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Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
#61
मेरे मन में मम्मी के लिए जो नज़रिया बना, वह किसी इत्तेफाक का नतीजा नहीं था। वह बहुत ही शातिर और चालाक थीं। मुझे याद है, कई बार जब मैं रात के सन्नाटे में या दरवाज़े की हल्की सी दरार से झाँकता था, तो मम्मी और पापा के बीच चल रहे शारीरिक संबंध केवल एक पति पत्नी का मिलन नहीं लगते थे। मम्मी जानबूझकर अपनी आवाज़ें और अपनी हरकतें इस तरह करती थीं कि मुझे यह साफ़ महसूस हो सके कि उनकी कामुकता का स्तर क्या है।

वह बहुत चालाकी से खुद को एक ऐसी औरत की तरह पेश करती थीं जो अपनी वासना और अपनी देह के सुख के लिए बेताब है। जब पापा उनके करीब आते, तो मम्मी का शरीर जिस तरह से प्रतिक्रिया करता, उनकी सिसकियाँ जिस तरह से कमरे की दीवारों से टकरातीं, वह सब मुझे यह बताने के लिए काफी था कि मेरी माँ केवल एक घरेलू महिला नहीं हैं वह एक बेहद कामुक स्त्री हैं।

वह जानती थीं कि मैं कहीं न कहीं देख रहा हूँ। वह पापा के साथ संबंध बनाते समय अपनी कमर को एक खास तरीके से मरोड़ती थीं या अपने शरीर को ऐसे पेश करती थीं जैसे वह अपनी कामुकता का प्रदर्शन कर रही हों। वह चाहती थीं कि मेरे छोटे से दिमाग में उनकी एक ऐसी छवि छप जाए जिसे मैं चाहकर भी भूल न पाऊँ। वह मुझे यह एहसास दिलाना चाहती थीं कि उनके भीतर एक ऐसी आग दबी है जो सिर्फ महसूस की जा सकती है। और उन्होंने यह काम इतनी सफाई से किया कि मुझे लगा जैसे यह सब अनजाने में हो रहा है, जबकि असल में वह मुझे मानसिक रूप से अपनी ओर खींच रही थीं।

***पापा के जाने में अब बस कुछ ही दिन बचे थे, और मम्मी ने अपना खेल अब अगले स्तर पर पहुँचा दिया था। अब वह केवल दरवाज़े की दरार से नहीं, बल्कि घर के चलते फिरते माहौल में मुझे अपनी देह का प्रदर्शन करने लगी थीं। वह जानबूझकर ऐसी स्थितियाँ पैदा करतीं कि मेरी नज़रें उनसे हटने का नाम ही न लें।

सुबह के समय जब मैं डाइनिंग टेबल पर नाश्ता कर रहा होता, तो मम्मी रसोई से निकलते समय जानबूझकर ऐसे कपड़े पहनतीं जो उनके शरीर के हर उभार को साफ़ साफ़ बयां कर रहे हों। कभी वह बहुत ही पतली और हल्की सिल्क की साड़ी पहनतीं, जो उनके शरीर से ऐसे चिपक जाती थी जैसे कि वह कुछ पहन ही न रही हों। जब वह झुककर सामान उठातीं या चाय छानने के लिए झुकतीं, तो वह जानबूझकर अपनी कमर को इस तरह मोड़तीं कि उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक जाए और उनकी कामुक देह का एक हिस्सा मेरी नज़रों के सामने आ जाए।

मुझे पता था कि वह यह सब जानबूझकर कर रही हैं। जब भी मेरी नज़रें उनके शरीर पर ठहरतीं, वह अपनी नज़रें झुकातीं या फिर एक ऐसी शरारती मुस्कान देतीं जिसे मैं समझ नहीं पाता था क्या वह मुझे शर्मिंदा कर रही थीं या मुझे उकसा रही थीं?

