21-08-2026, 06:19 PM
Update 4
मम्मी: “आआह्ह्ह… क्या कर रहे हो? पीछे नहीं।”
अंकल: “क्यों मेरी जान, डर लग रहा है क्या?”
मम्मी: “हाँ, बहुत दर्द होगा। मत करो प्लीज़। मैंने आपसे पहले भी कई बार कहा है—मेरी गाँड मत मारना। चुत को जमकर चोद लिया करो।”
मम्मी अपनी गाँड सीधी करके सीधी लेट गईं। लेकिन अंकल नहीं माने। वे मम्मी को फिर से उल्टा करने लगे।
मम्मी हँसती हुई मना करने लगीं और अंकल भी हँसते हुए मम्मी को उल्टा करने लगे। दोनों बहुत मस्ती कर रहे थे।
मम्मी: “आआह्ह… नहींईईईई…”
अंकल: “प्लीज़ वर्षा, कुछ दर्द नहीं होगा।”
मम्मी: “नहीं, मत करो।”
अंकल: “वर्षा, मान भी जाओ यार। अच्छा, धीरे-धीरे करूँगा बस।”
मम्मी ने अंकल को स्माइल करते हुए आँखें दिखाईं।
अंकल: “प्लीज़।”
मम्मी: “नहीं। आप मेरी चुत को गाँड समझकर मार लो।”
अंकल: “ठीक है वर्षा। घोड़ी बन जा। मैं तेरी चुत को गाँड समझकर मारूँगा। पर मुझे चुत में मज़ा आना चाहिए और तेरी चीखें भी सुननी हैं।”
मम्मी: “ओके राजा। आप मेरी चुत को ही गाँड समझकर फाड़ दो।”
फिर अंकल ने मम्मी को उल्टा करके दोनों हाथों से मम्मी की मुलायम गाँड को मसलने लगे। मम्मी की गाँड बहुत गोरी और चिकनी थी।
अंकल ने अपनी नाक मम्मी की गाँड के छेद पर घिसना शुरू कर दिया। मम्मी को इससे बहुत मज़ा आने लगा।
मम्मी: “उम्म्म… उफ्फ्फ…”
की आवाज़ें करने लगीं।
मम्मी: “नहीं प्लीज़… मत मारो मेरी गाँड।”
अंकल: “नहीं मारूँगा तेरी गाँड। पर इसकी खुशबू का आनंद तो लेने दे।”
अंकल ने अब अपनी जुबान मम्मी की गाँड के छेद में डाल दी।
मम्मी: “आआह्ह्ह… आआह्ह्ह… उफ्फ्… क्या कर रहे हो योगेश जी… आआह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…”
मम्मी को गुदगुदी हो रही थी और मम्मी गाँड को इधर-उधर हिला रही थीं। अंकल भी पूरा मन लगाकर मम्मी की गाँड चाट रहे थे और मम्मी की गाँड को रेडी कर रहे थे।
अब अंकल ने मम्मी की गाँड पर लंड सेट कर दिया और फिर मम्मी की गाँड पर थूक कर अपने लंड से थूक को गाँड पर मलने लगे।
तो मम्मी ने कहा, “नहीं… नहीं…”
तो अंकल बोले, “ठीक है, नहीं मार रहा। लेकिन चुत तो फाड़ने दे।” फिर अंकल ने मम्मी की चुत को और अपने लंड को कपड़े से साफ कर दिया और फिर अपना लंड को पीछे से गाँड से हटाकर चुत पर सेट कर दिया।
फिर अंकल बहुत ज़ोर का धक्का देकर लंड मम्मी की चुत के अंदर डालने लगे।
मम्मी: “आआआ… नहींईईईई…”
अंकल के लंड का टोपा मम्मी की चुत में चला गया। चुत सूखी होने के कारण उसमें लंड टाइट हो रहा था, इसलिए अंकल को बहुत मेहनत करनी पड़ी और मम्मी को भी बहुत दर्द होने लगा। मम्मी ने अंकल को बाहर निकालने के लिए बोला, लेकिन अंकल हँस रहे थे।
अब अंकल ज़ोर देकर लंड मम्मी की चुत में डालने लगे। अंकल का लंड मम्मी की चुत को चीरता हुआ अंदर जाने लगा।
मम्मी: “आआआह्ह्ह्ह… योगेश जी… आआआ… आआ… मेेेेे… राजाआआआ… जीीीी…”
अंकल: “उउउउफ्फ्फ… वर्षा।”
