21-08-2026, 06:20 PM
Update 5
तो देखा कि अंकल सोफे पर बैठे थे। मम्मी उन्हें चाय दे रही थीं। मम्मी के हाथ में चाय की ट्रे थी जिसमें तीन कप चाय थीं। मम्मी चाय बनाकर लाई थीं। अंकल ने बनियान पहनी थी और तौलिया लपेटा था। अंकल ने पैंट-शर्ट नहीं पहने थे। लेकिन मम्मी ने सुबह वाली ड्रेस ही पहनी थी जो वे मेरे घर से पहनकर आई थीं—एक टाइट लेगिंग और एक शॉर्ट कुर्ता जो स्ट्रैप वाला था। दुपट्टे को कंधे पर रखा था एक तरफ़ और उनकी 36डी चूचियाँ एकदम टाइट थीं।
मम्मी-अंकल मुझे देखकर मुस्कुराकर बोले, “आओ अंकित बेटा, बैठो।” फिर मैं अंकल के सामने वाले सोफे पर जाकर बैठ गया। अंकल बड़े सोफे पर बैठे थे और मैं सिंगल सोफे पर बैठ गया। फिर मम्मी ने मुझे भी चाय दी।
मम्मी: “बेटा, कैसा है तू?”
मैं: “मैं ठीक हूँ मम्मी। लेकिन आप ठीक नहीं लग रही हो।”
मम्मी ने समझ गईं लेकिन कुछ नहीं बोलीं।
अंकल: “बेटा, तेरी मम्मी थक गई हैं बेचारी। सुबह ग्यारह बजे से मेरे साथ थीं।” और फिर अंकल ने ये कहते हुए मम्मी का हाथ पकड़के अपने बगल में बैठा लिया।
मम्मी शर्म के मारे मरी जा रही थीं। उनसे कोई जवाब नहीं बन रहा था। और अंकल ने उन्हें अपने बगल में मेरे सामने बैठा लिया तो बेचारी और ज़्यादा शर्मिंदा हो रही थीं। मैंने उनके डर को दूर करने के लिए कहा—
मैं: “जी अंकल। आपने सुबह से उन्हें कंप्यूटर सिखाया, इसलिए वे सुबह से आपके साथ थीं। कंप्यूटर सीखने से थकान तो होगी ना?”
तो मम्मी ने नज़रें उठाकर मुझे देखा। मैं अपने सोफे से उठकर मम्मी के बगल में गया। अब मम्मी बीच में थीं। मैंने टेबल पे से चाय उठाकर मम्मी को दी और बोला, “मम्मी, आप क्यों शर्मा रही हो? आप ये सोचकर शर्मा रही हो ना कि आप अंकल के साथ अकेली थीं? इसमें क्या गलत है? आप कंप्यूटर सीखने आई हो।”
तो मम्मी ने भी मेरे सामने देखते हुए मेरे हाथों से चाय ली और बोलीं—
मम्मी: “बेटा, बस तू हमेशा मेरे साथ रहना।”
मैं: “मैं आपके साथ हूँ।” और फिर हम मम्मी-अंकल चाय पीने लगे।
फिर मैं बोला, “मम्मी, चलें?” तो मम्मी, “हाँ बेटे, चलते हैं।”
जब मम्मी चलने लगीं तो उनकी चाल बदल चुकी थी। वे लँगड़ा के चल रही थीं।
तो अंकल ने मज़ा लेने के लिए—
अंकल: “वर्षा, तू लँगड़ा के क्यों चल रही है? कोई क्या सोचेगा?”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए अंकल की तरफ़ देखकर आँखें दिखाईं।
मैं: “शायद कंप्यूटर टेबल पे लगातार बैठे रहने से मम्मी की टाँग ऐसी हो गई। थोड़ी देर बाद ठीक हो जाएँगी।”
मम्मी: “बेटा, तू सही कह रहा है। अब चलते हैं।”
अंकल: “वर्षा, रात को फिर से आओगी?”
मम्मी: “क्या?”