एक शाम, जब मैं सोफे पर बैठा किताब पढ़ रहा था, मम्मी कमरे में आईं। उन्होंने बहुत ही छोटा और ढीला सा गाउन पहना हुआ था।  वह सोफे के पास आकर रुकीं और ऐसे बैठ गईं कि उनके पैरों का एक हिस्सा मेरे बहुत करीब था। वह अ हाथों की उंगलियों से अपने बालों को पीछे हटा रही थीं, और उस प्रक्रिया में उनका गाउन उनके कंधों से थोड़ा नीचे सरक गया। उनकी त्वचा की चमक और उनके शरीर का वह नज़ारा इतना तीव्र था कि मेरी सांसें थम गईं। वह मुझे देख नहीं रही थीं, लेकिन उनकी हर हरकत मुझे यह बता रही थी कि वह जानती हैं कि मैं उन्हें देख रहा हूँ और वह मुझे अपनी वासना की आग में झोंकना चाहती हैं।

"एक दिन मैं और अंकल अकेले थोड़ा घूमने निकले थे। टहलते हुए अंकल मुझसे पूछने लगे, 'बेटा, तुम आजकल कुछ परेशान से रहते हो क्या? क्या मैं तुम्हारी परेशानी का कारण जान सकता हूँ?' मैंने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और चुप रहा। मेरे कुछ भी रिप्लाई न करने पर, उनका पूछने का तरीका थोड़ा बदल गया और वो कुछ अलग ही अंदाज़ में मुझसे बातें करने लगे।"
अंकल मुझसे कई तरह की बातें पूछ रहे थे, कोशिश कर रहे थे कि मेरी चुप्पी का कारण समझ सकें, पर हर बार मेरा जवाब सिर्फ 'ना' ही निकलता। वह बार बार अलग अलग वजहें तलाश रहे थे, पर नतीजा कुछ नहीं निकल रहा था। फिर धीरे धीरे, माहौल बदलने लगा और वह सीधे उस मुद्दे पर आ गए जिसे सुनकर मेरी धड़कनें तेज हो रही थीं।

उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए बहुत ही धीमी और गंभीर आवाज़ में पूछा, "रवि, क्या तुम्हारी इस परेशानी की वजह मेरा और तुम्हारी मम्मी का वह रिश्ता तो नहीं है? मेरे न कहने पर वो बोले... क्या तुम्हें उससे कोई एतराज़ नहीं है?"

मैंने बिना झिझके कहा, "हाँ।"

सन्नाटे को तोड़ते हुए उन्होंने अगला सवाल किया, "क्या तुम्हें हमारा दोनों का इस तरह मिलना अच्छा लगता है?"

मैंने फिर से वही कहा, "हाँ।"

उनकी आवाज़ में अब एक अलग तरह की गहराई थी जब उन्होंने पूछा, "क्या तुम चाहते हो कि हमारा मिलन तुम्हारे सामने  हो?"

मेरा जवाब तुरंत था, "हाँ।"

बात अब और भी गहरी होती जा रही थी। उन्होंने पूछा, "क्या तुमने पापा और मम्मी को भी देखा है?"

"हाँ," मैंने जवाब दिया।

"और उन दोनों को देख कर भी तुम्हें अच्छा लगा?" उन्होंने मेरी प्रतिक्रिया टटोलने के लिए पूछा।

"हाँ," मैंने कहा।

अंकल ने अब सीधा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल किया, "क्या तुम्हें मम्मी अच्छी लगती हैं?"

"हाँ," मैंने बिना पलक झपकाए कहा।

और फिर उन्होंने वह सवाल पूछा जिसका मुझे इंतज़ार था, "क्या तुम्हें मम्मी को नंगा देखना अच्छा लगता है?"

मैंने अपनी बात पूरी की, "हाँ।

अंकल के आखिरी सवाल ने जैसे मेरे पूरे वजूद को हिला कर रख दिया। वह सवाल जो मेरे दिमाग के सबसे अंधेरे कोने में दबा हुआ था, आज अचानक मेरे सामने खड़ा था। उन्होंने मेरी आँखों में आँखें डालकर बहुत ही भारी और सीधे लहजे में पूछा, "क्या तुम भी मम्मी की लेना चाहते हो?"