अंकल ने थोड़ा लंड बाहर खींचकर फिर से एक धक्का मारा और पूरा लंड मम्मी की चुत में डाल दिया। मम्मी दर्द के मारे चीख रही थीं।
मम्मी को बहुत दर्द हो रहा था। अंकल ने फिर अपना लंड बाहर निकाला और फिर एक ज़ोरदार धक्का मम्मी की चुत में मारा।
मम्मी: “आआआ… उउउईईई…”
अंकल का लंड मम्मी की चुत में भर चुका था। अंकल मम्मी की कमर पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारने लगे और मम्मी की चुत मारने लगे। अंकल लंड आगे-पीछे करके चुत मारे जा रहे थे और मम्मी “उह्ह्ह… आआह्ह्ह…” करने लगीं।
अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… वर्षा, बहुत मज़ा आ रहा है।” अंकल मम्मी की गाँड पर चाँटे मारने लगे। मम्मी अपने हाथ से अंकल को चाँटे मारने से रोकने लगीं। अंकल घपा-घप मम्मी की चुत में लंड डाल रहे थे।
फिर थोड़ी देर चुत मारने के बाद अंकल ने अपना लंड मम्मी की चुत से बाहर निकाल लिया। मम्मी “आआह्ह्ह… आआह्ह्ह…” करती हुई मुँह के बल लेट गईं।
मम्मी की चुत में गोल होल हो चुका था। अंकल कपड़े से मम्मी की चुत को साफ करने लगे और फिर अपने लंड को साफ किया। फिर मम्मी सीधी लेट गईं और अपनी दोनों टाँगें अंकल के सामने चौड़ी कर दीं।
मम्मी: “आआह्ह… योगेश जी… आआह्ह्ह…”
अंकल: “क्यों मेरी जान, मज़ा आया ना?”
मम्मी: “हम्म… आआह्ह्ह… उफ्फ्फ…”
मम्मी को थोड़ा दर्द हो रहा था, लेकिन मज़ा भी आया।
अंकल ने फिर से अपने लंड का टोपा मम्मी की चुत पर रखा और चुत पर थूक कर लंड से चुत पर मलने लगे और फिर धक्का देकर अपना लंड चुत में डाल दिए।
फिर अंकल अपनी गाँड आगे-पीछे करके मम्मी को चोदने लगे। मम्मी अंकल की चेस्ट पर हाथ घुमाती हुईं आवाज़ें करने लगीं। अंकल ने मम्मी के दोनों हाथों में अपने हाथ जकड़ लिए और मम्मी को चोदने लगे।
मम्मी नशे की धुन में सिसकारियाँ ले रही थीं। मम्मी ने अंकल को अपनी बाँहों में भर लिया। दो नंगे जिस्म एक होकर एक-दूसरे की प्यास बुझा रहे थे। मम्मी कभी अंकल की पीठ पर हाथ घुमातीं, तो कभी पीठ पर नाखून लगा देतीं।
अंकल मम्मी के रसीले होठों को चूसते हुए मम्मी को चोद रहे थे। अंकल कभी मम्मी के बूब्स को मसलते, तो कभी बूब्स को मुँह में डालकर चूसते।
अंकल: “आआह्ह… वर्षा, मज़ा आ रहा है।”
मम्मी: “उउउह्ह्ह… हाँह्ह्ह…”
अंकल: “उउउह्ह्ह्ह… मेरी जान… आआह्ह्ह्ह… वर्षा, यदि तेरा बेटा इसी रूम में होता तो उससे कहता—मैं देख… अंकित बेटा देख… देख कैसे चोद रहा हूँ तेरी मम्मी को।”
मम्मी के फेस पर हल्की मुस्कान आ गई थी।
अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… बहुत मज़ेदार औरत है तेरी मम्मी तो।”
मम्मी: “वो तो आप कहते ही होंगे उससे—मैं तेरी मम्मी को मस्त चोदता हूँ। जब वो मुझे आपसे चुदवा सकता है तो फिर आपसे ज़रूर पूछता भी होगा—कैसे चोदते हो मेरी मम्मी को।”
अंकल: “तू मस्त रांड है मेरी। पर उसने आज तक नहीं पूछा कैसे चोदते हो। पर इतना ज़रूर पूछता है—क्या मेरी माँ की इच्छा पूरी हुई?”