अंकल: “फिर से कंप्यूटर सिखा दूँगा।”
मम्मी: “नहीं, आज नहीं।”
मैं: “क्यों नहीं मम्मी? आप आ जाना। पापा और दादी के सोने के बाद।”
मम्मी: “नालायक! मैं मर जाऊँगी। सुबह से मैं थक गई। अब मुझे आराम चाहिए।”
मैं: “जैसी आपकी मर्ज़ी मम्मी।”
फिर मैं और मम्मी स्कूटी से घर आए तो पापा पहले से ही आ चुके थे। दादी-पापा हॉल में बैठे थे। मम्मी सीधा किचन में चली गईं और मैं पापा-दादी के पास हॉल में बैठ गया।
रात में डिनर के बाद पापा ने कहा, “मैं पंद्रह दिन घर पे ही रहूँगा। कल से पंद्रह दिन ऑफिस नहीं जाऊँगा। घर से वर्क करूँगा।” तो मम्मी के चेहरे पे उदासी आ गई क्योंकि वे अंकल से नहीं मिल पाएँगी। फिर हम सोने चले गए।
दस दिन मम्मी और अंकल की मुलाकात नहीं हुई थी। वे सिर्फ़ फोन पर ही बातें करते थे।
अंकल भी मुझसे कई बार कहते, “बेटा, कुछ कर। तेरी मम्मी को घर से बाहर ला।” लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। लेकिन दस दिन बाद अंकल ने मुझसे कहा, “बेटा, एक मौका मिला है। तू साथ देना।”
मैं: “कैसे? मुझे बताइए।”
अंकल: “आज दिन में पता चल जाएगा।”
मैं: “मैं आपका साथ दूँगा।”
फिर दिन में आंटी (जिनकी बेटी की शादी हुई थी) हमारे घर आई हुई थीं। उनकी बेटी घर पे शादी के बाद आने वाली थी तो उन्होंने मम्मी को इनवाइट करने के लिए आई थीं।
उन्होंने पापा से कहा, “आप भाभी जी को हमारे घर भेज देना।” तो पापा ने कह दिया, “चली जाएगी।” फिर वे मम्मी को और मुझे अंकल के घर ले गईं जहाँ अंकल ने मुझे बाहर जाने का इशारा किया। मैं समझ गया और मम्मी से कहा, “मम्मी, मेरे एक दोस्त का कॉल आ रहा है और मैं उससे बात करके आता हूँ।” और रूम में चला गया। अंकल-मम्मी-आंटी हॉल में साइड पे बैठे थे और मैं रूम से देखने लगा।
आंटी ने मम्मी का हाथ पकड़के उठाया और मम्मी को अंकल की गोद में बैठा दिया। तो मम्मी ना-ना करने लगीं लेकिन मम्मी को अंकल की गोद में बैठा ही दिया। मम्मी शर्म के मारे मरी जा रही थीं और फिर अंकल ने भी मम्मी को पकड़ लिया और अपनी गोद में ही बैठाकर रखा।
फिर तीनों हँस-हँस कर बातें करने लगे और मम्मी बार-बार शर्मा रही थीं।
आंटी मज़ाक में मम्मी को “भाभी-भाभी” कह रही थीं।
आंटी: “तो भाभी, आप और भाई को ही सब अरेंजमेंट्स करने हैं जैसे शादी पे किए थे बस। और हाँ, वो भी कर लेना जो उसके बाद किया था। ऊपर रूम में सारी रात।”
और सब हँसने लगे।
और अंकल ने झट से मम्मी के होठों पे अपने होठ रख दिए और किस किया। आंटी जैसे एकदम से हँस पड़ीं। अंकल के इस हरकत पर मम्मी बहुत मुस्कुरा रही थीं।
मम्मी: “प्लीज़ दीदी, चुप हो जाओ।”
फिर मम्मी अंकल की गोद से उठ गईं और बगल में बैठ गईं तो अंकल ने मम्मी के कंधे पे अपना हाथ रख लिया और मम्मी को अपने से चिपका लिया। फिर मैं भी रूम से बाहर आया तो मुझे देखकर मम्मी अंकल से थोड़ी दूर खिसक गईं लेकिन अंकल ने मम्मी के कंधे से हाथ नहीं हटाया।
तो फिर आंटी ने कहा, “बेटा, मम्मी को लेकर ज़रूर आना।” और फिर थोड़ी देर बाद आंटी और मम्मी वापस हमारे घर आ गईं और फिर बातें करने के बाद आंटी चली गईं।
फिर दो दिन बाद हमें फिर से उनके घर जाना था।
दो दिन बाद पापा ने हमें जाने के लिए बोल दिया और मैं-मम्मी आंटी के घर चले गए। और साथ में अंकल नहीं गए। उन्हें कुछ काम था तो बोले, “तुम चलो। मैं ज़रूरी काम करके आता हूँ।”
उस वक्त पहले तो मम्मी ने साड़ी पहनी हुई थी। लेकिन जब हम वहाँ पे पहुँच गए तो आंटी ने उन्हें रूम में बुलाकर एक लहंगा पहनने को दे दिया। फिर मम्मी ने मुझसे कहा, “बेटा, तेरी आंटी लहंगा पहनने को बोल रही है। क्या करूँ?”