उस एक सवाल ने मेरे अंदर जैसे विस्फोट कर दिया। मैं पूरी तरह से कश्मकश में पड़ गया। मेरा शरीर सुन्न पड़ गया और दिल इतनी ज़ोर से धड़कने लगा । मेरे अंदर एक भयानक युद्ध चल रहा था। मेरा जवाब 'हाँ' था, मेरा मन चीख चीख कर कह रहा था कि 'हाँ, मैं चाहता हूँ', लेकिन मेरे गले से शब्द नहीं निकल रहे थे।

मैं सोच में पड़ गया कि मैं यह कैसे कहूँ? यह इतना बड़ा और इतना 'Taboo' सच था। मैं डर रहा था कि अगर मैंने सीधे 'हाँ' कह दिया, तो शायद यह सब खत्म हो जाए या फिर मैं बहुत ज़्यादा आगे निकल जाऊँ। मैं चाहता था कि अंकल खुद मेरी इस इच्छा को समझें, वह खुद मेरे प्यार और मेरी तड़प को पहचानें और बड़ी ही कोमलता से, बड़े ही प्यार से इस बात को मेरे मुँह से निकलवा लें। मैं चाहता था कि वह मुझे मजबूर न करें, बल्कि मेरी इस दबी हुई चाहत को खुद महसूस करके मुझसे यह कबूल करवाएं।
मेरे चेहरे पर फैली उस कश्मकश और मेरी खामोशी को अंकल ने तुरंत भांप लिया। उन्हें समझ आ गया था कि मेरा जवाब 'हाँ' ही है, बस मैं उसे शब्दों में पिरोने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूँ। कमरे में एक भारी सन्नाटा पसर गया था, जिसमें सिर्फ मेरी तेज़ होती सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

अंकल ने अपना हाथ मेरे सिर पर रखा और बहुत ही धीमे, सुकून देने वाले लहजे में मेरे पास आकर बोले, "रवि... तुम चुप क्यों हो गए? क्या तुम डर रहे हो? मुझसे डरो मत बेटा। मैं यहाँ तुम्हें जज करने के लिए नहीं हूँ। मैं बस तुम्हारी सच्चाई जानना चाहता हूँ।"

उनकी आवाज़ में एक अजीब सा जादू था, जो मेरी घबराहट को कम कर रहा था। उन्होंने थोड़ा और झुकते हुए, लगभग मेरे कान के पास आकर बहुत ही कोमलता से पूछा, "क्या तुम्हारे मन में भी वही इच्छा है जो मेरे मन में है? क्या तुम भी मम्मी को उसी तरह महसूस करना चाहते हो जैसे मैं करता हूँ? क्या तुम भी उनके साथ उस सुख को बाँटना चाहते हो?"

उनकी इस बात ने मेरे अंदर की सारी झिझक को जैसे पिघला दिया। उनकी आवाज़ का वह प्यार भरा और गहरा अंदाज़ मुझे सच बोलने के लिए उकसा रहा था। मैं बस उनकी आँखों में देख रहा था, जहाँ कोई नफरत नहीं बल्कि एक तरह की स्वीकृति थी। मेरा गला अभी भी सूखा हुआ था, लेकिन अब मेरा मन उस 'हाँ' को कहने के लिए बेताब था जिसे मैं कब से दबाए बैठा था।
अंकल के उन शब्दों ने जैसे मेरे अंदर के बांध को तोड़ दिया। उनकी आवाज़ में जो भरोसा और जो अपनापन था, उसने मेरी सारी हिचकिचाहट को राख कर दिया। उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बहुत ही प्यार से, लगभग फुसफुसाते हुए कहा, "बोलो बेटा... डरो मत। मैं यहाँ तुम्हारा दुश्मन नहीं हूँ। अगर तुम्हारे मन में कोई ऐसी इच्छा है जो तुम्हें बेचैन कर रही है, तो मुझे बताओ। मैं वादा करता हूँ कि मैं तुम्हारी उस इच्छा को पूरी करवाने की पूरी कोशिश करूँगा।"

उनके 'कोशिश करूँगा' शब्द मेरे कानों में किसी संगीत की तरह गूँज रहे थे। उस एक वाक्य ने मुझे वह सुरक्षा दे दी जिसकी मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी। अब मुझे डर नहीं लग रहा था कि मैं कुछ गलत कह रहा हूँ या मैं कुछ गलत सोच रहा हूँ। अंकल ने मुझे एक ऐसी अनुमति दे दी थी जिसका सपना मैं अपनी बंद आँखों से देख रहा था।

