अब मम्मी और उनमें ज़्यादा अंतर नहीं था।
मम्मी बहुत डर गई थीं कि वे ये क्या कर रहे हैं।
गांडू अंकल: “ऐसा कैसे कुछ नहीं है? ये देखिए, आप खुद आईने में देखिए।”
ये कहकर गांडू अंकल ने मम्मी को घुमाकर आईने के सामने खड़ा कर दिया और मम्मी की कमर को पकड़कर उनके पीछे खड़े हो गए।
गांडू अंकल: “ये देखिए वर्षा जी, आप कितनी खूबसूरत लग रही हैं।”
ये कहते हुए गांडू अंकल अपने हाथ मम्मी के पेट पर घुमा रहे थे और अपना लंड मम्मी की चूतड़ों को घिस रहे थे। उनका लंड अब सख्त होने लगा था।
मम्मी को उनका लंड और महसूस होने लगा। उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
मम्मी ने अपनी आँखें कुछ देर के लिए बंद कर दीं और गांडू अंकल की बाँहों से निकल गईं।
मम्मी: “मुझे लगता है अब हमें चलना चाहिए।”
और मम्मी वहाँ से निकल गईं…
गांडू अंकल ने तो मम्मी को गरम करने का पूरा इंतज़ाम किया हुआ था, लेकिन मम्मी वहाँ से बच निकल गईं… और सीधा मेरे पास आईं।
मम्मी: “बेटा, कुछ बात करनी है।”
मैं: “बोलो मम्मी।”
मम्मी: “बेटा, आज गुड़िया के ससुर ने मुझे सेड्यूस करने की कोशिश की।”
मैं: “क्या? मम्मी, आपने उसे चाँटा क्यों नहीं मारा?”
मम्मी: “बेटा, वो गुड़िया का ससुर है और गुड़िया तेरी बहन जैसी है। मैं उसकी इन्सल्ट करती तो गुड़िया की ज़िंदगी में प्रॉब्लम होती। इसलिए मैं बाहर आ गई बेटा।”
मैं: “मम्मी, क्या उन्होंने आपके कपड़े…?”
मम्मी: “नहीं बेटा। उसने मुझे पकड़ा और मैं कुछ देर रूम में रुकती तो वो शायद…”
मैं: “मम्मी, अब आप उसके पास मत जाना। लेकिन योगेश अंकल के साथ…”
मम्मी (हँसती हुई): “नालायक! क्या तू मुझे योगेश के साथ सुलाकर ही रहेगा?”
मैं: “हाँ मम्मी। एक दिन योगेश अंकल और आप दोनों की दोस्ती करवाऊँगा।”
मम्मी: “मुझे ज़रूरत नहीं है। तेरे पापा हैं।”
मैं: “मम्मी, पापा तो ज़्यादातर आउट ऑफ़ सिटी रहते हैं। आपको अंकल की और अंकल को आपकी ज़रूरत है।”
और ये कहकर मैं वहाँ से दूर हो गया।
कुछ देर बाद योगेश अंकल भी आ गए।
योगेश अंकल ने जैसे ही मम्मी को देखा, वे एकदम देखते ही रह गए।
उन्होंने मम्मी को आँखों से ही इशारा करते हुए “बहुत अच्छी लग रही हो” कहा।
मम्मी भी उनको देखकर स्माइल देने लगीं।
लेकिन जब तक फंक्शन था तब मम्मी के दिमाग से गांडू अंकल का ख्याल नहीं गया था।
गांडू अंकल और मम्मी बार-बार एक-दूसरे को शर्म की आँखों से देख रहे थे।
मैं भी थोड़ा इधर-उधर गुड़िया के साथ घूम रहा था। गुड़िया भी काफ़ी हॉट थी। लेकिन मैंने जो अंदर देखा था उससे मेरा भी लंड खड़ा हो गया था। तो मैं भी कभी-कभी गुड़िया की कमर को और चूचियों का हाथ लगाकर मज़े ले रहा था। वो मुझे छोटा भाई ही मानती थी इसलिए उसको कुछ शक नहीं हो रहा था। मैंने बातों-बातों में उसके गाल पर किस भी कर दिया। वो मेरी तरफ़ देखने लगी। तब मुझे डर लगा कि लगता है ये कुछ ज़्यादा हो गया। लेकिन उसने मुस्कुराते हुए रिटर्न में मुझे भी किस कर दिया। उसका लिपस्टिक मेरे गाल पर लग गया। मेरा लंड तो वहीं पर झड़ गया।