मैं: “मम्मी, आप लहंगा पहन लीजिए। ये आप पर अच्छा लगेगा।”
मम्मी: “ओके बेटा।” और फिर मम्मी वापस रूम में चली गईं। मम्मी ने वो पहना।
मम्मी तो उसमें एकदम ही हॉट लग रही थीं। चोली में मम्मी की चूचियाँ आधी नंगी ही दिख रही थीं। उन्होंने लहंगा कमर के नीचे पहना हुआ था। आंटी ने मम्मी को अच्छे से तैयार किया हुआ था। मम्मी का मेकअप भी बहुत ज़्यादा दिख रहा था। बाल जूड़े से बंधे हुए थे। इसलिए मम्मी की नंगी पीठ दिख रही थी। मम्मी का पेट चिकना और मुलायम दिख रहा था। मम्मी की नागिन जैसी कमर तो कहर ढा रही थी।
मम्मी की कमर में बंधा हुआ कमरबंद एक अलग ही सुंदर लग रहा था। मम्मी किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थीं। मम्मी की गहरी नाभि उनकी सुंदरता बढ़ा रही थी। मम्मी ने कुछ गहने भी पहने थे।
मम्मी जब बाहर आईं तब जो कुछ रिश्तेदार आए थे वे उन्हीं को निहार रहे थे।
तो देखा कि अंकल सोफे पर बैठे थे। मम्मी उन्हें चाय दे रही थीं। मम्मी के हाथ में चाय की ट्रे थी जिसमें तीन कप चाय थीं। मम्मी चाय बनाकर लाई थीं। अंकल ने बनियान पहनी थी और तौलिया लपेटा था। अंकल ने पैंट-शर्ट नहीं पहने थे। लेकिन मम्मी ने सुबह वाली ड्रेस ही पहनी थी जो वे मेरे घर से पहनकर आई थीं—एक टाइट लेगिंग और एक शॉर्ट कुर्ता जो स्ट्रैप वाला था। दुपट्टे को कंधे पर रखा था एक तरफ़ और उनकी 36डी चूचियाँ एकदम टाइट थीं।
मम्मी-अंकल मुझे देखकर मुस्कुराकर बोले, “आओ अंकित बेटा, बैठो।” फिर मैं अंकल के सामने वाले सोफे पर जाकर बैठ गया। अंकल बड़े सोफे पर बैठे थे और मैं सिंगल सोफे पर बैठ गया। फिर मम्मी ने मुझे भी चाय दी।
मम्मी: “बेटा, कैसा है तू?”
मैं: “मैं ठीक हूँ मम्मी। लेकिन आप ठीक नहीं लग रही हो।”
मम्मी ने समझ गईं लेकिन कुछ नहीं बोलीं।
अंकल: “बेटा, तेरी मम्मी थक गई हैं बेचारी। सुबह ग्यारह बजे से मेरे साथ थीं।” और फिर अंकल ने ये कहते हुए मम्मी का हाथ पकड़के अपने बगल में बैठा लिया।
मम्मी शर्म के मारे मरी जा रही थीं। उनसे कोई जवाब नहीं बन रहा था। और अंकल ने उन्हें अपने बगल में मेरे सामने बैठा लिया तो बेचारी और ज़्यादा शर्मिंदा हो रही थीं। मैंने उनके डर को दूर करने के लिए कहा—
मैं: “जी अंकल। आपने सुबह से उन्हें कंप्यूटर सिखाया, इसलिए वे सुबह से आपके साथ थीं। कंप्यूटर सीखने से थकान तो होगी ना?”