मम्मी: “ओओह्ह्ह… इतना प्यार करता है मेरा बेटा मुझसे।”
अंकल: “हाँ, वो तुझसे बहुत प्यार करता है। वो तेरी चुदाई मेरे लंड से करवाने के लिए कुछ भी कर सकता है।” और फिर अंकल मम्मी को गंदे-गंदे कमेंट्स करके चोदे जा रहे थे।
मम्मी भी अपनी गाँड उछाल-उछाल कर अंकल का साथ दे रही थीं। मम्मी की चुत से बहुत पानी निकल रहा था, जिससे अंकल का लंड गीला हो चुका था।
लंड गीला होने की वजह से फच-फच की आवाज़ें आने लगी थीं। अंकल अब लंबे-लंबे कड़क शॉट मारने लगे थे। मम्मी के बूब्स ऊपर-नीचे होकर हिलने लगे थे और अंकल मम्मी को ज़ालिम दरिंदे की तरह चोद रहे थे।
मम्मी: “आआह्ह… आआह्ह… उफ्फ्…”
अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… वर्षा…”
फिर अचानक अंकल रुक गए और मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया और फिर ज़बरदस्त दो-तीन धक्के मारे। ऐसा लग रहा था जैसे अंकल खल्लास हो गए हों और अपने लंड का वीर्य मम्मी की चुत के अंदर छोड़ने लगे हों।
मम्मी भी लंबी साँसें भरती हुईं अंकल से लिपट गई थीं। फिर अंकल मम्मी के ऊपर ही लेट गए और तब तक नहीं उठे जब तक अपने लंड के पानी की एक-एक बूँद मम्मी की चुत में चली न जाए।
दोनों बिल्कुल ठंडे होकर पड़े थे। फिर अंकल मम्मी की चुत से लंड निकालकर मम्मी के बगल में लेट गए। अंकल का लंड वीर्य और पानी से चमक रहा था। मम्मी की चुत के अंदर पिंक शेप गोल हो चुकी थी और उसमें से अंकल का काफी सारा वीर्य निकल रहा था।
फिर मम्मी कपड़े से अपनी चुत साफ करने लगीं। चुत से अंकल का सफेद वीर्य बाहर आ रहा था और मम्मी उसी को साफ करने लगीं। मम्मी की चुत का भोंसड़ा बन चुका था।
फिर मम्मी ने अंकल के लंड को साफ किया। अंकल उठकर बाथरूम में चले गए और फिर वापस आकर पलंग पर लेट गए। मम्मी गंदे कपड़े को लेकर बाथरूम में चली गईं और नंगी ही वापस आईं। वापस आकर मम्मी अंकल के ऊपर लेट गईं। अंकल ने मम्मी को अपनी बाँहों में ले लिया।
अंकल: “मज़ा आया?”
मम्मी: “हम्म… और आपको?”
अंकल: “बहुत। तुमने तो मुझे खुश कर दिया है। मेरा जी तो चाहता है कि तुम उस नामर्द को छोड़कर मेरे पास आ जाओ।”
मम्मी (हँसती हुई): “नहीं।”
अंकल: “क्यों, मेरे साथ रहना नहीं चाहोगी?”