मेरे अंदर एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। मेरा गला अभी भी थोड़ा भारी था, लेकिन अब वह डर की वजह से नहीं, बल्कि उस उत्तेजना और उत्साह की वजह से था जो मेरे पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ रहा था। मैं उनकी आँखों में देख रहा था, जहाँ अब मुझे सिर्फ एक मार्गदर्शक और एक साथी नज़र आ रहा था। अब बस उस एक शब्द की देरी थी वह 'हाँ' जो मेरे दिल के सबसे करीब था और जिसे अब मैं बिना किसी झिझक के उनके सामने रखने के लिए तैयार था।

अंकल के वादे ने मेरे अंदर की आग को तो भड़का दिया था, लेकिन साथ ही मेरे दिमाग में सवालों का एक तूफ़ान भी खड़ा कर दिया था।
मैंने अपनी नज़रें झुका लीं और एक बहुत ही भारी और कांपती हुई आवाज़ में आखिरकार अपने दिल का हाल कह ही दिया।

"हाँ अंकल... मैं भी मम्मी के साथ... मैं भी उनके साथ वैसा ही करना चाहता हूँ जैसा आप करते हैं।"

जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो। मैंने तुरंत अपनी आँखें बंद कर लीं और डरते हुए आगे पूछा, "पर अंकल... क्या यह सही है? क्या मम्मी मान जाएँगी? क्या उन्हें बुरा नहीं लगेगा? और सबसे बड़ी बात... क्या यह पाप नहीं होगा? क्या मैं कोई बहुत बड़ा गुनाह तो नहीं कर रहा?"

मेरा गला रुँध रहा था। मैं अंकल के जवाब का इंतज़ार कर रहा था, लेकिन मेरा पूरा वजूद उस डर से कांप रहा था कि कहीं मेरा यह सच मुझे एक अपराधी न बना दे। मैं चाहकर भी अपनी इस तीव्र इच्छा को अपनी नैतिकता के बोझ से अलग नहीं कर पा रहा था। मैं बस उनके मुँह से यह सुनना चाहता था कि जो मैं महसूस कर रहा हूँ, वह गलत नहीं है।
मेरी आवाज़ में जो डर और अपराधबोध था, उसे देखकर अंकल ने मुझे और भी करीब खींच लिया। उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर और मजबूती से रखा, जैसे वह मुझे गिरने से बचा रहे हों। फिर उन्होंने बहुत ही कोमलता से मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम लिया और मेरी आँखों में झाँकते हुए बोले। उनकी आवाज़ में एक ऐसी गहराई और सुकून था कि मेरी कांपती हुई धड़कनें धीरे धीरे शांत होने लगीं।

उन्होंने मुझे समझाना शुरू किया कि जिसे मैं 'पाप' समझ रहा हूँ, वह असल में गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि पाप तब होता है जब हम किसी का दिल दुखाते हैं, लेकिन जो मैं महसूस कर रहा हूँ, वह तो कुदरत का एक स्वाभाविक आकर्षण है। उनकी बातों ने मेरे दिमाग में चल रहे उस नैतिक युद्ध को जैसे थाम ही दिया।

जब उन्होंने मम्मी के बारे में बात की, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि मम्मी को बुरा नहीं लगेगा, बल्कि उन्हें एक औरत होने का असली अहसास होगा। उन्होंने मुझे यकीन दिलाया कि जब उन्हें पता चलेगा कि उनका अपना बेटा उन्हें कितनी शिद्दत से चाहता है, तो उन्हें गर्व महसूस होगा, न कि शर्म। अंकल की उन मखमली बातों ने मेरे मन के सारे संशय और डर को जैसे पिघला दिया। अब मुझे वह 'पाप' जैसा बोझ महसूस नहीं हो रहा था, बल्कि एक ऐसी नई और तीव्र चाहत महसूस हो रही थी जो अब मेरे पूरे वजूद पर छा गई थी। उनके शब्दों ने मेरे अंदर के डर को खत्म कर दिया था और अब मेरी जगह सिर्फ एक बेतहाशा भूख ने ले ली थी।