तो मम्मी ने नज़रें उठाकर मुझे देखा। मैं अपने सोफे से उठकर मम्मी के बगल में गया। अब मम्मी बीच में थीं। मैंने टेबल पे से चाय उठाकर मम्मी को दी और बोला, “मम्मी, आप क्यों शर्मा रही हो? आप ये सोचकर शर्मा रही हो ना कि आप अंकल के साथ अकेली थीं? इसमें क्या गलत है? आप कंप्यूटर सीखने आई हो।”
तो मम्मी ने भी मेरे सामने देखते हुए मेरे हाथों से चाय ली और बोलीं—
मम्मी: “बेटा, बस तू हमेशा मेरे साथ रहना।”
मैं: “मैं आपके साथ हूँ।” और फिर हम मम्मी-अंकल चाय पीने लगे।
फिर मैं बोला, “मम्मी, चलें?” तो मम्मी, “हाँ बेटे, चलते हैं।”
जब मम्मी चलने लगीं तो उनकी चाल बदल चुकी थी। वे लँगड़ा के चल रही थीं।
तो अंकल ने मज़ा लेने के लिए—
अंकल: “वर्षा, तू लँगड़ा के क्यों चल रही है? कोई क्या सोचेगा?”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए अंकल की तरफ़ देखकर आँखें दिखाईं।
मैं: “शायद कंप्यूटर टेबल पे लगातार बैठे रहने से मम्मी की टाँग ऐसी हो गई। थोड़ी देर बाद ठीक हो जाएँगी।”
मम्मी: “बेटा, तू सही कह रहा है। अब चलते हैं।”
अंकल: “वर्षा, रात को फिर से आओगी?”
मम्मी: “क्या?”
अंकल: “फिर से कंप्यूटर सिखा दूँगा।”
मम्मी: “नहीं, आज नहीं।”
मैं: “क्यों नहीं मम्मी? आप आ जाना। पापा और दादी के सोने के बाद।”
मम्मी: “नालायक! मैं मर जाऊँगी। सुबह से मैं थक गई। अब मुझे आराम चाहिए।”
मैं: “जैसी आपकी मर्ज़ी मम्मी।”
फिर मैं और मम्मी स्कूटी से घर आए तो पापा पहले से ही आ चुके थे। दादी-पापा हॉल में बैठे थे। मम्मी सीधा किचन में चली गईं और मैं पापा-दादी के पास हॉल में बैठ गया।
रात में डिनर के बाद पापा ने कहा, “मैं पंद्रह दिन घर पे ही रहूँगा। कल से पंद्रह दिन ऑफिस नहीं जाऊँगा। घर से वर्क करूँगा।” तो मम्मी के चेहरे पे उदासी आ गई क्योंकि वे अंकल से नहीं मिल पाएँगी। फिर हम सोने चले गए।
दस दिन मम्मी और अंकल की मुलाकात नहीं हुई थी। वे सिर्फ़ फोन पर ही बातें करते थे।
अंकल भी मुझसे कई बार कहते, “बेटा, कुछ कर। तेरी मम्मी को घर से बाहर ला।” लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। लेकिन दस दिन बाद अंकल ने मुझसे कहा, “बेटा, एक मौका मिला है। तू साथ देना।”
मैं: “कैसे? मुझे बताइए।”
अंकल: “आज दिन में पता चल जाएगा।”
मैं: “मैं आपका साथ दूँगा।”
फिर दिन में आंटी (जिनकी बेटी की शादी हुई थी) हमारे घर आई हुई थीं। उनकी बेटी घर पे शादी के बाद आने वाली थी तो उन्होंने मम्मी को इनवाइट करने के लिए आई थीं।
उन्होंने पापा से कहा, “आप भाभी जी को हमारे घर भेज देना।” तो पापा ने कह दिया, “चली जाएगी।” फिर वे मम्मी को और मुझे अंकल के घर ले गईं जहाँ अंकल ने मुझे बाहर जाने का इशारा किया। मैं समझ गया और मम्मी से कहा, “मम्मी, मेरे एक दोस्त का कॉल आ रहा है और मैं उससे बात करके आता हूँ।” और रूम में चला गया। अंकल-मम्मी-आंटी हॉल में साइड पे बैठे थे और मैं रूम से देखने लगा।