मम्मी: “चाहती हूँ, लेकिन अब इस उम्र में नहीं।”
अंकल: “अंकित को भी एक बाप का प्यार दूँगा।”
ये कहकर अंकल हँसने लगे और मम्मी भी हँसने लगीं।
अब अंकल और मम्मी दोनों संतुष्ट होकर बिस्तर पर लेटे हुए बातें कर रहे थे। शाम के पाँच बज चुके थे।
मम्मी ने कहा, “अब मुझे जाना चाहिए। अंकित को बुला लेती हूँ।”
अंकल: “नहीं। उसने कहा था आठ बजे तक मम्मी को चोदना। अभी तो पाँच बजे हैं। तीन घंटे बाकी हैं। तुझे तीन घंटे और चोदूँगा। वो खुद आठ बजे तुझे लेने आ जाएगा। उसे कॉल करने की ज़रूरत नहीं है।”
मम्मी: “कॉल तो करूँगी। और उसने कहा है तो चोदिए आप मुझे पूरे आठ बजे तक।”
अंकल: “कर लेना।”
फिर मैं वहाँ से चुपचाप निकल आया और बाहर से अपनी स्कूटी निकालकर पार्क में आ गया क्योंकि मैंने दादी को बोल दिया था कि मैं मम्मी को लेकर आठ बजे आऊँगा। अभी तो पाँच बजे थे, तीन घंटे बाकी थे।
फिर मैं एक पार्क में चला गया क्योंकि आठ बजे से पहले और मम्मी के बिना घर जाता तो दादी बोलतीं—“इतना जल्दी कैसे आया और तेरी मम्मी कहाँ रह गई?” इसलिए मैं घर नहीं गया। अभी तो पाँच बजे थे। फिर मैं तीन घंटे पार्क में बैठा रहा और रात को आठ बजे मम्मी का कॉल आया।
मम्मी: “बेटा, मैं तेरे कहने से योगेश जी घर आ गई थी। तू योगेश जी घर आ जा और मैं तेरे साथ ही घर चलूँगी। नहीं तो तेरी दादी मुझे मार डालेगी।”
मैं: “ओके मम्मी। मैं अभी आता हूँ। तीस मिनट में।”
मम्मी: “हाँ बेटा, आ जाना। और बेटे, पीछे वाले गेट से आना।”
मैं: “जी मम्मी।”
फिर मैं अंकल के घर गया तो पीछे के रास्ते से और मम्मी को कॉल किया।
मैं: “मम्मी, मैं बाहर खड़ा हूँ।”
मम्मी: “बेटा, अंदर आ जा। गेट लॉक नहीं है।”
फिर मैं गेट को खोलकर अंदर गया।
मम्मी: “आआह्ह्ह… क्या कर रहे हो? पीछे नहीं।”
अंकल: “क्यों मेरी जान, डर लग रहा है क्या?”
मम्मी: “हाँ, बहुत दर्द होगा। मत करो प्लीज़। मैंने आपसे पहले भी कई बार कहा है—मेरी गाँड मत मारना। चुत को जमकर चोद लिया करो।”
मम्मी अपनी गाँड सीधी करके सीधी लेट गईं। लेकिन अंकल नहीं माने। वे मम्मी को फिर से उल्टा करने लगे।
मम्मी हँसती हुई मना करने लगीं और अंकल भी हँसते हुए मम्मी को उल्टा करने लगे। दोनों बहुत मस्ती कर रहे थे।
मम्मी: “आआह्ह… नहींईईईई…”
अंकल: “प्लीज़ वर्षा, कुछ दर्द नहीं होगा।”
मम्मी: “नहीं, मत करो।”
अंकल: “वर्षा, मान भी जाओ यार। अच्छा, धीरे-धीरे करूँगा बस।”
मम्मी ने अंकल को स्माइल करते हुए आँखें दिखाईं।
अंकल: “प्लीज़।”
मम्मी: “नहीं। आप मेरी चुत को गाँड समझकर मार लो।”
अंकल: “ठीक है वर्षा। घोड़ी बन जा। मैं तेरी चुत को गाँड समझकर मारूँगा। पर मुझे चुत में मज़ा आना चाहिए और तेरी चीखें भी सुननी हैं।”
मम्मी: “ओके राजा। आप मेरी चुत को ही गाँड समझकर फाड़ दो।”
फिर अंकल ने मम्मी को उल्टा करके दोनों हाथों से मम्मी की मुलायम गाँड को मसलने लगे। मम्मी की गाँड बहुत गोरी और चिकनी थी।