जब रात नौ बजे गुड़िया और उनके ससुराल वाले चले गए…
अब रात के दस बज चुके थे।
आंटी ने मुझसे कहा—
आंटी: “बेटा, मैंने तुझसे कहा था वर्षा और योगेश के बारे में।”
मैं: “आंटी, मुझे कुछ नहीं कहना।”
आंटी: “बेटा, मैंने आज ऊपर वाला कमरा अच्छे से सजाया है जैसे सुहागरात में सजाते हैं। इसलिए मैं आज रात को वर्षा और योगेश को उसमें सुला दूँगी। अगर इनमें कुछ है तो सुबह पता चल जाएगा।”
मैं: “आंटी, मुझे कुछ पता नहीं करना है। मैं तो इतना चाहता हूँ मम्मी खुश रहें। आप चाहें तो दोनों को एक साथ सुला दें। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। और मुझे ये भी नहीं जानना है दोनों के बीच रात को कुछ होता है या नहीं। मम्मी की ज़िंदगी है, वे उनकी मर्ज़ी से जिएँ। मैं हमेशा मम्मी के साथ हूँ।”
आंटी: “ओके बेटा। मैं आज इन्हें ऊपर वाले रूम में सुलाऊँगी। बस तुझसे इतना कहूँगी—तू उनके बगल वाले रूम में सो जाना। कुछ होगा तो तुझे पता चल जाएगा और नहीं होगा तो मेरा शक दूर हो जाएगा।”
मैं: “नहीं आंटी। मुझे उनके पास वाले रूम में नहीं सोना। एक बेटा अपनी मम्मी की जासूसी करे ये ठीक नहीं।”
आंटी: “बेटा, मैं जासूसी करने का नहीं। मैं तो सिर्फ़ इतना कह रही हूँ—तू अपनी मम्मी से प्यार करता है, ये भी पता कर वे खुश हैं या नहीं। मैं तुझसे ये नहीं कह रही हूँ तू उनको देखना। मैं तो बस इतना कह रही हूँ अगर तू बगल वाले रूम में सोएगा तो तुझे शायद कुछ मालूम हो जाए। और तू वर्षा से प्यार करता है ये पता कर वे खुश हैं या नहीं। और दोनों रूम में एक खिड़की है जो हमेशा खुली रहती है।”
मैं: “नहीं आंटी।”
आंटी: “बेटा, इतना तो कर सकता है तू। कुछ देखना मत, पर तुझे ये तो पता चल जाएगा कि दोनों खुश हैं या नहीं। और वर्षा ने कहा है तू उसे योगेश के घर भेजा है कंप्यूटर सीखने।”
मैं: “हाँ, इसमें क्या गलत है? अंकल मम्मी को कंप्यूटर सिखाते हैं।”
आंटी: “तो ठीक है। मैं उनसे बोल दूँगी वे आज भी कंप्यूटर सीख लेंगे।”
मैं: “जो आपको ठीक लगे।”
फिर उसके बाद मम्मी ने आंटी से घर जाने की बात कही तो—
आंटी ने मेरी तरफ़ देखते हुए: “वर्षा, आज तू यहीं रुक। कल जाना। मैंने तेरे सोने के लिए ऊपर कमरा खाली कर दिया है। तू ऊपर सो जाना और अंकित मेरे पास सोएगा। आखिर वो मेरा भी तो बेटा है।”
मम्मी: “क्या दीदी? मैं अकेली कैसे सोऊँगी?”
आंटी (हँसते हुए): “वैसे ही जैसे शादी वाली रात सोई थी।”
मम्मी ने शर्म से अपना सिर नीचे झुका लिया और कुछ नहीं बोलीं।
अंकल: “दीदी, मैं वर्षा को कंप्यूटर सिखाता हूँ। आप कहें तो क्या मैं आज भी इसे कंप्यूटर सिखा दूँ?”