आंटी ने मम्मी का हाथ पकड़के उठाया और मम्मी को अंकल की गोद में बैठा दिया। तो मम्मी ना-ना करने लगीं लेकिन मम्मी को अंकल की गोद में बैठा ही दिया। मम्मी शर्म के मारे मरी जा रही थीं और फिर अंकल ने भी मम्मी को पकड़ लिया और अपनी गोद में ही बैठाकर रखा।
फिर तीनों हँस-हँस कर बातें करने लगे और मम्मी बार-बार शर्मा रही थीं।
आंटी मज़ाक में मम्मी को “भाभी-भाभी” कह रही थीं।
आंटी: “तो भाभी, आप और भाई को ही सब अरेंजमेंट्स करने हैं जैसे शादी पे किए थे बस। और हाँ, वो भी कर लेना जो उसके बाद किया था। ऊपर रूम में सारी रात।”
और सब हँसने लगे।
और अंकल ने झट से मम्मी के होठों पे अपने होठ रख दिए और किस किया। आंटी जैसे एकदम से हँस पड़ीं। अंकल के इस हरकत पर मम्मी बहुत मुस्कुरा रही थीं।
मम्मी: “प्लीज़ दीदी, चुप हो जाओ।”
फिर मम्मी अंकल की गोद से उठ गईं और बगल में बैठ गईं तो अंकल ने मम्मी के कंधे पे अपना हाथ रख लिया और मम्मी को अपने से चिपका लिया। फिर मैं भी रूम से बाहर आया तो मुझे देखकर मम्मी अंकल से थोड़ी दूर खिसक गईं लेकिन अंकल ने मम्मी के कंधे से हाथ नहीं हटाया।
तो फिर आंटी ने कहा, “बेटा, मम्मी को लेकर ज़रूर आना।” और फिर थोड़ी देर बाद आंटी और मम्मी वापस हमारे घर आ गईं और फिर बातें करने के बाद आंटी चली गईं।
फिर दो दिन बाद हमें फिर से उनके घर जाना था।
दो दिन बाद पापा ने हमें जाने के लिए बोल दिया और मैं-मम्मी आंटी के घर चले गए। और साथ में अंकल नहीं गए। उन्हें कुछ काम था तो बोले, “तुम चलो। मैं ज़रूरी काम करके आता हूँ।”
उस वक्त पहले तो मम्मी ने साड़ी पहनी हुई थी। लेकिन जब हम वहाँ पे पहुँच गए तो आंटी ने उन्हें रूम में बुलाकर एक लहंगा पहनने को दे दिया। फिर मम्मी ने मुझसे कहा, “बेटा, तेरी आंटी लहंगा पहनने को बोल रही है। क्या करूँ?”
मैं: “मम्मी, आप लहंगा पहन लीजिए। ये आप पर अच्छा लगेगा।”
मम्मी: “ओके बेटा।” और फिर मम्मी वापस रूम में चली गईं। मम्मी ने वो पहना।
मम्मी तो उसमें एकदम ही हॉट लग रही थीं। चोली में मम्मी की चूचियाँ आधी नंगी ही दिख रही थीं। उन्होंने लहंगा कमर के नीचे पहना हुआ था। आंटी ने मम्मी को अच्छे से तैयार किया हुआ था। मम्मी का मेकअप भी बहुत ज़्यादा दिख रहा था। बाल जूड़े से बंधे हुए थे। इसलिए मम्मी की नंगी पीठ दिख रही थी। मम्मी का पेट चिकना और मुलायम दिख रहा था। मम्मी की नागिन जैसी कमर तो कहर ढा रही थी।
मम्मी की कमर में बंधा हुआ कमरबंद एक अलग ही सुंदर लग रहा था। मम्मी किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थीं। मम्मी की गहरी नाभि उनकी सुंदरता बढ़ा रही थी। मम्मी ने कुछ गहने भी पहने थे।
मम्मी जब बाहर आईं तब जो कुछ रिश्तेदार आए थे वे उन्हीं को निहार रहे थे।


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