अंकल ने अपनी नाक मम्मी की गाँड के छेद पर घिसना शुरू कर दिया। मम्मी को इससे बहुत मज़ा आने लगा।
मम्मी: “उम्म्म… उफ्फ्फ…”
की आवाज़ें करने लगीं।
मम्मी: “नहीं प्लीज़… मत मारो मेरी गाँड।”
अंकल: “नहीं मारूँगा तेरी गाँड। पर इसकी खुशबू का आनंद तो लेने दे।”
अंकल ने अब अपनी जुबान मम्मी की गाँड के छेद में डाल दी।
मम्मी: “आआह्ह्ह… आआह्ह्ह… उफ्फ्… क्या कर रहे हो योगेश जी… आआह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…”
मम्मी को गुदगुदी हो रही थी और मम्मी गाँड को इधर-उधर हिला रही थीं। अंकल भी पूरा मन लगाकर मम्मी की गाँड चाट रहे थे और मम्मी की गाँड को रेडी कर रहे थे।
अब अंकल ने मम्मी की गाँड पर लंड सेट कर दिया और फिर मम्मी की गाँड पर थूक कर अपने लंड से थूक को गाँड पर मलने लगे।
तो मम्मी ने कहा, “नहीं… नहीं…”
तो अंकल बोले, “ठीक है, नहीं मार रहा। लेकिन चुत तो फाड़ने दे।” फिर अंकल ने मम्मी की चुत को और अपने लंड को कपड़े से साफ कर दिया और फिर अपना लंड को पीछे से गाँड से हटाकर चुत पर सेट कर दिया।
फिर अंकल बहुत ज़ोर का धक्का देकर लंड मम्मी की चुत के अंदर डालने लगे।
मम्मी: “आआआ… नहींईईईई…”
अंकल के लंड का टोपा मम्मी की चुत में चला गया। चुत सूखी होने के कारण उसमें लंड टाइट हो रहा था, इसलिए अंकल को बहुत मेहनत करनी पड़ी और मम्मी को भी बहुत दर्द होने लगा। मम्मी ने अंकल को बाहर निकालने के लिए बोला, लेकिन अंकल हँस रहे थे।
अब अंकल ज़ोर देकर लंड मम्मी की चुत में डालने लगे। अंकल का लंड मम्मी की चुत को चीरता हुआ अंदर जाने लगा।
मम्मी: “आआआह्ह्ह्ह… योगेश जी… आआआ… आआ… मेेेेे… राजाआआआ… जीीीी…”
अंकल: “उउउउफ्फ्फ… वर्षा।”
अंकल ने थोड़ा लंड बाहर खींचकर फिर से एक धक्का मारा और पूरा लंड मम्मी की चुत में डाल दिया। मम्मी दर्द के मारे चीख रही थीं।
मम्मी को बहुत दर्द हो रहा था। अंकल ने फिर अपना लंड बाहर निकाला और फिर एक ज़ोरदार धक्का मम्मी की चुत में मारा।
मम्मी: “आआआ… उउउईईई…”
अंकल का लंड मम्मी की चुत में भर चुका था। अंकल मम्मी की कमर पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारने लगे और मम्मी की चुत मारने लगे। अंकल लंड आगे-पीछे करके चुत मारे जा रहे थे और मम्मी “उह्ह्ह… आआह्ह्ह…” करने लगीं।
अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… वर्षा, बहुत मज़ा आ रहा है।” अंकल मम्मी की गाँड पर चाँटे मारने लगे। मम्मी अपने हाथ से अंकल को चाँटे मारने से रोकने लगीं। अंकल घपा-घप मम्मी की चुत में लंड डाल रहे थे।
फिर थोड़ी देर चुत मारने के बाद अंकल ने अपना लंड मम्मी की चुत से बाहर निकाल लिया। मम्मी “आआह्ह्ह… आआह्ह्ह…” करती हुई मुँह के बल लेट गईं।
मम्मी की चुत में गोल होल हो चुका था। अंकल कपड़े से मम्मी की चुत को साफ करने लगे और फिर अपने लंड को साफ किया। फिर मम्मी सीधी लेट गईं और अपनी दोनों टाँगें अंकल के सामने चौड़ी कर दीं।
मम्मी: “आआह्ह… योगेश जी… आआह्ह्ह…”
अंकल: “क्यों मेरी जान, मज़ा आया ना?”