अंकल की उन मखमली बातों ने मेरे मन के सारे संशय और डर को जैसे पिघला दिया। अब मुझे वह 'पाप' जैसा बोझ महसूस नहीं हो रहा था, बल्कि एक ऐसी नई और तीव्र चाहत महसूस हो रही थी जो अब मेरे पूरे वजूद पर छा गई थी। उनके शब्दों ने मेरे अंदर के डर को खत्म कर दिया था और अब मेरी जगह सिर्फ एक बेतहाशा भूख ने ले ली थी। मुझे महसूस हो रहा था कि मैं अब किसी अपराध की ओर नहीं, बल्कि अपनी नियति की ओर बढ़ रहा हूँ।

मैंने अंकल की आँखों में देखते हुए एक गहरी साँस ली और कहा, "आप सही कह रहे हैं अंकल। अब मुझे सिर्फ वही दिख रहा है जो मैं पाना चाहता हूँ। अब मुझे डर नहीं लगता, मुझे बस उनकी प्यास बुझानी है।" अंकल ने मेरी बात सुनकर मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा और एक गहरी, अर्थपूर्ण मुस्कान के साथ बोले, "यही तो मैं सुनना चाहता था। अब खेल शुरू होगा, रवि।" उनकी उस मुस्कान ने मेरे अंदर की उस बेतहाशा भूख को और भी बढ़ा दिया। अब मैं उस पल के लिए पूरी तरह तैयार था।
अंकल ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और उसकी आँखों में आँखें डालकर एक गहरी, भारी आवाज़ में कहना शुरू किया। "रवि, तू जो देख रहा है न, वो सिर्फ उसकी देह नहीं है... वो एक जलता हुआ ज्वालामुखी है। तेरी मम्मी के अंदर की कामुकता कोई दबी हुई चीज़ नहीं है, वो तो भड़क रही है, वो तो हर पल बाहर निकलने के लिए छटपटा रही है। तूने उनकी आँखों में वो तड़प देखी है? वो जो एक अनकही प्यास है?"मेरा शरीर उत्तेजना से तपने लगा।  धड़कनें तेज़ हो गईं। मैने बेताबी से पूछा, "पर अंकल... उन्हें इस आग से बाहर निकालने के लिए, उन्हें पूरी तरह मेरे सामने झुकाने के लिए मुझे क्या करना होगा?"

अंकल ने एक कुटिल मुस्कान के साथ मेरे कान के बेहद करीब आकर फुसफुसाया, "तुझे बस उन्हें उस मोड़ पर ले जाना है जहाँ उनकी मर्यादा हार मान ले। तू बस एक बार ये तरीका आज़मा कर देख... तू देख लेना कि वो कितनी व्याकुल और बेकाबू हो जाती हैं। वो इतनी बेताब हो जाएँगी कि तुझे रात दिन अपनी देह की गर्मी से सहलाने के लिए खींच लाएंगी। वो खुद तुझे अपने बिस्तर पर खींच लाएंगी और तुझे जन्नत के ऐसे नज़ारे दिखाएंगी कि तू दुनिया भूल जाएगा। वो खुद तुझे निर्वस्त्र करेंगी और तुझे अपनी कामुकता के उस समंदर में डुबो देंगी जहाँ से वापस आने का रास्ता ही नहीं होगा। तू बस तैयार रह, क्योंकि वो तुझे अपनी देह का हर एक कतरा, अपनी हर एक बूंद तेरे नाम करने के लिए पागल हो जाएँगी।"

एरे अंदर का संयम टूट रहा था। अंकल की बातें मेरे दिमाग में ज़हर की तरह घुल रही थीं और उसकी भूख को एक भयानक आकार दे रही थीं। अब मुझे बस उस पल का इंतज़ार था जब मैं अपनी मम्मी की उस भड़कती हुई आग को अपनी मर्ज़ी से ठंडी करूंगा।