आंटी: “मुझसे क्यों पूछ रहे हो? अंकित से पूछो। वो इसका बेटा है।”
मम्मी: “नहीं दीदी… नहीं दीदी…”
मैं: “क्यों मम्मी? आप चाहें तो सीख लीजिए। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं।”
आंटी: “देख, तेरा बेटा भी बोल रहा है। सीख ले आज रात। वैसे भी तो पहले से सीख रही है। चल, मैं तुझे ऊपर रूम में छोड़कर आती हूँ। योगेश, तुम भी आ जाओ। ऊपर रूम में कंप्यूटर भी रखा है।”
फिर आंटी मम्मी का हाथ पकड़के ऊपर ले गईं। मम्मी पीछे से मुझे देख रही थीं और थोड़ी देर में मम्मी-आंटी ऊपर चली गईं।
अंकल मेरे पास आए।
योगेश अंकल: “बेटा, ऊपर रूम रेडी है सुहागरात का।”
मैं: “अंकल, तो जाइए ना और फाड़िए मम्मी की चुत पूरी रात।”
फिर अंकल बोले: “चल ऊपर, मुझे छोड़ने।”
तो मैं और अंकल ऊपर चले गए और रूम के बाहर—
मैं: “अंकल, मैं दूर छिप जाता हूँ। नहीं तो मम्मी को शर्म आएगी।”
अंकल: “हाँ, तू ज़ीने में रुक और दीदी के साथ नीचे चले जाना। फिर बाद में आकर लाइव देखना। मैं खिड़की खोल दूँगा।”
मैं: “नहीं अंकल। मैं आज आंटी के साथ सोऊँगा। मैं नहीं आऊँगा।”
अंकल: “बेटा, आज तू ज़रूर देखना। और मैं तेरे वापस आने के बाद ही रूम में जाऊँगा।”
मैं: “लेकिन नीचे आंटी हैं। मैं उनके सोने के बाद आऊँगा।”
अंकल: “बेटा, वे रोज़ रात को नींद की टैबलेट लेती हैं। वे जल्दी सो जाएँगी। तू आ जाना।”
मैं: “ओके अंकल।”
फिर मैं ज़ीने में आ गया।
अंकल ने दरवाज़ा खटखटाने लगे।
तभी आंटी बाहर आईं और—
आंटी: “हा हा भाई, बहुत जल्दी है आपको अंदर जाने की।”
अंकल: “अरे दीदी, तुमने तो कमाल ही कर दिया। वर्षा बहुत खूबसूरत लग रही थी आज।”
दीदी: “हाँ, जाइए अंदर। आपकी दुल्हन इंतज़ार कर रही है।”
योगेश अंकल एक दो हज़ार का नोट निकालते हैं और आंटी को दे देते हैं। और रूम के अंदर चले जाते हैं।
फिर आंटी नीचे आने लगती हैं तो मैं वहाँ से जल्दी से नीचे आ जाता हूँ और सोफे पर बैठ जाता हूँ।
फिर आंटी भी आ जाती हैं और बोलती हैं—
“क्या तू देखने जाएगा?”
मैं: “नहीं आंटी।
वो मेरी मम्मी हैं। मैं चाहता हूँ वे खुश रहें। यदि उनके बीच कुछ होगा तो वे एन्जॉय करें। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। और उनके बीच कोई ऐसा रिलेशन नहीं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। उनकी ज़िंदगी, वे जानें। अब मुझे नींद आ रही है। मैं सोता हूँ।”
आंटी: “तू चाहे तो मेरे साथ रूम में सो ले।”
मैं: “हाँ आंटी। लेकिन मैं रात को मोबाइल पे मूवी देखता हूँ।”
आंटी: “देख लेना।”
और फिर मैं आंटी के साथ उनके रूम में आ गया।
और आंटी ने टैबलेट ली।
मैं: “ये टैबलेट आप क्यों लेती हो?”
आंटी: “बेटा, मुझे नींद की प्रॉब्लम है। इसलिए टैबलेट लेती हूँ।”
और आंटी सो गईं। थोड़ी देर बाद मैंने आवाज़ लगाकर आंटी को चेक किया लेकिन आंटी नहीं उठीं। फिर मैं जल्दी से ऊपर गया।


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