मम्मी: “हम्म… आआह्ह्ह… उफ्फ्फ…”
मम्मी को थोड़ा दर्द हो रहा था, लेकिन मज़ा भी आया।
अंकल ने फिर से अपने लंड का टोपा मम्मी की चुत पर रखा और चुत पर थूक कर लंड से चुत पर मलने लगे और फिर धक्का देकर अपना लंड चुत में डाल दिए।
फिर अंकल अपनी गाँड आगे-पीछे करके मम्मी को चोदने लगे। मम्मी अंकल की चेस्ट पर हाथ घुमाती हुईं आवाज़ें करने लगीं। अंकल ने मम्मी के दोनों हाथों में अपने हाथ जकड़ लिए और मम्मी को चोदने लगे।
मम्मी नशे की धुन में सिसकारियाँ ले रही थीं। मम्मी ने अंकल को अपनी बाँहों में भर लिया। दो नंगे जिस्म एक होकर एक-दूसरे की प्यास बुझा रहे थे। मम्मी कभी अंकल की पीठ पर हाथ घुमातीं, तो कभी पीठ पर नाखून लगा देतीं।
अंकल मम्मी के रसीले होठों को चूसते हुए मम्मी को चोद रहे थे। अंकल कभी मम्मी के बूब्स को मसलते, तो कभी बूब्स को मुँह में डालकर चूसते।
अंकल: “आआह्ह… वर्षा, मज़ा आ रहा है।”
मम्मी: “उउउह्ह्ह… हाँह्ह्ह…”
अंकल: “उउउह्ह्ह्ह… मेरी जान… आआह्ह्ह्ह… वर्षा, यदि तेरा बेटा इसी रूम में होता तो उससे कहता—मैं देख… अंकित बेटा देख… देख कैसे चोद रहा हूँ तेरी मम्मी को।”
मम्मी के फेस पर हल्की मुस्कान आ गई थी।
अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… बहुत मज़ेदार औरत है तेरी मम्मी तो।”
मम्मी: “वो तो आप कहते ही होंगे उससे—मैं तेरी मम्मी को मस्त चोदता हूँ। जब वो मुझे आपसे चुदवा सकता है तो फिर आपसे ज़रूर पूछता भी होगा—कैसे चोदते हो मेरी मम्मी को।”
अंकल: “तू मस्त रांड है मेरी। पर उसने आज तक नहीं पूछा कैसे चोदते हो। पर इतना ज़रूर पूछता है—क्या मेरी माँ की इच्छा पूरी हुई?”
मम्मी: “ओओह्ह्ह… इतना प्यार करता है मेरा बेटा मुझसे।”
अंकल: “हाँ, वो तुझसे बहुत प्यार करता है। वो तेरी चुदाई मेरे लंड से करवाने के लिए कुछ भी कर सकता है।” और फिर अंकल मम्मी को गंदे-गंदे कमेंट्स करके चोदे जा रहे थे।
मम्मी भी अपनी गाँड उछाल-उछाल कर अंकल का साथ दे रही थीं। मम्मी की चुत से बहुत पानी निकल रहा था, जिससे अंकल का लंड गीला हो चुका था।
लंड गीला होने की वजह से फच-फच की आवाज़ें आने लगी थीं। अंकल अब लंबे-लंबे कड़क शॉट मारने लगे थे। मम्मी के बूब्स ऊपर-नीचे होकर हिलने लगे थे और अंकल मम्मी को ज़ालिम दरिंदे की तरह चोद रहे थे।
मम्मी: “आआह्ह… आआह्ह… उफ्फ्…”
अंकल: “आआआह्ह्ह्ह… वर्षा…”
फिर अचानक अंकल रुक गए और मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया और फिर ज़बरदस्त दो-तीन धक्के मारे। ऐसा लग रहा था जैसे अंकल खल्लास हो गए हों और अपने लंड का वीर्य मम्मी की चुत के अंदर छोड़ने लगे हों।
मम्मी भी लंबी साँसें भरती हुईं अंकल से लिपट गई थीं। फिर अंकल मम्मी के ऊपर ही लेट गए और तब तक नहीं उठे जब तक अपने लंड के पानी की एक-एक बूँद मम्मी की चुत में चली न जाए।
दोनों बिल्कुल ठंडे होकर पड़े थे। फिर अंकल मम्मी की चुत से लंड निकालकर मम्मी के बगल में लेट गए। अंकल का लंड वीर्य और पानी से चमक रहा था। मम्मी की चुत के अंदर पिंक शेप गोल हो चुकी थी और उसमें से अंकल का काफी सारा वीर्य निकल रहा था।
फिर मम्मी कपड़े से अपनी चुत साफ करने लगीं। चुत से अंकल का सफेद वीर्य बाहर आ रहा था और मम्मी उसी को साफ करने लगीं। मम्मी की चुत का भोंसड़ा बन चुका था।
फिर मम्मी ने अंकल के लंड को साफ किया। अंकल उठकर बाथरूम में चले गए और फिर वापस आकर पलंग पर लेट गए। मम्मी गंदे कपड़े को लेकर बाथरूम में चली गईं और नंगी ही वापस आईं। वापस आकर मम्मी अंकल के ऊपर लेट गईं। अंकल ने मम्मी को अपनी बाँहों में ले लिया।
अंकल: “मज़ा आया?”