***

मेरे  दिमाग में अंकल की कही बातें किसी नशीले ज़हर की तरह फैल रही थीं। मेरी आँखों के सामने मेरी  मम्मी का वो सुराहीदार बदन और उनकी वो दबी हुई कामुकता नाचने लगीमेरी  उत्तेजना अब मेरे काबू से बाहर हो रही थी। मैने अंकल की आँखों में सीधे देखते हुए, एक भारी और लड़खड़ाती हुई आवाज़ में पूछा, "अंकल... क्या ये वाकई मुमकिन है? क्या मेरे लिए उनकी इस भड़कती हुई आग को शांत करना संभव है? क्या मैं सच में उन्हें उस मोड़ पर ला पाऊँगा?"
अंकल ने रवि के कंधे पर हाथ रखा और एक गहरी, गंदी आवाज़ में कहा, "बिलकुल हो पाएगा रवि... जब वो तुम्हारे नीचे तड़प रही होगी और तुम्हारी गर्मी उसके जिस्म में उतरेगी, तब वो खुद तुमसे माँगेगी। बस तुम्हें बस थोड़ा सा शैतानी दिमाग लगाना होगा।"

"पर मुझे क्या करना पड़ेगा उन्हें अपने बिस्तर पर लिटाने के लिए?" मैंने पूछा। तो अंकल ने मेरे सर पर प्यार से हाथ रखते हुए मेरे कान में कुछ प्लान समझाया जिसे सुनकर मैं खुश हो गया।
"पर अंकल, मुझे तो कुछ करना ही नहीं आता," मैंने जवाब में कहा। तो अंकल बोले, "बेटा, जब वो तेरे पास आ गई, तो सब कुछ सिखा देगी।"
अब मुझे लगा कि अंकल मेरी भलाई चाहते हैं,  मैंने अब पक्का इरादा बना लिया था इस बड़े गुनाह के रास्ते पर चलने का।  

मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि मुझसे ज़्यादा मज़ा उनको आने वाला है ऐसा मज़ा जो माँ बेटे के वर्जित संबंधों को देख कर वो लेना चाहते थे।
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Messages In This Thread
Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 08-08-2026, 11:20 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 01:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 10-08-2026, 02:12 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 10-08-2026, 06:16 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 11-08-2026, 09:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:19 AM
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RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 11-08-2026, 10:33 AM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 11-08-2026, 08:41 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Ella - 12-08-2026, 02:21 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Renuka Shahane - 12-08-2026, 02:34 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 04:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nomita - 12-08-2026, 04:17 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Suhana. - 12-08-2026, 07:15 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:09 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by shalini - 12-08-2026, 07:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 12-08-2026, 10:11 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 13-08-2026, 09:39 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 13-08-2026, 12:08 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 12:19 PM
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RE: Kahani mere ghar ki - by Sara Khan - 13-08-2026, 02:05 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 08:17 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 13-08-2026, 03:48 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 14-08-2026, 12:30 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:31 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 14-08-2026, 01:32 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 14-08-2026, 03:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fanfunda - 14-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 04:58 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 05:35 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 05:43 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 15-08-2026, 09:39 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 15-08-2026, 10:38 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Asli lund - 15-08-2026, 09:46 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 16-08-2026, 12:37 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 07:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 16-08-2026, 10:40 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Nehapatel - 16-08-2026, 03:26 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 17-08-2026, 06:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 17-08-2026, 08:03 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 17-08-2026, 09:28 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 18-08-2026, 05:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 18-08-2026, 08:45 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Fattu - 18-08-2026, 10:22 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Huzmakhan - 18-08-2026, 01:53 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Rijwana Ansaari - 18-08-2026, 02:13 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by SweetSonali - 18-08-2026, 02:24 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Loveakb18 - 18-08-2026, 08:10 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:41 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 19-08-2026, 05:44 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 20-08-2026, 05:50 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 21-08-2026, 07:00 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 22-08-2026, 06:55 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 10:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 10:51 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 22-08-2026, 03:37 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 05:07 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by srider69 - 22-08-2026, 07:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 22-08-2026, 08:51 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by wetpussy - 23-08-2026, 02:19 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 23-08-2026, 03:06 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:25 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 23-08-2026, 06:29 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Sumitra Sen - 24-08-2026, 07:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 07:24 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by sdd2686 - 24-08-2026, 09:10 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 10:09 AM
RE: Kahani mere ghar ki - by Jasmin. - 24-08-2026, 12:21 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Motalund14 - 24-08-2026, 02:45 PM
RE: Kahani mere ghar ki - by Monticute - 24-08-2026, 04:01 PM
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