मम्मी: “हम्म… और आपको?”
अंकल: “बहुत। तुमने तो मुझे खुश कर दिया है। मेरा जी तो चाहता है कि तुम उस नामर्द को छोड़कर मेरे पास आ जाओ।”
मम्मी (हँसती हुई): “नहीं।”
अंकल: “क्यों, मेरे साथ रहना नहीं चाहोगी?”
मम्मी: “चाहती हूँ, लेकिन अब इस उम्र में नहीं।”
अंकल: “अंकित को भी एक बाप का प्यार दूँगा।”
ये कहकर अंकल हँसने लगे और मम्मी भी हँसने लगीं।
अब अंकल और मम्मी दोनों संतुष्ट होकर बिस्तर पर लेटे हुए बातें कर रहे थे। शाम के पाँच बज चुके थे।
मम्मी ने कहा, “अब मुझे जाना चाहिए। अंकित को बुला लेती हूँ।”
अंकल: “नहीं। उसने कहा था आठ बजे तक मम्मी को चोदना। अभी तो पाँच बजे हैं। तीन घंटे बाकी हैं। तुझे तीन घंटे और चोदूँगा। वो खुद आठ बजे तुझे लेने आ जाएगा। उसे कॉल करने की ज़रूरत नहीं है।”
मम्मी: “कॉल तो करूँगी। और उसने कहा है तो चोदिए आप मुझे पूरे आठ बजे तक।”
अंकल: “कर लेना।”
फिर मैं वहाँ से चुपचाप निकल आया और बाहर से अपनी स्कूटी निकालकर पार्क में आ गया क्योंकि मैंने दादी को बोल दिया था कि मैं मम्मी को लेकर आठ बजे आऊँगा। अभी तो पाँच बजे थे, तीन घंटे बाकी थे।
फिर मैं एक पार्क में चला गया क्योंकि आठ बजे से पहले और मम्मी के बिना घर जाता तो दादी बोलतीं—“इतना जल्दी कैसे आया और तेरी मम्मी कहाँ रह गई?” इसलिए मैं घर नहीं गया। अभी तो पाँच बजे थे। फिर मैं तीन घंटे पार्क में बैठा रहा और रात को आठ बजे मम्मी का कॉल आया।
मम्मी: “बेटा, मैं तेरे कहने से योगेश जी घर आ गई थी। तू योगेश जी घर आ जा और मैं तेरे साथ ही घर चलूँगी। नहीं तो तेरी दादी मुझे मार डालेगी।”
मैं: “ओके मम्मी। मैं अभी आता हूँ। तीस मिनट में।”
मम्मी: “हाँ बेटा, आ जाना। और बेटे, पीछे वाले गेट से आना।”
मैं: “जी मम्मी।”
फिर मैं अंकल के घर गया तो पीछे के रास्ते से और मम्मी को कॉल किया।
मैं: “मम्मी, मैं बाहर खड़ा हूँ।”
मम्मी: “बेटा, अंदर आ जा। गेट लॉक नहीं है।”
फिर मैं गेट को खोलकर अंदर गया।


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